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केजरीवाल के इशारे पर दिल्ली विधानसभा में की गई रामचरितमानस के बहिष्कार की अपील

सनातन धर्म बहुत प्राचीन धर्म है जिसमे हिंदू शब्द का समावेश है। बहुत समय से अर्थात महाराजा भरत के पहले से मतलब आदिकाल से इस धर्म की स्थापना हुई जो समाज के कल्याण हेतु सर्वदा तत्पर रही। हां इसको कुछ विदेशियों ने मिटाने की कोशिश की लेकिन नही मिटा पाए। हमारे पूर्वज भगवान राम और कृष्ण सनातन धर्म के रक्षक रहे।

आज हिन्दुओं को एक ज्वलन्त प्रश्न पर विचार करना होगा कि जब समस्त सनातन विरोधी एकजुट हो सकते हैं, फिर क्या कारण है कि सनातन प्रेमी एकजुट क्यों नहीं हो सकते? और एकजुट होकर उन सभी हिन्दू विरोधियों का सामाजिक बहिष्कार कर ईंट का जवाब पत्थर से दें। दूसरे, चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देना चाहते, मत दो लेकिन इन्हें वोट देने से अच्छा है NOTA का बटन दबाया जाए। जब तक इन लोगों का परिवार सहित बहिष्कार नहीं होगा, तब तक हिन्दू इसी तरह अपमानित होता रहेगा। आखिर बर्दाश्त की भी एक सीमा होती है।  

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सत्ता के इतने भूखे हो चुके हैं कि अपने सामने भगवान श्रीराम और हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस का अपमान होते देख रहे हैं। उनके इशारे पर पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के विधायक राजेंद्र पाल गौतम दिल्ली विधानसभा में रामचरितमानस के बहिष्कार की अपील कर रहे थे। जिस समय राजेंद्र पाल गौतम रामचरितमानस के खिलाफ बोल रहे थे, उस समय सदन में आम आदमी पार्टी के हिन्दू विधायकों ने उनका विरोध नहीं किया। उनकी मौन सहमति बताती है कि आम आदमी पार्टी हिन्दू विरोधी वोट के लिए हिन्दू मतदाताओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। यहां तक कि आम आदमी पार्टी हिन्दू विरोधी पार्टियों से गठजोड़ कर भगवान श्रीराम के खिलाफ देशभर में मुहिम चला रही है।

दिल्ली विधानसभा में पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस और हिन्दू आस्था पर हमला

हिन्दू देवी- देवताओं के खिलाफ पूरे देश में मुहिम चला रहे आम आदमी पार्टी के विधायक राजेंद्र पाल गौतम 29 मार्च, 2023 को दिल्ली विधानसभा में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा के दौरान अपने एजेंडे के तहत रामचरितमानस को निशाना बनाया। पवित्र ग्रंथ के एक दोहे का जिक्र करते हुए उन्होंने हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने सदन में जो बयान दिया, उससे लगा कि वो ‘ताड़ना’ शब्द की आड़ में हिन्दू धर्म के खिलाफ लोगों को भड़का रहे हैं। शूद्र और नारी के संदर्भ मे ‘ताड़ना’ शब्द की गलत व्याख्या कर उन्होंने रामचरितमानस के बहिष्कार की अपील की। अपने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए आम आदमी पार्टी के नेता और केजरीवाल हिन्दू साधु-संतों और विद्वानों के पक्ष को अनसुना कर लगातार हिन्दू धर्म और उसकी आस्था पर हमला कर रहे हैं।

क्या केजरीवाल हिंदुत्व, सनातन और पवित्र ग्रंथों को नहीं मानते ?

दिल्ली विधानसभा में आप के विधायक राजेंद्र पाल गौतम की इस अपमानजनक टिप्पणी के बाद बीजेपी और आम लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि राजेन्द्र पाल गौतम बीते छह महीने से लगातार हिन्दू विरोधी अभियान चला रहे हैं। और ऐसा लगता है कि वह आम आदमी पार्टी के हिन्दू विरोधी पोस्टर बॉय हैं। प्रवक्ता ने आम आदमी पार्टी से रामचरितमानस के बहिष्कार की अपील पर अपना रूख स्पष्ट करने की मांग की। बीजेपी ने सवाल किया कि क्या केजरीवाल राजेंद्र पाल गौतम के विचारों से सहमत है ? अगर सहमत नहीं है तो कब उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर रहे हैं ? वहीं बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने केजरीवाल को चुनौती देते हुए ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, “हिन्दू विरोधी केजरीवाल के नेता ने फिर उगला जहर ! केजरीवाल हिम्मत है तो स्वीकार करो कि तुम हिंदुत्व, सनातन और पवित्र ग्रंथों को नहीं मानते?”

हिन्दू विरोधियों से केजरीवाल और AAP का गठजोड़

दिल्ली के सीएम केजरीवाल दूसरे राज्यों में अपनी पार्टी के विस्तार के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू विरोधी ताकतों से गठजोड़ कर रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि पार्टी के विस्तार में अन्ना हजारे की तरह हिन्दू विरोधी ताकतों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी पार्टियों से गठजोड़ के लिए केजरीवाल ने विधायक राजेंद्र पाल गौतम को बड़ी जिम्मेदारी दी है। केजरीवाल की योजना के तहत ही राजेंद्र पाल गौतम हिन्दू विरोधी अभियान चलाने वाले दूसरी पार्टी के नेताओं से मिल रहे हैं। हिन्दू धर्म के खिलाफ देशभर में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं और मंच साझा कर रहे हैं। हाल ही में रजेंद्र पाल गौतम उत्तर प्रदेश में रामचरितमानस की प्रतियां जलवाने वाले सपा एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ नजर आए थे। दिल्ली विधानसभा में राजेंद्र पाल गौतम ने जो कुछ बयान दिया, वो इसी गठजोड़ का नतीजा है।

हिन्दुओं का सफाया करने वाले के साथ केजरीवाल

आम आदमी पार्टी की मंशा सिर्फ हिन्दू देवी-देवताओं के प्रति लोगों में नफरत फैलाना नहीं है, बल्कि हिन्दू विरोधी ताकतों के साथ मिलकर हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाना भी शामिल है। केजरीवाल जहां दलित हिन्दुओं का धर्मांतरण कराने वाले संगठनों को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं दंगे में हिन्दुओं की हत्या करने वाले दंगाई का बचाव भी कर रहे हैं। दिल्ली दंगा में आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका सामने आ चुकी है। उसके घर से जिस तरह दंगे को संचालित किया गया और वहां से जो हिंसा की सामग्री मिली, वो ताहिर के गुनाहों की कहानी खुद बयां कर रहे थे। इसके बावजूद दिल्ली के सीएम केजरीवाल पार्षद ताहिर हुसैन को बेकसूर बता रहे थे। दरअसल केजरीवाल की मंशा हिन्दू विरोधी ताकतों के साथ मिलकर उनके इलाके से हिन्दुओं का सफाया करना और भगाना है। ताकि हिन्दुओं के घर और संपत्ति पर कब्जा किया जा सके।

किस तरह हिन्दू विरोधी और चुनावी भक्त केजरीवाल और उनके समर्थकों ने कब-कब भगवान राम और हिन्दू देवी-देवाताओं का अपमान किया

आम आदमी पार्टी हिन्दू विरोधी लोगों का जमावड़ा है और अरविंद केजरीवाल उनके संरक्षक हैं। केजरीवाल के समर्थक, विधायक और मंत्री हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ लोगों को भड़काते हैं। लोगों को देवी-देवताओं की पूजा नहीं करने की शपथ दिलाते हैं। यहां तक कि भगवान राम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और राम कथा सुनाने पर जान से मारने की धमकी भी देते हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक केजरीवाल समर्थक को गिरफ्तार किया गया, जिसने राम कथा कहने पर मशहूर कवि और आम आदमी पार्टी के नेता रहे कुमार विश्वास को जान से मारने की धमकी दी थी।

केजरीवाल और AAP की हिन्दू विरोधी विचारधार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनाव आते ही मंदिरों का दौरा शुरू कर देते हैं। हिन्दुओं को झांसा देने के लिए जनसभा में कृष्ण और अर्जुन की कहानियां सुनाते हैं। लेकिन असल में आम आदमी पार्टी की विचारधार पूरी तरह हिन्दू धर्म विरोधी है। क्योंकि इस पार्टी के जन्मदाता अरविंद केजरीवाल ईसाई संत मदर टरेसा के शिष्य है और उनके ही बताये रास्ते पर चल रहे हैं। इसलिए आम आदमी पार्टी में वही लोग शामिल है, जो हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं को नहीं मानते और इस धर्म को खत्म करना चाहते हैं। इसके लिए वे तरह-तरह के अभियान चला रहे हैं। इसका प्रमाण दिल्ली में ‘मिशन जय भीम’ कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला, जब केजरीवाल सरकार के मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम ने लोगों को ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम और कृष्ण को ईश्वर ना मानने और इनकी कभी पूजा नहीं करने की शपथ दिलाई थी।

भगवान राम को गाली और कुमार विश्वास को धमकी

गाजियाबद पुलिस के मुताबिक भगवान राम को गाली और कुमार विश्वास को धमकी देने के आरोप में लोकेश नाम के एक केजरीवाल समर्थक को इंदौर के सुदामा नगर से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह अरविंद केजरीवाल से प्रभावित है। इसलिए, कुमार विश्वास द्वारा राम कथा कहने और केजरीवाल के खिलाफ बयान देने से नाराज है। कुमार विश्वास के मैनेजर ने बताया कि आरोपी लोकेश ने विश्वास को केजरीवाल पर टिप्पणी नहीं करने की चेतावनी दी थी। उसने शहीद उधम सिंह की कसम खाते हुए विश्वास को जान से मारने की धमकी दी थी।

फेसबुक के पूर्व कर्मचारी का खुलासा- रोका जा सकता था दिल्ली दंगा

राजनीति भी विचित्र है, जो रंग बदलने में गिरगिट को भी पूर्णरूप से बहुत पीछे छोड़ रही है। जन विरोधी सारे खेल खेलने के बाद बेनकाब होते हैं, आरोप दूसरे पर छाड़ दूध के धुले कहें या दूध से ज्यादा सफ़ेद बताने सामने आ जाते हैं। 

नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में अब तक पकडे गए आरोपियों से जो सच्चाई सामने आ रही है, उससे घबरा कर अब मोदी विरोधी सारा दोष फेसबुक पर डाल अपने आपको निर्दोष सिद्ध करने में लग गए हैं, क्योंकि दिल्ली और बंगाल चुनाव अति निकट हैं। क्या फेसबुक ने नेताओं अथवा निर्वाचित सदस्यों को बोला था कि "जाओ दंगा करो"? इन बेशर्मों से पूछा जाए कि "मरने वाला मर गया, किसी का घर/कार एवं स्कूटर जलाकर राख कर दिया, ये जो नुकसान हुआ, किसी और का नहीं हिन्दुस्तानियों का हुआ है। कौन है इन बिकाऊ दंगाइयों के पीछे? किसने पेट्रोल, एसिड, पत्थर, गुलेल और छुरे-चाकुओं का प्रबंध किया और किसने इस काम के लिए धन दिया?" 
राजधानी दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को रोका जा सकता था, अगर फेसबुक ने सही समय पर दंगों को भड़काने वाले कंटेंट को रोका होता। यह दावा फेसबुक के पूर्व कर्मचारी मार्क एस लकी ने दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति के सामने किया है। उन्होंने बताया कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों के इशारों पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाया जाता है। इसके चलते कई बार फेसबुक को अपने ही कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि फेसबुक पर पहले भी दक्षिणपंथ के प्रति पूर्वग्रह रखने के आरोप लगते रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा की इस कमेटी के अध्यक्ष विधायक राघव चड्ढा हैं। समिति ने गुरुवार (नवम्बर 12, 2020) को फेसबुक के अधिकारियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली सामग्री को जानबूझकर नजरअंदाज करने से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करते हुए एक बैठक बुलाई थी। दरअसल समिति का मानना है कि दिल्ली दंगों को भड़काने में फेसबुक का भी बहुत बड़ा हाथ था।

बैठक के दौरान पूर्व कर्मचारी लकी ने फेसबुक के पॉलिसी हेड समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों पर राजनीतिक दलों के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए। लकी ने अपने बयान में कहा कि अगर समय रहने फेसबुक पर दिल्ली में दंगे भड़काने वाले कंटेंट को रोका गया होता जो शायद इतनी ​बड़ी घटना नहीं होती। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अगर फेसबुक ने सही समय पर कार्रवाई की होती तो म्यांमार जनसंहार और श्रीलंका में हुए दंगों को आसानी से रोका जा सकता था।

लकी ने राजनीतिक पार्टियों और फेसबुक के बीच के कनेक्शन के बारे में खुलासा करते हुए यह भी बयान दिया कि फेसबुक के पॉलिसी हेड समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों के इशारे पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाया जाता है। इसके अलावा फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारी और क्षेत्रीय प्रमुख उन देशों में राजनीतिक दलों से दोस्ती बनाकर रखते हैं, जहाँ फेसबुक को काफी ग्राहक हैं। इस सब की वजह से कई बार फेसबुक को अपने ही कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। जिसका फायदा भी होता है और नुकसान भी झेलना पड़ता है। साथ ही उन्होंने कहा कि फेसबुक कंटेंट मॉडरेशन के संबंध में ऐसी नीतियां बना रहा है, जो पारदर्शी नहीं हैं।

 बिज़नेस के सिलसिले को उजागर करते हुए मार्क ने बताया कि फेसबुक के लिए भारत के बाद अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन भारत को इसका कोई खास फायदा नहीं मिलता। क्योंकि फेसबुक भारत में अमेरिका जितना संसाधन खर्च नहीं करता है, जिससे भारत को अपेक्षाकृत नुकसान है। फेसबुक के दिशानिर्देशों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी कंपनी के कर्मचारियों को वास्तविक गाइडलाइंस के मुताबिक काम करने दें तो समाज में ज्यादा शांति और सद्भाव रहेगा।

चांदनी चौक के AAP विधायक अलका लांबा अयोग्य घोषित

चांदनी चौक के AAP विधायक अलका लांबा अयोग्य घोषित, हाल ही में कांग्रेस में हुईं थी शामिल
चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी  विधायक अलका लांबा अयोग्य घोषित हो गई हैं. अलका लांबा ने हाल ही में कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी, जिसके बाद 'आप' विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने अलका लांबा को अयोग्य घोषित करने की याचिका लगाई थी. याचिका पर फैसला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने अलका लांबा को अयोग्य घोषित कर दिया. बता दें कि  इसी महीने की शुरुआत में अलका लांबा ने 'आप' का साथ छोड़ा था. उन्होंने ट्वीट कर किया था, "time to say good bye" यानी गुड बॉय बोलने का समय आ गया है. अलका लांबा काफी समय से पार्टी छोड़ने की बात कह रही थीं और उन्होंने ऐलान भी किया था कि अगले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगी.

आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले अलका लांबा 20 सालों तक कांग्रेस से जुड़ी रहीं थीं, लेकिन साल 2013 में उन्होंने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली और चांदनी चौक से चुनाव जीता था. लेकिन इस साल लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार पर उन्होंने अरविंद केजरीवाल की भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही. लेकिन इसके बाद उनको आम आदमी पार्टी के विधायकों वाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया गया.
अलका लांबा निर्दलीय लड़ेंगी अगला चुनाव
इसके बाद मतभेद लगातार बढ़ते चले गए और जब अरविंद केजरीवाल के रोड शो में उन्हें कार में ही बैठे रहने को कहा गया तो वह बीच में रोड शो को छोड़कर चली आईं. वहीं अलका लांबा ने पार्टी के उस प्रस्ताव का भी खुले तौर पर विरोध किया जिसमें राजीव गांधी को मिले भारत रत्न वापस लेने की मांग की गई थी. 

बेसबॉल बैट से पिटाई मामले में AAP विधायक सोम दत्त को तिहाड़ जेल

सोमदत्त-आप
2015 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान समर्थकों संग की थी मारपीट
दिल्ली में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने सदर बाजार से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमदत्त को मारपीट के मामले में बृहस्पतिवार को 6 महीने के लिए तिहाड़ जेल भेजा है। सदर विधानसभा से विधायक सोमदत्त की याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दे दिया।
यह मामला जनवरी 2015 का है। अदालत ने सोम दत्त को तिहाड़ भेजने के साथ ही मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल के उन्हें इस मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ की गई अपील को भी खारिज कर दिया। उन्हें 2015 के इस मारपीट के मामले में पहले 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी।
मजिस्ट्रेट विशाल ने 29 जून को दिए फैसले में सोम दत्त को दोषी ठहराया था और फैसले को चुनौती देने की अनुमति दी थी। शिकायतकर्ता संजीव राणा ने सोमदत्त पर मारपीट का आरोप लगाया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि सोम दत्त गुलाबी बाग स्थित उनके घर में अपने 50-60 समर्थकों के साथ गया और उनके साथ मारपीट की थी।

अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाया था कि AAP विधायक ने बेसबॉल से शिकायतकर्ता संजीव राणा के पैर में मारा था। जबकि समर्थक शिकायतकर्ता को घसीटकर सड़क पर लाए थे और उनकी पिटाई की थी। वहीं, सोमदत्त के वकील ने दलील की थी कि सोमदत्त व उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से प्रचार कर रहे थे और शिकायतकर्ता ने ही सोमदत्त के साथ झगड़ा शुरू किया था।

पूरा मामला

पीड़ित संजीव की शिकायत के मुताबिक 10 जनवरी 2015 को वह अपने फ्लैट में थे। तभी 50-60 लोग उनके दरवाजे पर पहुँचकर, घर की घंटी बजाने लगे। जब संजीव ने इसका विरोध किया तो नाराज़ सोमदत्त ने बेसबॉल बल्ले से उनके पैर पर मार दिया। इसके बाद वह उसे खींचकर सड़क पर ले गए और वहाँ उन्हें लात-घूँसों से मारना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़ित के भाई ने पुलिस बुलाई और पीसीआर वैन ही उन्हें हिंदूराव अस्पताल लेकर गई।

सिख दंगे पर प्रस्ताव: वापस लिया जाए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का 'भारत रत्न' : दिल्ली विधानसभा में आप विधायक

Jarnail Singh
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत में सोनिया गाँधी की सलाहकार परिषद् के रहे सदस्यों द्वारा गठित आम आदमी पार्टी भी लगता है, मोदी के इस अभियान में सम्मिलित हो गयी है। 
दिल्ली के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 1984 में सिख विरोधी दंगे भड़काने के आरोप में दोषी सिद्ध होते ही आप पार्टी में कांग्रेस के विरुद्ध आवाज़ बुलंद होनी स्वाभाविक है। 
यही कारण है कि आम आदमी पार्टी में इन दिनों राजीव गांधी को लेकर विरोधी स्वर सुनाई दे रहे हैं। आम आदमी पार्टी के एक विधायक का कहना है कि राजीव गांधी से उनका भारत रत्न पुरस्कार वापस लिया जाना चाहिए। इसके पीछे की वजह साल 1984 में हुआ सिखों का कत्लेआम बताई जा रही है। पीटीआई की खबर के मुताबिक दिसम्बर 21 को दिल्ली विधानसभा में राजीव गांधी का भारत रत्न वापस लिए जाने संबंधी प्रस्ताव दिल्ली विधानसभा में पारित भी हो गया। 
इस प्रस्ताव को आम आदमी पार्टी के विधायक जनरैल सिंह ने विधानसभा में पेश किया। खबरों के अनुसार यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया है। प्रस्ताव में यह बात कही गई कि दिल्ली सरकार की ओर से गृह मंत्रालय को कड़े शब्दों में यह लिख कर दिया जाना चाहिए कि राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के सबसे भयानक जनसंहार के पीड़ितों के परिवार और उनके अपने न्याय से वंचित हैं।’View image on Twitter
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Jarnail Singh,AAP MLA: Delhi Assembly today declared 1984 anti-Sikh riots as worst genocide in the history of India’s national capital. In a resolution that has been passed today we have demanded from the Centre that Bharat Ratna should be withdrawn from Former PM Rajiv Gandhi.
राजीव गांधी की मां और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत के बाद देश की बागडोर राजीव गांधी के हाथ में आई थी। इस दौरान हुए दंगों में सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में देश भर में मारे गए थे। साल 1991 में राजीव गांधी को भारत रत्न पुरस्कार दिया गया था।
 'आप' विधायक जनरैल सिंह ने कहा, 'दिल्ली विधानसभा ने साल 1984 के सिख विरोधी दंगे को राजधानी के इतिहास का सबसे बर्बर नरसंहार करार दिया है। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वह राजीव गांधी को दिया गया भारत रत्न पुरस्कार वापस ले।'
Lines about Late Rajiv Gandhi were not part of resolution placed before house and distributed to the members.
One MLA in his handwriting proposed an addition/amendment about Late Rajiv Gandhi.
Amendments cannot be passed in this manner.
आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने इस बारे में ट्वीट करते हुए लिखा कि फिलहाल राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने संबंधी प्रस्ताव पास नहीं हुआ है। एक विधायक की ओर से प्रस्ताव में इस बात को शामिल किए जाने के लिए कहा गया था लेकिन यह संशोधन इस तरह पास नहीं किया जा सकता है।
प्रस्ताव के अनुसार राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी की मौत के बाद विवादित बयान देकर सिख दंगों को भड़काया था। इसके बाद AAP के विधायक ने मीडिया से बात कर इसकी पुष्टि भी की थी। जरनैल सिंह ने कहा था, 'राजीव गांधी के खिलाफ इस प्रस्ताव में कहा गया है कि दिल्ली सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से मांग करती है कि केंद्र सरकार राजीव गांधी को दिए गए अवार्ड को वापस ले, क्योंकि यह भारत के इतिहास में सबसे खराब "नरसंहार" था। इसके पीड़ितों के परिवारों को अभी तक न्याय नहीं मिल सका है और इसे बार-बार टाल दिया जाता है। बता दें कि 1991 में राजीव गांधी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।' 
Related imageप्रस्ताव का विरोध करने पर विधायिका अलका लाम्बा निष्कासित 
अलका लांबा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिये गये ‘भारत रत्न’ सम्मान को वापस लेने की मांग संबंधी विधानसभा में पेश कथित प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वह विधायक पद से इस्तीफ़ा देने जा रही हैं। टाइम्स नाउ से बात करते हुए चांदनी चौक से आप विधायक अलका लांबा ने कहा, 'मैं पार्टी के प्रस्ताव से सहमत नहीं थी, इसलिए यह ने यह निर्णय लिया। पार्टी बैक फुट पर थी। मैं इस बात के लिए सहमत नहीं थी कि राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिया जाए। मैं अपने स्टैंड पर कायम रहूंगी चाहे इसका मुझे कोई भी परिणाम भुगतना पड़े।'
अलका लांबा ने आगे कहा, 'केजरीवाल चाहते थे कि मैं इस्तीफा दूं। मैं उनकी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीती थी, इसलिए मैं इस्तीफा दे रही हूं।' यहीं नहीं अलका ने ट्वीट कर भी कहा, 'आज दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव लाया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी को दिया गया भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिए, मुझे मेरे भाषण में इसका समर्थन करने के लिये कहा गया, जो मुझे मंजूर नहीं था, मैंने सदन से वॉकआउट किया। अब इसकी जो सजा मिलेगी मैं उसके लिये तैयार हूं।’View image on Twitter
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आज @DelhiAssembly में प्रस्ताव लाया गया की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी को दिया गया भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिये,
मुझे मेरे भाषण में इसका समर्थन करने को कहा गया,जो मुझे मंजूर नही था,मैंने सदन से वॉक आउट किया।
अब इसकी जो सज़ा मिलेगी,मैं उसके लिये तैयार हूँ।
इससे पहले लांबा ने पीटीआई से कहा कि किसी व्यक्ति को किसी एक कार्य के लिये भारत रत्न नहीं मिलता है। देश के लिए जीवन पर्यन्त उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह सम्मान दिया जाता है। इसलिए किसी एक वजह से भारत रत्न वापस लेने की बात का समर्थन करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा, 'राजीव जी ने देश के लिए क़ुर्बानी दी है, इस बात को नहीं भुलाया जा सकता है।' 
आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने इस बारे में ट्वीट करते हुए लिखा कि फिलहाल राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने संबंधी प्रस्ताव पास नहीं हुआ है। एक विधायक की ओर से प्रस्ताव में इस बात को शामिल किए जाने के लिए कहा गया था लेकिन यह संशोधन इस तरह पास नहीं किया जा सकता है।

Related imageआप में घमासान, अलका लांबा की छुट्टी के साथ सोमनाथ भारती भी हटाए गए

आम आदमी पार्टी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के भारत रत्न वापस लेने का प्रस्ताव दिल्ली विधानसभा में पारित होने के बाद,अब एक नया मोड़ सामने आया है। AAP की विधायक अलका लांबा की पार्टी से छुट्टी कर दी गई है। वहीं सोमनाथ भारती को भी प्रवक्ताओं के पैनल से हटा दिया गया है। जबकि विधायक जरनैल सिंह पर भी कार्रवाई करने किए जाने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, अलका इस प्रस्ताव के खिलाफ थीं और नहीं चाहती थीं कि राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग की जाए।
वहीं सोमनाथ भारती कुछ अलग ही कहते नजर आ रहे हैं। सोमनाथ भारती ने ट्वीट कर लिखा कि ऐसा कोई बिल विधानसभा में पारित ही नहीं हुआ। हालांकि वह यह मानते हैं कि इसकी पेशकश उन्होंने की थी, लेकिन उनके अनुसार यह प्रस्ताव का मूल हिस्सा नहीं बनी, न इसपर कोई वोटिंग हुई।
सोमनाथ भारती ने लिखा, 'लेजिसलेटिव प्रोसेस में किसी भी प्रस्ताव पर हर विधायक अपने विचार को रखते हुए मूल प्रस्ताव में अपने विचार को जोड़ने की मांग या प्रस्ताव से किसी लाइन के साथ राजी ना होते हुए उसे प्रस्ताव से हटाने की मांग रख सकता है, लेकिन जब तक उस विधायक का जोड़ने घटाने के प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं होती तब तक वह मूल प्रस्ताव का हिस्सा नहीं बनता है। मेरा सुझाव सदन में माननीय अध्यक्ष महोदय ने वोटिंग के लिए रखा ही नहीं तो उस पर वोट कहां से होती इसी कारण मेरा सुझाव मूल प्रस्ताव का हिस्सा बना ही नहीं।'
लेकिन जब तक उस विधायक का जोड़ने घटाने के प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं होती तब तक वह मूल प्रस्ताव का हिस्सा नहीं बनता है। मेरा सुझाव सदन में माननीय अध्यक्ष महोदय ने वोटिंग के लिए रखा ही नहीं तो उस पर वोट कहां से होती इसी कारण मेरा सुझाव मूल प्रस्ताव का हिस्सा बना ही नहीं।...2/2
विवाद कॉपी को लेकर है और मामला सामने आने के बाद AAP इस मामले से खुद को दूर करने का ठिकाना ढ़ुंढ़ रही है। इन दो विधायकों के अलग-अलग बयान के बाद से यह तो पता चल गया है कि AAP में आपस में ही राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग को लेकर मतभेद हैं। अलका द्वारा अपलोड किए गए प्रस्ताव की कॉपी में साफ-साफ इसको पास होने को लेकर लिखा गया है, जबकि सोमनाथ भारती इससे इनकार कर रहे हैं। AAP विधायक सौरभ भारद्वाज भी सोमनाथ भारती से सहमत दिख रहे हैं। भारद्वाज ने कहा है कि एक विधायक ने खुद से इसमें यह बात लिख दी, जबकि यह  मूल प्रस्ताव का हिस्सा थी ही नहीं।