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देवबंद में सड़कों पर आए मदरसे के छात्र (तस्वीर साभार: जनसत्ता) |
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसम्बर 11 की शाम को मदरसा छात्र सहारनपुर जिले के सरसटा बाजार स्थित जामा मस्जिद पर इस बिल के विरोध में एकत्रित हुए और करीब साढ़े चार बजे तक उन्होंने यहाँ शांतिमार्च निकाला। लेकिन, कुछ देर बाद यह खानकाह पुलिस चौकी से होते हुए सहारनपुर-मुजफ्फरनगर हाईवे पर पहुँच गए और देखते-देखते ही यहाँ जाम लग गया। छात्रों पर आरोप हैं कि उन्होंने वाहनों को रोकने के लिए हाईवे पर पत्थरबाजी की। साथ ही बिल की कॉपी को जलाकर अपना विरोध जताया। इसके अलावा बताया जा रहा है कि शाम को मगरिब की नमाज का वक्त होते ही इन लोगों ने सड़क पर ही बैठकर नमाज अदा की।
ऐसे में चर्चा है कि आखिर किसके आव्हान पर मदरसे के छात्र सड़क पर जमा हुए? क्या नागरिक बिल के विरोधी कट्टरपंथी भाजपा विरोधियों के साथ मिलकर छात्रों को सडकों पर उतार देश का वातावरण ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं? मुस्लिम कट्टरपंथी काफी समय से सरकार और न्यायालय को डरा-धमका कर अपनी मनमानी कर आम मुस्लिम को भ्रमित करते रहे हैं। शाहबानो हो, तीन तलाक हो, हलाला हो, यूनिफार्म सिविल कोड हो या फिर नागरिक संशोधक बिल हो अपनी दुकानदारी पर होते प्रहार से भड़काते रहते हैं, लेकिन बटवारे के समय पाकिस्तान गए मुसलमानों को आज भी मुहाजिर(शरणार्थी) कहा जाता है, उस पर कोई नहीं बोलता।
हालाँकि, इन सबके बीच मामले की सूचना मिलते ही कई बड़े अधिकारी मौक़े पर पहुँचे और उन्होंने छात्रों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन जब बहुत कोशिशों के बाद भी छात्र मानने को तैयार नहीं हुए, तो अधिकारियों ने देर शाम पूर्व विधायक माविया अली और मदरसों के मौलानाओं के साथ छात्रों को समझाया। जिसके बाद शाम 7 बजे के करीब हाईवे को खोला गया।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार पूरे वाकये के बाद इलाके के डीएम आलोक कुमार पांडे और एसएसपी दिनेश कुमार दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी से बात करने पहुँचे। जहाँ नोमानी ने देवबंद में शाम को नागरिकता संशोधन बिल को लेकर हुए प्रदर्शन पर नाखुशी जताई और कहा कि दारुल उलूम और देवबंद के किसी भी मदरसे से इस प्रदर्शन का कोई संबंध नहीं है। हम ऐसे विरोध की मुखालफत करते हैं, जिससे आमजन को परेशानी पहुँचे।
नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो जाने के बाद देश के कई हिस्सों में इसे लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। असम और देवबंद के अलावा एएमयू में भी इसका विरोध बड़ी तादाद में देखने को मिला है। जहाँ अब तक पुलिस ने इस मामले में 20 छात्रों को नामजद करते हुए, जबकि 500 लोगों पर अज्ञात नाम से मुकदमा दर्ज किया है।