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राजीव गाँधी जन्मदिन पर विशेष : प्रस्तुत है भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की माला

Rajiv Gandhi Profiles। राजीव गांधी : भारत के ...
                                                                                                        साभार 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पिछले कुछ सालों में राहुल गाँधी और अब उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा भी केंद्र सरकार पर हर प्रकार के घोटालों के आरोप लगाते नजर आए हैं। इसके लिए उन्होंने कभी द हिन्दू अखबार की फर्जी कतरनों का सहारा लिया तो कभी चुनावी रैलियों में मनगढ़ंत आँकड़ों के जरिए एक ही झूठ को कई बार दोहरा कर यह साबित करने का प्रयास किया कि राहुल गाँधी के पिता राजीव के कार्यकाल और उसी तरह UPA के दागदार राजनीतिक सफर की तरह ही नरेंद्र मोदी सरकार में भी घोटाले हुए हैं।
इस कड़ी में राहुल गाँधी और उनकी बहन को कभी सुप्रीम कोर्ट से लताड़ लगी तो कभी उन्हें पीएम मोदी के खिलाफ इन खुले झूठों को बेचने की कीमत आम चुनावों में भारी हार के साथ चुकानी पड़ी।
अगस्त 20, 1944 को, आज ही के दिन पैदा हुए राजीव गाँधी देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे। राजीव गाँधी की उम्र तब महज 40 साल थी और भारत के प्रधानमंत्री पद पर अक्टूबर 31, 1984 से दिसंबर 01, 1989 तक आसीन रहे।
राजीव गाँधी कंप्यूटर लाये” – आखिर ...राजीव गांधी : मिस्टर क्लीन या मिस्टर ...
देशभक्ति मात्र एक दिखावा 
कांग्रेस और इसके समर्थकों द्वारा कहा जाता है कि परिवार ने देश के लिए जानें दी हैं। परन्तु जब राजीव की ओर देखने पर ज्ञात होता है कि इंडो-पाक युद्ध के दौरान इन्हे ड्यूटी पर रहने की बजाए इटली में विवाहित आनंद विभोर होने चले गए थे। जबकि नियम है की "युद्ध के दौरान हर एयरलाइन का पायलट 24-घंटे ड्यूटी पर रहेगा, लेकिन देशभक्त राजीव गाँधी भारत से ही गायब थे।  
राजीव गाँधी के राजनीतिक जीवन कई प्रकार से दागदार रहा, इसमें सबसे बड़ी वजह एक बोफोर्स घोटाला और भोपाल गैस त्रासदी से लेकर कश्मीरी पंडितों का पलायन है। इसके साथ ही कोरोना काल में राजीव गाँधी फाउंडेशन के अंतर्गत किए गए घोटाले दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न राजीव गाँधी के करियर में एक और अध्याय जोड़ते हैं।
राजीव गाँधी का प्रधानमंत्री रहते घोटालों और विवादों से निरंतर ही करीबी सम्बन्ध रहा। इन पर एक नजर डालते हैं –
कश्मीरी पंडितों का पलायन  
केंद्र में राजीव गाँधी की सरकार के दौरान ही जेकेएलएफ के आतंकियों ने कश्मीरी हिंदूओं पर हमले शुरू कर दिए थे। जगमोहन की तैनाती राज्यपाल के तौर पर जनवरी 19, 1990 को हुई। लेकिन इससे पहले और जगमोहन के शुरूआती दिनों में हालात काबू से बाहर आ चुके थे।
सितंबर 14, 1989 को पंडित टीकालाल टपलू की हत्या कर दी गई जो कि कश्मीर घाटी के प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे। आतंकियों ने सबसे पहले उन्हें निशाना बनाकर अपने इरादे साफ कर दिए थे। इस हत्या के मात्र सात सप्ताह बाद ही जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई थी।
घाटी में गवर्नर का शासन मार्च, 1986 में दूसरी बार तब लागू किया गया था, जब कॉन्ग्रेस ने गुलाम मोहम्मद शाह से समर्थन वापस ले लिया था। उस दौरान फारूक-राजीव समझौते पर काम चल रहा था और इस पर मुहर लगने और हस्ताक्षर होने के बाद फारूक मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो गए।
1987 का विधानसभा चुनाव, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से लड़ा गया। कश्मीर के इतिहास में खुले धाँधली के आरोपों के साथ सबसे बड़ी धोखाधड़ी के रूप में इसे याद रखा गया। यही वो समय था, जब उग्रवाद के साथ कश्मीर का रिश्ता गहरा होता चला गया। 1987 के इस ‘फारूक-राजीव एकॉर्ड’ के बाद कश्मीर हमेशा के लिए बारूद के ढेर पर बैठ गया और कश्मीरी पंडितों का नारकीय जीवन शुरू हो गया।
घोटालों में फंसा नेहरु गांधी परिवार ...
बोफोर्स घोटाला 
एक चुनावी रैली के दौरान उत्तर प्रदेश के बस्ती में पीएम मोदी ने कहा था, ”आपके पिताजी को आपके राग दरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था। गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन… मिस्टर क्लीन चला था। लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया।”
मोदी का इशारा राहुल गाँधी के पिता राजीव गाँधी और उनके बोफोर्स घोटालों में सम्बन्ध की ओर ही था। इस घोटाले ने 1980 और 1990 के दशक में गाँधी परिवार और ख़ासकर तब प्रधानमंत्री रहे राजीव गाँधी की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया था।
बोफोर्स घोटाले ने राजीव गाँधी की मौत के कई साल बाद भी उनका पीछा नहीं छोड़ता। इस घोटाले में आरोप थे कि स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपए राजीव गाँधी समेत कई कॉन्ग्रेस नेताओं को दिए थे, ताकि वो भारतीय सेना को अपनी 155 एमएम हॉविट्ज़र तोपें बेच सकें।
बाद में राजीव गाँधी की पत्नी सोनिया गाँधी पर भी बोफ़ोर्स तोप सौदे के मामले में आरोप लगे थे, जब इस सौदे में बिचौलिया बने इटली के कारोबारी और गाँधी परिवार के क़रीबी ओतावियो क्वात्रोची का नाम सामने आया तो वह अर्जेंटिना भाग गया।
यूपीए सरकार के दौरान साल 2009 की शुरुआत तक भारत को आपराधिक मामलों में ओतावियो क्वात्रोची की तलाश थी, लेकिन अप्रैल 28, 2009 को सीबीआई ने क्वोत्रोची को क्लीनचिट देते हुए इंटरपोल से उस पर जारी रेडकॉर्नर नोटिस को हटा लेने की अपील की। सीबीआई की अपील पर इंटरपोल ने क्वात्रोची पर से रेडकॉर्नर हटा लिया गया। तब भाजपा ने क्वोत्रोची को क्लीनचिट देने के पीछे कॉन्ग्रेस का हाथ बताया था। 2013 में मिलान में उसकी मौत की खबरें सामने आईं थीं।
भोपाल गैस त्रासदी : 35 साल बाद भी ...
भोपाल गैस त्रासदी 25 हज़ार लोगों के कातिल को भगाया 
भोपाल गैस त्रासदी कोई भारतीय शायद ही भूल सकता है। हजारों लोगों की मौत के जिम्मेदार एंडरसन को राजीव गाँधी ने 25 हजार रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर भारत से बाहर भेज दिया था। भोपाल गैस त्रासदी हुई, उसके एक महीने पहले ही राजीव गाँधी प्रधानमंत्री बने थे।
2-3 दिसंबर, 1984 को भोपाल में यूनियन कार्बाइड की कंपनी से जानलेवा गैस लीक होने से हजारों लोगों की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि 8000 लोगों की मौत इस त्रासदी के महज 2 हफ़्ते के भीतर ही हो गई थी।
अब तक अनुमान है कि तकरीबन 25,000 लोगों की इस गैस संबंधी बीमारी से मौत हो चुकी है। जबकि, हजारों लोग आज भी पीड़ित हैं। इस कंपनी के मालिक वॉरेन एंडरसन को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और उनकी सरकार ने सरकारी प्लेन में बैठाकर सुरक्षित भोपाल से दिल्ली पहुँचाया, जहाँ से उसे अमेरिका जाने दिया गया।
इस त्रासदी पर मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह पर कन्हैयालाल नंदन ने ‘मोहे कहाँ विश्राम’ नामक पुस्तक लिखी थी, जिसमें कहा गया कि राजीव गाँधी के मौखिक आदेश के बाद अर्जुन सिंह ने वॉरेन को भोपाल से जाने दिया था। भगौड़े एंडरसन को भारत सरकार कभी दुबारा भारत वापस ला पाने में नाकामयाब रही और 92 साल की उम्र में सितंबर 29, 2014 को अमेरिका के फ्लोरिडा में एंडरसन की मौत हो गई।
Rajiv Gandhi Quotes: राजीव गांधी के 10 अनमोल ...सिखों के नरसंहार को ठहराया था उचित 
भारत में सबसे बड़े दंगे (नरसंहार ही था वो) को सरकारी छूट देने का आरोप राजीव गाँधी पर ही है। अक्टूबर 31, 1984 को इंदिरा गाँधी की हत्या के अगले दिन से ही दिल्ली और देश के दूसरे कुछ हिस्सों में भयानक सिख विरोधी दंगे भड़क उठे।
नवंबर 19, 1984 को इंदिरा गाँधी के उत्तराधिकारी उनके पुत्र राजीव गाँधी ने बोट क्लब में इकट्ठा हुए लोगों की भीड़ के सामने सिखों के क़त्ल को जायज ठहराते हुए बयान दिया था, “जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी़, तो हमारे देश में कुछ दंगे-फ़साद हुए थे। हमें मालूम है कि भारत की जनता को कितना क्रोध आया, कितना ग़ुस्सा आया और कुछ दिन के लिए लोगों को लगा कि भारत हिल रहा है। जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है।”
राजीव गाँधी ने इन दंगों का शिकार हुए हज़ारों सिखों पर कोई टिपण्णी ना करते हुए उनके घावों को कुरेदने वाला यह बयान दिया था जो आज तक भी गाँधी परिवार की प्राथमिकताओं को बेनकाब करने के लिए काफी है।
News on rajiv gandhi and sonia gandhi love story, all latest ...सरकार 1 रूपया भेजती है, जनता तक 15 पैसे पहुँचते हैं 
भ्रष्टाचार और घोटालों पर राजीव गाँधी के विचार क्या थे, इस बात का अंदाजा उनके इसी बयान से लगाया जा सकता है कि उन्हें इस बात से भी कोई ख़ास समस्या नहीं थी कि यदि केंद्र द्वारा 1 रुपया भेजा जाता है तो आम आदमी तक 15 पैसे ही पहुँच पाते हैं।
यानि सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार स्वीकार करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की। दूसरे, अर्थों में सरकार और पार्टी के भ्रष्ट होने की बात स्वीकार की। अपने जीवनकाल में शायद यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि 85 पैसे कौन खा रहा है? 
यह वर्ष 1985 की बात है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी सूखा प्रभावित ओडिशा के कालाहाँडी जिले में दौरे पर थे। यहाँ उन्होंने भ्रष्टाचार पर बात करते हुए कहा था कि सरकार जब भी 1 रुपया खर्च करती है तो लोगों तक 15 पैसे ही पहुँच पाते हैं। भ्रष्टाचार से निपटने में असमर्थता जताते हुए राजीव ने अपने उस भाषण में कहा था कि देश में बहुत भ्रष्टाचार है, जिसे दिल्ली से बैठकर दूर नहीं किया जा सकता।
विजय महाजन को राजीव गांधी फाउंडेशन ...राजीव गाँधी फाउंडेशन घोटाला 
राजीव गाँधी का घोटालों के साथ रिश्ता उनकी मौत के इतने वर्ष बाद भी जीवित नजर आता है। ऐसे समय में जब देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा था और भारतीय सेना लद्दाख क्षेत्र में चीन की सेना के साथ संघर्षरत थी, राजीव गाँधी फाउंडेशन द्वारा किए गए घोटाले चर्चा का विषय बन गए। ख़ास बात यह रही कि यह घोटाला तब उजागर हुआ, जब गाँधी परिवार के माँ-बेटा और बेटी की नजर PM CARES फंड पर टिकी हुई थी।
राजीव गाँधी फाउंडेशन पर चीन की कम्युनिस्ट सरकार से फंड लेकर चीन के पक्ष में लॉबिग करने का मामला भी सामने आया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री राहत कोष फंड (PMNRF) को राजीव गाँधी फाउंडेशन में ट्रांसफर करने भी खुलासा भी हुआ। साथ ही पता चला कि UPA के दौरान कई मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों की ओर से भी राजीव गाँधी फाउंडेशन में पैसे ट्रांसफर किए गए। इन सभी खुलासों के बाद गृह मंत्रालय ने एक कमिटी का गठन किया है।
शाहबानो केस एक ऐसा मामला है जिसने ...शाहबानो पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय को निरस्त किया 
राजीव गाँधी के करियर में तमाम घोटालों के अलावा दंगे और सबसे अहम शाहबानो प्रकरण शामिल हैं। 
सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल 1985 को अंतिम निर्णय सुनाया,जिसके अनुसार खान साहब को शाहबानो को प्रति मास 500 रुपए गुज़ारा भत्ता देना होगा। इस फैंसले को सुन कर देश में शरीयत के नाम पर ढोल बजाने वाले मुसलमान धर्मगुरु और नेताओं के तो गले ही सूख गए। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर थी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का इस निर्णय के विरोध में उतरना प्रत्याशित था। देश को झटका तो तब लगा जब उस समय की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम बोर्ड के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया। शाहबानो अदालतों में तो जीत गई पर सरकार के सामने हार गई।
शाहबानो निर्णय से तत्कालीन ...
 राजीव के करीबी रहे एम.जे.अकबर ने
शाहबानो निर्णय को बदलवाने में निर्णायक भूमिका
वाले आज भाजपा में रहते असहाय रहे 
जब सात सालों की कठिन कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट से जीतने के बाद मुस्लिम समाज का विरोध इस कदर बढ़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने एक कानून मुस्लिम महिला अधिनियम 1986 पास करवा दिया था, और इस अधिनियम ने मुस्लिम महिलाओं से गुजारा भत्ता की मांग को लेकर अदालत के दरवाजे पर जाने का अधिकार भी छीन लिया। राजीव गांधी सरकार का यह अधिनियम, मानो मुस्लिम पर्सनल लॉ का फोटोकॉपी था।
राजीव गांधी चाहते तो अपने राजनैतिक लाभ और वोट बैंक के दलदल से ऊपर उठ कर, पुराने कायदों को पीछे छोड़कर, एक अच्छा फैंसला ले सकते थे। लेकिन शायद उन्हें वोट बैंक की ज़्यादा टेंशन थी। करीब तीन दशक बाद, इस गलती को एनडीए सरकार ने सुधारा। 1975 में अपना संघर्ष शुरू करने वाली शाहबानो की असल जीत मानों 2019 में हुई हो। ये किस्सा हमारे आगे कई सवाल खड़े कर देता है…
  • क्या कांग्रेस, धर्मनिरपेक्षता का टैग लगाने योग्य है?
  • इंसाफ और धर्म में एक सरकार के लिए क्या ऊपर होना चाहिए?
  • क्या 62 साल की महिला और बच्चों को गुजारा भत्ता ना देना किसी धर्म/मजहब के खिलाफ हो सकता है?
CalcutaQuranPetition.jpgइस कानून के चलते शाहबानो के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी पलट दिया गया। यहाँ से खुले तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण की शुरूआत हुई थी और आज ये हाल हैं कि राहुल गाँधी और उनकी कॉन्ग्रेस आज खुद को कट्टर हिन्दू साबित करने का हर सम्भव प्रयास कर रही है।
कुरान के विरुद्ध आए निर्णय को भी निरस्त किया 
31 जुलाई 1986 को कुरान की लगभग 24 आयतों के कारण दिल्ली की अदालत द्वारा आए निर्णय को भी निरस्त कर कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का प्रमाण दिया। जिसका खामियाजा कांग्रेस को इतना भारी पड़ रहा है कि तब से लेकर आज तक कांग्रेस निरन्तर नीचे जा रही है। अब तो यह स्थिति हो गयी है कि आने वाले समय में कब पाताललोक सिधार जाए, कह नहीं सकते। दूसरे अर्थों में कहा जा सकता है कि राजीव युग में ही कांग्रेस के पतन की गाथा लिख दी गयी थी। 
SANATANGYANPEETH.IN
कुरान की चौबीस आयतें और उन पर दिल्ली कोर्ट का फैसला श्री इन्द्रसेन (तत्कालीन उपप्रधान हिन्दू महासभा
इन सबसे हटकर उस किस्से को तो शायद ही कभी यह देश भूल सकेगा, जब राजीव गाँधी ने भारत की सुरक्षा में तैनात आईएनएस विराट को अपने परिवार और इटली के ससुरालवालों की मौज मस्ती में लगा दिया था। समुद्र के बीचों-बीच 10 दिन तक मौज काटी थी। यह इस बात का बहुत छोटा सा सबूत था कि गाँधी परिवार इस देश की हर सम्पदा पर अपना पहला हक़ समझता आया था। यह सब तब घटित हो रहा था, जब दरबारी मीडिया, दरबारी विचारक और दरबारी इतिहासकार इन्हीं राजीव गाँधी को इक्कीसवीं सदी का वास्तुकार साबित करने के हर प्रयास कर रहे थे।

राम मंदिर निर्माण पर अध्यादेश के लिए संघ परिवार के अंदर से उठी आवाज

अयोध्या राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जनवरी पहले हफ्ते तक के लिए टलने के बाद से मंदिर के जल्द निर्माण के लिए भाजपा और संघ परिवार के अंदर से ही आवाजें तेज होने लगी हैं। भाजपा अब अयोध्या में विवादित स्थल पर जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण चाहती है। 
पार्टी के नेता विनय कटियार ने आरोप लगाया है कि इस मसले को कांग्रेस के ‘दबाव’ में लटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण जैसे लोग इस मामले को लंबा खींचने के लिए दबाव डाल रहे हैं। आखिर राम भक्त कब तक इंतजार करेंगे। 

सर्वोच्च न्यायालय जल्द दे फैसला : संघ

हालांकि कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। भाजपा के नेता संजय बालियान ने कहा, ‘मैं अदालत की प्राथमिकता से आश्चर्यचकित हूं। मेरा मत है कि राम मंदिर बनना चाहिए और सरकार को इसके लिए सभी संभावनाएं तलाश करनी चाहिए।’
आरएसएस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राम जन्मभूमि विवाद पर जल्द फैसला देना चाहिए और केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण की राह में कोई बाधा हो तो उसे दूर करने के लिए कानून लाना चाहिए। संघ के मुख्य प्रवक्ता अरुण कुमार ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्वीकार किया था कि वह स्थल भगवा राम की जन्मभूमि है और वहां पहले मंदिर था।
सत्ता के गलियारों के चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को टालता रहेगा, जिसे मन्दिर विरोधी अपनी जीत और मंदिर पक्षधर अपनी हार समझते रहेंगे, क्योकि शाहबानो प्रकरण शायद ही भूला होगा, कि किस तरह तुष्टिकरण के चलते तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी ने संसद में अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट निर्णय को निरस्त कर, सुप्रीम कोर्ट निर्णय का अपमान किया था। लेकिन हिन्दू वोट कांग्रेस से जाता देख, राममन्दिर के बंद तालों को खुलवाकर हिन्दू वोटों को सुरक्षित किया था। दूसरे, जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर ने इस विवाद को समाप्त करने का साहसिक निर्णय लिया ही था, राजीव गाँधी(कांग्रेस) ने तुरन्त सरकार से अपना समर्थन वापस ले, चंद्रशेखर सरकार को गिरा दिया था। 
खुदाई में मिले अवशेषों को कोर्ट से किसने छुपाया और किसके कहने पर?
फिर कांग्रेस और अन्य भाजपा-विरोधी कभी नहीं चाहेंगे कि अयोध्या विवाद समाप्त हो। इसलिए खुदाई में मिले अवशेषों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किये। मंदिर विरोधी भलीभांति इस बात से अवगत थे कि खुदाई में मिले अवशेषों को देखते ही, दुनियाँ की कोई अदालत अयोध्या में राम मंदिर बनने से नहीं रोक सकती और जिस दिन मंदिर बन गया, मंदिर विरोधियों को मुस्लिम वोट तो क्या रोटियों के भी लाले पड़ सकते हैं। इसीलिए खुदाई में मिले इतने प्रमाणों को छुपा कर, कोर्ट में केवल एक ही खम्बा दिखाया गया। 
मंदिर विरोधी खेमे में भी यह चर्चा गम्भीर होती जा रही है कि कहीं मंदिर पक्षधर खुदाई में मिले अवशेषों को केवल कोर्ट ही नहीं, जनता के समक्ष प्रस्तुत करने की माँग को केन्द्र में मोदी सरकार, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध जनआन्दोलन छेड़, कोर्ट को धोखा देने वालों को आजीवन कारावास किये जाने की माँग करने पर शायद मन्दिर विरोधी दुनियाँ में शर्मसार होने के साथ-साथ अपने ही परिवारों में लज्जित न हो जाये और उनके शाही रहन-सहन निर्धनता में न परिवर्तित हो जाएँ।    
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सरकार कानून नहीं लाई तो धर्म संसद में होगा फैसला : विहिप

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनंत काल तक इंतजार नहीं किया जा सकता। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अगर सरकार कानून बनाने में असफल रहती है तो अगले साल प्रयागराज कुंभ में होने वाले धर्म संसद में साधु संत इस पर रणनीति बनाएंगे। 
उन्होंने कहा कि राम मंदिर आजादी के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन है और इससे हिंदू-मुस्लिम समीकरण प्रभावित हो रहा है। पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत भी विजया दशमी के मौके पर मंदिर के लिए कानून बनाने की बात कह चुके हैं।

राम मंदिर मामले में कुछ नहीं करेगी अदालत : शिव सेना

भाजपा से रिश्ते में कड़वाहट रखने वाली उसकी सहयोगी शिव सेना ने कहा है कि कोर्ट राम मंदिर मामले में कुछ नहीं करेगा। शिव सेना नेता संजय राउत ने फैसले पर कहा, ‘राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है, उसने कौन सी तारीख दी, हम इस पर ध्यान नहीं देते और न ही देना चाहते हैं। इस मसले पर कोर्ट कुछ नहीं करेगा।’ राउत ने कहा कि हमने 25 साल पहले बाबरी ढांचा ढहाने से पहले कोर्ट से नहीं पूछा था। हम चाहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बने। हम पाकिस्तान में राम मंदिर बनाने की मांग नहीं करते। 
मंदिर पर एनसीपी व शिव सेना में वाक युद्ध
मंदिर निर्माण को लेकर शिव सेना और एनसीपी में शब्द युद्ध तेज हो गया है। शरद पवार के भतीजे राजेंद्र के बेटे ने मंदिर मुद्दे पर अजित पवार की आलोचना पर शिव सेना नेता उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया है। 
दरअसल शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पिछले हफ्ते कहा था कि उद्धव ठाकरे अपने पिता बाल ठाकरे के नाम पर एक स्मारक तक तो बनवा नहीं पाए और अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की ‘बीन’ बजा रहे हैं। शिव सेना ने इसका अपने मुखपत्र सामना में जवाब देते हुए अजित पवार को ‘गटर का कीड़ा’ बता दिया। 
जहाँ तक बाल ठाकरे स्मारक की है, अजित पवार को स्मरण होगा कि बाल ठाकरे तो प्रारम्भ से ही अयोध्या में भव्य राम मन्दिर के पक्षधर रहे हैं, और जिस दिन अयोध्या में भव्य राम मन्दिर बनेगा, बाल ठाकरे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

सरकार को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए : भाकपा

उधर भाकपा नेता डी राजा और सुधाकर रेड्डी ने कहा है कि यह मामला अभी विचाराधीन है और भाजपा नेता अध्यादेश के जरिये मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी तानाशाही व्यवस्था में नहीं रहते और लोकतांत्रिक संस्थानों को भाजपा नेताओं के बयानों का संज्ञान लेना चाहिए। सरकार को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

'कोई भी अच्छा हिन्दू अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहता'--शशि थरूर, कांग्रेस नेता

Shashi Tharoor
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर सुनवाई शुरू होने से कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर ने विवादित बयान दिया है। शशि थरूर ने सोमवार को कहा कि 'अच्छे हिन्दू अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहते।' शशि थरूर के इस बयान पर नए सिरे राजनीतिक विवाद शुरू हो सकता है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने थरूर के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि थरूर का यह बयान कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाएगा।
थरूर ने कहा है, 'कोई भी अच्छा हिन्दू किसी दूसरे के पूजास्थल को गिराकर और बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहता है।' बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 29 अक्टूबर से राम मंदिर विवाद पर सुनवाई शुरू करने जा रहा है।
वहीं शशि थरूर ने इस विवादित बात कहने के साथ ही भाजपा पर वोट बैंक की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। वह कहते हैं कि, हिंदी भाषी तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने सॉफ्ट हिंदुत्व से आगे जाकर धार्मिक कार्ड खेला है। मध्य प्रदेश में उसने ‘राम वन गमन पथ’ का निर्माण और प्रत्येक पंचायतों में गोशाला का निर्माण कराने का वादा किया है। ऐसे में अब थरूर के इस विवादित बयान से काफी हलचल मचने वाली है और कांग्रेस को भी थरूर के इस बयान से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
लगता है थरूर ने मंत्री होते हुए भी कभी भारत देश का वास्तविक इतिहास पढ़ने का प्रयास नहीं किया। थरूर तो क्या किसी भी कोंग्रेसी ने नहीं किया होगा। अगर किया होता, कोर्ट में रामसेतु और पुरुषोत्तम राम को काल्पनिक नहीं कहते। कोर्ट से खुदाई में मिले राम मन्दिर के अवशेषों को नहीं छुपवाते। थरूर जी कुछ तो शर्म कर लो। 
दरअसल कांग्रेस गुड़ तो खाती है, लेकिन गुलगुलों से परहेज़ भी करती है। अब कोई कांग्रेस से पूछे : राममन्दिर के ताले किसने खुलवाए, तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी ने। शिलान्यास किसने करवाया, तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी ने। राजीव भाजपा, शिव सेना, आरएसएस या हिन्दू महासभा से नहीं थे, बल्कि कांग्रेस से थे। फिर किस आधार पर राजीव गाँधी ने किसी की जगह पर शिलान्यास करने की कोर्ट से आज्ञा दिलवाई? यानि कांग्रेस अयोध्या में राममन्दिर बनवाना तो चाहती है, परन्तु अपने वोट-बैंक अर्थात मुस्लिम वोट नहीं खोना चाहती। मुझ जैसे वरिष्ठ पत्रकार इस सच्चाई से पूर्णरूप से परिचित होंगे कि किन परिस्थितियों में राजीव ने इन कामों को अन्जाम दिया था। वह था सुप्रीम कोर्ट का शाहबानो के पक्ष में निर्णय।संसद से सुप्रीम कोर्ट निर्णय को बदले जाने पर कांग्रेस से हिन्दू वोटर नाराज़ न हो जाए, इसलिए ताला खुलवाया गया। दूसरे अर्थों में यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस में हिन्दू "मुँह में राम बगल में छुरी" कहावत को चरितार्थ कर रही है।  
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पाकिस्तान भारत की तरह एक देश नहीं है, पाकिस्तान का निर्माण ही हिन्दुओ से नफरत के कारण .....


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कांग्रेस के नेता शशि थरूरद्वारा शुरू किए गए हिन्दू पाकिस्तान विवाद में अब बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तसलीमा नसर...



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निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को ‘‘अवैध प्रवासी’’ करार नहीं द....



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राम मंदिर निर्माण को लेकर शिवसेना ने अक्टूबर 5 को बड़ा बयान दिया है. शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा 'जब अयोध्‍या मे....

इस बीच शशि थरूर का यह बयान कि 'अच्छे हिंदू अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहते' कांग्रेस को मुश्किल में डाल सकता है। हिंदी भाषी तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने सॉफ्ट हिंदुत्व से आगे जाकर धार्मिक कार्ड खेला है। 
कांग्रेस अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को जनेऊधारी हिन्दू और शिवभक्त बता चुकी है। ऐसे में थरूर का मंदिर विरोधी बयान कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है। थरूर का यह सामने आने के बाद भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने निशाना साधने में देरी नहीं की। उन्होंने कहा कि थरूर के इस बयान से कांग्रेस पार्ट को भारी नुक्सान होगा। कांग्रेस थरूर के इस बयान से दूरी बना लेगी।
Who is he (Shashi Tharoor) to decide?, asks @Swamy39, BJP MP on his comment on Ram Mandir
स्वामी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को थरूर के इस बयान से भारी नुक्सान होगा। वह अपने नेता के बयान से दूरी बना लेगी।' भाजपा नेता ने कहा कि सुनंदा पुष्कर की हत्या मामले में थरूर के खिलाफ चार्जशीज दायर हो चुका है, उन्हें जेल जाना होगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर और हिंदुत्व के बारे में कांग्रेस नेता को जानकारी नहीं है। देश के सभी साधु और संत अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होते देखना चाहते हैं।