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#Go Back Stalin… बिहार पहुँच रहे तमिलनाडु मुख्यमंत्री के खिलाफ हर जिले में विरोध प्रदर्शन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना में विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है, जिसमें शामिल होने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन भी आ रहे हैं। बता दें कि तमिलनाडु में बिहारियों की प्रताड़ना का आरोप लगा कर वीडियो शेयर करने वाले बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप को तमिलनाडु की जेल में ही रखा गया है। उन पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा दिया गया है। इसे लेकर एमके स्टालिन का बिहार में विरोध हो रहा है।

सोशल मीडिया पर भी लोग ‘Go Back Stalin’ ट्रेंड करा रहे हैं। इससे पहले नीतीश कुमार भी तमिलनाडु के पूर्व CM करुणाननिधि के मेमोरियल के उद्घाटन के लिए वहाँ जाने वाले थे, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें ये योजना रद्द करनी पड़ी। बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और जल संसाधन मंत्री संजय झा उनकी तरफ से इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। पटना में शुक्रवार (23 जून, 2023) को 20 विपक्षी दलों की बड़ी बैठक होने वाली है।

राजनीतिक विश्लेषक चंदन शर्मा ने लिखा, आप में से कितने लोगों को आज भी मनीष कश्यप याद हैं? विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए तमिलनाडु का मुख्यमंत्री स्टालिन 23 जून को बिहार आ रहा है। आपको याद करना होगा स्टालिन ने हमारे भाई मनीष कश्यप पर NSA लगाया है!” उधर ‘ब्राह्मण ऑफ भारत’ नामक ट्विटर पेज ने भी इस ट्रेंड को आगे बढ़ाया। बिहार के कई लोग स्टालिन के पटना दौरे का विरोध कर रहे हैं।

 ‘पाञ्चजन्य’ के पत्रकार रितेश कश्यप ने लिखा, “मनीष कश्यप को जेल से रिहा करने को लेकर, बिहार के लोगों ने चलाया #GoBackStalin का ट्रेंड ! आपको बता दें कि बिहार में विपक्षी एकता को लेकर महागठबंधन की बैठक की जा रही है जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन भी आ रहे हैं। बिहार के जाने-माने पत्रकार मनीष कश्यप तमिलनाडु के जेल में बंद है। उन्हीं के समर्थन मे पूरे बिहार में स्टालिन के खिलाफ आक्रोश देखा जा रहा है और यह ट्रेंड चलाया जा रहा है।”

RJJP (राष्ट्रीय जन-जन पार्टी) की गया यूनिट ने ऐलान किया कि 23 जून को स्टालिन का विरोध बिहार में जम के होना चाहिए, अगर बिहारियों को लगता है की मनीष कश्यप के साथ गलत हुआ है। ‘EWS कम्युनिटी’ नामक ट्विटर पेज ने ऐलान किया कि आशुतोष कुमार के नेतृत्व में 23 जून को बिहार के हर एक जिले और खासकर पटना में जोरदार विरोध किया जाएगा। 23 जून को स्टालिन के विरोध में बिहारवासियों का आक्रोश देखने को मिलेगा, ये तय है।

तमिलनाडु : ‘मैं हिंदी भाषियों को पीटूँगा, जल्दी ही ये सामान पैक कर भागेंगे’: प्रशांत किशोर ने वीडियो शेयर कर मुख्यमंत्री से पूछा- इन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई


राज ठाकरे द्वारा बिहारी को निकाले जाने पर सांप्रदायिक एकता के नाम पर हंगामा करने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्ष तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के विरुद्ध हंगामा करने पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? क्या तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के विरुद्ध हिंसा करने से अनेकता में एकता हो रही है? जब संविधान की कसम खाने वाले ही चुप रहेंगे, फिर कसम न खाने वाले हिंसा को बढ़ावा दे तो कोई हैरानी की बात नहीं। 

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा (Violence against Hindi Speaking People) की बात को वहाँ की स्टालिन सरकार (MK Stalin Government) दबाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। इस मुद्दे को उठाने वाले सोशल मीडिया यूजर से लेकर मीडिया संस्थानों एवं पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कर रही है। अब तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने इस मामले को उठाया है।

बिहार में राजनीतिक जमीन तलाश रहे प्रशांत किशोर ने इस मामले में शुक्रवार (10 मार्च 2023) को एक ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने स्टालिन सरकार पर सवाल उठाया और पूछा कि तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ जहर उगलने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया, “नफरत और हिंसा भड़काने के लिए फर्जी वीडियो का इस्तेमाल करने वाले लोगों से कानून के मुताबिक निपटा जाना चाहिए, लेकिन यह उन लोगों को दोषमुक्त नहीं करता है जो खुले तौर पर तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का आह्वान कर रहे हैं। सेंथामिजन सीमन जैसे उकसाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट के साथ सीमन का एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वह हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ विष उगल रहे हैं। ट्विटर प्रोफाइल के मुताबिक, सीमन ‘नाम तमिलार काटची (NTK)’ के मुख्य समन्वयक हैं। यह तमिलनाडु की एक प्रमुख पार्टी है। इसमें वे इस वीडियो में लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सेंथामिजन सीमन तमिल लोगों के एक समूह को संबोधित करते हुए कह रहे हैं, “हिंदी भाषी लोग बदहवासी में अपना सामान पैक करके यहाँ से भागेंगे। मुझे नहीं पता कि मैं कितनों को पीटूँगा। एक हफ्ते के अंदर वे अपना सामान बाँध लेंगे।”

तमिलनाडु में हिंदी भाषी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की बात वहाँ से लौट कर आए मजदूरों ने खुद सुनाई है। वे डरे हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि तमिलनाडु में स्थानीय लोगों दूसरे राज्यों से आए लोगों का नाम-पता पूछ-पूछकर पीट रहे हैं। इतना ही नहीं, वहाँ कुछ लोगों की हत्या की भी बात कही जा रही है। हालाँकि, तमिलनाडु की पुलिस हिंसा या हत्या की किसी भी बात को पूरी तरह नकार रही है।

तमिलनाडु पुलिस द्वारा हिंसा की बात नकारे जाने के बावजूद वहाँ से चोरी-छिपे लौटकर आ रहे लोग समस्या की भयावहता के बारे में बता रहे हैं। इस खबर को प्रकाशित करने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने कई पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बिहार के नेता पप्पू यादव ने पत्रकारों पर केस का विरोध किया था।

‘मुस्लिमों ने अभी तक मोदी और अमित शाह की हत्या क्यों नहीं की’: जिस कांग्रेस नेता ने कहा, उसे मुख्यमंत्री की मौजूदगी में अवॉर्ड

                                                       साभार: इंडियन एक्सप्रेस
कांग्रेस नेता और तमिल वक्ता नेल्लई कन्नन को 2021 के कामराजर कथिर पुरस्कार (Kamarajar Kathir Award) से नवाजा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की उपस्थिति में चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में शुक्रवार (24 दिसंबर, 2021) को यह अवॉर्ड प्रदान किया गया। कन्नन वही कांग्रेस नेता हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हत्या के लिए मुस्लिमों को उकसाया था। इसके बाद जनवरी 2020 में उन्हें तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था।

कन्नन के इस बयान का वीडियो पिछले साल वायरल हुआ था। वे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की रैली को तिरुनेलवेली में संबोधित कर रहे थे। यह रैली नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में बुलाई गई थी। कन्नन ने कहा था, “मुस्लिमों ने अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को क्यों नहीं मारा? अगर उनकी (अमित शाह की) कहानी खत्म हो जाती है तो पीएम की कहानी भी खत्म हो जाएगी। मैं कुछ होने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन कोई मुस्लिम ऐसा नहीं कर रहा है।”

कांग्रेस नेता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इस विवादित टिप्पणी को वहाँ पर जमा हुए मुस्लिम लोगों ने काफी सराहा भी था। लेकिन व्यापक तौर पर उनकी इस भड़काऊ टिप्पणी की निंदा की गई थी। भारतीय जनता पार्टी के तमिलनाडु प्रदेश महासचिव के एस नरेंद्रन ने कन्नन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर सेलम सेंट्रल जेल में भेज दिया गया था। हालाँकि एक हफ्ते के भीतर ही उन्हें जमानत भी मिल गई थी।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के समय में कन्नन तमिलनाडु कांग्रेस के एक प्रमुख नेता थे। 2006 में वे कुछ समय के लिए अन्नाद्रमुक में शामिल हो गए थे और उन्होंने राज्य भर में पार्टी के लिए प्रचार भी किया था। लेकिन एक साल बाद वह फिर कांग्रेस में लौट आए। 

प्रधानमन्त्री के नाम पर महागठबंधन में अभी से दरार

PM के नाम पर महागठबंधन में अभी से दरार, SP, BSP और तृणमूल जैसी पार्ट‍ियां स्‍टालिन की घोषणा से नाराज!
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
विपक्षी दलों के कई नेता 2019 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन की ओर से किसी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किये जाने के खिलाफ लगते हैं। विपक्षी खेमे के सूत्रों ने यह जानकारी दी। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘विपक्ष के कई नेता प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में किसी का नाम घोषित किये जाने के खिलाफ हैं। सपा, बसपा, तृणमूल और राकांपा स्टालिन की घोषणा से सहमत नहीं है। उनके अनुसार यह जल्दीबाजी है। लोकसभा परिणामों के बाद ही प्रधानमंत्री का निर्णय होगा।’
विपक्षी खेमे की प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को विपक्ष के प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी होना चाहिए, क्योंकि उनमें भाजपा को शिकस्त देने की क्षमता है। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने दिसम्बर 16 को राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए उनका पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि गांधी वंशज में ‘फासीवादी’ नरेन्द्र मोदी सरकार को हराने की क्षमता है।
वीडियो देखिए:--
https://www.facebook.com/Wesupportbhagwa/videos/1166809530155397/
वैसे भी प्रधानमन्त्री के मुद्दे पर किसी भी दल का प्रधानमंत्री पद पर राहुल गाँधी के नाम अपना समर्थन देने पर राहुल गाँधी भी कई बार कह चुके हैं कि जिस पार्टी की सबसे ज्यादा सीटें होंगी, उसी पार्टी से प्रधानमन्त्री होगा।लेकिन हर पार्टी प्रमुख प्रधानमन्त्री की दौड़ में अपने आपको आगे रखने में व्यस्त है।   
अवलोकन करें:--
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अकेला मोदी, सब पर भारी आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 2019 में नरेन्द्र मोदी को मात देने को हर कोई लगा हुआ है, लेकिन अपने अ...

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
कहते हैं कि दिल्ली की मीडिया का एक बड़ा तबका आज भी गांधी परिवार के साथ अपनी वफादारी निभा रहा है। लगता है कि ये वफादा.....


सीपीआई ने भी स्‍टाल‍िन की बात नहीं द‍िया जवाब
हालांकि डीएमके द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए सीपीआई के डी राजा ने स्‍टालिन की घोषणा से पूरी तरह सहमति नहीं जताई। उन्‍होंने कहा, अभी सारी पार्टियों को इस पर विचार करने की जरूरत है। आने वाले दिनों में इस पर और तस्‍वीर साफ हो सकती है।
एक चेहरा घोष‍ित करने के पक्ष में नहीं
हालांकि इतना तय है कि महागठबंधन में अब भी सभी दल किसी एक नाम पर सहमत नहीं हैं। कुछ दिन पहले फारुख अब्‍दुल्‍ला जैसे नेताओं की ओर से कहा गया था कि महागठबंधन में कोई एक चेहरा नहीं है। हम अपना चेहरा चुनावों के बाद तय कर लेंगे। इसके अलावा शरद यादव भी कह चुके हैं कि महागठबंधन में अभी चेहरे की कोई लड़ाई नहीं है। लेकिन ममता बनर्जी और मायावती जैसी दि‍ग्‍गज नेता कांग्रेस की सरपरस्‍ती स्‍वीकार करने के लि‍ए तैयार नहीं हैं।
फारूख अब्दुल्ला की बात मानी जाए तो जनता यह भी जानना चाहेगी कि जब गठबंधन में प्रधानमन्त्री योग्य कोई नेता नहीं, फिर किस आधार पर गठबंधन को वोट देकर पुनः मतदान प्रक्रिया में जाकर देश का धन व्यर्थ करने से क्या लाभ? गंभीरता से मन्थन करने पर फारूख की बात में बहुत वजन हैं, जिसे नज़रअंदाज़ करना देश के साथ अन्याय करना होगा। यानि जनता किसी ऐसे-वैसे को वोट देकर अपना समय और वोट ख़राब नहीं करना चाहेगी। 
कांग्रेस के लिए इन तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में सरकार बनाना 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले काफी अच्छे संकेत के रूप में आए हैं। इसलिए पार्टी ने तीनों ही जगहों पर होने वाले शपथ ग्रहण के लिए सभी विपक्षी दलों को न्योता भी भेजा है। लेकिन अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए समाजवादी और बहुजन समाजवादी द्वारा सम्मिलित न होना महागठबंधन के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि शहर बसने से पहले ही लुटेरे, चील, कौए और गिद्ध विराजमान हो गए हैं।