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दिल्ली : हाई कोर्ट को आवंटित जमीन पर 'ईमानदार' आम आदमी पार्टी ने बनाया लिया कार्यालय ; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वापस करो

'ईमानदार' पार्टी हो तो अरविन्द केजरीवाल जैसी। जो पार्टी खुद अतिक्रमण कर रही हो, दिल्ली से अतिक्रमण क्या हटाएगी? दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कई बार कहा कि मै anarchy हूँ। ईमानदारी का ढोल पीटने वाली आम आदमी पार्टी की तथाकथित ईमानदारी का नमूना एक बार फिर सामने आया, जब हाई कोर्ट को आवंटित जमीन पर अपना कार्यालय बनाकर कब्ज़ा कर लिया। जिस तरह वक़्फ़ बोर्ड किसी भी जमीन पर अपना हक़ जता लेता है, उसी तरह ईमानदार केजरीवाल ने दूसरे की जमीन को हता लिया। 
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को कहा कि दिल्ली के राउज़ एवेन्यू स्थित आम आदमी पार्टी (AAP) का राजनीतिक कार्यालय कब्जा की हुई जमीन पर बनी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस जमीन पर यह राजनैतिक कार्यालय बनाया गाय है, वह जमीन दिल्ली हाई कोर्ट को आवंटित की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हैरानी की बात है कि दिल्ली हाईकोर्ट की जमीन पर एक राजनीतिक दल का दफ्तर चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह जमीन दिल्ली हाईकोर्ट को लौटाई जाए। कोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी सचिव और वित्त सचिव अगली तारीख से पहले हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के साथ एक बैठक करें और मामले का समाधान निकालें। 

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। उन्होंने सवाल किया, “कोई राजनीतिक दल उस पर कैसे बैठ सकता है? हाईकोर्ट को कब्जा दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट इसका उपयोग किस लिए करेगा? केवल जनता और नागरिकों के लिए करेगा।”

CJI ने कहा कि सभी अतिक्रमण हटाए जाएँगे और आगे के निर्देशों के लिए इस मामले में सोमवार (19 फरवरी 2024) को होगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में न्यायिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित एक मामले से निपटान के दौरान इस मुद्दे पर ध्यान दिया और ये बातें कहीं।

दरअसल, CJI चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ को मंगलवार (13 फरवरी 2024) को एमिकस क्यूरी के परमेश्वर ने सूचित किया कि उच्च न्यायालय के अधिकारी आवंटित भूमि पर कब्जा करने गए थे, लेकिन वहाँ एक राजनीतिक दल का कार्यालय बनाया गया है। इसलिए वे जमीन पर कब्जा नहीं ले सके।

दिल्ली सरकार के कानून सचिव भरत पाराशर ने अदालत को यह भी बताया कि उक्त जमीन 2016 से आम आदमी पार्टी के पास है। इस पर मुख्य न्ययाधीश ने कहा कि यह जमीन दिल्ली हाई कोर्ट को लौटानी होगी। उन्होंने इसके लिए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पीडब्ल्यू सचिव और वित्त सचिव को बैठक कर समाधान निकालने के लिए कहा।

पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने दिल्ली जिला न्यायपालिका में बुनियादी ढाँचे के लिए धन उपलब्ध कराने के प्रति उदासीन रवैये के लिए दिल्ली सरकार की आलोचना की थी। उस समय सीजेआई ने कहा था कि मार्च 2021 तक चार में से तीन परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी गई, लेकिन इन परियोजनाओं के लिए धन जारी नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि 5 दिसंबर 2023 तक 887 न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या को समायोजित करने के लिए 118 अदालत कक्षों या 813 न्यायिक अधिकारियों की वर्तमान कार्यशील शक्ति को समायोजित करने के लिए 114 अदालत कक्षों की आवश्यकता थी। तब सरकार की ढुलमुल रवैये की आलोचना की थी।

‘मेरे साथ जो हुआ वो रेप से कम नहीं’...एसिड भी डलवा सकते थे: अर्चना गौतम, कांग्रेस नेता

                                     मारपीट के बाद अर्चना गौतम को पार्टी ने दिखाया बाहर का रास्ता 
कांग्रेस नेता अर्चना गौतम और उनके पिता के साथ 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर बदसलूकी हुई थी। इस घटनाक्रम के बाद कॉन्ग्रेस ने अर्चना गौतम को पार्टी से बाहर कर दिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि अर्चना को अनुशासनहीनता के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। लेकिन उन्होंने जवाब दिया। इसलिए 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है।

दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुई घटना के बाद 30 सितंबर को पार्टी की ओर से जारी एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पूर्व विधायक औए कांग्रेस की अनुशासन समिति के सदस्य श्याम किशोर शुक्ला के नाम से वायरल लेटर में 8 जून, 2023 की तारीख लिखी हुई है।

                                                   सोशल मीडिया पर वायरल लेटर

इस लेटर में कहा गया है कि अनुशासनहीनता के लिए अर्चना गौतम को 31 मई, 2023 को पत्र भेजा गया था। इस पत्र में एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया था। लेकिन जवाब नहीं दिया गया। इसलिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 साल के किए निष्कासित किया जाता है।

इसको लेकर मेरठ से कांग्रेस जिलाध्यक्ष अवनीश काजला का कहना है कि अर्चना गौतम को पार्टी ने जून में ही निष्कासित कर दिया था। वहीं दिल्ली से कॉन्डली सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक अमरीश सिंह गौतम ने भी सोशल मीडिया पर यूपी कांग्रेस द्वारा जारी लेटर शेयर किया। साथ ही उन्होंने लिखा कि अर्चना गौतम को 6 साल पहले पार्टी से बाहर किया जा चुका है। वह पब्लिसिटी स्टंट करने के लिए पार्टी कार्यालय गईं थीं।

हालाँकि, इन तमाम बातों के बीच राजनीतिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक में इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस ने अर्चना गौतम को अभी निष्कासित कर पुरानी डेट का लेटर जारी किया है। इस बीच खबर है कि 30 सितंबर को मेरठ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अर्चना गौतम के खिलाफ पुलिस में एक शिकायत दी है। इसमें कहा गया है कि अर्चना लोगों को फर्जी केस लगाने की धमकी देकर डराती हैं।

‘मेरे साथ जो हुआ वो रेप से कम नहीं’: अर्चना गौतम

वहीं कांग्रेस कार्यालय में हुई घटना को लेकर अर्चना गौतम ने कहा कि वह तो महिला आरक्षण बिल पास होने की बधाई देने गई थी। लेकिन वहाँ उनके साथ अचानक से क्या होने लगा यह उन्हें समझ नहीं आ रहा था। वह भागकर किसी सुरक्षित स्थान में जाना चाहती थीं मैं लोगों से मदद की गुहार लगा रहीं थीं। लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
अर्चना ने आगे कहा है कि हो सकता है कि उनका प्लान रहा हो कि इस भीड़ में उनका मर्डर हो जाए। वहाँ मौजूद लोग कुछ भी कर सकते थे। एसिड भी डलवा सकते थे। कांग्रेस कार्यालय में जो कुछ हुआ वह ऑन रोड रेप से कम नहीं है। अर्चना का दावा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बचने के लिए वह वहाँ खड़ी गाड़ियों के दरवाजे में हाथ मार रहीं थीं। लेकिन किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला। ये सब कुछ होने के बाद पार्टी की ओर से किसी ने फोन कर उनका हाल भी नहीं पूँछा।
29 सितंबर को अर्चना गौतम और उनके पिता के साथ बदसलूकी का वीडियो सामने आया था। वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ अर्चना गौतम और उनके पिता के साथ बदसलूकी कर रही है। इस दौरान उनके पिता जमीन पर गिर जाते हैं। अर्चना गौतम अपने पिता के लिए पानी माँगती हुई मिन्नतें करती हैं, लेकिन कोई पानी तक नहीं देता। वीडियो में उन्हें चीखते-चिल्लाते हुए भी देखा जा सकता है।
अवलोकन करें:- 
अर्चना गौतम का दावा है कि वह संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ पास होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गाँधी को बधाई देने पहुँची थी। गौरतलब है कि अर्चना गौतम ‘बिग बॉस 16’, ‘खतरों के खिलाड़ी’ का हिस्सा रह चुकी हैं। उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर हस्तिनापुर विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था। पार्टी ने उन्हें प्रियंका गाँधी के अभियान ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ का चेहरा भी बनाया था। लेकिन अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अर्चना और उनके पिता के साथ बदसलूकी कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।