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कार्यकर्ताओं को राम मंदिर-पौधरोपण का मुद्दा देकर खुद विदेश घूमने निकले अखिलेश : क्या UP चुनाव के लिए यही है आपकी राजनीति?

                                                            (AI तस्वीर साभार: Dall-e)
कहते हैं, “नेतृत्व की असली पहचान चुनावी मंच पर नहीं, मुश्किल समय में होती है।” जब जनता सवाल पूछ रही हो, सरकार फैसले ले रही हो और राजनीति अपने सबसे गर्म दौर में हो, तब यह भी देखा जाता है कि नेता मैदान में खड़ा है या हजारों किलोमीटर दूर बैठकर सोशल मीडिया से राजनीति कर रहा है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस समय राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर जाँच कर रही है, पौधरोपण अभियान को लेकर बडे़ स्तर पर सक्रिय है। ऐसे वक्त में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव विदेश दौरे पर हैं। ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव निजी दौरे पर अमेरिका गए हैं, और वहाँ से लंदन की यात्रा कर वापस भारत लौटेंगे।

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का अखिलेश पर हमला 

राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि, राम मन्दिर दान चोरी का मास्टर माइंड टिन्नू यादव तो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी का पुराना कार्यकर्ता निकला जो अपने आका के कहने पर हिन्दूओं की आस्था पर चोट कर रहा था।
और ये सब पता चला टिन्नू यादव और अखिलेश यादव की 980 बार हुई फोन कॉल से.. वाह रे सपाई भड़वो बाप ने राम भक्तों पर गो**ली चलवाई और बेटे ने रामभक्तों का चन्दा ही चुरा लिया यानी दोनों ही बाप बेटे ने हिन्दूओं के साथ खेला किया है। ध्यान रहे..
जो अखिलेश राम मन्दिर से चोरी करवा सकता है वो 2027 में CM बनने के बाद राम मन्दिर को तुड़वा भी सकता हैं।

ये वही अखिलेश यादव हैं, जो अपनी विदेश यात्रा के ठीक एक दिन पहले अपनी राजनीति चमकाने के लिए मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम से मिलते हैं। उससे पहले योगी सरकार के पौधरोपण अभियान को ‘भ्रष्टाचार’ बता देते हैं और अपने हिस्से का जनता को बरगलाकर खुद गर्मियों की छुट्टियाँ मनाने विदेश चले जाते हैं।

हजारों किलोमीटर दूर से सोशल मीडिया पर राजनीति कर रहे अखिलेश यादव

दिलचस्प बात यह है कि विदेश जाने से पहले अखिलेश यादव अपनी सोशल मीडिया टीम को ठीक ढंग से समझाकर गए हैं। तभी तो उत्तर प्रदेश से हजारों किलोमीटर दूर पहुँचने के बाद भी अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट बंद नहीं हो रहे हैं। उनकी टीम योगी सरकार को घेरते हुए हर घंटे पोस्ट शेयर कर रही है।

अखिलेश यादव की ताजा पोस्ट भी योगी सरकार के बड़े पौधरोपण अभियान को निशाना बनाने वाली है। इस पोस्ट में उन्होंने अपना पुराना आरोप दोहराते हुए पूरे अभियान को ‘भ्रष्टारोपण’ अभियान बताया। इसके साथ उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंच पर पौधरोपण करते हुए एक वीडियो भी साझा किया।

इतना ही नहीं, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने जैसे अभियान पर राजनीतिक हमला करते हुए उन्होंने इसे ‘एनकाउंटर’ तक कह दिया।

पहले भी राजनीति छोड़ विदेश घूमने गए समाजवादी पार्टी के मुखिया

यह पहली बार नहीं है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति छोड़ अचानक अखिलेश यादव विदेश घूमने निकल गए हों। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मौके आए, जब प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई थी, लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया विदेश यात्रा पर रहे। पार्टी ने हर बार इन दौरों को निजी बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इनकी टाइमिंग पर चर्चा जरूर हुई।

जून 2018 में अखिलेश यादव परिवार के साथ एक विदेशी छुट्टी पर रवाना हुए थे। उस समय समाजवादी पार्टी उपचुनावों में मिली सफलता के बाद विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रही थी। वहीं, लखनऊ के सरकारी बंगले को खाली करने और उसमें नुकसान के आरोपों को लेकर भी उनकी राजनीति के केंद्र में चर्चा हो रही थी। ऐसे समय में उनके विदेश जाने को लेकर सवाल भी उठे थे।

और 2020 में जब हाथरस कांड पूरे देश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ था। कॉन्ग्रेस से लेकर विपक्षी दलों के नेता लगातार हाथरस पहुँच रहे थे। लेकिन उस समय अखिलेश यादव विदेश में थे।

2025 में संसद के बजट सत्र के आसपास भी अखिलेश यादव परिवार के साथ लंदन टूर पर गए थे। तब तक 2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में मजबूत वापसी कर चुकी थी और अखिलेश यादव राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल हो चुके थे। इस समय जब देश में राजनीति करनी चाहिए थी, तब वह जश्न मनाने विदेश में थे।

यानी न तो अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दिया, न प्रदेश में किसी मुद्दे पर सक्रियता से भाग लिया और न ही खुद पर आए आरोपों का जवाब देने की उन्हें फुरसत मिली क्योंकि समाजवादी पार्टी के मुखिया विदेश घूमने में व्यस्त थे।

आज राम मंदिर पर सिर्फ तीन लोग बोल रहे हैं।
1:-पहले कांग्रेसी जिन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी कि अयोध्या में किसी भी कीमत पर राम मंदिर ना बने अपने बड़े-बड़े वकीलों को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर रोकने के लिए लगा दिया और राम को काल्पनिक पात्र बताया था.. कोर्ट में एफिडेविट दिए कांग्रेस ने.*
2:- दूसरा समाजवादी पार्टी जिन्होंने डेढ़ सौ से ज्यादा राम भक्तों की अयोध्या में.. हत्या करवा दी पूरा सरयू खून से लाल करवा दिया..सरयू मै घायलों को बोरी में डालकर फेंका था मुलायम सरकार ने। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक आजम खान को पार्टी और सरकार में नंबर दो बना दिया ।और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के अध्यक्ष जफरयाब जिलानी को कैबिनेट मंत्री का प्रोटोकॉल दिया*
3:- तीसरा आम आदमी पार्टी जिसका सबसे बड़ा नेता केजरीवाल कहता था कि मेरी नानी ने कहा है कि राम मंदिर भूलकर भी मत जाना क्योंकि राम कभी ऐसे मंदिर में नहीं रह सकते जो मस्जिद तोड़कर बनी है । और इसी AAP का मनीष सिसोदिया जो कहता था कि राम मंदिर नहीं बनना चाहिए वहां यूनिवर्सिटी बननी चाहिए।*
इनकी राजनीतिक लालसा तो देखिए आज यह तीनों कैटेगरी के हिंदूद्रोही इस तरह से हिंदुओं को भरमा रहे हैं जैसे यही सबसे बड़े राम भक्त हो..।*
इसका कारण कोई राम भक्त और सनातनी विचारधारा, हिंदुत्व की विचारधारा नहीं है सिर्फ एक ही मकसद है कि हिंदुओं को और ज्यादा कैसे बांटे?कैसे इनको एक से दो फिर दो से चार से चार से आठ करें... इनका यही मकसद है कि हिंदू समाज को कैसे तोड़ा जाए... सिर्फ अपने वोट के हित के लिए सिर्फ अपनी राजनीति एजेंडा के लिए... जिन लोगों ने कभी भी राम मंदिर के समर्थन भी नहीं किया.. चंदा देना तो बहुत दूर की बात... आज वह लोग बात करते हैं राम मंदिर की!!*

अखिलेश, तेजस्वी, राहुल… सब विदेश में बैठकर चमका रहे राजनीति

एक तरफ अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में सत्ता हथियाने का ख्वाब बुन रहे हैं, दूसरी तरफ हर जरूरी मौकों पर विदेश यात्राएँ पर घूमने निकल पड़ते हैं। उन्होंने राम मंदिर चंदा चोरी के नाम पर हिंदुओं को जगाने का ढोंग कर, दलित छात्रा की हत्या पर अपने मतलब की राजनीति कर और पौधरोपण जैसे पॉजिटिव काम को भ्रष्टाचार बताकर, अपने समर्थकों को झुनझुना थमा दिया है और अब उनके समर्थक पूछ रहे हैं कि इसे बजाना कैसे हैं?

अखिलेश यादव अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, जिनकी विदेश यात्रा पर सवाल उठे हों। अलग-अलग समय पर अन्य विपक्षी नेता भी यही करते आए हैं। उदाहऱण के लिए, तेजस्वी यादव, जो फिलहाल यूरोप में है, वहीं बैठकर पटना के बंटी यादव हत्याकांड के पीड़ित परिवार से फोन पर बात कर लेते हैं। राहुल गाँधी भी तीन हफ्ते से यूरोप घूम रहे हैं, जिसके चलते कॉन्ग्रेस के खुद के ‘छात्रों की गूँज’ जैसे कार्यक्रम रद्द हो रहे हैं।

तो इसीलिए यह सोच-विचार करना जरूरी है कि किस नेता को असल में जनता के मुद्दों की फिक्र है और किसे नहीं है। जहाँ एक ओर योगी सरकार राम मंदिर चढ़ावे की निष्पक्ष जाँच कर रही है, ग्लोबल वॉर्मिंग को खत्म करने के लिए पौधरोपण कर रही है लेकिन दूसरी ओर देश का विपक्ष विदेश घूमने में व्यस्त है।

संविधान के दो ही बड़े रक्षक है, पहला नंबर राहुल गांधी है जो अपनी अधिकांश सभाओं एवं पद यात्राओं में एक लाल रंग की पुस्तक होती है उसी को हाथ में लहराते हुए ,चाहे उन्होंने उस पुस्तक को खोल कर पढ़ा हो या नहीं, बह लाल किताब को बह भारत का संविधान कहते है, उसकी रक्षा का बह प्रण लेते दिखते है जब उनके नेहरू गांधी परिवार ने उस संविधान को अपने हिसाब से दसियों बार तोड़ा एवं बदला है।
दूसरे संविधान के रक्षक समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव है, जो 10 साल से सत्ता से बाहर रहकर ऊब चुके है। उन्हें भी राहुल गांधी की तरह संविधान से बहुत प्यार है। उनके एवं उनके पिताश्री के शासन काल में जिस तरह से दूसरे समुदाय के तुष्टिकरण के लिए अपनी सरकार आते ही
उन अपराधियों को छोड़ दिया गया जिन पर बहुत ही गंभीर आरोप थे । अतीक अहमद, मुख्तयार अंसारी एवं उनके गुर्गो के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। फिरौती, जवारदस्त हफ्ता वसूली करने बालों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं। महिलाओं के अंदर घर से बाहर निकलने पर उनके परिजनों को भय, बच्चियां स्कूल जाने से भी डरती थी, बही लोग अब संविधान की रक्षा की बात कर रहे है।

क्रांतिनायक अमर शहीद धनसिंह कोतवाल के नाम पर मेरठ में बनेगा बसअड्डा

                                                      अमित अग्रवाल, विधायक मेरठ कैंट

23 नवंबर 2022 को 1857 के क्रांतिनायक अमर शहीद धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ, गुर्जर सभा मेरठ, गुर्जर विकास समिति उत्तर प्रदेश द्वारा बीएनजी स्कूल एवं हीरो बाइक शोरूम के बराबर में किला रोड मेरठ पर वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया । 

जन-क्रांतिनायक शहीद धनसिंह कोतवाल का जन्मोत्सव सप्ताह कार्यक्रम दिनांक 21 नवंबर 2022 से दिनांक 27 नवंबर 2022 तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाना सुनिश्चित हुआ है। उसी श्रृंखला में आज माननीय विधायक मेरठ कैंट श्री अमित अग्रवाल जी द्वारा एक वृक्ष लगाकर वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है।   वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में माननीय विधायक मेरठ कैंट श्री अमित अग्रवाल ने कहा की मैंने एक प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा है जिसमें क्रांतिनायक अमर शहीद धनसिंह कोतवाल के नाम पर मेरठ में बसअड्डा बनेगा तथा माननीय विधायक जी ने धन सिंह कोतवाल जी की याद में ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाने का आह्वान किया। 

शोध संस्थान के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना ने अपने उद्बोधन में बताया कि धनसिंह कोतवाल के जन्मोत्सव सप्ताह में बहुत उत्साह के साथ हर कार्यक्रम में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी प्रतिभाग कर रहे हैं। आज वृक्षारोपण कार्यक्रम विद्यालयों के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा भी आयोजित किए गए हैं । महिलाएं धन सिंह कोतवाल जी का चित्र हाथ में लेकर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। उन्होंने नारा दिया कि एक वृक्ष लगाओ धनसिंह कोतवाल का जन्मदिन मनाओ। 

गांधी इंटर कॉलेज  खेकड़ा बागपत  में बड़ी संख्या में विद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा वृक्षारोपण किया तथा प्रवक्ता जितेंद्र कुमार ने बच्चों को क्रांति नायक धन सिंह कोतवाल जी का जीवन परिचय, उनकी संघर्ष गाथा और शहादत का विस्तार से चर्चा की। 

धन सिंह कोतवाल महिला शोध समूह की सदस्य प्रधान क्यामपुर जनपद बागपत श्रीमती मीनू चौधरी ने वृक्षारोपण कार्यक्रम में वृक्ष लगाकर महिलाओं को वृक्षों के प्रति सजग किया। इससे प्रेरित होकर सभी महिलाओं ने संकल्प लिया कि क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल की याद में अपने घर पर, अपने खेत में एक वृक्ष जरुर लगाएंगे। 

टिटोडा जनपद मुजफ्फरनगर में स्कूल के विद्यार्थियों तथा धनसिंह कोतवाल महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यों ने मिलकर धन सिंह कोतवाल जी की याद में उनको नमन करते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम किया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम के अवसरों पर कैप्टन सुभाष चंद, चेयरमैन जबर सिंह, भंवर सिंह अध्यक्ष गुर्जर सभा, प्रधानाचार्य संजीव नागर, एडवोकेट सचिन भड़ाना, वीरेंद्र सिंह, गुलवीर पार्षद, सतीश मावी, शौकत अली पार्षद, कमर पाल सिंह नगर जिला अध्यक्ष गुर्जर विकास समिति मेरठ,  जितेंद्र कुमार, मुकेश धस्माना, प्रधान राजवीर सिंह, भरत शर्मा, शैलेंद्र भारद्वाज, चतुरसेन मित्तल, रघुवीर सिंह,आनंद जाटव, मंजू नागर, मीनू चौधरी, सविता, मोमिना, कलावती, वीरवाला, विमला, मूर्ति,आशा,रीता, पवित्रा, दिव्या,पूनम, दीपांशु शर्मा, नूतन सुनीता, पुष्पा, आरती, संजीदा, आदि ने प्रतिभाग किया

तस्वीर सिंह चपराना 

चेयरमैन। 

धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ

केजरीवाल का वृक्षारोपण की आड़ में घोटाला ; भ्रष्टाचार की जड़ें कहां-कहां तक फैली है?

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार भ्रष्टाचार में इस कदर डूब चुकी है कि ऐसा कोई विभाग ही नहीं बचा है जहां भ्रष्टाचार नहीं हो। इनके भ्रष्टाचार की जड़ें कहां-कहां तक फैली है, यह पता करना भी आसान काम नहीं है। दिल्ली में एक के बाद एक कई घोटालों को अंजाम देने के बाद अब वृक्षारोपण घोटाला सामने आया है। इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में वृक्षारोपण में ‘वित्तीय अनियमितताओं’ पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। 

हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी कर यह पूछा है कि पिछले पांच साल में कितने और किस प्रकार के पौधे लगाए गए और उन पर कितना खर्च हुआ है। अदालत को यह बताया गया कि सरकारी एजेंसियां केवल यह लक्ष्य रखती हैं कि पेड़ कितने लगाए गए जबकि पर्यावरण संबंधी लक्ष्य उनके एजेंडे से नदारद रहता है। यानी लगाए गए पौधे बचे हैं या नहीं और प्रदूषण को कम करने में इन पौधों का क्या रोल है, इसकी खोज खबर कोई नहीं लेता है।

याचिकाकर्ता के वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि आमतौर पौधारोपण करने वाली एजेंसियां के पास पौधे की प्रजातियां, संख्या, सटीक स्थान, जियोटैग किए स्थान, पौधारोपण में खर्च और वास्तविक स्थिति में मौजूद पौधों का सटीक रिकॉर्ड नहीं होता है। कैग की रिपोर्ट में भी दिल्ली में पौधारोपण में घोर अनियमितता और मृतप्राय दिल्ली ट्री अथारिटी पर प्रकाश डाला गया है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अगुवाई वाली एक पीठ जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में इस मामले में एसआईटी जांच या एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की गई। पीठ ने सभी पौधारोपण एजेंसियों को ईपीए अधिनियम के 5 के तहत आगे के निर्देश जारी करने के निर्देश भी जारी किए, ताकि सभी नए या प्रतिपूरक वृक्षारोपण को न्यूनतम 8-10 वर्षों की अवधि के लिए आवश्यक रूप से बनाए रखा जा सके। अदालत ने इस मामले में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, डीडीए, एमसीडी, एनडीएमसी, सीपीडब्ल्यूडी, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जैव विविधता परिषद, दिल्ली पार्क और गार्डन सोसाइटी, एएसआई, एनएचएआई और सीपीसीबी से भी उनकी राय मांगी।

पर्यावरणविद् दीवान सिंह ने यह याचिका दायर की थी। याचिका में बड़े पैमाने पर होने वाले या एक दिवसीय वृक्षारोपण करने वाली सरकारी एजेंसियों की समस्या को उठाया गया है। याचिका में कहा गया कि सरकारी एजेंसियां पेड़ लगाने की संख्या गिनकर अपनी उपलब्धियों का बखान करने तक सीमित रहती हैं। जो कि पारिस्थितिक रूप से व्यर्थ और राजधानी में जैव विविधता को बाधित करने वाली होती हैं।

याचिका में भूमि की सीमित मात्रा का मुद्दा भी उठाया गया जिसका उपयोग वृक्षारोपण के लिए किया जा सकता है, साथ ही साथ वृक्षारोपण के गलत तरीके की तरफ भी ध्यान दिलाया गया है जैसे-दो पेड़ों की बीच की दूरी अगर कम होगी तो पेड़ का विकास सही तरीके से नहीं हो पाएगा और वह प्रदूषण को खत्म करने में भी मददगार नहीं होंगे। इसके साथ ही कहा गया है कि शुरुआती वर्षों में पौधों के रखरखाव में कमी की वजह से बहुत से पौधे सूख जाते हैं।

केजरीवाल सरकार ने इसी महीने वृक्षारोपण के लक्ष्य को बढ़ाकर अब 35 लाख की जगह इस साल 42.81 लाख पौधारोपण का नया लक्ष्य तय किया था। केजरीवाल सरकार ने कहा है कि इस साल अब तक 96 प्रतिशत वृक्षारोपण के लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है। पौधारोपण लक्ष्य तो पूरा कर लिया जाता है लेकिन उनमें से कितने पौधे बचे हैं और उनका सही तरीके विकास हो रहा है या नहीं यानी रखरखाव पर किसी कोई ध्यान नहीं देता।