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अमित शाह ने LNJP जाकर हालात का लिया जायजा, कोरोना वार्डों में CCTV कैमरे लगाने के दिए निर्देश

अमित शाह
अमित शाह (साभार: Hindustan Times)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनकी सरकार को शर्म आनी चाहिए कि देश के गृहमंत्री को लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल का दौरा कर, कोरोना पीड़ितों के सुचारु रूप से इलाज किए जाने के सख्त आदेश दिए, जबकि केजरीवाल और उनकी सरकार केवल अपनी कमियों को छुपाने हमेशा की भांति आरोप-प्रत्यारोप की दुनिया में खोकर, जनता को भ्रमित करते रहे। केजरीवाल और उनकी सरकार को आंख खोलकर देखना चाहिए की जनता की चिंता करने वाले वातानुकूलित कमरों में बैठकर नहीं, बल्कि सड़क पर आकर समस्याओं को दूर करना चाहिए। केजरीवाल, उनकी सरकार और पार्टी को धरातल पर आकर काम करना सीखना चाहिए। 
दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना केसों से निपटने के लिए अब देश के गृहमंत्री अमित शाह ने खुद कमान सँभाल ली है। सोमवार (15 जून 2020) को शाह ने सर्वदलीय बैठक की। इसके बाद वे LNJP अस्पताल जाकर हालात का जायजा लिया।
LNJP अस्पताल पहुँचे अमित शाह ने कॉन्फ्रेंस रूम में वरिष्ठ डॉक्टरों से मुलाकात की। इस दौरान डॉक्टरों ने शाह को अस्पताल में कोरोना मरीजों की संख्या, कोरोना से अभी तक होने वाली मौतें और दिल्ली से बाहर के कोरोना मरीजों की अस्पताल में संख्या के बारे में अवगत कराया। वहीं अमित शाह ने डॉक्टरों से कोरोना वायरस से होने वाली मौत और उनके ठीक होने की दर के बारे में जानकारी ली।


गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के चीफ सेक्रेट्री को निर्देश दिए हैं कि वह अस्पतालों के अंदर सभी कोरोना वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगवाएँ, जिससे कि वार्ड में मौजूद कोरोना मरीजों की ठीक से देखभाल की जा सके और उनकी समस्याओं को दूर किया जा सके।
इससे पहले हुई सर्वदलीय बैठक में अमित शाह ने सभी राजनीतिक दलों से इस संकट में लोगों के हित के लिए मिलकर काम करने का अनुरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल से दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना वायरस पर चर्चा करने के बाद ऐलान किया कि अब दिल्ली में हर दिन 18 हजार कोरोना के टेस्ट किए जाएँगे।
अमित शाह ने आगे कहा, “ऐसे संकट के समय में राजनीतिक मतभेदों को भुला दिया जाना चाहिए और सभी दलों को एकजुट होकर दिल्ली के लोगों के लिए काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सभी को मिलकर इस महामारी को रोकने के लिए काम करना चाहिए।”
शाह ने कहा, “राजनीतिक दलों के बीच की एकता दिल्ली में स्थिति के बारे में लोगों के बीच विश्वास और विश्वास बढ़ाने का काम करेगी। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूँ कि वे अपने कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने के लिए कहें कि केंद्र द्वारा दिल्ली के लोगों के लिए लिए गए फैसलों को तेजी से जमीन पर लागू किया जाए।”
नॉर्थ ब्लॉक में हुई सर्वदलीय बैठक में दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी- आम आदमी पार्टी, भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी शामिल थी।
दरअसल देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना मरीजों की दुर्दशा और कोरोना के टेस्ट में कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों तल्ख टिप्पणी की थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए केन्द्र सरकार को भी नोटिस जारी किया था।
इसके बाद ही केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में बिगड़े हालात की कमान को अपने हाथों लिया और तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाई। उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे।
दिल्ली के मुख्यमंत्री की चिंताओं पर अमित शाह ने घोषणा की कि कोरोना वायरस मरीजों के लिए बेड की कमी से निपटने के लिए केन्द्र 500 रेलवे कोच की व्यवस्था करेगा।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद दिल्ली कोरोना वायरस के संकट की तीसरी सबसे बुरी स्थिति वाला राज्य है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 41,182 हो गई है, जबकि कोरोना से मरने वालों की संख्या 1,327 हो गई है।
पिछले कई दिनों से इंटरनेट पर दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना वायरस के मरीजों के बेड न मिलने की खबरें लगातार घूम रही थीं। इसकों गंभीरता से लेते हुए अमित शाह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई और कोरोना संकट से निपटने के लिए चर्चा की।

बेड न मिलने से अस्पताल के बाहर मरीज ने दम तोड़, उड़ा दी केजरीवाल के दावे की धज्जियां

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2 मई, 2020 को ‘दिल्ली कोरोना’ एप लॉन्च किया। इस एप को लॉन्च करते समय केजरीवाल ने कहा कि अब लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, लेकिन हमने इतना इंतजाम किया हुआ है कि अगर आपके घर में कोई बीमार होता है तो उसके लिए बेड, ऑक्सीजन और आईसीयू का इंतजाम है। लेकिन दो दिन बाद ही केजरीवाल के इस दावे की पोल खुल गई। बेड न मिलने की वजह से एक मरीज ने लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के बाहर दम तोड़ दिया। 
मृतक 1 जून को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। घरवालों की शिकायत है कि मरीज को 1 तरीख से लगातार दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में एडमिट करने की कोशिश की गई लेकिन उन्हें कहीं जगह नहीं मिली।
जून 4 की सुबह जब मरीज की हालत ज्यादा खराब हुई तो उन्हें दिल्ली के लोक नायक अस्पताल लाया गया। लेकिन अस्पताल ने मरीज को एडमिट करने से मना कर दिया। काफी देर इंतजार करने के बाद घर वाले खुद मरीज को स्ट्रेचर पर सुलाकर इमरजेंसी में ले जाने लगे तो एक डॉक्टर ने मरीज को भर्ती किया। कुछ समय के बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले पर सफाई देते हुए अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब मरीज अस्पताल लाया गया तो वो पहले से ही मृत था। वहीं मृतक की बेटी अमरप्रीत ने ट्वीट कर आपने पिता की मौत की जानकारी देते हुए कहा कि वो अब नहीं रहे, हमारी सरकार ने हमें फेल कर दिया।


अमरप्रीत पिछले कई दिनों से लगातार ट्वीटर पर अपने पिता के इलाज को लेकर दिल्ली सरकार और अस्पतालों से मदद मांगने की कोशिश कर रही थीं। पिता को अस्पताल लाने के बाद अमरप्रीत ने ही ट्वीट कर कहा “मेरे पिता को तेज बुखार है, हमें जल्द उन्हें अस्पताल में भर्ती करना है, मैं लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के बाहर खड़ी हूं और ये लोग इन्हें भर्ती नहीं कर रहे हैं। मेरे पिता को कोरोना है, तेज बुखार है, उन्हे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। वो बिना मदद के नहीं बच पाएंगे। प्लीज मदद कीजिए।”
एप लॉन्च करते समय सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर बेड खाली होने के बाद भी कोई अस्पताल मरीज को नहीं भर्ती करता है तो आप 1031 पर फोन कीजिए और अपनी समस्या बताइए। इसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को होगी और वह तुरंत उस अस्पताल से बात करके आपको ऑन द स्पॉट बेड दिलवाएंगे। लेकिन हेल्पलाइन पर मदद की गुहार लगाने पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अमरप्रीत ने ट्वीट कर बताया कि 2 जून को हैल्पलाइन नंबर पर कॉल किया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
पिता को खोने के बाद अब अमरप्रीत और उनके परिवारवालों के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। पिता की मौत की खबर के बाद अमरप्रीत ने ट्वीट कर बताया कि उनके परिवार का कोरोना टेस्ट नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि हम सुबह से कोशिश कर रहे हैं लेकिन हमारा टेस्ट नहीं हो पा रहा है। मेरी मां, भाई, उनकी बीवी और 2 बच्चों का टेस्ट होना है।
दिल्ली सरकार के दावे के विपरीत अस्पतालों में अव्यवस्था का आलम है। कोरोना टेस्ट की समुचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से मरीज और उनके परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकने को मजबूर है। मरीज के परिजन सीएम केजरीवाल, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और आम आदमी पार्टी के नेताओं से ट्विटर और अन्य माध्यम से मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मरीज के परिजनों ने केजरीवाल को नसीहत दी है कि रोज 12 बजे टीवी पर आकर गाल बजाने से इलाज नहीं होता।

दिल्ली : अस्पताल और श्मशान में शव रखने की जगह नहीं, हाइकोर्ट ने भेजा केजरीवाल सरकार, तीनों निगमों को नोटिस

दिल्ली, कोरोना से मौतदिल्ली हाई कोर्ट ने लोकनायक अस्पताल में शवों की बदत्तर स्थिति का जायजा लेने के बाद दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने शवों को लेकर मानवाधिकारों के उल्लंघन पर आपत्ति जताई गई है। साथ ही इस मामले पर वकीलों के साथ दिल्ली सरकार और तीनों एमसीडी को अदालत में पेश होने को कहा है।
देश में लगातार कोरोना के आँकड़े बढ़ते चले जा रहे है। ऐसे में दिल्ली की दशा भी आए दिन और खराब होती चली जा रही है। दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोगों के मौत के मामलों में वृद्धि लोकनायक अस्पताल के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बता दें इस वक्त दिल्ली में लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल कोविड-19 का सबसे बड़ा अस्पताल है।
हाल ही में मीडिया में लोकनायक अस्पताल की मॉर्चरी में रखे शवों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी। जिसमें अस्पताल स्थित कोविड-19 मॉर्चरी में 108 शव रखे हुए हैं। मोर्चरी में 80 शवों वाले रेक के भरने के बाद 28 कोरोना संक्रिमत शवों को ज़मीन पर एक के ऊपर रखा गया था।
लोकनायक अस्पताल में इस वक्त सिर्फ कोविड 19 के मरीजों का ही इलाज चल रहा है। जिसके चलते अस्पताल का शवगृह सिर्फ़ उन शवों से भरा है जिनकी मौत कोरोना से हुई है या वो कोरोना के संदिग्ध थे। सभी शवों को अलग-अलग पीपीई किटों में पैक किया गया हैं। दिल्ली के 16 कोविड 19 अस्पतालों में भर्ती 2242 में से 602 मरीज लोकनायक में भर्ती हैं।
अस्पताल अधिकारी ने शवगृह की हालत बताते हुए कहा कि, अभी तक पाँच दिन पहले जिनकी मौत हुई थी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। जिसकी वजह से मोर्चरी में हर दिन संख्या बढ़ती चली जा रही है। पिछले हफ्ते जमीन पर 28 की जगह 34 शव रखें हुए थे।
26 मई को आठ शवों को निगमबोध घाट के सीएनजी श्मशान घाट से लौटा दिया गया क्योंकि सीएनजी श्मशान घाट और ज्यादा शवों का शवदाह करने की स्थिति में नहीं था। वहाँ की छह भट्टियों में से केवल दो ही काम कर रही थीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार मंगलवार निगमबोध घाट पर इलेक्ट्रिक शवदाह भट्ठी की सिर्फ दो ही सीएनजी शवदाह भट्टियाँ काम कर रही थी, जिसकी वज़ह से वो ज्यादा भार नहीं ले सकते इसलिए बचे हुए शवों को उन्होंने वापस अस्पताल भेज दिया था। इस श्मशान घाट पर अब तक 244 कोविड संक्रमित या संदिग्ध संक्रमितों का दाह संस्कार कर चुका है।
कोर्ट ने इस भयावह स्थिति को लेकर सरकार और नगर निगम से जवाब माँगा है। कोर्ट ने नोटिस के जरिए शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी तय करने और इससे निपटने के लिए आधिकारिक तौर पर पूरा भी माँगा है।
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प्रतीकात्मक आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली में कोरोना के कदम रखते ही, मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनकी स...
कोरोना के सभी हिंदू मरीजों या संदिग्धों का इलेक्ट्रिक भट्ठी में दाह संस्कार होता है। जिसके लिए इन्हें निगमबोध घाट या पंजाबी बाग ले जाया जाता है। वहीं मुसलमानों और ईसाइयों के शवों का अंतिम संस्कार आयकर कार्यालय के इलाके में बने चार कब्रिस्तान मंगोलपुरी, मदनपुर खादर और शास्त्री पार्क में किया जाता है।

तबलीगी कोरोना मरीजों का दिल्ली में हंगामा : महिला डॉक्टर पर गंदे कॉमेंट्स… गेट तोड़ कर हमला की कोशिश

लोकनायक अस्पतालदिल्ली के लोकनायक अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए गई महिला डॉक्टर के साथ मरीज ने अभद्रता की और जब एक पुरूष डॉक्टर उन्हें बचाने वहाँ पहुँचा तो मरीजों ने उन पर भी हमला कर दिया। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने खुद को ड्यूटी रूम में छिपाया। बाद में उन्होंने इसकी जानकारी सुरक्षाकर्मियों को दी, मगर उनकी गुहार किसी ने नहीं सुनी।
ऑपइंडिया ने जब लोकनायक अस्पताल में कॉल कर इस घटना से संबंधित जानकारी जुटाई तो मरीजों के तबलीगी जमात से जुड़े होने की बात सामने आई। कोरोना संक्रमण के बीच हर स्वास्थ्यकर्मी अपना घर-परिवार सब छोड़कर मरीजों की सेवा में जुझारू रूप से जुटा है। ऐसे में उनके साथ होती अभद्रता बिलकुल भी बर्दाश्त योग्य नहीं है। पिछले दिनों गाजियाबाद समेत कई इलाकों से महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हुई बदसलूकी की खबरें आईं और अब मामला राष्ट्रीय राजधानी का है।
समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, इस घटना के संबंध में डॉक्टरों ने लोकनायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर को भी पत्र लिखा। जिसमें पूरी घटना का जिक्र करते हुए सिक्यॉरिटी की कमी पर ध्यान आकर्षित कराया गया। पत्र में बताया गया कि कल यानी 14 अप्रैल को सर्जिकल ब्लॉक के वार्ड नंबर 5a में शाम 5:20 पर एक मरीज ने महिला डॉक्टर पर फब्तियाँ कसनी शुरू की और उन पर अभद्र टिप्पणी करने लगा। तभी उनके साथी डॉक्टर ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो मरीज इकट्ठा हो गए और डॉक्टरों को धमकाने लगे। ऐसे में जब डॉक्टरों ने खुद को बचाने के लिए ड्यूटी रूम में बंद कर लिया तो मरीजों की भीड़ गेट खुलवाने के लिए उसे तोड़ने पर आतुर हो गई।


इसके बाद इस पत्र में सुरक्षा अभाव पर प्रकाश डालते हुए इस घटना से संबंधित कुछ वाकये बताए गए। उन्होंने लिखा कि ऐसी स्थिति में फँसने के बाद दोनों डॉक्टरों ने दो फ्लोर इंचार्ज को संपर्क किया। मगर, उनका फोन नहीं लगा। ऐसे में उन्हें व्हॉट्सअप से सूचित किया गया। लेकिन घटना जानने के बाद भी वो खुद वहाँ नहीं आए और न ही सुरक्षाकर्मियों को भेजा। उनका कहना है कि फ्लोर इंचार्ज ने उनके कॉल की अनदेखी की और मुश्किल में फँसे डॉक्टर्स को वहीं फँसे रहने दिया। इसके अलावा सीएमओ ने भी उनकी कॉल नहीं उठाई। कुछ सिक्यॉरिटी अधिकारियों ने भी डॉक्टरों का साथ नहीं दिया। सुरक्षा गार्डों ने भी सिक्यॉरिटी अलार्म सुनने के बाद प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं मार्शल व गार्ड्स भी सुरक्षा उपकरण न होने के कारण वार्ड में आने से इंकार कर दिया।
पत्र के माध्यम से शिकायत करते हुए डॉक्टरों ने सभी स्थिति को साफ करते हुए पूछा है कि अगर इस बीच उन्हें कुछ हो जाता, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होता। पत्र में डॉक्टरों ने आरोपित मरीजों पर फौरन एफआईआर की माँग की है। इसके अलावा हथियारों सहित पुलिसकर्मियों की तैनाती की गुहार भी लगाई है। डॉक्टरों ने कैज्युएलटी में तैनात सुरक्षाकर्मियों को निलंबित करने का मुद्दा उठाया है और घटना के समय सर्जिकल वार्ड के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ एक्शन लेने को कहा है। इसके अतिरिक्त दोनों फ्लोर इंचार्ज समेत ड्यूटी पर तैनात सीएमओ से स्पष्टीकरण की माँग की है।
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दिल्ली में बंगले वली मस्जिद के बाहर तब्लीगी जमात के फॉलोवर (फोटो साभार: Mint) आर.बी.एल.न...
इस घटना से पहले गाजियाबाद से भी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी की खबर आई थी। खुद सीएमओ ने गाजियाबाद कोतवाली में पत्र लिखकर बताया था कि आइसोलेशन वार्ड में रखे गए संभावित कोरोनावायरस तबलीगी जमाती मरीज बिना कपड़े, पैंट के नंगे घूम रहे हैं। यही नहीं, आइसोलेशन में रखे गए जमाती अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही नर्सों को गंदे-गंदे इशारे भी कर रहे हैं।

डॉ राम मनोहर लोहिया संस्थान में जांच करना हुआ महंगा

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ जहाँ मोदी सरकार आयुष्मान योजना लागू कर रही है, तो दूसरी तरफ सरकारी हॉस्पिटल डॉ राम मनोहर लोहिया में इलाज करवाना महँगा होता जा रहा है। अब इसे सरकार की भ्रमित योजनाएँ कहा जाये या कुछ और, यह सरकार को स्पष्ट करना है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार पर भाजपा सहित कांग्रेस भी आरोप लगाने से पीछे नहीं, जबकि दिल्ली प्रशासन के अंतगर्त आने वाले लोक नायक जयप्रकाश हॉस्पिटल में जहाँ कुछ वर्ष पूर्व तक सीटी स्कैन आदि पर 750 रूपए लिए जाते थे, आज उसी हॉस्पिटल में प्रत्येक जाँच निशुल्क है। प्रमाण: लगभग एक दशक पूर्व, सड़क दुर्घटना से पीड़ित अपने पिताश्री एम.बी.एल.निगम का सीटी स्कैन करवाया, तब हॉस्पिटल ने उपरोक्त राशि चार्ज की थी, और कुछ दिन पूर्व अपने पडोसी का इसी हॉस्पिटल में सीटी स्कैन निशुल्क हुआ। जगह-जगह मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल के चित्र लगे बैनर पर स्पष्ट रूप से लिखा है "इस हॉस्पिटल में कोई भी जाँच और दवाईयाँ निशुल्क है।" लेकिन सरकारी हॉस्पिटल लोहिया में पर्ची बनवाने का भी शुल्क देना पड़ता है।    
डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त संस्थान में जांचें एक नंवबर से महंगी हो जाएंगी। जांचें महंगी करने के पीछे संस्थान का तर्क है कि संस्थान को सरकार की ओर मिलने वाली 30 करोड़ रुपये की राहत राशि अभी तक नहीं मिल पाई है। रकम न मिलने के कारण जांच शुल्क बढ़ाना मजबूरी है। 
अभी तक डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त अस्पताल में एक रुपये का पर्चा बनता है। अधिकतर जांचें निशुल्क हैं। जबकि संस्थान में सौ रुपये का पर्चा बनता है और जांचों का भी पैसा जमा होता है। विलय के बाद संस्थान नियमानुसार लोहिया अस्पताल में भी पैसा लेने का अधिकार रख सकेगा।
विलय के दौरान योजना बनाई गई थी कि सरकार की ओर से 30 करोड़ रुपये मिल जाएं तो लोहिया अस्पताल में पहले की तरह मरीजों को मुफ्त दवाएं मिलती रहेंगी। पैथोलॉजी की जांचें भी मुफ्त होती रहेंगी। अभी तक राहत राशि नहीं मिली है। ऐसे में विलय के बाद संस्थान घाटा उठाने की स्थिति में नहीं है।
सूत्रों की मानें तो संस्थान के अधिकारियों ने दरों का निर्धारण शुरू कर दिया है। केजीएमयू, एसजीपीजीआई की जांच दरों की लिस्ट भी मंगवाई गई है। संस्थान के निदेशक प्रो. दीपक मालवीय कहते हैं कि 30 करोड़ की राहत राशि मिल जाए तो दिक्कत दूर हो जाएगी। रकम न मिलने पर जांच दरें बढ़ाना ही विकल्प होगा। समीक्षा कर अपनी स्थिति की आकलन करेंगे। इसके बाद फीस और जांच संबंधी सुविधाओं पर विचार किया जाएगा।

केजीएमयू भी बढ़ा देगा शुल्क

उदाहरण के तौर पर देखें तो हीमोग्लोबिन से जुड़ी टीएलसी, डीएलसी जांच लोहिया अस्पताल में मुफ्त होती है। सिर्फ एक रुपये का पर्चा बनता है। यदि संस्थान में यह जांच कराई जाए तो पहले सौ रुपये का पर्चा बनेगा। इसके बाद जांच के लिए सौ रुपया चुकाना होगा।
लोहिया अस्पताल में एक्सरे निशुल्क होता है, जबकि संस्थान में  50 रुपया देना पड़ता है। इसी तरह अल्ट्रासाउंड मुफ्त है, जबकि संस्थान में तीन सौ रुपया देना पड़ता है। इसी तरह अन्य जांचों के लिए यहां पैसा देना पड़ता है। विलय के बाद अस्पताल में भी संस्थान के नियम लागू होंगे।
सूत्रों का कहना है कि राहत राशि मिलने के आसार बहुत कम हैं। यदि संस्थान को मदद मिलती है तो  केजीएमयू, पीजीआई व अन्य चिकित्सा संस्थान भी अतिरिक्त बजट की डिमांड करेंगे। अभी तक केजीएमयू में भी कई जांचें काफी सस्ती हैं। अतिरिक्त बजट न मिलने का तर्क देकर वह भी जांच शुल्क बढ़ा सकता है।