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टेरर फंडिंग का खुलासा : गाजियाबाद के रियाजुद्दीन का बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर बिहार के हुसैन का: 70 लाख रूपए का ट्रांजेक्शन, दोनों फरार

                                                  यूपी एटीएस ने टेरर फंडिंग का किया खुलासा
उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS विंग ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से की जा रही फंडिंग का खुलासा किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण निवासी इजहारुल हुसैन को नामजद किया गया है। दोनों पर भारत सरकार को अस्थिर करने, सेना व अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान को भेजने का आरोप है।

ATS ने शुक्रवार (10 नवम्बर 2023) को इजहारुल हुसैन और रियाजुद्दीन पर FIR दर्ज की। FIR के मुताबिक गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र निवासी रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण में शिकारपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले इजहारुल हुसैन के एक-दूसरे से सम्पर्क में होने की सूचना एजेंसी को मिली थी। रियाजुद्दीन ने गाजियाबाद के फरीदनगर की केनरा बैंक ब्रान्च में एक खाता खुलवा रखा है। इस खाते से इजहारुल का मोबाइल नंबर लिंक है।

इस खाते की जाँच में ATS को पता चला कि मार्च 2022 से अप्रैल 2022 के बीच इस खाते से कुछ अन्य खातों के बीच लगभग 65 से 70 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ। ये पैसे रियाजुद्दीन ने इजहारुल हुसैन ने देशी विरोधी साजिश के तहत अलग-अलग खातों में भेजे हैं। इस हरकत में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के कुछ एजेंट भी शामिल बताए जा रहे हैं। जाँच एजेंसी के मुताबिक इस पैसे का प्रयोग भारतीय सेना सहित देश के अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान भेजने के लिए होना था।

ATS के अनुसार रियाजुद्दीन, इजहारुल और कुछ अन्य ISI एजेंट भारत सरकार को अस्थिर करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना चाह रहे थे। ये सभी आरोपित पाकिस्तान में मौजूद अपने आकाओं से बात करने के लिए अलग-अलग एप का प्रयोग किया करते थे। इन सभी पर IPC की धारा 121- A के तहत कार्रवाई की गई है।

इस FIR में आरोपितों पर जिस 121- A के तहत कार्रवाई हुई है वो सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या उसकी साजिश रचने की आशंका के तहत लगाई जाती है। इस धारा के प्रावधान में आजीवन कारावास और मृत्युदंड भी शामिल है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR दर्ज होने के बाद से रियाजुद्दीन और इजहारुल हुसैन फरार हैं। ATS इन दोनों की तलाश में दबिश दे रही है।

ट्रैफिक रूल तोड़ने पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न, पैसे लेकर आतंकवादियों की मदद: हिलाकर रख देगा DSP आदिल मुश्ताक का सेक्स और टेरर ट्रैप

                 आतंकियों का सहयोगी और जम्मू-कश्मीर पुलिस का DSP आदिल मुश्ताक (साभार: अमर उजाला)
हाल ही में गिरफ्तार किए गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी शेख आदिल मुश्ताक को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें अगले आदेश तक प्रदेश सरकार ने जोनल पुलिस मुख्यालय कश्मीर के साथ अटैच कर दिया है। मुश्ताक पर टेरर फंडिंग से जुड़े एक आरोपित को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ करने और घूस लेने का आरोप है।

श्रीनगर पुलिस मुश्ताक को 21 सितंबर 2023 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस उसे 6 दिन की रिमांड पर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पाँच सदस्यीय एक SIT का गठन किया गया है और उसे इस मामले की जाँच सौंपी गई है।

प्रशासन की जाँच में सामने आया है कि आदिल मुश्ताक ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमल आदिल डार और जहूर मुज्जमिल पर सर्विलांस लगाया था। इसके बाद इसी साल फरवरी में उनके कब्जे से 32 लाख रुपए बरामद किए गए हुए। इस दौरान आदिल मुश्ताक की करतूत का पता चला।

इस दौरान पता चला कि इस पूरे मामले की जाँच करने वाला डीएसपी आदिल मुश्ताक ही था और उसने टेरर फंडिंग के आतंकियों को बचाने के लिए 2.7 लाख रुपए की घूस ली थी।मार्च 2023 में उसे नौगाम और जाँच से हटा दिया गया। तब मुश्ताक ने अपने जूनियर के जरिए फर्जी बयान दिलाकर मुज्जमिल को बचाने की कोशिश की थी।

मुश्ताक के खिलाफ लगने वाले आरोपों से जम्मू-कश्मीर पुलिस की हर तरफ आलोचना हो रही थी। इससे केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस की छवि को भारी नुकसान हो रहा था। इसके बाद पुलिस ने आदिल मुश्ताक के खिलाफ सबूत जुटाने की कोशिश शुरू कर दी और आखिर कार पुलिस को ये सबूत हाथ लग ही गए। इसके बाद सरकार ने एक्शन लिया।

 जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई कि आदिल मुश्ताक अपनी गुड लुकिंग परनालिटी के साथ-साथ DSP जैसे महत्वपूर्ण पद का भरपूर मिसयूज करता था। जब वह ट्रैफिक पुलिस में था तो वह अपने पद का दुरुपयगो करते हुए लड़कियों का यौन शोषण करता था। इसके लिए उसने एक होटल में कमरा तक ले रखा था।

ट्रैफिक डिपार्टमेंट में बतौर डीएसपी मुश्ताक पैसे वाली परिवार से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों को ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अपने सामने पेश करवाता था। इनमें फर्जी मामले भी होते थे, जो उसके कहने पर बनाए जाते थे। मुश्ताक ने श्रीनगर के एक टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर में कमरा ले रखा था। वहीं पर धमकाकर इन लड़कियों का वह यौन शोषण करता था।

उस पर पिछले 6 महीनों तक लगाए सर्विलांस में सामने आए तथ्यों के आधार पर बनाए डोजियर में कहा गया है कि मुश्ताक होटल के कमरे में ले जाकर युवा महिला का शोषण का वीडियो भी बनाता था। इसके आधार पर उन्हें वह ब्लैकमेल भी करता था। उन्हें वह धमकाता था कि उसका सर्विस अभी लंबा है और आगे जाकर वे परेशानी में पड़ जाएँगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जाँच में यह बात भी सामने आई है कि आदिल मुश्ताक ने सीज किए गए 200 से अधिक जानवरों को उसने बेच दिया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग के दरफ्तर से वह 4 टेंट और 16 स्लीपिंग एवं कैरी बैग से भी लेकर अपने घर चला गया।

आदिल अपने ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए सरकारी संपत्तियों का भी खूब दुरुपयोग करता था। उसे सोशल मीडिया का भी खूब शौक था। वह इन पर खूब सक्रिय रहता था। उसके लगभग 47000 फॉलोअर हैं। वह सोशल मीडिया पर अपनी ऐशो आराम की जिंदगी का खूब प्रदर्शन करता था।

साल 2020 में ऐसे ही एक और डिप्टी एसपी देविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। टेरर फंडिंग में सहयोग करने के कारण देविंदर को आखिरकार सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि आदिल को भी बर्खास्त किया जा सकता है।

डीएसपी शेख आदिल के दिल्ली के कई मीडिया संस्थानों से अच्छे संबंध थे। इसके अतिरिक्त, वह जम्मू और कश्मीर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ भी लंबे समय से संपर्क बनाए हुए था। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपने घर से कूदकर भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

‘तुर्की’ : भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रीय मुस्लिमों को रेडिकल बनाने के लिए कर रहा फंडिंग

तुर्की भारत रेडिकल मुस्लिम
इमरान खान और एर्दोगन
पाकिस्तान के अलावा एक और ऐसे देश का नाम सामने आ रहा है। जो पिछले काफी समय से भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर तुर्की ने पाकिस्तान की बातों का समर्थन किया था। लेकिन इसके बाद वह भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ बन चुका है। तुर्की में पनप रहे इस नए तरह के आतंकवाद को कोई और नहीं बल्कि वहाँ की एर्दोगन सरकार खुद बढ़ावा दे रही है।
हैरानी की बात यह है कि केरल और कश्मीर में मौजूद इन इस्लामी कट्टरपंथियों को हर तरह की मदद मिल रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस बारे में हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कई अहम बातें बताई। उन्होंने कहा तुर्की की तरफ से भारत के मुसलमानों को कट्टर बनाने की भरपूर कोशिश जारी है। इतना ही नहीं तुर्की भारत के कट्टर मुसलमानों को और कट्टर बना कर उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करना चाहता है।  
तुर्की दक्षिण एशियाई देशों में अपना विस्तार करना चाहता है। लेकिन दूसरी तरफ इस इलाके में सऊदी अरब का प्रभाव किसी से छुपा नहीं है। इसके लिए तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और उनकी सरकार की तरफ से तमाम प्रयास जारी हैं। उसका नतीजा है कि तुर्की ने अपनी छवि बतौर एक रेडिकल इस्लामिक देश स्थापित कर ली है। 
इसी कड़ी में पिछले ही हफ्ते तुर्की की सरकार ने बाईज़ानटाईन कैथेद्रल हगिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में तब्दील कर दिया था। एर्दोगन के इन कदमों से इतना साफ़ है कि वह वैश्विक स्तर पर खुद को मुस्लिमों के रखवाले की तरह दिखाना चाहते हैं। पिछले साल एर्दोगन ने उन मलेशिया के महातिर मोहम्मद और पाकिस्तान के इमरान खान समेत कुछ मुस्लिम देशों के साथ एक गैर-अरब इस्लामी देशों का संगठन बनाने की कोशिश की थी। इसमें ईरान और क़तर ने भी तुर्की की सरकार का साथ दिया था।
सऊदी अरब और यूएई से भारत के समझौते बढ़ने के बाद तुर्की ने पाकिस्तान की और निहारना शुरू कर दिया था। रियाध के दबाव की वजह से तुर्की के साथ होने वाली बैठक में इमरान खान अंतिम वक्त में पीछे हट गए थे। जबकि तुर्की की तरफ से इमरान खान को मनाने की कोशिशें जारी थीं। अधिकारियों का मानना है कि तुर्की की सरकार ने एजेंडा तैयार किया है। जिसके तहत वह दक्षिण एशियाई देशों के मुस्लिमों में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। इस एजेंडे में भारत के मुसलमानों को प्राथमिकता में रखा गया है। 
भारतीय खुफ़िया अधिकारियों के मुताबिक़ तुर्की ने कश्मीर के कट्टर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को सालों आर्थिक मदद की थी। बीते कुछ समय में तुर्की ने अलग तरीकों से भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। एर्दोगन सरकार ने पिछले कुछ सालों के दौरान भारत में कई मज़हबी आयोजनों को बढ़ावा दिया। जिसमें वह मुस्लिम समुदाय के युवाओं को अपने मन मुताबिक़ मज़हबी प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसी कड़ी में उस कट्टरपंथी समूह का नाम सामने आया है जो केरल में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।  
कुछ अधिकारियों का कहना है, “हम अच्छी तरह जानते हैं कि यह समूह तुर्की के लोगों से मिलने के लिए क़तर जाता है। जिससे इन्हें आर्थिक मदद मिलती रहे। उन्हें केरल में इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए 40 लाख रूपए तक मिलते हैं। इसके अलावा तुर्की पाकिस्तान और इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक की फंडिंग भी करता है। तुर्की फ़िलहाल पाकिस्तान के लिए ‘नया दुबई’ बन चुका है। साल 2000 से लेकर 2010 के बीच दुबई आईएसआई का गढ़ बना हुआ था। जहाँ से पाकिस्तान भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता था।”  
इस दशक के दौरान पाकिस्तान की आईएसआई ने भारत के मुस्लिमों को उनके ही देश के खिलाफ़ कट्टर बनाने का काम किया था। यहीं से इंडियन मुजाहिद्दीन ही शुरुआत हुई थी। इसके बाद यूएई और भारत ने आपस में संधि कर ली थी। जिसके बाद यूएई ने खुद भारत विरोधी गतिविधियों को ख़त्म करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा भारत में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ़ हो रहे विरोध में भी तुर्की ने अपनी भूमिका निभाई थी। भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए तुर्की ने आर्थिक मदद तक की थी।  
कश्मीर मुद्दे पर भी संयुक्त राष्ट्र असेम्बली में भी सिर्फ एर्दोगन ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारत के खिलाफ़ बोला था। भारत के खिलाफ़ साज़िश में पाकिस्तान तुर्की का पूरा साथ देता है। इस साल हुए पाकिस्तान के दौरे में एर्दोगन ने कश्मीर पर कई हैरान कर देने वाली बातें कही थीं। उनका कहना था “कश्मीर हमारे लिए पहले जैसा ही है। कश्मीर जितना अहम पाकिस्तान के लिए उतना ही अहम हमारे लिए भी है।”  

35 A पर जो हाथ लगाएगा, वो जिस्म जल कर राख हो जाएगा : महबूबा मुफ़्ती

पीडीपी प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 35 A को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिससे विवाद पैदा हो सकता है। पीडीपी के 20वें स्थापना दिवस पर श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 35 ए को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इस पर छेड़छाड़ करने का मतलब है बारूद पर हाथ लगाना।
कश्मीर की स्थानीय पार्टियाँ वहां की जनता को खुशहाली के सब्जबाग दिखाकर, किस तरह उनके जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं, उसे कोई नहीं समझ रहा। धरती के स्वर्ग में अपनी रोजी-रोटी और तिजोरी भरने के चक्कर में गोलियों से छलनी किया जा रहा है। ये अनुच्छेद 370 और 35A से वहां की जनता को गुमराह किया जा रहा है। कोई मानवाधिकार भी नहीं बोलता, आखिर क्यों चुप्पी साधे हुए है? हकीकत यह है कि जिस दिन ये अनुच्छेद समाप्त हो गए, इन पार्टियों को कश्मीर तो क्या कश्मीर से बाहर भी कोई नहीं पूछने वाला मिलेगा।  
अब्दुल्ला और मुफ़्ती परिवारों ने कश्मीर की मासूम जनता को इस हद तक डराकर कर रखा हुआ है कि "यदि केन्द्र सरकार ने इन अनुच्छेदों को ख़त्म कर दिया, तुम कश्मीरी तबाह और बर्बाद हो जाओगे और पता नहीं और कितने डरों से इनको बहका रखा है। यह कैसी विडंबना है कि पाकिस्तान द्वारा धोखे से हथियाए हिस्से में लोग पाकिस्तान से मुक्त होने की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, और भारत में पल रही पाकिस्तान समर्थक कश्मीरी पार्टियां पाकिस्तान से विलय होने की बात कर रही हैं। दूसरे, जो पाकिस्तान 1947 से लेकर आज तक आत्मनिर्भर नहीं हो पाया, सिन्ध, बलुचिस, अफ़ग़ान आदि पर किस तरह सख्तियाँ करता है, फिर 1947 में गए भारत के मुसलमानों को मुहाजिर कहा जाता है, क्यों ऐसे देश में जाने की धमकियाँ दी जा रही हैं?" इन बातों को वहाँ की जनता के दिमाग में भरनी होगी। इन अनुच्छेदों के समाप्त होने पर उन्हें मुहाजिर नहीं, एक भारतीय ही कहा जाएगा।      महबूबा मुफ्ती ने कहा, '35 ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर होगा। जो हाथ 35 ए के साथ छेड़छाड़ करने के लिए उठेंगे वो हाथ ही नहीं बल्कि वो सारा जिस्म जलकर राख हो जाएगा।' महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम अपनी आखिरी सांस तक कश्मीर की सुरक्षा के लिए लड़ेंगे। कार्रकर्ताओं को संबोधित करते हुए महबूबा ने कहा कि वह राज्य को बचाने के लिए लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
Former J&K CM and PDP leader, Mehbooba Mufti, in Srinagar: 35A ke saath chhedd chhadd karna baarood ko haath lagaane ke baraabar hoga. Jo haath 35A ke saath chhedd chaadd karne ke liye uthenge wo haath hi nahi wo saara jism jal ke raakh ho jaega.

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पीएम मोदी ने मन की बात में किया कश्मीर का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार(जुलाई 28) को अपने रेडियो कार्यक्रम के जरिए कश्मीर का जिक्र किया। पीएम ने अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर के लोगों और उनकी मेहमान-नवाजी की भी प्रशंसा की। कश्मीर में 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा, 'कश्मीर के लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ने को कितने बेताब हैं, कितने उत्साही हैं यह इस कार्यक्रम से पता चलता है। इस कार्यक्रम में, पहली बार बड़े-बड़े अधिकारी सीधे गांवो तक पहुँचे। जिन अधिकारियों को कभी गाँव वालों ने देखा तक नहीं था, वो खुद चलकर उनके दरवाजे तक पहुँचे ताकि विकास के काम में आ रही बाधाओं को समझा जा सके, समस्याओं को दूर किया जा सके।'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'विकास की शक्ति बम-बंदूक की शक्ति पर हमेशा भारी पड़ती है। ये साफ है कि जो लोग विकास की राह में नफरत फैलाना चाहते हैं, अवरोध पैदा करना चाहते हैं, वो कभी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकते।'
Centre’s decision to deploy additional 10,000 troops to the valley has created fear psychosis amongst people. There is no dearth of security forces in Kashmir. J&K is a political problem which won’t be solved by military means. GOI needs to rethink & overhaul its policy.
अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर भड़की थी महबूबा
इससे पहले शनिवार को जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती को लेकर भी महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार की आलोचना की थी। महबूबा ने कहा, 'यह एक राजनीतिक समस्या है, जिसे सैन्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता है। केंद्र को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार और उसे दुरुस्त करना होगा।'
महबूबा मुफ्ती ने ट्वीटर पर लिखा, 'घाटी में अतिरिक्त 10,000 सैनिकों को तैनात करने के केंद्र के फैसले ने लोगों में भय पैदा कर दिया है। कश्मीर में सुरक्षा बलों की कोई कमी नहीं है। जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसे सैन्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता। भारत सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और उसे दुरूस्त करने की जरूरत है।'
NIAटेरर फंडिंग पर छापेमारी 
नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के बारामूला कस्बे में चार स्थानों पर छापे मारे। एनआईए द्वारा टेरर फंडिंग जांच के तहत ये छापे मारे गए हैं।' एनआईए के अधिकारियों के साथ राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की टीमें भी थीं। एनआईए ने कई घरों की तलाशी ली। एनआईए पिछले कुछ वक्त से लगातार कश्मीर घाटी में टेरर फंडिंग और हवाला रैकेट का भंड़ाफोड़ करने में जुटी है। पिछले महीने एनआईए ने दावा किया था कि कश्मीर घाटी में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान से टेरर फंडिंग होती रही है।
एनआईए ने इससे पहले 23 जुलाई को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में स्थित केलर इलाके में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रॉस एलओसी ट्रेड का काम करने वाले व्यापारी गुलाम अहमद वानी के घर पर छापा मारा था। वानी पर यह छापेमारी पाकिस्तान से टेरर फंडिंग और हवाला नेटवर्क की साजिश में संलिप्त होने के शक में की गई थी। एनआईए ने अब तक टेरर फंडिंग और हवाला रैक्ट को लेकर कई अलगाववादी नेताओं और व्यापारियों के घर और उनके अन्य ठिकानों पर छापेमारी की है। इसके साथ ही जांच एजेंसी टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में कई अलगाववादी नेताओं को भी गिरफ्तार कर चुकी है। 
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सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों की ओर से जम्मू-कश्मीर में एक बड़े आतंकी हमले क.....

टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में एनआईए ने साल 2017 में केस दर्ज किया था। इस दौरान जांच एजेंसी को जानकारी मिली थी कि जमात-उद -दावा, हिजबुल मुजाहिदीन, लशकर-ए- तैयबा, दुखतारन-ए- मिल्लत और जम्मू- कश्मीर के कई दूसरे अलगाववादी नेताओं के समूह इसमें शामिल हैं। एजेंसी ने इस दौरान 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप- पत्र दाखिल किया था।
घाटी में टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में एनआईए ने अलगाववादी नेता मसरत आलम. शब्बीर शाह और आसिया अंद्राबी को भी गिरफ्तार किया था। इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन अलगाववादी नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इन तीनों पर आरोप था कि इन्होंने आतंकवादी संगठन लश्कर- ए- तैयबा के चीफ हाफिज सईद के इशारे पर जम्मू- कश्मीर में टेरर फंडिंग को बढ़ावा दिया।