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भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई पर कोर्ट में फेंका जूता


सुप्रीम कोर्ट में सोमवार(अक्टूबर 6, 2025) को भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई पर जूता उछालने के मामले में आरोपी वकील के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री का बयान सामने आया है। उन्होंने पुलिस को हिरासत में लिए गए वकील के खिलाफ एक्शन नहीं लेने के निर्देश दिए है। 
 

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को CJI के डाइस के पास एक वकील ने उन पर जूता उछालने की कोशिश की है। हालांकि इस दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने आरोपी वकील को रोक लिया। इस दौरान आरोपी वकील सनातन सनातन धर्म का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान के नारे भी लगाए. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री का बयान आया है।

 
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने पुलिस को आदेश देते हुए कहा कि आरोपी वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। जिसके बाद माना जा रहा है कि पुलिस अब जल्द ही हिरासत में लिए गए आरोपी वकील को छोड़ देगी। वहीं इस पूरे मामले में भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई आरोपी वकील को पहले ही माफ कर चुके हैं। आरोपी वकील की पहचान राकेश किशोर के रूप में हुई है। दिल्ली पुलिस के दो डीसीपी उससे पूछताछ कर रहे हैं। 

CJI बोले- उन्हें फर्क नहीं पड़ता, उन्हें माफ करता हूं

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान ही एक वकील चीफ जस्टिस के पास पहुंच गया और अपना जूता निकालकर उनकी तरफ उछालने की कोशिश की। तभी वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने वकील को पकड़ लिया। इसके बाद वकील ने कोर्ट में नारेबाजी शुरू की दी है। इससे कुछ देर तक कोर्ट की कार्यवाही बाधित रही। वहीं इस घटना को लेकर चीफ जस्टिस ने उन्हें ऐसी घटनाओं से फर्क नहीं पड़ता है। मैं उन्हें माफ करता हूं।

अवलोकन करें:-

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में CJI गवई एक बौद्ध और दूसरा जज अगस्टीन मसीह, एक ईसाई, फिर हिंदू भगवान विष्ण
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में CJI गवई एक बौद्ध और दूसरा जज अगस्टीन मसीह, एक ईसाई, फिर हिंदू भगवान विष्ण
 

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला खजुराहो के जवारी मंदिर से जुड़ा है। पिछले दिनों चीफ जस्टिस ने इस मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इतना ही नहीं सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अपने दिए गए बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका विरोध शुरू हो गया था।

मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं

सोशल मीडिया पर विरोध होने के बाद चीफ जस्टिस बीआर गवई ने इस मामले में अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि था कि ‘किसी ने मुझे बताया कि मैंने जो टिप्पणियां की थीं, उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है. मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।’

'Hit & Run' अपनाते केजरीवाल ने 10 बार माफी मांगने का रिकॉर्ड बनाया

अपने आपको ईमानदार दिखाने के चक्कर में अरविन्द केजरीवाल जनता को पागल बनाने की नीति अपनाते कोर्ट में माफ़ी मांगने का रिकॉर्ड बनाकर गेंद जनता के पाले में डाल दी है, अब जनता को देखना है कि आने वाले चुनावों में आम आदमी पार्टी और केजरीवाल की बातों पर कितना विश्वास कर इसको वोट देती है। दिल्ली और पंजाब को छोड़ समस्त राज्यों की जनता ने इस पार्टी को घास न डालते हुए NOTA से भी कम वोट मिले। 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था वे राजनीति करने नहीं आए हैं बल्कि राजनीति बदलने आए हैं। केजरीवाल ने किन-किन क्षेत्रों में राजनीति बदली है ये तो शोध विषय है लेकिन एक क्षेत्र में सचमुच उन्होंने राजनीति बदलने का काम किया है और वह है माफी की राजनीति। केजरीवाल ने अपने आचरण, अपनी बदजुबानी और दूसरे नेताओं पर अनाप-शनाप आरोप लगाकर कोर्ट से लेकर जनता तक में अपनी छीछालेदर करवाई है। अपने आचरण की वजह से उन्होंने 10 बार माफी मांगने का रिकॉर्ड बनाया है। भारतीय राजनीति में केजरीवाल संभवतः एकमात्र ऐसे नेता होंगे जिन्होंने 10 बार माफी मांगी हो।

सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा आईटी सेल के बारे में एक वीडियो रीट्वट करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 26 फरवीर 2024 को माफी मांगी। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में माना कि यूट्यूबर ध्रुव राठी ने बीजेपी आईटी सेल के बारे में जो वीडियो शेयर किया था, उसे रीट्वीट करना उनकी गलती थी। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी वीडियो को रीट्वीट करने के लिए दायर आपराधिक मानहानि के मुकदमे में जारी समन को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील ने गलती स्वीकार कर ली और माफी मांग ली।

अरुण जेटली माफी मांगी
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अप्रैल, 2018 में भाजपा नेता अरुण जेटली से माफी मांगी। केजरीवाल के साथ आशुतोष, संजय सिंह और राघव ने एक संयुक्त माफीनामा पटियाला हाउस कोर्ट में सौंपा। केजरीवाल ने पहले भी अरुण जेटली से माफी मांगी थी, लेकिन तब उन्होंने कहा था कि जबतक आप के सभी नेता माफी नहीं मांगते, केस वापस नहीं होगा। केजरीवाल ने अरुण जेटली पर डीडीसीए की अध्यक्षता के दौरान भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। केजरीवाल के आरोप लगाने के बाद जेटली ने उनपर और उनके सहयोगी नेताओं पर 10 करोड़ रुपये मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था।

बिक्रम मजीठिया से माफी मांगी
पंजाब चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने चुनावी रैलियों में अकाली दल के महासचिव और प्रदेश के तत्कालीन मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर ड्रग्स माफिया होने का आरोप लगाए। यह आरोप अलग-अलग जगहों पर केजरीवाल बार-बार दोहराते रहे। इन आरोपों से दुखी होकर बिक्रम मजीठिया ने मानहानि का केस अमृतसर कोर्ट में किया। अरविन्द केजरीवाल को जब लगने लगा कि उनके आरोपों में कोई दम नहीं है, झूठे आरोप लगाने के मामले में जेल हो जाएगी तो आदतन अरविन्द केजरीवाल ने मार्च 2018 में लिखित में माफी मांगकर मुकदमा वापस लेने का अनुरोध किया।

नितिन गडकरी से लिखित में मांगी माफी
केजरीवाल ने मार्च 2018 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से माफी मांगते हुए कोर्ट केस खत्म करने की गुजारिश की थी। केजरीवाल ने नितिन गडकरी को एक पत्र लिखकर उनके खिलाफ लगाए गए असत्यापित आरोपों के लिए खेद व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, ‘मेरी आपसे कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं है। मैं इसके लिए खेद जताता हूं। इस मामले को पीछे छोड़ते हुए कोर्ट केस को खत्म करें।’ केजरीवाल ने भ्रष्टाचारियों की सूची जारी करते हुए गडकरी का भी नाम लिया था।

कपिल सिब्बल से मांगी माफी
केजरीवाल ने 2018 में कपिल सिब्बल और उनके बेटे अमित सिब्बल से माफी मांगी। अरविंद केजरीवाल 2013 में भ्रष्ट नेताओं की सूची में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का नाम भी लिया था। इसके साथ ही अरविन्द केजरीवाल ने वर्ष 2013 में प्रेस कांफ्रेंस करके अमित सिब्बल (कपिल सिब्बल के बेटे) पर ‘निजी लाभ के लिए शक्तियों के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया था।

अमित सिब्बल से माफी मांगी
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के बेटे सीनियर वकील अमित सिब्बल द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में मार्च 2018 में उनसे माफी मांग ली. केजरीवाल और सिसोदिया ने अपने माफीनामे में सिब्बल के खिलाफ लगाए‘ बेबुनियाद आरोपों’ के लिए एक पत्र में माफी मांगी। केजरीवाल ने जब कपिल सिब्बल के खिलाफ आरोप लगाया तो उनके बेटे अमित सिब्बल को भी भ्रष्टाचारी बता दिया।

अवतार सिंह भड़ाना से माफी मांगी
केजरीवाल ने भाजपा सांसद अवतार सिंह भड़ाना से माफी मांगी और कहा कि बहकावे में आकर ये आरोप लगाया था। केजरीवाल ने उनके संबंध में 31 जनवरी 2014 को एक आपत्तिजनक बयान दिया था। इस बयान में उन्होंने कहा था कि वे देश के सबसे भ्रष्ट व्यक्तियों में से एक हैं।

किसान की मौत के बाद भी भाषण, माफी मांगी
जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी (आप) की 2015 में आयोजित किसान रैली काला अध्याय लिख गई। बारिश और ओले से बर्बाद हुए राजस्थान के एक किसान गजेंद्र सिंह ने रैली के दौरान मंच के सामने पेड़ पर चढ़कर फांसी लगा ली और मंच पर बैठे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेता उसे देखते रहे। किसान ने आत्महत्या कर ली इसके बाद भी केजरीवाल भाषण देते रहे, बाद में सफाई देते हुए अपने कृत्य के लिए माफी मांगी। केजरीवाल ने अपनी माफी में कहा- जंतर-मंतर पे एक किसान ने आत्महत्या की। बहुत ही दर्दनाक घटना थी। मैंने बोलना शुरू किया और मैंने कहा कि बोलने का बिलकुल मन नहीं कर रहा, ग्लानि आ रही है। मेरे को एक घंटे का भाषण देने था लेकिन मैंने 10-15 मिनट में अपनी बात समेटने की कोशिश की। मुझे लगता है हां ये मेरी गलती थी। शायद मुझे नहीं बोलना चाहिए उस टाइम। लेकिन उस टाइम ये बात नहीं सूझी। उसकी वजह से किसी की भी संवेदना को ठेस पहुंची तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं।

मीटिंग को लाइव टेलीकास्ट करने के लिए माफी मांगी
केजरीवाल ने कोविड के समय मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई इन हाउस मीटिंग को लाइव टेलीकास्ट कर दिया। पीएम मोदी के चेताने के बाद माफी मांगी। पीएम मोदी ने कहा- ये हमारी जो परंपरा है, हमारे जो प्रोटोकॉल है उसके बहुत खिलाफ हो रहा है कि कोई मुख्यमंत्री ऐसी इन हाउस मीटिंग को लाइव टेलीकास्ट करे, ये उचित नहीं है। ये हमने हमेशा संयम पालन करना चाहिए। इसके बाद केजरीवाल ने कहा- अगर सर मेरी तरफ से कोई गुस्ताखी हुई है, मैंने कुछ कठोर बोल दिया, मेरे आचरण में कोई गलती है तो उसके लिए मैं माफी चाहता हूं।

AAP कार्यकर्ताओं के हंगामे पर माफी मांगी
केजरीवाल ने 2014 में दिल्‍ली में हुए आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के हंगामे और हिंसा पर माफी मांगी। केजरीवाल ने कहा- हमारे एकाध कार्यकर्ता ऐसे हैं जिन्होंने रिटैलिएशन में थोड़ा सा हिंसा किया है। उसके लिए कल भी मैंने माफी मांगा था कि अगर हमारा कोई भी कार्यकर्ता कोई गलत काम करता है तो उसके लिए मैं माफी मांगता हूं।

राहुल गाँधी माफ़ी विनायक दामोदर सावरकर ने नहीं, मोतीलाल नेहरू ने उनके ‘परदादा’ जवाहरलाल नेहरू के लिए ब्रिटिश हुकूमत से माफी मांगी थी!

हिन्दुत्व विरोधी किस तरह सच्चाई को छुपाकर झूठ बोलकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। हिन्दुत्व विरोधियों को नहीं मालूम की सच्चाई को अधिक समय तक छुपाकर नहीं रखा जा सकता, और जिस दिन सच्चाई सामने आएगी, कहीं छुपने की जगह नहीं मिलेगी। 
राहुल गांधी (डिसक्वॉलिफाइड एमपी) ने एक बयान में कहा कि वो सावरकर नहीं हैं, गांधी हैं। इसलिए माफी नहीं मांगेंगे। राहुल गांधी ने सच ही कहा है, वो सावरकर नहीं हैं। इससे भी अधिक सच्चाई ये है कि राहुल गांधी कभी सावरकर जैसे हो भी नहीं सकते। हर किसी कांग्रेसी के लिए विनायक दामोदर सावरकर जैसा होना संभव भी नहीं है। वीर सावरकर के लिए कितने भी अपमानजन अलंकारों का सहारा लेने से पहले राहुल गांधी को यह भी जानना जरूरी है कि विनायक सावरकर ने तो कई सालों तक काले पानी की सजा काटी थी, लेकिन उनके खुद के  ‘परदादा’ जवाहर लाल नेहरू को जब 2 साल की सजा सुनाई गई थी,  तब दो सप्ताह में ही उनकी हालत खस्ता हो गई थी। इस पर मोती लाल नेहरू और जवाहर नेहरू ने माफीनामा दिया था। उन्होंने कभी भी नाभा रियासत में प्रवेश न करने का माफीनामा देकर दो हफ्ते में ही जवाहर लाल नेहरू की सजा माफ करवा ली थी।

नेहरू ने 2 साल की सजा को माफी मांगकर दो सप्ताह में बदलवाया

साल 1923 में नाभा रियासत में गैर कानूनी ढंग से प्रवेश करने पर औपनिवेशिक शासन ने जवाहरलाल नेहरू को 2 साल की सजा सुनाई थी। तब नेहरू ने कभी भी नाभा रियासत में प्रवेश न करने का माफीनामा देकर दो हफ्ते में ही अपनी सजा माफ करवा ली और रिहा भी हो गए। नेहरू के साथ नाभा जेल में रहे स्वतंत्रता सेनानी के.सन्तनाम के अनुसार कुछ दिन में ही जेल में नेहरू की हालत पतली हो गई थी। तब कथित रूप से लोकतंत्र के मसीहा बनने वाले नेहरू के लिए उनके पिता मोती लाल ने मर्सी बांड (माफीनामा) ब्रिटिश हुकूमत को दिया था।

नेहरू के लिए पिता मोतालाल ने भी वायसराय से की थी माफी की सिफारिश
इतना ही नहीं जवाहर लाल के पिता मोती लाल नेहरू उन्हें रिहा कराने के लिए तत्कालीन वायसराय के पास सिफारिश लेकर भी पहुंच गए थे। पर नेहरू का ये माफीनामा वामपंथी गैंग की नजर में बॉन्ड था और सावरकर का माफीनामा कायरता थी। हिन्दुस्तान के इतिहास लेखन की ये बहुत बड़ी विंडबना है कि जिन क्रांतिकारियों ने सेल्युलर और मांडला जेल में यातनाएं झेलीं, उनपर गुमनामी की चादर डाल दी गई। अब सवाल ये है कि सावरकर जैसे महान क्रांतिकारी को कायर और अंग्रेजों के आगे घुटने टेकने वाला साबित करने की साजिश क्यों रची गई? दरअसल काले पानी की सजा काट रहे सावरकर को इस बात का अंदाजा हो गया था कि सेल्युलर जेल की चारदीवारी में 50 साल की लंबी जिंदगी काटने से पहले की उनकी मौत हो जाएगी। ऐसे में देश को आजाद कराने का उनका सपना जेल में ही दम तोड़ देगा। लिहाजा एक रणनीति के तहत उन्होंने अंग्रेजों से रिहाई के लिए माफीनामा लिखा।

हिन्दुत्व की विचारधारा वाले वीर सावरकर को अलोकप्रिय बनाने की है साजिश
यही वजह है कि आज ये देखना आवश्यक हो जाता है कि सावरकर के जीवन में ऐसा क्या है जो कॉन्ग्रेस और राहुल गांधी को इतना परेशान कर रहा है। दरअसल, कॉन्ग्रेस को लगता है कि देश को उसने आज़ाद कराया है। इसलिए देश पर राज करने का हक सिर्फ कॉन्ग्रेस का है। इसलिए आजाद भारत के 70 सालों में से करीब 55-60 साल राज करने वाली कॉन्ग्रेस आज जब पहली बार सत्ता से 10 साल के लिए बाहर हुई है, तो वो देख रही है कि चुनौती मिल कहाँ से रही है। और इस चुनौती के मूल में उसे दिखाई देती है हिन्दुत्व की विचारधारा। कॉन्ग्रेस को लगता है कि अगर हिन्दुत्व के इस विचार का सामना करना है तो इसे लिखने वाले सावरकर को ही अलोकप्रिय बना दिया जाए। देश की आजादी की लड़ाई में सभी बड़े नेताओं के आपस में मतभेद थे। गाँधी-अंबेडकर, सुभाष-गांधी, सावरकर-गाँधी, जिन्ना-गाँधी, भगत सिंह-गाँधी, लेकिन आज कॉन्ग्रेस के निशाने पर सावरकर को छोड़कर इनमें से कोई भी महापुरुष निशाने पर नहीं है। क्योंकि सत्ता पर जो चुनौती दे रहे हैं, वो सावरकर के विचार से आने वाले माने जाते हैं। इसलिए मंच से सावरकर को गाली और जेएनयू में उनकी प्रतिमा पर कालिख पोती जाती है।

सावरकर के नाम पर देश के विभाजन का भी झूठ परोसा जाता है
एक और झूठ जो सावरकर के नाम से परोसा जाता है वो ये है कि सब से पहले देश के विभाजन की बात सावरकर ने 1937 में की थी। जबकि, सच ये है कि 1933 के तीसरे गोलमेज़ सम्मेलन में ही चौधरी रहमत अली ‘Pakistan Declaration’ के पर्चे बाँट रहे थे। 1937 से पहले दर्जन बार कई नेता इस तरह की बातें कर चुके थे लेकिन बड़ी होशियारी से देश के विभाजन की त्रासदी के जवाबदेही को कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग के खाते से निकाल कर सावरकर के हिस्से में डालने की कोशिश की जाती रही हैं। राहुल गांधी और कॉन्ग्रेस अपनी राजनीतिक लड़ाई अपने दम पर लड़े लेकिन अगर उसे लगता इतिहास के किसी महापुरुष का अपमान करके वो अपना कद ऊँचा कर रही है तो ये उसकी भयंकर भूल है।

कांग्रेस शासन के स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाया, सावरकर महान स्वतंत्रता सेनानी थे

वीर सावरकर को अपमानित करने से पहले राहुल गांधी को यह भी जानना चाहिए कि उनकी दादी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आखिर सावरकर के सम्मान में डाक टिकट जारी क्यों किया था? जब सावरकर को उनकी दादी वीर और सम्मानित मानती थीं, तो राहुल अपमानजनक भाषा में ये क्यों कहते हैं कि वो सावरकर नहीं गांधी हैं !! क्या उनको लगता है कि सावरकर को सम्मानित करने के लिए इंदिरा गांधी पर कोई दबाव था? यदि ऐसा है तो राहुल गांधी को ये भी स्वीकार करना चाहिए। राहुल गांधी को ये भी जानना चाहिए कि यदि सावरकर कथित रूप से देशद्रोही थे, तो स्कूली पाठ्यक्रम में यह क्यों पढ़ाया कि वीर सावरकर देश की आजादी के आंदोलन के लिए लड़ रहे थे? वे महान स्वतंत्रता सेनानी थे। और हां, याद दिला दें कि स्कूली पाठ्यक्रम की ये किताबें कांग्रेसी शासन में ही प्रकाशित हुई थीं। तब भाजपा का राज नहीं था।

सावरकर ने ब्रिटिश सरकार की आज्ञा का उल्लंघन कर आजादी की लड़ाई लड़ी

यदि राहुल गांधी को यह बात पुरानी लगती है तो अभी चार साल पहले की ही इससे जुड़ी बात याद दिला देते हैं। अक्टूबर 2018 की बात है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय वीर सावरकर और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े एक मसले पर एकराय थी। अमित मालवीय ने एक ट्वीट किया था, जिसमें एक इमेज पोस्ट की गई थी। जिसमें इंदिरा गांधी और वीर सावरकर की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। इस इमेज में इंदिरा गांधी के वीर सावरकर के बारे में दिया गया बयान दिखाई दे रहा है। जिसमें इंदिरा गांधी ने कहा था कि सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार की आज्ञा का उल्लंघन करने की हिम्मत करना,  हमारी आजादी की लड़ाई में अपना अलग ही स्थान रखता है।

इंदिरा ने ‘महान क्रांतिकारी’ सावरकर पर डॉक्यूमेंट्री बनाने को कहा था

इस तस्वीर में एक और बात बताई गई कि इंदिरा गांधी ने महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के योगदान को पहचाना था। उन्होंने साल 1970 में वीर सावरकर के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया था। इसके साथ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सावरकर ट्रस्ट में अपने निजी खाते से 11,000 रुपए दान किए थे। इतना ही नहीं इंदिरा गांधी ने साल 1983 में फिल्म डिवीजन को आदेश दिया था कि वह ‘महान क्रांतिकारी’ के जीवन पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाएं।’ इतना ही नहीं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्‍त्री ने सावरकर को मासिक पेंशन देने का आदेश जारी किया था।

 लेफ्ट लिबरल गैंग नेहरू के माफीनामे पर चुप्पी साध लेता है

बड़ा सवाल ये भी है कि यदि सावरकर अंग्रेजों के सहयोगी थे तो फिर दस साल से ज्यादा अंडमान की नरक समान जेल में क्यों रहे? ऐसी जेल में कथित क्रांतिकारी दस दिन भी नहीं गुजार पाएंगे। इसी के साथ इस ओर भी ध्यान दिलाना जरूरी है, जो लेफ्ट लिबरल गैंग सावरकर के माफीनामे पर शोर मचाता है वह नेहरू के माफीनामे पर एक दम चुप्पी साध लेता है। वीर सावरकर पर सवाल उठाने से पहले राहुल गांधी को इसका भी जवाब देना चाहिए कि अंग्रेजों ने अंडमान की सेलुलर जेल में जब सावरकर को बंद किया तो महात्मा गांधी, विट्ठलभाई पटेल और बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं ने रिहाई की मांग क्यों उठाई?

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ शमीमा बेगम बिना बुर्के के आई नजर, ब्रिटेन के लोगों से माँगी माफी

ISIS दुल्हन शमीमा बेगम बुर्के की बजाए लिपस्टिक लगाए
बोल्ड अंदाज में नजर आई (Photo: the sun)
दुनिया भर में ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से मशहूर हुई शमीमा बेगम ने अब ISIS से तौबा कर ली है। ISIS ‘दुल्हन’ शमीमा बेगम को अब अपने किए ​गए कामों पर पछतावा हो रहा है। उसने ‘गुड मार्निंग ब्रिटेन’ शो के लाइव इंटरव्यू में कहा कि वह दहशतगर्दों के पास जाने की बजाए मरना पसंद करेगी। शमीमा ने ब्रिटेन के लोगों से माफी माँगते हुए कहा कि वह अपने देश आकर आतंकवाद के सभी मामलों का सामना करने को तैयार है।

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन से भागकर वर्ष 2014 में आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम की उम्र उस वक्त केवल 15 साल थी। उसने वहाँ पर ISIS के एक आतंकी से शादी कर ली थी और उसके साथ जिहाद में शामिल हो गई। इस शादी से उसे 2 बच्चे पैदा हुए थे।

रिपोर्ट के अनुसार एक विशेषज्ञ ने कहा कि शमीमा बेगम ‘वेस्टर्नाइज्ड’ दिखने की कोशिश कर रही हैं। शमीमा बेगम ने आईटीवी प्रसारक के ‘गुड मार्निंग ब्रिटेन’ शो में कहा, ”मैं ब्रिटेन के लोगों से माफी माँगती हूँ। मैंने बहुत ही कम उम्र में एक बड़ी गलती की थी और उस उम्र के अधिकतर बच्चों को पता भी नहीं होता है कि उन्हें अपने जीवन में क्या करना है। इस उम्र में अधिकतर बच्चे भ्रमित हो जाते हैं और वे आसानी से इस तरह की चीजों के झाँसे में आकर आसानी से बेवकूफ बन जाते हैं।”

इस दौरान ‘गुड मॉर्निंग ब्रिटेन’ शो में 22 साल की पूर्व आईएसआईएस दुल्हन काले रंग की नाइके बेसबॉल टोपी, ग्रे वेस्ट टॉप और लिपस्टिक लगाए हुए खुले बालों में बात करते हुए दिखाई दी। उसका लुक इस बार पिछले इंटरव्यू की तुलना में बिल्कुल अलग था, जिसमें वह हिजाब और बिना मेकअप के दिखाई देती थी।

शमीमा बेगम को मार्च 2021 में बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने बड़ा झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था। इसके पहले 2019 में उससे ब्रिटिश सरकार ने उसकी नागरिकता छीन ली थी।