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‘जाओ अपने बॉयफ्रेंड केसी वेणुगोपाल को अपना ego दिखाओ’..बता भागी एम हजीना सैयद, तमिलनाडु महिला कांग्रेस की अध्यक्ष; आरोप-प्रत्यारोप के बीच चल रही नूराकुश्ती

                                                                                                                                                                                                                                  साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के मतदान होने के अगले ही दिन प्रदेश की महिला कांग्रेस अध्यक्ष हजीना सैयद को उनके पद से हटा दिया गया है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए हजीना सैयद को अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया है। वहीं अब हजीना ने अलका लांबा को जवाब देते हुए करारा पलटवार किया है। हजीना सैयद ने कहा कि क्या तुम्हें कोई कॉमन सेंस है? मैंने तो एक ऑफिशियल प्रेस मीट में पहले ही इस्तीफा दे दिया है। जाओ अपने बॉयफ्रेंड केसी वेणुगोपाल को अपना ego दिखाओ।

कांग्रेस पार्टी के अंदर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहाँ तमिलनाडु महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एम हजीना सैयद ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद शीर्ष नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी की ओर से उन्हें ‘एंटी-पार्टी गतिविधियों’ के आरोप में निष्कासित भी कर दिया गया, लेकिन सैयद का कहना है कि वह पहले ही इस्तीफा दे चुकी थीं। उन्होंने कथित तौर पर अल्का लाँबा को केसी वेणुगोपाल की गर्लफ्रेंड करार दिया।

हजीना ने अपने मेल में लिखा है कि नमस्ते सुश्री अलका लांबा, क्या आपमें ज़रा भी अक्ल है? मैंने तो कल ही इस्तीफ़ा दे दिया था। 10 अप्रैल 2026 को दोपहर 1:00 बजे हुई आधिकारिक प्रेस मीट में मैंने इस बात की घोषणा भी कर दी थी। जाइए, अपना अहंकार अपने बॉयफ्रेंड के. सी. वेणुगोपाल को दिखाइए, मुझे नहीं। हजीना ने आगे लिखा है कि ध्यान रहे, आपको मुझे अपमानित करने का कोई अधिकार नहीं है। आप हमारी सदस्यता फ़ीस के पैसों पर ऐश कर रही हैं। क्या इस पार्टी में इतनी हिम्मत है कि वह AIMC के खातों का ऑडिट करवा सके? हजीना सैयद ने यह भी लिखा कि आप आम आदमी पार्टी से कूदकर यहां कांग्रेस को बर्बाद करने आई हैं। इसलिए, अपनी हद में रहिए और चुपचाप बैठी रहिए। वरना मैं आपको ठीक कर दूंगी। हजीना ने सोशल मीडिया एक्स पर अलका लांबा को टैग करके अपना जवाब भी लिखा है।

निष्कासन से पहले इस्तीफे का दावा, आदेश पर उठाए सवाल

ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अल्का लांबा ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को एक आधिकारिक पत्र जारी कर हजीना सैयद को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निकालने की घोषणा की। पत्र में कहा गया कि यह निर्णय संगठन की अनुशासन और अखंडता बनाए रखने के लिए लिया गया है।
हालाँकि सैयद ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने उसी दिन दोपहर 1 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में निष्कासन का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सीधे अल्का लांबा को टैग करते हुए इस कदम को गलत बताया।

अल्का लांबा पर लगाए गंभीर आरोप, सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

हजीना सैयद ने अपने पोस्ट और ईमेल में आल्का लांबा पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लांबा महिला कांग्रेस के पदाधिकारियों को सदस्यता के नाम पर परेशान करती हैं और पैसे का दुरुपयोग करती हैं। सैयद ने यहाँ तक कहा कि संगठन के फंड्स का सही ऑडिट नहीं होता और इसका इस्तेमाल निजी विलासिता के लिए किया जा रहा है। यही नहीं, अपने पोस्ट में और अल्का को लिखे मेल में उन्होंने अल्का लाँबा को कथित तौर पर केसी वेणुगोपाल की गर्लफ्रेंड करार दिया है।
उन्होंने अपने ईमेल में यह भी लिखा कि अगर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो वह लांबा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराएँगी। सैयद का दावा है कि उनके पास गैरकानूनी लेन-देन और सदस्यता घोटाले के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लांबा के पिछले राजनीतिक संबंधों पर भी सवाल उठाए।

इस्तीफा पत्र में भी लगाए आरोप, पार्टी नेतृत्व पर उठाए सवाल

हजीना सैयद ने गुरुवार (9 अप्रैल 2026) को लिखे अपने इस्तीफा पत्र में भी पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उनकी गरिमा तथा आत्मसम्मान को ठेस पहुँची है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनकी अपील पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सैयद ने तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने निजी हितों के चलते उनका विधानसभा टिकट काट दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में भ्रष्ट व्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, जिससे सच्चे कार्यकर्ताओं को नुकसान हो रहा है।

कब हुई थी उनकी नियुक्ति

हजीना सैयद को 21 अप्रैल, 2024 को इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने सुधा रामकृष्णन का स्थान लिया, जिन्होंने मयिलादुथुराई निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में आम चुनाव लड़ने के लिए पद छोड़ दिया था। उस समय हजीना को एक सशक्त संगठनात्मक नेता के रूप में जाना जाता था, क्योंकि वे पहले अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी थीं। इन वर्षों में, उन्होंने कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरे के रूप में अपनी पहचान बनाई और टेलीविजन बहसों और सार्वजनिक मंचों पर अक्सर पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। पार्टी के विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने और राजनीतिक चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी ने उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता दोनों के बीच पहचान दिलाई।

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म से निकाला, मंदिरों में न मिले प्रवेश

                                ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म से निकाला
उत्तराखंड के रुद्रप्रायग स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म से निष्कासित किए जाने का ऐलान किया है। संसद में मनुस्मृति के विरुद्ध दिए गए उनके बयान के कारण शंकराचार्य ने ये ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा था और धर्म-संसद में सनातनधर्मियों के प्रश्न आते थे जिनका जवाब सभासदों द्वारा दिया जाता था। उसी दौरान राहुल गाँधी को लेकर प्रश्न आया था। बकौल अविमुक्तेश्वरानंद, राहुल गाँधी ने कहा था कि बलात्कारी बाहर घूम रहे हैं और पीड़िता बिटिया अंदर रहने को मजबूर हैं।

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि घटना पर चर्चा से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और पीड़िता को पीड़ा को समझकर संसद में उठाना अच्छी बात है और संवेदनशील व्यक्ति इसे लेकर प्रश्न उठाएगा। हालाँकि, उन्होंने आगे कहा कि राहुल गाँधी ने इस पीड़ा को व्यक्त करते हुए आगे कहा कि बलात्कारी को संरक्षण देना हमारे संविधान में नहीं लिखा है, फिर उन्होंने सत्तापक्ष की तरफ उँगली दिखाकर कहा कि ‘तुम्हारी किताब’ में ऐसा लिखा है। शंकराचार्य ने पूछा कि वो किताब कौन सी है?

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “राहुल गाँधी ने अगले वाक्य में ख़ुद साफ़ कर दिया कि मनुस्मृति में ऐसा लिखा है। मनुस्मृति इस संसार का पहला संविधान है, हम हिन्दू इसे मानते हैं। उससे ही प्रेरणा लेकर कई संविधान रचे गए, हम आज भी उसके अनुसार अपना जीवन चलाते हैं। इसकी किसी बात से आप सहमत न हो सकते हैं या हो सकता है कि कुछ आपको समझ में न आ रहा हो या परिस्थितियों में बदलाव के कारण कोई बात आपको अच्छी नहीं लग रही हो और आप कहें कि आप इसे नहीं मान पा रहे हैं।”

अविमुक्तेश्वरानंद ने मनुस्मृति को आक्षेप करने का विरोध करते हुए कहा कि राहुल गाँधी के बयान से साफ़ हो गया कि राहुल गाँधी इसे अपनी किताब नहीं मानते, अगर वो हिन्दू होते तो इसे अपनी किताब मानते। अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी 18 स्मृतियों को हिन्दुओं की किताब बताते हुए इन्हें धर्मशास्त्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जो मनुस्मृति को अपनी किताब नहीं मानता वो हिन्दू नहीं हो सकता, उनके हिन्दू होने में समस्या है। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म का न माना जाए और मंदिरों में प्रवेश न दिया जाए।

राहुल गाँधी ने दिसंबर 2024 में कहा था कि भाजपा के लिए संविधान से ऊपर मनुस्मृति है। वहीं पिछले साल राजद की प्रवक्ता प्रियंका भारती द्वारा ‘इंडिया टीवी’ के एक शो में मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के बाद इसे लेकर विवाद हो गया था। इसे दलित विरोधी पुस्तक बताया गया, जबकि डॉ आंबेडकर ने संविधान निर्माण के दौरान मनु महाराज द्वारा महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिए जाने की प्रशंसा की थी। इस विवाद के बाद मनुस्मृति की बिक्री भी बंपर तरीके से बढ़ गई थी।

‘5 दिन में देश छोड़ो’: ट्रूडो के खालिस्तानी तुष्टिकरण के बाद भारत ने कनाडा के राजनयिक को निकाला

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडाई हाई कमिश्नर कैमरून मैक्के को तलब कर के अपने फैसले के बारे में बताया
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या का आरोप भारत पर मढ़ने और भारतीय राजनयिक को कनाडा से वापस भेजने के बाद अब भारत ने भी कड़े कदम उठाए हैं। भारत ने दिल्ली स्थित कनाडाई दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक को भारत छोड़ने का आदेश दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है कि उसने भारत में कनाडा के हाई कमिश्नर कैमरून मैक्के (Cameroon Mackay) को तलब करके उन्हें इस बात की जानकारी दी है। भारत ने कनाडाई राजनयिक को 5 दिनों के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दिया है।

बीते एक वर्ष में यह तीसरा ऐसा मौका है जब कनाडा के हाई कमिश्नर को भारतीय विदेश मंत्रालय ने तलब किया है। इससे पहले जुलाई और मार्च महीने में भी उन्हें तलब किया गया था जो कि दर्शाता है कि दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हैं।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “कनाडा के भारत में हाई कमिश्नर को आज तलब किया गया था और उन्हें एक कनाडाई राजनयिक के भारत से निष्कासन के निर्णय की जानकारी दी गई। उक्त राजनयिक को 5 दिनों के भीतर भारत छोड़ने को कहा गया है। यह निर्णय कनाडाई राजनयिकों की भारत विरोधी गतिविधियों में बढती संलिप्तता और उनके भारत के आंतरिक मामले बढ़ते दखल के प्रति भारत की चिंताओं को दर्शाता है।”

इससे पहले कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कनाडाई संसद में भारतीय राजनयिक के कनाडा से निष्कासन की सूचना दी थी। बीते कुछ वर्षों से कनाडा के खालिस्तानी आतंकवादियों के संरक्षण को लेकर भारत से सम्बन्ध काफी निचले स्तर पर चले गए हैं।

आतंकवादी निज्जर की हत्या का दोषारोपण भारत पर करके कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो अपनी खीझ जाहिर कर रहे हैं। वह कनाडा के खालिस्तानियों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं। खालिस्तानियों के दबाव में आए ट्रूडो को हाल ही में G20 में भी कोई ख़ास तवज्जो नहीं मिली थी।

भारत ने निष्कासित किए जाने वाले कनाडाई राजनयिक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, जबकि कनाडा ने यह जानकारी दी है कि उसने कनाडा में ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW)’ के मुखिया पवन कुमार राय को निष्कासित किया गया है। हालाँकि, अंग्रेजी समाचार वेबसाइट मिंट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत से निष्काषित होने वाले कनाडाई राजनयिक, कनाडा की ख़ुफ़िया एजेंसी के भारत में मुखिया ओलिवर सिल्विस्टर हैं।

उत्तर प्रदेश : रामचरितमानस जलाने और स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध करने पर समाजवादी पार्टी ने महिला नेत्रियों को निकाला

समाजवादी पार्टी ने दो महिला नेताओं को पार्टी से निकाल दिया है। इनके नाम हैं- रोली तिवारी मिश्रा और ऋचा सिंह। इन दोनों ने रामचरितमानस पर पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की अनर्गल टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। साथ ही मानस को जलाए जाने का विरोध किया था।

सपा ने गुरुवार (16 फरवरी 2023) को ट्वीट कर रोली तिवारी मिश्रा और ऋचा सिंह को पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी दी। निष्कासन के बाद दोनों महिला नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा को महिला विरोधी बताते हुए रामद्रोहियों के खिलाफ आवाज उठाते रहने की बात कही है।

रोली तिवारी मिश्रा ने रामचरितमानस के पन्नों को जलाने और स्वामी प्रसाद मौर्य की विवादित टिप्पणियों का विरोध किया था। इस मामले में पार्टी की तरफ से कोई एक्शन न लेने पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने मौर्य के बयान वाले वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा था, “स्वामी प्रसाद का कहना है कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों को प्रतिबंधित करवाएँगे। 2012 में रोटी कपड़ा सस्ती हो दवा पढ़ाई मुफ्त हो, इस नारे के साथ अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने थे। क्या ‘मानस का मुद्दा’ लेकर सपा पुनः सरकार बना पाएगी?”

यही नहीं उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा था, “श्रीरामचरितमानस के सम्मान स्वाभिमान की लड़ाई धर्मद्रोहियों से लड़ती रहूँगी। मैं छल, कपट, धूर्त्तता, धोखेबाजी, कूटयोजना से मेरा अपमान करने वालों को खुली चुनौती देती हूँ। मर्द हो तो सामने से लड़ो।”

वहीं ऋचा सिंह ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध किया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “छद्म समाजवादी स्वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी की नींव डॉ. राम मनोहर लोहिया से बड़े हो गए हैं? डॉ. लोहिया ने 1961 में रामायण मेले कि परिकल्पना की थी। स्वामी प्रसाद रामचरित मानस का निरंतर अपमान कर रहे हैं। क्या समाजवादी पार्टी अब राम मनोहर लोहिया के बदले स्वामी प्रसाद मौर्य के सिद्धान्तों पर चलेगी??”

पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋचा सिंह ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर समाजवादी पार्टी को महिला विरोधी बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “महिलाओं का अपमान करने वाले लंपटों के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी डीजीपी ऑफिस पहुँच जाते हैं और महिलाओं के-जन अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाली महिलाओं को बिना कारण बताए निष्कासित कर दिया जाता है। समाजवादी पार्टी का महिला विरोधी चेहरा।”

उन्होंने यह भी कहा है, “संविधान के भाग 3, फंडामेंटल राइट पृष्ठ की शुरुआत भगवान राम लक्ष्मण और भगवती सीता के चित्र से होती है। राम भारत की आत्मा हैं। यहाँ तक कि अल्लामा इक़बाल ने उनको इमामे हिंद माना है। ऐसे में भारत की आध्यात्मिक एवं संवैधानिक आत्मा के साथ मैं खड़ी थी और खड़ी रहूँगी।”

वहीं रोली तिवारी मिश्रा ने कहा है, “16 वर्षों की निष्ठा के इस पुरस्कार के लिए आभार आदरणीय अखिलेश यादव जी। राष्ट्रद्रोहियों, सनातन धर्मद्रोहियों, रामद्रोहियों के खिलाफ आवाज उठाती थी, उठाती रहूँगी। सनातन धर्म के स्वाभिमान प्रभु श्रीराम, श्रीरामचरितमानस के सम्मान के लिए ऐसे हजारों निष्कासन स्वीकार। धर्मो रक्षति रक्षितः।”