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केजरीवाल की ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ : देश को बदनाम करने के लिए झूठे आँकड़े पेश कर रही केजरीवाल सरकार

मोदी विरोध में अरविन्द केजरीवाल सरकार कितनी नीचे गिर सकती है, यह कोरोना काल में खुलकर सामने आ गया है, या फिर दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि कोरोना समस्त मोदी विरोधियों के लिए एक अभिशाप बनकर आया है। अभी तक किसी विरोधी को इस आपदा के समय मोदी के साथ खड़ा नहीं देखा गया। मोदी का विरोध करने को इतने मुद्दे हैं, मोदी विरोधी सरकार की नींद हराम कर सकते हैं, लेकिन विरोध उन मुद्दों का किया जा रहा है, जिसकी सच्चाई सामने आते ही, विरोधी अपने ही बुने जाल में फंस रहे हैं, जैसे कभी लॉक डाउन का विरोध, कभी ऑक्सीजन पर हाहाकार आदि। और जैसे ही केंद्र की मोदी सरकार ने ऑक्सीजन ऑडिट की बात की सारा हाहाकार ठीक उसी तरह शांत हो गया, जैसे किसी ने उबलते दूध पर दो बून्द पानी की डाल दी हो, कोई हॉस्पिटल नहीं रो रहा कि हमारे पास दो घंटे या तीन घंटे की ऑक्सीजन बची है। 

मीडिया में भी ऑक्सीजन की कमी और लाशों के ढेर दिखा अपनी TRP बढ़ाने की होड़ में लगी हुई थी। ऑडिट की बात शुरू होते ही हॉस्पिटल के बाहर प्रतीक्षा में मरीज कहाँ लुप्त हो गए, चिंता का विषय है। इसीलिए ऑक्सीजन की ही तरह मोदी सरकार को वैक्सीन की भी ऑडिट करवानी चाहिए।  
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 24 मई 2021 को वैक्सीन के ऐसे आँकड़े पेश किए, जिन्हें मिलावटी कचरा कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जबरदस्त फर्जी और झूठी खबरें फैलाने के बावजूद, ट्विटर ने अभी तक इन पर कोई भी कार्रवाई नहीं की है।

पार्टी द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में, AAP विधायक सौरभ भारद्वाज दावा कर हैं कि यूनाइटेड किंगडम में 88% लोग वैक्सीन लगा चुके हैं। इसी तरह अमेरिका के 84% लोग वैक्सीन की खुराक ले चुके हैं, जबकि भारत में केवल 13% लोग ही वैक्सीन लगवा पाए हैं।

आम आदमी पार्टी द्वारा जारी किए गए ये आँकड़ें झूठे हैं। केंद्र सरकार की छवि धूमिल करने के ​लिए वह यह फर्जी खबरें फैला रही है।

यूके में वैक्सीन आंकड़े 

यूनाइटेड किंगडम की सरकारी वेबसाइट के अनुसार, वहाँ अब तक वैक्सीन की कुल 37,943,681 पहली खुराक दी जा चुकी है। ब्रिटेन की जनसंख्या 6.6 करोड़ को देखते हुए लगभग 57.49 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक मिल चुकी है।

वैक्सीन की कुल 22,643,417 डोज दी जा चुकी हैं, जो दर्शाता है कि 34.30% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है। साथ ही यह भी दिखाता है कि यहाँ कुल व्यस्कों में से 72% ने वैक्सीन की पहली डोज ले ली है और 43% लोगों ने दूसरी डोज भी ले ली है।

इसके अलावा, यूके में सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण नहीं खोला गया है। वर्तमान में, इंग्लैंड में 34 वर्ष से कम, उत्तरी आयरलैंड में 25 वर्ष से कम और स्कॉटलैंड में 30 वर्ष से कम आयु वाले लोगों के लिए टीकाकरण नहीं खोला गया है। वेल्स के अधिकांश क्षेत्रों में वयस्कों के लिए वैक्सीनेशन खोल दिया गया है। इस तरह आम आदमी पार्टी ने जो 88 फीसदी का आँकड़ा पेश किया है, वह उसकी कोरी कल्पना है।

अमेरिका के आंकड़े 

अमेरिका में कम से कम 49.2% लोगों ने टीके की पहली खुराक ले ली है। वहीं, 49.6% वयस्कों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 65 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए यह आँकड़ा 73.9% है। यानी अब अमेरिका में अब तक कुल 39.2% आबादी को पूरी तरह से टीका लग चुका है।

जैसा कि ‘आप’ विधायक सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है, यह आँकड़ा 84 प्रतिशत से काफी दूर है।

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भारत के वैक्सीन आंकड़े 

भारत में अब तक कुल 15,29,30,249 लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है। भारत की कुल जनसंख्या 125 करोड़ है, इसका मतलब है कि कम से कम 12.23% आबादी को टीके की पहली खुराक मिल गई है। भारत की जनसंख्या अमेरिका और यूके की तुलना में कहीं अधिक है। ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत को अपनी पूरी आबादी का टीकाकरण करने में अधिक समय लगेगा, लेकिन AAP टीकाकरण अभियान पर घटिया राजनीति करके देश भर में अपनी किरकिरी करा रही है।

सांसद नाज शाह के कारण 60 साल के बुजुर्ग जेल में : पाकिस्तानी फ्री होकर रहें, इसलिए रेप की गईं बच्चियाँ चुप रहें

                                          महिला सांसद नाज शाह (दाएँ) और 2017 में उनका ट्वीट
इंग्लैंड में एक सांसद हैं, नाम है नाज शाह। पाकिस्तानी मूल की हैं। इन्हें रिटायर हो चुके एक नर्स ने नस्लवादी चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी के आधार पर अब 60 साल के इयान ब्राउन (नर्स) को वहाँ की अदालत ने सजा सुनाई है।

इयान ब्राउन ने सांसद नाज शाह को 11 अप्रैल 2020 को चिट्ठी भेजी थी। इसमें मुख्य तौर पर जबरन शादी, ऑनर किलिंग, ग्रूमिंग गैंग और महिला जननांग विकृति (FGM: female genital mutilation) के बारे में लिखा गया था। साथ ही सांसद नाज शाह पर तंज कसते हुए यह भी लिखा था कि ग्रूमिंग गैंग के शिकार लोग आपकी (सासंद की) नियुक्ति पर खुश होंगे।

पाकिस्तानी मूल की सांसद नाज शाह ने इस चिट्ठी के कंटेंट को नस्लीय मानते हुए पुलिस में शिकायत दी थीं। कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हालाँकि नर्स इयान ब्राउन ने चिट्ठी की बातों को नस्लीय मानने से इनकार किया। उन्होंने इतना ही स्वीकार किया कि ग्रूमिंग गैंग (पाकिस्तानी मूल के) ने जिन सैकड़ों-हजारों बच्चे-बच्चियों के यौन शोषण, हत्या, अपहरण आदि किए, उसके गुस्से के कारण सांसद को पत्र लिखा गया।

वेस्टमिन्सटर मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने नर्स इयान ब्राउन की बातों को नकारते हुए भेजी गई चिट्ठी को नस्लीय ही माना और सजा सुनाई। ब्राउन को 6 सप्ताह की सजा, 24 महीने का सस्पेंशन और अगले 6 महीने तक सांसद नाज शाह से संपर्क नहीं करने का आदेश सुनाया गया।

नाज़ शाह, ग्रूमिंग गैंग और 2017  

बात 2017 के अगस्त की है। ओवेन जोन्स नाम का एक पैरोडी अकाउंट था ट्विटर पर। उसने लिखा था – विविधता (विभिन्न नस्लों, देशों के लोगों के एकसाथ रहने) की भलाई के लिए… रोटरहैम और अन्य जगहों पर जिन लड़कियों का यौन शोषण हुआ, उन्हें अपना मुँह बंद रखने की जरूरत है। नाज शाह तब भी सांसद थीं। उन्होंने न सिर्फ इस ट्वीट को लाइक किया था बल्कि इसे रिट्वीट भी किया था। बवाल के बाद ट्वीट डिलीट करना पड़ा था नाज शाह को।

इन सबके पीछे एक कहानी थी। कहानी पाकिस्तानी कनेक्शन की। ग्रूमिंग गैंग (ऐसा गिरोह, जो 13-16 साल की लड़कियों को प्याप में फँसाता, रेप करता, देह-व्यापार में धकेलता या मर्डर कर देता) इंग्लैंड में पाकिस्तानियों का एक “अनजान लेकिन खौफनाक” समूह है। नाज शाह भी पाकिस्तानी मूल की है। रोटरहैम सेक्स स्कैंडल को लेकर एक सांसद साराह चैंपियन ने अपनी बात रखी थी। पीड़ितों को न्याय दिलाने और आरोपितों को सजा देने की बात कही गई थी।

पाकिस्तानी मूल की सांसद नाज शाह को यह बुरा लगा था। इतना बुरा कि खुद एक महिला होते हुए भी यौन शोषण पीड़ितों की न सोच कर उन्होंने आरोपितों के लिए लंबा-चौड़ा लेख लिख डाला था। नाज शाह के अनुसार ग्रूमिंग गैंग पर चर्चा करके बिना वजह पूरे पाकिस्तानी कम्युनिटी को बदनाम किया जाना है।

ग्रूमिंग गैंग: मौत नहीं बलात्कार का आतंक 

यह पूरे इंग्लैंड में फैला हुआ है। बहुत कम ऐसे शहर हैं, जहाँ पर यह गैंग सक्रिय नहीं। पिछले 40 साल में इंग्लैंड में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने रेप किया है। रेप पीड़िता डॉ. एला हिल ने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था।

हिल ने कहा था, “इसका बहुत कुछ नस्ल और धर्म से लेना-देना है। लड़कियों की गोरी त्वचा हमेशा ग्रूमिंग गैंग से जुड़े मुस्लिम अपराधी के दिमाग में होती है। खुद डॉ. एला हिल की यातना अच्छे मुस्लिम और गैर मुस्लिम के विचारों से प्रेरित था। उनके मुस्लिम अपराधी (पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड) का मानना था कि उनके साथ बलात्कार जायज है, क्योंकि वह सिर से पैर तक पूरी तरह से ढँकी नहीं थीं।

2018-19 में 19000 बच्चियों का यौन शोषण 

2019 में इंग्लैंड में लगभग 19,000 नाबालिगों के साथ यौन ग्रूमिंग (sexual grooming) की वारदात को अंजाम दिया गया था। इंग्लैंड में स्थानीय प्रशासन ने 2018-19 में कुल 18,700 पीड़ितों की पहचान की थी, जिनकी संख्या पाँच साल पहले 3300 थी। नवीनतम आँकड़ों में पिछले 5 वर्षों में चाइल्ड ग्रूमिंग पीड़ितों की संख्या में तेज वृद्धि देखी गई।

इन सब आँकड़ों के बावजूद इंग्लैंड की न्यायिक व्यवस्था अब तक सख्ती (अज्ञात कारणों से) नहीं दिखा पा रहा। इसे आप इस खबर से समझिए। इंग्लैंड में रोशडेल चाइल्ड ग्रूमिंग गिरोह का सरगना कारी अब्दुल रऊफ अब आराम से सड़कों पर बेखौफ घूम रहा है। सजा के बाद अब वो फ्री है! वो भी तब जबकि उसकी सजा के अनुसार उसे 6 साल बाद निर्वासित किया जाना था… लेकिन अभी तक नहीं किया गया।

अब्दुल या डॉ. एला हिल के पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड जैसों के साथ क्यों न्यायिक सख्ती की जानी चाहिए, इसे समझिए। अब्दुल ने एक बच्चे के साथ तब जबरन सेक्स किया, जब वो खुद 3 बच्चों का बाप था। फिर मानव तस्करी भी की। डॉ. हिल का पाकिस्तानी ब्वॉयफ्रेंड प्यार का नाटक करके बार-बार रेप करता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो ‘मुसलमान जैसी नहीं’ है।

नाज शाह सांसद हों या पाकिस्तानी मूल की या एकदम अंग्रेज… इस पर बहस हो सकती है लेकिन वह एक औरत हैं, यह अकाट्य सत्य है। आश्चर्य इस बात का है कि एक औरत यह कैसे कह सकती है कि जिन बच्चे-बच्चियों का यौन शोषण हुआ है, वो चुप हो जाएँ क्योंकि देश में विविधता को बचाना है। सभ्य समाज की पूरी नींव ही न्याय पर आधारित है। जो ताकतवर है, उसी को ध्यान में रख कर फैसले सुनाने वाला समाज जंगलों में रहता था। सांसद नाज शाह तो इंग्लैंड के शहर में रहती हैं, फिर जंगली मानसिकता क्यों? उनकी सोच का कनेक्शन इस्लामी कट्टरपंथ से तो नहीं!

इस्लामी कट्टरपंथी सोच से प्रभावित नहीं हैं नाज शाह तो एक चिट्ठी (गुस्से से भरी, नस्लीय ही सही) से इतनी नाराजगी क्यों? क्यों किसी 60 साल के बुजुर्ग के लिए इतनी नफरत कि वो सलाखों के पीछे पहुँचा दिए जाएँ? क्षमा शोभती उस भुजंग को… ओह, दिनकर की यह कविता पाकिस्तानी आसमानी किताब वाली सांसद कहाँ पढ़ी होंगी!

किसान आंदोलन के पीछे लंदन का खालिस्तानी? : दिलजीत दोसाँझ का UK मैनेजर और भंग कर दी गईं 9 कम्पनियाँ

                               काका ने दिलजीत दोसाँझ के साथ और बन्दूक लेकर अलग-अलग तस्वीरें भी डाली हुई हैं
एक व्यक्ति हैं, काका सिंह मोहनवालिया। वो अपने ट्विटर बायो में अपने काम के बारे में दो चीजें लिखते हैं – पहली ये कि वो यूनाइटेड किंगडम (UK) में पंजाबी गायक दिलजीत दोसाँझ के मैनेजर हैं। दूसरी बात ये लिखते हैं कि वो ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ नामक ट्रस्ट के स्वयंसेवक हैं। दिलजीत दोसाँझ फ़िलहाल चर्चा में भी हैं। ‘किसान आंदोलन’ को लेकर उनका रुख और कंगना रनौत से बहस को लेकर उन्हें खूब मीडिया फुटेज मिल रही है। अब उनके यूके मैनेजर काका का नाम सामने आया है। साथ ही 9 ऐसी कम्पनियाँ सामने आई हैं, जिनके डिटेल्स चौंकाने वाले हैं।

काका सिंह मोहनवालिया का ट्विटर हैंडल

हमने जब ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ ट्रस्ट की वेबसाइट खोली तो इस पर बताया गया है कि ये एक चैरिटी म्यूजिक लेबल है, जिसमें ‘धार्मिक म्यूजिक’ के लिए बिना कोई रकम लिए दुनिया भर में 60 स्वयंसेवक सेवाएँ दे रहे हैं। इस पर बताया गया है कि ये यूके रेजिस्टर्ड चैरिटी है, जो लाभ नहीं कमाता है। धार्मिक म्यूजिक के प्रमोशन, पहचान और प्रचार का दावा करता है। इस पर लिखा है कि कई पंजाबी गायकों के अलावा दिलजीत दोसाँझ भी इससे जुड़े हुए हैं।

‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ की वेबसाइट पर दिलजीत दोसाँझ का नाम

ट्विटर पर विजय पटेल नामक यूजर ने कुछ ऐसी कंपनियों की तरफ ध्यान दिलाया है, जिनका नाम ‘डरहम सेवा रिकार्ड्स’ ट्रस्ट से मिलता-जुलता है और साथ ही उन सभी कम्पनी के प्रमुख लोगों के नाम भी अधिकतर में समान ही हैं। कुछेक में कम्पनी का आधिकारिक पता समान ही है। उनका आरोप है कि संदीप सिंह खाख पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का मास्टरमाइंड है और लगभग सभी पंजाबी गायक उससे संपर्क में रहते हैं।

सबसे पहले उन 7 कंपनियों की बात करते हैं, जो इसी ट्रस्ट से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। सबसे पहले बात ‘धर्म सेवा लिमिटेड’ की, जिसका पता ‘1 St. Davids Close, Leamington Spa, Warwickshire, CV31 1NN’ है और जनवरी 23, 2013 में बनी इस कम्पनी को जुलाई 5, 2016 में भंग कर दिया गया। इसके अधिकारियों में संदीप सिंह खाख और गुरमीत सिंह का नाम है। संदीप सिंह पेशे से इंजीनियर बताए गए हैं।

‘धर्म सेवा लिमिटेड’ – भंग कर दी कई कम्पनी

अब बात करते हैं ‘डरहम सेवा रिकॉर्ड्स लिमिटेड’ नामक कम्पनी की, जिसे सितम्बर 2, 2013 में बनाया गया और मई 3, 2016 में भंग कर दिया गया। पता वही है, जो पहली वाली कम्पनी का था। वही संदीप सिंह खाखा का नाम इसमें भी है, जो ‘धर्म सेवा लिमिटेड’ का अधिकारी था। इस बार वो ‘इंजीनियर’ से ‘डायरेक्टर’ बन गया है। साथ ही उसकी राष्ट्रीयता पहले की तरह ही ब्रिटिश बताई गई है और निवास यूके।

इसी नाम से बनी दूसरी कम्पनी में भी उसी व्यक्ति का नाम

अब ‘Famous STD LTD’ नामक तीसरी कम्पनी की तरफ आते हैं, जिसे अगस्त 9, 2016 को बनाया गया और इसे जनवरी 16, 2018 को ख़त्म कर दिया गया। इस कम्पनी के नाम में न ‘धर्म’ है और न ही ‘सेवा’, फिर भी ये उनसे मिलती-जुलती कैसे है, आइए बताते हैं। क्योंकि इसके अधिकारियों में उसी संदीप सिंह खाख और किसी ‘दिलजीत सिंह’ का नाम है। दिलजीत का जन्मदिन जनवरी 1984 बताया गया है।

ज्ञात हो कि गायक दिलजीत दोसाँझ का जन्म भी जनवरी 1984 में ही हुआ था। बताया गया है कि इस ‘दिलजीत सिंह’ ने सितम्बर 2016 में कम्पनी के डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया। इस कम्पनी के बारे में बताया गया है कि ये मोशन पिक्चर और साउंड रिकॉर्डिंग का काम करती है। यानी, म्यूजिक से जुड़ी कम्पनी ही थी ये भी। विजय पटेल ने जो दावा किया, वो कंपनियों की इन्फो देने वाली वेबसाइट पर सही निकला।

खाख संदीप सिंह और दिलजीत सिंह का नाम

अब विजय पटेल द्वारा बताई गई चौथी कम्पनी की तरफ आते हैं। ‘BUILDAGE LIMITED’, इसे भी मात्र एक साल के लिए चलाया गया और फिर भंग कर दिया गया। इस कम्पनी के अधिकारियों में खाख संदीप सिंह के साथ-साथ बलजीत सिंह और अमृत सिंह का नाम है। कम्पनी का पता वही है, जो तीसरी कम्पनी का था। कम्पनी का नेचर बताया नहीं गया है। इस बार खाख संदीप सिंह इंजीनियर या डायरेक्टर नहीं, ‘Self Employed’ है।

चौथी कम्पनी, जिसका पता समान है, अधिकारी वही है

अब पाँचवीं कम्पनी पर आते हैं। इसका नाम है ‘ATMA TEAS LTD’ और इसका भी पता वही है। इसे मई 28, 2015 में रजिस्टर किया गया और सितम्बर 5, 2017 के बाद से ये कम्पनी अस्तित्व में नहीं है। इस बार संदीप सिंह खाख के साथ-साथ रमणीक पाल सिंह रंधावा का भी अधिकारी के रूप में नाम है। इसका पता वही है, जो पिछली दो कंपनियों का था- ‘112 Office 112 Oxford Street, Leamington Spa, Warwickshire, England, CV32 4RB’।

उसी पते पर, उसकी व्यक्ति की – एक और कम्पनी

अब छठी कम्पनी की बात करते हैं, जिसका नाम है ‘FLAMESKY LIMITED’ और इसे भी सितम्बर 23, 2013 को बनाया गया और मई 12, 2015 को भंग कर दिया गया। इसका पता ‘1 St. Davids Close, Leamington Spa, Warwickshire, United Kingdom, CV31 1NN’ वही है, जो पहली वाली कम्पनी का था और जो संदीप सिंह खाख का भी पता बताया गया था। कम्पनी के अधिकारी के रूप में भी उसका नाम है।

खाख संदीप सिंह की छठी कम्पनी

अब बात विजय पटेल द्वारा बताई गई सातवीं कम्पनी के बारे में। इसे लेकर भी हमने पुष्टि के लिए कम्पनी इन्फो देने वाली वेबसाइट पर सर्च किया। ‘SPEED RECORDS LIMITED’ नामक ये कम्पनी सितम्बर 19, 2011 में बनी और सितम्बर 9, 2014 में भंग कर दी गई। इसमें संदीप सिंह खाख के अलावा दिनेश और बारबरा नामक व्यक्तियों के नाम हैं। हाँ, इसका पता ज़रूर बाकी की कंपनियों से अलग है।

सातवीं कम्पनी, जो बनी और भंग कर दी गई

इसके अलावा दो और कम्पनियाँ ‘SPEED UK RECS LTD’ और ‘SPEED UK RECORDS LTD’ के बारे में भी विजय पटेल ने बताया है, जिनके स्क्रीनशॉट्स भी दिए हैं। हमारे सर्च करने के बाद इन कंपनियों के बारे में दिए गए इन्फो भी सही निकले। इनके साथ भी उसी संदीप सिंह खाख का नाम जुड़ा हुआ है और इन दोनों को 2013 में बना कर 2015 में भंग कर दिया गया। अब बात करते हैं पटेल के आरोपों की।

उन्होंने आरोप लगाया है कि खाख संदीप सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट का मास्क लगा कर खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही वो अपना और अपने ट्रस्ट के सोशल मीडिया हैंडल्स का इस्तेमाल भी ‘किसान आंदोलन’ को लेकर लोगों को भड़काने के लिए कर रहा है। साथ ही सभी पंजाबी गायकों के उसके साथ काम करने की बात भी कही। पटेल ने आरोप लगाया कि उनकी ट्वीट्स के बाद उसने अपना ट्विटर बायो भी बदला और बन्दूक के साथ पोस्ट की गई तस्वीर हटा दी।

विजय सिंह दावा करते हैं कि ये ‘काका सिंह मोहनवालिया’ ही ‘संदीप सिंह खाख’ है। उन्होंने कई पंजाबी गायकों के साथ एक व्यक्ति की तस्वीर शेयर कर के ये दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये 9 तो बस उदाहरण हैं, लेकिन संदीप सिंह खाख के न जाने कितनी ही फर्जी कम्पनियाँ हैं। उसे यूके के सिख नेटवर्क और सिख फेडरेशन ने अवॉर्ड भी दिया था। एक डिलीट की हुई ट्वीट में वो बन्दूक के साथ दिख रहा है।

अगर इस पूरे मामला का सार समझें तो ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ एक ट्रस्ट है, जिसके नाम से मिलती-जुलती और जिसके स्वयंसेवक से जुड़ी 9 ऐसी कम्पनियाँ सामने आई हैं, जिन्हें कुछ महीनों के लिए अस्तित्व में लाया गया और फिर भंग कर दिया गया। इन सबमें मोहनवालिया का नाम जुड़ा, जो विजय पटेल के अनुसार खाख ही है। मोहनवालिया खुद को दिलजीत दोसाँझ का यूके मैनेजर बताता है और कई पंजाबी गायकों के साथ उसकी तस्वीरें हैं। हमने मेल लिख कर ट्रस्ट से सम्पर्क किया है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है। प्रतिक्रिया आते ही आपको अवगत कराएँगे।


हाल ही में कंगना ने एक ट्वीट में दिलजीत दोसाँझ को ‘करण जौहर का पालतू’ कह डाला। वहीं दिलजीत ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कंगना ने दिलजीत के एक ट्वीट पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए लिखा था, “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए आंदोलन कर रही थी वो ही बिलकिस बानो दादीजी किसान आंदोलन के एमएसपी के लिए भी आंदोलन करती हुई दिखीं। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने। इसे तुरंत खत्म करो।” (साभार)