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बेंगलुरु : पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट लिखने वाला हुआ गिरफ्तार; मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसा करने पर 150 दंगाई गिरफ्तार

बेंगलुरु, येदियुरप्पा, हिंसा, मुस्लिम
                                                                                                साभार: Deccan Herald 
बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ द्वारा दलित कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर किए गए हमले, दंगे, आगजनी और पत्थरबाजी और हिंसा के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। भीड़ ने पुलिस स्टेशन में भी आगजनी की। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है।
बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार(अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित है। श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
नवीन के ही फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है। अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 2 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।



पूरे बेंगलुरु में धारा-144 लगा दिया गया है। बता दें कि 100 के क़रीब की मुस्लिम भीड़ ने न सिर्फ कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा अभी भी देखा जा सकता है। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की। विधायक ने भी शांति की अपील की है।
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बेंगलुरु के पुल्केशी नगर में मुस्लिम भीड़ ने किए दंगे, आगजनी (फोटो साभार: इंडिया टुडे) मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्.....
पूर्वी बेंगलुरु के केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी हुई, पत्थरबाजी की गई और गाड़ियों को फूँक दिया गया। पूर्वी भीमाशंकर के डीसीपी की कर को डंडों और पत्थरों से निशाना बनाया गया। वहीं डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। रात के करीब 10:30 बजे अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियाँ आईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी मुस्लिम भीड़ ने जगह नहीं दी।

उत्तर प्रदेश : धार्मिक उन्माद फैलाने की PFI ने रची थी साजिश: बहराइच से साहिबे आलम, डॉ.अलीम, कमरुद्दीन गिरफ्तार

राम मंदिर PFI and SDPI
तीनो आरोपी जेल भेजे गए 
उत्तर प्रदेश के बहराइच से रामजन्मभूमि पूजन के दौरान सोशल मीडिया पर लोगों को बरगलाने और उन्माद फैलाने के आरोप में पुलिस ने शुक्रवार (7 अगस्त, 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े एक डॉक्टर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह लोग अयोध्या राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम के दिन सोशल मीडिया पोस्ट जरिए समुदाय विशेष के लोगों में आक्रोश फैलाना चाह रहे थे। जिससे सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठे।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुँवर ज्ञानंजय ने कहा कि उन्हें बुधवार को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग डॉ.अलीम के क्लिनिक में बैठ कर समुदाय विशेष के लोगों को व्हाट्सएप और ट्वीट के जरिए ऐसे मैसेज कर रहे हैं, जो सांप्रदायिक एकता और राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ थे।
अयोध्या में रामजन्म मंदिर भूमि पूजन के शुभारंभ कार्यक्रम को लेकर पहले से ही अलर्ट जारी कर दिया गया था। इसी के आधार पर पुलिस व खुफिया तंत्र सरहद के साथ ही सोशल मीडिया पर चौकस थे। बुधवार को ट्विटर पर भूमि पूजन को बाधित करने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्माद फैलाने की कोशिश शुरू की गई, तभी खुफिया एजेंसियाँ सतर्क हो गईं और जरवल में छापेमारी कर डॉ. अलीम अहमद की क्लीनिक से उन्हें दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने डॉ. अलीम और उसके क्लीनिक में मौजूद कमरुद्दीन और साहिबे आलम को गिरफ्तार किया था। 24 घंटे पूछताछ के बाद गुरुवार को पुलिस ने तीनों पर मुकदमा दर्ज कर जेल रवाना कर दिया। 
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इनमें साहिबे आलम पीएफआई के पूर्व पदाधिकारी और एसडीपीआई के मीडिया प्रभारी के रूप में काम कर रहा था। डॉ. अलीम और कमरुद्दीन दोनों एसडीपीआई व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य थे। उन्होंने कहा, एसडीपीआई और पीएफआई संगठनों के गिरफ्तार तीन सदस्यों से उनके नेटवर्क खंगाले जा रहे है और विस्तृत जाँच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इनके तार सऊदी अरब, दिल्ली, लखनऊ समेत कई जगहों से जुड़े बताए गए हैं। 
तीन सदस्यों के पकड़े जाने के बाद पीएफआइ व एसडीपीआइ के बहराइच में सक्रिय होने के सबूत ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इन लोगों ने अयोध्या में हो रहे भूमिपूजन के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए सोशल मीडिया पर गलत मैसेज प्रसारित कर मुस्लिमों में आक्रोश पैदा करने की योजना बनाई थी। लेकिन समय रहते पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी हो गई, जिससे इनका मंसूबा नाकाम हो गया।
भारतीय खुफिया एजेंसी को 5 अगस्त को अयोध्या और जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों की सूचना मिली थी। एजेंसी के अनुसार यह साजिश पाकिस्तान द्वारा रची गई थी। इसके लिए उसने अफगानिस्तान में 20 तालिबानी आतंकियों को प्रशिक्षण दिया है, ऐसी भी खबर थी। खुफिया एजेंसियों ने इस खतरे को लेकर पुलिस और आर्मी को पहले से आगाह कर दिया था।
खुफिया एजेंसी को पिछले कुछ हफ़्तो से आतंकी हमलों को लेकर सूचना मिल रही थी। कहा गया था कि आतंकी 15 अगस्त तक किसी भी बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दी गई चेतावनी के बाद अयोध्या, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।

CAA पर विरोधियों का साथ देने वाले हिन्दुओं का गलत इस्तेमाल हो सकता है !

मौलाना तौकीर रजा
मौलाना तौकीर रजा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में देश में जो अराजकता फैलाई जा रही है, उससे जहरीले नाग अपने वास्तविक रूप में आ गए हैं। क्योकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह संसद से लेकर सड़क तक(चुनावी रैलियों में) स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भारतीय की नागरिकता नहीं छिनेगी, उसके बावजूद कुछ राजनीतिक दल इन प्रदर्शनों और धरनों में अपनी पार्टी के हिन्दुओं के सहारे अपना खेल खेल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन धरनों में "गजवा हिन्द, इस्लामिक राष्ट्र, हिन्दुत्व की कबर खुदेगी, मोदी-योगी की कब्र खुदेगी" आदि नारे लगने पर उनका साथ देने वाले हिन्दुओं पर शंका होती है। राष्ट्र को ऐसे बहरूपी हिन्दुओं से सचेत रहने की जरुरत है। 
हालाँकि जब कुछ न्यूज़ चैनलों ने इन मौलानाओं से उनके भड़काऊ भाषणों पर बात करने पर सभी माफ़ी मांगते नज़र आए। ऐसे में प्रश्न यह होता है कि किन नेताओं के कहने पर इन्होने ऐसे भड़काऊ भाषण दिए? उनके माफ़ी मांगने से समस्या का समाधान नहीं, विपरीत इसके जो हिन्दू प्रदर्शन और धरने में इनका साथ दे रहे हैं, उनसे सतर्क रहने की जरुरत है। संभव है कि जो ये मौलाना भाषणों में धमकियां दे रहे हैं, उन्हें अंजाम देने में उन्हीं गैर-मुस्लिमों का प्रयोग करें, जो धरनों में इनके साथ खड़े हैं।
जबकि भड़काऊ जहरीले भाषण देने वाले सारे मौलाना पकडे जाने पर इंडिया टीवी पर माफ़ी मांग रहे हैं। लेकिन जो जहर इन लोगों ने घोला है, उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? सरकार को चाहिए इन पर कार्यवाही करने के साथ-साथ जहरीले भाषण देने के लिए उकसाने वाले नेता और उनकी पार्टी पर भी कार्यवाही करनी होगी। 
‘अगर यहाँ के 30 करोड़ मुसलमान आतंकी बन गए तो क्या हाल होगा, खून की नदियाँ बहेंगी’ – मौलाना तौकीर रजा पर FIR   
मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। मौलाना ने उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में चल रहे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन में भड़काऊ बयान दिया था। मौलाना तौकीर रजा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हिटलर और गृहमंत्री अमित शाह को मुसोलिनी बताया था। मौलाना के खिलाफ सोमवार (फरवरी 17, 2020) को मामला दर्ज किया गया। मौलाना के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 305 और 153-K के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस दौरान मौलाना ने पीएम मोदी और अमित शाह को आतंकवादी भी बताया था। मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि आतंकवादी मुसलमान नहीं बल्कि आतंकवादी नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। इसके अलावा रजा ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी अभद्र टिप्पणी करते हुए उन्हें ढोंगी बताया था।
रजा इससे पहले भी CAA के विरोध में भड़काऊ बयानबाजी कर चुके हैं। उन्होंने एक गाड़ी पर लाउडस्पीकर लगाकर भड़काऊ भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि हिन्दुस्तान की हुकूमत ने नागरिकता संशोधन बिल वापस नहीं लिया तो गलियों में खून बह जाएगा। सबसे पहले वह गोली खाएँगे। दंगे-फसाद हो जाएँगे। इसमें हिंदू, मुस्लिम और दलित भी उनका साथ देंगे।


हालिया भड़काऊ भाषण के दौरान भी उन्होंने गलियों में खून की नदियाँ बहाने वाले बयान का उल्लेख करते हुए कहा, “याद है पिछले दिनों हमने कहा था कि गलियों में खून की नदियाँ बहेंगी। हमने ये नहीं कहा था कि मैं खून बहाऊँगा। लेकिन हम अल्लाह के बंदे हैं, जो कह देते हैं, वो हो जाता है। अगर उन्होंने मेरी बात मान ली होती तो आज देश का ये माहौल नहीं होता। हमने तो उन्हें आगाह किया था।” मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के लिए भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।
इसके अलावा तौकीर रजा ने कहा, “देश का माहौल चंद आतंकवादी हमलों से खराब हो जाता है। जरा सोचो अगर यहाँ के 30 करोड़ मुसलमान आतंकवादी बन गए तो इस देश का क्या हाल होगा।” मौलाना ने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम से ‘न’ और अमित शाह के नाम से ‘शा’ शब्द लेकर नशा शब्द गढ़ा और कहा, “कुछ हिंदू भाइयों पर मोदी और अमित शाह का नशा चढ़ा हुआ है, जिनके सिर पर मुल्क की बर्बादी का सेहरा बँधने वाला है। मोदी और अमित शाह का नशा उतरने में अगर देर हो गई तो ये दोनों मिलकर देश को बर्बाद कर देंगे। हमें इनका नशा उतारना है। ऐसा न हो कि कहीं हमारे नौजवान आतंकवाद का रास्ता न अपना लें, उन्हें रोकने के लिए हम यहाँ आए हैं। अगर तुमने ये CAA कानून वापस न लिया तो हमें अंदेशा है कि कहीं हमारे नौजवान गलत रास्ता न अपना लें।”
मौलाना आगे कहते हैं, “हमारी जंग बड़ी जंग है और ये हुकूमत से जंग है और ये जंग हम जीत कर रहेंगे। हमने बाबरी मस्जिद के मामले में बड़ी नाइंसाफी को बर्दाश्त किया। इससे बड़ी बेईमानी नहीं कर सकते तुम कि हमने देश की शांति के लिए उसे बर्दाश्त किया और कोई प्रतिक्रिया नहीं की। कश्मीर में तुमने जो जुल्म किया, हमने उसे बर्दाश्त किया और सब्र किया। तुमने तीन तलाक के मामले में हमारे साथ बेईमानी की, हमने बर्दाश्त किया। आज हमारी बहन बेटियाँ सड़क पर निकाल आई हैं तो वो बिलबिला रहे हैं।”
जब मौलाना तौकीर रजा विवादित बयान दे रहे थे, उस समय मौके पर संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान बर्क भी मौजूद थे। तौकीर ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था, “अगर हमें रास्ते से हटाया गया तो तुम भी नहीं रहोगे।”
जिहाद, CAA, पीएम मोदी, अमित शाह
 ‘अनपढ़ मोदी और टकले शाह, CAA वापस लो नहीं तो जिहाद के लिए तैयार रहो: मौलाना जरजिस अंसारी हाफिजुल्लाह
एमके इस्लामिक चैनल नाम के एक इस्लामवादी यूट्यूब चैनल ने हाल ही में एक मौलाना जरजिस अंसारी हाफिजुल्लाह का एक भड़काऊ भाषण अपलोड किया है। इस भड़़काऊ भाषण में मौलाना को कई जगह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करते और धमकी देते देखा और सुना जा सकता है। मौलाना ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) बिल को झूठा करार देते हुए इसे मुस्लिम-विरोधी ठहराया।
इस वीडियो को 18 दिसंबर 2019 को अपलोड किया गया था। इसे अब तक 4 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। एमके इस्लामिक यूट्यूब चैनल से पता चलता है कि इसे इस साल अक्टूबर में बनाया गया। इस यूट्यूब चैनल पर इसी मौलाना द्वारा बनाए गए अब तक 13 वीडियो को शेयर किया जा चुका है जिसे 27 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है।
मौलाना अपने नफ़रत भरे भाषण में यह कहता है कि अगर मोदी या शाह उन्हें (मुस्लिम समुदाय को) देश से बाहर फेंकने की कोशिश कर रहे हैं तो वह भारत के कोने-कोने में ‘जिहाद’ करेंगे। इस वीडियो में मौलाना को यह कहते हुए सुना जाता है कि “इनके बाप के बाप के बाप की भी ताक़त नहीं हैं कि हमें बाहर निकाल दें। हमें निकाल के तो दिखा मोदी, हम भी जिहाद करने से पीछे नहीं हटेंगे।”
मौलाना ने पीएम मोदी को ‘अनपढ़’ और ‘नपुंसक’ कहा और गृह मंत्री को “मोटे” और “टकले” कहा। इसके अलावा, मौलाना ने गृह मंत्री को यह कहते हुए धमकी दी कि तुम आग से खेल रहे हो, तो हमें कमतर न आँके। इसके अलावा, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की भी तारीफ़ करते हुए मौलाना ने कहा कि यह केजरीवाल ही थे जिन्होंने उन्हें पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता दिखाई थी।
हालाँकि, सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि CAA को लेकर भारतीय मुसलमानों को बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन, मौलाना ने अपने श्रोताओं के बीच यह कहकर झूठ फैलाया कि सरकार देश से सभी मुसलमानों को बाहर निकालना चाहती है।
इसके अलावा, अपने नफ़रत भरे भाषण में लगभग 3 मिनट 30 सेकेंड पर, मौलाना ने सरकार को CAA और NRC को वापस लेने या जिहाद के लिए तैयार रहने की धमकी दी। मौलाना ने कहा कि अगर यह क़ानून पर तुम अटल रहे तो इतना याद रखना की मरने और मारने से कोई नहीं चूकेगा।
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मोदी सरकार द्वारा नागरिकता अधिनियम लाए जाने के बाद से देशभर में इसके विरोध में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। जबकि देश भर में कई पाकिस्तानी हिन्दू प्रवासियों ने ऐतिहासिक नागरिकता संशोधन अधिनियम को पारित करने का जश्न मनाया और इसकी सराहना की है। इससे उनकी खोई हुई आशा वापस आ गई है, लेकिन दूसरी तरफ़ मुस्लिम भीड़ हिंसा पर उतारू है और सार्वजनिक सम्पत्ति को नष्ट करने के साथ-साथ देशभर में अराजकता फैलाने में जुटी हुई है।

स्वास्तिक से छेड़छाड़: क्या देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने को आतुर हैं मोदी विरोधी?

शाहीन बाग़, CAA, पोस्टर
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब से नागरिकता कानून बना है, मोदी-विरोधी विरोध में इतने अंधे और पागल हो चुके हैं, लगता है सबकी अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं। विरोध करना विपक्ष का जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन विरोध में हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाजी लगना कौन-सी दानिशमंदी है? इन उन्मादियों को शायद ये नहीं मालूम कि जिस दिन हिन्दुओं के सबर का पैमाना टूट गया, और इसी तरह इस्लाम विरोधी नारेबाजी होने की स्थिति में क्या होगा? कभी उन्मादियों और इनके समर्थक दलों ने लेशमात्र भी सोंचा है? यह कौन-सा संविधान है, जो दूसरे धर्म के प्रति उत्तेजक नारों की इजाजत देता है? भारतीय संविधान का कौन उल्लंघन कर रहा है? कौन वो शैतानी नेता है, जो प्रदर्शनकारियों को ऐसे उत्तेजक नारे लगाने के लिए समर्थन देकर देश में साम्प्रदायिक आग में झोंकने का प्रयास कर रहा है? क्यों नहीं, ऐसे उत्तेजक नारो पर लगाम लगाई जाती? आखिर CAA के विरोध में हिन्दू-विरोधी नारों का क्या मतलब निकाला जाए?
इसी तरह जब जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश-विरोधी नारे लगते हैं, विपक्ष उनके साथ खड़ा हो जाता है, क्यों? ऐसे नेता एवं उनकी पार्टी क्या कभी देशहित कर सकती हैं? आखिर कौन-सी आज़ादी की मंशा है? क्या इस तरह के नारे लगाने वाले और उनको समर्थन देने वाली पार्टियां किसी गुलाम देश में रह रहे हैं? जब प्रदर्शनकारियों द्वारा "हिन्दू से चाहिए आज़ादी", "हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी", "मोदी-योगी की कब्र खुदेगी" आदि आदि उत्तेजक नारे लग रहे हैं, 'गंगा-यमुना तहजीब' की बात करने वाले किस बिल में घुसकर बैठे हैं? क्यों नहीं इन हिन्दू भावनाओं को भड़काने वाले नारों का विरोध करते? ये सब तभी बाहर निकलेंगे, जब दूसरी तरफ से पलटवार होगा। अभी सब कुम्भकरण की नींद में सोये हुए हैं।हकीकत यह है कि जब से देश में तीन तलाक पर पाबंदी, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का समाप्त होना, अयोध्या में राममन्दिर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आदि पर चुप्पी साधे छद्दम धर्म-निरपेक्ष नागरिकता संशोधन कानून बनने पर दिलों में दबी अपनी ज्वाला को प्रकट कर रहे हैं। किस कदर इन उन्मादी नेता और पार्टियों ने मुस्लिम समाज को भ्रमित कर दिया है, वह प्रदर्शनों में लग रहे उत्तेजक नारों से जाहिर हो रहा है।  
नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) संसद में पारित होने के बाद से ही भारत के वामपंथियों और मुस्लिमों के लिए एक विवादित क़ानून बन गया है। देश के कई हिस्सों में हिंसक हुई मुस्लिम भीड़ द्वारा विरोध-प्रदर्शन के नाम पर हिन्दू विरोधी नारे और पोस्टर लगाए जाने से लेकर उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ताज़ा मामले में शाहीन बाग का एक और पोस्टर सामने आया है। इसे पत्रकार, सबा नकवी ने शेयर किया है। इस पोस्टर को देखते ही आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यह हिन्दू-विरोधी कल्पना से भरा है।
सबा नकवी द्वारा गर्व के साथ शेयर की गई इमेज में तीन महिलाओं को बुर्क़ा पहने और माथे पर बिंदी लगाए दिखाया गया है। इसके अलावा, पोस्टर के नीचे, फ़ैज़ की कविता ‘हम देखेंगे’ शीर्षक से कुछ पंक्तियाँ भी लिखी हुई हैं। अंत में, हिन्दू स्वस्तिक को खंडित कर उसका विघटित रूप दर्शाया गया।

यह पोस्टर स्पष्ट रूप से हिन्दुओं पर इस्लामी वर्चस्व की स्थापना और हिन्दुओं के घृणा जताने की मंशा से ओत-प्रोत है। इसे CAA विरोधी-प्रदर्शनों का प्रतीक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। और न ही इसे राजनीतिक विरोध मानकर हवा में उड़ाया जा सकता है।
हिजाब पहने और माथे पर बिंदी लगाए महिलाओं के इस पोस्टर को देखकर ऐसा भी लगता है कि मुस्लिम समुदाय हिन्दू महिलाओं को किस नज़रिए से देखता है। पहली नज़र में ऐसा भी प्रतीत होता हो सकता है जैसे यह पोस्टर कश्मीर से है, जहाँ कश्मीरी हिन्दू महिलाओं का बलात्कार इस्लामी ताकतों द्वारा किया गया और फिर उनकी उनकी हत्या कर दी गई। इसके अलावा, यह पोस्टर मुस्लिमों के अत्याचार के उस दौर का भी खुला चित्रण करती है जिसके तहत कश्मीर में हिन्दू पुरुषों को धर्म परिवर्तन, पलायन या मरने के अलावा अपनी महिलाओं को बलात्कार और मुस्लिम बनाने के लिए छोड़ने तक के लिए मजबूर किया गया।
मुस्लिम महिलाओं की इमेज के ठीक नीचे फैज़ की कविता का शीर्षक ‘हम देखेंगे’ तो लिखा था, लेकिन उसके नीचे की पंक्तियों को बदल कर नई पंक्तियों को गढ़ा गया। इसके अनुसार
जब ज़ुल्म-ओ-सितम मोदी-शाह के, 
खाक में मिल जाएँगे, 
जनता के एक इशारे पे,
सब कुर्सी से उतारे जाएँगे, 
लाज़िम है कि हम देखेंगे। 

इस पोस्टर के अंत में, हिन्दुओं के पवित्र स्वास्तिक चिन्ह को खंडित कर उसके विघटित रूप को दिखाया गया था।
बीते दिनों CAA के ख़िलाफ़ हुए दंगों में देश ने मुस्लिमों की भीड़ का एक अलग ही चेहरा देखा गया। ये याद रखने वाली बात है कि खुद को भारत का नागरिक कहने वाले लोग एक तरफ देश में धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ ये लोग हिन्दुओं से आजादी की माँग कर रहे थे। और हिन्दू विरोधी नारों के साथ उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली में हिंसा और दंगा कर रहे थे। ख़िलाफत 2.0 का संदेश दे रहे थे और ला इलाहा इल्लल्लाह के नारे लगा रहे थे।
एक बात और ध्यान दिला दें कि हिन्दू घृणा से सने शाहीन बाग़ इलाक़े में CAA और NRC के ख़िलाफ़ ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ जैसे नारे लगाए गए थे। इस दौरान ऐसे पोस्टर भी देखे गए जिनमें हिन्दू धर्म की तुलना नाज़ीवाद से और स्वास्तिक का दुरुपयोग करते हुए विखंडित दिखाया गया।
दिलचस्प बात यह है कि CAA विरोधी-प्रदर्शनों में ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के जमकर नारे लगाए गए। पवित्र हिन्दू स्वास्तिक की इमेज को कलंकित किया गया, इसकी तुलना नाज़ी हैकेन क्रुज़ (Nazi Haken Kreuz) से की गई है। बता दें कि ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ का शाब्दिक अर्थ ‘अल्लाह के सिवाय कोई ईश्वर नहीं’ है। जिसका किसी भी राजनीतिक प्रोटेस्ट से कोई लेना-देना नहीं है।
स्वास्तिक को इस्लामवादी हमेशा से ही हिटलर हैकेन क्रुज़ के साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि ख़ुद हिटलर ने कभी भी Hast Kreuz के लिए स्वस्तिक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन आतंकी संगठन ISIS ने ला इलाहा इल्लल्लाह को अपने झंडे में शामिल किया।
हिंदूघृणा से लबरेज पोस्टर
गाल पर हिन्दुत्व के विरुद्ध लिखने वाली लड़की क्या इस्लाम के विरुद्ध ऐसी भाषा लिखने का साहस करेगी?
हिन्दू घृणा से सने पोस्टर
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का विरोध करने के नाम पर सड़कों पर उतरी भीड़ को बीते दिनों हमने दंगाइयों में बदलते देखा। हमने देखा कि किस तरह संविधान को बचाने के नाम पर तोड़फोड़, आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। पुलिस पर उपद्रवियों द्वारा हमले किए गए। बम फेंकने का प्रयास हुआ। सरेआम गोली चलाई गई। करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट किया गया आदि-आदि। इन सबके अतिरिक्त एक जो चीज़ इन प्रदर्शनों और दंगों में सबसे आम देखने को मिली, वो थी- हिंदुओं के प्रति घृणा।
जामिया मिलिया इस्लामिया हो या जेएनयू; शाहीन बाग हो या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, हर जगह सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों में हिंदूघृणा से लबरेज पोस्टर दिखाई दिए। कहीं हिंदुओं को कैलाश भेजने की बात हुई, कहीं ख़िलाफ़त 2.0 को काली स्याही से दीवार पर लिख दिया गया। जोर-जोर से ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगे और पूरी दुनिया में ‘ऊँ’ के चिन्ह को अपमानित करते हुए पोस्टरों में ‘फक हिंदुत्व’ लिखा गया।
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इसके अलावा इन प्रदर्शनों में हिंदू राष्ट्र को रेपिस्ट कहा गया। साथ ही ‘फक हिंदू राष्ट्र’ जैसे नारे लड़कियों के गाल पर लिखे देखे गए। इन प्रदर्शनों में पोस्टरों के जरिए न केवल केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाया गया। बल्कि देश की बहुसंख्यक आबादी की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुँचाया गया। इन आंदोलनों में इस्लाम के मायने तो समझाए गए, लेकिन हिंदू संस्कृति और सभ्यता का न केवल बुरी तरह मजाक उड़ाया गया, बल्कि हर मुमकिन तरीके से सेकुरलिज्म के नाम पर उसे रौंदा गया।
ये केवल चुनिंदा नारे और वाकये थे। बीते दिनों हुए इन प्रदर्शनों में करीब 30 पोस्टर ऐसे दिखाई दिए, जो हिंदूघृणा की खुली किताब थे। जिन्हें देखते ही अंदाजा लग जाएगा कि सेकुलरिज्म बचाने के नाम पर ये हिंदुत्व पर हमला है।