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केजरीवाल के पक्ष में जारी किया फतवा


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अपने को तथाकथित सेक्युलर कहलाने वाले सियासी दल चुनाव के समय अपने पक्ष में फतवा जारी करवाना जरूरी समझते हैं, क्योंकि मुसलमानों के ध्रुवीकरण से उन्हें सियासी फायदा होता है। हर चुनाव में उलमा और मुस्लिम संगठनों के फतवे सुर्खियां बनते हैं। इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए मुख्य रूप से मुस्लिमों के कट्टरपंथी संगठन पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने फतवा जारी किया है।
अक्सर फतवों के बारे में पहले भी कई बार लिखा जा चूका है कि फतवों की राजनीती का चुनाव आयोग को संज्ञान लेकर कोई सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। एक तरफ पार्टियां अपने आपको समाजवादी, धर्म-निरपेक्ष कहती हैं, फिर किस आधार पर फिरकापरस्ती के कंधे चुनाव जीतने का प्रयास करते हैं? यह इस बात को भी प्रमाणित करता है कि फतवों की राजनीती करने वाले सबसे बड़े साम्प्रदायिक हैं और इन फतवों के सहारे चुनाव जीतने वाले उनसे भी बड़े साम्प्रदायिक। इसका मतलब है कि ये सभी छद्दम धर्म-निरपेक्ष 'गंगा-यमुना तहजीब' के नाम पर हिन्दुओं को पागल बनाते हैं। 
बीजेपी को हराने का फतवा
पीएफआई के महासचिव अनीस अहमद ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में फतवा जारी किया है। उन्होंने कहा कि हम हर विधानसभा में जाकर लोगों से बीजेपी को हराने वाले सेक्युलर दल को जीताने की अपील कर रहे हैं।  पीएफआई पर ही सीएए के खिलाफ पूरे देश में हिंसा फैलाने का आरोप लगा है। आप भी सुन लीजिए केजरीवाल के समर्थन में क्या कहा जा रहा है।
मुसलमान करेंगे केजरीवाल का समर्थन
मुस्लिम नेता हाफिज गुलाम सरवर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि केजरीवाल जी ने साफ शब्दों में कहा कि मैं काम के नाम पर वोट मांगता हूं मेरे विधायक ने जहां काम किया है, वहां वोट दें। ये मैटर साफ हो गया। इसी तरह का ऐलान होना चाहिए था। हम लोग इसका समर्थन करते हैं।
बीजेपी के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काने में लगे हैं उलेमा
शाहीन बाग में कुछ मुस्लिम नेता लोगों को भड़काते नजर आए। उनके मुताबिक फैसला शाहीन बाग से हो चुका है। ये तीन प्रतिशत आरएसएस के लोग इस देश को नहीं बदल सकते, हम बदल सकते हैं। ऐसे आतंकवादी और हत्यारे इस तरह से शासन में आए और ये पहले भी आ रहे थे। 
शाहीन बाग प्रदर्शनों के पीछे पीएफआई की साजिश
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को शाहीन बाग प्रदर्शनों के तार पीएफआई से जोड़ने वाले कुछ सबूतों का पता चला है। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सामने आने वाली इस सूचना का संबंध पीएफआई के साथ आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं के साथ भी है।
संजय सिंह का पीएफआई से संबंध- ईडी
ईडी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने पीएफआई का कुछ अन्य संगठनों के साथ संबंधों का पता लगाया है, जिसमें आम आदमी पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के नाम भी शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के अनुसार PFI का मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में है, जहां प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के लिए लाखों रुपये जमा किए जाते हैं। ईडी के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि दिल्ली के पीएफआई अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद लगातार आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और उदित राज समेत कांग्रेस के कई नेताओं  से संपर्क में बने हुए हैं। 
 देखिए वीडियो…
परवेज अहमद ने की संजय सिंह से निजी मुलाकात
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने दावा किया है कि जांच में सामने आया है कि परवेज अहमद केवल सीएए विरोधी गतिविधियों में ही शामिल नहीं था बल्कि आम आदमी पार्टी के संजय सिंह से निजी मुलाकात, फोन कॉल व व्हाट्सएप चैट के जरिए संपर्क में बना हुआ था।
PFI के शाहीन बाग स्थित मुख्यालय को मिला डोनेशन 
ईडी सूत्रों ने पाया कि 120.5 करोड़ रुपए 17 विभिन्न बैंकों के कुल 73 बैंक खातों में भेजा गया, जिसमें से 27 बैंक खाते पीएफआई, नौ बैंक खाते रेहाब इंडिया फाउंडेशन और कुछ खाते निजी लोगों और संस्थानों द्वारा संचालित है। ईडी सूत्रों ने यह भी पता लगाया कि इस दौरान बड़ी संख्या में कैश के जरिए डोनेशन दिया गया, जिसमें से एक तिहाई डोनेशन को पीएफआई के शाहीन बाग स्थित राष्ट्रीय मुख्यालय में रखा गया है।
पीएफआई के संपर्क में कांग्रेस के कई नेता
जांच से पता चला कि पीएफआई दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद आप और कांग्रेस के कई नेताओं के संपर्क में थे। जनवरी में, ईडी ने सीएए-विरोधी प्रदर्शनों के लिए पीएफआई और आरएफआई को 120 करोड़ रुपए के फंडिंग के सबूत जुटाए थे, जोकि मुख्यत: दिल्ली के शाहीनबाग क्षेत्र के लिए थे। ईडी ने पहले ही पीएफआई और आरएफआई के बैंक खातों में पैसे भेजने वाले लोगों की जानकारी के लिए पश्चिमी उत्तरप्रदेश में अपनी कई टीमों को भेजा है।
समर्थन के बदले संरक्षण की कोशिश
पीएफआई जैसे संगठन और उलेमा हर चुनावी सीजन में स्वार्थवश मुसलमानों को गुमराह करके अपने संगठन को मजबूत बनाने के साथ ही सत्ता में आने वाली सरकार को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे संगठन चुनाव में समर्थन के बदले सरकार से संरक्षण चाहते हैं, ताकि देश विरोधी गतिविधियों को बिना किसी बाधा के चला सके। ऐसे संगठनों द्वारा किसी पार्टी की विचारधारा या उसकी बैकग्राउंड पर नहीं उनके मोटे ऑफर पर उसे वोट देने का फरमान जारी किया जाता है।
चुनाव के समय दलबदलू उलेमाओं की बहार
दलबदलू उलेमा हर चुनाव में पार्टियों पर अपनी आस्था बदलते रहे। कभी भाजपा को हराने के लिये कांग्रेस के लिए वोट मांगा तो कभी आम आदमी पार्टी को जिताने की अपील की। आम तौर पर वो जिस पार्टी की सरकार आती है उस पार्टी और उसकी सरकार पर आस्था व्यक्त कर देते हैं। चुनावी मौसम में जिसकी सरकार बनती देखते हैं उस पार्टी को मुसलमानों की हमदर्द पार्टी होने का फरमान जारी कर देते हैं।

उत्तर प्रदेश: जमात-ए-इस्लामी की मुस्लिमों से अपील : 'महागठबंधन को दें वोट'


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लोकसभा चुनाव 2019 में धर्म और जाति के आधार पर वोट देने की बात चाहे हम कितना ही नकारते रहें, लेकिन कोई ना कोई धार्मिक संगठन या नेता धर्म या जाति के आधार पर वोट देने की अपील कर ही देता है।ताजा मामला मुसलमानों के धार्मिक संगठन जमात-ए-इस्लामी हिंद का समाने आया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद ने मुसलमानों से धर्म के नाम पर वोट डालने की अपील की है।मुस्लिम संगठन ने चिट्ठी लिखकर अपील की है कि मुसलमान महागठबंधन को वोट करें। 
अगर मुस्लिम समाज ने जमात की अपील अथवा फतवा को स्वीकारते गठबंधन को वोट दे भी दिया और उत्तर प्रदेश में गठबन्धन सभी सीटें जीत भी लें, तो क्या केन्द्र में सरकार बना सकता है गठबंधन। क्यों मुस्लिम समाज को बदनाम कर रहे हो। भाजपा को छोड़ कर कोई भी पार्टी पूर्ण बहुमत के लिए लड़ ही नहीं रही है। बहुमत के लिए 272 सीट चाहिए और कांग्रेस कुल 230 सीटो पर चुनाव लड़ रही है जबकि सपा 37, माया 38, लालू 20, ममता 42 सीटों पर, मतलब सरकार बनाने के लिए कोई चुनाव नही लड़ रहा सिर्फ भाजपा को बहुमत न मिले इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं।
स्मरण हो, कुछ वर्ष पूर्व तक कांग्रेस दिल्ली जामा मस्जिद के तत्कालीन इमाम अब्दुल्ला बुखारी और देवबन्द से मुसलमानों को कांग्रेस के लिए वोट करने के फतवा जारी करवाती थी, अब कांग्रेस की उसी नीति को मायावती ने अपनाया है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि निश्चित रूप से भाजपा को सत्ता से रोकने के लिए जमात को मोदी और योगी का मुस्लिम समाज को भय दिखाकर यह अपील करवाई गयी हो।  
इससे पहले बीएसपी प्रमुख मायावती ने सहारनपुर की चुनावी रैली में मुस्लिम समुदाय से अपील की थी कि उनका वोट बंटना नहीं चाहिए। 
अब हिन्दुओं को नहीं समस्त देशवासियों को वोट देने से पूर्व निर्णय करना होगा कि "देश में साम्प्रदायिकता का जहर कौन फैला रहा है?" ये हैं जहरीले लोग जो आम मुसलमान को डरा-धमका कर मुख्यधारा से जुड़ने से रोकते हैं। धर्म-निरपेक्षता, समाजवाद और सौहार्द का चोला ओढ़कर देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकते हैं। 
क्या प्रधानमन्त्री जनधन योजना और अन्य योजनाओं का लाभ लेने वाले मुसलमान भी मोदी को वोट देने से डरेंगे? यदि हाँ, तो उन्हें इन योजनाओं से अपने नाम और बैंकों में खाते बंद देने चाहिए। आखिर ये नेता और संगठन कब तक समाज में जहर फैलाते रहेंगे। हकीकत यह है कि कांग्रेस, बसपा और सपा कभी धर्म-निरपेक्ष ही नहीं रहीं। मायावती पहले ही कह चुकी है "तिलक, तराज़ू और तलवार! इनको मारो जूते चार !!" और समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोलियाँ चलवा चुके हैं। कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने देश में गौ-हत्या का विरोध कर रहे साधु समाज पर गोलियाँ चलवा कर दिल्ली में पार्लियामेंट स्ट्रीट को साधुओं के खून से रंग दिया था। फिर भी कुर्सी के भूखे हिन्दू इन पार्टियों में घुस रहे हैं। 
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:-
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खत्म होना चाहिए हरा वायरस
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ये वे लोग (महागठबंधन) हैं, जो मुस्लिम लीग जैसे हरे वायरस के साथ मिलकर देश को बर्बाद करना चाहते हैं
। अब समय आ गया है कि इस हरे वायरस को सदैव के लिए खत्म किया जाना चाहिए।
हिन्दुओं के पास नहीं हैं विकल्प
सीएम योगी ने कहा कि जिस तरह बीएसपी प्रमुख मायावती ने मुस्लिमों के लिए वोट मांगे हैं. मुस्लिमों से कहा है कि वे सिर्फ गठबंधन के लिए वोट करें और अपना वोट बंटने न दें
। अब हिंदुओं के पास भारतीय जनता पार्टी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।