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‘दिल्ली जल बोर्ड के मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान पर रोज 2 घंटे छुट्टी’

                                      किरकिरी के बाद केजरीवाल सरकार का यू-टर्न
आज देश में पनप रही मुस्लिम कट्टरपंथी के लिए मुल्लावाद को आरोपित किया जाता है, लेकिन जनता असली गुनाहगारों को नहीं पहचान रही। वास्तव में कट्टरपंथी के असली गुनाहगार कुर्सी के भूखे और तुष्टिकरण कार्ड खेलते नेता हैं। जो अपनी कुर्सी के लिए केवल मुस्लिमों के पक्ष में निर्णय ले रहे हैं। जबकि रमजान कोई पहली बार नहीं आये हैं, जो विशेष सुविधाएं घोषित कर रहे हैं। 90 के दशक तक हर वर्ष होली और दिवाली के दिन दोपहर को 1 बजे के बाद एक घंटे के पानी की सप्लाई होती थी। इसी तरह ईद एवं रमजान के दिनों में पानी की सप्लाई होती थी। पूजा एवं नमाज़ के लिए किसी विशेष आदेश की जरुरत नहीं होती थी, केवल अनुरोध पर इजाजत दे दी जाती थी। बदकिस्मती से कुर्सी के भूखे नेताओं के कारण स्थिति एकदम विपरीत हो गयी है।  

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने रमजान के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) के मुस्लिम कर्मचारियों को हर दिन दो घंटे की शॉर्ट लीव की मंजूरी सोमवार (4 अप्रैल, 2022) को दी थी जिसे सोशल मीडिया पर हुई किरकिरी के बाद यूटर्न लेते हुए आज वापस ले लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड ने मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दौरान शॉर्ट लीव देने का फैसला किया था, इसके लिए बकायदा जल बोर्ड की तरफ से आधिकारिक आदेश भी जारी किया गया था। आदेशानुसार रमजान के दौरान हर दिन ये शॉर्ट लीव करीब दो घंटे तक की हो सकती थी, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर होती किरकिरी के कारण दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 24 घंटे से भी कम समय के अंदर मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को आदेश वापस ले लिया गया है।

जल बोर्ड के असिस्टेंट कमिश्नर वीरेंद्र सिंह की ओर से 04 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया था, “सक्षम प्राधिकारी संबंधित डीडीओ/नियंत्रक अधिकारी द्वारा मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दिनों में यानी 03 अप्रैल से 2 मई 2022 तक या ईद उल फितर की तारीख तक हर दिन लगभग दो घंटे शॉर्ट लीव की अनुमति देने की मंजूरी दे दी है।”

हालाँकि, यह भी कहा जा रहा है कि इस आदेश में यह भी साफ कर दिया गया था कि यह शॉर्ट लीव इस शर्त के अधीन होगी कि वे शेष कार्यालय समय के दौरान अपना कार्य पूरा करेंगे ताकि कार्यालय का कार्य प्रभावित न हो।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस भी है मुस्लिमों पर मेहरबान

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने भी रमजान के महीने में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने निर्देश जारी कर कहा है कि रमजान के पूरे महीने में किसी भी मुस्लिम बहुल इलाके में बिजली कटौती नहीं होगी। बता दें कि जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को जोधपुर डिस्कॉम के नाम से भी जाना जाता है।
जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी एक पत्र भी ट्विटर पर वायरल हो रहा है। इस पत्र पर 1 अप्रैल की तारीख है। ट्विटर यूजर @8PMnoCM ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी पत्र की कॉपी सोशल मीडिया पर शेयर की है।

दिल्ली : केजरीवाल सरकार ने यमुना सफाई के 2000 करोड़ पर फेरा पानी; जल छिड़क कर टॉक्सिक फोम से छुटकारा; अब झूठ ना बोले तो वो कैसा केजरीवाल?

जनता को मूर्ख बनाने में IITian और revenue officer से मुख्यमंत्री बने अरविन्द केजरीवाल ने सबको बहुत पीछे छोड़ दिया। अगर सोनिया गाँधी ने अपनी सलाहकार समिति के इन पाखंडियों को अलग से पार्टी बनाने की बजाए इन्हीं लोगों को टिकट देकर चुनाव लड़ा होता कम से कम दिल्ली में तो कांग्रेस सत्ता में रहती। 

RTI के अनुसार 7 सालो में केजरीवाल ने प्रदूषण के विज्ञापन में 940 करोड़ रुपये उड़ा दिए है अपनी तस्वीर लगा लगाकर मगर इस बाबत ठोस धरातल पर कोई भी कार्य नही किया और आज भी दिल्ली का प्रदूषण खतरे के निशान से ऊपर है इसीलिये साँस लेने के लिये जिल्लेइलाही गोवा चले गये हैं ..अगर हवा ठीक नहीं हुई तो गोवा से वो उत्तराखंड चले जायेंगे !

Ad Man ने दिल्ली में एक Smog Tower लगाई थी,सब चैनलों में Ad दिये थे,वो उसी दिन से ख़राब पड़ी है

मुफ़्तख़ोरी और समाजवाद बर्बादी की ओर ही ले जाता है

दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड को ही लीजिये...... फिलहाल 4 बड़े मुद्दे हैं

1. यमुना की गंदगी

2. दिल्ली में गंदे पानी की सप्लाई

3. दिल्ली जल बोर्ड की बुरी हालत

4. पानी सप्लाई पर काम नही होना

यमुना की गंदगी - ये हर साल का रोना है, छठ आने पर यमुना नदी की तस्वीरों की बाढ़ आ जाती है, और फिर दोषारोपण का काम शुरू हो जाता है। इस बार केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पर आरोप लगाया है कि उनके कचरे से यमुना गंदी हो जाती है।

                                       साभार: सोशल मीडिया 
अब झूठ ना बोले तो वो कैसा केजरीवाल?

दोनों तस्वीरों को देखिए, दिल्ली में यमुना प्रवेश करती है वजीराबाद barrage से, और उससे पहले यमुना का पानी काफी हद तक साफ है, दिल्ली में घुसते ही नजफगढ़ से एक नाला यमुना में गिरता है, और वहां से आई कालिख आपको इस तस्वीर में दिख ही जाएगी। नजफगढ़ Drain से पहले का पानी देखिए और उसके बाद का, फर्क साफ है.....और नजगगढ़ का नाला दिल्ली सरकार के अंतर्गत ही आता है....उसे साफ करने की, उस पर सीवेज प्लांट लगाने की जिम्मेदारी किसकी हुई..... ये आपको समझ आ गया होगा।

दिल्ली में गंदे पानी की सप्लाई -  चाहे मदनपुर खादर हो, संगम विहार हो, यमुना पार के इलाके हों, या फिर राजौरी या पंजाबी बाग हो.....गंदे पानी की सप्लाई की समस्या हर जगह है......मुफ्त पानी का वादा किया गया था, शायद ऐसा ही पानी मुफ्त मिलता है.....खैर


दिल्ली जल बोर्ड की बुरी हालत - आपमे से ज्यादा लोगो को पता नही होगा कि जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी, तब दिल्ली जल बोर्ड मुनाफा कमाने वाला डिपार्टमेंट हुआ करता था। जब से IIT पास revenue officer दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं, DJB की हालत खराब होती चली गयी है। आज DJB पर 20,000 करोड़ रूपए से ऊपर का कर्ज है, 2015 के बाद DJB नुकसान में ही चल रहा है, और अब ये नुकसान सैकड़ो करोड़ रुपये का हो चुका है.....2018-19 में ये 600 करोड़ था.....इसी से समझ लीजिए कि क्या हालत है।

दुनिया भर को भ्रष्ट बोलने वाले केजरीवाल साहब खुद DJB chairman रहे हैं कई साल, लेकिन इस डिपार्टमेंट की Balance sheet और अन्य फाइनेंसियल documents आज तक तैयार नही किये गए......इसके लिए भी बाकायदा एक PIL डाली गई है कोर्ट में, कि DJB के financial status को सही से report करके बताया जाए। आम आदमी पार्टी ने इस PIL को politically motivated बता दिया.....और करते भी क्या 

पानी सप्लाई पर काम नही होना - जब IIT से पढ़े दुनिया के एकमात्र नेता मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने कुछ बड़ी घोषणाएं की थी......जैसे पानी माफ, पूरी दिल्ली में पानी की supply लाइन डालना, शुद्ध पानी पहुचाना, यमुना को साफ कर देना.......लेकिन इसमे से कोई काम नही हुआ।

पानी के पुराने बिल माफ कर दिए, कनेक्शन चार्ज हटा दिए, पेनल्टी माफ कर दी, late payment और अन्य कई तरह के सरचार्ज माफ कर दिए.....कुल मिलाकर हालात ये हुए की DJB के पास उसका काम करने तक के पैसे नही हैं.....फिर पानी सप्लाई, यमुना की सफाई और पाइपलाइन कहां से लगाएंगे।

दिल्ली वाले खुश हैं, कि 20,000 लीटर पानी मुफ्त मिल रहा है.....20,000 लीटर का अगर चार्ज लिया भी जाए तो कितना होगा.....200-300 रुपये? 

लेकिन ये 200-300 रुपये बचा कर आपने क्या पाया.......गंदा पानी, गंदी यमुना, टूटी फूटी पानी की पाइपलाइन........वहीं आप हजारो खर्च करके टैंकर लाते हैं पानी के लिए.......,वहीं DJB हजारो करोड़ के नुकसान में है.....कल को ये चुकाने के लिए आपके टैक्स का पैसा ही लगेगा......शिक्षा या स्वास्थ्य में लिए लगने वाला पैसा DJB को बचाने के लिए जाएगा.....

कल को यही काम DTC, बिजली सप्लाई कंपनियो और अन्य डिपार्टमेंट के लिए भी होगा, जो जबरदस्त financial crisis झेल रहे  हैं, और भविष्य में या तो Bankrupt हो जाएंगे, या बेकार service देने लगेंगे.........लेकिन आपको की, आपको तो बिजली हाफ और पानी माफ हो गया है......आज तो चवन्निया बचा रहे हो, लेकिन भविष्य में अपना पेट काट कर ये सब चुकाना पड़ेगा......क्योंकि मुफ़्तख़ोरी और समाजवाद आपको सिर्फ बर्बादी की तरफ ही ले जाता है......अब ये आम आदमी पार्टी करे, बीजेपी करे या कांग्रेस....इनका end result एक ही रहेगा।

देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का पानी गंदे नालों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के कारण पूरी तरह से जहरीला हो गया है। छठ के मौके पर श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए अब दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी जहरीले झाग से छुटकारा पाने के लिए यमुना नदी पर पानी छिड़क रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग केजरीवाल सरकार के मजे ले रहे हैं।

इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी अशोक कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि वे शाम तक झाग से छुटकारा पाने के लिए नदी के किनारे यमुना के जल में पानी छिड़केंगे। यह छठ पूजा के लिए जहरीले झाग को खत्म करने तैयारी का हिस्सा है जहाँ भक्त सूर्य से प्रार्थना करते हुए पानी में डुबकी लगाते हैं।

हालाँकि, यह समझ नहीं आ रहा है कि पानी छिड़कने के बाद नदी कैसे साफ की जा सकेगी। लेकिन, अब नेटिजन्स को ये बात परेशान कर रही है कि जब इतने सरल तरीके से जहरीले झाग से निपटा जा सकता था तो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने नदी की सफाई के लिए 2000 करोड़ रुपए क्यों आवंटित किए थे।

सोशल मीडिया पर तार्किक लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जहरीले झाग को छितरा देने भर से कैसे यमुना के पानी का जहरीलापन कम होगा। लेकिन, इसमें किसी प्रकार का आतिशयोक्ति नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब आम आदमी पार्टी की बात आती है, तो ज्यादातर समय तर्क और बेसिक सामान्य ज्ञान को झुठला दिया जाता है।

गजेंद्र नाम के यूजर ने लिखा कि गैर-मानसून महीनों में अगर इस तरह से यमुना में पानी का छिड़काव करने से नदी का जल स्तर बढ़ सकता है और शायद राष्ट्रीय राजधानी में भी जल संकट का समाधान हो सकता है। इतने अच्छे आइडिया का मजाक उड़ाने वाले लोगों को शर्म आनी चाहिए।

दरअसल, यमुना के पानी के जहरीलेपन को खत्म करने के केजरीवाल सरकार के इस आइडिया से हर कोई आश्चर्यचकित है। किसी ने भी नहीं सोचा था कि AAP सरकार यमुना के जहरीले झाग को साफ करने के लिए आगे आएगी।

वैसे भी प्राकृतिक नियमों के विपरीत यमुना नदी को पानी उपलब्ध कराने के दिल्ली के सीएम की महानता की सराहना नेटिजन्स ने की। दिल्ली सरकार के इस आश्चर्यचकित कर देने वाले कारनामे पर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी दिल्ली के हालात का वर्णन करते हुए एक कविता लिख दी।

हालाँकि, अगर आप दिल्ली सरकार के इस साइंटफिक सॉल्यूशन से अचंभित हो रहे हैं तो इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दिल्ली सरकार का विज्ञान से बहुत गहरा रिश्ता है। आखिरकार, वे अपनी सरकार में बहुत पढ़े-लिखे लोगों के होने का दावा जो करते हैं। इसी तरह जनवरी 2021 में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक वैज्ञानिकता भरा तर्क देते हुए कहा था कि दिल्ली में पानी की आपूर्ति करने वाले पाइपों को साफ करना असंभव था।

उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक पत्रकार सिसोदिया से खराब गुणवत्ता वाले पानी के बारे में पूछता है। इस पर सिसोदिया ने समझाया कि जब पानी की आपूर्ति की जा रही है और मोटर चालू रहेगा तो पानी साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा, “भौतिकी बताती है कि जब आप पानी की आपूर्ति बंद होने पर मोटर चालू करते हैं तो वो पाइप के अंदर की मिट्टी और अन्य गंदगी को अपने साथ ले जाएगा।” उन्होंने दिल्लीवासियों को सलाह दी कि पानी की सप्लाई के लिए जो समय निर्धारित किया गया है अगर वो उसमें मोटर को चालू करेंगे तो उन्हें साफ पानी मिलेगा।

उस दौरान भी किसी ने ये तनिक भी नहीं सोचा था कि #ScientistSisodia इतना अच्छा आइडिया भी सुझा सकते हैं। 

दिल्ली : नल में आता है नाले का पानी

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दिल्ली शहर आजकल प्रदूषण का ऐसा पर्याय बन चुका है जिसमें कि साफ़ हवा और साफ़ पानी दोनों ही मिलना आज के समय में नसीब होना हद से ज्यादा कठिन हो गया है। हाल ही में एक जाँच रिपोर्ट में सामने आया था कि राजधानी का पानी देश में सबसे गन्दा पानी है।
इस जाँच में 21 शहरों के पानी के सैम्पल लिए गए थे। इसमें राजधानी दिल्ली का भी सैंपल शामिल था जहाँ से करीब 11 सैम्पल उठाए गए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के जिन इलाकों से सैम्पल लिए गए, उनमें लुटियंस ज़ोन से लेकर पीतमपुरा, बुराड़ी, अशोक नगर, सोनिया विहार, शाहदरा और नन्दनगरी जैसे इलाके शामिल हैं।  
यह सैम्पल भीकम सिंह
कॉलोनी का है, और विधायक
हैं भाजपा के
ओम प्रकाश शर्मा 
यह सैम्पल है बलबीर नगर
शाहदरा, और विधायक हैं
आप के गोपाल राय 
 
चुनाव निकट आते ही आम आदमी पार्टी के विरोधियों को पानी की समस्या सता रही है, जबकि यह कोई नयी समस्या नहीं है। अक्सर अपने लेखों में भाजपा के स्थानीय नेताओं पर प्रहार करता रहता हूँ, लेकिन शीर्ष नेतृत्व भी व्हाट्सअप आदि पर फोटो देख भ्रमित हो जाते हैं और स्थानीय नेता लापरवाही करते केवल मोदी-योगी-अमित त्रिमूर्ति के कन्धों पर उछलते रहते हैं। कुछ समय पूर्व जब ओम प्रकाश शर्मा की फेसबुक वाल पर फोटो शेयर किया, तो कार्यकर्ता मेरे रिश्तेदार के घर पहुँच, भविष्य में ऐसा न करने की बात कह, समस्या को दूर करने का आश्वासन देकर चले गए। यह समस्या केवल एक घर की नहीं, पूरी गली की है। फिर अक्सर गन्दा पानी आने पर टंकी में भरा सारा पानी बहाना पड़ता है। 
आप पार्टी का मान लिया कि कोई काम नहीं करते, लेकिन भाजपा विधायक क्या कर रहे हैं? उन्हें तो पार्टी जनाधार मजबूत करने के लिए अपने पड़ोसी क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, जैसाकि जनसंघ कार्यकाल में होता था।   
साल 2015 में केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के साथ ही दिल्ली में पानी को लेकर बड़े बदलाव करने की बात कही थी मगर इसका कोई असर धरातल पर दिखाई नहीं पड़ता। यह हाल तब है जब केजरीवाल खुद जल बोर्ड के अध्यक्ष हैं। दिल्ली में साफ़ पानी को लेकर हालात इस कदर बुरे हैं कि घर के नलों में भी नालों और सीवर का पानी आ जाता है। एक ट्विटर यूजर ने इस मसले पर अपनी लिखकर बताया कि कैसे दिल्ली के घरों में नल से साफ़ पानी की बजाय नालों और सीवर का गन्दा पानी आता है। @proudkannadiga नामक ट्विटर हैंडल के इस शख्स ने इस मामले में काफी तथ्य भी सामने रखे।
यह एक ऐसी समस्या है जिसे सुनकर कोई भी इंसान अचरज में पड़ जाए। इसे झेलने वाले यूज़र ने अपने खुद के अनुभव से बताया कि कैसे नाले और सीवर का यह पानी घरों में पानी पहुँचाने वाले पाइप के ज़रिए टंकी तक में भर जाता है। यह पानी एकदम गन्दा, दुर्गन्ध वाला और काला होता है। इसके लिए टंकी साफ़ करने से लेकर सारे उपाय करने पड़ते।
यह एक ऐसी समस्या है जिसे सुनकर कोई भी इंसान अचरज में पड़ जाए। इसे झेलने वाले यूज़र ने अपने खुदके अनुभव से बताया कि कैसे नाले और सीवर का यह पानी घरों में पानी पहुँचाने वाले पाइप के ज़रिए टंकी तक में भर जाता है। यह पानी एकदम गन्दा, दुर्गन्ध वाला और काला होता है। इसके लिए टंकी साफ़ करने से लेकर सारे उपाय करने पड़ते। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि यह ज़रूरी नहीं कि दुर्गन्ध न आए तो पानी साफ़ ही आ रहा हो। क्योंकि जिस पाइप के ज़रिये पानी घरों में आता है वह खुद सीवर के जर्जर हो चुके पाइप के साथ समनान्तर हैं। कई-कई जगहों पर तो पानी के यह पाइप खुद सीवर के जल-जमाव से होकर आते हैं।


अधिकतर पाइप जिनसे सीवर और पानी अपने-अपने गंतव्य के लिए भेजे जाते हैं, वह पुराने हैं और सही रखरखाव न होने के चलते लीक कर जाते हैं। इसके बाद ही सप्लाई वाले पाइप में भी सीवर और नाले के जल-जमाव का पानी खिंच कर घरों में चला जाता है।
दरअसल मोटर चलने के बाद सक्शन के चलते पानी पाइप में खिंचकर घरों में आता है। मगर इस दौरान अगर सप्लाई वाला पाइप सीवर के दलदल या नाले या किसी अन्य तरह के जल जमाव के करीब से होकर गुज़रता है तो वह गन्दा पानी उस जर्जर पाइपलाइन के ज़रिये खुद-ब-खुद घर के नलों तक खिंचा चला आता है।
सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर करते हुए इस यूजर ने बताया कि कई बार बुलाने के बाद जाकर किसी तरह दिल्ली जल बोर्ड से एक कर्मचारी उसके घर पहुँचा। नलों में सीवर के पानी की बात पर खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि पास मे ही सीवर की एक पाइपलाइन फट गई, जिसके चलते लीकेज हुआ और इस जल-जमाव से आती घरों में पानी पहुँचाने वाली पाइपलाइन में सीवर का पानी भी आ गया।
उसने बताया कि कैसे अस्थायी जुगाड़ के तौर पर उस कर्मचारी ने सीवर पाइप का एक 2 से 3 फीट का हिस्सा काटकर बदल दिया। जब कर्मचारी से पूछा गया कि इस समस्या का उपाय क्या है तो उसने बताया कि सीवर के 400 मीटर लम्बे पाइप को बदले बगैर यह समस्या नहीं सुधरेगी, मगर इलाके के सीवर को ढोने वाली 40 इंच डायमीटर वाली मुख्य पाइपलाइन को तबतक नहीं बदला जा सकता जब तक कि ऊपर से (यानी जल बोर्ड से) इस सम्बन्ध में फण्ड नहीं दिया जाता।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार एक तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पुनः सत्ता प्राप्त करने जनता को फ्री म...

अपनी समस्या को लेकर विस्तार से लिखने के बाद गंदे पानी की इस समस्या से पीड़ित यूजर ने अपनी शिकायत में कांग्रेस को जमकर कोसा और कहा कि इस पार्टी ने कभी जनता की लड़ाई में साथ ही नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स देने वाले इंसान के साथ यह एक बहुत बड़ा छलावा है।
अपने एक अन्य ट्वीट में उस यूजर ने यह भी लिखा कि वह खुद 15 साल से दिल्ली में रह रहते आ रहे हैं। 2018 में पश्चिमी दिल्ली में शिफ्ट हुए हैं मगर गंदे पानी की ऐसी समस्या उन्होंने 2015 से पहले कभी नहीं देखी थी।