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विनेश फोगाट पर कांग्रेस की राजनीति को उनके ताऊ ने किया फुस्स, कहा- भूपेंद्र हुड्डा ने CM रहते बबीता-गीता के साथ किया भेदभाव, आज राज्यसभा की कर रहे बात

                                 भूपेंद्र फोगाट के बयान पर बोले महावीर फोगाट
ओलंपिक में वजन ज्यादा होने के कारण अयोग्य करार दी गईं विनेश फोगाट के मुद्दे पर विपक्ष जमकर राजनीति कर रहा है। इसी क्रम में हरियाणा के पूर्व सीएम हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अगर उनकी सरकार होती तो वो विनेश को राज्यसभा में सीट देते। अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के इसी बयान पर विनेश फोगाट के ताऊ और गीता फोगाट व बबीता फोगाट के पिता महावीर फोगाट ने करारा जवाब दिया है।

उन्होंने समाचार एजेंसियों से बात करते हुए कहा, “2005 और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता ने गोल्ड मेडल लिया था और बबीता ने सिल्वर मेडल लिया था। पहली महिला पहलवान थी जिन्होंने हिंदुस्तान की तरफ से ये मेडल लिया। इसके बाद 2012 में गीता ने बतौर पहली महिला ओलंपिक क्वालीफाई किया था। जब भूपेंद्र हुड्डा की सरकार और गीता और बबीता को DSP का पद मिलना था लेकिन हुड्डा साहब ने भेदभाव करके गीता को इंस्पेक्टर और बबीता को सब इंस्पेक्टर लगाया।”

बता दें कि विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक 50 किग्रा कुश्ती स्पर्धा के फाइनल से पहले वजन अधिक पाए जाने के कारण बुधवार (8 अगस्त 2024) को ओलंपिक से अयोग्य घोषित किया गया था। इसके बाद पूरा देश उनके साथ खड़ा हुआ। इस बीच हरियाणा सरकार ने ऐलान किया कि वो विनेश को वो सारे सम्मान देगी जो मेडल आने पर खिलाड़ी को दिए जाते हैं।

‘बखिया उधेड़ देंगे आपकी’ : पतंजलि मामले में जस्टिस अमानुल्लाह की टिप्पणी पर बवाल, पूर्व न्यायधीशों ने याद दिलाई शब्दों की गरिमा


भ्रामक प्रचार करने के आरोप में पतंजलि और बाबा रामदेव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई चर्चा में है। कारण है जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की सख्त टिप्पणी। 10 अप्रैल को बाबा राम देव और पतंजलि के एमडी बाल कृष्ण द्वारा जब बिन शर्त के लिए माफी माँगने के लिए हलफनामा दायर किया गया तो कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने उत्तराखंड के राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था- “हम आपकी बखिया उधेड़ देंगे।”

जस्टिस अनानुल्लाह की टिप्पणी से अब पूर्व जज नाराज हैं। उनका कहना है कि अदालती कार्यवाही ने संयम के मानदंड स्थापित किए हैं, लेकिन जो भाषा जस्टिस ने सुनवाई के समय प्रयोग की वो सड़क पर मिलने वाली धमकी जैसी है। पूर्व जजों और पूर्व मुख्याधीशों ने सलाह दी है कि जस्टिस अमानुल्लाह को खुद को आवश्यक न्यायिक आचरण से परिचित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो निर्णयों को देखना अच्छा होगा। ये कृष्णा स्वामी बनाम भारत संघ (1992) और सी रविचंद्रन अय्यर बनाम जस्टिस ए एम भट्टाचार्जी (1995) ) केस हैं।

कृष्णा स्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संवैधानिक अदालत के जजों का आचरण समाज में सामान्य लोगों से कहीं बेहतर होना चाहिए। न्यायिक व्यवहार के मानक, बेंच के अंदर और बाहर दोनों जगह, सामान्य रूप से ऊँचे होते हैं… ऐसा आचरण जो चरित्र, अखंडता में जनता के विश्वास को कमजोर करता है या जज की निष्पक्षता को कम बनाता है, उसे त्याग दिया जाना चाहिए। जज से यह अपेक्षा की जाती है कि वह स्वेच्छा से उच्च जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्तता की पुष्टि करते हुए आचरण के संपूर्ण मानक स्थापित करेगा।

दूसरा मामला, रविचंद्रन केस का है जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “न्यायिक कार्यालय मूलतः एक सार्वजनिक ट्रस्ट है। इसलिए, समाज यह उम्मीद करने का हकदार है कि एक न्यायाधीश उच्च निष्ठावान, ईमानदार व्यक्ति होना चाहिए और उसके पास नैतिक शक्ति, नैतिक दृढ़ता और भ्रष्ट या द्वेषपूर्ण प्रभावों के प्रति अभेद्य होना आवश्यक है। उससे न्यायिक आचरण में औचित्य के सबसे सटीक मानक रखने की अपेक्षा की जाती है। कोई भी आचरण जो अदालत की अखंडता और निष्पक्षता में जनता के विश्वास को कमजोर करता है, न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावकारिता के लिए हानिकारक होगा…”

जस्टिस अमानुल्लाह की तरह 2005 में जस्टिस बीएन अग्रवाल की पीठ ने भी ऐसी टिप्पणी की थी। उस समय बिहार के तत्कालीन राज्यपाल, वरिष्ठ राजनेता बूटा सिंह, बार-बार बेदखली के आदेशों की अनदेखी करते हुए, दिल्ली में एक सरकारी बंगले पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर रहे थे। तब जज ने कहा था, “बिहार के राज्यपाल दिल्ली में बंगला लेकर क्या कर रहे हैं? उन्हें यहां बंगला आवंटित नहीं किया जा सकता। उन्हें बाहर फेंक दीजिए।” इसके अलावा नुपूर शर्मा वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और पारदीवाला ने कहा था कि नूपुर शर्मा की ‘फिसली जुबान’ ने पूरे देश में आग लगा दी है और उन्हें पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए।

पाकिस्तानी, हुडदंगी, घुसपैठिए, इनको जेल में डालो… केजरीवाल ने ‘पीड़ितों’ के जख्मों पर फिर रगड़ा नमक

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वाली आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के खिलाफ आज (15 मार्च 2024) फिर पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी शरणार्थी सड़कों पर उतरे। उन्होंने हाथ में पोस्टर और तिरंगा लेकर AAP और कॉन्ग्रेस का विरोध किया। इसे देखते हुए अरविंद केजरीवाल की एक और बार सख्त टिप्पणी आई है।

अरविंद केजरीवाल ने सड़कों पर प्रदर्शन करते शरणार्थियों को देख अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “इन पाकिस्तानियों की हिम्मत? पहले हमारे देश में गैर कानूनी तरीके से घुसपैठ की, हमारे देश का क़ानून तोड़ा। इन्हें जेल में होना चाहिए था। इनकी इतनी हिम्मत हो गई कि हमारे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, हुडदंग कर रहे हैं? CAA आने के बाद पूरे देश में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी फैल जाएँगे और लोगों को परेशान करेंगे। बीजेपी इन्हें अपना वोट बैंक बनाने के स्वार्थ में पूरे देश को परेशानी में धकेल रही है।”

केजरीवाल ने यह टिप्पणी पीटीआई द्वारा साझा की गई वीडियो पर की। इसमें सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को विरोध करते देखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास करती दिख रही है। सामने आई वीडियो कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर के पास की है। यहाँ प्रदर्शन करने आई एक महिला को कहते सुना जा सकता है- “हम अरविंद केजरीवाल, राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, ये लोग क्यों हमारे अधिकार छीनना चाहते हैं जब पीएम हमें दे रहे हैं।”

विपक्षी नेताओं का विरोध

जब से मोदी सरकार ने सीएए को लेकर अधिसूचना जारी की है उसके बाद से कॉन्ग्रेस नेता और आप नेता समेत बाकी विपक्षी दल भी इसके विरोध में टिप्पणियाँ कर रहे हैं। हाल में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CAA को भेदभावपूर्ण था। उन्होंने कहा था कि सीएए भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों और भावना के खिलाफ है। चुनाव से ठीक पहले अधिसूचित CAA नियम दर्शाता है कि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति को लेकर कितनी सजग है।
वहीं AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर सीएए लागू होगा तो देश में अंधाधुंध लोग आएँगे, जैसा कि स्वतंत्रता के बाद हुआ था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और चोरियाँ, डकैतियाँ और बलात्कार आदि होंगे।
इन्हीं बयानों के बाद कल भी पाकिस्तान से आए शरणार्थी सड़कों पर उनके विरोध में उतरे थे। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के समर्थन में नारे लगाए थे और सीएम केजरीवाल को कहा था कि वह सीएए पर भ्रम न फैलाएँ, जनता को सच बताएँ। केजरीवाल के इसी बयान के विरोध में गृहमंत्री अमित शाह ने भी उनसे कहा था कि वो हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध के खिलाफ बोलते हैं मगर कभी रोहिंग्याओं के खिलाफ नहीं कहा।

केरल : नाथूराम गोडसे के लिए किया कमेन्ट तो प्रोफ़ेसर पर हो गई FIR, सच्चाई से घबराते तुष्टिकरण करने वाले

                                                                                                                               साभार: NIT-C
केरल के कोझिकोड में एक महिला प्रोफ़ेसर पर नाथूराम गोडसे के समर्थन में कमेन्ट करने पर FIR हो गई है। केरल के कोझिकोड की पुलिस ने उनके विरुद्ध दंगा भड़काने की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। उनके खिलाफ केरल के वामपंथी छात्र संगठन ने FIR दर्ज करवाई है।
यह कार्यवाही इस बात को शत-प्रतिशत सिद्ध कर रही है कि छद्दम धर्म-निरपेक्षों और तुष्टिकरण करने वालों ने कितनी भ्रांतियां फैलाई हुई थी/हैं कि सच्चाई सुनने को तैयार नहीं। गोडसे विरोधियों को मालूम होना चाहिए कि जस्टिस खोसला ने गोडसे को उनके 150 बयान पढ़ने के लिए माइक और लाउड स्पीकर की इजाजत दी थी, जो आज तक विश्व रिकॉर्ड हैं। सेवानिर्वित होने के बाद एक पाक्षिक को सम्पादित करते शीर्षक "गोडसे ने गाँधी को मारा क्यों?" शृंखला प्रकाशित की थी।(सामने देखिए पृष्ठ) अवलोकन कीजिए नीचे दिए लिंक।  
दूसरे, अगर गोडसे ने गाँधी को मार अपराध किया है, फिर क्यों तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को सार्वजनिक होने पर क्यों प्रतिबन्ध लगाया था? गोडसे विरोधियों को यह भी मालूम होना चाहिए कि परिवार ने आज तक गोडसे की अस्थियों को सुरक्षित रखा हुआ है। गोडसे ने कहा था कि "अखंड भारत होने पर सिंधु नदी में विसर्जन किया जाए।" 
अवलोकन करें:-
महात्मा गाँधी प्रेमियों को गोडसे के 150 बयान घर-घर बंटवाने में क्या आपत्ति है?
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
महात्मा गाँधी प्रेमियों को गोडसे के 150 बयान घर-घर बंटवाने में क्या आपत्ति है?
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार "I have however no doubt that had the audience of that day been constituted into a jury and entrusted with...

क्या महात्मा गांधी जन्मजात हिन्दू विरोधी थे ?
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क्या महात्मा गांधी जन्मजात हिन्दू विरोधी थे ?
आज देश नहीं बल्कि तुष्टिकरण पुजारी महात्मा गांधी जयंती मना रहे है। आप जानते ही होंगे कि महात्मा गांधी ने आजादी में...

जब मोपला में हुआ हिंदुओं का नरसंहार, तब गाँधी पढ़ा रहे थे खिलाफत का पाठ

जब अंबेडकर ने गाँधी के लिए कहा था- बगल में छुरी मुँह में राम, ‘हत्या’ को देश के लिए बताया था ‘अच्छ

जिन महिला प्रोफ़ेसर के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है, वह नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) कालीकट में वरिष्ठ प्रोफ़ेसर हैं। उनका नाम शैजा अन्दावन है। वह NIT में मैकेनिकल इंजीयनियरिंग विभाग में पढ़ाती हैं। उन्होंने 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या की बरसी पर एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। पोस्ट में नाथूराम गोडसे को भारत में अनेकों लोगों का नायक बताया गया था। इसमें उन्होंने नाथूराम गोडसे का समर्थन किया था।

उन्होंने एक पोस्ट पर कमेन्ट किया, “भारत को बचाने के लिए गोडसे पर गर्व है।” यह पोस्ट गोडसे के समर्थन में किया गया था। उनके इस कमेन्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया। हालाँकि, उन्होंने यह कमेन्ट बाद में हटा दिया। यह पोस्ट एक हिंदूवादी वकील कृष्णा राज की पोस्ट पर किया गया था। जब प्रोफ़ेसर अन्दावन से इस सम्बन्ध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह यूनिवर्सिटी में विवाद नहीं पैदा करना चाहती, इसलिए उन्होंने कमेन्ट हटा दिया।

कमेंट डिलीट करने के बावजूद उनके खिलाफ वामपंथी छात्र संगठनों ने दो FIR दर्ज करवा दी। उनके खिलाफ राजद्रोह की धाराओं में मामला दर्ज करवाया गया है। वामपंथी छात्र संगठनों का प्रोफ़ेसर पर आरोप है कि उन्होंने इस कमेन्ट के जरिए द्वेष फैलाने का प्रयास किया। इन संगठनों ने उन्हें NIT से निष्कासित करने की माँग की है। केरल के कोझिकोड से कॉन्ग्रेस सांसद एमके राघवन ने NIT के डायरेक्टर को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

प्रोफ़ेसर शैजा अन्दावन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, “मेरा कमेन्ट गाँधीजी की हत्या की प्रशंसा करना नहीं था और ना ही मैं कभी ऐसा करना चाहती थी। मैंने गोडसे की ‘मैंने गाँधी को क्यों मारा’ किताब पढ़ी है। इस किताब में कई खुलासे और जानकारियाँ हैं, जो कि आम लोगों को नहीं पता। गोडसे ने इस किताब में हमें वह बताया है। मैंने इसी सम्बन्ध में फेसबुक पर डाली गई एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। जब मैंने देखा कि लोग मेरे कमेन्ट का गलत मतलब निकाल रहे हैं, तो मैंने वह हटा दिया।”

हाल ही में NIT कोझिकोड में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एक विरोध में एक छात्र ने यहाँ पूरे कैम्पस में पोस्टकार्ड लहराए थे, जिसके बाद विवाद हो गया था। उसने यहाँ कुछ छात्रों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाए जाने का विरोध किया था।

नव्वा (नौंवी) फेल आदमी हैं। क्रिकेट खेलने गए तो वहाँ पानी ढोते थे… प्रशांत किशोर ने बताई तेजस्वी यादव की ‘पहचान’

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों पदयात्रा पर हैं। इस दौरान वो लोगों के बीच जाकर उनसे बात करके उन्हें जात-पात से ऊपर उठकर वोट करने को कहते हैं। हाल में उन्होंने इसी क्रम में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भी टिप्पणी की।

उन्होंने 16 नवंबर 2023 को बयान देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव की पहचान क्या है? वो नव्वा (नौंवी) फेल आदमी हैं। क्रिकेट खेलने गए तो वहाँ पानी ढोते थे। कौन सा ऐसा बड़ा पराक्रम कर दिया। लालू के लड़के हैं इसलिए सब लोग जानते हैं।

नव्वा (नौंवी) फेल को वोट देने वाले शिक्षित भी किसी अशिक्षित से कम नहीं। चलो तेजस्वी नव्वा (नौंवी) फेल है, तो क्यों जनता ने उसे वोट दिया? क्या अशिक्षित शिक्षित पर राज करेगा? जब जनता ही ऐसे लोगों को अपना नेता मानेगी किसी को दोष देना व्यर्थ है? जेल जाने से पहले लालू यादव द्वारा अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री को बनाना बिहार के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं था, यानि जो मुख्यमंत्री शपथ तक न पढ़ सके, क्या मुख्यमंत्री पद का घोर अपमान नहीं था? जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री ही अशिक्षित हो प्रदेश का क्या चलाएगा? 

पत्रकारों से बात करते हुए वह बोले- इन लोगों को क्या मतलब है इन चीजों से। गया उलूल-जुलूल बकवास किया, लोगों को जाति धर्म में बाँटा… पैसा वसूल करके लोगों को धर्म में बाँटा। जाति के नाम पर लोग गरीबी में मजबूरी में वोट दे देते हैं। उसके बाद नेता बनकर ज्ञान दे रहा है।

प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव के जीडीपी वाले बयान पर इतनी तल्ख प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभी आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि महाज्ञानी उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीडीपी तो सबसे ज्यादा बिहार की है। प्रशांत किशोर बोले- “तेजस्वी को तो यही नहीं पता कि जीडीपी क्या है? बिना कागज देखे अगर वो इसकी परिभाषा बता दें तो हम ये काम छोड़कर तेजस्वी यादव का झंडा ले लेंगे। या बिना कागज देखे जीडीपी की फुल फॉर्म ही लिख दें तो हम मान जाएँगे।” इसके बाद उन्होंने तेजस्वी पर नौंवी फेल वाली टिप्पणी की।

प्रशांत किशोर का बयान आने के बाद शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को लालू प्रसाद यादव की बेटी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और अपना गुस्सा जाहिर किया। रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में लिखा- “ये है कौन? इसको कोई पहचानता भी है। ये भी किसी को बाबू जी बना ले, ताकि किसी का राजनीतिक वारिस बन सके। ये जो कह रहा है वो अपना बाप अपनी दुकानदारी एवं अपने फायदे के हिसाब से समय-समय पर बदलते रहता है।”

रोहिणी आगे लिखती हैं- “कभी मोदी-शाह इसके बाबू जी, कभी पवन वर्मा-नीतीश कुमार इसके बाबू जी। कभी राहुल गाँधी इसके बाबूजी, कभी अभिषेक बनर्जी इसके बाबूजी, कभी जगन रेड्डी इसके बाबूजी तो कभी स्टालिन इसके बाबूजी…अभी फिर से इसने सबसे पहले वालों को अपना बाप बना रखा है सिर्फ नाम नहीं उजागर कर पा रहा है। भाजपा की दलाली करता है इसलिए मीडिया की कृपा दृष्टि इस पर बना रहता है। वरना गली का कुत्ता भी इसको भाव ना दे और चला है तेजस्वी पर कीचड़ उछालने।”

तेजस्वी यादव के अलावा प्रशांत किशोर ने राहुल गाँधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा-राजीव गांधी के लड़के हैं राहुल गाँधी इसलिए वह कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं।
आपके बाबू जी की पार्टी है तो कोई भी नेता बन जाएगा। बाबूजी की दुकान है तो कोई भी जाकर बैठ जाएगा और मालिक हो जाएगा। इसमें आपकी योग्यता क्या है?