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हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी पर कसा शिकंजा, दिल्ली में प्रॉपर्टी जब्त

Syed Ali Shah Geelani
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। आय कर विभाग ने अप्रैल 1 को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष गिलानी का दिल्ली स्थित फ्लैट जब्त कर लिया। पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों का नकेल घाटी के अलगाववादी नेताओं पर कसता जा रहा है। गिलानी का यह फ्लैट मालवीय नगर के पास खिड़की एक्सटेंशन में है। इसके साथ ही आय कर विभाग ने उनके संपत्तियों के हस्तांतरण पर भी रोक लगा दी है। गिलानी 3,62,62,160 रुपए नहीं चुका पाए हैं।
हुर्रियत नेता पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। पिछले महीने यानी मार्च में प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध रूप से 10,000 अमेरिकी डॉलर के विदेशी मुद्रा रखने के जुर्म में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर ₹14.40 लाख का जुर्माना लगाया था। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष यासीन मलिक के खिलाफ भी इस तरह की कार्यवाही होने के आसार हैं।
पीटीआई के पास उपलब्ध आदेश की प्रति के मुताबिक, यह फ्लैट दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित है और विभाग के कर वसूली अधिकारी (टीआरओ) ने 1996-97 से लेकर 2001-02 के बीच कथित तौर पर ₹3.62 करोड़ आयकर का भुगतान करने में विफल रहने पर इस घर को सील कर दिया। इसके अनुसार विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 222 के तहत यह कार्रवाई की और इसके अंतर्गत हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता द्वारा संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक रहेगी। 
गिलानी सहित हुर्रियत नेताओं पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी भावनाएं भड़काने का आरोप है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) घाटी के अलगाववादी नेताओं के खिलाफ जांच भी कर रही है। आरोप है कि हुर्रियत नेता पाकिस्तानी के इशारे पर घाटी में युवकों को भारत विरोधी गतिविधियों और सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी के लिए उकसाते हैं। 
पुलवामा में गत 14 फरवरी सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादी हमला हुआ था। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए। इस आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने अलगावादी नेताओं के खिलाफ अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। सरकार ने अलगाववादी नेताओं को दी गई सुरक्षा वापस ले ली है। सुरक्षा हटाए जाने के बाद अलगाववादी नेताओं ने कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा की मांग नहीं की थी। 
टीआरओ आयकर विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई शाखा है और यह इरादतन कर न चुकाने के मामलों से निपटती है। अधिकारी बकाया कर के भुगतान के लिए संपत्ति जब्त कर सकते हैं और आगे उसकी नीलामी भी कर सकते हैं। इस संबंध में 29 मार्च को गिलानी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया गया था। इस आवास में गिलानी के दामाद की भी हिस्सेदारी बताई जा रही है। आयकर विभाग द्वारा गिलानी के खिलाफ शिकायत करने के बाद ईडी ने जाँच शुरू की।

: Office of the Tax Recovery Officer attaches Kashmiri Separatist Syed Ali Shah Geelani's Khirki Extension, Malviya Nagar property. Prohibits him from transferring the property as he has failed to pay Rs 3,62,62,160. (file pic)
सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में कार्रवाई करते हुए कुछ समय पहले मीर वाइज उमर फारूक के घर से हॉट लाइन बरामद की। बताया गया कि मीर वाइज इस हॉट लाइन का इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से बातचीत करने के लिए करते थे। समझा जाता है कि आने वाले समय में जांच एजेंसियां गिलानी के अलावा अन्य अलगाववादी नेताओं पर कार्रवाई कर सकती हैं।

हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी पर 14.40 लाख रुपए का जुर्माना

Syed Ali Shah Geelaniजम्मू-कश्मीर के अलागवावादी नेताओं पर भारतीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घाटी के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत 14.40 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा ईडी ने 10 हजार डॉलर (करीब सात लाख रुपए) जब्त किए हैं। यह रकम साल 2002 में गिलानी के श्रीनगर स्थित आवास पर आयकर विभाग की छापे के दौरान पकड़ी गई थी। 
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 87 वर्षीय अलगाववादी नेता को फेमा के अलग-अलग प्रावधानों के तहत नोटिस भेजा था। यही नहीं ईडी जेकेएलएफ के पूर्व चेयरमैन यासीन मलिक के पास से मिली अवैध विदेशी मुद्रा को जब्त करने के साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाएगा। मलिक के खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही जारी है। बता दें कि एनआईए और अन्य एजेंसियां घाटी में टेरर फंडिंग की जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस दौरान अलगाववादी नेताओं से पूछताछ की है। 
पुलवामा में गत 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले के बाद अलगावादी नेताओं के खिलाफ भारत सरकार ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। सरकार ने अलगाववादी नेताओं को दी गई सुरक्षा वापस ले ली। सुरक्षा हटाए जाने के बाद अलगाववादी नेताओं ने कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा की मांग नहीं की थी। हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान समर्थक कहा जाता है। इन पर आरोप है कि ये घाटी में अलगाववादी भावनाओं को भड़काने के साथ-साथ सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने के लिए युवाओं को पैसे देते हैं। 
ED Sources: Enforcement Directorate will also impose a penalty and confiscate the illegal acquisition of foreign exchange recovered from Yasin Malik, former Chairman of JKLF. The adjudication proceedings against Yasin Malik are in progress
सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में कार्रवाई करते हुए कुछ समय पहले मीर वाइज उमर फारूक के घर से हॉट लाइन बरामद की। बताया गया कि मीर वाइज इस हॉट लाइन का इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से बातचीत करने के लिए करते थे।

अलगाववादियों की गिरफ्तारी पर महबूबा मुफ्ती : इंसान को कैद कर सकते हो उसके विचार नहीं

Mehbooba Mufti
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पाकिस्तान द्वारा इतने वर्षों से खेली जा रही खून की होली से जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का पाकिस्तानी प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा। ज्ञात हो विश्वनाथ प्रताप सिंह के प्रधानमंत्री काल में केन्द्रीय गृहमंत्री रहे महबूबा के पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद के कार्यकाल में आतंकवादियों पर छुड़ाने के लिए इनकी बहन रुबैया का अगवा काण्ड उन दिनों बहुत चर्चित रहा था। छद्दम देशप्रेमी नेता कंधार याद रखते हैं, लेकिन रुबैया अगवा काण्ड नहीं। आखिर वह क्या कारण है कि जब दुनिया पाकिस्तान पर नकेल डाल रही है, लेकिन इनका पाकिस्तान प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा? क्या इनकी निगाह में पाकिस्तान भक्ति भारतमाता की भक्ति से ज्यादा है? मुंबई हमले के कितने सबूत दिए थे, क्या कार्यवाही की पाकिस्तान ने? कितने वर्षों से उनका पाकिस्तान भारत की धरती को लहू-लुहान कर रहा है, कभी पाकिस्तान का विरोध क्यों नहीं किया? दूसरे हुर्रियत और अलगाववादियों को किसके इशारे पर इतनी सुरक्षा प्रदान की गयी थी? क्या कभी इस पर विचार किया? आखिर किसके इशारे पर टैक्स-पेयर्स(tax-payers) के पैसे को बर्बाद किया गया?  
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादियों पर की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। फरवरी 22 की रात जेकेएलएफ (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक को हिरासत में ले लिया गया। इसी पर महबूबा का कहना है कि किस आधार पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति को कैद किया जा सकता है, लेकिन उसके विचारों को नहीं।'
महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, 'पिछले 24 घंटों में हुर्रियत नेताओं और जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। ऐसी मनमानी चाल को समझना मुश्किल है। किस कानूनी आधार के तहत उनकी गिरफ्तारी जायज है? आप किसी व्यक्ति को कैद कर सकते हैं, लेकिन उसके विचारों को नहीं।' 
In the past 24 hours, Hurriyat leaders & workers of Jamaat organisation have been arrested. Fail to understand such an arbitrary move which will only precipitate matters in J&K. Under what legal grounds are their arrests justified? You can imprison a person but not his ideas.
पिछले हफ्ते जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने पांच अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया था। अधिकारियों ने कहा, 'इन पांच नेताओं और अन्य अलगाववादियों को किसी भी तरह का सुरक्षा कवर नहीं दिया जाएगा।' मीरवाइज उमर फारूक, शब्बीर शाह, हाशिम कुरैशी, बिलाल लोन और अब्दुल गनी भट ये पांच अलगाववादी नेता हैं जिनकी सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि, पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी का नाम सूची में नहीं है।
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 फरवरी को पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले के बाद अपनी घाटी की यात्रा के दौरान कहा था, 'जम्मू और कश्मीर में कुछ तत्वों के आईएसआई (पाकिस्तान में) और आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध हैं। उनकी सुरक्षा की समीक्षा की जानी चाहिए।'