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"....यह मत सोचिएगा कि जवानी मुझे छोड़ गई, जवानी नहीं छोड़ गई है।” : कमल नाथ ने अलका लाम्बा को कहा

कांग्रेस में सुंदरता और सुंदरता के प्रशंसकों की जवाहर लाल नेहरू से लेकर आज तक कोई कमी नहीं रही, जिस कारण आज कांग्रेस शून्य होती जा रही है। 
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मार्च 8, 2021 को महिला कांग्रेस के एक कार्यक्रम में पहुँचे। यहाँ उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा की तारीफ की और अपने जवान होने का दावा भी। अब कमलनाथ के इस बयान पर भाजपा नेता चुटकी ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि कमलनाथ बार-बार खुद के जवान होने के दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी जवानी के चक्कर में कांग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

महिला दिवस के अवसर पर महिला कांग्रेस ने एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें अलका लांबा मुख्य अतिथि थीं। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने अलका लांबा की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, ”मैं अलका लांबा को तब से जानता हूँ जब वह 18 साल की थी। मैं इसकी शादी में भी गया था।” पीछे से अलका लांबा ने बताया कि 27 साल हो गए। इस पर कमलनाथ ने कहा कि बताओ 27 साल हो गए।

फिर पूर्व मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में अलका लांबा की ओर इशारा करते हुए कहा, ”भई अब समय को कोई नहीं रोक सकता। तुम्हारी भी उम्र हो गई और मेरी भी उम्र हो गई, लेकिन यह मत सोचिएगा कि जवानी मुझे छोड़ गई, जवानी नहीं छोड़ गई है।” नरोत्तम मिश्रा ने मार्च 10, 2021 सुबह मीडियाकर्मियों से बातचीत में महिला दिवस के मौके पर कमलनाथ के बयान को आपत्तिजनक बताया।

उन्होंने कहा कि कमलनाथ बार-बार खुद को जवान साबित करने की कोशिश करते रहते हैं। पहले भी सागर में वह मंच से कूद गए थे। नरोत्तम मिश्रा ने ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को लेकर दिए उनके बयान को भी याद किया। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा कि वह इस तरह के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, लेकिन सच्चाई यह है कि कमलनाथ की जवानी के चक्कर में कांग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

कांग्रेस नेता अलका लांबा ने राजस्थान का फोटो शेयर कर फैलाया झूठ

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज विपक्ष योगी-मोदी विरोध करने में पदभ्रष्ट होकर एक बिगड़े बच्चे के समान व्यवहार कर रहा है। विरोध में कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा कर अपना ही स्तर गिरा रहे हैं। यानि फोटो कहीं का दिखा रहे हैं उत्तर प्रदेश का। अगर मोदी-योगी विरोधी ठंठे दिमाग से काम कर रहे होते, विरोध के लिए मुद्दे बहुत हैं, लेकिन जो स्वयं घोटालों और कानून को ताक पर रख कुर्सी पर कब्ज़ा बनाए हुए थे, किस मुंह से विरोध करेंगे। कारण हैं, देखिए इन लोगों ने कितने वर्ष राज किया, क्या बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, अपराध कम हुए? आदित्यनाथ योगी के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से अपराध जैसे लूट, डकैती, बलात्कार आदि अपने चरम पर थे। सांसद रहते योगी ने संसद में भी उत्तर प्रदेश में हो रहे अपराधों पर कांग्रेस को घेरा था। 
हकीकत यह है कि जिस उत्तर प्रदेश में हिन्दुओं के त्यौहारों पर प्रहार हो रहे थे, आज सत्ता परिवर्तन होने पर 84 कोसी आदि परिक्रमा हो रही है, अयोध्या में भव्य राममन्दिर निर्मित होने का श्रीगणेश होना किसी को रास नहीं आ रहा। कितने वर्षों तक अयोध्या मुद्दे पर हिन्दू और मुसलमानों के बीच दंगे करवाए। राम को काल्पनिक तक बता दिया, खुदाई में मिले मंदिर के सैकड़ों सबूतों को कोर्ट से छुपाया गया। यही कारण है योगी के विरुद्ध का कारण। 
योगी का इतना भय था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में एक प्रान्त में हुए दंगे पर मुलायम सिंह ने योगी के आने पर पाबन्दी लगाने के बावजूद अपने काफिले के साथ पहुँच हिन्दुओं पर हो रहे प्रहारों से रक्षा की थी। योगी से स्वयं कह रहे हैं कि "मैं एक हाथ में माला तो दूसरे हाथ में भाला रखता हूँ।" यानि बदमाशों को उन्हीं की भाषा में जवाब।  
 
  

आम आदमी पार्टी की पूर्व विधायक और वर्तमान में कांग्रेस नेत्री अलका लांबा को झूठ फैलाने के बाद मेरठ पुलिस से ट्विटर पर करारा जवाब मिला है। लांबा ने अपने ट्विटर पर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरने का प्रयास किया था। उन्होंने न्यूज24 चैनल का पोस्ट शेयर करते हुए भाजपा पर आरोप लगाए थे।

इस पोस्ट में एक वायरल पोस्टर की जानकारी दी गई थी जिसमें कोई जॉन्टी बदमाश नाम का युवक अपराधिक कार्यों के लिए मूल्य बता रहा था। इन अपराधों में धमकाना, प्रताड़ना, नुकसान पहुँचाना और हत्या तक के रेट लिखे थे।

न्यूज 24 ने इसी विज्ञापन को शेयर किया था और मेरठ पुलिस को इसमें टैग भी किया था। इसी के बाद लांबा ने इस पोस्ट को शेयर किया और बिना उसकी प्रमाणिकता जाँचे सोशल मीडिया पर अपना निष्कर्ष निकाल लिया। अलका लांबा ने लिखा कि गुंडे-बदमाशों द्वारा ऐसा प्रचार-प्रसार मात्र भाजपा के राज में ही संभव हो सकता है।

इसी ट्वीट के रिप्लाई में मेरठ पुलिस ने अपना बयान जारी किया। मेरठ पुलिस ने फर्जी पोस्ट की हकीकत बताते हुए कहा कि इसका संबंध यूपी से नहीं है और यह कांग्रेस शासित प्रदेश राज्य राजस्थान से निकाला गया प्रचार है।

मेरठ पुलिस ने पोस्ट में कहा कि यह पोस्ट साल 2019 में फेसबुक पर शेयर हुआ था। मगर, जिस पत्रकार ने इसे बाद में उत्तर प्रदेश और मेरठ से जोड़ दिया, उसके खिलाफ़ शिकायत दर्ज करके उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने लांबा से भी फौरन झूठे पोस्ट को हटाने और मेरठ या यूपी के बारे अफवाह न फैलाने की अपील की। बयान में लांबा से कहा गया कि वह इस पोस्ट का जल्द से जल्द खंडन करें।


यह पहली बार नहीं है जब लांबा ने ऐसी फर्जी जानकारी सोशल मीडिया पर फैलाई हो। हाल में इससे पहले उन्होंने एक चार साल पुरानी तस्वीर को शेयर करके कहा था कि डोनेशन इकट्ठा करने के लिए मंदिर को लॉकडाउन में खोला गया। उन्होंने उस समय श्रद्धालुओं की पूजा व भक्ति पर भी टिप्पणी की थी।

कांग्रेस के गुंडों ने अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर किया हमला

अर्नब गोस्वामी हमला
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब से 2014 में मोदी सरकार बनी है, कांग्रेस मीडिया की स्वतन्त्रता पर हो रहे तथाकथित प्रहारों से जनता को भ्रमित करती रही है। लेकिन पालघर में निर्दोष हिन्दू साधुओं की निर्मम हत्या पर अर्नब गोस्वामी द्वारा सोनिया गाँधी की चुप्पी पर अपने तीखे प्रश्नों से प्रहार करके कांग्रेस की धर्म-निरपेक्षता पर जबरदस्त प्रहार किया था। जो कांग्रेस से बर्दाश्त नहीं हो रहा। अगर अर्नब ने कुछ आपत्तिजनक प्रहार किया था, कोर्ट में केस डालते, हमला करने की क्या जरुरत थी? किसके इशारे और कहने पर यह हमला हुआ? अगर अर्नब के प्रश्नों पर गंभीरता से चिंतन किया जाने यह बात उजागर होती है, जब इसके 'शान्तिप्रिय' पर किसी न किसी कारण हमला होने पर ही दर्द होता है, हिन्दू मरता है तो मर जाने दो।    
कांग्रेस के प्रैस प्रेम पर रौशनी डालते हैं:-
जो पत्रकार कांग्रेस के समर्थन में अर्नब पर हमला बोल रहे हैं, शायद आपातकाल भूल गए। इस दौरान कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने Press Censorship लगा दी थी, कोई भी समाचार-पत्र/पत्रिका बिना सरकार द्वारा पारित समाचार प्रकाशित नहीं कर सकता था। The Motherland के मुख्यसंपादक केवल रतन मलकानी को मीसा में बंद कर दिया था और समाचार पत्र को भी बंद कर दिया था। 
यूपीए के कार्यकाल में ये ही मीडिया कितनी निर्ममता से हिन्दू धर्म को कलंकित कर रहा था? इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए बेकसूर हिन्दू साधु-संत, साध्वियों जैसे साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित को तथाकथित "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर जेलों में डाला जा रहा था। किसी तथाकथित खोजी पत्रकार ने सच्चाई सामने लाने का साहस नहीं किया। दीपावली के शुभावसर पर हिन्दुओं के सम्मानित शंकराचार्य को झूठे आरोप में गिरफ्तार किया करने पर भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उस समय कांग्रेस कार्यकारणी के सदस्य रहते मीटिंग में जो प्रश्न किया था, "क्या ईद के मौके किसी मौलवी गिरफ्तार किया जा सकता है?" और उनके इस प्रश्न का उन्हें आज तक कांग्रेस ने कोई जवाब नहीं दिया। 
फिर अख़लाक़ के मरने पर, कांग्रेस सहित समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष चीख-चिल्ला रहे थे, लेकिन पालघर में निर्दोष साधुओं की निर्मम हत्या पर सबके मुंह दही जम गया है? दूसरे, महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा गिरफ्तार आरोपियों के नाम सार्वजनिक करने से एक और नए विवाद को जन्म देकर, शक की सुई छद्दम धर्म-निरपेक्षों की ओर घुमा दी है। 
अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कल रात हुए हमले के बाद कांग्रेस सवालों के घेरे में है। करीब 12 बजे हुई इस घटना पर अर्नब गोस्वामी ने खुद वीडियो जारी करके पूरे वाकये की जानकारी दी है। अब खबर है कि उन्होंने इस घटना पर लिखित शिकायत भी दर्ज करवा दी है। ये शिकायत उन्होंने मुंबई में हुए हमले के संबंध में आज सुबह ही करवाई है। अपनी शिकायत में उन्होंने 2 लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि रिपब्लिक भारत के हेडक्वार्टर से घर लौटते हुए उन पर व उनकी पत्नी पर हमला किया गया।
अर्नब के अनुसार, इस बीच दोनों गुंडे उन्हें हिंदी में गालियाँ देते रहे और उनका रवैया हिंसक रहा। जब अर्नब ने ये सब देखते हुए अपनी गाड़ी आगे ले जाने की कोशिश की तो दोनों ने उनका रास्ता रोक लिया और फिर वहीं तरल पदार्थ फेंकने लगे। साथ ही उनकी कार का गेट भी थपथपाया। हालाँकि, थोड़े प्रयास करने के बाद वो अपनी गाड़ी आगे ले जाने में सफल रहे। आगे जाकर उन्होंने अपनी गाड़ी के बैक मिरर में देखा कि हमलावरों को मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन टीम के शिवाजी होस्मानी और उनके ऑफिस गार्ड ने पकड़ लिया था।
अपनी बिल्डिंग तक पहुँचने के बाद उन्होंने अपने ऑफिस गार्ड को इस बारे में पूछा। तो उसने बताया कि हमलावरों ने खुद को यूथ कांग्रेस का सदस्य बताया है, जो कह रहे थे कि वे उन्हें (अर्नब को) सबक सिखाने आए थे। अर्नब के मुताबिक इस बीच मुंबई पुलिस भी मौके में पहुँची और अर्नब की प्रोटेक्शन में तैनात शिवाजी होस्मानी ने उन्हें पूरा वाकया बताया कि उन पर हमला यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया। इसके बाद डीसीपी खुद अर्नब की पार्किंग में 10-15 मिनट के बाद आ गए और यहाँ भी शिवाजी होस्मानी ने उन्हें तीसरी बार पूरा वाकया बताया। साथ ही ये भी कहा कि हमलावर यूथ कांग्रेस के थे।



लिखित शिकायत के अनुसार, पहले उन दोनों लोगों ने अर्नब की गाड़ी में ये पहचानने की कोशिश की कि उसे कौन चला कौन कहा है। फिर उनमें से एक ने अर्नब की ओर उंगली से इशारा किया और बाइक को सामने खड़ा करके उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद उन्होंने ख़िड़की के शीशे तो तोड़ना चाहा, मगर जब वो नहीं टूटा तो उन्होंने अपनी जेब से कुछ तरल पदार्थ निकाला और पूरी कार पर छिड़क दिया।
अर्नब अपनी शिकायत में कहते हैं कि जब उन्होंने इस मामले पर एफआईआर की बात की तो डीसीपी ने उन्हें जल्दबाजी न करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसमें वे शिकायत दर्ज करेंगे और तथ्यों को सत्यापित करने के लिए उन्हें कॉल करेंगे। मगर, जब उन्हें डेढ़ घंटे तक कॉल नहीं आई तो उन्होंने अपने सहकर्मी को फोन किया जो कि पुलिस थाने पर था। उसने अर्नब को बताया कि डीसीपी इस समय कह रहे हैं कि ये जाँच का विषय है कि वे लोग यूथ कॉन्ग्रेस के थे या नहीं।
अर्नब का आरोप है कि उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि उन पर हमला करने वाले लोग वे थे, जो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े थे। इसलिए बार-बार कहने पर भी उनकी बात को अनसुना किया जाता रहा। इस दौरान उनके सुरक्षा में तैनात प्रोटेक्शन टीम का हिस्सा रहे शिवाजी कहते रहे कि उन्होंने जिन्हें पकड़ा था, उन्होंने खुद स्वीकारा था कि वे लोग यूथ कॉन्ग्रेस से थे। जिनकी पहचान श्याम सुंदर मिश्रा और अरुण दिलीप बुराडे के रूप में हुई। जिनकी वीडियो और फोटोज भी उनके पास हैं।
अर्नब का अपनी शिकायत में कहना है कि सब कुछ साफ होने के बाद भी ऐसी बात कहना तथ्यों को मोड़ने जैसा है। उनका दावा है कि डीसीपी के साथ बातचीत की उनके पास 2 रिकॉर्डिंग हैं। उन्होंने बताया कि वे ये सब जानकर साढ़े तीन बजे पुलिस थाने गए और वहाँ जाकर वे तब हैरान रह गए तब डीसीपी ने उनके मुँह पर झूठ बोला कि चूँकि वे उन हमलावरों को नहीं जानते हैं इसलिए ये जाँच करने का विषय है कि वे यूथ कांग्रेस से हैं भी या नहीं।
इसके अलावा अपनी शिकायत में अर्नब ने अलका लांबा के ट्वीट का भी जिक्र किया है। जिसमें उन्होंने इस हमले के तुरंत बाद यूथ कांग्रेस जिंदाबाद लिखा। उन्होंने सोनिया गाँधी, पालघर में साधु लिंचिंग को लेकर भी अपनी बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस व उसके शीर्ष नेता लगातार उनसे, उनकी टीम से असहज हैं क्योंकि वे उनके ख़िलाफ सवाल पूछते हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
इस मामले में मुंबई के एनएम जोशी थाने में दोनों आरोपितों के ख़िलाफ 341 और 504 के तहत मामला दर्ज हुआ है। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हमले की निंदा करते हुए कहा, “हम वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी पर हमले की निंदा करते हैं। हम किसी भी पत्रकार पर हमले की निंदा करते हैं। यह लोकतंत्र के खिलाफ है। जो लोग सहिष्णुता पर प्रवचन देते हैं वे उतने असहिष्णु हो गए हैं। यह अलोकतांत्रिक है।”
अर्नब गोस्वामी हमला, अल्का लाम्बा
अर्नब गोस्वामी पर हमले के तुरंत बाद लिखा – ‘युवा कांग्रेस  जिंदाबाद’
हैरानी की बात है कि इस हमले की सूचना के तुरंत बाद कांग्रेस की महिला नेता अलका लांबा ने यूथ कॉन्ग्रेस की वाह वाही में ट्वीट लिख दिया। ये ट्वीट रात के तीन बजे आया और बता दें कि अर्नब गोस्वामी पर हमला 12 से 1 बजे के बीच हुआ। जिसकी जानकारी उन्होंने वीडियो जारी करके खुद दी।

अलका लांबा ने देर रात ट्वीट में लिखा, “युवा कांग्रेस जिंदाबाद।” अब सोचने की बात है कि कांग्रेस ने ऐसा क्या किया? जो अलका लांबा को देर रात युवा कांग्रेस जिंदाबाद कहना पड़ा। तो बता दें कि अर्नब गोस्वामी की टिप्पणी के अलावा कांग्रेस कल किसी मुख्य कारण चर्चा में नहीं आई। और अलका लांबा जो ये ट्वीट कर रही हैं उससे पहले वे और राजस्थान सीएम समेत कई कांग्रेस नेता अर्नब पर एक्शन लेने की माँग कर रहे थे। मगर जैसी ही हमले की खबर सार्वजनिक हुई। उन्होंने यूथ कांग्रेस की जय-जयकार शुरू कर दी। जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उन्हें आड़े हाथों लिया और जमकर सुनाया। लोगों ने कहा कि ये हमला अलका लांबा के कारण हुआ, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भड़काया था, इसके लिए उन्होंने 2 ट्वीट भी किए थे।
इस टिप्पणी को सुनकर कई कांग्रेसियों की प्रतिक्रिया आई। उनपर एफआईआर की गईं। उनके ख़िलाफ आवाज उठी। यहाँ तक सहमति-असहमति आम बात है। मगर अलका लांबा ने यहाँ अपने कार्यकर्ताओं को भड़काना शुरू कर दिया। पहले अलका लांबा ने लिखा कि अगर अर्नब गोस्वामी को साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी जी को लेकर की गई टिप्पणी पर गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बिना सोचे सड़कों पर उतर जाना चाहिए, वरना कोरोना से पहले यह नफ़रत कर ज़हर देश को मार डालेगा।


इसके बाद, अलका लांबा यहीं पर नहीं रुकी। उन्होंने इसी बयान पर अपनी आगे बात रखी और फिर कहा, “देशभर के कार्यकर्ता अर्नब गोस्वामी द्वारा कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी जी पर दिए गए ब्यान को लेकर बेहद आहत हैं, अगर समय रहते महाराष्ट्र ने उचित क़ानूनी कार्यवाही नहीं की तो मैं यह चेतावनी दे रही हूँ कि फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतर आने से कोई नहीं रोक पाएगा।”
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार मंगलवार(अप्रैल 21) को छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रिपल्बिक भारत टीवी के प्रमुख एंकर अर्नब गो...
अब भले ही, इन ट्वीट को करने के बाद अलका लांबा अर्नब के विरोध में और सोनिया गाँधी के समर्थन में कितनी ही बातें रखें। मगर, सोशल मीडिया पर लोगों का यही मानना है कि अर्नब की टिप्पणी के बाद अलका लांबा के भड़काने के कारण उन पर हमला हुआ। हालाँकि ये बात कितनी सच है? ये भी जाँच का विषय है क्योंकि यूजर्स के इल्जाम निराधार नहीं है। पहले लगातार अर्नब की निंदा और फिर अपने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उकसाने की बात कहना, फिर अचानक अर्नब पर कांग्रेस के गुंडों का हमला करना और देर रात कॉन्ग्रेस नेता का ट्वीट आना…ये सब एक क्रम से होना दर्शाता है कि हमले के सोनिया गाँधी पर टिप्पणी सुनकर अलका लांबा ने हिंसा भड़काने और नियमों का उल्लंघन करने के लिए उकसाने के लिए ट्वीट किया। उन्होंने लगातार कहा कि उनके युवा नेता सड़कों पर आ जाएँगे। जबकि वो जानती है कि ये लॉकडाउन का समय है और सरकार लोगों को घर में रहने की सलाह दे रही है।

'दोनों’ को कांग्रेस ने 2002 में ही नाप दिया होता तो आज फन फैला कर न बैठे होते: अलका लाम्बा ने फिर उगला ज़हर

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अलका ...
मुस्लिम बहुल क्षेत्र जामा मस्जिद में हिजाब पहन
ड्रामा करती अलका लाम्बा 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कांग्रेस नेता अलका लाम्बा ने कहा कि अगर कांग्रेस ने 2002 में ही ‘दोनों को नाप दिया होता’ तो आज भारत को ये दिन नहीं देखने पड़ते। लोगों ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात कर रही हैं। बता दें कि 2002 की बात कर वे गुजरात दंगों का जिक्र कर रही थीं।
जब इन दंगों की जाँच चल रही थी और मोदी से सीबीआई ने घंटों पूछताछ की थी, तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि इस ट्वीट से पता चलता है कि कांग्रेस ने कोशिश तो ख़ूब की, पर सफल नहीं हुए।
अलका लाम्बा ने ट्वीट कर लिखा कि कांग्रेस से बहुत बड़ी ग़लती हुई। उन्होंने लिखा कि ‘दोनों’ आज सत्ता में फन फैला कर बैठे हैं, जो कांग्रेस द्वारा उन्हें तभी ‘न नाप देने’ का नतीजा है। मालवीय ने कहा कि लाम्बा ने देश को इस बात की जानकारी देकर अच्छा किया है कि कांग्रेस ने पूरी कोशिश की।
एक व्यक्ति ने उन्हें रिप्लाई करते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस ‘नापने’ में एक्सपर्ट रही है और ख़ुद के नेताओं को भी नहीं छोड़ती। जैसे लाल बहादुर शास्त्री, संजय गाँधी और माधवराव सिंधिया। एक ने कहा कि देश तो आनंद मना रहा है, खामियाजा तो आज कांग्रेस पार्टी भुगत रही है।
बाद में अलका लाम्बा ने अपने इस बयान का बचाव भी किया। उन्होंने 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध की बात करते हुए दावा किया कि कांग्रेस की कोशिशें कभी नाकाम नहीं होतीं। उन्होंने 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण की बात कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की याद दिलाई।

उन्होंने कहा कि कड़वी सच्चाई ये है कि कोशिश ही नहीं हुई और कोशिश होती तो ज़रूर कामयाब होते, जिससे देश को आज ‘ये दिन’ नहीं देखने पड़ते। एक व्यक्ति ने अलका को याद दिलाया कि जिस पाकिस्तान का नाम लेकर वो राजनीतिक रोटी सेंक रही हैं, कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री मोदी को हटाने के लिए फिर उसी पाकिस्तान के पास चले गए।
अलका लाम्बा इससे पहले भी मोदी की फोटो लगा कर भाजपा नेताओं को ‘संघ की नाजायज पैदाइश’ बता चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में पहलवान योगेश्वर दत्त के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था, “अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ कि तेरा बाप कौन है? लगता है कि अपने बाप के साथ तस्वीर लगाने में भी तुझे शर्म आती है? ऐसा क्या? जिसके साथ तूने तस्वीर लगा रखी है, अगर तेरी माँ कहती है कि वही तुम्हारा बाप है तो मान जाना। ऐसा इसीलिए, क्योंकि तेरी माँ झूठ नहीं बोलती। यूँ ही दर्द नहीं हुआ है तुझे?”
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चीन के वुहान प्रांत से पूरी दुनिया में फैला कोरोना वायरस संक्रमण अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोगों की जान ले चुका है, जबक.....
जुलाई 2019 में भी उन्होंने मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि जो पति न हुआ, वो पिता कैसे होगा? तब वो आम आदमी पार्टी में थीं।

"अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ तेरा बाप कौन है" : अलका लाम्बा, कांग्रेस नेता

Alka Lamba questions Yogeshwar Dutt's parentage in ugly Twitter spat
लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अध्यात्म द्वारा कोरोना वैश्विक बीमारी से मुक्ति मार्ग पसंद नहीं आ रहा। राहुल गाँधी से लेकर छुटभैया नेता बोलने से पहले यह नहीं सोंच रहे कि आखिर हम बोल क्या रहे हैं?
कांग्रेस नेताओं ने अब देश के लिए मेडल लाने वाले खिलाड़ियों का भी सम्मान करना बंद कर दिया है। पूर्व-विधायक अलका लाम्बा ने हद पार करते हुए पहलवान योगेश्वर दत्त पर ओछी टिप्पणी की। योगेश्वर न सिर्फ़ भारत के लिए ओलम्पिक से लेकर कॉमनवेल्थ में मेडल ला चुके हैं बल्कि उन्होंने बजरंग पुनिया जैसे अन्य पहलवानों को प्रशिक्षित भी किया है। अलका लाम्बा ने योगेश्वर दत्त पर टिप्पणी करते हुए लिखा:
“अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ कि तेरा बाप कौन है? लगता है कि अपने बाप के साथ तस्वीर लगाने में भी तुझे शर्म आती है? ऐसा क्या? जिसके साथ तूने तस्वीर लगा रखी है, अगर तेरी माँ कहती है कि वही तुम्हारा बाप है तो मान जाना। ऐसा इसीलिए, क्योंकि तेरी माँ झूठ नहीं बोलती। यूँ ही दर्द नहीं हुआ है तुझे?”
साथ ही अलका लाम्बा ने योगेश्वर दत्त का अपमान करते हुए अपनी ट्वीट के साथ हँसने वाली इमोजी का भी प्रयोग किया। दत्त ने धैर्य और संयम का परिचय देते हुए अलका लाम्बा की इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बावजूद गरिमामयी जवाब ही दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच पर ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाली को जब अपनी गरिमा का ध्यान नहीं तो वो इनसे अपने, अपनी माँ के अथवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौरव का ध्यान रखने की आशा कैसे कर सकते हैं?

योगेश्वर दत्त ने कहा कि इस देश में पुरुष होने के कुछ घाटे भी हैं क्योंकि अलका लाम्बा जैसे लोग तुरंत ‘महिला कार्ड’ खेलने लगते हैं। दरअसल, ये सब शुरू हुआ अलका द्वारा भाजपा नेताओं को संघ की नाजायज पैदाइश बताने से। उन्होंने कहा कि संघ का भले राजनीति से कोई लेना-देना नहीं हो लेकिन सारे भाजपा नेता संघ की ही नाजायज औलाद हैं। ऐसा उन्होंने उस तस्वीर को कोट करते हुए लिखा, जिसमें नरेंद्र मोदी 70 के दशक में संघ के गणवेश में एक कार्यक्रम में दिख रहे हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कोरोना संकट का सामना करने के लिए पूरा देश एकजुट है। इसका नजारा रविवार(अप्रैल 5) रात नौ ब...
इसी पर योगेश्वर दत्त ने उन्हें मोदी का अपमान न करने की सलाह दी। इस पर योगेश्वर दत्त ने कहा कि नाजायज पैदाइश कौन है, ये अलका लाम्बा की बातों से ही पता चल रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की सोच से ही उनकी परवरिश का पता चल जाता है। उन्होंने समझाया कि जिस इंसान की फ़ोटो पर लाम्बा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की है, उसके लिए देशवासियो का प्यार सब ने देख भी लिया होगा। उन्होंने ‘9 बजे 9 मिनट्स’ की सफलता की बात करते हुए कहा कि पूरा देश प्रधानमंत्री मोदी के साथ में खड़ा है, बस लाम्बा जैसे कुछ मानसिक रोगियों को छोड़ कर।

अलका लांबा ने PM मोदी के ख़िलाफ़ उगला जहर

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अलका लाम्बा अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में आ जाती हैं, शायद इस तरह चर्चा में रहना पसंद करती हैं। और इस तरह उनको मुफ्त में मीडिया में जगह भी मिल जाती है। कुछ लोगों का स्वभाव होता है, जिसे कोई नहीं बदल सकता। लेकिन वह भूल रही हैं कि जिनके घर शीशे के होते हैं, दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकते। 
आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व नेता अलका लांबा ने मंगलवार (24 सितंबर) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का पिता’ कहा था।
दिल्ली के चांदनी चौक की पूर्व AAP विधायक लांबा ने ट्रम्प की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “जो पति न हुआ, वह पिता कैसे होगा?”

इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जो लोग अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को ‘भारत का पिता’ कहने में गर्व का अनुभव नहीं करते हैं, उन्हें ख़ुद को भारतीय नहीं मानना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जो लोग विदेश में रहते हैं, वे भारतीय होने पर गर्व करते हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और व्यक्तिगत आउटरीच के कारण हो रहा है… अगर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक स्पष्ट और निष्पक्ष दृष्टिकोण निकलकर बाहर आता है, तो मुझे लगता है कि अपने राजनीतिक संबद्धता के बावजूद, सभी भारतीय नागरिकों को इस पर गर्व महसूस करना चाहिए।” इसके आगे उन्होंने कहा, “पहली बार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी प्रधानमंत्री की प्रशंसा के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। अगर किसी को इस पर गर्व नहीं है, तो शायद वह व्यक्ति ख़ुद को भारतीय नहीं मानता है।”
संयुक्त राष्ट्र महासभा के न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुआ उन्हें ‘भारत का पिता’ कहा था।
ट्रम्प ने कहा था कि वो निजी तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और वास्तव में उन्हें बहुत पसंद करते हैं। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी एक सज्जन और महान नेता हैं। उन्हें आज भी वो भारत याद है जो काफ़ी अस्थिर था, वहाँ काफ़ी मतभेद, लड़ाई थी, लेकिन वो (पीएम मोदी) सबको साथ लेकर आए। जैसे एक पिता सबको साथ लाता है, वो भारत के पिता हैं। इसलिए उन्हें हम ‘फ़ादर ऑफ़ इंडिया’ बुलाएँगे।
इससे पहले, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए उन्हें उन्हें ‘जहिल’ (अनपढ़) कहा था। ओवैसी ने यह भी कहा कि ट्रम्प ने इस तरह का बयान देकर महात्मा गाँधी की विरासत का अपमान किया और उन्हें भारतीय इतिहास के स्वतंत्रता संग्राम का कोई ज्ञान नहीं।
औवैसी ने कहा था, “मोदी राष्ट्र के पिता नहीं हो सकते क्योंकि आप उनकी तुलना महात्मा गाँधी से नहीं कर सकते। यहाँ तक ​​कि जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे दिग्गजों को इस तरह का ख़िताब नहीं दिया गया।”

चांदनी चौक के AAP विधायक अलका लांबा अयोग्य घोषित

चांदनी चौक के AAP विधायक अलका लांबा अयोग्य घोषित, हाल ही में कांग्रेस में हुईं थी शामिल
चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी  विधायक अलका लांबा अयोग्य घोषित हो गई हैं. अलका लांबा ने हाल ही में कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी, जिसके बाद 'आप' विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने अलका लांबा को अयोग्य घोषित करने की याचिका लगाई थी. याचिका पर फैसला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने अलका लांबा को अयोग्य घोषित कर दिया. बता दें कि  इसी महीने की शुरुआत में अलका लांबा ने 'आप' का साथ छोड़ा था. उन्होंने ट्वीट कर किया था, "time to say good bye" यानी गुड बॉय बोलने का समय आ गया है. अलका लांबा काफी समय से पार्टी छोड़ने की बात कह रही थीं और उन्होंने ऐलान भी किया था कि अगले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगी.

आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले अलका लांबा 20 सालों तक कांग्रेस से जुड़ी रहीं थीं, लेकिन साल 2013 में उन्होंने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली और चांदनी चौक से चुनाव जीता था. लेकिन इस साल लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार पर उन्होंने अरविंद केजरीवाल की भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही. लेकिन इसके बाद उनको आम आदमी पार्टी के विधायकों वाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया गया.
अलका लांबा निर्दलीय लड़ेंगी अगला चुनाव
इसके बाद मतभेद लगातार बढ़ते चले गए और जब अरविंद केजरीवाल के रोड शो में उन्हें कार में ही बैठे रहने को कहा गया तो वह बीच में रोड शो को छोड़कर चली आईं. वहीं अलका लांबा ने पार्टी के उस प्रस्ताव का भी खुले तौर पर विरोध किया जिसमें राजीव गांधी को मिले भारत रत्न वापस लेने की मांग की गई थी. 

दिल्ली : क्या AAP विधायक अलका लांबा की होगी घर वापसी?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 

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आज जिस तरह से राजनीती अपने रंग बदल रही है, शायद इतनी जल्दी कोई गिरगिट भी नहीं बदलती होगी। अपने आपको समाजसेवी एवं निष्ठावान कहलवाने नेता किस तरह सौदेबाज़ हो सकते हैं, यह चुनाव दिनों में पता चलता है। मोदी को सत्ता विहीन करना तो दूर, नेताओं को देश की बजाए अपनी जीविका की चिन्ता सत्ता सता रही है, इनका वही हाल है, "जहाँ दिखे तवा परात, वहीँ बिसाये सारी रात।"  
लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी को एक और झटका लग सकता है। चांदनी चौक से पार्टी विधायक अलका लांबा ने पार्टी को अलविदा कहने का मन बना लिया है। दरअसल अलका लांबा और पार्टी के बीच मतभेद की खबरें काफी समय से आ रही थीं। पिछले साल दिसंबर में लांबा ने दावा किया था कि AAP ने उनसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने के कथित प्रस्ताव का विरोध करने को लेकर उससे इस्तीफा मांगा था।
मार्च 15 को मीडिया से बात करते हुए अलका ने कहा, 'मुझे कांग्रेस की तरफ से पार्टी में शामिल करने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। अगर ऐसा होता है तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी, मैंने पार्टी के लिए 20 साल दिए हैं। कांग्रेस इस मुद्दे पर फैसला लेगी, बिना निमंत्रण के पहुंचे अतिथि का कहीं सम्मान नहीं होता है।'
2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले अलका लांबा कांग्रेस में 20 साल रह चुकी हैं। वह कांग्रेस के छात्र  संगठन एनएसयूआई से पहली बार दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष बनीं थी। 2003 में उन्होंने मोती नगर विधानसभा सीट से भाजपा नेता मदन लाल खुराना के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गईं थी।
पिछले साल दिसंबर में लांबा ने दावा किया था कि AAP ने उनसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने के कथित प्रस्ताव का विरोध करने को लेकर उससे इस्तीफा मांगा गया था। हालांकि, AAP ने इस दावे को खारिज कर दिया था। तब अलका लांबा ने ट्वीट किया था, 'आज दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव लाया गया की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी को दिया गया भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिए, मुझे मेरे भाषण में इसका समर्थन करने को कहा गया, जो मुझे मंजूर नही था, मैंने सदन से वॉक आउट किया। अब इसकी जो सजा मिलेगी,मैं उसके लिए तैयार हूं।'
AAP MLA, Alka Lamba: I don't have any such proposal (of joining Congress) from Congress yet, but it will be a matter of respect for me if any such proposal comes, I had given 20 years to the party. Congress will decide on the matter, an uninvited guest isn't welcomed anywhere.
कुछ समय पहले उन्होंने पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि सीएम केजरीवाल ने उन्हें ट्विटर पर 'अनफॉलो' कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा था कि उन्हें मौजूदा हालात में पार्टी में काम करने में दिक्कत हो रही है। तब उन्होंने कहा था, 'मुझे ऐसा लगता है कि पार्टी अब मेरी सेवा नहीं चाहती। लेकिन जब तक मैं विधायक हूं, अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना जारी रखूंगी।' उन्होंने दावा किया था कि उन्हें पार्टी के सभी आधिकारिक वाट्सएप्प ग्रुप से हटा दिया गया है । 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पिछले कई माह में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता मुक्त करने के लिए मोदी विरोधी .....

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