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जनवरी से फिर शुरू होगी सीलिंग, इन 6400 फैक्ट्रियों पर सील लगनी तय

दिल्‍ली में सीलिंग अभियान का पहिया कुछ समय के लिए भले ही थमा हुआ है, लेकिन जनवरी 2019 से यह फिर तेजी पकड़ेगा. एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में मुताबिक, दिल्‍ली राज्‍य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना (डीएसआईडीसी) ने पूर्वी दिल्‍ली नगर निगम को करीब 6400 फैक्ट्रियों की सूची सौंपी है और निगम ने भी लिस्‍ट के आधार पर सर्वे शुरू करा दिया है और इसके बाद इन फैक्ट्रियों पर सीलिंग की गाज गिर सकती है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति के आदेश पर दिल्‍ली में एक साल पहले सीलिंग शुरू हुई थी.
हिंदुस्‍तान अखबार में सूत्रों के हवाले से प्रकाशित खबर के मुताबिक, पूर्वी दिल्‍ली नगर निगम की तरफ से दिसंबर के अंत तक सर्वे का काम किया जाना है और इसके बाद ही सीलिंग की कार्रवाई शुरू होगी. इस तरह नए साल 2019 में कारोबारियों पर फिर से गाज गिरनी शुरू हो जाएगी.
अवलोकन करिये:--
दिल्ली में कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहाँ भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है। और इन क्षेत्रों में कार्यवाही करने का किसी में साहस भी नहीं। सरकारी जमीन पर अधिक्रमण कर रखा है। यदि गम्भीरता से जाँच की जाए, तो सर्वप्रथम उन अधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाए, जिनके कार्यकाल में सरकारी ज़मीन का अधिक्रमण या अवैध निर्माण किया गया। 2014 चुनावी रैलियों में भाजपा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने को कहती थी, लेकिन दिल्ली की तीनों नगर निगमों पर भाजपा का ही कब्ज़ा है, भाजपा बताए नगर निगमों में कितना भ्रष्टाचार समाप्त हुआ? फिल्म "उपकार" का एक चर्चित संवाद है "राशन पर भाषण है, भाषण पर कोई राशन नहीं" जो आज भी हमारे नेता समाज पर सटीक बैठता है। नगर निगमों में सत्ता अगर भाजपा की है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के भी सदस्य हैं, कोई नहीं बोलता। चुनाव आएंगे, तब सभी नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार पर लम्बे-चौड़े भाषण देते नज़र आएंगे। लेकिन किसी भी मतदाता ने यह पूछ लिया, "जब सदन में तुम्हारी पार्टी विराजमान थी, क्यों नहीं आवाज़ उठाई? क्यों नहीं धरने या प्रदर्शन किये?" तुरन्त उस मतदाता पर विरोधी पक्ष का होने का आरोप लगाकर बदनाम कर देंगे।

इस वेबसाइट का परिचय
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्‍ली में अवैध फैक्ट्री मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर को .....

खबर में कहा गया है कि डीएसआईडीसी ने ईडीएमसी को जिन 6400 फैक्ट्रियों की जो फाइल सर्वे के लिए सौंपी है, उनमें वह फैक्‍ट्री शामिल है, जिन्‍हें बवाना या दूसरी इंडस्‍ट्रीयल एरिया में प्‍लॉट अलॉट नहीं हुए हैं. 
अधिकारियों का मानना है इनमें से ज्‍यादा फैक्ट्रियां अभी पूर्वी दिल्‍ली में ही चल रही हैं और इनमें से ज्‍यादातर प्रदूषण फैलाने वाली हैं. इनमें रंगाई-डाई करने वाली फैक्ट्रियां खास तौर पर शामिल हैं. इसलिए इनके खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है.

अरविन्द केजरीवाल दिल्ली का सबसे नाकाम मुख्यमन्त्री -- अजय माकन

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली का अब तक का सबसे नाकाम मुख्यमंत्री बताया है। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और बहानेबाजी करने के सिवाए केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के लिए कुछ नहीं किया। माकन ने सीलिंग के मुद्दे पर भी उन्हें कठघरे में खड़ा किया और उनके साथ कहीं भी बहस करने की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि वह साबित करके दिखा देंगे कि केजरीवाल नाकारा हैं और सीलिंग के लिए भी जिम्मेदार हैं। माकन अपने इस्तीफे की अटकलों के बीच और विदेश से लौटने के बाद बुधवार को पहली बार प्रदेश पार्टी कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
बेनकाब हो गया ‘आप’ का जन विरोधी चेहरा
माकन ने कहा कि सीएम केजरीवाल के इशारे पर राजधानी में बड़े पैमाने पर दिल्ली सरकार के एसडीएम मास्टर प्लान में मौजूद प्रावधानों के बावजूद जबरन लोगों को परेशान करने के लिए सेक्शन 133 CrPC में नोटिस जारी करके न केवल आतंक फैला रहे है बल्कि उच्चतम न्यायालय के आदेश की आड़ में ऐसी गैर प्रदूषित इकाईयों को भी सील कर रहे है। उन्होंने विवेक विहार के एसडीएम राजेश चौधरी के हस्ताक्षर से जारी एक नोटिस की प्रति संवाददाताओं दिखाते हुए कहा कि इस नोटिस के बाद कम से कम ‘आप’ का जन विरोधी चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। माकन ने मांग की है कि तुरंत प्रभाव से इन नोटिसों को बिना शर्त वापस लिया जाए।
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दिल्ली में कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहाँ भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है। और इन क्षेत्रों में कार्यवाही करने का किसी में साहस भी नहीं। सरकारी जमीन पर अधिक्रमण कर रखा है। यदि गम्भीरता से जाँच की जाए, तो सर्वप्रथम उन अधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाए, जिनके कार्यकाल में सरकारी ज़मीन का अधिक्रमण या अवैध निर्माण किया गया। 2014 चुनावी रैलियों में भाजपा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने को कहती थी, लेकिन दिल्ली की तीनों नगर निगमों पर भाजपा का ही कब्ज़ा है, भाजपा बताए नगर निगमों में कितना भ्रष्टाचार समाप्त हुआ? फिल्म "उपकार" का एक चर्चित संवाद है "राशन पर भाषण है, भाषण पर कोई राशन नहीं" जो आज भी हमारे नेता समाज पर सटीक बैठता है। नगर निगमों में सत्ता अगर भाजपा की है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के भी सदस्य हैं, कोई नहीं बोलता। चुनाव आएंगे, तब सभी नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार पर लम्बे-चौड़े भाषण देते नज़र आएंगे। लेकिन किसी भी मतदाता ने यह पूछ लिया, "जब सदन में तुम्हारी पार्टी विराजमान थी, क्यों नहीं आवाज़ उठाई? क्यों नहीं धरने या प्रदर्शन किये?" तुरन्त उस मतदाता पर विरोधी पक्ष का होने का आरोप लगाकर बदनाम कर देंगे।
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जनसुनवाई मुद्दे को उलझाने और लटकाने का प्रयास है
संवाददाता सम्मेलन में पार्टी ने घरेलू उद्योग के मामले में मास्टर प्लान 2021 में संशोधन के लिए हो रही जनसुनवाई में पार्टी द्वारा अजय माकन, अरविन्दर सिंह लवली व मुकेश शर्मा के संयुक्त रुप से हस्ताक्षरयुक्त आपत्ति दर्ज कराने संबधी पत्र को भी जारी किया। उन्होंने कहा कि इस जनसुनवाई की आवश्यकता नहीं थी, जानबूझ कर मामले को उलझाने के लिए यह जनसुनवाई की गई है। माकन ने स्पष्ट रुप से कहा कि जनसुनवाई इस मुद्दे को पूरी तरह उलझाने और लटकाने का प्रयास है। क्योंकि पहले से ही मास्टर प्लान में सारे प्रावधान मौजूद हैं जिसके तहत कर्मचारियों की संख्या और बिजली के लोड को घटाने और बढ़ाने के अधिकार सरकार को हैं।
सरकार कर सकती है परिवर्तन 
अरविन्दर सिंह लवली ने कहा कि गैर प्रदूषित घरेलू उद्योग की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए किसी किस्म की कोई अड़चन नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मास्टर प्लान 2021 में साफ तौर पर यह कहा गया है कि सरकार जब चाहे इसमें परिवर्तन कर सकती है। उन्होंने मांग की कि तुरंत प्रभाव से घरेलू उद्योगों के लिए बिजली का कनेक्शन 5 किलोवाट से बढ़ाकर 11 किलोवाट और कर्मचारियों की संख्या 5 से बढ़ाकर 11 की जाए। 
भाजपा और ‘आप’ को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम 
मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के एसडीएम स्तर के अधिकारी मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के इशारे पर लोगों को उच्चतम न्यायालय की आड़ में जबरन नोटिस जारी करके ‘आप’ के लिए अवैध रुप से धन वसूली कर रहे हैं। उन्होंने घूसकांड की जांच की मांग करते हुए केन्द्र व दिल्ली सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 15 अक्टूबर तक घरेलू उद्योग की परिभाषा को बदलने का सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ तो भाजपा और ‘आप’ को गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

अवैध फैक्‍ट्रियां बंद की जाएं-- सुप्रीम कोर्ट

सीलिंग के बाद दिल्‍ली के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक और बड़ा आदेश, कहा- अवैध फैक्‍ट्रियां बंद की जाएं
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्‍ली में अवैध फैक्ट्री मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर को कहा कि संसद कानून बनाती है और अगर लोग कानून का उल्लंघन करते रहे तो दिल्ली को कोई नहीं बचा सकता. कोर्ट ने इसके साथ ही दिल्‍ली में चल रहीं अवैध फैक्ट्रियां बंद करने का आदेश पारित किया. कोर्ट में विश्वास नगर के फैक्टरी मालिक रिलीफ के लिए आए थे। हैरानी इस बात से होती है, जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते समय कोर्ट राज्य  
सीलिंग मामले में भी कोर्ट ने की थी खिंचाई
इससे पहले शीर्ष अदालत ने सीलिंग मामले में दिल्ली के स्थानीय निकाय को अपनी आंखे मूंदने और कोई हादसा होने का इंतजार करने पर आड़े हाथ लिया था। साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण से नगर के मास्टर प्लान 2021 में बदलाव करने के उसके प्रस्तावों पर सवाल खड़े किए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण किसी तरह के दबाव के आगे झुक रहा है। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, 'दिल्ली में हर कोई अपनी आंखें मूंदे है और कोई हादसा होने का इंतजार कर रहा है। आपने (नगर निकाय) उपहार सिनेमा अग्निकाण्ड त्रासदी और बवाना तथा कमला मिल्स जैसी घटनाओं से भी कुछ नहीं सीखा है।'
सीलिंग से कारोबारियों को बड़ी राहत मिली थी
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने हाल ही में दुकान-रिहाइशी भूखण्डों और परिसरों का एफएआर और रिहाइशी भूखण्डों के बराबर करने का प्रस्ताव किया है। प्राधिकरण के इस कदम से सीलिंग के खतरे का सामना कर रहे कारोबारियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। पीठ ने प्राधिकरण से सवाल किया, 'दिल्ली में रहने वाली जनता के बारे में क्या कहना है?' पीठ ने कहा, 'आपको जनता का पक्ष भी सुनना होगा। आप सिर्फ कुछ लोगों को ही नहीं सुन सकते।' पीठ ने दिल्ली में हो रहे अनधिकृत निर्माणों का जिक्र किया और कहा, 'आप दिल्ली की जनता के हितों का ध्यान रख रहे हैं या नहीं?' पीठ ने कानून का शासन बनाये रखने पर जोर देते हुये कहा कि दिल्ली कचरा प्रबंधन, प्रदूषण और पार्किंग जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है। 
दिल्ली में चाहे अधिक्रमण हो, अवैध निर्माण हो या अवैध फैक्ट्रियां बिना पुलिस, नेता और प्रशासन की मिलीभगत के बिना असम्भव है। 

क्या अधिकारी सो रहे हैं?--सुप्रीम कोर्ट 

इससे पूर्व दिल्ली में सीलिंग पर जुलाई 18 को सुप्रीम कोर्ट ने और सख्ती दिखाई। कोर्ट ने कहा कि सीलिंग रुकनी नहीं चाहिए। साथ ही आदेश दिया कि बिल्डिंग बाईलॉज को अनदेखा कर अवैध निर्माण करने वाले सभी बिल्डर, कांट्रेक्टर और आर्किटेक्ट ब्लैक लिस्ट किए जाएं। इस बाबत दो सप्ताह में नियम बनाए जाएं। जस्टिस एमबी लोकुर की बेंच ने कहा कि अवैध निर्माण करने वालों को सिर्फ 48 घंटे का नोटिस दिया जाए। जवाब नहीं मिले तो तुरंत कार्रवाई करें। अवैध निर्माण ढहाना है तो ढहा दें और सील करना है तो सील कर दें।
नजफगढ़ वार्ड कमेटी के चेयरमैन को कोर्ट ने पेश होने का आदेश दिया
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि नजफगढ़ में अवैध निर्माण ढहाने गए दस्ते को नजफगढ़ वार्ड कमेटी के चेयरमैन मुकेश सुर्यन ने काम नहीं करने दिया। इस पर कोर्ट ने सुर्यन को अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि सीलिंग करने वाले अधिकारियों के साथ पर्याप्त पुलिस बल भेजा जाए।
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क्या इस क्षेत्र में कभी कार्यवाही हो सकती है?
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कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा आपके अधिकारी क्या कर रहे हैं
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि सील किए गए अवैध निर्माण खोलने के लिए 1130 आवेदन मिले हैं। इनमें से 405 खोले जा चुके हैं। इस पर कोर्ट ने कहा, “आपके अधिकारी क्या कर रहे हैं? आप कह रहे हैं कि 405 मामलों में अवैध निर्माण नहीं मिला। बाकी 700 मामलों का क्या? क्या अधिकारी सो रहे हैं?’ अधिकारी सो नहीं रहे, बल्कि अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं। 
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क्या नगर निगम, डीडीए या दिल्ली प्रशासन इस क्षेत्र में
हुए अनधिकृत निमार्ण हटा सकते हैं? 
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कौन वसूलता है?

तीनों नगर निगमों में इंजीनियरों ने हड़ताल करने की धमकी दी थी

दरअसल, अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने के खिलाफ नजफगढ़ जोन के डीसी विश्वेंद्र सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद दिल्ली के तीनों नगर निगमों में इंजीनियरों ने हड़ताल करने की धमकी दी थी। उधर, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कार्रवाई के लिए जाने वाले निगम इंजीनियरों को पुलिस की ओर से पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। वहीं, कॉन्ट्रैक्टर, बिल्डर और आर्किटेक्ट को ब्लैक लिस्ट करने के सुझाव पर कोर्ट ने केंद्र को दो सप्ताह में डिजिटल मैपिंग को लेकर दिशा-निर्देश तय करने को कहा है। साथ ही कहा कि जरूरत पड़े तो इसके लिए इसरो और एनआईसी की भी मदद ली जा सकती है।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली का लाजपत नगर मार्केट वैसे तो सरोजिनी नगर मार्केट के बाद सबसे बड़ा बाजार है। ले....

दिल्ली में कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहाँ भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है। और इन क्षेत्रों में कार्यवाही करने का किसी में साहस भी नहीं। सरकारी जमीन पर अधिक्रमण कर रखा है। यदि गम्भीरता से जाँच की जाए, तो सर्वप्रथम उन अधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाए, जिनके कार्यकाल में सरकारी ज़मीन का अधिक्रमण या अवैध निर्माण किया गया। 2014 चुनावी रैलियों में भाजपा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने को कहती थी, लेकिन दिल्ली की तीनों नगर निगमों पर भाजपा का ही कब्ज़ा है, भाजपा बताए नगर निगमों में कितना भ्रष्टाचार समाप्त हुआ? फिल्म "उपकार" का एक चर्चित संवाद है "राशन पर भाषण है, भाषण पर कोई राशन नहीं" जो आज भी हमारे नेता समाज पर सटीक बैठता है। नगर निगमों में सत्ता अगर भाजपा की है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के भी सदस्य हैं, कोई नहीं बोलता। चुनाव आएंगे, तब सभी नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार पर लम्बे-चौड़े भाषण देते नज़र आएंगे। लेकिन किसी भी मतदाता ने यह पूछ लिया, "जब सदन में तुम्हारी पार्टी विराजमान थी, क्यों नहीं आवाज़ उठाई? क्यों नहीं धरने या प्रदर्शन किये?" तुरन्त उस मतदाता पर विरोधी पक्ष का होने का आरोप लगाकर बदनाम कर देंगे।  
ढाबा मालिक से रिश्वत मांगने पर DDA के दो अफसरों को चार-चार साल का सश्रम कारावास
उत्तर पश्चिम दिल्ली में एक व्यक्ति को ढाबा अवैध रूप से चलाने की अनुमति के बदले हर महीने 6 हजार रुपये की रिश्वत मांगने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के दो अधिकारियों को एक अदालत ने चार - चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.  विशेष न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने डीडीए के अधिकारियों मुकेश चंद्र और सत्यवीर सिंह को एक व्यक्ति से मासिक रिश्वत मांगने पर जेल की सजा सुनाई. अवैध रूप से ढाबा चलाने पर इस व्यक्ति को अधिकारियों से एक नोटिस मिला था.
न्यायाधीश ने कहा कि यह तार्किक संदेह से परे साबित हुआ है कि डीडीए में ‘ खलासी ’ (सरकारी कर्मचारी) आरोपी मुकेश ने यह सुनिश्चित करने के लिए शिकायतकर्ता से छह हजार रुपये प्रति माह की रिश्वत मांगी कि उनके आवासीय परिसर के बाहर शिकायतकर्ता और उसके पिता द्वारा संचालित ‘ ढाबे ’ के खिलाफ कारण बताओ नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. न्यायाधीश ने कहा कि यह भी साबित हुआ है कि मुकेश और (सरकारी कर्मचारी) सत्यवीर सिंह ने साजिश रची. 
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जिस दिन इस क्षेत्र से अतिक्रमण समाप्त हो गया,
यही क्षेत्र खुला और सुन्दर नज़र आएगा,
लेकिन जय बोलो तुष्टिकरण की 
अजय कुमार ने 29 सितंबर 2016 को दर्ज शिकायत में कहा कि वह 16 साल से नरेला में ढाबा चला रहे हैं और ढाबा बंद करने के लिए डीडीए द्वारा नोटिस प्राप्त होने के बाद वह डीडीए कार्यालय गए जहां उसके अधिकारियों ने कारोबार जारी रखने के बदले हर महीने छह हजार रुपये की रिश्वत की मांग की. सीबीआई की एक टीम ने जाल बिछाकर मुकेश और सत्यवीर को शिकायतकर्ता से नकदी लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा. 
जहाँ तक डीडीए अधिकारीयों को भ्रष्टाचार के आरोप में सजा सुनाई गयी है, अच्छी बात है। लेकिन दिल्ली में अनेकों ऐसे इलाके हैं जहाँ डीडीए, नगर निगम, पुलिस और तो और बिजली विभाग भी रिश्वत में पीछे नहीं। कोई उच्च अधिकारी इस सच्चाई के मुँह मोड़ नहीं सकता। सबको मालूम है कि इन क्षेत्रों में चाहे जायज काम हो अथवा नाजायज बिना रिश्वत के कोई काम नहीं हो सकता। यहाँ किसी भी ट्रक के अन्दर आने पर 400 रूपए और विक्रम गाड़ी के प्रवेश पर 100 रूपए। कौन वसूलता है? सबको मालूम है।  
मजे की बात यह है कि देश में इतने अधिक भ्रष्टाचार विरोधी दस्ते और संस्थायें होने के बाबजूद इतने व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार होने का यही अभिप्राय निकाला जा सकता है कि सबने अपनी रोज़ी-रोटी के साधन बनाए हुए हैं। 
स्मरण हो, कुछ वर्ष पूर्व खुले घी, तेल, और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल खिला। लेकिन सील बंद में भी मिलावट। एक मशहूर तेल की बोतल निरीक्षण में फेल हो गयी, मामला कोर्ट तक पहुँच गया, क्या हुआ? अब सब इतिहास बन गया है। मिलावट वहीँ की वहीँ।