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Delhi Commission for Women में 6 महीने से सैलरी नहीं, बजट 30% घटाया: महिलाओं की दुश्मन क्यों है AAP सरकार?: स्वाति मालीवाल का सवाल


दिल्ली महिला आयोग लगभग निष्क्रिय हो चुका है। दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष पद पिछले 6 माह से खाली है। एससी सदस्य का पद 1.6 साल से खाली है। 2 सदस्य भी कम हैं। दिल्ली महिला आयोग का बजट करीब 30 प्रतिशत कम कर दिया गया है। कर्मचारियों को 6 महीने से वेतन नहीं मिला है। दिल्ली सरकार ने रेप पीड़ितों के लिए बनी हेल्पलाइन 181 को भी बंद कर दिया है। ये सब जानकारी दी है दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 4 पन्नों की चिट्ठी लिखी है और केजरीवाल से अपील की है कि उनकी सरकार महिलाओं से दुश्मनी न निकाले।

दिल्ली महिला आयोग पहली संस्था नहीं जहाँ कर्मचारियों का वेतन रुका हुआ है। जो सरकार सफाई कर्मचारियों, अध्यापकों और लेक्चरर का वेतन रोक सकती है, उस सरकार से क्या उम्मीद की जा सकती है। कोई नया समाचार नहीं। 

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने ‘रेप कैपिटल’ जैसे बदनामी वाले टैग लगे ‘दिल्ली’ को सेफ बनाए रखने के लिए अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। स्वाति मालीवाल ने वो चिट्ठी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “जब से मैंने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया है, तबसे दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अफ़सरों ने आयोग के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। पिछले 6 महीने से किसी को सैलरी नहीं दी गई है, बजट 28.5 प्रतिशत कम कर दिया है, 181 हेल्पलाइन वापस ले ली गई है और अध्यक्ष और 2 मेम्बर की पोस्ट भरने के लिए कोई कार्य नहीं किया गया है। दलित मेम्बर की पोस्ट 1.5 साल से ख़ाली पड़ी है! मेरे जाते ही हर संभव कोशिश की जा रही है महिला आयोग को फिर से एक कमज़ोर संस्थान बनाने की। महिलाओं से दिल्ली सरकार क्यों दुश्मनी निकाल रही है? मैंने अरविंद केजरीवाल जी को पत्र लिखके उनसे जवाब माँगा है!”

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और अब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने ANI से कहा, “आठ साल में दिल्ली महिला आयोग ने 1,70,000 मामलों की सुनवाई की, लेकिन जब से मैंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है, पूरी दिल्ली सरकार दिल्ली महिला आयोग को बंद करने पर अड़ी हुई है। दिल्ली सरकार ने छह महीने से दिल्ली महिला आयोग के लिए एक रुपया भी फंड के तौर पर जारी नहीं किया है।”

स्वाति ने आगे कहा, “हम यह भी देख रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने इस साल के लिए दिल्ली महिला आयोग के बजट में 30% की कटौती की है। दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष का पद अभी भी खाली है और छह महीने हो गए हैं…दो अन्य पद भी खाली हैं…दिल्ली सरकार ने 181 हेल्पलाइन बंद कर दी है। यह शर्मनाक है कि रेप कैपिटल माने जाने वाले राज्य की 181 हेल्पलाइन बंद कर दी गई है…मैंने सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है कि वे ऐसा कैसे कर सकते हैं…जिस राज्य का महिला आयोग सक्षम नहीं है, वहाँ की महिलाओं की सुरक्षा कैसे हो सकती है?…मेरा मानना ​​है कि सरकार नहीं चाहती कि महिलाएँ सक्षम हों। मुझे लगता है कि सरकार को सवाल उठाने वाली महिलाओं से दिक्कत है…”

स्‍वाति मालीवाल ने पूछा है कि महिलाओं से दिल्ली सरकार क्यों दुश्मनी निकाल रही है? उन्होंने पत्र में लिखा है, “बहुत दुख हो रहा है कि जिस सिस्‍टम को इतना कष्‍ट झेलकर 2015 से लेकर अब तक बनाया उसे दिल्‍ली सरकार खत्‍म कर रही है। मेरे 8 साल के कार्यकाल में महिलाओं और बच्‍चों की ओर से कमीशन में आई 1.7 लाख शिकायतों को हैंडल किया। 2016 से आयोग की 181 हेल्‍पलाइन पर 41 लाख से ज्‍यादा कॉल्‍स दर्ज की गई हैं। इस हेल्‍पलाइन को 45 काउंसिलर्स की मदद से बेहतर ढंग से चलाया गया. राजधानी से उससे बाहर 2500 से ज्‍यादा रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन चलाए।”

स्वाति मालीवाल ने कहा, “स्‍वाति ने लैटर में आयोग की रेप क्राइसिस सेल में भर्ती किए गए वकीलों द्वारा दिल्‍ली की हर एक अदालत में की गई रेप पीड़‍ितों की मदद का हवाला दिया। इसके अलावा क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर की मदद से 60 हजार से ज्‍यादा सेक्‍सुअल असॉल्‍ट सर्वाइवर्स की मदद का आंकड़ा पेश किया।”

स्‍वाति ने लिखा कि दिल्‍ली सरकार की ओर से दिल्‍ली महिला आयोग के साथ किए जा रहे बर्ताव की वजह से करीब 674 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। आयोग में बहुत सारी ऐसी सर्वाइवर्स को भर्ती किया गया था जो अपने परिवार में खुद कमाकर घर चलाती हैं, लेकिन सैलरी न मिलने से इनके परिवारों पर भरण पोषण का संकट आ गया है। यहाँ तक कि वे अपने बच्‍चों को स्‍कूलों से निकाल रही हैं, उन्‍हें बीमारियों में भी इलाज नहीं दिलवा पा रही हैं। आरसीसी के लॉयर्स ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में रुकी हुई सैलरीज को लेकर याचिका दी थी, जिस पर हाईकोर्ट ने 9 मई 2024 को वेतन जारी करने का आदेश भी जारी किया था लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 30 मई को फिर से हाईकोर्ट ने सैलरी देने का आदेश दिया लेकिन अभी तक डब्‍ल्‍यूसीडी की ओर से इसे बहाल किया जाना बाकी है। इस पर तत्‍काल कदम उठाने की जरूरत है।

स्वाति मालीवाल लंबे समय तक दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेज दिया। कुछ समय पहले स्वाति मालीवाल के साथ अरविंद केजरीवाल के घर में कथित तौर पर मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसमें अरविंद केजरीवाल के अहम सहयोगी विभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगा। विभव को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया।

दिल्ली : घोटाले ही घोटाले : उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली महिला आयोग के 223 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया

अरविन्द केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट की पीठ को गुमराह कर अपने electronic devices के पासवर्ड नहीं बताने का कारण सामने आने शुरू हो रहे हैं। पीठ ED को पासवर्ड तोड़ने का आदेश क्यों नहीं दे रही? शराब घोटाला, जल बोर्ड घोटाला, वक़्फ़ बोर्ड घोटाला और जो दिल्ली महिला आयोग में घोटाला सामने आया है, इससे भी भयंकर घोटाले बाहर आने को बेचैन हो रहे हैं। केजरीवाल भी महिला आयोग में हुए घोटालों से इंकार नहीं कर सकता। Too many heads to roll. 

दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली महिला आयोग के 223 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। इनकी नियुक्तियाँ दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने गलत तरीके से की थी। दिल्ली महिला आयोग के पास सिर्फ 40 कर्मचारियों का कोटा है, लेकिन स्वाति मालीवाल ने नियमों को अनदेखा करते हुए बिना उपयुक्त मंजूरी के ही इनकी नियुक्ति की थी।

इस मामले का खुलासा वेतन देते समय हुआ था, जब एक महिला कर्मचारी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपना वेतन माँगा था। अब एलजी ने जाँच के बाद इस पर एक्शन लिया है और गलत तरीके से की गई सभी भर्तियों को रद्द कर दिया है। इस भर्ती घोटाले का समय 2016 का है, जब दिल्ली के वक्फ बोर्ड में भर्ती घोटाले को अंजाम दिया गया था। उस मामले में वक्फ बोर्ड के दो बार अध्यक्ष रहे ओखला से आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान को जेल भी जाना पड़ा था। वक्फ बोर्ड में 2016 में फर्जी नियुक्तियों के बाद 2019 में भी अवैध तरीके से 32 नियुक्तियाँ की गई थी।

वहीं, दिल्ली महिला आयोग में 223 लोगों को अवैध तरीके से भर्तियाँ की गई थी, जिन्हें दिल्ली के एलजी ने नौकरी से निकाल दिया है। दिल्ली प्रशासन द्वारा जारी एलजी के आदेश पत्र में सभी बिंदुओं को विस्तार से बताया गया है। इन कर्मचारियों को स्वाति मालीवाल द्वारा वित्त विभाग/दिल्ली एलजी की मंजूरी के बिना नियुक्त किया गया था। यही नहीं, दिल्ली महिला आयोग के पास इन 223 लोगों को संविदा कर्मचारियों के रूप में नियुक्त करने की शक्ति भी नहीं थी, और न ही इतनी नियुक्तियों की जगह ही थी। दिल्ली महिला आयोग अधिनियम द्वारा इस विभाग में 40 पदों का ही सृजन किया गया था। ऐसे में स्वाति मालीवाल ने नियमों को अनदेखा कर इनकी नियुक्तियाँ की थी।

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग के जुड़े सचिव ने उन्हें चेताया भी था और स्वाति मालीवाल को बताया भी था कि वो बिना वित्त विभाग की मंजूरी के नियुक्तियाँ नहीं कर सकती। पहले इसके लिए पद का सृजन होना चाहिए। लेकिन स्वाति मालीवाल ने सलाह को दरकिनार करते हुए ये भर्तियाँ की। इन भर्तियों की शिकायत सचिव ने की थी, साथ ही ये मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी गया था, जब वेतन न मिलने पर एक महिला कर्मचारी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

स्वाति मालीवाल साल 2015 में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनी थी और अगले ही साल उन्होंने ये नियुक्तियाँ की थी। दिल्ली महिला आयोग नें 223 नियुक्तियों के बाद से वेतन का मामला लगातार उठता रहा था और कर्मचारियों को हाई कोर्ट की शरण में जाने के बाद वेतन मिल रहा था। इस मामले की जाँच के बाद ही अब एलजी ने ये कदम उठाया है। कुछ लोग इस मामले में भ्रष्टाचार का अंदेशा भी जता रहे हैं कि कहीं इन नियुक्तियों की आड़ में दिल्ली वक्फ बोर्ड की तरह भ्रष्टाचार तो नहीं किया गया।

वक्फ बोर्ड घोटाला क्या है?

जिस समय स्वाति मालीवाल ने दिल्ली महिला आयोग में भर्तियाँ की, ठीक उसी समय दिल्ली वक्फ बोर्ड के पहली बार अध्यक्ष रहे आप नेता और ओखला से विधायक अमनातुल्लाह खान ने वक्फ बोर्ड में नियुक्तियाँ की थी। उस मामले में सीबीआई की जाँच चल रही है। वहीं, साल 2018 में वक्फ बोर्ड का दोबारा अध्यक्ष बनने के बाद अमानतुल्लाह खान की अगुवाई में 32 लोगों की भर्तियाँ वक्फ बोर्ड में की गई। इन भर्तियों में अमानतुल्लाह खान के करीबी रिश्तेदार और ओखला से ही 24 लोगों को चुना गया। यही नहीं, अमानतुल्लाह के पैतृक गाँव से जुड़े लोगों को भी नौकरियाँ दी गई थी। कॉन्ग्रेस ने बाकायदा इन भर्तियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया था।
अमानतुल्लाह खान को इस मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। यही नहीं, वित्त विभाग ने पत्र जारी कर अमानतुल्लाह खान पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद अमानतुल्ला खान को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी छोड़ना पड़ा था। अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष रहते और भी कई गंभीर आपराधिक कामों को अंजाम दिया, जिसमें उन्होंने वक्फ की संपत्तियों को अवैध तरीके से किराए पर देकर पैसे कमाए। वहीं, भर्तियों के माध्यम से भी उन पर पैसे बनाकर रियल इस्टेट में निवेश का आरोप है। सीबीआई के बाद अब ईडी ने अमानतुल्लाह खान को समन जारी किया है।