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समाजवादी पार्टी के लिए आतंकी थे ‘मासूम मुस्लिम’, योगी बने निर्दोष हिंदुओं का सुरक्षा कवच


सत्ता का इस्तेमाल कैसे होगा, ये पूरी तरह उस इंसान की सोच पर निर्भर करता है जो कुर्सी पर बैठा है। कानून वही रहता है, सिस्टम वही रहता है लेकिन फैसले बदल जाते हैं। उत्तर प्रदेश में यही फर्क साफ दिखाई देता है। जब MY समीकरण वाली राजनीति हावी होती है तब फैसले तुष्टिकरण की तरफ झुकते हैं। जब वही कुर्सी भगवा पहनने वाले मुख्यमंत्री के हाथ में होती है तो जोर कानून-व्यवस्था और न्याय पर दिखाई देता है।

अब इसे सीधे-सीधे एक उदाहरण से समझिए। साल 2015 में दादरी में अखलाक की भीड़ द्वारा हत्या हो गई। उस वक्त यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी। क्या हुआ? करीब दो दर्जन हिंदू युवकों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया। केस चलता रहा, सालों निकल गए लेकिन आज तक ये साफ नहीं हो पाया कि अखलाक को मारा किसने। बाद में ये भी सामने आया कि उसके घर में गौमांस पकाया गया था। इसके बावजूद जिन युवकों को पकड़ा गया, वे लगातार अदालतों के चक्कर काटते रहे। अब जाकर योगी सरकार ने उसी मामले में 18 हिंदू युवकों पर से मुकदमे हटाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी है।

अब जरा 2012 की तरफ चलते हैं। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने और समाजवादी पार्टी की असली सोच सामने आने लगी। पार्टी 2012 के चुनावी घोषणा-पत्र में कह चुकी थी कि आतंकवाद के मामलों में पकड़े गए ‘कथित मासूम मुस्लिम युवकों’ को छोड़ा जाएगा। बात सिर्फ छोड़ने तक ही नहीं थी, ऐसे लोगों को मुआवजा देने तक की बात सपा की सरकार ने की। हुआ भी यही, सरकार बनते ही अप्रैल 2012 में 19 मुस्लिम आरोपितों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

ये कोई छोटे-मोटे टटपुँजिये आतंकी नहीं थे, इनमें वलीउल्लाह जैसे दरिंदे शामिल थे। वही वलीउल्लाह जिसने 2006 में वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में बम धमाका किया था। उस हमले में 7 लोग मारे गए थे और बाकी धमाकों को जोड़ दें तो कुल 18 लोगों की जान गई थी। जाँच एजेंसियों ने बताया कि वह बांग्लादेश के आतंकी संगठन हूजी से जुड़ा था और ट्रेनिंग लेकर भारत आया था। बाद में अदालत ने उसे फाँसी की सजा सुनाई। लेकिन उससे पहले समाजवादी सरकार उसे भी ‘मासूम’ मानकर छोड़ने की तैयारी में थी।

 यही कहानी गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट के आरोपी तारिक कासमी की थी। उसे भी मासूम बताकर रिहा करने की कोशिश हुई। वह जेल में ही मर गया जबकि कोर्ट ने उसे दोषी माना था। फिर नाम आया सितारा बेगम का जिसने पाकिस्तानी जासूस वकास अहमद को छिपने की जगह दी थी। उसे भी छोड़ने की बात चल रही थी। ऊपर से पार्टी नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों से तुष्टिकरण के लिए बयान दिए जा रहे थे। कहा जा रहा था कि ‘मुसलमान बेटियाँ ही हमारी बेटियाँ हैं’। ऐसे में सवाल उठना लाजमी था कि सरकार की प्राथमिकता आखिर है क्या? सत्ता, कानून, न्याय या बस तुष्टिकरण।

हालात ऐसे हो गए कि अदालतों तक को अखिलेश सरकार को फटकार लगानी पड़ी। 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ये तय करना सरकार का काम नहीं है कि कौन आतंकी है और कौन मासूम। अदालत ने तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया कि आज इन्हें छोड़ रहे हो, कल इन्हें पद्म भूषण भी दे दोगे। इसके बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा।

अब दूसरी तरफ देखिए दादरी केस में फँसे हिंदू युवकों की हालत। किसी ने घर बेच दिया, किसी ने जमीन। परिवार के परिवार टूट गए। इसी केस में रवि नाम का एक युवक जेल में ही मारा गया। उसकी जमीन बिक गई, परिवार सड़क पर आ गया और पत्नी विधवा हो गई। रवि की माँ ने ऑपइंडिया को बताया कि उसके बेटे को जेल में भयानक यातनाएँ दी गईं। यहाँ तक आरोप लगा कि ये सब माफिया आजम खान के कहने पर हुआ। यानी एक तरफ आतंकी वलीउल्लाह को छोड़ने की कोशिश और दूसरी तरफ रवि की जान की कोई कीमत नहीं थी।

अब योगी सरकार ने इस मामले में कदम उठाया है। दस साल पुराने केस में 18 हिंदुओं पर से मुकदमे हटाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी गई है। 18 दिसंबर को सुनवाई है। अगर अदालत ने अर्जी मान ली, तो ये 18 युवक सालों बाद सामान्य जिंदगी जी पाएँगे। उनके सिर से केस का बोझ हटेगा। फर्क साफ है कि योगी सरकार ने संवैधानिक तरीके से कोर्ट का रास्ता चुनकर हिंदुओं को न्याय दिलाने पर जोर दिया है जबकि अखिलेश यादव के दौर में सत्ता की प्राथमिकता आतंकवाद के मामलों में आरोपियों को ‘मासूम’ बताकर बचाने की दिखाई देती थी।

योगी आदित्यनाथ ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता का मतलब तुष्टिकरण नहीं बल्कि जिम्मेदारी होता है। दशकों तक जिस प्रदेश में सरकारें वोट बैंक के दबाव में फैसले लेती रहीं, वहाँ योगी ने सत्ता की दिशा ही बदल दी। उनके शासन में प्राथमिकता किसी खास वर्ग को खुश करने की नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और न्याय को केंद्र में रखने की दिखाई देती है।

योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी पहचान यही है कि उन्होंने सत्ता को अपराधियों और दबाव समूहों की ढाल बनने से रोका। पहले जहाँ सरकारें संवेदनशील मामलों में कदम उठाने से बचती थीं, वहीं योगी ने बिना झिझक साफ संदेश दिया कि कानून सबके लिए बराबर है। चाहे राजनीतिक दबाव हो या वोट की चिंता, योगी सरकार ने यह दिखाया कि राज्य चलाने के लिए ‘रीढ़ की हड्डी’ सीधी रखनी पड़ती है। ‘माफिया को मिट्टी में मिला देंगे’ जैसे संदेश उनकी न्याय के प्रति स्पष्ट सोच को दिखाते हैं।

आज योगी आदित्यनाथ का शासन इस बात का उदाहरण बन चुका है कि मजबूत इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीयत हो तो सत्ता का इस्तेमाल सही दिशा में किया जा सकता है। यूपी में बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं है, यह मानसिकता का बदलाव है। जहाँ तुष्टिकरण की जगह न्याय और डर की जगह भरोसा लेने लगा है।

हमास आतंकियों ने महिलाओं से कुछ ऐसे किया रेप : फटे पेट, टूटी हड्डियाँ, खून सने अंडरवियर… : कपडे उतरने से मना करने पर कुदाल से कर दिया सिर कलम, तो किसी के साथ 10 ने मिल कर किया बलात्कार

इजरायल में महिलाओं के साथ बलात्कार की भयावहता का अब पता चल रहा है, हमास आतंकियों ने की थी बर्बरता (फोटो साभार: AFP/Getty/ZumPress)
हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल में घुस कर वहाँ के आम नागरिकों को निशाना बनाया था। यहूदी मुल्क पर 5000 रॉकेट दागे गए थे और 1500 नागरिकों का नरसंहार कर दिया गया था। एक जर्मन महिला टैटू आर्टिस्ट की हत्या के बाद उसे नग्न कर हथियारों के साथ ‘अल्लाहु अकबर’ नारे लगाते हुए जुलूस निकाले जाने का वीडियो अब भी लोगों के जेहन में ताज़ा है। अब इजरायल के पुलिस-प्रशासन और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस हमले का एक और काला सच उजागर किया है।

हमास के इस्लामी आतंकियों ने न सिर्फ महिलाओं का बलात्कार किया, बल्कि पुरुषों को भी अप्राकृतिक यौनाचार का शिकार बनाया। यौन शोषण के पीड़ितों के लिए काम करने वाली संस्था के प्रवक्ता येल शेरेर ने बताया कि महिलाओं एवं पुरुषों के खिलाफ दुष्कर्म के सबूत मिले हैं, प्रत्यक्षदर्शियों ने भी इसकी पुष्टि की है। साथ ही उन्हें शारीरिक हिंसा का भी शिकार बनाया गया। हमास के आतंकियों ने जानबूझकर यौन अपराधों की साजिश पहले से ही रच ली थी, ताकि आम लोगों को आतंकित किया जा सके।

महिलाओं के साथ इस कदर बलात्कार हुआ था कि उनके पेट तक फट गए थे। खूब से सने अंडरवियर मिले हैं। ऐसे सैकड़ों तस्वीरें, वीडियो क्लिप्स और बयान मिले हैं जिनसे यौन अपराधों की भयावहता का पता चलता है। एक महिला ने जब कपड़े उतारने से मना कर दिया तो उसका सिर कलम कर दिया गया। कुदाल से काटे जाने के बाद उसका सिर जमीन पर लुढ़कता रहा। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भी निंदा हो रही है, जिन्होंने इन घटनाओं को मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में मान्यता नहीं दी। इन आपराधिक घटनाओं की जाँच में 6-8 महीने लग सकते हैं।

 ‘वंडर विमन’ का किरदार अदा करने वाली गल गैडोट ने भी इसे लेकर आवाज़ उठाई है। एक अन्य पीड़ित महिला के बारे में पता चला है, जिसके बारे में पता चला है कि वो एक परी की तरह सुंदर थी। 8-10 हमास आतंकियों ने मिल कर उसका सामूहिक बलात्कार किया। वो लगातार चिल्ला रही थी, “बंद करो ये सब, मुझे मार डालो। तुम जो कर रहे हो उसके बाद मैं खुद ही मर जाऊँगी।” महिलाओं से इस कदर बलात्कार किया गया कि उनके हाथ-पाँव की हड्डियाँ तक तोड़ डाली गईं।


भारत के मोस्ट वांटेड एक और दुश्मन का पाकिस्तान में सफाया, जम्मू में आर्मी कैंप पर हमले का मास्टरमाइंड था ख्वाजा शाहिद

वर्ष 2014 से पहले भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद झेलता रहा और यहां की सरकार द्वारा 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' का नाम देकर इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने के कारण विश्व में कोई इनकी नहीं सुनता था, चूंकि भारत सरकार की तरफ से एक्शन का रिएक्शन नहीं होता था तो पाकिस्तान के हौसले बुलंद रहते थे और वह भारत में कहीं भी आतंकवादी हमले करने की हिमाकत कर बैठते था। लेकिन 2014 के बाद भारत बदल गया, लेकिन पाकिस्तान उसी ढर्रे पर चलता रहा। 2014 के बाद पाकिस्तान को जवाब मिलने लगा तो वह संभलकर आतंकवादी हमले करने लगा। लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल उलट गई है। पहले पाकिस्तान भारत के सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर आतंकवादी हमले करता था। आज वह खुद अपने बुरे कर्मों का नतीजा झेल रहा है। उसके सैन्य अड्डों पर पिछले कुछ समय में आतंकवादी हमले बढ़ गए हैं। वहीं जिन आतंकवादियों को उसने पाला-पोसा आज वह एक-एक कर मारे जा रहे हैं। इससे पाकिस्तान के पैरों तले से जमीन खिसक गई है। अब जम्मू में आर्मी कैंप पर हमले का मास्टरमाइंड ख्वाजा शाहिद भी मारा गया है। 2023 से भारत के मोस्ट वांटेड 15 दुश्मनों का सफाया हो चुका है।

2022 से अब तक 20 आतंकवादी मारे गए, 2023 में 15 ढेर
पिछले कुछ महीनों में विदेशी धरती पर भारत विरोधी हरदीप सिंह निज्जर, अवतार सिंह खांडा, परमजीत पंजवार, रिपुदमन सिंह मलिक, हरविंदर रिंडा, सुखदूल सिंह, हैप्पी संघेड़ा के साथ ही अबू कासिम, जहूर मिस्त्री, अब्दुल सलाम भुट्टावी, सैयद नूर, एजाज अहमद, खालिद रजा, बशीर अहमद, शाहिद लतीफ, मुफ्ती कैसर फारूक, जियाउर रहमान, मलिक दाऊद, सुक्खा दुनिके, ख्वाजा शाहिद जैसे आतंकियों की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। वर्ष 2023 में अब तक 15 भारत विरोधी आतंकवादी विदेशों में मारे जा चुके हैं। वहीं 2022 में पांच भारत विरोधी आतंकवादी मारे गए थे।

एक-एक कर मरते जा रहे आतंकवादी
पीएम मोदी के नेतृत्व में जिस तरह भारत का कद बढ़ता जा रहा है वह विदेशी ताकतों को पसंद नहीं आ रहा है। इसीलिए वे तरह-तरह के प्रपंच कर भारत को बदनाम करने, उसकी विकास की रफ्तार को रोकने के षडयंत्र में जुटे हैं। लेकिन यह नया भारत है, ​​भारत के दुश्मन जहां कहीं भी हो उसका खत्म होना निश्चित है, चाहे वे कहीं भी छिपे हों। 2014 से पहले की सरकारें आतंकवादी हमला होने पर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका जैसे देशों से निहोरा करती थीं कि वे इसकी निंदा करें और भारत को इन आतंकवादी हमलों से बचाएं। आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत इस कदर सशक्त, सबल और सक्षम हुआ है कि अब वह दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देता है। यही वजह है कि अब भारत नहीं, पाकिस्तान खुद को आतंकवाद से पीड़ित बता रहा है।

5 नवंबर 2023
जम्मू आर्मी कैंप पर हमले का मास्टरमाइंड आतंकी ख्वाजा शाहिद ढेर
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारत मोस्ट वांटेड लश्कर आतंकी ख्वाजा शाहिद उर्फ मिया मुजाहिद की 5 नवंबर 2023 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सिर कटी लाश बरामद की गई। ख्वाजा शाहिद साल 2018 में जम्मू के आर्मी कैंप पर हमले का मास्टरमाइंड था। एक दिन पहले ही उसको अगवा कर लिया गया था। आतंकी ख्वाजा शाहिद साल 2018 में जम्मू के सुंजुवान में भारतीय सेना के एक कैंप पर हमले की साजिश रचने का मास्टरमाइंड था। आर्मी कैंप पर हुए हमले में 6 जवान, एक सैन्य अधिकारी और एक आम नागरिक की मौत हुई थी। वहीं जवाबी ऑपरेशन में सेना ने हमले में शामिल तीन आतंकियों को ढेर किया था। एजेंसियों को काफी समय से उसकी तलाश थी।

20 अक्टूबर 2023
आतंकवादी मसूद अजहर का दाहिना हाथ दाऊद मलिक पाकिस्तान में ढेर
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने लिखा है, पुलिस के मुताबिक पाकिस्तान के कबायली जिले उत्तरी वजीरिस्तान के मिराली इलाके में 20 अक्टूबर 2023 को मास्क पहने अज्ञात लोगों ने गोली मारकर मलिक दाऊद उर्फ खान मलिक दाऊद उर्फ दाऊद मलिक की हत्या कर दी है। पुलिस ने कहा है कि मलिक दाऊद को निशाना बनाकर गोली मारी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मलिक दाऊद मुसाकी गांव का रहने वाला था और गोली लगने के बाद उसे फौरन टीएचक्यू अस्पताल मीर अली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलवामा हमले के बाद जब भारतीय सेना ने बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की थी तो उस वक्त दाऊद मलिक की वहां पर उपस्थिति बताई गई थी लेकिन वह एयरस्ट्राइक के दौरान बाल-बाल बच गया था।

11 अक्टूबर 2023
पठानकोट हमले का मास्टमाइंड शाहिद लतीफ पाकिस्तान में ढेर
पठानकोट हमले के मास्टमाइंड शाहिद लतीफ की पाकिस्तान के सियालकोट की मस्जिद में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। शाहिद लतीफ NIA की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था। लतीफ पर अज्ञात लोगों ने गोलियां बरसा दी जिससे उसकी मौत हो गई। 2 जनवरी, 2016 को जैश के आतंकियों ने पठानकोट में एयरबेस पर हमला कर दिया था। इसमें 7 जवान शहीद हो गए थे। 36 घंटे एनकाउंटर और तीन दिन तक कॉम्बिंग ऑपरेशन चला था। शाहिद लतीफ आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का एक प्रमुख सदस्य था। उसने ही चारों आतंकवादियों को पठानकोट भेजा था। लतीफ 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान को अगवा करने में भी शामिल था। लतीफ को नवंबर 1994 में भारत में गिरफ्तार किया गया था, और मुकदमा चलाया गया था। कांग्रेस सरकार ने भारत में सजा पूरी होने के बाद 2010 में उसे वाघा के रास्ते पाकिस्तान भेज दिया गया था। NIA के मुताबिक लतीफ 2010 में अपनी रिहाई के बाद पाकिस्तान में जिहादी फैक्ट्री में वापस चला गया था।

10 अक्टूबर 2023
कुलभूषण जाधव को अगवा करने वाला आईएसआई एजेंट मुल्ला बाहौर ढेर
पाकिस्तानी आतंकवादी और आईएसआई एजेंट मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज उर्फ महद उर्फ अब्दुल लतीफ को कुछ अज्ञात लोगों ने बलूचिस्तान के केच इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी। मुल्ला बाहौर ने ही ईरान से कुलभूषण जाधव को अगवा किया था और फिर उसे आईएसआई के हवाले किया था। कुलभूषण जाधव बिजनेस करते थे और भारतीय नौसेना से रिटायर थे। इस वक़्त वह पाकिस्तान की जेल में हैं। कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इसके ख़िलाफ़ भारत ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दस्तक दी थी। वहां से कुलभूषण की मौत की सजा पर रोक लगाई गई है।

30 सितंबर 2023
हाफिज सईद के करीबी मुफ्ती कैसर फारूक की कराची में हत्या
26/11 मुंबई टेरर अटैक के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी हाफिज सईद के सबसे करीबी माने जाने वाले मुफ्ती कैसर फारूक को कराची में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। कैसर फारूक लश्कर के संस्थापक सदस्यों में से एक था और हाफिज सईद का बेहद करीबी सहयोगी था। 30 वर्षीय कैसर फारूक को 30 सितंबर 2023 को समानाबाद इलाके में एक धार्मिक संस्थान के पास गोली मार दी गई।

21 सितंबर 2023
कनाडा में खालिस्तानी आतंकी सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके मारा गया
गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके की कनाडा के विन्निपेग में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वह कई अपराधों में वांटेड था और 2017 में पंजाब से कनाडा भाग गया था। सुक्खा खालिस्तान समर्थक ताकतों के साथ जुड़ गया था। सुक्खा दविंदर बंबीहा गैंग का गैंगस्टर था और पंजाब के मोगा का रहने वाला था। कनाडा के विन्निपेग में अंतर-गिरोह प्रतिद्वंद्विता में उसकी हत्या हुई है। दुनेके पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में देविंदर बंबीहा गिरोह को संचालित करता था, फाइनेंस जुटाता था और मजबूत कर रहा था। वह फर्जी पासपोर्ट पर 2017 में कनाडा भाग गया था। उसके खिलाफ पंजाब और आसपास के राज्यों में हत्या और अन्य जघन्य अपराधों के 20 से अधिक मामले दर्ज थे।

12 सितंबर 2023
लश्कर आतंकी मौलवी मौलाना जियाउर रहमान की दिनदहाड़े हत्या
कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर के एक पार्क में एक मौलवी मौलाना जियाउर रहमान की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। रहमान लश्कर का ऑपरेटिव रहा है। रहमान की मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून दिया। रहमान शाम को सैर करने निकला हुआ था। इस हत्या ने रहमान के रिश्तेदारों, उनके दोस्तों और उनकी धार्मिक भक्ति के प्रति आश्वस्त लोगों को चिंता में डाल दिया है। रहमान लश्कर से लंबे समय से जुड़ा था और मजहबी काम करता था।

8 सितंबर 2023
हाफिज सईद के करीबी आतंकवादी अबू कासिम ढेर
पाकिस्तान में भारत विरोधी कुख्यात आतंकियों की शामत आ चुकी है। पाकिस्तान वैसे तो खुद ही कभी अपने पाले आतं​कियों के हमलों का सामना कर रहा है। वहीं भारत विरोधी आतंकियों की भी जान जा रही है। इन आतंकवादियों की हत्या अज्ञात बंदूकधारी कर रहे हैं। जिनकी खोज पाकिस्तान पुलिस अब तक नहीं कर पाई है। 8 सितंबर 2023 को इन्हीं अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) सरगना हाफिज सईद के करीबी माने जाने वाले आतंकवादी अबू कासिम को मार गिराया। अबू कासिम को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में एक मस्जिद के अंदर गोली मारी गई। अबू कासिम कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार था। वह जम्मू-कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ कई हाई प्रोफाइल हमलों में शामिल था। इतना ही नहीं, वह पीओके से लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को लॉन्च पैड के जरिए जम्मू और कश्मीर में दाखिल कराता था। वह उन आतंकवादियों के रहने, खाने-पीने और पैसों का इंतजाम भी करता था। कासिम स्थानीय युवाओं को लश्कर में भर्ती करने के काम में भी शामिल था। उसे इसके लिए पाकिस्तान से पैसे मिलते थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां काफी समय से अबू कासिम की तलाश कर रही थीं।

पाकिस्तान में छिपे हैं भारत के 10 मोस्ट वांटेड आतंकी

दाऊद इब्राहिमः भारत में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाला दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है। दाऊद के भांजे अलीशाह पारकर ने ED को दिए बयान में खुलासा किया था कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान के कराची में है।

मौलाना मसूद अजहरः आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख नेता है।

हाफिज मुहम्मद सईदः प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और जमात-उद-दावा का मुखिया है। साल 2008 में मुंबई पर हुए हमले में मुख्य आरोपी है। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी। मुंबई हमले के बाद हाफिज सईद को घर में नज़रबंद कर दिया गया था, लेकिन 2009 में छोड़ दिया गया, क्योंकि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट को उसके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

जकी-उर-रहमान लखवीः जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वहीद इरशाद अहमद अरशद का पहली बार नाम उस समय लोगों ने सुना, जब साल 1999 में मुर्दिके सम्मेलन हुआ। लखवी ने फिदायिनों को भारत पर हमले करने और यहां पर खून-खराबा करने के लिए उकसाया था। लखवी ने उस समय इस बात को जोर देकर कहा था कि अब भारत को सबक सिखाने का समय आ गया है। मुंबई की लोकल ट्रेन में वर्ष 2006 में हुए ब्लास्ट्स के पीछे लखवी ही था।

वधावा सिंह बब्बरः ख़तरनाक आतंकी संगठन बब्बर खालसा का चीफ है। पंजाब में बड़ी घटनाओं के पीछे बब्बर खालसा का हाथ रहा है। वाधवा सिंह का पाकिस्तान की सेना और वहां की खुफिया एजेंसियों के साथ काफी गहरा रिश्ता है। बब्बर खालसा को ट्रेनिंग लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात आतंकवादियों द्वारा दी गई है। वधावा सिंह के दाऊद इब्राहिम से भी संबंध हैं और कई तरह की अवैध गतिविधियों में दोनों एक-दूसरे का साथ देते रहे हैं।

लखबीर सिंहः आतंक के दौर में देश छोड़कर इंग्लैंड चला गया था। बाद में इंग्लैंड से पाकिस्तान पहुंच गया। तब से वह पाकिस्तान में रह रहा है। वहां ISI के संपर्क में आने के बाद भारत में अपने पुराने संपर्क के सहारे देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उस पर भारत में कई स्लीपर सेल बनाने का भी आरोप है।

रणजीत सिंह नीताः खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) का चीफ है। वह पाकिस्तान में रहकर इस प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन को चला रहा है। वह आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पंजाब से लोगों को भर्ती करता रहता है।

लखबीर सिंह रोडे उर्फ बग्गाः पाकिस्तान में रहता है, उसका काम ड्रग्स और हथियार भेजना है। पंजाब में लोकल गैंग की मदद के लिए प्रमुख आईएसआई समर्थित खालिस्तानी आतंकी है लखबीर।

परमजीत सिंह पम्माः पम्मा के अमृतपाल सिंह से अच्छे संबंध हैं। पम्मा प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनैशनल से जुड़ा हुआ है। वह खालिस्तान टाइगर फोर्स का भी सदस्य है। NIA की मोस्ट वांटेड लिस्ट में पम्मा का नाम शुमार है। 1994 में पम्मा ने भारत छोड़ दिया था और पाकिस्तान चला गया। उसकी आईएसआई से भी करीबी है।

जावेद चिकनाः जावेद चिकना का नाम टेरर फंडिंग से जुड़ी एनआईए की एफआईआर में आया था। उसने 1993 के मुंबई बम धमाकों के लिए कई लोगों को बम बनाने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी थी।

केमिकल हमले के बाद तबाह हो जाता पूरा इजरायल; हमास आतंकियों की अलकायदा वाली साजिश, तैयार था सायनाइड से बम बनाने का पूरा खाका

                   हमास के आतंकी केमिकल हमला करना चाहते थे (साभार: Council on Foriegn Relations)
दक्षिणी इजरायल पर 7 अक्टूबर, 2023 को किए गए हमले में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकी निर्दोष नागरिकों पर सायनाइड वाले केमिकल हथियारों का उपयोग करने वाले थे। यह खुलासा आतंकियों के पास मिली सामग्री में हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली ख़ुफ़िया एजेंसियों को दक्षिणी इजरायल के किब्बुत्ज़ में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ USB पेन ड्राइव बरामद हुई हैं। इन पेन ड्राइव में आतंकी संगठन अलकायदा की तरह सायनाइड वाले केमिकल हथियार बनाने की विधि बताई गई है।

इस यूएसबी डिवाइस में पूरी तरीके से समझाया गया था कि सायनाइड वाले केमिकल बम कैसे बनाए जाएँ और उन्हें लगा कर ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाई जाए। इजरायली सुरक्षा बलों ने पता लगाया है कि हमास आतंकियों के पास मिली यह जानकारी असल में आतंकी संगठन अलकायदा द्वारा वर्ष 2003 में तैयार की गई थी।

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर सबसे पहले दक्षिणी हिस्से में हमला किया था। इस इलाके में बसे गाँवों और मुहल्लों में आतंकियों ने घर-घर जाकर बच्चों, महिलाओं समेत एक-एक व्यक्ति को मार दिया था। इसी इलाके में आयोजित किए जा रहे एक म्यूजिक फेस्टिवल में 260 से अधिक लोगों को मार दिया था। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हेर्जोग ने आतंकियों के पास से केमिकल बम की जानकारी मिलने पर कहा, “यह अलकायदा की सामग्री है। हम अल कायदा, ISIS और हमास का मुकाबला कर रहे हैं।”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातर यह कहते आए हैं कि हमास भी ISIS की तरह ही खतरनाक है और इसका खात्मा ISIS की तरह होना चाहिए। वह लगातार हमास का समर्थन करने वालों को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से निष्कासित करने की मांग भी करते रहे हैं।

इजरायल की सरकार ने विदेशों में स्थित अपने दूतावासों को भेजे गए केबल में भी इन केमिकल हथियारों के विषय में जानकारी दी है। उन्होंने अपने दूतावासों को बताया है कि हमास ISIS की तरह ही हमले करना चाहता था। इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या अब बढ़ कर 1400 के पार हो चुकी है। इजरायल ने भी इस के जवाब में हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 4400 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।

पाकिस्तान की तरह आतंकवादियों, उग्रवादियों के लिए सुरक्षित पनागाह बन रहा है कनाडा, अब FATF के शिकंजे में फंसेगा

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपनी कुर्सी बचाने के लिए खालिस्तान आतंकवादियों के समर्थक बन गए हैं। जी-20 सम्मेलन में हुई बेइज्जती से तिलमिलाए ट्रूडो ने स्वदेश लौटने पर अपनी छवि चमकाने और देशवासियों का ध्यान भटकाने के लिए खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की मौत का ठीकरा भारत पर फोड़ दिया। पश्चिम के देश अपनी सामंतवादी मानसिकता में ही जीते थे। यही सोचकर उन्होंने भारत पर आरोप मढ़ दिया। लेकिन यह पीएम मोदी का नया भारत है। भारत ने जब एक के बाद एक एक्शन लिए तो कनाडा के पैरों तले जमीन ही खिसक गई। अब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कनाडा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत ने यह कहकर कि कनाडा आतंकवादियों और उग्रवादियों के लिए सुरक्षित पनागाह बनता जा रहा है, उसके मुंह पर तमाचा जड़ दिया है। यह कहकर भारत ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तो यह कि दुनिया नजरों में कनाडा को गिरा दिया जाए और दूसरा उसे फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के शिकंजे में लाया जाए।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर हत्या प्रकरण में कनाडा को खूब लताड़ लगाई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कनाडा आतंकियों को शरण देने वाला देश बनता जा रहा है। उन्होंने कनाडाई नागरिकों को वीजा देने पर लगाई गई रोक की भी पुष्टि की।
विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकांश प्रश्न कनाडा से संबंधित थे। इस दौरान बागची से पूछा गया कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने आरोपों से संबंधित भारत को क्या सबूत पेश किए। इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा की तरफ से भारत को कोई भी जानकारी नहीं दी गई है।

आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना कनाडा
भारत ने 21 सितंबर को कहा कि कनाडा आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “मुझे लगता है कि चरमपंथियों और संगठित अपराध के लिए आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह के रूप में कनाडा की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। मुझे लगता है कि यही वह देश है जिसे अपनी अंतरराष्ट्रीय मान-सम्मान के बारे में चिंता करने की ज़रूरत है।”

कनाडा के लोगों को अभी भारत का वीजा नहीं मिलेगा


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘कनाडा में भारतीय कांसुलेट और उच्चायोग का कामकाज खतरों और धमकियों से प्रभावित हुआ है। इसके चलते हम कनाडा में हम वीजा आवेदनों की प्रोसेसिंग में अभी असमर्थ हैं। जब स्थिति सामान्य होगी तो हम सामान्य प्रक्रिया बहाल करेंगे। हम लगातार समीक्षा कर रहे हैं।’

भारत में कनाडा के राजनयिकों की संख्या कम होगी
अरिंदम बागची ने कहा, ‘कनाडा के राजनयिक की उपस्थिति संख्या कनाडा में हमारी तुलना में बहुत अधिक है। राजनयिक उपस्थिति में समानता होनी चाहिए। भारत में कनाडा के राजनयिकों की संख्या अधिक है। हमने उन्हें बताया है कि इसे बराबर करने की जरूरत है। इस तरह उनके राजनयिकों की संख्या कम होगी। इसको वर्क आउट किया जा रहा है।’

कनाडा सरकार के आरोप पूर्वाग्रह से प्रेरित
कनाडा सरकार के आरोपों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘मुझे लगता है कि कुछ हद तक पूर्वाग्रह है। उन्होंने आरोप लगाए हैं और उन पर कार्रवाई की है। हमें ऐसा लगता है कि कनाडा सरकार के ये आरोप मुख्य रूप से राजनीति से प्रेरित हैं।’

भारतीय राजनयिक को सुरक्षा देना कनाडा सरकार की जिम्मेदारी
कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास में सुरक्षा बढ़ाने के सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘हमारा मानना है कि सुरक्षा प्रदान करना मेजबान सरकार की जिम्मेदारी है। कुछ जगहों पर हमारी अपनी सुरक्षा व्यवस्था भी है। लेकिन इस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करना ठीक नहीं है। यह उचित स्थिति नहीं है।’

भारत की कूटनीति से FATF के शिकंजे में फंसेगा कनाडा
कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो के मुताबिक, हरदीप सिंह निज्जर एक कनाडाई नागरिक था। निज्जर भारत का मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी था। इसी तरह अभी भी भारत के कई वांटेड खालिस्तानी आतंकी कनाडा की धरती से संचालित हो रहे हैं। अब इसे कूटनीति के जरिये FATF तक ले जाना चाहता है और जिस तरह पाकिस्तान को बाकी दुनिया से अलग-थलग कर दिया उसी तरह कनाडा को भी करना चाहता था। नीचे वीडियो में देखिए जिसमें भारत का मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी निज्जर असॉल्ट राइफल लहराते हुए दूसरे आतंकियों को ट्रेनिंग देता नजर आ रहा है। जस्टिन ट्रूडो ने खुद कहा है कि निज्जर कनाडाई नागरिक थे। तो क्या FATF को “एक नामित आतंकवादी को नागरिकता देने और भारत के खिलाफ अलगाववाद फैलाने” के लिए कनाडा के खिलाफ कार्रवाई करके उसे काली सूची में नहीं डाल देना चाहिए?

कनाडा बन गया भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों का ‘दूसरा पाकिस्तान’
मई 2022 में लोकप्रिय पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की नृशंस हत्या के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सहित सुरक्षा एजेंसियों ने भारत में तमाम अपराधों में कनाडा के खालिस्तानी आतंकवादियों के शामिल होने को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उस वक्त यह भी कहा गया था कि कनाडा भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों का ‘दूसरा पाकिस्तान’ बनता जा रहा है। मूसेवाला की हत्या के अलावा, 2022 में मोहाली में पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर दुस्साहसी आरपीजी हमले में कनाडा स्थित पंजाबी गैंगस्टरों का हाथ होने आशंका जताई गई थी। 2018 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अमृतसर यात्रा के दौरान पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कथित तौर पर इस बात पर चिंता जताई थी कि कैसे कनाडाई धरती का भारत के हितों के खिलाफ उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, इन चिंताओं के जवाब में कनाडाई सरकार की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पंजाब पुलिस ने कनाडा के सात गैंगस्टरों की पहचान की
कनाडा में रहने वाले गैंगस्टर भारत में आपराधिक गतिविधियों पर खासा प्रभाव डालते हैं। कई महीने पहले, पंजाब पुलिस ने कनाडा से लंबे समय से काम कर रहे सात गैंगस्टरों की पहचान की थी। इनमें लखबीर सिंह उर्फ लांडा, गोल्डी बराड़, चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू रंधावा, अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला, रमनदीप सिंह उर्फ रमन जज, गुरपिंदर सिंह उर्फ बाबा दल्ला और सुखदुल सिंह उर्फ सुखा दुनेके शामिल हैं। सुखा दुनेके अब मारा जा चुका है। माना जाता है कि ये लोग पंजाब में विभिन्न आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

कनाडा से खालिस्तानी आतंकी पन्नू चलाता है भारत विरोधी अभियान
प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) का सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू भी कनाडा में रहता है और सक्रिय रूप से भारत के खिलाफ जहरीला अभियान चलाता है। गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा ने दिसंबर 2022 में घोषणा की थी कि अगर कोई गुरपतवंत सिंह पन्नू का सिर काटकर लाएगा तो उसे 10 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। यह इनाम सिख समाज की ओर से दिया जाएगा।

पन्नू के खिलाफ कनाडा में हिंदू संगठन ने भी मोर्चा खोला
भारत के मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की धमकी के बाद उसके खिलाफ कनाडा में हिंदू संगठन ने भी मोर्चा खोल दिया है। पिछले कल आतंकी पन्नू ने एक वीडियो जारी कर धमकी दी थी कि हिंदू कनाडा को छोड़ कर भारत वापस लौट जाए। पन्नू की इस स्टेटमेंट पर हिंदू फोरम कनाडा ने संज्ञान लेते हुए जस्टिन ट्रूडो सरकार के पब्लिक सेफ्टी मंत्री डोमिनिक लीबैलेंस को पत्र लिखा है। हिंदू फोरम ने सरकार से मांग की है कि कनाडा की धरती में इंडो-कानाडियन हिंदुओं को धमकाने और उन्हें देश छोड़ कर चले जाने के लिए कहने वाले खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ हेट-क्राइम की कार्रवाई अमल में लाई जाए। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और सरकार को समर्थन देने वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के प्रमुख जगमीत सिंह से भी पन्नू पर एक्शन लेने के लिए कहा है।

दिल्ली में पांच मेट्रो स्टेशनों की दीवारों को विकृत करने में पन्नू का हाथ
हाल ही में दिल्ली में पांच मेट्रो स्टेशनों की दीवारों को खालिस्तानी समर्थक संदेशों के साथ विकृत करने के आरोप में पंजाब से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी की पहचान प्रितपाल सिंह उर्फ काका (30) और उसके सहयोगी राजविंदर उर्फ काले के रूप में हुई, जो एसएफजे से जुड़े थे, उन्हें गुरपतवंत सिंह पन्नू ने नौकरी के लिए 7,000 डॉलर देने का वादा किया था। शिवाजी पार्क, मादीपुर, पश्चिम विहार, उद्योग नगर और महाराजा सूरजमल स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों की दीवारों को “दिल्ली बनेगा खालिस्तान” और “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारों से विरूपित किया गया। नांगलोई में एक सरकारी स्कूल की दीवार भी क्षतिग्रस्त कर दी गई। एसएफजे द्वारा जारी एक वीडियो में मेट्रो स्टेशन की क्षतिग्रस्त दीवारों को दिखाया गया है।

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भारत ने कनाडा को सौंपे हैं कई दस्तावेज, अब तक कार्रवाई नहीं
सुरक्षा एजेंसियों को सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) सदस्यों पर देश भर में अवैध गतिविधियों में लिप्त गैंगस्टरों का समर्थन करने का भी संदेह है। अधिकांश गैंगस्टर जघन्य अपराध करने के बाद कनाडा चले जाते हैं, क्योंकि उन्हें एसएफजे लिंक का समर्थन प्राप्त होता है। वहां से और एसएफजे लिंक के समर्थन से, वे ड्रग्स व्यापार, जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग सहित पूरे नेक्सस को संचालित करते हैं। एसएफजे के समर्थन के बिना, यह संभव नहीं है। भारत ने अलगाववादी संगठनों और आतंकवादी समूहों से जुड़े व्यक्तियों के निर्वासन की तत्काल मांग करते हुए कनाडाई अधिकारियों को कई दस्तावेज सौंपे हैं। अफसोस की बात है कि इन निर्वासन अनुरोधों पर ध्यान नहीं दिया गया और कनाडा आतंकी गतिविधियों से जुड़े कम से कम नौ अलगाववादी संगठनों का अड्डा बन गया है। इन पर पाकिस्तान की आईएसआई के साथ साजिश रचने का आरोप भी है।

आतंकी जैसा, नफरत फैलाने वाला, भीख पर पलने वाला… मोहम्मद जुबैर को क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद द्वारा आईना दिखा, औकात दिखाने पर कांग्रेस और इस्लामिक कट्टरपंथी उतरे बचाव में


क्रिकेट की पिच पर फुदकते पाकिस्तानियों को पेवेलियन भेज औकात दिखाते थे वेंकटेश प्रसाद। वही फास्ट बोलर वेंकटेश अब सोशल मीडिया पर भी उसी फॉर्म में हैं – बेखौफ, बेधड़क! बस मैदान अलग है, टारगेट बदल गया है। मोहम्मद जुबैर नाम के फर्जी फैक्ट-चेकर ने जब वेंकटेश प्रसाद को टारगेट करना चाहा तो उसी की भाषा में चमाटेदार जवाब मिला।
                           वेंकटेश प्रसाद को डिलीट किए गए ट्वीट पर घेरना चाह रहा था जुबैर

इसकी शुरुआत होती है मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट से, जो उसने वेंकटेश प्रसाद को टारगेट कर लिखा। इसमें वेंकटेश प्रसाद के एक डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाया गया था। वेंकटेश ने यह ट्वीट 9 सितंबर को किया था, जो किसी कारण से डिलीट किया गया होगा। इसी पर ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ बनते हुए मोहम्मद जुबैर टूट पड़ा। बिना यह सोचे कि वेंकटेश उसे क्लिन बोल्ड करने वाले हैं। और हुआ भी ऐसा ही।

वेंकटेश प्रसाद ने मोहम्मद जुबैर की भाषा में ही जवाब दिया, उसके डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाते हुए। उन्होंने लिखा:

“हाहाहा… हमेशा नफरत फैलाने वाला वो बोल रहा है, जिसने अपने एजेंडे के लिए कई लोगों की जान खतरे में डाल दी। तुम फैक्ट-चेकर के भेष में ठीक वैसे हो, जैसे कोई आतंकी शांति की बात कर रहा हो। अब पोस्ट करो कि तेरे को पैसे की जरूरत है, अपनी वेबसाइट के लिए भीख माँगो… क्योंकि लोगों को बेवकूफ बनाकर पेट पालने में तुम्हे कोई शर्म नहीं।”

राम-भक्त वेंकटेश को घेर रहे थे जुबैर के चमचे, खाए बाउंसर

जुबैर को उसके ट्वीट पर जब करारा जवाब मिल गया तो उसके चमचे वेंकटेश प्रसाद की ट्रोलिंग करने लगे। रोशन राय नाम के एक यूजर ने तो ‘राम-भक्त’ लिखते हुए वेंकटेश को चैलेंज तक कर डाला। लेकिन अफसोस! वेंकटेश ने यहाँ भी फास्ट बोलर वाली तेजी के साथ ही उसे धो डाला।
रोशन राय ने वेंकटेश प्रसाद के डिलीट किए गए ट्वीट के बारे में पूछा था, जिस पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने लिखा कि उनका ट्वीट एक सामान्य ट्वीट था। जिसमें उन्होंने एक भ्रष्ट व्यक्ति के कारण उसके संगठन पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव की बात कही थी। वेंकटेश ने यह भी कहा कि वर्ल्ड कप में टिकटों को लेकर वो बीसीसीआई की अक्षमता पर भी खुल कर लिख चुके हैं, इसी कारण से भ्रम पैदा हुआ। और ट्वीट डिलीट करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने लिखा: “वरना नाम लेकर, खुल कर बोलने में रामभक्त किसी को छोड़ते नहीं, जय श्री राम।”
वेंकटेश प्रसाद को 9 सितंबर 2023 वाले ट्वीट को अगर गलत मंशा से डिलीट करना होता तो वो फिर से 10 सितंबर को वही ट्वीट एक लाइन जोड़ कर नहीं करते।
जुबैर ने बिना संदर्भ जाने उनको ट्रोल करना चाहा, जिसने कभी भारत का झंडा बुलंद किया है। और जुबैर ने क्या किया है? फर्जी और एडिट किए गए वीडियो के दम पर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगवाए, कट्टर इस्लामी लोगों को हिंदुओं की हत्या के लिए उकसाया।

मोहम्मद जुबैर: फैक्ट-चेकर की भेष में इस्लामी कट्टरपंथी

वो मोहम्मद जुबैर ही था जो ‘Times Now’ चैनल पर आए नाविका कुमार की उस डिबेट का एडिट किया हुआ वीडियो इस्लामी संगठनों तक लेकर गया था, जिसमें नूपुर शर्मा ने इस्लामी साहित्य में लिखी किसी बात का उल्लेख किया था। उससे पहले इस्लामी कट्टरपंथी तस्लीम रहमानी क्या कह रहा था, किस तरह शिवलिंग और हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बना रहा था – इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। इसे एक साजिश के तहत एडिट कर दिया था मोहम्मद जुबैर ने।
एडिट वीडियो वायरल होने के बाद क्या हुआ? मोहम्मद ज़ुबैर वामपंथी मीडिया का हीरो बना… लेकिन नूपुर शर्मा और उनके परिवार को छिप कर रहना उनकी मजबूरी है। कन्हैया लाल तेली, उमेश कोल्हे और प्रवीण नेट्टारू को तो मार ही डाला गया।
फर्जी फैक्ट-चेकर जुबैर कैसे खबरों से खेल कर फेक न्यूज फैलाता है, BefittingFacts नाम के ट्विटर (अब X) यूजर ने इस पर लंबा थ्रेड लिखा है। वेंकटेश प्रसाद ने इस थ्रेड पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह अपने मालिक लोगों से सवाल नहीं करेगा और फिर से पत्रकारिता के नाम पर भीख माँग कर पेट पालेगा।
कॉन्ग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने लिखा, “प्रिय वेंकटेश प्रसाद आप हर किसी के लिए हीरो की तरह हैं। इस दुनिया ने आपको बहुत कुछ दिया है। कृपया कृतज्ञ रहें। जिस तरह आप जुबैर के लिए निगेटिव हैं, दूसरों के लिए निगेटिव न बनें। आपके पास जो कुछ भी है उसकी खुशी मनाएँ। आप पॉवर में हैं, उसे टारगेट न करें। ये उचित नहीं है।”
प्रोपेगेंडा कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य ने लिखा, ‘मैं दशकों से आपका फैन रहा हूँ। लेकिन इस भाषा ने मेरा दिल तोड़ दिया, वेंकी सर।”
रेडियो जॉकी से न्यूजपेडलर बनी सायमा ने लिखा, “एक-एक करके सभी हीरो गिर रहे हैं। यह कितना निराशाजनक है। अपनी भाषा देखिए। कैसी बीमार मानसिकता है। यह बेहद शर्मनाक है।”
कथित पत्रकार जोया रसूल ने अपना परमानेंट टाइप ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए लिखा, “एक पूर्व क्रिकेटर अब एक ट्रॉल बन गया है। सामूहिक हत्यारों का समर्थक और मॉब लिंचर से सहानुभूति रखने वाला आतंकियों के बारे में बात कर रहा है? आप कायर हैं जो हर दिन हत्या करने वाले आतंकियों को मौन समर्थन देते हुए एक मुस्लिम को आतंकी कहने से पहले दो बार नहीं सोचते।”
कर्नाटक के उडुपी में हुए टॉयलेट कांड में लीपापोती करने की कोशिश करने वाली ‘पत्रकार’ अनुषा रवि सूद ने लिखा कि हमारे बचपन के नायक आखिर कितना नीचे गिरेंगे।

वेंकटेश प्रसाद ने दिया जवाब

कॉन्ग्रेस नेताओं, वामपंथियों और इस्लामवादियों के गुट द्वारा वेंकटेश प्रसाद को भला-बुरा कहे जाने के बाद पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने ‘बाउंसर’ के जरिए जवाब दिया। उन्होंने बताया कि कैसे मोहम्मद जुबैर एक पार्टी विशेष के खिलाफ एजेंडे के तहत काम कर रहा है, पैसे बनाने के लिए। उन्होंने कहा कि वो सब कुछ है, लेकिन फैक्ट-चेकर नहीं।
प्रोपेगेंडाधीश सतीश आचार्य को जवाब देते हुए उन्होंने लिखा, “ऐसे कई उदाहरण हैं जिनसे यह साबित होता है कि यह व्यक्ति अपना एजेंडा आगे बढ़ा रहा है। वीडियो को आसानी से एडिट कर रहा है। पैसे कमाने के लिए किसी राजनीतिक दल के खिलाफ चुनिंदा और पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है। वह एक फैक्ट-चेकर के अलावा कुछ भी नहीं है। सच्चाई को न देखने के लिए किसी का अंधा होने की जरूरत नहीं है।”
तहसीन पूनावाला को जवाब देते हुए लिखा कि स्वघोषित फैक्ट-चेकर जुबैर फैक्ट-चेक के नाम पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कई लोगों की जान खतरे में डाल चुका है। लेकिन इसके बाद भी वह अब तक नहीं सुधरा है। अनजाने में ही सही लेकिन शायद आप भी उसे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
वेंकटेश ने आगे लिखा, “बीसीसीआई ने विश्व कप की टिकट को लेकर जिस तरह का रवैया अपनाया है। उसकी आलोचना करता रहा हूँ। लेकिन अब इस तरह के एजेंडा पेडलर्स का एक उदाहरण दिखाइए जहाँ वह अपने मालिकों के खिलाफ बोल रहा हो। उनकी गै-रजिम्मेदारी और हरकतों ने कई लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।” इन तमाम बातों के बीच वेंकटेश प्रसाद ने डिलीट किए गए पोस्ट को फिर से शेयर किया है।

चंपारण के मदरसे से देश विरोधी प्लानिंग, NIA ने मौलवी को दबोचा: 5 बोरी किताबें बरामद, 100 लड़कियों को दे रहा था ‘तालीम’

पूर्वी चंपारण के ढाका से मदरसे के मौलवी को NIA ने किया गिरफ्तार (फोटो साभार: TV9 भारतवर्ष)
अक्सर इस बात का उल्लेख करता रहता हूँ कि मुस्लिम कट्टरपंथी नूपुर शर्मा मुद्दे को जितना अधिक जीवित रखेंगे, उससे कहीं अधिक यह इस्लाम के लिए घातक होगा। यह कटु सच्चाई है। इसलिए यह हर शांतिप्रिय मुसलमानों का फ़र्ज़ है कि वह मुल्लावाद के खिलाफ खड़े हों। क्यों नहीं मौलवी आगे आकर नूपुर के बयान पर चर्चा करते, क्योकि इस बात को वह भी जानते हैं कि नूपुर ने किसी अपशब्द की बजाए वही कहा जो इस्लामिक किताबों में लिखा है। चर्चा यह भी है कि कट्टरवादी कोर्ट इसलिए नहीं जा अगर तीस हज़ारी कोर्ट का 31 जुलाई 1986(नीचे लिंक क्लिक करके पढ़िए) और Calcutta High Court में दर्ज कुरान की 124 आयतों के खिलाफ केस को पुनः खोल दिया वास्तव में इनके लिए घोर संकट खड़ा हो जायेगा। कोई मुस्लिम देश नहीं बोल पाएगा। वैसे भी अब तो सोशल मीडिया यानि यूट्यूब पर तो चर्चाओं में कुरान पर ही प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं, और सब मुंह में दही जमाए बैठे हैं। किसी में खंडन करने का साहस नहीं, बस शरारती तत्वों को लालच देकर डर का माहौल बनाकर अशांति फैलाते रहो। इन कट्टरपंथी मौलानाओं को इतना ज्ञान तो होना ही चाहिए कि जब 800 साल में मुग़ल आतताई हिन्दुत्व को ख़त्म करने में असफल रहे। भारत को छोड़ कहीं उनका नामलेवा नहीं, लेकिन हिन्दुत्व आज भी वही खड़ा है। 

कांवड़ यात्रा रोकने का षड़यंत्र 

कांवड़ियों के ट्रक के नीचे एक मुसलमान व्यक्ति की मौत हो जाती है जिसको लेकर बवाल खड़ा हो गया आसपास के रहने वाले मुस्लिम युवकों ने कहा कांवरियों ने जानबूझकर इस व्यक्ति को मारा है पुलिस ने सभी कांवरियों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी, लेकिन भला हुआ एक बच्चे का जो एक जगह खड़ा होकर कावड़ियों की झांकी का वीडियो बना रहा था और यह घटना भी उस बच्चे के मोबाइल में कैद हो गई वीडियो जांच में सामने आया मरने वाला मुस्लिम व्यक्ति जानबूझकर कावड़ियों के ट्रक के पिछले पहिए के नीचे कूद गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। देवबंद अति संवेदनशील मुस्लिम बहुल इलाका है ऐसी घटना से जातिय दंगा भड़कने की पूरी संभावना रहती है लेकिन इस बच्चे की बनी वीडियो वायरल से मामला पुलिस ने तुरंत शांत करा दिया। 

योगी सरकार को इस मृतक के परिवार को मिलने वाली सरकारी सुविधा वापस ही नहीं ली जाएं बल्कि अब तक मिल चुकी सुविधाओं को ब्याज सहित वापस लिया जाए और परिवार के बैंक खातों की जाँच करवाई जाए। क्योंकि इस लघु वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि न ट्रक ने टक्कर मारी और न ही किसी ने धक्का दिया। यह किसी षड़यंत्र के तहत किया गया है, यूँही कोई मौत के मुंह में नहीं जाता।   

लेकिन सोचने वाली बात यह है आखिर मरने वाला मुसलमान शख्स ने सुसाइड करने के लिए कावड़ियों का ही ट्रक को क्यों चुना कहीं यह कोई दंगा भड़काने की सोची समझी साजिश तो नहीं थी पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। 

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Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts
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बिहार के पटना में हाल में ही ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ के कुछ संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है। जिसके बाद उनके खतरनाक मंसूबों के बारे में देश को पता चला है। इस गिरफ्तारी के बाद से बिहार की पुलिस व जाँच एजेंसी NIA सक्रिय है। NIA अपनी तरफ से लगातार जाँच कर रही है।

इसी सिलसिले में 19 जून, 2022 को पटना से ढाका पहुँची एनआईए की टीम ने पचपकड़ी रोड स्थित जामिया मारिया मिसवा मदरसा से तीन लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान सिकरहना डीएसपी राजेश कुमार समेत एसडीओ व कई पुलिस अधिकारी थाना पर मौजूद रहे।

पटना से आई एनआईए की टीम जामिया मारिया मिसवा मदरसा ढाका के पचपकड़ी पहुँची और मदरसा के मौलवी मुफ्ती असगर अली को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही मदरसा के दो अन्य लोगों को भी कस्टडी में लेकर ढाका थाना पहुँची। हालाँकि पूछताछ के बाद उन दोनों को छोड़ दिया गया और अली असगर को लेकर जाँच एजेंसी पटना आ गई है। जहाँ उससे दोबारा पूछताछ की जाएगी। मौलाना पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है।

एफआईआर में अली का नाम भी है। पुलिस इस सिलिसिले में उसके घर पर भी दबिश देने पहुँची थी, जहाँ पाँच बोरे में उर्दू की किताबें मिली हैं। ये किताबें आपत्तिजनक बताई जा रही हैं, जिनकी आगे जाँच की जाएगी और पता लगाया जाएगा कि वे कैसी मजहबी किताबें हैं। 

असगर अली पलनवा थाना के सिसवनिया गाद गाँव का रहने वाला है और जामिया मारिया मिसवा मदरसा में बच्चों को तालीम देने का काम करता था। ढाका के पचपकड़ी में स्थित जामिया मारिया मिसवा मदरसा का संचालन वर्ष 2013 से हो रहा है। इस मदरसे में लगभग 100 मुस्लिम लड़कियों को तालीम दी जाती है। अली असगर ढाका बड़ी मस्जिद के नायाब इमाम मोहम्मद नेसार के कमरे में रहता है। मस्जिद के नायाब इमाम ढाका थाना क्षेत्र के जमुआ के रहने वाले हैं।

ढाका पहुँची एनआईए की टीम को लेकर एसपी डॉ. कुमार आशीष ने भी कुछ बताने से इनकार किया है। डीएसपी सिकरहना राजेश कुमार ने सिर्फ एनआईए की टीम के आने की पुष्टि की, मगर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम पर देश विरोधी गतिविधियाँ चल रही थी, जिसका खुलासा होने का बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे बिहार में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। 

इससे पहले इस मामले में बिहार की पटना पुलिस ने फुलवारी शरीफ से पाँच लोगों की गिरफ्तारी की थी। इस मामले में कुल 26 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। बिहार पुलिस की फुलवारी शरीफ कार्यालय में छापेमारी के दौरान पुलिस को आपत्तिजनक दस्तावेज मिले थे, जिनमें से एक का शीर्षक था – ‘2047 इंडिया टुवर्ड्स रूल ऑफ इस्लामिक इंडिया’। इसके अलावा इनके पास से पीएफआई के पर्चे भी बरामद किए गए थे।

मोदी के पटना दौरे से 15 दिन पहले से ही इन आतंकियों को फुलवारी शरीफ में ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीएम मोदी को मारने की साजिश को लेकर उन्होंने 6 और 7 जुलाई को बैठकें कीं। हालाँकि, बिहार पुलिस का कहना है कि पीएम मोदी को सीधा खतरा नहीं था।