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रोहिंग्या : आप विधायक अमानतुल्ला ने बसाया योगी ने भगाया

उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है तब से प्रदेश में अवैध कब्जे पर लगातार कार्रवाई हो रही है, मुख्यमंत्री योगी का ‘ऑपरेशन नेस्तनाबूत’ अब उत्तर प्रदेश के बाद राजधानी दिल्ली पहुँच चुका है। योगी के निर्देश पर मदनपुर खादर में सिंचाई विभाग को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।

मार्च 24, 2021 की सुबह, मदनपुर खादर क्षेत्र में खसरा नंबर 612 की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए गए ढाँचों को ध्वस्त करने के लिए जेसीबी को भेजा गया। कई करोड़ रुपए की भूमि उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है, जिस पर अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों द्वारा अतिक्रमण किया गया था।

योगी सरकार को अब निरंतर इस खसरे पर गिद्ध की नज़र रखनी होगी, क्योकि उनकी कार्यशैली और दिल्ली के मुख्यमंत्री की कार्यशैली में जमीन आसमान का अंतर है। जगह-जगह शाहीन बाग बनवाने वाले अपनी कुर्सी की खातिर पुनः रोहिंग्यों को वहां स्थापित करने का प्रयास कर सकते हैं। गौर करने की बात यह कि दिल्ली में कोर्ट के आदेश से हटाए अतिक्रमण पुनः उसी स्थिति में आ गए हैं। कोई यह पूछने वाला नहीं कि हटाए अतिक्रमणों पर जो खर्चा हुआ, उसकी वसूली किस मद में किससे होगी? 

अमानतुल्ला खान ने दिल्ली के मदनपुर खादर में बसने के लिए 300 से अधिक रोहिंग्याओं की मदद की थी। आज अवैध रूप से कब्जा किए गए ढाँचों को ध्वस्त करने के लिए योगी सरकार के आदेश पर जेसीबी भेजा गया। फ़िलहाल, कई करोड़ रुपए की भूमि से अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों द्वारा अतिक्रमण को बुल्डोजर से ढहा के समतल कर दिया गया है।

यूपी के जल विभाग के मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने विध्वंस अभियान का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि यूपी सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली मदनपुर में 6 एकड़ जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जे थे। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने अवैध ढाँचों को ध्वस्त कर दिया है और अब जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन पर जलशक्ति-सिंचाई विभाग की भू माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई। दिल्ली के मदनपुर में सिंचाई विभाग की वर्षों से अतिक्रमित 6 एकड़ भूमि को अभियान चला कर कराया गया अतिक्रमण मुक्त।”

अमानतुल्ला खान ने मदनपुर खादर में बसने के लिए 300 से अधिक रोहिंग्याओं की मदद की थी

अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि पर 300 से अधिक रोहिंग्याओं द्वारा अतिक्रमण किया गया था, जिन्होंने इस पर अवैध निर्माण किया था। दैनिक भास्कर द्वारा पिछले साल प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी के मदनपुर खादर क्षेत्र में श्मशान घाट पर रोहिंग्या लोग अवैध रूप से रह रहे थे। इसके अलावा, वे उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली भूमि पर बसे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को सभी सरकारी लाभ भी मिल रहे थे। लॉकडाउन के बीच, दिल्ली सरकार और ओखला विधायक अमानतुल्ला खान पर आरोप लगाया गया था कि उन्हें भारी मात्रा में राशन मुहैया कराया जाता है। मदनपुर खादर नई दिल्ली में ओखला निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। रिपोर्ट के अनुसार, बिजली, पानी का कनेक्शन भी इन्होंने चोरी छिपे करवा लिया था, जिसका भुगतान भी ये लोग नहीं कर रहे थे।
घुसपैठियों को सरकारी संरक्षण दे रही पार्टियां संविधान की शपथ लेकर क्यों संविधान के विरुद्ध काम कर रहे हैं? क्या विश्व में कोई एक ऐसा देश बताएं जहाँ घुसपैठियों को सरकारी सुख-सुविधाएं दी जाती हों। विपरीत इसके विपक्ष भी सरकार के साथ खड़ी होती है, जबकि भारत में देशहित का स्वांग रचने वाले ही घुसपैठियों को अपना "दामाद" बनाकर संविधान तक को नज़रअंदाज़ करते हैं। 
कोरोना काल में आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने रोहिंग्याओं को राशन-पानी से लेकर जरुरत की चीजें मुहैया कराने में एड़ी-चोटी एक कर दिया था आसपास में ही रह रहे स्लम बस्तियों के लोग दाने-दाने को मोहताज थे, लेकिन इन रोहिंग्याओं को दिल्ली सरकार का विधायक आलीशान जिंदगी जीने के लिए मदद कर रहा था। ऑपइंडिया ने तब रिपोर्ट की थी कि कैसे ओखला में गरीबों ने अमानतुल्ला खान के निर्वाचन क्षेत्र में राशन वितरण में धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें राशन इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वे हिंदू थे और ‘आप’ को वोट नहीं दिया था।
अवलोकन करें:-
तेलंगाना : ‘टीआरएस सरकार रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड दे रही’: अरविंद धर्मपुरी, भाजपा सा
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तेलंगाना : ‘टीआरएस सरकार रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड दे रही’: अरविंद धर्मपुरी, भाजपा सा
2014 से केन्द्र में भाजपा सत्ता में है, जिस 
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि कालिंदी कुंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी अवैध रोहिंग्याओं को मारिजुआना, स्मैक और अन्य अवैध पदार्थ बेचने के बारे में जानते थे लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचते थे। कई आरडब्ल्यूए ने दिल्ली पुलिस से अवैध निपटान को हटाने का अनुरोध किया था, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।

सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों से वसूला जाएगा किराया, ढहाने के खर्च की भी होगी क्षतिपूर्ति: योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जों को हटाने व निर्माण गिराने के साथ-साथ भूमाफियों व अपराधियों को सबक सिखाने के लिए एक नया निर्देश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि अब आरोपितों से सरकारी संपत्ति पर कब्जे की अवधि के हिसाब से किराया भी लिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पिछले कुछ समय से योगी सरकार बडे़ पैमाने पर प्रदेश को भूमाफियों से आजाद करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में बीते दिनों प्रशासन ने कई इमारतों पर बुल्डोजर चलवाया है।

अगस्त से लेकर सितंबर तक में माफिया मुख्तार अंसारी के ख़िलाफ़ ही 4-5 कार्रवाई हो चुकी हैं। कुछ दिन पहले मुख्तार अंसारी के दो बेटों को अपराधी घोषित किया गया था। वहीं अंसारी के अवैध निर्माण को लखनऊ नगर निगम ने गिरा दिया था। इससे पहले भी गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर सहित वाराणसी में मुख्तार गैंग के करीबियों और अवैध निर्माण, कारोबारों पर कार्रवाई हो चुकी है।

सबसे पहले प्रशासन ने 27 अगस्त को माफिया मुख्तार अंसारी की डालीबाग कॉलोनी में स्थित अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया और ऐलान किया कि इमारत ध्वस्त करने में जो खर्चा आया है वह भी मुख्तार अंसारी से वसूला जाएगा।

इसके बाद 28 अगस्त को मऊ में उसके करीबी रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर प्रशासन ने कार्रवाई की और बुलडोजर चला कर उसे गिरा दिया। खबरों में इस बूचड़खाने की कीमत 40 लाख बताई गई।

फिर 3 सितंबर को मऊ में ही प्रशासन ने अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे सुरेश सिंह की अवैध रूप से कमाई संपत्ति पर शिकंजा कसा और उसकी 1 करोड़ 5 लाख 40 हजार मूल्य की संपत्ति जब्त की गई। इसमें कई वाहन शामिल थे। 9 सितंबर की खबर के मुताबिक ताबड़तोड़ कार्रवाई के चलते उसे 25 वाहन सीज किए जा चुके थे। सभी वाहनों की कीमत 4. 29 करोड़ थी।

जनसेवा के नाम पर लूट मचाते नेता

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज हर कांग्रेस विरोधी कांग्रेस का विरोध करता नज़र आता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने कोई अच्छा काम नहीं किया। 
स्मरण हो, तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने राजे-रजवाड़ों को प्रिवी पर्स समाप्त किया था, ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो। परन्तु समय परिवर्तन ने राजनीती को एक पेशा बना दिया है। समाजसेवक के नाम पर पार्षद से लेकर लोक/राज्य सभा तक सभी जनता के धन को लूट रहे हैं और जनता मात्र एक मूकदर्शक बनी इनको बहुत बड़ा नेता और समाज सुधारक मान अपना कामकाज छोड़ जय-जयकार करने निकल पड़ते हैं।  
चुनावों में जनता को नैतिकता और राजा हरिश्चन्द्र की ईमानदारी का लॉलीपॉप देने वाले नेता स्वयं किस तरह कानून को ताक पर रख जनता को लूट रहे हैं, जिसे हर जनता समझ नहीं पाती और इन्हे अपना सच्चा समाज सेवक समझने की भूल कर रहे हैं। 
लगभग तीन दशक पूर्व तक कोई निर्वाचित जनसेवक फ्री में इतनी सुविधाएं और पेंशन नहीं लेता था, लेकिन आज जनसेवा के नाम पर खुली लूट मची हुई है। आज वास्तव में जनसेवा के नाम सफेदपोशी लुटेरे राज कर रहे हैं। कोई राजनीती के नाम पर, कोई RWA के नाम, तो कोई एनजीओ के नाम पर। जबकि किसी राजनीतिक संरक्षण के कोई एनजीओ नहीं चलता, पब्लिक का क्या है, एक रूपए खर्च कर दस रूपए खर्चे में डालकर, तुम भी खाओ और हमें भी खिलाओ, पब्लिक को मरने दो। 
दो दशक पूर्व तक चीनी, गेहूँ, चावल, दूध अथवा घी पर 25 पैसे बढ़ने पर विपक्ष धरने और प्रदर्शन करता था, लेकिन आज दो रूपए बढ़ने पर सब अपने बिलों में छुपे रहते हैं। क्या इसी का नाम जनसेवा है?
सरकारी आवास कब्जाए 50 पूर्व सांसदों को दिल्ली पुलिस की मदद से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू 
केंद्र सरकार ने उन सभी पूर्व सांसदों को सरकारी आवासों से निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो नियमों को ताक पर रख कर डेरा जमाए हुए थे। ये सभी पूर्व सांसद सरकार द्वारा दिए गए समय की अवधि होने के बावजूद सरकारी आवासों में टिके हुए थे। अब सरकार ने दिल्ली पुलिस की मदद से उन्हें निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पूर्व सांसदों ने आवास खाली न करने के पीछे कई बहाने बनाए थे।
कुछ पूर्व सांसदों ने कहा था कि उनके बच्चे दिल्ली में पढ़ रहे हैं, इसीलिए वे सरकारी आवास खाली नहीं कर सकते। कुछ सांसदों ने अपने किसी परिवारजन के स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने का बहाना बनाया था। कुछ अन्य पूर्व सांसदों ने तो अजोबोग़रीब तर्क देते हुए कहा था कि वे दिल्ली में कहीं और आवास नहीं ढूँढ पा रहे हैं, इसीलिए वे सरकार आवास खाली नहीं कर सकते। शहरी मामलों के मंत्रालय ने अंत में दिल्ली पुलिस की मदद ली है और कुछ पूर्व सांसदों द्वारा कब्जाए गए सरकारी आवास खाली करा भी लिया गया है।
अब पुलिस की मदद से सरकारी बंगलों पर कब्जा करे बैठे पूर्व सांसदों को निकाला जाएगा बाहर#Delhi #MemberOfParliament https://t.co/DMCLVzhWqR
— Intl. Business Times (Hindi) (@IBTimesHindi) October 7, 2019
अक्टूबर 4, 2019 तक की बात करें तो कुल 50 पूर्व सांसद ऐसे थे, जिन्होंने अपने सरकारी बंगले खाली नहीं किए थे। इन लोगों को कई बार लीगल नोटिस दिया जा चुका था। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के सूत्रों के अनुसार, इस लिस्ट में जन अधिकार पार्टी के संस्थापक पप्पू यादव, उनकी पत्नी और कॉन्ग्रेस नेता रंजीता रंजन, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, मेघालय के मुख्यमंत्री कोर्नाड संगमा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम शामिल है।
अभी इस बात पर स्थिति साफ़ नहीं है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी अपने सरकारी आवासों में बने रह सकते हैं या नहीं। 91 वर्षीय आडवाणी और 85 वर्षीय जोशी के सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इस सम्बन्ध में निर्णय लेगी। अधिकारियों ने कहा है कि पूर्व सांसद जिस तरह से सरकारी आवासों में डेरा जमा कर बैठे हैं, उससे नए सांसदों को आवास उपलब्ध कराने में काफ़ी दिक्कतें आ रही हैं।
20 अगस्त को ख़बर आई थी कि जो भी पूर्व सांसद सरकारी आवास खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके घर में बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाएगी। ऐसा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया था। उस समय 200 ऐसे पूर्व सांसद थे जो सरकारी आवासों में जमे हुए थे। नियमानुसार, दोबारा चुन कर न आए सांसदों को लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर अपना सरकारी आवास खाली करना होता है। राष्ट्रपति कोविंद ने 25 मई को ही पिछली लोकसभा भंग कर दी थी। इस हिसाब से देखें तो अब तक लगभग साढ़े 4 महीने हो चुके हैं।
पप्पू यादव ने सरकारी बंगले को खाली करने से पहले उखाड़े खिड़की, दरवाजे और टाइलें भी, देखें VIDEO
पप्पू यादव ने सरकारी बंगले को खाली करने से पहले उखाड़े खिड़की, दरवाजे और टाइलें भी 
लुटियन दिल्ली स्थित बलवंत राय मेहता लेन के 11 ए नंबर बंगले का नजारा युद्ध क्षेत्र की किसी इमारत में मची तबाही जैसा है. कमरों से उखाड़े गये खिड़की दरवाजे और दीवारों से निकाली गयी टाइलें, बिखरा पड़ा फर्नीचर, खंडहर में तब्दील हुये बरामदे, इस बंगले की ताजा तस्वीर का हिस्सा हैं. यह बंगला बिहार से पूर्व सांसद पप्पू यादव के नाम आवंटित है और बंगले में तबाही के मंजर की वजह, इसे खाली करने से पहले इसमें किये गये अतिरिक्त निर्माण कार्य को हटाना बताया गया है. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा पूर्व सांसदों से बलपूर्वक सरकारी बंगला खाली कराने की कार्रवाई पप्पू यादव को आवंटित बंगले में शुरु होती, इससे पहले ही उन्होंने बंगले में किये गये सैकड़ों लोगों के रुकने के इंतजामों का नामोनिशान मिटाने के लिये अस्थायी निर्माण को ढहा दिया है.
आवास पर मौजूद पप्पू यादव के निजी सचिव अजय कुमार ने दावा किया कि बंगले में लगभग 400 लोगों के रुकने का इंतजाम था, उन्होंने बताया, ‘‘हमारे सांसद जी ने उन मरीजों के लिये आवास में रुकने ठहरने के इंतजाम किया था जो मधेपुरा सहित बिहार के अन्य इलाकों से इलाज कराने के लिये दिल्ली आते थे. इसीलिये बंगले के बाहर सुभाष चंद्र बोस सेवाश्रम का बोर्ड पर भी लगा है जिस पर लिखा है, आपका घर, सबका घर.'
कुमार ने हालांकि निर्माण कार्य को ढहाने और खिड़की दरवाजे उखाड़ कर ले जाने की तोहमत केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के सिर पर मढ़ दी लेकिन सीपीडब्ल्यूडी ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुये स्पष्ट किया कि पूर्व सांसद ने अभी बंगले का कब्जा हस्तांतरित नहीं किया है. कुमार ने बताया, ‘‘मंगलवार को सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माण कार्य को हटाया गया था और इससे निकले खिड़की दरवाजे भी सीपीडब्ल्यूडी का दल ले गया.''
सीपीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने पप्पू यादव को आवंटित बंगले में ऐसी किसी कार्रवाई से इंकार करते हुये बताया कि इस तरह की कार्रवाई पुलिस की मौजूदगी में बलपूर्वक बंगला खाली कराते समय होती है जबकि बलपूर्वक बंगला खाली कराने वालों की सूची में पप्पू यादव का नाम शामिल नहीं है.
उल्लेखनीय है कि लुटियन दिल्ली स्थित बंगलों की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी केन्द्रीय भवन निर्माण एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी की है. मंत्रालय का संपदा निदेशालय इन बंगलों के आवंटन के बाद आवंटी को कब्जा दिलाने और आवंटन रद्द होने पर कब्जा वापस लेने की जिम्मेदारी निभाता है. हाल ही में लोकसभा चुनाव के बाद संपदा निदेशालय ने 230 पूर्व सांसदों को बंगले खाली करने के नोटिस जारी किये थे. अक्टूबर के पहले सप्ताह तक बंगले खाली नहीं करने वाले लगभग 50 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब तलब किया गया था. 
इस सूची में पप्पू यादव और उनकी पूर्व सांसद पत्नी रंजीत रंजन भी शामिल थी. सुपौल से पूर्व सांसद रंजीत रंजन को बलवंत राय मंहता लेन में ही सात नंबर बंगला आवंटित है. गत सोमवार को निदेशालय ने नोटिस का जवाब नहीं देने वाले 40 पूर्व सांसदों के बंगले बलपूर्वक खाली कराने की कार्रवाई शुरु कर दी है. निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि पप्पू यादव और उनकी पत्नी ने एक सप्ताह में आवास खाली करने की सूचना दी थी, इसलिये बलपूर्वक आवास खाली कराने वालों की सूची में उनका नाम नहीं है.
सीपीडब्ल्यूडी के लुटियन दिल्ली स्थित कार्यालय ने पप्पू यादव के आवास में लोगों के रुकने ठहरने के अतिरिक्त इंतजाम किये जाने की जानकारी होने की बात को भी स्वीकार किया है. एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘‘नियमों के तहत विभाग ने इससे जुड़ी सभी जानकारियां लोकसभा सचिवालय को दे दी थी। अतिरिक्त निर्माण कार्य के खिलाफ कार्रवाई करने की पहल मंत्रालय के स्तर पर की जाती है.'अधिकारी ने कहा कि बंगले में की गयी तोड़फोड़ से सीपीडब्ल्यूडी का कोई संबंध नहीं है लेकिन बंगले के कब्जे के हस्तातंरण के समय इस पर संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. 
कुमार ने बताया कि बिहार में बाढ़ राहत कार्यों में लगे पप्पू यादव शुक्रवार तक दिल्ली पंहुच रहे हैं. इसके बाद दोनों बंगलों का कब्जा सीपीडब्ल्यूडी को सौंपा जाएगा. सरकारी आवास में व्यापक पैमाने पर किये गये निर्माण कार्य और तोड़फोड़ के मामले में प्रतिक्रिया के लिये पप्पू यादव और रंजीत रंजन उपलब्ध नहीं थे.
अखिलेश और तेजस्वी यादव भी कर चुके हैं ऐसी हरकत 
इसके पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ऐसी ही हरकत कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले तो उन्होंने ये-वो बहाने कर के बंगला छोड़ा ही नहीं, और जब छोड़ा, तो उसकी टोंटियाँ तक साथ ले गए। वहीं पप्पू यादव के ही गृह राज्य बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बंगला लंबी जद्दोजहद के बाद जब यादव का पदभार संभालने वाले सुशील मोदी को मिला तो पता चला कि तेजस्वी यादव ने बंगले में तमाम निर्माण कार्य करा रखा था। मोदी ने पत्रकारों को आलीशान बंगले का भ्रमण कराया, और उसके सौन्दर्यीकरण में तेजस्वी यादव के खर्च को करोड़ों के सरकारी धन का दुरुपयोग बताया था। 
पुलिस की मदद से खाली कराया गया पूर्व सांसद हरी मांझी और पप्पू यादव का बंगला
अरुण जेटली के परिवार को नहीं चाहिए पेंशन, पत्नी ने जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए की दान
अरुण जेटली के परिवार को नहीं चाहिए पेंशन, पत्नी ने जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए की दान
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के परिवार ने मौत के बाद मिलने वाली उनकी पेंशन दान कर दी है। दिवंगत नेता की पत्नी संगीता जेटली ने इस बारे में राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिखी है।संगीता जेटली ने अपने पति की पेंशन उन कर्मचारियों को दान करने को कहा है जिनकी सैलरी कम है। जेटली परिवार के फैसले के बाद अब उनकी पेंशन राज्यसभा के कम सैलरी वाले कर्मचारियों को दी जा सकती है। बता दें कि पेंशन के रूप में परिवार को सालाना करीब 3 लाख रुपये मिलते।
अरुण जेटली के परिवार में पत्नी संगीता जेटली के अलावा बेटी सोनाली और बेटा रोहन हैं। ये दोनों ही अपने पिता की तरह वकील हैं। वकालत में ये जेटली परिवार की तीसरी पीढ़ी है। अरुण जेटली वकालत और राजनेता के साथ-साथ दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष भी रहे।
पेंशन जरूरतमंद लोगों को देने की बात ने जनता में उपज रहे रोष को बल दे दिया है। काफी समय से जनता सरकार से प्रश्न कर रही है कि "आखिर किस आधार पर अपने आपको जनसेवक कहलवाने पेंशन और मुफ्त में सुविधाओं क्यों लेते हैं? पार्षद से लेकर सांसद तक सबको पेंशन भी चाहिए, क्यों? जनता इनसे पूछे "आप लोग कर्मचारी हो या जनसेवक?" 
यदि पेंशन के नाम पर इन जनसेवकों द्वारा मचाई जा रही लूट पर अंकुश लगता है, देश का बजट लाभ में जाएगा ही नहीं, महंगाई एवं दूसरे संसाधन भी प्रभावित होंगे, जिसका लाभ जनता को ही मिलेगा।  
अरुण जेटली का निधन?
बता दें पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली का 24 अगस्त को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। जेटली काफी समय से एक के बाद एक बीमारी से लड़ रहे थे। इसी के चलते उन्‍होंने लोकसभा चुनाव, 2019 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कैबिनेट में शामिल नहीं करने की गुजारिश की थी
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सांसदों को कितनी मिलती है पेंशन?
साल 2010 में हुए संशोधन के अनुसार संसद से रिटायर होने के बाद सदस्यों को 20 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है। साथ ही उनके कार्यकाल के एक साल के आधार पर 1500 रुपये अधिक मिलते हैं।खास बात ये है कि पेंशन हर सदस्य को मिलती है, चाहे उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया हो गया या नहीं। इसके अलावा किसी भी पूर्व सांसद के निधन के बाद उनके पति या पत्नी को पेंशन का आधा हिस्सा दिया जाता है
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शिकंजा कसा तो आजम को याद आया मजहब, बोले- पाकिस्तान नहीं जाने की सजा भुगत रहे हैं मुस्लिम

Azam Khan
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान ने देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुसलमानों को 1947 के बाद की सजा मिल रही है। आजम खान ने कहा है कि यदि उनके (मुस्लिमों के) पूर्वज उस समय पाकिस्तान चले जाते हैं तो उन्हें यह सजा ना मिलती। आजम खान को उत्तर प्रदेश सरकार ने भू माफिया घोषित किया है और उन पर 23 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
लिंचिंग की घटनाओं से संबंधित सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए आजम खान ने कहा, 'यह मुसलमानों को 1947 के बाद की सजा मिल रही है। जो भी किया जाएगा मुस्लिम लोग उसका सामना करेंगे। हमारे पूर्वज पाकिस्तान क्यों नहीं गए? यह सवाल मौलाना आजाद, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और बापू से पूछें। उन्होंने मुसलमानों से वादे किए थे।' आजम खान ने कई सवाल दागते हुए पूछा कि मुस्लिमों से इतने वादे क्यों किए गए?
आज़म खान मजहब कार्ड खेलने वाले पहले मुसलमान नहीं है। स्मरण हो, जब क्रिकेटर अजरुद्दीन पर सट्टे के आरोप लगे थे, तब अजरुद्दीन ने भी कहा था कि "मुस्लिम होने वजह से परेशान किया जा रहा है।"  यह कहना कि "हमारे पूर्वज पाकिस्तान क्यों नहीं गए?", आज़म खान को नहीं मालूम कि वहाँ आज भी उन्हें मुहाजिर के नाम से पुकारा जाने पर कहते कि "हमारे पूर्वज भारत छोड़ पाकिस्तान क्यों आ गए?" और अगर वहाँ मुहाजिर कहलाए जाने का रोना रोते, अल्लाह ही बेहतर जाने क्या अंजाम होता इनका। 
इतना ही नहीं, जितना अधिक्रमण मुस्लिम क्षेत्रों में हो रहा है, कहीं और नहीं, और जब कार्यवाही होगी आज़म और अजरु जैसे चीखते हुए यही कहेंगे कि "मुसलमान होने की वजह से परेशान किया जा रहा है।"  
आजम के खिलाफ 23 मुकदमे दर्ज
आजम खान पर जबरन जमीन हड़पने के आरोप में उत्तर प्रदेश में 23 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। यूपी सरकार ने उनका नाम एंटी भू माफिया पोर्टल पर बनी सूची में डाल दिया है। आजम पर आरोप है कि उन्होंने अपनी जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों से जोर जबरदस्ती करके जमीन को हथिया लिया। इसके लिए कई किसानों ने शपथ पत्र दायर कर आरोप लगाए हैं।
आजम बोले- राजनीति से प्रेरित हैं आरोप
वहीं आजम ने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को हराने की सजा दी जा रही है। आजम ने अपनी तथा जौहर विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने की रामपुर के जिलाधिकारी की साजिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी ने भी आजम खान के खिलाफ लगे आरोपों को फर्जी बताया है। यूपी विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान सपा सदस्यों ने जमकर इसका विरोध किया और कहा कि आजम खान का उत्पीड़न किया जा रहा है। सपा सदस्यों ने इस मामले की जांच के लिए एक सर्वदलीय समिति बनाने को कहा है।
Azam Khan,Rampur MP on mob lynching incidents:It's the punishment Muslims are getting after 1947.Muslims will face it whatever may it be.Why didn’t our ancestors go to Pakistan?Ask this to Maulana Azad,Jawaharlal Nehru, Sardar Patel&Bapu.They had made promises to Muslims. (19.07)


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संसद में उठा मॉब लिंचिंग का मुद्दा
देश में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा लोकसभा में भी उठ रहा है। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर सरकार से कानून बनाए जाने की मांग की है। आपको बता दें कि हाल ही में बिहार के सारण तथा राजस्थान के अलवर से मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आई हैं जिसमें  चार लोगों की मौत हो गई।

अवैध फैक्‍ट्रियां बंद की जाएं-- सुप्रीम कोर्ट

सीलिंग के बाद दिल्‍ली के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक और बड़ा आदेश, कहा- अवैध फैक्‍ट्रियां बंद की जाएं
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्‍ली में अवैध फैक्ट्री मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर को कहा कि संसद कानून बनाती है और अगर लोग कानून का उल्लंघन करते रहे तो दिल्ली को कोई नहीं बचा सकता. कोर्ट ने इसके साथ ही दिल्‍ली में चल रहीं अवैध फैक्ट्रियां बंद करने का आदेश पारित किया. कोर्ट में विश्वास नगर के फैक्टरी मालिक रिलीफ के लिए आए थे। हैरानी इस बात से होती है, जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते समय कोर्ट राज्य  
सीलिंग मामले में भी कोर्ट ने की थी खिंचाई
इससे पहले शीर्ष अदालत ने सीलिंग मामले में दिल्ली के स्थानीय निकाय को अपनी आंखे मूंदने और कोई हादसा होने का इंतजार करने पर आड़े हाथ लिया था। साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण से नगर के मास्टर प्लान 2021 में बदलाव करने के उसके प्रस्तावों पर सवाल खड़े किए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण किसी तरह के दबाव के आगे झुक रहा है। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, 'दिल्ली में हर कोई अपनी आंखें मूंदे है और कोई हादसा होने का इंतजार कर रहा है। आपने (नगर निकाय) उपहार सिनेमा अग्निकाण्ड त्रासदी और बवाना तथा कमला मिल्स जैसी घटनाओं से भी कुछ नहीं सीखा है।'
सीलिंग से कारोबारियों को बड़ी राहत मिली थी
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने हाल ही में दुकान-रिहाइशी भूखण्डों और परिसरों का एफएआर और रिहाइशी भूखण्डों के बराबर करने का प्रस्ताव किया है। प्राधिकरण के इस कदम से सीलिंग के खतरे का सामना कर रहे कारोबारियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। पीठ ने प्राधिकरण से सवाल किया, 'दिल्ली में रहने वाली जनता के बारे में क्या कहना है?' पीठ ने कहा, 'आपको जनता का पक्ष भी सुनना होगा। आप सिर्फ कुछ लोगों को ही नहीं सुन सकते।' पीठ ने दिल्ली में हो रहे अनधिकृत निर्माणों का जिक्र किया और कहा, 'आप दिल्ली की जनता के हितों का ध्यान रख रहे हैं या नहीं?' पीठ ने कानून का शासन बनाये रखने पर जोर देते हुये कहा कि दिल्ली कचरा प्रबंधन, प्रदूषण और पार्किंग जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है। 
दिल्ली में चाहे अधिक्रमण हो, अवैध निर्माण हो या अवैध फैक्ट्रियां बिना पुलिस, नेता और प्रशासन की मिलीभगत के बिना असम्भव है। 

क्या अधिकारी सो रहे हैं?--सुप्रीम कोर्ट 

इससे पूर्व दिल्ली में सीलिंग पर जुलाई 18 को सुप्रीम कोर्ट ने और सख्ती दिखाई। कोर्ट ने कहा कि सीलिंग रुकनी नहीं चाहिए। साथ ही आदेश दिया कि बिल्डिंग बाईलॉज को अनदेखा कर अवैध निर्माण करने वाले सभी बिल्डर, कांट्रेक्टर और आर्किटेक्ट ब्लैक लिस्ट किए जाएं। इस बाबत दो सप्ताह में नियम बनाए जाएं। जस्टिस एमबी लोकुर की बेंच ने कहा कि अवैध निर्माण करने वालों को सिर्फ 48 घंटे का नोटिस दिया जाए। जवाब नहीं मिले तो तुरंत कार्रवाई करें। अवैध निर्माण ढहाना है तो ढहा दें और सील करना है तो सील कर दें।
नजफगढ़ वार्ड कमेटी के चेयरमैन को कोर्ट ने पेश होने का आदेश दिया
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि नजफगढ़ में अवैध निर्माण ढहाने गए दस्ते को नजफगढ़ वार्ड कमेटी के चेयरमैन मुकेश सुर्यन ने काम नहीं करने दिया। इस पर कोर्ट ने सुर्यन को अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि सीलिंग करने वाले अधिकारियों के साथ पर्याप्त पुलिस बल भेजा जाए।
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कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा आपके अधिकारी क्या कर रहे हैं
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि सील किए गए अवैध निर्माण खोलने के लिए 1130 आवेदन मिले हैं। इनमें से 405 खोले जा चुके हैं। इस पर कोर्ट ने कहा, “आपके अधिकारी क्या कर रहे हैं? आप कह रहे हैं कि 405 मामलों में अवैध निर्माण नहीं मिला। बाकी 700 मामलों का क्या? क्या अधिकारी सो रहे हैं?’ अधिकारी सो नहीं रहे, बल्कि अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं। 
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हुए अनधिकृत निमार्ण हटा सकते हैं? 
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तीनों नगर निगमों में इंजीनियरों ने हड़ताल करने की धमकी दी थी

दरअसल, अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने के खिलाफ नजफगढ़ जोन के डीसी विश्वेंद्र सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद दिल्ली के तीनों नगर निगमों में इंजीनियरों ने हड़ताल करने की धमकी दी थी। उधर, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कार्रवाई के लिए जाने वाले निगम इंजीनियरों को पुलिस की ओर से पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। वहीं, कॉन्ट्रैक्टर, बिल्डर और आर्किटेक्ट को ब्लैक लिस्ट करने के सुझाव पर कोर्ट ने केंद्र को दो सप्ताह में डिजिटल मैपिंग को लेकर दिशा-निर्देश तय करने को कहा है। साथ ही कहा कि जरूरत पड़े तो इसके लिए इसरो और एनआईसी की भी मदद ली जा सकती है।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली का लाजपत नगर मार्केट वैसे तो सरोजिनी नगर मार्केट के बाद सबसे बड़ा बाजार है। ले....

दिल्ली में कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहाँ भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है। और इन क्षेत्रों में कार्यवाही करने का किसी में साहस भी नहीं। सरकारी जमीन पर अधिक्रमण कर रखा है। यदि गम्भीरता से जाँच की जाए, तो सर्वप्रथम उन अधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाए, जिनके कार्यकाल में सरकारी ज़मीन का अधिक्रमण या अवैध निर्माण किया गया। 2014 चुनावी रैलियों में भाजपा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने को कहती थी, लेकिन दिल्ली की तीनों नगर निगमों पर भाजपा का ही कब्ज़ा है, भाजपा बताए नगर निगमों में कितना भ्रष्टाचार समाप्त हुआ? फिल्म "उपकार" का एक चर्चित संवाद है "राशन पर भाषण है, भाषण पर कोई राशन नहीं" जो आज भी हमारे नेता समाज पर सटीक बैठता है। नगर निगमों में सत्ता अगर भाजपा की है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के भी सदस्य हैं, कोई नहीं बोलता। चुनाव आएंगे, तब सभी नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार पर लम्बे-चौड़े भाषण देते नज़र आएंगे। लेकिन किसी भी मतदाता ने यह पूछ लिया, "जब सदन में तुम्हारी पार्टी विराजमान थी, क्यों नहीं आवाज़ उठाई? क्यों नहीं धरने या प्रदर्शन किये?" तुरन्त उस मतदाता पर विरोधी पक्ष का होने का आरोप लगाकर बदनाम कर देंगे।  
ढाबा मालिक से रिश्वत मांगने पर DDA के दो अफसरों को चार-चार साल का सश्रम कारावास
उत्तर पश्चिम दिल्ली में एक व्यक्ति को ढाबा अवैध रूप से चलाने की अनुमति के बदले हर महीने 6 हजार रुपये की रिश्वत मांगने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के दो अधिकारियों को एक अदालत ने चार - चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.  विशेष न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने डीडीए के अधिकारियों मुकेश चंद्र और सत्यवीर सिंह को एक व्यक्ति से मासिक रिश्वत मांगने पर जेल की सजा सुनाई. अवैध रूप से ढाबा चलाने पर इस व्यक्ति को अधिकारियों से एक नोटिस मिला था.
न्यायाधीश ने कहा कि यह तार्किक संदेह से परे साबित हुआ है कि डीडीए में ‘ खलासी ’ (सरकारी कर्मचारी) आरोपी मुकेश ने यह सुनिश्चित करने के लिए शिकायतकर्ता से छह हजार रुपये प्रति माह की रिश्वत मांगी कि उनके आवासीय परिसर के बाहर शिकायतकर्ता और उसके पिता द्वारा संचालित ‘ ढाबे ’ के खिलाफ कारण बताओ नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. न्यायाधीश ने कहा कि यह भी साबित हुआ है कि मुकेश और (सरकारी कर्मचारी) सत्यवीर सिंह ने साजिश रची. 
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जिस दिन इस क्षेत्र से अतिक्रमण समाप्त हो गया,
यही क्षेत्र खुला और सुन्दर नज़र आएगा,
लेकिन जय बोलो तुष्टिकरण की 
अजय कुमार ने 29 सितंबर 2016 को दर्ज शिकायत में कहा कि वह 16 साल से नरेला में ढाबा चला रहे हैं और ढाबा बंद करने के लिए डीडीए द्वारा नोटिस प्राप्त होने के बाद वह डीडीए कार्यालय गए जहां उसके अधिकारियों ने कारोबार जारी रखने के बदले हर महीने छह हजार रुपये की रिश्वत की मांग की. सीबीआई की एक टीम ने जाल बिछाकर मुकेश और सत्यवीर को शिकायतकर्ता से नकदी लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा. 
जहाँ तक डीडीए अधिकारीयों को भ्रष्टाचार के आरोप में सजा सुनाई गयी है, अच्छी बात है। लेकिन दिल्ली में अनेकों ऐसे इलाके हैं जहाँ डीडीए, नगर निगम, पुलिस और तो और बिजली विभाग भी रिश्वत में पीछे नहीं। कोई उच्च अधिकारी इस सच्चाई के मुँह मोड़ नहीं सकता। सबको मालूम है कि इन क्षेत्रों में चाहे जायज काम हो अथवा नाजायज बिना रिश्वत के कोई काम नहीं हो सकता। यहाँ किसी भी ट्रक के अन्दर आने पर 400 रूपए और विक्रम गाड़ी के प्रवेश पर 100 रूपए। कौन वसूलता है? सबको मालूम है।  
मजे की बात यह है कि देश में इतने अधिक भ्रष्टाचार विरोधी दस्ते और संस्थायें होने के बाबजूद इतने व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार होने का यही अभिप्राय निकाला जा सकता है कि सबने अपनी रोज़ी-रोटी के साधन बनाए हुए हैं। 
स्मरण हो, कुछ वर्ष पूर्व खुले घी, तेल, और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल खिला। लेकिन सील बंद में भी मिलावट। एक मशहूर तेल की बोतल निरीक्षण में फेल हो गयी, मामला कोर्ट तक पहुँच गया, क्या हुआ? अब सब इतिहास बन गया है। मिलावट वहीँ की वहीँ।