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CAA का समर्थन करने पर 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने वाला जामिया का प्रोफेसर अबरार सस्पेंड

जामिया, अबरार अहमद
जामिया मिलिया इस्लामिया ने असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद को सस्पेंड कर दिया है। उसने नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वाले 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का दावा किया था। अबरार ने एक ट्वीट में ऐसा करने का दावा किया था। यूनिवर्सिटी ने ट्वीट कर उसे सस्पेंड करने की जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि अबरार ने जो दावा किया है वो गंभीर और अस्वीकार्य है। इसलिए जाँच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया गया है।
प्रोफेसर अबरार ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मेरे सभी विद्यार्थी पास हो गए, सिर्फ 15 गैर मुस्लिमों को छोड़कर, जो सीएए के समर्थन में थे या फिर सीएए का विरोध करने वालों के खिलाफ में थे।

जामिया के प्रोफेसर डॉ. अबरार द्वारा किए गए
दो ट्वीट के स्क्रीन शॉट
इतना ही नहीं उसने अपनी कक्षा के 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को धमकी दते हुए कहा था कि 55 छात्र उसके समर्थन में हैं। अगर उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनों का विरोध नहीं बंद किया तो 55 छात्र उन्हे दंगों के माध्यम से सबक सिखाएँगे। वहीं जामिया के एक सूत्र ने कहा कि प्रोफेसरों को गैर मुस्लिम छात्रों के रोल नंबर पता है इसलिए प्रोफसर को गैर-मुस्लिम छात्रों की पहचान करना आसान है। हालाँकि बाद में अबरार ने अपने ट्वीट पर सफाई देते हुए इसे मजाक बताया था।
अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयायी है। वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है। साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर भी सरकार के दावों और मेडिकल जगत की सलाहों पर पानी फेरने की कोशिश की थी।
अबरार ने कहा था कि कोरोना वायरस या फिर इस प्रकार की बाकी चीजें अल्लाह की परीक्षा है। उसने दावा किया था कि कोरोना वायरस से डरे बगैर सभी को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। यहाँ सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यक्ति पर आज तक जामिया ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जब वो खुले रूप से सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की घृणास्पद बातें कर रहा है। एक ऐसा प्रोफेसर, जो कोरोना वायरस को ‘अल्लाह का इम्तिहान’ बताता है।

दिल्ली दंगे : भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने उड़ाई कांग्रेसियों और नकली लिबरलों की धज्जियां

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
संसद में मार्च 11 को दिल्ली में हुए दंगों को लेकर काफी तीखी बहस हुई, जहां सांसद तेजस्वी सूर्या ने दिल्ली दंगों के लिए भाजपा को घेरने वाली कांग्रेस के साथ-साथ पूरे विपक्ष को जमकर धोया। इससे पहले भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस को उसकी खोखली बातों के लिए लताड़ भी लगाई।
संसद में दिल्ली दंगों पर हुई बहस में कई छुपे हुए तथ्यों को उजागर किया गया, जिन्हें लिबरल ब्रिगेड छुपाने का प्रयास कर रहा था। सांसद तेजस्वी सूर्या ने अपनी बात कहते हुए कई तथ्य उजागर किए कि कैसे धर्म के नाम पर महिलाओं को इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अपना सुरक्षा कवच बनाया।

सीएए मुस्लिम विरोधी नहीं पर प्रदर्शन हिन्दू विरोधी थे
दिल्ली दंगों पर बहस के दौरान संसद में विपक्ष ने कपिल मिश्रा के बयान का मुद्दा उठाकर सरकार को दिल्ली दंगों का दोषी बताने का प्रयास किया। जिस पर तेजस्वी सूर्या ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में कई कट्टरपंथी नारों ‘जिन्ना वाली आज़ादी’, ‘हिंदुओं से आज़ादी’, ‘काफ़िरों से आज़ादी’ जैसे नारों की गूंज सुनाई दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि ‘सीएए मुस्लिम विरोधी तो नहीं है, पर ये प्रदर्शन निस्संदेह हिन्दू विरोधी थे।’ 
ज्ञात हो, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नेता ने भी विरोध प्रदर्शनों और धरनों में अलगावादी नारों के लगाए जाने पर आपत्ति जताई थी। लेकिन नगाड़े की आवाज़ के आगे तूती की किसी ने नहीं सुनी। क्योकि यह सब षड़यंत्र हिन्दू विरोधियों द्वारा रचा गया था। मुस्लिम क्षेत्रों में छोटे-छोटे बच्चे तक कहते फिरते हैं, "मोदी को मारो", "मैं मोदी को मारूंगा" आदि। फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर पत्थरबाज़ी, दर्शाता है कि आयोजकों की मंशा नागरिकता संशोधक कानून का विरोध नहीं बल्कि देश में अराजकता पैदा करना है।  
तेजस्वी ने अपनी बात को विस्तार में रखते हुए प्रदर्शन के दौरान ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या? ला इलाह इल्लाल्लाह’ जैसे नारों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन सांप्रदायिक लोगों को मासूम बताने में विपक्ष और कई बुद्धिजीवी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
राष्ट्रद्रोहियों को बताया गया ‘शीरोज़’
तेजस्वी ने अपनी बात रखते हुए बताया कि सीएए विरोध के नाम पर लोगों में तरह-तरह से अफवाहें फैलाई गईं। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं, जिनके लिए भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने वाले पुलिस बर्बरता से पीड़ित हैं और कई बुद्धिजीवी तो इन राष्ट्रद्रोहियों को ‘शीरोज़’ तक बुलाने लगे।
तेजस्वी ने कांग्रेस का भांडा फोड़ते हुए नके पूर्ववर्ती सरकारों के अंतर्गत हुए दंगों और सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मैंने देखा है और समझा है कि कैसे कांग्रेस riot engineering में विशेषज्ञ बन चुकी है। सीएए जब संवैधानिक रूप से पारित हुआ तो कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भीड़ को संबोधित कर कहा कि ये आर-पार की लड़ाई है और आप सभी लोग इसके खिलाफ लड़ें। इसके अगले ही दिन शाहीन बाग में प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं। जेएनयू से लेकर जामिया तक हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए और इनमें जो नारे सुने गए वो तो बेहद शर्मनाक थे।
भारत की छवी खराब करने के लिए पत्रकार को मिला था ऑफर
तेजस्वी सूर्या ने ये भी बताया कि कैसे इन सीएए विरोधी प्रदर्शनों का एक ही उद्देश्य था – भारत की छवि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिगाड़ना। उन्होंने अपनी बात को साफ करने के लिए उमर खालिद के भाषण का उदाहरण भी दिया। इसके साथ ही तेजस्वी ने पत्रकार जे गोपीकृष्णन के आरोप का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे भारत की छवि खराब करने वाला लेख लिखने के लिए जे गोपीकृष्णन को 1500 डॉलर का ऑफर मिला था।
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गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार(मार्च 12) को राज्यसभा में कहा कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी कि दिल्ली दंगों में चर्....
सांसद तेजस्वी सूर्या ने संसद में उन सभी बातों को स्पष्टता से रखा, जिन्हें खास मीडिया वर्ग और दिल्ली के लुटियंस हमेशा से छुपाने में लगे हैं। इसके साथ ही तेजस्वी ने संसद में अवसरवादियों और विपक्ष को जमकर खरी-खरी सुनाई। कुल मिलाकर तेजस्वी ने अपने तथ्यों से विरोधियों को निरुत्तर कर दिया।

अब शाहीन बाग जाम से त्रस्त लोग भी उतरे सड़कों पर

शाहीन बाग़
फरीदाबाद सड़क खोलने की माँग को लेकर
शाहीन बाग़ मेट्रो स्टेशन जाने वाली सड़क की गई बंद
सीएए-एनआरसी (CAA-NRC) के विरोध में शाहीन बाग़ में चल रहे प्रदर्शन के खिलाफ आज दिल्ली के सरिता विहार और जसोला में लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। ये लोग उन सभी रास्तों को खोलने की माँग कर रहे हैं जो शाहीन बाग में करीब ढाई महीने से जारी विरोध प्रदर्शन के कारण बंद पड़े हैं। सरिता विहार, मदनपुर खादर और जसोला के स्थानीय लोगों ने फरीदाबाद सड़क के खुलने तक शाहीन बाग मेट्रो स्टेशन जाने वाली सड़क को बंद कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है जब तक फरीदाबाद रोड नहीं खोली जाएगी वे शाहीन बाग़ जाने वाली सड़क को बंद रखेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीदाबाद सड़क खोलने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सरिता विहार, जसोला आदि इलाके के लोगों का कहना है कि जामिया मिलिया विश्वविद्यालय से शाहीन, ठोकर संख्या 9 के कालिंदी कुंज जाने वाला मार्ग खुला है और इसकी वजह से जामिया, बटला हाउस और शाहीन इलाके के लोगों को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है। जबकि, दूसरे मोहल्ले के निवासियों को इससे कोई खास राहत नहीं मिली है। उनका कहना है कि फरीदाबाद रोड भी खोला जाए ताकि उन्हें भी राहत मिल सके।

इन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जो रास्ता कल खोला गया था, उससे सिर्फ शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर लोगों को ही फायदा हुआ है, इसलिए उनकी भी परेशानी को समझते हुए प्रशासन फरीदाबाद रोड को खुलवाए। फरीदबाद की सड़क खोलने को लेकर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ भी शामिल हैं।
वहीं सीएए और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ दिल्ली के जाफराबाद में बीती रात से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बीजेपी नेता और दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मॉडल टाउन से बीजेपी उम्मीदवार रहे कपिल मिश्रा ने कहा है कि दिल्ली में दूसरा शाहीन बाग नहीं बनने देंगे।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सरकार के किसी भी निर्णय का विरोध करना कोई गलत बात नहीं, करना भी चाहिए, लेकिन विरोध का को...
इससे पहले कल आधी रात से जाफराबाद मेट्रो स्टेशन सड़क को जाम किये लोगों पर टिप्पणी करते हुए कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया, “जाफराबाद में अब स्टेज बनाया जा रहा है। एक और इलाका जहाँ अब भारत का कानून चलना बंद। सही कहा था मोदी जी ने, शाहीन बाग एक प्रयोग था। एक-एक करके सड़कों, गलियों, बाजारों, मोहल्लों को खोने के लिए तैयार रहिए। चुप रहिए, जब तक आपके दरवाजे तक ना आ जाएँ, चुप रहिए।”

20 घटनाएँ, जहाँ CAA समर्थन पड़ा महँगा

संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के पास होने के साथ ही वामपंथियों, कट्टरपंथियों और उपद्रवियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश भर में हिंसा और गुंडागर्दी की गई और कुछ जगहों पर अभी भी की जा रही है। दिल्ली, यूपी, असम, बिहार से लेकर हर जगह हिंसा और आगजनी की घटना देखी गई। कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया।
काफी दिनों तक इनके हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद जब देश की जनता बड़ी संख्या में CAA के समर्थन में सड़कों पर उतरने लगी तो ये प्रदर्शनकारी गुंडे और भी ज्यादा बिलबिला गए, क्योंकि उनके झूठ का पर्दाफाश होने लगा। CAA का समर्थन करने पर किसी को अपनी जान गँवानी पड़ी तो किसी की नौकरी चली गई। किसी को जान से मारने की धमकी मिली तो किसी के घरों को जला दिया गया, किसी के घर का पानी का सप्लाई बंद कर दिया गया। इन प्रदर्शनकारियों ने किसी का सिर फोड़ दिया तो किसी को अपनी जान बचाने के लिए खुद को मुसलमान साबित करना पड़ा, तब जाकर जान बची।
ऐसी बहुत सी घटनाएँ घटी हैं महज कुछ ही दिनों के भीतर। नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करना किसी को कितना महँगा पड़ सकता है, इसके कई सारे उदाहरण सामने आए। हम यहाँ पर आपको ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में बता रहे हैं:-
इसका ताजा उदाहरण है झारखंड के लोहरदगा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलूस पर हुई हिंसा में घायल नीरज राम प्रजापति की मौत। लोहरदगा में 23 जनवरी को CAA के समर्थन में हुई रैली में 15 से 20 हज़ार लोग शामिल थे, फिर भी मुस्लिम मोहल्ले में जुलूस के पहुँचते ही इतनी तेज़ पत्थरबाजी हुई कि लोगों में भगदड़ मच गई। CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं तक को निशाना बनाया गया। नीरज इसी दौरान घायल हो गए थे।
हाल ही में केरल के ही एक डॉक्टर को सिर्फ इस वजह से नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वह CAA के समर्थन में सरकार और कानून के साथ खड़ा था। ट्विटर पर @vedvyazz नाम से ट्विटर अकाउंट चलाने वाले एक डॉक्टर ने अपनी कहानी लिखते हुए बताया था कि किस तरह से उनकी पूरी पहचान और उनके कार्यस्थल से लेकर उसके घर तक की गोपनीय जानकारी को कुछ CAA विरोधियों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया और आखिर में उन्हें नौकरी से निकाले जाने के बाद डर के कारण अपने ही पैतृक शहर से भागने को मजबूर कर दिया गया।
इससे पहले केरल के तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने दावा किया था कि नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने के कारण उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं। वे गैस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया था कि CAA का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्व’ उन्हें परेशान कर रहे हैं।
शाहीन बाग में पिछले कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से एक इंजीनियर को नौकरी छोड़नी पड़ी। विरोध प्रदर्शन के कारण कालिंदी कुंज-नोएडा रोड बंद है और इस वजह से सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत को ऑफिस पहुँचने में काफी परेशानी होने लगी। रोज-रोज लेट पहुँचने की वजह से उनकी हाफ डे की अटेंडेंस लग रही थी। सैलरी आधी हो गई और सफर का खर्च दोगुना। 6-7 घंटे रोड पर बीतने लगा, उसके बाद 9 घंटे की नौकरी। इतनी मेहनत के बाद भी सैलरी आधी मिल रही थी। ऐसे में जॉब कर पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था, तो उन्हें तंग आकर नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा।
सत्ता-विरोधी दलों ने मानो CAA-विरोधी माहौल के बहाने अपनी मानसिकता के जहर को भुनाने की कसम खा ली है। इसका ही एक ताजा उदाहरण कैब सर्विस ओला (Ola) के एक ड्राइवर के साथ देखने को मिला है, जिसे एक CAA विरोधी ने सिर्फ इस वजह से Ola से नौकरी से निकलवा दिया क्योंकि वह CAA और NRC के मुद्दे पर सरकार के समर्थन में था।
शाहीन बाग में चल रहे CAA-विरोधी प्रदर्शन में न्यूज़ नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ वहाँ प्रदर्शन कर रहे गुंडों ने बदसलूकी की। यही नहीं, उनके साथ हाथापाई करने के बाद उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में धक्का-मुक्की कर रही भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया।
दिल्ली के शाहीन बाग में न्यूज नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया पर हमले के बाद मुंबई में भी न्यूज नेशन की टीम पर हमला किया गया। मुंबई के नागपाड़ा इलाके में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की कवरेज करने गए वीडियो जर्नलिस्ट ओमप्रकाश केवट के साथ मारपीट की गई। उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया।
केरल के मलप्पुरम जिले के कुट्टिपुरम में एक कॉलोनी के हिंदू निवासियों को CAA का समर्थन करने पर पीने का पानी देने से वंचित कर दिया गया और साथ ही उन्हें मुस्लिम समूहों द्वारा बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा। कॉलोनी के पास रहने वाला एक व्यक्ति हिंदू बहुल कॉलोनी के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति करता था। मगर CAA का समर्थन करने के बाद कॉलोनी के हिंदुओं को पानी की आपूर्ति नहीं की गई।
इसी तरह केरल में CAA का समर्थन करने पर राज्य भाजपा के सचिव एके नजीर की बेरहमी से पिटाई की गई। नजीर पर तब क्रूरतापूर्वक हमला किया गया, जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे। हमलावर चरमपंथी संगठन SDPI कार्यकर्ताओं ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा।
केरल में ही एक सामाजिक कार्यकर्ता को बुरी तरह से पीट दिया गया। केरल में कोल्लम ज़िले के इरुकुजुई में एक वरिष्ठ मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) को सीएए-एनआरसी अधिकारी समझकर एक मुस्लिम परिवार ने बेरहमी से पीट दिया। आशा कार्यकर्ता की पहचान महेश्वरी अम्मा के रूप में की गई, जो कि एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता भी हैं।
इसी तरह राजस्थान और पश्चिम बंगाल में दो महिलाओं को CAA और NRC से संबंधित आँकड़े जुटाने वाली समझकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। राजस्थान के कोटा में, राष्ट्रीय आर्थिक जनगणना विभाग में काम करने वाली नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय अर्थशास्त्र जनगणना 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं। जब उन्होंने भीड़ को यकीन दिलाया कि वह उनकी तरह मुस्लिम हैं, तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया।
पटना कॉलेज में एक छात्र को सिर्फ़ इसीलिए पीटा गया, क्योंकि उसने फेसबुक पर नागरिकता संशोधन क़ानून का समर्थन किया था। उसे इतना पीटा गया कि उसका सिर फट गया। पीड़ित छात्र ने इक़बाल हॉस्टल के छात्रों पर मारपीट का आरोप लगाया उसने बताया कि जब वो परीक्षा देकर लौट रहा था, तब उसपर हमला किया गया। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उसने सीएए के समर्थन में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।
मध्य प्रदेश के शाजापुर में CAA के समर्थन में निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान कुरैशी मोहल्ला के लोगों ने पथराव किया। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि ये यात्रा जैसे ही कुरैशी मोहल्ले में पहुँची, वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वहाँ हिंसा भड़क गई। पत्थरबाजी होते देख कर आसपास के दूकानदार भी सहम गए और वो अपनी-अपनी दुकानें बंद कर के वहाँ से भाग खड़े हुए। रैली पर हमले होते ही वहाँ भगदड़ मच गई।
मध्य प्रदेश में CAA के समर्थन में निकाली गई शांतिपूर्ण रैली में रायगढ़ की डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा पहुँची और प्रदर्शनकारियों को पीटना शुरू कर दिया। प्रिया वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटने के लिए कहा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर एक-दो थप्पड़ भी रसीद दिए।
AIADMK राज्यसभा सांसद ए मोहम्मद जॉन को संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर ऑल जमात फेडरेशन से निष्कासित कर दिया गया। फेडरेशन में मोहम्मद जॉन ‘संरक्षक’ के पद पर साल 2010 से आसिन थे। लेकिन 16 दिसंबर 2019 को उन्हें इस पद से यह कहकर हटा दिया गया कि कैब का समर्थन करके उन्होंने मुस्लिमों का अपमान किया है।
CAA एवं NRC के विरोध में आयोजित राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बिहार बंद के नाम पर शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को ‘हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया।’ राज्‍य में कई जगहों भारी हिंसा हुई। सबसे बड़ी घटना पटना के फुलवारीशरीफ में हुई, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हनुमान मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की
CAA के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन में 19 जनवरी कुछ कश्मीरी पंडित भी पहुँचे और कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के नारे लगाने लगे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प शुरू कर दी जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई
चेन्नई में एक स्टेशनरी के दुकानदार को इसलिए जान से मारने की धमकी मिली, क्योंकि वहाँ पर CAA-NRC के समर्थन का लेबल वाला पेन बिक रहा था। दुकान पर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई और CAA के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। इसके बाद उसे कई जगहों से धमकी भरे कॉल आने लगे।
बंगलुरु में वरुण नाम के एक व्यक्ति को सीएए के समर्थन का खामियाजा तब भुगतना पड़ा, जब कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला कर दिया। 31 वर्षीय वरुण पर सीएए के विरोधियों ने धारदार हथियार से हमला किया था। बेंगलुरु साउथ के सांसद व युवा भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि वरुण जब CAA समर्थक रैली में भाग लेकर लौट रहे थे, तब उन पर चाकू और कुल्हाड़ी से हमला किया गया।
CAA का समर्थन करने की वजह से उबर इंडिया ने पाकिस्तानी हिंदू को मजनू का टीला शरणार्थी कैम्प तक छोड़ने से इनकार कर दिया। ड्राइवर नसीम की इस करतूत के बारे में भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा ने ट्विटर पर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि नसीम को जैसे ही पता चला कि उसे अपने कैब में एक पाकिस्तानी हिन्दू को लेकर जाना है, वह वहाँ से चला गया। पाकिस्तानी हिन्दुओं ने बताया कि उबर इंडिया के ड्राइवर नसीम ने उन्हें नीचे उतरने को कहा। जैसे ही वो नीचे उतरे, वो गाड़ी लेकर फरार हो गया।
जहाँ एक तरफ CAA के विरोधी अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना रोते हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो ख़ुद विरोधी विचार रखने वाले लोगों के साथ मारपीट करते हैं। ये उनकी असहिष्णुता नहीं है तो क्या है?

मोदी के ‘India supports CAA’ को मिल रही चारों ओर प्रशंसा

सोशल मीडिया पर लोगों ने नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में अभियान चला कर उपद्रवियों व दंगाइयों को करारा जवाब दिया। ख़बर लिखे जाने तक ‘India supports CAA’ को लेकर 7 लाख ट्वीट्स किए जा चुके थे जबकि इसका विपक्ष में 50 हज़ार ट्वीट्स भी नहीं हुए थे। आम लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर सड़क पर उत्तर कर गुंडई करने वालों को जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अभियान में भाग लेते हुए सद्गुरु का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने सीएए को लेकर बातें की हैं। पीएम मोदी ने लिखा कि सद्गुरु ने सीएए के सभी पहलुओं के बारे में स्पष्टता से बात की है।
इस वीडियो में सद्गुरु ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिस तरह की हिंसा देखने को मिली है, उस हिसाब से इसे स्पष्ट करना आवश्यक है। उन्होंने विभाजन की त्रासदी की चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह दोनों तरफ के लोगों ने बड़े पैमाने पर माइग्रेट होना पड़ा। सद्गुरु ने कहा कि पकिस्तान और बांग्लादेश का गठन मजहबी आधार पर हुआ लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश रहा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और संपत्ति को छोड़ कर जाना उचित नहीं समझा। सद्गुरु ने बताया कि 1971 में बांग्लादेश गठन के समय 19-20% लोग प्रताड़ना से तंग आकर भारत में आ गए थे।
उन्होंने पाकिस्तान की चर्चा करते हुए कहा कि वहाँ का क़ानून ही भेदभाव वाला है। उन्होंने कहा कि भारत में भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं लेकिन यहाँ एक व्यक्तिगत स्तर पर हो सकता है, क़ानून में नहीं है। उन्होंने कहा कि जाति-धर्म, लिंग इत्यादि के आधार पर दुनिया में हर जगह भेदभाव होते हैं। उन्होंने कहा कि क़ानून के अनुसार, भारत के सभी लोग समान हैं। सद्गुरु ने आगे कहा:
“पाकिस्तान में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है, सभी अल्पसंख्यकों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। एक प्रोफेसर पर ईशनिंदा का आरोप लगा कर सज़ा-ए-मौत दी गई। ऐसी चीजें भारत में संभव नहीं हैं। मैं अज़रबैजान के बाकू में था, जहाँ फायर टेम्पल है। वहाँ 164 पाकिस्तानी हिन्दू पहुँचे थे। वो फायर टेम्पल 6000 साल पुराना है। प्राचीनकाल में साधना के लिए भारत के लोग वहाँ जाया करते थे, ऐसा प्रमाण मिला है। भारत के लोग बाकू के बारे में भूल गए हैं। लेकिन, पाकिस्तानी वहाँ भी जाते हैं। मैंने 164 लोगों के साथ अलग-अलग फोटोज लिए, कुल 200 से भी ज्यादा फोटोज। एक पाकिस्तानी हिन्दू युवक ने मुझे बताया कि 10-12 लोग आए और उसके साथ मारपीट की, इसके बाद वो उसकी पत्नी को उठा कर ले गए।”
सद्गुरु ने बताया कि उक्त युवक की पत्नी की शादी किसी और से कर दी गई। वो क़ानून के पास भी नहीं जा सकता था, वो अदालत में केस भी नहीं दायर कर सकता था क्योंकि पाकिस्तान में हिन्दू शादी को वैध माना ही नहीं जाता है। सद्गुरु ने बताया कि पाकिस्तान में ऐसी कई वारदातें होती हैं और उत्पीड़ित लोग दशकों से यहाँ आते रहते हैं। बकौल सद्गुरु, सीएए तो उनके लिए बहुत कम राहत है, जो काफ़ी देर से मिला। उन्होंने पाकिस्तान में मंदिरों की संख्या कम होने और तोड़े जाने की भी चर्चा की। वहीं भारत के बारे में उन्होंने कहा कि यहाँ सभी धर्मों के लोग अपनी आस्था की प्रैक्टिस करते हुए रह सकते हैं।

सद्गुरु ने समझाया कि सीएए उनलोगों के लिए नहीं है, जो दूसरे देशों से भारत में आएँगे। ये उन धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए है, जो तीन पड़ोसी इस्लामिक देशों में हुई प्रताड़ना से तंग आकर दिसंबर 2014 तक भारत में आ चुके हैं। उन्होंने समझाया कि इससे नए लोग नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश को आज़ाद किए जाने के समय 30 लाख हिन्दुओं को मार डाला गया था। उन्होंने बताया कि असम में शरणार्थियों की संख्या ज्यादा हो गई थी, जिसके बाद असम एकॉर्ड बना और घुसपैठियों को बाहर निकाले की व्यवस्था की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्होंने ये एकॉर्ड बनाया, उन्होंने ही इसे अमल में नहीं लाया।
सद्गुरु ने सीएए के ख़िलाफ़ हो रहे उपद्रव पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि इसका विरोध कैसे किया जा सकता है? उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिकता के लिए कोई भी आवेदन कर सकता है, किसी के लिए दरवाजे बंद नहीं किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन्हें भी नागरिकता मिलेगी, वो सालों से यहाँ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका विरोध किया जाना अजीब है। उन्होंने कहा कि सीएए के ख़िलाफ़ विरोध करने वाले अब कह रहे हैं कि वो पुलिस की बर्बरता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। सद्गुरु ने कहा:
“केंद्र सरकार को भी अंदाज़ा नहीं था कि इतने अच्छे क़ानून का इतने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा और इसे मुद्दा बना दिया जाएगा। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा हुई और पुलिस के साथ काफ़ी बर्बर तरीके से व्यवहार किया गया। हज़ारों लोगों ने पुलिस को पीटा, जिसके बाद बड़ी संख्या में सुरक्षा बल लगाना पड़ा। सीएए विरोधी कह रहे हैं कि वो जामिया में पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। जामिया वालों ने पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस को कैम्पस में घुसना पड़ा। हो सकता है उन्हें भी पीटा गया हो, जिन्होंने पत्थर नहीं चलाए लेकिन वो पत्थरबाजों के साथ बस बैठे हुए थे। भीड़ में ऐसा होता है। लेकिन, फिर भी पुलिस ने धैर्य दिखाते हुए गोली नहीं चलाई। लखनऊ में 56 पुलिसकर्मियों को गोली लगी। तब गोलियाँ कहाँ से आई? पुलिस पर गोली किन लोगों ने चलाई? कई लोगों ने खतरनाक खेल खेला।”
सद्गुरु ने कहा कि कुछ अनपढ़ मजहबी उन्मादियों ने हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया। अफवाह फैलाया गया कि भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता छीन ली जाएगी और उन्हें निकाल बाहर किया जाएगा। सद्गुरु ने आश्चर्य जताया कि इतने बड़े स्तर पर अफवाह फैलाया गया। सद्गुरु ने कहा कि बड़े यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों ने भी क़ानून को पढ़ने की भी जहमत नहीं उठाई और अफवाहों पर ध्यान दिया। उन्होंने पूछा कि क्या ये छात्र व्हाट्सप्प पर पीएचडी कर रहे हैं? सद्गुरु ने सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाए जाने की भी निंदा की।
सद्गुरु ने कहा कि अल्पसंख्यकों के बीच काफ़ी सुनियोजित तरीके से अफवाहें फैलाई गई। उन्होंने कहा कि अब जब उपद्रवियों की पोल खुल गई है, वो कह रहे हैं कि वो फलाँ कारण से प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान सद्गुरु ने एनआरसी को लेकर भी बातें की। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से लोगों को डेटाबेस में रजिस्टर किया जाना है। उन्होंने कहा कि ये पता होना चाहिए कि देश में कितने लोग हैं और वो कहाँ से आए हैं। उन्होंने पूछा कि जब ये नियम सबके लिए है, फिर भी इसे भेदभाव वाला क्यों बताया जा रहा है? उन्होंने कहा कि जो बोल रहे हैं कि उनके पास कोई कागज़ात नहीं हैं, फिर वो आख़िर हैं कौन?