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केरल से लेकर बंगाल तक हार मिलने पर भी कांग्रेस में जश्न

जिस पार्टी का नायक अपनी पार्टी की हो रही हार पर चिन्ता करने की बजाए अपने विरोधी की हार पर जश्न मनाए, उस नायक को क्या नाम दिया जाना चाहिए, आप ही निर्णय कर सकते हैं। इन जिन राज्यों में कभी कांग्रेस की तूती बोलती थी,वहां ही धरातल में चली गयी है। हैरानी, तो पार्टी के बुद्धिजीवी वर्ग पर भी होती है, जो नायक को पार्टी को उठाने पर मंथन करने के लिए सलाह दे।   
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को करारी हार मिली है, यानि एक तरह से पार्टी का सफाया हो गया है। पश्चिम बंगाल में पहली बार कांग्रेस खाता नहीं खोल सकी है। लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी की जीत पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी खुशी मना रहे हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ममता बनर्जी को जीत के लिए बधाई दी है। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी को हराने के लिए मैं ममता बनर्जी जी और पश्चिम बंगाल के लोगों को बधाई देता हूं।

राहुल गाँधी ममता को बधाई देने से पूर्व भाजपा उम्मीदवारों की हार का अंतर देखना भूल गए, जो तृणमूल कांग्रेस के लिए भी अच्छे संकेत नहीं। इस बार व्हीलचेयर के कारण सहानुभूति के कारण ममता इतनी सीटें लेने में सफल रही, अन्यथा सत्ता तो निकल गयी थी। ऐसा कौन-सा फ्रैक्चर है, जो मतदान पूरा होने के बाद ठीक हो जाए। अगर ममता ने छठे दौर से पहले व्हीलचेयर छोड़ दी होती, परिणाम विपरीत होते, और फिर दौर शुरू होता EVM पर प्रहारों का।   

राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में बीजेपी की हार पर खुशी मना रहे हैं। जबकि राज्य में बीजेपी को फायदा ही हुआ है। पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 3 सीटें मिली थी जबकि इसबार पार्टी को 77 सीटें मिली है, जो पहले से 74 ज्यादा है। पुडुचेरी में भी बीजेपी 0 से 6 पर पहुंचकर गठबंधन सरकार बनी रही है। इसी तरह पार्टी असम में 60 सीटें जीतकर एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है, जबकि तमिलनाडु से 0 से 4 पर पहुंच गई है। बीजेपी के लिए तो फायदे की बात है। लेकिन राहुल इसे बीजेपी की हार बता रहे हैं। अब आप कांग्रेस की हकीकत देखिए…

पश्चिम बंगाल सहित असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में कई रैलियां की लेकिन वे पार्टी की हार का सिलसिला नहीं रोक सकें।

असम में कांग्रेस को सिर्फ 29 सीटें, केरल में 21 सीटें, तमिलनाडु में 18 सीटें और पुडुचेरी में सिर्फ 2 सीटें मिली हैं। पश्चिम बंगाल में तो पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी। कांग्रेस यहां पहली बार विधानसभा नहीं पहुंची है। इसे आप कांग्रेस का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन मान सकते हैं। पश्चिम बंगाल में तो पार्टी को लेफ्ट के साथ गठबंधन से भी कोई फायदा नहीं मिला।

राज्यकुल सीटें कांग्रेस
पश्चिम बंगाल2920
पुडुचेरी302
तमिलनाडु23418
असम12629
केरल14021

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सबसे ज्यादा प्रचार केरल में किया। अमेठी से हार का स्वाद चखने वाले राहुल गांधी केरल के वायनाड से सांसद हैं और उन्होंने अपना पूरा जोर केरल पर लगा रखा था। राहुल ने राज्य में कई रोडशो भी किए लेकिन वे एक बार फिर फेल साबित हुए। राहुल यूडीएफ के साथ मिलकर भी पी विजयन को मात नहीं दे सके। कांग्रेस यहां किसी तरह 21 सीटें जीत पाई।

असम में राहुल के साथ प्रियंका वाड्रा ने भी हर तरीके आजमाएं। दोनों ने जमकर प्रचार किए। चाय बागान और मंदिर भी गए, लेकिन सत्ता के नजदीक पहुंच नहीं पाए। पार्टी राज्य में 126 में से सिर्फ 29 सीटें जीत पाई। यहां बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के साथ तालमेल का फॉर्मूला भी काम ना कर सका। गांधी परिवार के साथ पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी यहां पूरा जोर लगाया, लेकिन कोई फायदा ना मिला। यहां के मतदाताओं पर राहुल के साथ प्रियंका का भी जादू नहीं चला।

कांग्रेस केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है। यहां पार्टी को भारी नुकसान हुआ है। कांग्रेस यहां 2 सीट पर सिमटकर रह गई है। इस हार से राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय पार्टियों के आगे कांग्रेस कहीं टिक नहीं रही है। ऐसे में ममता की जीत पर राहुल गांधी के खुश होने को तो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ही कह सकते हैं।

ABP-C Voter का ओपिनियन पोल : असम-पुडुचेरी में BJP की सरकार, बंगाल में 5% वोट से बिगड़ रही बात, ममता तीसरी बार

चुनाव आयोग द्वारा तारीखों के ऐलान के साथ ही 5 राज्यों में आचार संहिता लागू हो चुकी है और खास बात ये है कि भाजपा इस बार पाँचों राज्यों में शीर्ष 2 की लड़ाई में है। ये वो राज्य हैं, जहाँ 2014 से पहले पार्टी के लिए खाता खोलना भी मुश्किल होता था। इसी बीच एबीपी न्यूज और सी-वोटर ओपिनियन पोल ने सर्वे किया है, जिसके आधार पर दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में तीसरी बार ममता बनर्जी की सरकार बनती दिख रही है।

इस ओपिनियन पोल के हिसाब से कुल 294 सीटों में वोट प्रतिशत की बात करें TMC को 43% वोट, बीजेपी को 38% वोट मिल सकता है। वहीं कांग्रेस-वामपंथी गठबंधन को 13% वोट मिल सकता है। दूसरे अर्थों में कहा जाए कि इतने वर्ष राज करने वाली कांग्रेस और वामपंथी धरातल में जा रहे हैं। अन्य के खाते में 6% वोट जाने की संभावना जताई गई है।

ममता बनर्जी की पार्टी TMC को 148-164 सीटें आने की संभावना जताई गई है। भाजपा यूँ तो तो 200 का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरी है, लेकिन उसे 92-100 सीट मिलने की संभावना जताई गई है।

इस सर्वे के हिसाब से कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन लड़ाई में भी नहीं है और उसे 31-39 सीटें ही मिलने की संभावना है। बताते चलें कि 34 साल तक सत्ता में रहे वामदलों के गठबंधन को हराकर TMC ने 2011 में 294 सीटों में से 194 सीटें हासिल की थी।

2016 के विधानसभा चुनाव में TMC और मजबूत हुई और कुल 211 सीटों पर उसका कब्ज़ा हुआ। बंगाल में किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 148 सीटों के जादुई आँकड़े की जरूरत होती है।

सर्वे की मानें तो केरल में CPI(M) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के खाते में इस बार 83-91 सीटें जाने की संभावना है और कांग्रेस की अगुवाई वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को मात्र 47 से 55 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। इस तरह से पिनाराई विजयन दोबारा मुख्यमंत्री बन सकते हैं। LDF को 40% और UDF को 33% वोट्स मिलने की संभावना जताई गई है।

असम में भाजपा के लिए अच्छी खबर है और सत्ता में उसकी लगातार दूसरी बार वापसी होती दिख रही है। भाजपा गठबंधन का वोट प्रतिशत 42% होने का अनुमान लगाया गया है और उसे 126 सदस्यीय विधानसभा में 68-76 सीटें मिलते दिखाया गया है। हालाँकि, कांग्रेस यहाँ 31% वोट्स पाकर 43-51 सीटें झटक सकती है। 30 सीटों वाली पुडुचेरी में भी भाजपा 36% वोट शेयर और 17-21 सीटें जीत कर सरकार बना सकती है।

बात दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की करें तो वहाँ DMK गठबंधन को आगे बताया गया है। इस सर्वे की मानें तो AIADMK और भाजपा के गठबंधन को जहाँ महज 29% वोट ही मिलेंगे, वहीं स्टालिन की अगुआई वाली कांग्रेस और DMK गठबंधन को 41% वोट मिलेंगे। सीटों की बात करें तो 154-162 सीटें पाकर स्टालिन मुख्यमंत्री बन सकते हैं, वहीं मौजूद सत्ताधारी गठबंधन को 58-66 सीटों से संतोष करना पड़ेगा।

उधर सीएम ममता ने कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव होगा। बीजेपी के कहने पर ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि बंगाल पर बंगाली ही राज करेगा, किसी बाहरी को घुसने नहीं दिया जाएगा। ममता बनर्जी ने कहा, ”क्या केंद्र के निर्देश पर तारीखों का ऐलान किया गया है? जिलों को 2 भागों में क्यों बाँटा गया है? हमारा अनुरोध है कि पैसे की बर्बादी बंद की जाए। हम जमीनी नेता हैं और स्थानीयों की परेशानी से वाकिफ हैं।”