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अमानतुल्लाह की शिकायत पर दिल्ली पुलिस हरकत में; लेकिन योगी जी दिल्ली विधायक अमानतुल्लाह पर कार्यवाही कब?

                                      यति नरसिंहानंद सरस्वती (बाएँ), अमानतुल्लाह खान (दाएँ)
आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित आलोचनात्मक टिप्पणियों के लिए डासना देवी मंदिर के प्रमुख पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती की जुबान और गर्दन काटने की माँग की।
‘नरसिंहानंद की जुबान और गर्दन काट कर सजा देनी चाहिए…’: पैगंबर मोहम्मद की आलोचना पर AAP नेता अमानतुल्लाह
गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार महेंद्र सिंह मनराल के अनुसार दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर पैंगबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A और 295-A के तहत पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यति नरसिंहानंद की टिप्पणी वाला यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने इस वीडियो को लेकर दिल्ली के जामिया नगर थाने में महंत के खिलाफ शिकायत की थी। अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर कहा था कि नरसिंहानंद की गुस्ताखी के लिए उनके ख़िलाफ़ जामिया नगर में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
ऐसे में ज्वलंत प्रश्न यह है कि आखिर दिल्ली पुलिस ने एक तरफ़ा कार्यवाही क्यों की? क्यों नहीं अमानतुल्लाह के विरुद्ध भड़काऊ बयान का संज्ञान लिया? खैर, क्या न्यायालय मुस्लिम लेखक अनवर शेख की पुस्तकों और मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जे एस लोहत द्वारा 31 जुलाई 1986 को दिल्ली की एक कोर्ट द्वारा इसी विवाद पर दिए निर्णय का संज्ञान लेगी? 
http://indiafacts.org/court-ruling-ayats-quran-cause.../
Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts
INDIAFACTS.ORG
Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts
अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हिन्दू स्वयंसेवी संस्थानों आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और हिन्दू महासभा आदि को भी दिल्ली विधायक के विरुद्ध एक हिन्दू नेता को धमकी देने के आरोप में कार्यवाही करनी चाहिए। 

अमानतुल्लाह खान ने यति नरसिंहानंद सरस्वती का इस्लाम की निंदा करता हुआ वीडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।”

अमानतुल्लाह के इस दो-मुखी बयान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संज्ञान लेकर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। अगर इन लोगों को अपने इस्लाम की बुराई पसंद नहीं, फिर किस आधार पर ये लोग हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित भाषा का प्रयोग करते हैं? दूसरे, शार्ली एब्डोलो द्वारा कार्टून पर शोर मचा सकते हैं, सलमान रश्दी और तस्लीमा के विरुद्ध हंगामा कर सकते हैं, लेकिन अनवर शेख के विरुद्ध बोलने अथवा फतवा देने का विश्व में किसी में साहस नहीं हुआ। जिनकी पुस्तकें इस्लाम और पैगम्बर को तार-तार किया है। दुनियां में हर धर्म के देवी-देवताओं पर शोध हुए हैं, जरुरी है इस्लाम पर भी शोध हुआ होगा, क्यों नहीं जगजाहिर किया जाता? यति नरसिंहानंद हो या कमलेश तिवारी इन्होंने उन्हीं तथ्यों को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं, जिस शोध को जनता से छुपाया जा रहा है। यदि अमानतुल्लाह के उकसाने पर किसी सिरफिरे ने यति का कमलेश तिवारी वाला हाल किया, इसका अंजाम इतनी दूर तक जाने की संभावनाएं हैं, कोई कल्पना भी नहीं कर पाएगा। केवल भारत ही नहीं विश्व में एक नयी बहस छिड़ जाएगी, जिसकी गूंज कट्टरपंथियों की रोटी ही नहीं रातों की नींद हराम कर देगा। (पढ़िए नीचे मीनाक्षीपुरम का कड़वा सच, जब कांग्रेस काल में हिन्दुओं का इस्लामीकरण किया गया था, लेकिन डॉ नसरुद्दीन कमाल परिवार सहित हिन्दू बन गया। )   

यति नरसिंहानंद सरस्वती प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहाँ उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की असलियत को उजागर करने के लिए हिंदुओं से निडर होने का आग्रह किया। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा:

“अगर इस्लाम की असलियत, जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि अगर मोहम्मद के बारे बोला तो सिर काट देंगे… हिंदू ये भय अपने दिमाग से निकाल दें। हम हिंदू हैं। हम राम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, हम परशुराम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, तो हमारे लिए मोहम्मद क्या चीज है? हम मोहम्मद की मीमांसा क्यों नहीं करेंगे और क्यों सच नहीं बोलेंगे?”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आज मोहम्मद का सच दुनिया के मुसलमान को चल जाए तो उसे अपने मुसलमान होने पर शर्म आएगी। क्योंकि भगवान हर इंसान के अंदर एक अंतरात्मा देता है, जिसे पता होता है कि क्या अच्छा है, क्या बुरा है और जब किसी इंसान को पता चलेगा कि वो केवल एक चोर, लुटेरे, बलात्कारी को, औरतों की सौदागरी करने वाले को फॉलो कर रहा था, तो उसे शर्म आएगी। ये तो हिंदुस्तान के घटिया नेता और नकली धर्मगुरु हैं, जिन्होंने इस्लाम जैसी गंदगी का महिमामंडन कर दिया। अगर इस्लाम के बारे में खुल कर बोला जाता तो आज हम मुसलमान को अपने मुसलमान होने पर शर्म आती। उसे शर्म आती कि वो हिंदुओं के खाने में थूक रहा है, उसे शर्म आती कि उसने अपने भाई जैस दोस्त की पत्नी और बेटी पर गंदी निगाह डाली।” 

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वैदेही और इस्लाम....

23 फरवरी 1981 का दिन था वह, जब तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में डाँ० नसरुद्दीन कमाल अपने साथियों के साथ एक दलित परिवार को बंधक बनाए हुए थे। घर के सभी लोगों ने इस्लाम कबूल लिया था, घर के लोग ही क्यों लगभग एक हजार दलित धर्मांतरण करके जबरन मुस्लिम बनाए चुके थे। इसलिए मीनाक्षीपुरम का नाम बदलकर रहमतनगर रख दिया गया था।

यह दलित गिने के घर की कहानी है। उसकी 8 वर्ष की पोत्री थी वैदेही...वह किसी भी कीमत पर मुस्लिम बनने को तैयार नहीं हुई,

‘‘मै मर जाऊंगी लेकिन कलमा नहीं पढ़ूंगी,’’ उसने अपने दादा से कहा था, ‘‘बाबा आपने ही तो मुझे गायत्री मंत्र सिखाया था ना...आपने ही तो बताया था कि यह परमेश्वर की वाणी वेदों का सबसे सुंदर मंत्र है, इससे सब मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, फिर मैं उन लोगों का कलमा कैसे पढ़ सकती हूं, जिन्होंने मेरे सहपाठियों का कत्ल कर दिया, क्योंकि वे भी मुस्लिम नहीं बनना चाहते थे।

हम ऐसे मजहब को कैसे अपना सकते हैं?, जिसे न अपनाने पर कत्ल का भय हो, मुझे तो गायत्री मंत्र प्रिय है जो मुझे निर्भय बनाता है।’’

''बेटी जीवन रहेगा तो ही धर्म रहेगा ना...जिद छोड दे और कबूल कर ले इस्लाम।'' बाबा ने अंतिम प्रयास किया था।

उसने बाबा से सवाल किया था, ''बाबा आपने एक दिन बताया था कि गुरु गोबिंद सिंह के दो बच्चे दीवार में जिंदा चिनवा दिए थे, लेकिन उन्होंने इस्लाम नहीं कबूला था, क्या मैं उन सिख भाइयो की छोटी बहन नहीं? जब वे धर्म से नहीं डिगे तो मैं कैसे डिग सकती हूं?''

‘‘दो टके की लड़की, कलमा पढ़ने से इंकार करती है,’ डाँ० नसरूद्दीन कमाल के साथ खड़े मौलाना नुरूद्दीन खान ने उसके बाल पकड़ते हुए चूल्हे पर गर्म हो रहे पानी के टब में उसका मुंह डूबा दिया था। पानी भभक रहा था, इतना गर्म था कि बनती भाप धुंए के समान नजर आ रही थी। बालिका के चेहरे की चमड़ी निकल गई थी एक बार ही डुबोते, चीख पड़ी थी, ‘‘भगवान मुझे बचा लो?’’

‘‘तेरा पत्थर का भगवान तुझे बचाने नहीं आएगा, अब तो इस्लाम कबूल ले लड़की, नहीं तो इस बार तुझे इस खोलते पानी में डुबा दिया जाएगा।’’ मौलवी ने कहा था, फिर उसके दादा ने भी कहा, ‘‘कबूल कर ले बेटी इस्लाम, हम भी सब मुसलमान बन चुके, तू जिंदा रहेगी तो तेरे सहारे मेरा भी बुढ़ापा भी कट जाएगा।’’

मौलवी ने चूल्हे के पास से मिर्च पाउडर उठाकर उसकी आंखों में भरते हुए और चेहरे पर मलते हुए कहा, ‘‘दूध के दांत टूटे नहीं, और इस्लाम नहीं कबूलेगी।’’

एक बार फिर तड़प उठी थी वह मासूम, पर इस बार भी यही कह रही थी, ‘‘नहीं मैं इस्लाम नहीं कबूल करूंगी।’’

मौलवी को भी क्रोध आ गया था, इस बार तो उसका सिर जलते हुए चूल्हें में ही दे डाला था। परंतु प्राण त्यागते हुए भी उस बालिका के मुख से यही निकल रहा था, ‘‘मैं इस्लाम नहीं कबूल करूंगी।’’

अंतिम बार डाॅक्टर नसरूद्दीन कमाल की ओर आशा भरी दृष्टि से देखा था, ‘‘मेरा धर्म बचा लो...डाॅक्टर साहब...पत्थर के भगवान नहीं आएंगे, आज से मैंने तुझे भगवान मान लिया...’’

अब उसमें कुछ नहीं रहा था, वह तो मिट्टी बन चुकी थी, डाँ० नसरूद्दीन कमाल भी तो धर्मांतरण करने वाले लोगों की मंडली में ही शामिल था, लेकिन उस बालिका ने पता नहीं उसमें क्या देखा कि विधर्मी से ही धर्म बचाने की गुहार लगा बैठी थी, उस असहाय बालिका का धर्म के प्रति दृढ़ निश्चय देखकर हृदय चीत्कार कर उठा था नसरूद्दीन कमाल का, ‘‘या अल्लाह ऐसे इस्लाम के ठेकेदारों से तो मर जाना अच्छा है।’’ वह घर की ओर भाग लिया था और डाँ० नसरूद्दीन कमाल पूरे दस दिन अपने घर से नहीं निकला, कुछ खाया पीया नहीं, बस उस बालिका का ध्यान बराबर करता और आंखों में आंसू भर आते उसके...गायत्री मंत्र का अर्थ जानने के लिए उसने एक किताब खरीदी, गलती से वह नूरे हकीकत यानी सत्यार्थ प्रकाश थी। उसने उसका गहराई से अध्ययन किया और 11 नवंबर 1981 को एक जनसमूह के सामने विश्व हिन्दू परिषद और आर्य समाज के तत्वावधान में अपने पूरे परिवार के साथ वैदिक धर्म अंगीकार कर लिया।

डाँ० नसरूद्दीन ने अब अपना नाम रखा था आचार्य मित्रजीवन, पत्नी का नाम बेगम नुसरत जहां से श्रीमती श्रद्धादेवी और तीन पुत्रियों शमीम, शबनम और शीरीन का नाम क्रमशः आम्रपाली, अर्चना और अपराजिता रखा गया।

15 नवंबर 1981 को आर्य समाज सांताक्रुज, मुंबई में उनका जोरदार स्वागत हुआ, जहां उन्होंने केवल एक ही बात कही, ‘‘मैं वैदेही को तो वापस नहीं ला सकता, लेकिन हिन्दू समाज से मेरी विनती है, मेरी बेटियों को वह अपनाए, वे हिन्दू परिवारों की बहू बनेंगी तो समझूंगा कि उस पाप का प्रायश्चित कर लिया, जो मेरी आंखों के सामने हुआ। हालांकि वह मैंने नहीं किया, लेकिन मैं भी दोषी था, क्योंकि मेरी आंखों के सामने एक मासूम बालिका की निर्मम हत्या कर दी गई।’’

आचार्य मित्रजीवन ने अपना शेष जीवन वेदों के प्रचार-प्रसार में लगा दिया, इसलिए उन्हें आज बहुत से लोग जानते हैं, उनकी पुस्तकें पढ़ते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि वे जन्म से मुस्लिम थे और यह तो कोई जानता ही नहीं कि वैदेही कौन थी?

साभार ......

वेद वृक्ष की छाया तले, पुस्तक का एक अंश

लेखिका फरहाना ताज

स्रोत : वैदेही के संदर्भ के लिए देखें 24 फरवरी 1981 इंडियन एक्सप्रेस

वैदिक गर्जना, मासिक पत्रिका 1982

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लोगों ने लगा दी अमानतुल्लाह और केजरीवाल की क्लास:-

इससे पहले भी अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन का बचाव करने के लिए ’मुस्लिम कार्ड’ खेला था। उसने उसके खिलाफ ढेर सारे सबूतों को अनदेखा करते हुए दावा किया कि उसे सिर्फ इसलिए सजा दी जा रही है क्योंकि वह मुस्लिम है। बता दें कि खान पर खुद CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान 15 दिसंबर, 2019 को दिल्ली में हिंसा भड़काने का आरोप है।

अब श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर अवैध अतिक्रमण हटवाने का दावा करेगी हिन्दू महासभा

श्रीनिवास आर्य

नई दिल्ली : श्री रामजन्मभूमि के केस को 1949 से ही लड़ कर उसमें सफलता का कीर्तिमान स्थापित करने वाली हिन्दू महासभा ने अब मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर अपना दावा करते हुए कहा है कि यह जन्मभूमि भी वैसे भी हिन्दू धर्म के पवित्र स्थलों में सम्मिलित है जैसे श्रीराम जन्मभूमि सम्मिलित रही है।
इस संबंध में पार्टी की ओर से आहूत प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बाबा नंदकिशोर मिश्र ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा हुआ प्रश्न है। जिसके ऐतिहासिक प्रमाण हिन्दू महासभा न्यायालय के समक्ष उचित समय पर प्रस्तुत करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जी के मंदिर के निर्माण के लिए बनाया गया ट्रस्ट पूर्णतया असंवैधानिक और अवैधानिक है। जिसकी बाबत प्रधानमंत्री श्री मोदी को भी अवगत करा दिया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट में पार्टी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि न रखा जाना और उसके भूमि पूजन के समय पार्टी की ओर से किसी भी प्रतिनिधि को न बुलाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

 श्रीराम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को बताया अवैधानिक और असंवैधानिक , कहा – जाएंगे न्यायालय

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में जिन संस्थाओं व संगठनों को स्थान दिया गया है उनका श्रीराम जन्मभूमि की मूल लड़ाई से कोई संबंध नहीं है । ऐसे में मूल पक्षकार को भूल जाना मोदी सरकार के लिए शूल के समान होगा।
जबकि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया ने कहा कि केवल हिन्दू महासभा ही एक ऐसी पार्टी है जो 1949 से श्रीराम जन्मभूमि का केस लड़ती चली आ रही है। इसके उपरांत भी पार्टी को उपेक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि महंत अवैद्यनाथ जैसी पुण्य आत्माओं का नाम लेकर सरकार जब उनके प्रति अपनी झूठी श्रद्धा प्रकट करती है तो उसके लिए यह भी आवश्यक हो जाता है कि उन जैसी पुण्यात्माओं की विचारधारा को सहेज कर चलने वाली हिन्दू महासभा को भी ट्रस्ट में उचित स्थान और सम्मान दिया जाता। पर सरकार की ओर से ऐसा न किए जाने से पार्टी अपने आपको आहत और क्षुब्ध महसूस करती हैं। इसलिए उक्त प्रसंग में पार्टी की ओर से विधिक नोटिस जारी किया गया है और मांग की गई है कि उक्त संबंध में बनाए गए ट्रस्ट में पार्टी की ओर से प्रतिनिधि रखा जाए अन्यथा पार्टी उपरोक्त ट्रस्ट की वैधानिकता और संवैधानिकता को चुनौती देगी। श्री कालिया ने कहा कि पार्टी की ओर से यह निवेदन सरकार से किया गया था कि भूमि पूजन के समय पार्टी को आमंत्रित किया जाए, परंतु सरकार की ओर से ऐसी किसी उदारता का परिचय नहीं दिया गया, जो कि निंदनीय है। पार्टी के बलिदानी इतिहास की ओर इंगित करते हुए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि सबसे पहले हिन्दू महासभा ने ही श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति की आवाज उठाई थी। उसके साथ ऐसा उपेक्षा पूर्ण व्यवहार किया जाना पूर्णतया निंदनीय है।
पार्टी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि के संबंध में अपील संख्या 236 (1921) एवं 276 (1920) में मथुरा के तत्कालीन जिला न्यायालय ने आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि यह भूमि हिंदुओं की है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया था कि उक्त भूमि से ईदगाह का कोई लेना देना नहीं है। न्यायालय ने उस समय इस भूमि को राजा पत्नीमल के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी से खरीदी हुई भूमि होने के कारण हिंदुओं की भूमि सिद्ध किया था । 1928 में मुस्लिमों ने फिर इस भूमि पर ईदगाह की मरम्मत की कोशिश की तो उस समय फिर न्यायालय ने इस भूमि को राजा पत्नीमल के उत्तराधिकारीयों की भूमि माना और मुस्लिमों को ईदगाह की मरम्मत करने से रोक दिया।
श्री आर्य ने कहा कि 1944 में मालवीय जी की प्रेरणा से जुगल किशोर बिरला ने इस भूमि को ₹13400 में खरीद लिया था। 1946 में मामला फिर अदालत में गया तो फिर वही निर्णय आया और स्पष्ट किया गया कि यह भूमि अब ट्रस्ट की भूमि है। ऐसा ही निर्णय स्वतंत्र भारत में 1960 में भी दिया गया कि भूमि श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की है। श्री आर्य ने कहा कि ऐसे में अब यह आवश्यक हो जाता है कि 1944 में जितनी भूमि श्री जुगल किशोर बिरला जी द्वारा खरीदी गई थी सरकार उतनी ही भूमि पर 
हिन्दू समाज का कब्जा स्थापित कराए। श्री आर्य ने कहा कि अब तक कुल 6 बार न्यायालय ने हिंदुओं के पक्ष में आदेश दिए हैं।
इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय विधिक प्रभारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इक्रांत शर्मा ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने सभी आवश्यक तथ्य , साक्ष्य व प्रमाणों को एकत्र कर लिया है और यदि आवश्यक हुआ तो उचित समय पर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर इस पवित्र भूमि को हिंदू समाज को दिलाने का कार्य पार्टी के दिशा निर्देश अनुसार करेंगे। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री विपिन खुराना ने पार्टी की इस संबंध में अब तक की गई कार्यवाही का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए राजेश मणि त्रिपाठी व वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन की ओर से भी कार्यवाही की गई है, जिसका हिंदू महासभा समर्थन करती है। पार्टी के विधिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इक्रांत शर्मा ने पार्टी के विधिक कार्यों की जानकारी दी । जबकि राष्ट्रीय महामंत्री श्री एसडी विजयन ने पार्टी के सांगठनिक कार्यों के बारे में पत्रकारों को जानकारी दी। 
(फोटो अजय आर्य )
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विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण शुरू होने के साथ ही अब वाराणसी में ‘....

‘कमलेश तिवारी के हत्यारों को 72 तोपों की सलामी दी जाए’ – कमेंट पर दानिश नवाब, मोहम्मद इमरान गिरफ़्तार

कमलेश तिवारी की हत्या
                                                                                                                                                                प्रतीकात्मक चित्र 
हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में अब तक कई ख़ुलासे हो चुके हैं। इनमें आरोपितों की पहचान से लेकर उनके हत्या करने की साज़िश तक का ख़ुलासा हो गया है। जिस योजनाबद्ध तरीक़े से कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या की गई, उसका भी पता चल चुका है। मिटाई के डिब्बे में असलहे और पिस्टल को छिपाकर किस तरह से हत्या की इस ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम दिया गया, वो किसी के भी दिल को दहलाने में सक्षम है।
जहाँ एक ओर इस हत्याकांड की देशभर में भरसक निंदा हो रही है, वहीं कुछ अराजक तत्व अपनी विकृत मानसिकता के चलते भद्दे कमेंट करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर से सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कमलेश तिवारी की हत्या को लेकर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने दानिश नवाब और मोहम्मद इमरान अंसारी को गिरफ़्तार किया है।
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इन आरोपितों ने कमलेश तिवारी की मौत का मज़ाक उड़ाते हुए उनकी हत्या करने वालों को 72 तोपों की सलामी दिए जाने की बात कही। फेसबुक पर की गई यह टिप्पणी जैसे ही वायरल हुई, हिन्दू संगठनों ने जमकर प्रदर्शन किया और आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की माँग की। प्रदर्शनकारियों में ब्राह्मण महासभा सेवा समिति, हिन्दू जागरण मंच और करणी सेना शामिल थी, जिन्होंने अकबरपुर थाने में तहरीर दी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया। 
मोहम्मद इमरान अंंसारी ने फ़ेसबुक पर हँसी-ठिठोली की इमोजी का इस्तेमाल करते हुए ‘एक ट्रक निंदा’ कमेंट लिखकर कमलेश तिवारी की हत्या की ख़बर शेयर की, इस पर अकबरपुर थाना इलाक़े के निवासी दानिश नवाब ने कमेंट किया, “जिसने भी मारा हो उसे 72 तोपों से सलामी दी जाए।” इस विवादित टिप्पणी के सामने आते ही हिन्दू संगठनों में आक्रोश फैल गया। क़रीब एक घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद एसपी वीरेंद्र कुमार मिश्र के निर्देश पर आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। एसपी ने आरोपितों की गिरफ़्तारी की पुष्टि की।
सोशल मीडिया पर एक हिन्दू नेता की सरेआम हत्या कर दिए जाने पर कुछ लोगों ने इसकी भर्त्सना की, वहीं कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों ने अपनी नीचता का परिचय यहाँ भी दिया। सोशल मीडिया पर “हा-हा” रिएक्शन देने वालों में फ़हीम रहमान, नदीम अख़्तर, मोहम्मद इमरान जैसे विकृत मानसिकता वाले लोग भी शामिल हैं, तो “लव” रिएक्ट करने वालों में सलाउद्दीन अंसारी और मुहम्मद समीउल्लाह के नाम सामने आए।

कमलेश तिवारी मर्डर: अशफाक और मोईनुद्दीन ने की हत्या, खालसा होटल से मिला खून लगा कुर्ता

कमलेश तिवारी, ख़ुलासाहिंदू समाज पार्टी के प्रमुख और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्याकांड में एक बड़ा ख़ुलासा हुआ है। दोनों हत्यारे लखनऊ के ही नाका थाना क्षेत्र के खालसा होटल में ठहरे थे। हत्या करने वाले दोनों आरोपितों के भगवा कपड़े और बैग बरामद कर लिए गए हैं। होटल के कमरे से जो भगवा वस्त्र मिले हैं उन पर ख़ून के निशान लगे हुए हैं। पुलिस ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट के साथ मिलकर पूरे कमरे की सघन जाँच की और संदिग्ध सामान को क़ब्ज़े में ले लिया है। हत्या करने के बाद दोनों आरोपितों की लोकेशन भी ट्रेस हो गई है। लखनऊ से निकल के हरदोई और बरेली होते हुए गाज़ियाबाद तक की लोकेशन मिली है।


ख़बर के अनुसार, शनिवार (19 अक्टूबर) को मामले की जाँच कर रही टीम को सूचना मिली थी कि पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत खालसा होटल के कमरे में कुछ भगवा कपड़े और बैग पड़ा है। सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस मौक़े पर पहुँची और फील्ड यूनिट को बुलाकर साक्ष्य इकट्ठे किए। मौक़े पर आला अधिकारियों ने भी पहुँचकर मुआयना किया।
कमलेश तिवारी हत्याकांड: होटल के कमरे से मिला लावारिस बैग और भगवा कुर्ता, फॉरेंसिक टीम ने कमरे को किया सीलइससे साफ़ पता चलता है कि कमलेश तिवारी की हत्या करने के बाद भी हमलावर शहर में घूमते रहे। इसके बाद वो होटल पहुँचे और वहाँ अपने कपड़े बदले। काफ़ी देर वहाँ रुकने के बाद वो शनिवार की सुबह वहाँ से फ़रार हो गए। जाँच में पता चला है कि अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन ने होटल का कमरा बुक कराया था। दोनों असली नाम से ही होटल में रुके थे। 
जानकारी के मुताबिक़, 17 अक्तूबर को रात 11 बजे होटल आए थे। 18 अक्टूबर को सुबह साढ़े 10 बजे होटल से निकल गए। इसके बाद दोपहर 1.21 बजे होटल में वापस आए और दोपहर को 1.37 बजे वापस निकल गए। उद्योगनगरी एक्सप्रेस से दोनों हत्यारे कानपुर पहुँचे थे। सड़क से दोनों हत्यारे लखनऊ पहुँचे थे। इस बात का ख़ुलासा पुलिस ने प्रेस रिलीज़ में किया है।
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि दोनों हमलावरों की आख़िरी लोकेशन बरेली थी। हमलावर कुछ समय तक बरेली में रहे और फिर शहर से भाग गए। फ़िलहाल, यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) समेत कई पुलिस दल आरोपितों की धर-पकड़ में जुटे हुए हैं।
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हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में उत...

लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को हत्या की वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

कमलेश राह का काँटा था, जो भी इस्लाम की ओर ऊँगली उठाएगा, उसका होगा यही अंजाम: अलहिंद ब्रिगेड

कमलेश तिवारीउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के घनी आबादी वाले नाका हिंडोला इलाके में शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) को हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े नृशंस हत्या कर दी गई। मामले की जाँच के लिए विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर तथाकथित संगठन अलहिंद ब्रिगेड के नाम से एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल मैसेज में हत्या की जिम्मेदारी ली गई है।
इस मैसेज को वायरल करके यह दावा किया जा रहा है कि जो भी इस्लाम या मुस्लिमों पर उँगली उठाने का काम करेगा, उसका अंजाम इसी तरह का होगा। इस मैसेज में कमलेश तिवारी की फोटो भी लगी हुई है। वायरल हो रहे मैसेज में लिखा है, “कमलेश तिवारी राह का काँटा था और जो कोई भी इस्लाम और मुस्लिमों की तरफ उँगली उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा। अलहिंद ब्रिगेड जिम्मेदारी लेता है। और ज्यादा देखने के लिए तैयार हो जाओ। युद्ध शुरू हो गया है। अलहिंद ब्रिगेड कमलेश तिवारी की हत्या की जिम्मेदारी लेता है, जिसने इस्लाम और मुस्लिमों को बदनाम किया था।”
हालांकि मैसेज की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यूपी पुलिस के पास भी यह मैसेज मौजूद है जिसकी जाँच की जा रही है। पुलिस हर एंगल से इसकी जाँच में जुटी है। फिलहाल इस बात का पता नहीं चल पाया है कि अलहिंद ब्रिगेड नाम के इस तथाकथित संगठन का किसी वैश्विक आतंकी संगठन से कोई रिश्ता है या नहीं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि ऐसा मैसेज वायरल करके सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोई साजिश हो।
इधर, पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार देर रात कमलेश तिवारी का शव सीतापुर के महमूदाबाद स्थित उनके पैतृक आवास लाया गया। शव के पहुँचते ही कमलेश के घर में चीख पुकार मच गई। परिजनों में गम के साथ-साथ गुस्सा भी है। परिजनों ने माँग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद उनके घर आएँ। यदि वे नहीं आएँगे तो शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों के लिए सरकारी नौकरी की भी माँग की है।
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हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े हत्याकांड मामले में उनके नौकर सतेंद्र ने मीडिया को रो-रोकर पूरे ह...

उल्लेखनीय है कि कमलेश तिवारी की पत्नी ने अपनी तहरीर में साफ लिखा है कि यूपी में बिजनौर जिले के रहने वाले मोहम्मद मुफ्ती नईम काजमी और अनवारुल हक ने साल 2016 में उनके पति कमलेश का सर काटने के लिए डेढ़ करोड़ रूपए के इनाम की सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी। इस सम्बन्ध में कमलेश की पत्नी ने पुलिस में दोनों आरोपितों के खिलाफ दफा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है। कमलेश की पत्नी का यह दावा है कि इन दोनों ने साजिशन उनके पति कमलेश तिवारी की हत्या कराई है।

कमलेश तिवारी के नौकर सतेंद्र ने बताई हत्याकांड की पूरी कहानी

कमलेश तिवारी हत्याकांडहिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े हत्याकांड मामले में उनके नौकर सतेंद्र ने मीडिया को रो-रोकर पूरे हत्याकांड का हाल बताया। यह पूछे जाने पर कि जिस समय हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया उस वक़्त उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड कहाँ थे, तो उनके नौकर ने जवाब दिया कि वो तो रात से ही मौजूद नहीं थे और जो सिपाही (सिक्योरिटी गार्ड) था वो लेटा हुआ था।
सतेंद्र ने बताया कि उन लोगों (हमलावर) ने तिवारी जी से 10 मिनट पहले फोन पर बात की, उसके बाद वो लोग तिवारी जी से मिलने आए। उस समय सिपाही (सिक्योरिटी गार्ड) सोया हुआ था। वो लोग तिवारी जी से मिलने ऊपर उनके रूम में चले गए। उन्हें देखकर तिवारी जी बाहर आए और उनसे आधे घंटे तक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने (हमलावर) दही-बड़ा खाया, और चाय भी पी।
सतेंद्र ने रोते हुए बताया कि उसने देखा कि गुरू जी (कमलेश तिवारी) टेबल के नीचे थे और उनसे मिलने वाले दोनों हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे, जैसे ही उसने टेबल के नीचे ख़ून देखा तो उसके होश उड़ गए।
इसके आगे सतेंद्र ने बताया कि आरोपितों और तिवारी के बीच किसी मुस्लिम लड़की की हिन्दू लड़के से शादी की कोई बात चल रही थी। इसके बाद उन गुंडों ने नौकर सतेंद्र को 100 रुपए का नोट दिया और गोल्ड फ्लैक्स पाँच सिगरेट लाने को कहा। वो पैसे लेकर बगल की दुकान से सिगरेट लेने चला गया, शायद वो लोग मौक़ा ढूँढ़ रहे थे, लेकिन सतेंद्र दो मिनट में सिगरेट लेकर पहुँच गया। इसके बाद तिवारी जी ने अपने नौकर को मसाला लाने के लिए बोला। सतेंद्र ने बताया कि जब वो मसाला लेने गया और वापस आने पर उसने देखा कि दोंनोंं आदमी वहाँ से ग़ायब थे। 
सतेंद्र ने बताया कि वो हत्या के बाद आधे घंटे से पुलिस को फोन करता रहा, लेकिन फोन लग ही नहीं रहा था… 100 नंबर भी नहीं मिल रहा था। इसके बाद इतनी देर में तो वो लोग (हमलावर) पता नहीं कहाँ चले गए। सतेंद्र ने बताया कि कार्यालय में जो सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था वो भी काम नहीं करता। तिवारी जी ने कई बार कहा कि यहाँ पर फ़ोर्स बढ़ाओ, लेकिन तब भी यहाँ एक बुज़ुर्ग को रख दिया गया। वो जब भी यहाँ आते हैं, हमेशा सोए-लेटे हुए ही रहते हैं। हमलावरों के बारे में सतेंद्र ने बताया कि वो दोनों हमलावर यहाँ पहली बार आए थे। लेकिन, उसने दावा किया कि अगर वो लोग सामने आ जाएँगे तो वो उन्हें पहचान लेगा। उसने बताया कि एक हमलावर ने भगवा वस्त्र पहने हुआ था और दूसरा सादे वस्त्र में था। हमलावर बाइक से आए थे।
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हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) दोपहर गला काट कर बेरहमी से हत्या कर दी है. कमलेश ....

ख़बर के अनुसार, कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस को अहम सुराग मिला। वारदात को अंजाम देने वाले संदिग्ध हत्यारे सीसीटीवी फुटेज में क़ैद हो गए है। फुटेज में दिख रहे संदिग्धों के आधार पर पुलिस आरोपितों की तलाश में जुट गई है। एसपी कलानिधि नैथानी के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें आरोपितों की तलाशी में जुट गई है। पुलिस दावा कर रही है कि जल्द ही हत्याकांड की गुत्थी को सुलाझा लिया जाएगा।