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CAA के ख़िलाफ़ एक शब्द नहीं पढ़ूँगा: विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान

आरिफ मोहम्मद ख़ान, केरल
केरल विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान के साथ बदसलूकी हुई। राज्यपाल के ख़िलाफ़ सदन में जम कर नारेबाजी की गई। दरअसल, राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को सूचित किया था कि वो अपने सम्बोधन का पैराग्राफ 18 नहीं पढ़ेंगे, क्योंकि उसमें सीएए के ख़िलाफ़ बातें लिखी हुई हैं। इस पैराग्राफ में नागरिकता संशोधन क़ानून को असंवैधानिक और भेदभाव करने वाला बताया गया है। ड्राफ्ट में सीएए के बारे में इस तरह की बातें लिखे जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई। बाद में राजभवन ने सीएम पिनाराई विजयन के स्पष्टीकरण को ख़ारिज कर दिया। राज्यपाल के सम्बोधन के ड्राफ्ट को मंत्रिपरिषद द्वारा तैयार किया गया गया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने राजभवन को सलाह दी थी कि राज्यपाल को अपना सम्बोधन बिना कोई बदलाव किए हुए पढ़ना चाहिए। राजभवन ने सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। राजभवन का आरोप है कि केरल मंत्रिपरिषद ने ‘विचारों’ को ‘नीतियों और योजनाओं’ के साथ मिक्स कर के पेश करने का प्रयास किया है और राज्यपाल इसके लिए राजी नहीं हैं। हालाँकि, मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल की आपत्तियों को नकार दिया।

बुधवार (जनवरी 29, 2020) को जब केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान बजट सेशन को सम्बोधित करने विधानसभा पहुँचे, तब विपक्षी पार्टी कांग्रेस के विधायकों ने उन्हें सदन में घुसने से रोक दिया। पोस्टर-बैनर लेकर राज्यपाल का रास्ते रोकते हुए कांग्रेस विधायकों ने जम कर नारेबाजी की। बाद में सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन विधायकों को वहाँ से हटाया। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि राज्यपाल ने लोकतंत्र का अपमान किया है क्योंकि विधानसभा ने सीएए के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास किया था। विधायकों ने सदन से वाकआउट किया।
हालाँकि, हंगामे के बीच ही राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान ने अपना सम्बोधन शुरू किया। नेता प्रतिपक्ष रमेश चेनिथाला ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि वो राज्यपाल को वापस भेजने के लिए एक प्रस्ताव पास करें, जिसमें राष्ट्रपति से अनुरोध किया जाए वो आरिफ मोहम्मद ख़ान को वापस बुला लें। जब से आरिफ मोहम्मद ख़ान ने सीएए विरोधी प्रस्ताव की आलोचना की है, तब से केरल में पक्ष और विपक्ष, दोनों ही उनका एक सुर से विरोध कर रहे हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई को आरिफ मोहम्मद खान को चर्चा में लाने से पूर्व उनके विषय में अच्छी तरह ...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार ऐसा लगता है मानो जैसे-जैसे समय बीत रहा है, CAA-NRC का विरोध अब शाहीन बाग़ से होते हुए अपने असल....
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कांग्रेस और उसके नेता मोदी सरकार पर हमेशा धर्म और जाति आधारित राजनीति करने का आरोप लग....
राज्यपाल के सम्बोधन के दौरान उन्हें मार्शलों ने घेरे रखा ताकि कोई विधायक उन तक पहुँच कर बदसलूकी न करे। उन्हें मार्शलों की सुरक्षा के बीच मंच तक पहुँचाया गया। इस घटना को लेकर केरल भाजपा ने कांग्रेस और वामपंथियों की निंदा की है।
आरिफ का विरोध करने वाले यह भूल रहे हैं कि मुस्लिम महिला विषय पर उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का विरोध करते त्यागपत्र दे दिया था, जब देश की सर्वोच्च अदालत ने शाहबानो के पक्ष में निर्णय दिए को राजीव गाँधी संसद के माध्यम से उस निर्णय को निरस्त करने जा रहे थे। यह व्यक्ति सच्चाई के लिए हर क़ुरबानी देने से पीछे हटने वालों में से नहीं।    

"भाजपा एजेंट" कहने पर आरिफ मोहम्मद ने उसी के चैनल पर राजदीप सरदेसाई को किया जलील

सरदेसाई-आरिफ मोहम्मद खान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राजदीप सरदेसाई को आरिफ मोहम्मद खान को चर्चा में लाने से पूर्व उनके विषय में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए थी। आरिफ मात्र एक गवर्नर ही नहीं, एक परिपक़्व, सुलझे हुए ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके मुंह में कोई पत्रकार शब्द डाल नहीं सकता। अभी कुछ ही दिन पूर्व सोशल मीडिया पर इनका एक साक्षात्कार देखा, जिसमें महिला मुस्लिम पत्रकार बार-बार जब अपने शब्द उनके मुंह में डालने का प्रयास करती रही, और उन्होंने उतनी बार उस महिला पत्रकार को टोकते रहे, "अपने शब्द मेरे मुंह में मत डालिए।"  नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) पारित होने के बाद से ही विवाद का मुद्दा रहा। 
देखिए वीडियो:-

इसके ख़िलाफ़ देशभर में जगह-जगह हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए। इस मुद्दे पर ‘लिबरल गैंग’ भी छटपटा रहा है, जो अपनी भड़ास किसी न किसी रूप में निकालता रहता है। इसी कड़ी में, फर्ज़ी ख़बरों के प्रचारक राजदीप सरदेसाई ने गुरुवार (16 जनवरी) को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को CAA के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने शो में आमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने केरल के राज्यपाल को ‘भाजपा का एजेंट’ और ‘रबर स्टाम्प’ तक कह डाला। जवाब में आरिफ मोहम्मद ने भी उनकी जमकर क्लास ली।
दरअसल, नागरिकता संशोधन क़ानून को लागू करने के केंद्र के फ़ैसले को लेकर कम्युनिस्ट शासित राज्य केरल में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद चल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच CAA के ख़िलाफ़ केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई। राज्यपाल ख़ान ने केरल सरकार को इस बात के लिए फ़टकार लगाई थी कि CAA को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले उनकी सलाह क्यों नहीं ली गई।
राजदीप सरदेसाई ने केरल विवाद पर अपने शो का प्रीमियर करते हुए, आरिफ मोहम्मद खान को ‘रबर स्टाम्प’ कहकर उनका अपमान किया। शो के दौरान सरदेसाई ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा CAA के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले उन्हें (खान) दरकिनार कर दिया गया था, इसलिए वो राज्य सरकार से नाराज़ थे।
राज्यपाल ने राजदीप सरदेसाई के दावे पर पलटवार करते हुए सम्मानपूर्वक कहा कि वो किसी से नाराज़ नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह संवैधानिक रूप से राज्य के प्रमुख हैं और राज्य सरकार को सलाह देना उनका अधिकार है। आरिफ मोहम्मद खान ने सवालिया लहजे में पूछा, “अगर राज्य सरकार मुझे बताए बिना सुप्रीम कोर्ट में चली जाती है, तो मैं अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कैसे करूँ?”
इसके अलावा, राज्यपाल खान ने देश की संसद द्वारा पारित क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करने के लिए भी केरल सरकार को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह मसला राज्य के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। खान ने कहा, “कानून का विरोध करने के लिए राज्य सरकार ने जो समय और धन खर्च किया उसका उपयोग प्रदेश के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए न कि अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए।”
राजदीप सरदेसाई ने चिड़चिड़ाते हुए पूछा कि क्या आरिफ मोहम्मद खान केरल सरकार के ख़िलाफ़ जाकर अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे थे? खान ने इसके जवाब में कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य सरकार को सलाह देना उनका संवैधानिक अधिकार है और राज्य सरकार राज्यपाल से कोई जानकारी छिपा नहीं सकती।
शो के दैरान राजदीप सरदेसाई ने राज्यपाल खान को ‘रबर स्टाम्प’ कहकर उनका अपमान करना जारी रखा, इस पर खान ने गहरी आपत्ति जताई। सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को ‘भाजपा एजेंट’ बताया और CAA के मुद्दे पर एक अलग रुख़ अपनाने के लिए उन पर हमला किया।
राजदीप सरदेसाई की असम्मानजनक टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि पत्रकार के तौर पर उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा अभद्र है। भाजपा का एजेंट कहे जाने पर खान ने कहा कि उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति ने की थी न कि भाजपा ने।
सवाल पूछने की आड़ में, सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल का न सिर्फ़ अपमान किया बल्कि लाइव शो में उन्हें भाजपा का एजेंट कहकर उनके प्रति अपनी व्यक्तिगत घृणा भी व्यक्त की। इस लाइव शो के विषय को हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा बनाकर देश की जनता के बीच धार्मिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करने पर मोहम्मद आरिफ खान ने राजदीप सरदेसाई की क्लास भी लगाई।
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जेएनयू हिंसा मामले पर कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर मीडिया ग्रुप इंडिया टुडे लगातार सुर्खियाँ बटोर रहा है। वही फर्ज.....
आरिफ मोहम्मद खान और CAA के लिए उनके समर्थन को बदनाम करने वाले सरदेसाई ने CAA के ख़िलाफ़ हो रहे जानलेवा विरोध-प्रदर्शनों को ’शांतिपूर्ण’ बताकर फ़र्ज़ी दावे किए थे। जबकि सच्चाई यह है कि CAA के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे मुस्लिम, संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद से ही उग्र हो गए थे। मुस्लिम मॉब ने शहरों को जला दिया और बड़े पैमाने पर हिंसा की।अप्रत्याशित रूप से, राजदीप सरदेसाई ने मुस्लिम भीड़ के कृत्यों को शांतिपूर्ण रवैया बताकर उनके अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश की।

भारतीय इतिहास कांग्रेस के मंच पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से CAA पर भिड़ गए इतिहासकार इरफान हबीब

भारतीय इतिहास कांग्रेस के मंच पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से CAA पर भिड़ गए इतिहासकार इरफान हबीब
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
इरफ़ान हबीब जैसे छद्दम इतिहासकारों ने चंद चांदी के टुकड़ों के लालच में भारत के वास्तविक इतिहास को ही धूमिल कर, आतताई मुगलों को महान बताकर देश का अपमान किया है। ऐसे छद्दम इतिहासकारों को तुष्टिकरण के पुजारी माथे का चन्दन बनाकर भारतीय इतिहास को कलंकित करते रहे हैं। ऐसे छद्दम इतिहासकार वास्तविकता को नकारने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं, जिस तरह प्रकाश होने पर अँधेरा लुप्त हो जाता है, वास्तविक इतिहास उजागर होने पर अब तक प्राप्त ऐसे छद्दमों को मिले सम्मान से कहीं अधिक कलंकित होने वाला है। ये छद्दम इतिहासकार भूल रहे हैं कि भारत आज जिस दिशा में जा रहा है, इनकी आने वाली पीढ़ियां कभी इनको अपना वंशज बताने में भी संकोच करेंगी। अभी भी समय है कि ये लोग वास्तविकता को स्वीकार लें। 
आरिफ मोहम्मद एक राज्यपाल ही नहीं एक कुशल राजनीतिज्ञ भी हैं। ये वही आरिफ मोहम्मद है जिसने शाहबानो प्रकरण के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी से लोहा लिया था। सच कहने पर ये व्यक्ति किसी से कोई समझौता नहीं करने वाला।  
इस सन्दर्भ में नीचे दिए लिंक पर विचार करें, जो इन छद्दमों को बेनकाब कर रहा है। विदेशी इतिहासकार भारत के गौरवशाली को उजागर करने में प्रयत्नशील हैं, इरफ़ान और रोमिला जैसे इतिहासकार जनता को भ्रमित कर रहे हैं। 
जो इतिहासकार भारत के गौरवशाली इतिहास को धूमिल कर सकते हैं, उनसे किसी अच्छाई की कामना करना ही व्यर्थ है। अगर भारतीय अयोध्या में राममन्दिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को खुले दिमाग और तुष्टिकरण के चश्मे को हटाकर देखें, प्रमाण अपने आप सामने आ जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ मोहम्मद की तरह सच्चाई को बताने वाले डॉ के.के.मोहम्मद के तर्कों को सम्मान दिया, ना कि कांग्रेस समर्थित वामपंथी इतिहासकारों को।
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आर.बी.एल.निगम इतिहासकार और लेखक विलियम डालरिम्पल (William Dalrymple) ने एक कार्यक्रम के दौरान यह स्वीकार किया कि देश में वामपं.....
   
केरल के कन्नूर विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय इतिहास कांग्रेस के मंच पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से इतिहासकार इरफान हबीब भिड़ गए। उन्होंने राज्यपाल पर गुस्से का इजहार किया। आरोप है कि इरफान ने राज्यपाल की सुरक्षा में तैनात कर्मियों से धक्का-मुक्की भी की। केरल के राज्यपाल के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी मंच पर सुरक्षाकर्मियों से उलझे इरफान हबीब की तस्वीर जारी की गई है।केरल गवर्नर के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट में कहा गया है, "इरफान हबीब ने राज्यपाल के उद्घाटन भाषण को बाधित करने की कोशिश की। उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद को कोट करने पर राज्यपाल के कहा कि उन्हें गोडसे को कोट करना चाहिए। 
छद्दम इतिहासकार इरफ़ान को शायद नहीं मालूम की, आखिर वो कौन से कारण थे, जिनके कारण गोडसे को गाँधी की जीवनलीला समाप्त कर, भारत को एक और विभाजन से बचा दिया। देखिए ये वीडियो  
उन्होंने राज्यपाल के एडीसी और सुरक्षाकर्मी को धक्का भी दिया।"  दरअसल, जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भारतीय इतिहास कांग्रेस के 80वें सत्र का उद्घाटन भाषण दे रहे थे, तो उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बोलना शुरू कर दिया, जिसका कुछ लोगों ने विरोध किया। उन्होंने मौलाना आज़ाद के एक बयान का हवाला दिया था विरोध कर रहे लोगों के लिए उन्होंने कहा कि आप लोगों के लिए मौलाना आज़ाद ने पहले कन्वेशन में कहा था,  'देश का बंटवारा गंदगी बहा ले गया लेकिन कुछ गड्ढे बच गए हैं, जिसमें पानी बच गया है और अब उससे बदबू आ रही है' राज्यपाल के इस बयान को आजकल चल रहे CAA और NRC के विरोध से जोड़ कर देखा जा रहा है ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या राज्यपाल महोदय विरोध की आवाज़ को सड़ा हुआ पानी और बदबू बता रहे हैं अपने बयान पर विवाद के बाद गवर्नर अब भी विरोध करने वालों पर ही निशाना साध रहे हैं.इस दौरान इतिहासकार इरफान हबीब मंच पर चढ़ गए

राज्यपाल ने कहा, "आपको विरोध करने का पूरा अधिकार है, मगर मुझे चुप नहीं करा सकते। जब आप बहस और चर्चा के दरवाजे बंद करते हैं तो आप हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।"  राज्यपाल ने यह भी कहा कि वह इस मसले पर नहीं बोलने वाले थे, मगर जब पूर्व के वक्ताओं ने सीएए पर बोलना शुरू किया तो उन्हें भी लगा कि सवालों का जवाब देना चाहिए
इरफ़ान हबीब को असहिष्णु करार देते हुए आरिफ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि वो उनके समीप आकर क्या करना चाह रहे थे, इसका उन्हें भान नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इरफ़ान हबीब शायद उनका कॉलर खींचना चाहते थे। राज्यपाल ख़ान ने बताया कि उनका कार्यक्रम 1 घंटे से ज़्यादा का नहीं हो सकता था लेकिन बाकी वक्ता डेढ़ घंटे तक बोलते रहे।
उन्होंने कहा कि वक्ताओं ने केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर भली-बुरी बातें कहीं और लगातार इसके विरोध में बोलते रहे। बकौल आरिफ मोहम्मद ख़ान, वो उन सभी बातों को चुपचाप सुनते रहे। वक्ताओं ने उस दौरान संविधान पर ख़तरे का भी आरोप लगाया। इरफ़ान हबीब ने राज्यपाल को बोलने से रोकने के लिए राज्यपाल के सुरक्षाकर्मी का बैज तक नोच लिया। इसके बाद उन्होंने वहाँ मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों के साथ बदसलूकी की। कन्नूर यूनिवर्सिटी के वीसी ने बीच में खड़े होकर हबीब को रोका।
इरफ़ान हबीब, आरिफ मोहम्मद ख़ानमेरा कॉलर नोचना चाहते थे 88 वर्षीय असहिष्णु वामपंथी इतिहासकार: राज्यपाल ने सुनाई आपबीती
राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि इरफ़ान हबीब न तो उन्हें सुनना चाहते थे और न ही कार्यक्रम से बाहर जाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि इन असहिष्णु लोगों का पहले से ही यही रवैया रहा है। इरफ़ान हबीब की हरकतों को देख कर नीचे बैठे लोगों ने हंगामा भी किया। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए ‘आजतक’ को आरिफ मोहम्मद ख़ान ने बताया:
“राज्यपाल होने के नाते संविधान और कानून की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है। अगर मैं संसद द्वारा पारित किसी क़ानून से सहमत नहीं हूँ, तो मुझको इस्तीफा देकर अपने घर चले जाना चाहिए। लेकिन, अगर संसद द्वारा पारित किसी क़ानून से मैं सहमत हूँ, तो मुझको उसका बचाव करना चाहिए। अगर किसी को ऐसा लगता है कि मेरी मौजूदगी में कोई संसद से पारित क़ानून पर हमला करेगा और मैं चुप होकर सुनता रहूँगा और जवाब नहीं दूँगा, तो यह ग़लत है। संवैधानिक पदों पर बैठे हर शख्स की यह जिम्मेदारी है कि वह संसद से पारित कानून की रक्षा करे।”

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने कहा कि अज्ञानी लोगों को इसकी जानकारी नहीं रहती है कि संसद से पारित होने के बाद कोई क़ानून किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं रहता, देश का क़ानून बन जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सहमति-असहमति जायज है लेकिन जिन्हें न क़ानून का ज्ञान है और जिन्होंने न कभी संविधान पढ़ा है, उनकी अज्ञानता का कोई समाधान नहीं है।

अंग्रेजों की देन है अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक: केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान साहब ये तो मुगलों की देन है

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अब देशभक्तों को देश निकाला नहीं दिया जाता बल्कि उन्हें सम्मान दिया जाता है
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वास्तव में प्रगतिशील व समाज सुधारक की छवि रखने वाले आरिफ मोहम्मद खान को केरल का राज्यपाल बनाकर केंद्र की मोदी सरकार ने बहुत सराहनीय कार्य किया है । अब से पहले आरिफ मोहम्मद खान जैसे देशभक्तों को देश निकाला और राष्ट्र विरोधी देशद्रोही लोगों को सत्ता की थाली देने की परंपरा रही थी , परंतु अब कुछ ऐसा लग रहा है कि जैसे राजनीति अपनी दिशा बदल रही है । अब देशभक्तों को सम्मान और देशद्रोहियों को जेल भेजने की एक राष्ट्र प्रेमी परंपरा स्वरूप लेती हुई दिखाई दे रही है । इसी रूप में श्री खान की नियुक्ति को देश के सभी बुद्धिजीवी और राष्ट्रवादी लोग देख रहे हैं ।
बहुचर्चित शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार द्वारा अमान्य घोषित करने के विरोध में आरिफ मोहम्मद खान ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था । पिछले दिनों आरिफ मोहम्मद खान के बयान का ही हवाला देकर पीएम मोदी ने संसद में कहा था, कांग्रेस के नेता ने कहा था कि मुस्लिम अगर गढ्ढे में रहना चाहते हैं तो रहने दो क्या हम मुस्लिमों के समाज सुधारक हैं? बाद में इस बात की पुष्टि आरिफ मोहम्मद खान ने यह कहते हुए की थी कि जब उन्होंने तीन तलाक के मुद्दे पर राजीव गांधी सरकार से इस्तीफा दिया था तो पीवी नरसिम्हा राव ने उनसे यह बात कही थी।
आरिफ मोहम्मद खान वंदे मातरम बोलने के लिए समर्थक रहे हैं। उन्होंने वंदे मातरम गीत का उर्दू अनुवाद करके भी अपनी देशभक्ति का परिचय दिया था। मोदी सरकार ने वास्तव में ही ऐसे देश भक्तों को राज्यपाल का पद देकर राज्यपाल पद को ही सम्मानित किया है।

अंग्रेजों की देन है अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक: केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान
केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक को अंग्रेजों की देन बताया है। राज्यपाल नियुक्त होने के बाद एशियानेट न्यूज़ को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक एक लोकतान्त्रिक देश और गणतांत्रिक समाज में केवल एक तरह के “अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक” हैं- जो क़ानून को माने, वह बहुसंख्यक है और जो कानून के खिलाफ है, वह अल्पसंख्यक है। इस इंटरव्यू की यह क्लिप सोशल मीडिया के कई हलकों में चर्चित हो रही है।

आरिफ़ मोहम्मद खान ने कहा कि जब तक अंग्रेज़ों की दी हुई महज़बी अल्पसंख्यक-मज़हबी बहुसंख्यक की शब्दावली जीवित रखेंगे, तब तक “मुस्लमानों में मोदी का डर” जैसी भ्रांतियाँ बनी रहेंगी। उन्होंने उपनिषदों को उद्धृत करते हुए कहा कि उपनिषदों में बताया गया है कि “द्वय”, पराएपन की भावना डर पैदा करती है। साथ ही कुरान में से मौलाना अली की एक आयत के ज़रिए बताया कि जिससे इंसान अनभिज्ञ होता है, उससे डर पैदा होता है। अपने राज्यपाल के कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा कि वे लोगों के साथ अपना विश्वास, कि अपने अंदर victimhood की प्रवृत्ति पैदा करना पाप है, गुनाह है, केरल के लोगों के साथ बाँटेंगे।
अंग्रेज़ों की नहीं मुगलों की देन है अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक यानि हिन्दू-मुसलमान 
आरिफ साहब एक बहुत सुलझे हुए राजनीतिज्ञ हैं, बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखने वाले राजनेताओं में से हैं। लेकिन इनके इस कथन कि "अंग्रेजों की देन है अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक" से केवल मै ही नहीं, वास्तविक इतिहास का कोई भी जानकर सहमत नहीं होगा, क्योकि जिसे आज अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक कहा जा रहा है, मुग़ल युग में हिन्दू-मुसलमान कहा जाता था, जिस कारण मुगलों ने तलवार के के दम पर हिन्दुओं का कत्लेआम किया, जिन हिन्दू महिलाओं ने इस्लाम नहीं कबूला उनका बलात्कार किया जाता था, हरम में ले जाया जाता था। हिन्दू धर्म की रक्षा करने में सिख गुरुओं की जान लेने वाले मुग़ल यानि मुसलमान ही थे, कहने का अभिप्राय है कि ये जहर मुगलों के आने पर ही शुरू हुआ था और उनको बचाने के लिए अंग्रेज़ों को दोष देना गलत है, अंग्रेज़ों ने तो बस इसी नब्ज को पकड़ कर इतने वर्ष भारत में राज किया था।        

'मुसलमान अगर गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहने दो'

Image result for नरेंद्र मोदी संसद मेंआर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव दिया। इस दौरान मोदी ने शाह बानो मामले का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कांग्रेस के एक नेता के विवादित बयान को संसद में दोहराया
मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस के एक नेता ने कहा था कि मुसलमानों के उत्थान की ज़िम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है, अगर वो गटर नें रहकर जीना चाहते हैं तो रहें
हालांकि नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान यह नहीं बताया कि यह बयान किस कांग्रेसी नेता का है जब कांग्रेस की तरफ़ से पूछा गया कि उनके किस नेता ने यह बात कही है तो मोदी ने उन्हें यूट्यूब लिंक भेज देने की बात कही
संसद में मोदी के इस बात का ज़िक्र करने के बाद यह बयान देने वाले कांग्रेसी नेता आरिफ़ मोहम्मद ख़ान सुर्ख़ियों में आ गए राजीव गांधी सरकार के वक़्त मंत्री रहे आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है
समाचार एजेंसी एएनआई से आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा, ''छह-सात साल पहले एक टीवी इंटरव्यू के दौरान मुझसे पूछा गया कि क्या मुझ पर इस्तीफ़ा (शाह बानो मामले के बाद) वापस लेने के लिए किसी तरह का दबाव बनाया गया था मैंने उन्हें बताया कि इस्तीफ़ा देने के बाद मैं अपने घर से चला गया था''
आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा, ''इसके बाद मैंने बताया था कि अगले दिन संसद में मेरी मुलाक़ात अरूण सिंह से हुई वो लगातार मुझे बोल रहे थे कि मैंने जो किया वो सैद्धांतिक तौर पर सही है लेकिन इससे पार्टी के लिए बहुत ज़्यादा मुश्किलें बढ़ जाएंगी तब नरसिम्हा राव ने मुझसे कहा था, 'तुम बहुत ज़िद्दी हो. अब तो शाह बानो ने भी अपना स्टैंड बदल लिया है''
देखिए वीडियो :-
https://www.facebook.com/KapilMishraAAP/videos/2351010758299676/
ट्विटर पोस्ट @ANI: Former Union Min, Arif M Khan on PM Modi's speech in Lok Sabha  6-7 yrs ago, during a TV interview, I was asked whether any pressure was brought upon me to take back my resignation(in connection with Shah Bano case). I told them after resigning, I disappeared from my house.
सदन में मोदी ने आरिफ़ मोहम्मद ख़ान के बयान का ज़िक्र किया था इस पर उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री ने मेरे इंटरव्यू का उल्लेख कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कब तक समाज का एक तबक़ा सत्तारूढ़ दलों को उसे धोखा देने का अधिकार देता रहेगा। यह बिलकुल साफ़ संदेश है''
ट्विटर पोस्ट @ANI: Former Union Min,Arif M Khan I further said, next morning at Parliament, I met Arun Singh who repeatedly told me I was correct morally but this would cause a lot of inconvenience to the Party. Mr Narishma Rao told me"tum bahut ziddi ho. Shah Bano ne bhi apna stand badal liya hai"
प्रधानमंत्री मोदी ने आरिफ़ मोहम्मद ख़ान के जिस इंटरव्यू का ज़िक्र किया उसमें उन्होंने दावा किया था कि, ''नरसिम्हा राव जी ने ख़ुद मुझसे कहा है कि मुसलमान हमारे वोटर हैं, हम इन्हें क्यों नाराज़ करें हम इनके सामाजिक सुधारक नहीं हैं कांग्रेस पार्टी समाज सुधार का काम नहीं कर रही है हमारा रोल समाज सुधारक का नहीं है हम राजनीति के बिज़नेस में हैं और अगर ये गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहने दो''
कई मीडिया वेबसाइटों में आरिफ़ मोहम्मद ख़ान के उस पुराने इंटरव्यू से जुड़े हिस्सों को बताया गया हैउस इंटरव्यू में आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने यह भी कहा था कि शाह बानो मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला बदलने के लिए राजीव गांधी पर दबाव डाला गया था
इस पूरे मामले के बाद बीजेपी ने एक बार फिर कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान और आरिफ़ मोहम्मद ख़ान के उस पुराने इंटरव्यू के एक छोटे से हिस्से को जोड़कर ट्वीट किया है
संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाए कि वो इतने साल सत्ता में रही लेकिन उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का मौक़ा गवां दिया
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image source : livehindustan.com मामला गोंडा के कोतवाली नगर के हाफिज पुरवा से जुड़ा है। बुजुर्ग महिला कमरजहां का आरोप है कि, उसके पति ...


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क्या आप जानते हैं कि ‘गाज़ी’ एक पदवी है जो किसी काफिर को मारने से मिलती है ! जानिए कि ‘अकबर’ ने यह ‘गाज़ी’ पदवी कैसे प्र...

यदि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाह बानो के पक्ष में दिए निर्णय को संसद में नहीं पलटा होता, उपरोक्त 70 वर्षीय वृद्धा इस उम्र में तलाक का दर्द नहीं झेलना पड़ता।  
सच्चाई यही है कि कांग्रेस ने कभी मुसलमान तो क्या देश की अन्य जातियों एवं धर्म का भला नहीं चाहा। कांग्रेस ने हमेशा, विशेषकर मुस्लिम समाज को, मात्र एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। ठीक वही स्थिति अन्य पार्टियों की भी है। अक्सर अपने लेखों में लिखता रहा हूँ कि कोई पार्टी मुस्लिम तो क्या समाज हितैषी नहीं। आज तीन तलाक का कांग्रेस क्यों विरोध कर रही है? इस विरोध को हर मुसलमान को ठंठे दिमाग से सोंचना होगा। 
आज अयोध्या, काशी और मथुरा विवादित क्यों हैं? उसकी भी जिम्मेदार कांग्रेस ही है। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने शाह बानो के पक्ष में आए निर्णय को संसद के माध्यम से बदला था, तब हिन्दुओं के विरोध को रोकने के लिए रामजन्मभूमि के ताले खुलवाए गए थे, और जब कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा कुरान के विरुद्ध दायर एक पीआईएल का निर्णय कुरान के विरुद्ध आते देख, उस निर्णय को बदलने के एवज में राममन्दिर का शिलान्यास करवा दिया। जब जगह विवादित थी, फिर किस आधार पर शिलान्यास करवाया गया था? 
ज्ञात हो, कांग्रेस के समर्थन से बनी अल्प कालीन चन्द्रशेखर सरकार ने अयोध्या मुद्दा हल करने जा रही थी, कांग्रेस ने सूचना मिलते ही तुरन्त समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी थी, यानि कांग्रेस ने न हिन्दू हित में और न ही मुस्लिम हित में काम किया। विपरीत इसके इन दोनों फिरकों को लड़वा राज करती रही। 
भारत के वास्तविक इतिहास को धूमिल कर मुग़ल आतताइयों का गुणगान किया जाता रहा। इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने की खातिर बेकसूर हिन्दुओं और इनके साधु, संत और साध्वी को हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के नाम पर जेलों में डाल हिन्दू धर्म को कलंकित किया। 
फिर राहुल, प्रियंका का दादा और सोनिया गाँधी का ससुर फिरोज गाँधी के पारसी मुस्लिम था, ये लोग कभी अपने दादा/ससुर की मज़ार पर तो जाते नहीं और हिन्दुओं को भ्रमित करने मन्दिरों में जाते हैं। अपने-आपको हिन्दू बताते हैं।