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चुनावी हिन्दू पूजा के दौरान आसनों पर बैठ गए कमलनाथ-प्रियंका : भगवान से पहले खुद ही लेने लगी थीं आरती

     माँ नर्मदा की पूजा के दौरान प्रियंका गाँधी ने की बड़ी गलतियाँ (फोटो साभार: @NarendraSaluja,@BJP4MP)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी और कमलनाथ समेत कांग्रेस नेताओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, कांग्रेस नेता मध्य प्रदेश के जबलपुर में माँ नर्मदा की पूजा करने पहुँचे थे। इससे पहले ही ये वहाँ लगे आसनों पर जाकर बैठ गए। हालाँकि, बाद में लोगों के समझाने के बाद प्रियंका गाँधी समेत अन्य नेताओं ने आसन छोड़ दिया।

आज तक गाँधी परिवार से किसी ने प्रश्न नहीं किया कि मुसलमान दादा(फ़िरोज़ जहांगीर) की संतानें कब हिन्दू बन गयीं? क्या किसी मुस्लिम नेता को चुनावों में मंदिर जाते और आरती करते देखा, फिर चुनावों में गाँधी परिवार मंदिर जाकर कब तक हिन्दुओं को मूर्ख बनाता रहेगा? दूसरे, कन्हैया के मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा क़त्ल करने पर राहुल द्वारा उन्हें बेगुनाह करार कर दिया जाता है,(देखिए वीडियो) आखिर इस नौटंकी का कब अंत होगा? 


कर्नाटक, हिमाचल और अब मध्य प्रदेश में हिन्दू कार्ड खेलने वाले केरल चुनावों में न रुद्राक्ष माला धारण करते हैं और न ही हाथ में कलावा, क्या यह ढोंग नहीं? हिन्दू कब इन ढोंगी हिन्दुओं को धूल चटवाएगी? मुसलमान अपने मजहब में हिन्दुओं से कहीं अधिक भेदभाव होने पर के बावजूद इस्लाम के नाम पर एकतरफा वोट कर सकता है, फिर हिन्दू इन ढोंगी चुनावी हिन्दुओं के विरुद्ध कब एकजुट होंगे?  
                हर चुनाव में इन चुनावी हिन्दुओं के ढोंग के जाल में हिन्दू फंस जाता है 

दरअसल, मध्य प्रदेश में 5 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी सोमवार (12 जून, 2023) को प्रदेश की ‘संस्कारधानी’ जबलपुर पहुँची थी। प्रियंका गाँधी के इस दौरे के कार्यक्रम में माँ नर्मदा की आरती भी शामिल थी। ऐसे में वह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं समेत जबलपुर के गौरी घाट पहुँची थीं। 


इस दौरान माँ नर्मदा के पूजन से पहले प्रियंका गाँधी समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेता वहाँ लगे आसनों पर जाकर बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद जब वहाँ मौजूद लोगों ने प्रियंका गाँधी व अन्य नेताओं को आरती से पहले आसन में न बैठने की समझाइश दी। इसके बाद सभी नेता ने आसन छोड़कर जमीन पर बैठ गए।

यह वीडियो मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने शेयर किया है। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं को चुनावी हिंदू करार दिया। सलूजा ने लिखा, “यह है कॉन्ग्रेस के नेताओं की स्थिति। जबलपुर में ग्वारी घाट पर माँ रेवा के पूजन के लिये पहुँचे तो आसनों पर सुशोभित हो गए। तभी किसी ने धार्मिक संस्कार व रीति-रिवाज बताए तो फिर जमीन पर आए। चुनावी हिंदू।” बता दें कि माँ नर्मदा का दूसरा नाम रेवा है।

इससे पहले प्रियंका गाँधी का एक और वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो को लेकर भी भाजपा ने उन पर निशाना साधते हुए चुनावी हिंदू बताया। मध्य प्रदेश भाजपा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “ढोंग और आस्था में यही फर्क है। प्रियंका गाँधी को इतना नहीं पता कि आरती पहले भगवान को दी जाती है फिर इंसान लेते हैं। इसलिए ही इन्हें चुनावी हिंदू कहा जाता है।”

वीडियो में प्रियंका गाँधी को माँ नर्मदा जी की आरती करते देखा जा सकता है। आरती करने के बाद उन्होंने विवेक तन्खा को पकड़ा दिया। साथ ही हाथों से आरती लेते हुए नजर आईं। सनातन धर्म संस्कृति के नियम के अनुसार, आरती पूरी होने के बाद पहले भगवान को दी जाती है। इसके बाद अन्य लोग उसे ले सकते हैं। लेकिन प्रियंका गाँधी यही गलती कर गईं और बीजेपी को उन पर निशाना साधने का मौका मिल गया

"....यह मत सोचिएगा कि जवानी मुझे छोड़ गई, जवानी नहीं छोड़ गई है।” : कमल नाथ ने अलका लाम्बा को कहा

कांग्रेस में सुंदरता और सुंदरता के प्रशंसकों की जवाहर लाल नेहरू से लेकर आज तक कोई कमी नहीं रही, जिस कारण आज कांग्रेस शून्य होती जा रही है। 
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मार्च 8, 2021 को महिला कांग्रेस के एक कार्यक्रम में पहुँचे। यहाँ उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा की तारीफ की और अपने जवान होने का दावा भी। अब कमलनाथ के इस बयान पर भाजपा नेता चुटकी ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि कमलनाथ बार-बार खुद के जवान होने के दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी जवानी के चक्कर में कांग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

महिला दिवस के अवसर पर महिला कांग्रेस ने एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें अलका लांबा मुख्य अतिथि थीं। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने अलका लांबा की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, ”मैं अलका लांबा को तब से जानता हूँ जब वह 18 साल की थी। मैं इसकी शादी में भी गया था।” पीछे से अलका लांबा ने बताया कि 27 साल हो गए। इस पर कमलनाथ ने कहा कि बताओ 27 साल हो गए।

फिर पूर्व मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में अलका लांबा की ओर इशारा करते हुए कहा, ”भई अब समय को कोई नहीं रोक सकता। तुम्हारी भी उम्र हो गई और मेरी भी उम्र हो गई, लेकिन यह मत सोचिएगा कि जवानी मुझे छोड़ गई, जवानी नहीं छोड़ गई है।” नरोत्तम मिश्रा ने मार्च 10, 2021 सुबह मीडियाकर्मियों से बातचीत में महिला दिवस के मौके पर कमलनाथ के बयान को आपत्तिजनक बताया।

उन्होंने कहा कि कमलनाथ बार-बार खुद को जवान साबित करने की कोशिश करते रहते हैं। पहले भी सागर में वह मंच से कूद गए थे। नरोत्तम मिश्रा ने ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को लेकर दिए उनके बयान को भी याद किया। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा कि वह इस तरह के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, लेकिन सच्चाई यह है कि कमलनाथ की जवानी के चक्कर में कांग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

मध्य प्रदेश उपचुनाव : भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी "ये क्या आइटम है" : कमलनाथ, कांग्रेस नेता

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में उपचुनाव का जोर चल रहा है। मध्य प्रदेश में हो रहे उपचुनाव पर सभी की नजर है, लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी की महिला प्रत्याशी इमरती देवी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘आइटम’ कह डाला।

पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने आम सभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती इमरती देवी के बारे में कहा, “आप तो उसे मुझसे ज्यादा पहचानते हैं, आपको मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है।” (इतना कहने के बाद श्री कमलनाथ ने जनता की तरफ देखा, खिलखिला कर हँसे, फिर दोहराया ये क्या आइटम है, और मुस्कुराए, उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और ठहाके लगाए।) हैरानी की बात यह है कि स्टेज पर विराजमान महिलाएं भी कमलनाथ के "आइटम" कहने पर ठहका लगाना, प्रमाणित कर रहा है, कांग्रेस में महिलाओं की हैसियत। 

जबसे कांग्रेस की बाग़डोर सोनिया गाँधी के हाथ आयी है, पार्टी चुनाव-दर-चुनाव अपना जनाधार खो रही है। हिन्दू धर्म का अपमान करने के साथ-साथ शायद नारी अपमान करना पार्टी का मूल सिद्धांत बन गया है। हिन्दू विरोधी का आरोप पूर्व राष्ट्रपति (स्व)प्रणव मुखर्जी अपनी पुस्तक के माध्यम से लगा चुके हैं। 

 

मध्य प्रदेश के डबरा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच से भाषण देते वक्त कहा, “सुरेंद्र राजेश हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूँ आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ‘यह क्या आइटम है।”

इमरती देवी, उन पूर्व विधायकों में से एक हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इमरती देवी को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है।

कमलनाथ पर भड़के शिवराज

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “कमलनाथ जी! इमरती देवी उस गरीब किसान की बेटी का नाम है, जिसने गाँव में मजदूरी करने से शुरुआत की और आज जनसेवक के रूप में राष्ट्रनिर्माण में सहयोग दे रही हैं। कॉन्ग्रेस ने मुझे ‘भूखा-नंगा’ कहा और एक महिला के लिए आपने ‘आइटम’ जैसे शब्द का उपयोग कर अपनी सामंतवादी सोच फिर उजागर कर दी।”
अपने एक और ट्वीट में शिवराज सिंह ने कहा, “खुद को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बताने वाले ऐसी ‘अमर्यादित भाषा’ का प्रयोग कर रहे हैं? नवरात्रि के पावन पर्व पर देश नारी की उपासना कर रहा है, ऐसे में आपके बयान से आपकी ओछी मानसिकता झलकती है। बेहतर होगा कि आप अपने शब्द वापिस लें और इमरती देवी सहित प्रदेश की हर बेटी से माफी माँगें।”

मगरूर नेता को सबक सिखाने का समयः सिंधिया

कमलनाथ की उक्त टिप्पणी पर पूर्व कॉन्ग्रेस और वर्तमान में बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “एक गरीब और मजदूर परिवार से आगे आईं दलित नेता इमरती देवी जी को आज डबरा में आइटम और जलेबी कहना अत्यंत निंदनीय और आपत्तिजनक है। ये कमलनाथ जी की मानसिकता को भी दर्शाता है। महिलाओं के साथ ही समूचे दलित समाज का अपमान करने वाले ऐसे मगरूर नेता को सबक सिखाने का समय आ गया है।”

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने इमरती देवी को ‘जलेबी’ कहा था 

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने भाजपा प्रत्याशी श्रीमती इमरती देवी के बारे में कहा था, “मैं कमलनाथ जी के संग कई जगह पर जनसभा करके आया हूँ। लेकिन आज डबरा में जो जनसभा देखी वैसे मैंने कहीं नहीं देखी और मुझे पूरा विश्वास है कि जनता आने वाले 3 नवंबर को इमरती देवी को जलेबी बना देगी।”

कमलनाथ के बयान पर बीजेपी ने विरोध जताया है और इसे नवरात्र के दौरान महिलाओं का अपमान बताया है। बीजेपी का कहना है कि इससे पहले दिग्विजय सिंह ने उनकी ही पार्टी की नेता और पूर्व सांसद के बारे में जो कहा था उसका भी विरोध हुआ था और अब कमलनाथ इस तरह के बयान दे रहे हैं जो गलत है।

आपके 100% पटवारी रिश्वत लेते हैं : मंत्री जीतू पटवारी

जीतू पटवारी
जीतू पटवारी 
भारत की आज़ादी से लेकर आज तक कांग्रेस से लेकर वर्तमान समस्त पार्टियां भ्रष्टाचार और न जाने कितनी जन समस्याओं से मुक्ति दिलवाने की घुट्टी पिलाते रहते हैं, पता नहीं कितने ही भ्रष्टाचार-विरोधी एनजीओ कार्यरत हैं, लेकिन भ्रष्टाचार कम होने की बजाए दिन-दुगनी तरक्की कर रहा है। इतना तय है कि कोई चपरासी अकेले अपने दम पर रिश्वत लेने का साहस नहीं कर सकता। आखिर में मोहरा चपरासी ही बनता है और भ्रष्टाचारी अपनी तिजोरी भरता रहता है। रिश्वत देना और लेना दोनों अपराध हैं, परन्तु बिना रिश्वत दिए जनता चक्कर काटती रहती है। मुश्किल से 10% काम ही बिना रिश्वत के होते हैं। फिर अब किस आधार पर नेता भ्रष्टाचार दूर करने की घुट्टी देते हैं।
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार में शिक्षा एवं खेल मंत्री जीतू पटवारी ने सितंबर 28, 2019 को इंदौर में एक बार फिर सरकार की योजनाओं का मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन न होने पर अधिकारी-कर्मचारियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने रिश्वतखोरी को लेकर कहा है कि 100 प्रतिशत पटवारी रिश्वत लेते हैं। जीतू पटवारी ने कलेक्टर से मिलकर इन सब पर लगाम कसने की भी बात कही।
इंदौर के रंगवासा गाँव में आयोजित ‘आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम में पहुँचे मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि 100 फीसदी पटवारी रिश्वत लेते हैं। उन्होंने कलेक्टर से इन पर लगाम लगाने के लिए कहा और साथ ही शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई लापरवाही सामने आई तो कड़ी कार्रवाई होगी।

जीतू पटवारी ने कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव से कहा, “हाथ जोड़ने के बाद अनुरोध करने पर भी ये (पटवारी) काम करने के लिए नहीं मानते हैं। रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध है। कोई माँगे तो आप इसे मना करें और काम करवाएँ। यदि आवेदन के बाद भी काम नहीं होता है, तो आप मुझे बताएँ। गरीब महिलाएँ पेंशन के लिए परेशान हो रही हैं। उनसे मिलने जब जाते हैं तो कहती है कि 5-5 बार फॉर्म भर दिए हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। शिकायतों का निराकरण नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी।”

इसके साथ ही मंत्री ने अवैध कॉलोनी के काम को लेकर भी प्रशासन को हिदायत दी कि वह इन्हें नहीं बढ़ने दें। उन्होंने कहा कि अवैध काॅलोनी को वैध करने का काम किया जा रहा है, अवैध से वैध करने के इस सिलसिले को रोकना होगा। यदि इसी प्रकार से अवैध कॉलोनियाँ बनती रहीं, तो आने वाले समय में आपका प्रबंधन क्या करेगा। ये चिंता का विषय है। 
इससे पहले कमलनाथ सरकार की एक अन्य मंत्री और डबरा से विधायक इमरती देवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। जिसमें वो ट्रांसफर के लिए पैसा लगने की बात कहती नजर आ रही हैं। दरअसल, इमरती देवी सरकारी अस्पताल में पहुँची थीं। इस दौरान जब लोगों ने अस्पताल की अव्यवस्‍था और डॉक्टर की लापरवाही का मुद्दा उठा कर उसके ट्रांसफर की माँग की, तो उन्होंने कहा, “ये कह रहा है ट्रांसफर करा दो, ट्रांसफर कराने में पैसे लगते हैं, इससे अच्छा सस्पेंड ही करा देते हैं।”

3 राज्यों में बीजेपी को मिली हार, सीएम योगी ने बताई यह बड़ी वजह

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश (यूपी) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि जनता के समर्थन ने हमारी आगे की लड़ाई को आसान कर दिया है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर बिहार की राजधानी पटना पहुंचे थे. सीएम योगी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी के खिलाफ आए चुनावी नतीजों पर कहा कि दोनों ही राज्यों में कुछ लोगों ने झूठ फैलाया, लेकिन हमनेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अच्छा मुकाबला किया.  
मध्य प्रदेश में बीजेपी वोट ज्यादा सीटें कम
बता दें कि मध्य प्रदेश में बीजेपी को कांग्रेस से करीब 1 लाख वोट ज्यादा वोट मिले थे, बावजूद इसके वहां पर अधिक सीटें कांग्रेस को मिलीं. वहीं, राजस्थान में बीजेपी को 38.8 फीसदी और कांग्रेस को 39.3 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे. 

बीजेपी को मिला जनता का समर्थन- सीएम योगी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनावी नतीजे बताते हैं कि जनता ने हमें समर्थन दिया है और जनता के इस समर्थन से हमारा आगे का मुकाबला आसान हो गया है. उन्होंने कहा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में लोगों ने मेरे बयान को लेकर जनता के सामने झूठ बोला. सीएम योगी ने हनुमान की जाति बताने वाले बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि मैंने बजरंगबली की जाति नही बताई थी. मैंने इस बात को कहा था कि देवत्व हर व्यक्ति के कृतित्व में समाहित होता है. उस देवत्व को हर कोई प्राप्त कर सकता है. इस के सबसे बड़े उदहारण बजरंगबली हैं.’

लोकतंत्र में हार और जीत दोनों होती हैं- योगी
वहीं, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हार और जीत सबके लिए होती है. लोकतंत्र में हार और जीत दोनों बनी रहती है. इसे एक तराजू के दो पलड़े के रूप में देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि हमने जीत स्वीकार की है, तो हम हार भी स्वीकार करते हैं. इसके साथ ही कांग्रेस पर हमला बोलते हुए योगी ने कहा कि जो लोग सत्ता में झूठ बोलकर सत्ता हथियाने का काम किया है वे लोग आने वाले समय में एक्सपोज हो जाएंगे. योगी ने कहा कि जीत ओर हार के अलावा जरूरी है देश में लोकतंत्र कायम रहना चाहिए. 

मध्य प्रदेश में BJP की हार को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया बड़ा बयान

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को कहा कि मध्य प्रदेश में कुछ स्थानीय चीजें बीजेपी के विरुद्ध रहीं. राज्य में कांग्रेस और बीजेपी के बीच विधानसभा चुनाव परिणाम में कांटे की टक्कर देखने को मिली. बीजेपी को यहां 109 सीटों पर और कांग्रेस को 114 सीटों पर जीत हासिल हुई. कांग्रेस 230 विधानसभा सीटों वाले राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘लोकतंत्र में मतदाताओं के अंतिम फैसले को स्वीकार करना चाहिए. हम इस परिणाम को स्वीकार करते हैं.’ प्रधान मध्य प्रदेश में बीजेपी के चुनावी प्रभारी हैं.
उन्होंने कहा, ‘मैंने मध्य प्रदेश में काम किया. मैंने नहीं सोचा था कि इतनी करीबी लड़ाई होगी. मध्य प्रदेश में कुछ स्थानीय चीजें हमारे विरोध में रहीं. अगर हम कुछ छोटी चीजों को संभालने में कामयाब रहते तो हम सत्ता में आ गए होते.’
‘हार की जिम्मेदारी मेरी’
इससे पहले बुधवार को मध्य प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा,‘अथक परिश्रम करने के बाद भी हमें अपेक्षित सफलता भी प्राप्त नहीं हुई. अगर इस हार के लिए कोई जिम्मेदार है तो शिवराज सिंह चौहान है. मैं हूं.’

शिवराज सिंह चौहान ने कहा,‘केन्द्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बाद भी हम चुनाव हार गये. दोष मुझमें ही है. कमी मुझमें ही कहीं न कहीं है. मैं इस कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया. ‘अबकी बार 200 पार’ पर हम फेल हो गये हैं.’
जब उनसे सवाल किया गया कि 13 मंत्रियों के हारने में क्या टिकट वितरण में गलती हुई, तो उन्होंने कहा,‘जो भी गलती थी, वह मेरी थी. हम जनता के बीच अपने विकास की योजनाओं को ठीक से नहीं पहुंचा पाये. इसके अलावा, कांग्रेस ने जनता के बीच भ्रम का वातावरण बनाया.’
जब उनसे सवाल किया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को इस हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, तो इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है. यह प्रदेश का मुद्दा है.’ उन्होंने कहा कि अब हम सशक्त एवं रचनात्मक सहयोग से विपक्ष की भूमिका निभाएंगे और प्रतिरोध पर चौकीदारी की भी जिम्मेदारी हमारी है.
एक सवाल के जवाब में चौहान ने कहा कि वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में फिर से बीजेपी की सरकार बने, यह मेरी मंशा है और इसके लिए हम अभी से तैयारी शुरू करेंगे.
उन्होंने कहा कि जनता से असीम स्नेह और प्यार सरकार को विशेष रूप से मुझे मिलता रहा. उन्होंने कहा,‘परिवार का सदस्य बनकर मैंने सरकार चलाने की कोशिश की. मुझे लगता था कि प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता मेरा परिवार है. उनका सुख मेरा सुख और उनका दुख मेरा दुख है. अपने 13 साल के शासनकाल में मैंने भरसक क्षमता के साथ प्रदेश का विकास करने की कोशिश की.’
कांग्रेस का प्रदर्शन, पाकिस्तान की जीत -- मधु किश्वर 
लेखिका मधु किश्वर ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को पाकिस्तान की जीत बताया है। मधु किश्वर ने अपने ट्विटर हैंडल से चुनाव रुझानों को लेकर कई ट्वीट किए और कांग्रेस के प्रदर्शन पर कहा कि ये पाकिस्तान की जीत है। किश्वर ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बड़ा झटका बताते हुए कहा कि पार्टी को अपने समर्थकों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 1 जून से 10 जून तक किसान हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान दूध, सब्जी व अन्य खाद्य पदार्थों को ले...


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चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को ‘लाभ का पद’ रखने के मामले में अयोग्‍य घोषित कर दिया है। वे सभी संसदीय स...

दुनिया भर की महिलाओं ने यौन प्रताड़ना के खिलाफ #metoo कैम्पेन की शुरुआत की थी। अब तक करीब 47 लाख महिलाओं ने फेसबुक पर इस अभियान के तहत अपने कड़वे अनुभव साझा किए हैं। मजे की बात यह है, कि नया मुद्दा एक नहीं, सब पुराने हैं। अब इसे कड़वे अनुभव कहा जाए या पब्लिसिटी स्टंट? आज सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम को पब्लिसिटी का जरिया बना लिया है। कल तक जो बात महिला कहने से या बताने से कतराती थी, पश्चिमी प्रभाव ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर सब पर्दों को हटा दिया, जिस कारण भारतीय संस्कृति महज एक मजाक बनती जा रही है। समझ नहीं आता कि आज कलाकार अपने शुभचिन्तकों को क्या सन्देश देने का प्रयास कर रहे हैं।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अभी हाल ही में दुनिया भर की महिलाओं ने यौन प्रताड़ना के खिलाफ #metoo कैम्पेन की शुरु...
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव नतीजे शाम तक साफ हो जाएंगे, लेकिन अभी आ रुझानों में तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है। रुझानों में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस भाजपा से काफी आगे है। कांग्रेस ने इसे अपनी जीत मानकर जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। इसपर लेखिका मधु किश्वर ने ट्वीट कर कहा, 'ये उतनी ही पाकिस्तान की जीत है, जितनी कांग्रेस पार्टी और वामपंथी उदारवादियों की। पेट्रो डॉलर की भूमिका को कम करके आंका नहीं जा सकता है।'
किश्वर ने आगे कहा कि ये पीएम मोदी के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने मतदाताओं की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। किश्वर ने साथ ही ये भी कहा कि कांग्रेस का पिछले 4 सालों में मुस्लिम तुष्टीकरण काफी बढ़ गया है। 'ये वर्चुअली मुस्लिम लीग में तब्दील हो गया, लेकिन नरेंद्र मोदी ने अपने कोर वोट बैंक को पीछे कर दिया और कांग्रेस जैसे सेक्युलर बनने की कोशिश की।'
'नोटा' के चलते यहां बदल गई तस्वीर
ब्यावरा में कांग्रेस प्रत्याशी 826 वोट से जीता, जबकि नोटा में 1481 मत गिरे। दमोह में वित्तमंत्री जयंत मलैया 798 मतों से हारे और नोटा में 1299 वोट निकले। गुन्नाोर में जीत हार का अंतर 1984 मतों का रहा, जबकि नोटा में 3734 वोट चले गए। ग्वालियर दक्षिण का फैसला 121 वोटों से हुआ, लेकिन 1550 मतदाताओं ने नोटा दबा दिया। जबलपुर उत्तर में राज्यमंत्री शरद जैन 578 मतों से हारे और 1209 नोटा को अपना मत दे दिया।
जोबट में 2056 मतों से फैसला हुआ, लेकिन नोटा में सबसे ज्यादा 5139 वोट चले गए। मंधाता में भले ही जीत-हार का फैसला 1236 वोट से हुआ हो पर 1575 मतदाताओं ने नोटा को चुना। नेपानगर में भाजपा प्रत्याशी को जीतने के लिए 732 वोट चाहिए थे पर 2551 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प अपनाया।

सुर्खियों में रही सीट राजनगर में राजपरिवार के विक्रम सिंह नातीराजा 732 वोट से जीते और 2485 वोट नोटा में चले गए उधर राजपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीत के लिए 932 वोट चाहिए थे, लेकिन 3358 मतदाताओं ने उनके बजाय नोटा का बटन दबा दिया। सुवासरा में भी भाजपा प्रत्याशी को जीतने के लिए मात्र 350 वोट चाहिए थे, लेकिन 2976 मतदाताओं ने उन्हें अथवा किसी अन्य प्रत्याशी को चुनने के बजाय नोटा का विकल्प चुन लिया।

अध्यक्ष राकेश सिंह ने की इस्तीफे की पेशकश

15 सालों तक मध्यप्रदेश की सत्ता से बेदखल होने का सदमा बीजेपी के सभी नेताओं का लगा है. पार्टी के हारते ही नेताओं के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. मध्यप्रदेश में बीजेपी के अध्यक्ष राकेश सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. गुरुवार सुबह अमित शाह ने अपने इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दिल्ली भेजा है.
मध्यप्रदेश में ली हार की जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश में हार की जिम्मेदारी लेते हुए राकेश सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले शिवराज सिंह ने बीजेपी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था. राकेश सिंह ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘यह शिवराज जी का बड़प्पन है कि वह पार्टी की हार की जिम्मेदारी ले रहे हैं, लेकिन बीजेपी में हर जिम्मेदारी सामूहिक होती है. अगर कोई कमी रही है, तो वह हम सभी की कमी है. उसे दूर करके हम लोकसभा चुनाव में पहले से अच्छा प्रदर्शन करेंगे.’ 


वहीं, बीजेपी ने शिवराज सिंह को नेता विपक्ष चुना है. बुधवार को जब शिवराज सिंह चौहान ने अपने पद से इस्तीफा दिया था, तभी इस बात का ऐलान कर दिया था कि मुख्यमंत्री कोई भी बनें, लेकिन नेता वही रहेंगे. 
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राकेश सिंह के इस्तीफे को नामंजूर कर दिया है. अमित शाह ने राकेश सिंह को पद पर बने रहने के लिए कहा है. इसके साथ ही अमित शाह ने राकेश को पार्टी के लिए और कड़ी मेहनत करने के लिए कहा है.
कौन है राकेश सिंह
बता दें कि विधानसभा चुनाव से करीब 8 महीने पहले खंडवा लोकसभा सीट से सांसद नंदकुमार सिंह चौहान को हटाकर राकेश सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था. राकेश सिंह, अमित शाह की पहली और आखिरी पसंद थे. उन्हें नरेंद्र सिंह तोमर और सीएम शिवराज सिंह चौहान का भी करीबी माना जाता है. उन्होंने नंद कुमार सिंह चौहान की जगह प्रदेश में पार्टी नेतृत्व की कमान संभाली है. पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार इस पद पर साल 2014 से कार्यरत थे.

इतना ही नहीं, मोदी, योगी, रमन सिंह, वसुन्धरा सरकारें #metoo, #mob lynching, #not in my name, किसान प्रदर्शन और सडकों पर दूध एवं सब्ज़ियों को फेंकने जाने वाले आन्दोलनों में केवल बचाव करती नज़र आयी, लेकिन इस सरकार विरोधी चक्रव्यू को भेदने में पूर्णरूप से असफल रहीं। क्या कोई भूखा अथवा क़र्ज़ में अपने उत्पाद को इस तरह बर्बाद करेगा? इन सरकारों को इन आंदोलनकारियों को बेनकाब करना चाहिए था, जो नहीं किया गया। ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक में विराजमान किसानों के कर्ज़ों के भुगतान पर ध्यान देने की बजाए सफाई अभियान एवं दूसरे कार्यों में फंसी रही। और अपने कमर्ठ कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज किया जाता रहा।  
केजरीवाल को अपने सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का गम नहीं 
आम आदमी पार्टी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन लगभग सभी के जमानत जब्त हो गए। पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले। लेकिन आज जब केजरीवाल ने ट्वीट किया तो उन्होंने अपनी पार्टी की हार पर कुछ नहीं कहा, बल्कि बीजेपी की हार पर अपनी खुशी जाहिर की।