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आतंकी हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर ट्रंप प्रशासन को नहीं है 'विश्वास'

Related imageआतंकी हाफिज सईद  को गिरफ्तार कर पाकिस्तान भले ही अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा हो लेकिन अमेरिका को उस पर विश्वास नहीं है। ट्रंप प्रशासन की ओर से पाकिस्तान की इस कार्रवाई पर शक जताया है अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पहले भी इस तरह की गिरफ्तारियों से न हाफिज सईद और न उसके संगठन लश्करे-तैयबा पर कोई असर पड़ा है एक अधिकारी ने कहा, 'हमने यह पहले भी देखा है हम ठोस कदम उठाए जाने की ओर देख रहे हैं न कि एक 'छलावा' अमेरिकी अधिकारी का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के कुछ दिन पहले आया है साल 2001 में भारत की संसद में हमला करने के बाद से हाफिज सईद को अब तक 7 बार गिरफ्तार किया जा चुका है
अमेरिकी अधिकारी ने आगे कहा कि हमें इस बात की दुविधा नहीं है कि पाकिस्तान सैन्य खुफिया एजेंसियां इन आतंकी समूहों की मदद करती हैं इसलिए हम ठोस कदम का इंतजार कर रहे हैं नाम न बताने की शर्त पर उस अधिकारी ने आगे कहा कि हमने देखा है कि पाकिस्तान ने कुछ आतंकी समूहों की संपत्तियां जब्त की हैं और यह भी सही है कि हाफिज सईद को गिरफ्तार किया गया है जो 2008 में मुंबई में हुए हमले का आरोपी है लेकिन उसकी गिरफ्तारी 7 बार हो चुकी है और फिर बाद में छोड़ दिया गयाइसलिए हमारा रुख उसकी गिरफ्तारी को लेकर बिलकुल साफ है 
गिरफ्तार हुआ हाफिज सईद, माजिद मेमन बोले- ईमानदारी से हो कार्रवाई​
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी) ने मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड एवं प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) के सरगना हाफिज सईद को आतंकवाद के वित्त पोषण के आरोपों में गिरफ्तार किया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका की पहली यात्रा से कुछ दिन पहले यह कार्रवाई की गई है सीटीडी के एक अधिकारी ने बताया कि सईद आतंकवाद वित्तपोषण को लेकर उसके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत के लिये लाहौर से गुजरांवाला जा रहा था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया अमेरिका के सईद की गिरफ्तारी पर एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की है
इमरान खान के झांसे में न आए अमेरिका -- सूत्र 
आतंकी गुट जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज़ सईद की गिरफ्तारी और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिए जाने की पाकिस्तानी मीडिया से मिली ख़बर पर सूत्रों के मुताबिक भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, "अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है... यह उनका कहना है... यह भी नहीं भूलना चाहिए कि (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री) इमरान खान जल्द ही पश्चिम की यात्रा पर जाने वाले है... वह अपनी छवि अच्छी बनाना चाहते हैं... सो, भले ही यह गिरफ्तारी सचमुच हुई हो, हमें इसके झांसे में नहीं आना चाहिए..."
मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा (जेयूडी) सरगना हाफिज सईद को आतंकवाद रोधी विभाग(सीटीडी) ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सईद आतंकवाद रोधी अदालत में पेश होने के लिए लाहौर से गुजरांवाला आया था तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया उसके खिलाफ कई मामले लंबित हैं, उन्होंने बताया कि उसे एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है
सईद के नेतृत्व वाला जेयूडी लश्कर-ए-तैयबा का ही संगठन है जो 2008 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार है। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे अमेरिका के वित्त विभाग ने सईद को आतंकवादी सूची में डाल रखा है और अमेरिका ने 2012 से ही सईद को सजा दिलाने के लिए सूचना देने के वास्ते एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेयूडी और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों और आतंकवाद के वित्त पोषण के वास्ते निधि जुटाने के लिए ट्रस्टों के इस्तेमाल के मामलों की जांच शुरू की है
पाकिस्तान की कार्यवाही महज एक दिखावा -- भारत 
भारत ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई महज़ एक दिखावा है दाऊद कहां है ये किसी से छिपा नहीं है हम सामान्य संबंध चाहते हैं जो आतंकवाद से मुक्त हो एक दिन पहले हाफिज सईद के खिलाफ आतंक के वित्तपोषण के मामले में जो मामला दर्ज किया गया है, वह पाकिस्तान पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से किया गया विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ईमानदारी का आकलन आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई के आधार पर होगा, न कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में की गई आधी-अधूरी कार्रवाई के आधार पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान हर बार कार्रवाई की बात करता है, लेकिन यह सब दिखावा है जो पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को दिखाता है 
एक दिन पहले ही पाकिस्तान सरकार ने जमाद-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद और उसके तीन अन्य सदस्यों के खिलाफ आतंकवाद के लिए धन उपलब्ध कराने के मामले में मामला दर्ज किया है पंजाब आतंकवाद निरोधक विभाग ने हाफिज के प्रतिबंधित संगठन के खिलाफ यह कार्रवाई की हैआतंकवाद निरोधक कानून के तहत पांच प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ लाहौर, गुजरांवाला और मुल्तान में दावातुल इरशाद ट्रस्ट, मोएज बिन जवाल ट्रस्ट, अल अनफाल ट्रस्ट, अल मदीना फाउंडेशन ट्रस्ट और अलहमाद ट्रस्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है 
क्या आतंक को लेकर पाकिस्तान का रुख बदलेगा?
हाफिज सईद और उसके तीन सहयोगियों को हालही पाकिस्तान में आतंक रोधी एक अदालत ने, अपने मदरसे के लिए जमीन के अवैध इस्तेमाल से जुड़े मामले में तीन अगस्त तक अग्रिम जमानत दी थी
लाहौर में आतंक रोधी अदालत (एटीसी), ने सईद और उसके सहयोगियों- हाफिज मसूद, अमीर हमजा और मलिक जफर को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर तीन अगस्त तक अंतरिम जमानत दी थी
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यूएस कमेटी ने ट्रम्प पर किया पलटवार: पाक हाफिज को तलाश नहीं रहा था, वह स्वतंत्र रूप से रह रहा था
इससे पहले ‘डॉन' अखबार ने खबर दी थी कि एटीसी ने जेयूडी नेताओं को 31 अगस्त तक अंतरिम जमानत प्रदान की है आतंक रोधी विभाग (सीटीडी) ने लाहौर में अवैध तरीके से एक भूखंड हड़पने और उस पर मदरसा बनाने के लिए सईद और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी(एजेंसीज)

मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को NIA ने किया गिरफ्तार

Asia Andrabi
आसिया अंद्राबी  |  तस्वीर साभार: BCCL
भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के केन्द्रीय गृह मंत्री बनने के बाद से कश्मीर समस्या पर मंथन शुरू होते ही, बड़े स्तर पर वर्षों से शहंशाही ज़िंदगी जीने वाले अलगाववादियों के विरुद्ध कार्यवाही ने गति पकड़ ली है। तुष्टिकरण के चलते पिछली सरकारें उन पर कोई कार्यवाही करने की बजाए दामादों की पाल, जनता में डर पैदा कर रखा था। परन्तु केन्द्र में सत्ता परिवर्तन ने सारे पासे ही पलट दिए। लोगों को डराने वाले ही अब डर के साये में जीने को मजबूर हैं। 
दिल्ली की एक अदालत ने आतंकवादी गतिविधियों के लिये धन मुहैया कराने के एक मामले में अलगाववादी मसरत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को दस दिनों के लिये एनआईए की हिरासत में भेज दिया। यह मामला 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ा हुआ है।
एक वकील ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश राकेश स्याल की अदालत में बंद कमरे में चल रही सुनवाई के दौरान तीनों को गिरफ्तार किया और 15 दिनों तक उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की। आरोपियों के वकील एम एस खान ने पीटीआई को बताया कि आसिया और शाह अलग-अलग मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं, जबकि आलम को ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू- कश्मीर से लाया गया था।
एनआईए ने 2018 में सईद, एक अन्य आतंकवादी सरगना सैयद सलाउद्दीन और दस कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के लिये कथित तौर पर धन मुहैया कराने और अलगाववादी गतिविधियों के मामले में आरोपपत्र दायर किया था।इसने कहा कि आरोपियों के खिलाफ जिन अपराधों के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है उनमें भादंसं की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराएं शामिल हैं।
एनआईए के मुताबिक, मामला 30 मई 2017 को दर्ज हुआ था और पहली गिरफ्तारी पिछले वर्ष 24 जुलाई को हुई थी। दरअसल जांच एजेंसी तीनों आरोपियों से पत्थरबाजी और टेरर फंडिंग मामले में और इसके पीछे शामिल लोगों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहती है।

कौन हैं आसिया अंद्राबी

हुर्रियत की महिला विंग ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ चीफ आसिया अंद्राबी जानी-मानी अलगावावादी नेता हैं! 28 अगस्त 2010 को आसिया को देश में गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने, हिंसा फैलाने और देश के विरुद्ध युद्ध छेडने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 6 जुलाई 2018 को एनआईए ने आसिया अंद्राबी को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। आसिया के साथ उसकी दो सहयोगियों नाहिदा नसरीन और सोफी फहमीदा को भी गिरफ्तार किया गया था। 
कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी ने खुलासा किया है कि, वह पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी के जरिए लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के करीब आई थी। अधिकारी दुख्तारन-ए-मिल्लत नेता अंद्राबी का रिश्तेदार था। अंद्राबी के साथ ही दो अलगाववादी नेताओं से इन दिनों राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) पूछताछ कर रही है। कश्मीर यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक अंद्राबी चार साल पहले पाकिस्तानी झंडा फहराने और पाकिस्तानी राष्ट्रगान गाने के कारण सुर्खियों में आई थी। अंद्राबी के इस कृत्य के पीछे हाफिज सईद को माना जाता है !
एनआईए सूत्र ने कहा कि, अंद्राबी का भतीजा पाकिस्तान सेना में कैप्टन रैंक का अधिकारी है। उसका एक अन्य करीबी रिश्तेदार पाकिस्तान सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में है। अंद्राबी के रिश्तेदार दुबई और सऊदी अरब में भी हैं जहां से वह फंड प्राप्त करती है और भारत के खिलाफ गतिविधियों में उपयोग करती है। एनआईए ने अंद्राबी के खिलाफ एक केस दर्ज किया है जिसके तहत जमात-उद-दावा के अमीर और लश्कर के मास्टरमाइंड सईद बडे पैमाने पर अंद्राबी को फंड मुहैया कराते थे ! यह धन पत्थरबाजों और हुर्रियत के समर्थकों में बांटे गए थे जिन्होंने श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए !
आसिया अंद्राबी कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ महिलाओं को भडकाती थीं ! महिलाओं को भडकाने में अंद्राबी का अहम रोल माना जाता है। साथ ही इसे पाकिस्तान परस्त नेता को महिलाओं के रोल मॉडल के तौर पर भी पेश किया जाता है। अपने नफरत भरे भाषणों से आसिया अंद्राबी भारत के खिलाफ लडाई का झंडा बुलंद करती थी !

पाकिस्तान : हाफिज सईद को नहीं पढ़ने दी पसंदीदा जगह नमाज़

समय बड़ा बलवान होता है, जब मुंबई हमलों का मास्टर माइंड जिस जगह से भारत के खिलाफ अक्सर जहर उगलता था उस जगह पर हाफिज सईद को पाकिस्तान सरकार ने नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी। कई सालों में यह पहला अवसर है जब हाफिज सईद को पाकिस्तान के गद्दाफी स्टेडियम में ईद की नमाज का नेतृत्व नहीं करने दिया गया। यह हाफिज सईद का पसंदीदा स्थान है।
यहां से भगाए जाने के बाद सईद ने यहां अपने जौहर कस्बा स्थित आवास के पास एक स्थानीय मस्जिद में नमाज अदा की। उसके संगठन जेयूडी को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। एक अधिकारी ने बताया, ‘जेयूडी प्रमुख सईद गद्दाफी स्टेडियम में नमाज का नेतृत्व करना चाहता था लेकिन उसे एक दिन पहले (मंगलवार को) पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने ऐसा नहीं करने को कहा था।
यदि वह अपनी योजना (ईद की नमाज का नेतृत्व करने) पर आगे बढ़ता है तो सरकार उसे गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देश के बाद सईद के पास कोई और विकल्प नहीं था और उसने गद्दाफी स्टेडियम में नमाज का नेतृत्व करने की अपनी योजना रद्द कर दी।
अतीत में सईद न सिर्फ नमाज का नेतृत्व करता था, बल्कि इस तरह के धार्मिक उत्सवों पर इकट्ठी भारी भीड़ के समक्ष खासतौर पर कश्मीर के बार में अपने विचार भी प्रकट करता था। मुंबई हमलों के बाद सईद को 10 दिसंबर 2008 संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित कर दिया था। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे।

हरियाणा की एक मस्जिद में लगा आतंकी हाफिज सईद के लश्कर-ए-तैयबा का पैसा


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ पाकिस्तान गम्भीर वित्तीय संकट में है, तो दूसरी तरफ हाफिज सईद की पार्टी भारत के हरियाणा में मस्जिद बनवा देता है, जो शायद इस बात को सिद्ध करता है कि पाकिस्तान वित्तीय संकट का शोर मचाकर विश्व को यह संकेत देने का प्रयास कर रहा है कि "जो देश वित्तीय संकट में हो, आतंकवाद को बढ़ावा कैसे दे सकता है?" वास्तव में पाकिस्तान IMF के आलावा दूसरे देशों से आर्थिक मदद लेकर भारत के विरुद्ध आतंकवाद को बढ़ावा देने के अलावा पाकिस्तान समर्थकों की सहायता से मस्जिदें निर्मित कर साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने में प्रयत्नशील है। कश्मीर विचारक सुशील पंडित का कहना बिल्कुल ठीक है, कि "पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत भारत में मौजूद सैकड़ों पाकिस्तान और समर्थकों का होना है।"   
दिल्ली से सटे हरियाणा के पलवल जिले में बनी एक मस्जिद सुरक्षा एजेंसियों की जांच के घेरे में आ गई है। पलवल के उटावड़ गांव में खुलाफा-ए-रशीदीन मस्जिद की जांच में पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और वर्तमान में जमात-उद-दावा से संबंधित खूंखार आतंकी हाफिज सईद का नाम सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि इस मस्जिद में कथित रूप से पाकिस्तान में रह रहे हाफिज सईद के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का फंड लगा हुआ है।
पलवल के उटावड़ गांव में खुलाफा-ए-रशीदीन मस्जिद की जांच इसी महीने की 3 अक्टूबर को एनआइए अधिकारियों ने की थी। इसमें पता चला था कि इस मस्जिद का नक्शा भी दुबई में बना था। ऐसे में माना जा रहा है कि मस्जिद को बनाने में पैसा भी दुबई से आया होगा। एनआइए इस पहलू की जांच में जुट गई है।
एनआइए पहले ही टेरर फंडिंग के इस मामले में नई दिल्ली में मस्जिद के इमाम मोहम्मद सलमान सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बता दें कि सलमान (52), मोहम्मद सलीम और सज्जाद अब्दुल वानी को 26 सितंबर को लाहौर स्थित फलाह-ए-इंसानियायत फाउंडेशन (FIF) से फंड प्राप्त करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।
आसपास के लोगों को कहना है कि मस्जिद जिस जमीन पर बनी है, वो पहले से ही विवादित है। सलमान को लेकर यहां के लोगों को कहना है कि वह नहीं जानते कि वह किसी आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। फलाह-ए-इंसानियायत फाउंडेशन की स्थापना हफीज सईद के जमात-उद-दावा (लश्कर का मूल संगठन) द्वारा की गई थी।
दुबई में तैयार हुआ था मस्जिद का नक्शा
दिल्ली से सटे हरियाणा के पलवल जिले के मुस्लिम (मेव) बहुल गांव उटावड़ में बन रही मरकजी मस्जिद का नक्शा दुबई में तैयार हुआ था। इस नक्शे को के आरोपित मोहम्मद सलमान ने ही बनवाया था। सलमान इसके निर्माण का जायजा लेने हर जुमे (शुक्रवार) को निजामुद्दीन (दिल्ली) से उटावड़ आता था। पलवल के हथीन उपमंडल में आने वाले इस पिछड़े गांव के लोग मेहनत-मजदूरी करके गुजर-बसर करते हैं।

इस गांव या आसपास के इलाके में मरकजी मस्जिद जैसी पहले कोई मस्जिद तो क्या कोई निजी भवन भी नहीं है। मोहम्मद सलमान इस मस्जिद का निर्माण जामा मस्जिद के अनुरूप करवा रहा था। गांव के कुछ लोगों और मस्जिद के निर्माण में जुटे कारीगरों के अनुसार सलमान इसके निर्माण में बेहतरीन सामग्री इस्तेमाल करवा रहा था। इसका नाम भी सलमान ने खुलफा-ई-राशिदीन रखा है।
मोहम्मद सलमान 25 सितंबर से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की गिरफ्त में है। एनआइए के अधिकारियों ने सलमान के दुबई में कई आतंकी संगठनों से संबंधों की पुष्टि की है। एनआइए की गिरफ्त में होने के कारण मरकजी मस्जिद में पिछले दो बार से जुमे की नमाज बिना सलमान के पढ़ी गई है। इसके पहले आठ साल में हर जुमे की नमाज उसकी मौजूदगी में पढ़ी गई।
गांव के लोग बताते हैं कि सलमान ने यहां अपने लिए एक कमरा भी बनवाया है। वह उसी में ठहरता था। उससे आसपास के गांवों के लोग भी मिलने आते थे।
अख्तर हुसैन (पूर्व सरपंच, उटावड़) का कहना है कि सलमान पर लगे आरोप उटावड़ गांव सहित मेवात क्षेत्र के लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं । मरकजी मस्जिद के निर्माण का जिम्मा सलमान को 2010 में तब सौंपा गया था जब गांववासी इसे पूरा करने में असमर्थ हो रहे थे। गांव के कुछ प्रमुख लोग सलमान को निजामुद्दीन से बुलाकर लाए थे। उसे बुलाने की वजह यह थी कि उसके पिता मौलवी दाऊद का जन्म उटावड़ में हुआ था। गांववासियों को विश्वास है कि जांच में सलमान बेकसूर साबित होगा।
गौरतलब है कि संदिग्ध आतंकी हाफिज सलमान की गिरफ्तारी के बाद चर्चा में आई पलवल के उटावड़ क्षेत्र की मरकजी मस्जिद को आतंकी फंडिंग की आशंका पर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआइए) की टीम ने 3 अक्टूबर को मस्जिद को चंदे से मिले धन से जुड़े रजिस्टर व बैंक दस्तावेज कब्जे में ले लिए थे। 
3 अक्टूबर को उटावड़ पहुंची एनआइए की चार सदस्यीय टीम ने हरियाणा पुलिस की मौजूदगी में पांच घंटे तक मस्जिद परिसर में जांच- पड़ताल की और मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों के बयान लिए हैं। रजिस्टर और बैंक खाते जब्त किए डीसीपी अशोक डागर की अगुआई में टीम ने सबसे पहले मस्जिद प्रबंधन कमेटी से जुड़े लोगों से निर्माण खर्च बजट का आंकलन किया था।
बारीकी से रजिस्टरों को जांचा व चंदे के माध्यम से आई धनराशि व बैंक खातों का विवरण लिया। करीब पांच घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान एनआइए ने एक रजिस्टर, दो पॉकेट डायरी तथा कुछ कागजातों को कब्जे में लिया है। दिल्ली से गिरफ्तार हुआ था सलमान मूल रूप से उटावड़ निवासी सलमान व उसके दो साथियों को एनआइए की टीम ने विदेशी फंडिंग के मामले में दिल्ली से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय वह दिल्ली के निजामुद्दीन में रहता था। सलमान की ही देखरेख में उटावड़ मोड़ पर मस्जिद का निर्माण हो रहा था। निर्माण वर्ष 2010 में शुरू हुआ था।
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आरोप है कि सलमान का संपर्क पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना हाफिज सईद द्वारा चलाए जा रहे संगठन के एक सदस्य से था, जो दुबई में रहता है। उससे सलमान की फोन पर बातें होती थीं। सूत्रों के अनुसार सलमान व उसके दो साथियों से पूछताछ में मस्जिद को दुबई निवासी उक्त व्यक्ति द्वारा फंडिंग करने की बात सामने आई, उसी के बाद टीम जांच के लिए पहुंची।
आलोक मित्तल (महानिरीक्षक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने बताया कि सलमान से पूछताछ के आधार पर जांच चल रही है। पलवल के गांव उटावड़ में बनाई गई मस्जिद में दुबई के एक नागरिक के माध्यम से पैसा लगाने की बात सामने आई है। छानबीन शुरू कर दी गई है। जल्द ही सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।
यहां पर बता दें कि पिछले महीने 26 सितंबर को एनआइए ने मेवात से दिल्ली के एक हवाला डीलर को गिरफ्तार किया था। खुफिया एजेंसियों का आरोप है कि सलमान लश्कर के जुड़े पाकिस्तानी संगठन फलाह-ए-इंसानियत से फंड लेता था।
खुफिया सूचना पर 27 सितंबर को एनआइए ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। कार्रवाई के तहत दिल्ली के दरियागंज, निजामुद्दीन और कूचा घासीराम इलाके में एजेंसी ने छापा मारा था। इस छापे में टेरर फंडिंग मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया था।

गौरतलब है कि फलाह-ए-इंसानियत पाकिस्तान के लाहौर का एक संगठन है। इस जमात-उद-दावा ने स्थापित किया है और UAPA के अंतरगत आतंकी संगठन के श्रेणी में रखा गया है। NIA ने यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है।

आतंकवाद पर अपना रवैया नहीं बदलेगा पाकिस्तान!

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अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने कहा है कि पाकिस्तानी नेतृत्व आतंकवाद को अमेरिकी सरकार से अलग तरह से परिभाषित करता है और अमेरिका की मांग पर सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना नहीं है। अमेरिकन इंटरेस्ट जर्नल में एक आलेख में हक्कानी ने कहा है कि पाकिस्तानी नेतृत्व का मानना है कि अफगानिस्तान में उनका हित अमेरिका से काफी अलग है और यही अफगान युद्ध की समाप्ति में सहयोग की संभावना को सीमित करता है।
Image result for पाकिस्तान में आतंकवादवॉशिंगटन के ह्यूडसन इंस्टीट्यूट में अब दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के निदेशक हक्कानी ने कहा, "पाकिस्तानी नेतृत्व अमेरिकी सरकार से अलग तरह से आतंकवाद को परिभाषित करता है और ऐसी संभावना नहीं है कि वह सभी आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध कार्रवाई करे (जैसा कि अमेरिकी विदेश मंत्री) माइक पोम्पिओ की मांग है।"
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए दो अक्टूबर को पोम्पिओ से मिलने का कार्यक्रम है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत यात्रा के दौरान पांच सितंबर को इस्लामाबाद में संक्षिप्त ठहराव के दौरान यह वार्ता शुरु की थी। हक्कानी ने कहा, 'अमेरिकी राजनायकों ने पाकिस्तान में निर्णय लेने वालों को चीजें अपने ढंग से देखने के लिए अपने पाले में लाने की कोशिश में करीब तीन दशक बीता दिए हैं।'
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उन्होंने कहा कि (बात नहीं बनने पर) नतीजा यह निकला कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका ने इस साल जनवरी से पाकिस्तान को सभी सुरक्षा सहायता पर रोक लगा दी। हक्कानी ने चेतावनी दी कि ट्रंप प्रशासन को आतंकवाद के संदर्भ में पाकिस्तान से बहुत कम सहयोग के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पोम्पियो की संक्षिप्त यात्रा के हफ्ते भर के अंदर ही पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा से संबद्ध संगठन जमात उद दवा और उसके चैरिटी संगठन फलाही इंसानियत फाउंडेशन पर पिछली सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदी हटा दी। दोनों ही संगठनों का सम्बन्ध संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हाफिज सईद से है। 
हक्कानी ने आरोप लगाया कि यह इस बात का संकेत है कि सेना और न्यायपालिका का समर्थन प्राप्त पाकिस्तान की नई सरकार की मंशा किसी संगठन या व्यक्ति को अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित करने के प्रति सम्मान नहीं करना है। यह भी कहा जा सकता है कि बोतल जरूर बदल गयी है, लेकिन शराब वही पुरानी है। पाकिस्तान में सरकार किसी भी पार्टी की बन जाए, लेकिन कश्मीर और फौज के चुंगल से कोई बच नहीं पाया, जिसने भी प्रयास किया, वह सत्ता में टिक भी नहीं पाया।