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राजेश पायलट ने सोनिया को दी थी चुनौती, अब बेटे सचिन ने राहुल के सामने ठोका खम

पहले राजेश पायलट ने सोनिया को दी चुनौती, अब बेटे सचिन ने राहुल के सामने ठोका खम
कांग्रेस पार्टी को 11 दिसंबर को आए चुनाव नतीजों में आखिरकार वह जीत मिल गई जिसके लिए पार्टी लंबे समय से तरस रही थी. एक ऐसी जीत जिससे पार्टी की सूखती धान में पानी पड़ा. लेकिन जीत के साथ ही महत्वाकांक्षाएं भी मुंहजोर होने लगीं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लंबी मंत्रणा के बाद मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री न बनने के लिए मना लिया, लेकिन वही बात राजस्थान में सचिन पायलट को समझानी कठिन हो रही है.
राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने अंगद की तरह पांव जमा रखा है. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जादू खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है. अगर पूरे मामले को गौर से देखें तो अब तक इतना साफ है कि विधायक दल ने फैसला करने का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को दे दिया है. लेकिन राहुल गांधी अपना फैसला गहलोत और पायलट को मनवा नहीं पा रहे हैं. सचिन पायलट का कहना है कि पिछले चार साल से प्रदेश अध्यक्ष के नाते उन्होंने राज्य में मेहनत की है. इस जीत में उनकी मेहनत का बड़ा हाथ है. इसलिए मुख्यमंत्री उन्हें बनाया जाना चाहिए. इस तरह से वे राहुल गांधी के फैसले के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं.
इस समय देश की सियासत में चल रहे घटनाक्रम को दो दशक पुराने घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा सकता है. उस जमाने में जब राहुल की मां सोनिया गांधी कांग्रेस की बागडोर संभाल रही थीं, तब सचिन के पिता राजेश पायलट और ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस के बड़े नेता हुआ करते थे. ये दोनों नेता भी आलाकमान के सामने दंडवत नहीं थे. लेकिन सिंधिया सीनियर और पायलट सीनियर की राजनीति में एक फर्क था, मावधराव कभी आलाकमान के सामने मुखर नहीं हुए, वहीं राजेश पायलट खुलकर सामने आने वाले शख्स बने रहे.
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राजेश पायलट का 9 जून 2000 को एक कार दुर्घटना में निधन हो गया था 
उन्होंने अपने बागी तेवर सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी के सामने दिखाए और कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा. उस समय शरद पवार ने भी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था. ये दोनों नेता केसरी से चुनाव हार गए. जब बाद में कांग्रेस की बागडोर सोनिया गांधी के हाथ में आई तो शरद पवार ने बगावत की और पार्टी छोड़ने को मजबूर हुए. लेकिन राजेश पायलट पार्टी के भीतर रहकर ही सोनिया के मुकाबले में आए. सन 2000 में जब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सोनिया गांधी चुनाव लड़ रही थीं, तो उनके खिलाफ जो नेता बिगुल उठाए थे, उनमें कांग्रेस नेता जीतेंद्र प्रसाद और पायलट मुखर थे.
कांग्रेस नेता जतिन प्रसाद के पिता जीतेंद्र प्रसाद जब 2000 में सोनिया गांधी के सामने चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे तो पायलट ने उनके समर्थन में रैलियां की थीं. बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में राजेश पायलट ने सोनिया गांधी की आलोचना की थी. इस इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में पायलट ने कहा था कि हां, वह प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं.
9 जून 2000 को एक कार दुर्घटना में मृत्यु से पहले राजेश पायलट ने सोनिया गांधी से लंबी मुलाकात की थी. हो सकता है इस मीटिंग में कुछ अच्छी बातें हुई हों. बहरहाल तब जीतेंद्र प्रसाद वह चुनाव हार गए थे.
आज दो दशक बाद इन सारे नेताओं की दूसरी पीढ़ी मैदान में है. सोनिया की जगह राहुल हैं, राजेश की जगह सचिन हैं और माधवराव की जगह ज्योतिरादित्य हैं. दोनों ही नेताओं को मनमोहन सिंह सरकार में राज्य मंत्री बनाया जा चुका है. समय के साथ दोनों नेता राहुल के करीब भी आ चुके हैं. इन सबने मिलकर उसी तरह कांग्रेस को संकट से उबारा है, जैसे दो दशक पहले इनके बुजुर्गों ने मिलकर उबारा था.
लेकिन इस उत्साह के साथ नेताओं की वर्तमान पीढ़ी में अपने बुजुर्गों के तेवर भी आ गए हैं. ज्योतिरादित्य वही कर रहे हैं, जो उनके पिता ने किया था. यानी शांति से समय के साथ चलना. दूसरी तरफ सचिन वही कर रहे हैं, जो उनके पिता राजेश पायलट ने किया था. यानी अपनी बात के लिए खुलकर मैदान में आना. जाहिर है सचिन को पता होगा कि किसी भी दूसरी पार्टी की तरह कांग्रेस में भी इस तरह के विरोध को अच्छा तो नहीं ही समझा जाएगा. इस पूरे घटनाक्रम से सचिन को गद्दी मिले या न मिले, 24 अकबर रोड में उनके नंबर जरूर कम हो जाएंगे.

जिससे मोदी से माफ़ी मांगने को कहा, वही मुख्यमन्त्री पद का दावेदार

राजस्‍थान: CM पद की रेस में है वह नेता, जिससे राहुल गांधी ने PM मोदी से माफी मांगने को कहा!
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कुछ समय पहले राजस्‍थान से ताल्‍लुक रखने वाले वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता डॉ सीपी जोशी को बिहार के राज्‍य प्रभारी पद से हटाया गया तो यही माना गया कि वह पार्टी में हाशिए पर चले गए हैं. उससे पहले वह नॉर्थ-ईस्‍ट के भी पार्टी प्रभारी थे. लेकिन पूर्वोत्‍तर में बीजेपी का दबदबा बढ़ने के बाद उनको कांग्रेस ने वहां के प्रभारी पद से मुक्‍त कर दिया था.
उसके बाद राजस्‍थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सीपी जोशी को उनकी परंपरागत विधानसभा सीट नाथद्वारा से टिकट देकर सबको चौंका दिया. अब उन्‍हीं सीपी जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती पर विवादित बयान देकर चुनावी सीजन में सियासी पारे को चढ़ा दिया है. इसकी बानगी इसी बात से समझी जा सकती है कि राहुल गांधी को इस मामले में हस्‍तक्षेप करना पड़ा.
सोशल मीडिया एवं कुछ चैनलों पर प्रसारित वीडियो के मुताबिक सीपी जोशी ने प्रधानमंत्री मोदी एवं उमा भारती की जाति पर कथित तौर पर सवाल करते हुए कहा कि धर्म पर केवल ब्राह्मण ही बात कर सकते हैं. इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, 'सीपी जोशी जी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है...उन्हें अपने बयान पर खेद प्रकट करना चाहिए.' इसके बाद जोशी ने निष्‍ठावान कार्यकर्ता की तरह पार्टी अध्‍यक्ष की टिप्‍पणी के बाद खेद भी प्रकट किया.
सवाल उठना लाजिमी है कि राजस्‍थान के चुनावी सीजन में कांग्रेस के दो बड़े दिग्‍गजों अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अचानक सुर्खियां बटोरने वाले सीपी जोशी कौन हैं? हालांकि जब सीपी जोशी को राजस्‍थान में नाथद्वारा से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया गया तो दबे स्‍वरों में ये आवाज भी उठी थी कि ब्राह्मण वोटबैंक को साधने के लिए उनके चेहरे को भी आगे बढ़ाया जा रहा है.
राजनीतिक गलियारे में ये भी सुगबुगाहट है कि कांग्रेस यदि चुनाव के बाद सत्‍ता में आती है और सचिन पायलट या अशोक गहलोत में से किसी एक के नाम पर अंदरूनी खेमेबाजी के चलते सहमति नहीं बन पाती तो सीपी जोशी आम सहमति के नेता के रूप में मुख्‍यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं. 
जाति वाले बयान पर जोशी को चुनाव आयोग का नोटिस 
10 साल बाद एक बार फिर चुनावी मैदार में उतरे सीपी जोशी ने गुरुवार को नाथद्वारा में एक चुनावी सभा के दौरान पीएम मोदी और उमा भारती की जाती को लेकर एक विवादित बयान दिया था. अपने बयान में उन्होंने कहा था कि उमा भारती और पीएम मोदी की जाति क्या है? हिंदू धर्म के बारे में केवल पंडित ही जानता है. हालांकि, बाद में अपने इस बयान पर उन्होंने माफी भी मांगी थी लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा समाज मे वैमनस्य फैलाने का आरोप के चलते सीपी जोशी को नोटिस भेजा गया है. 
सीपी जोशी ने नाथद्वार में चुनावी सभा के दौरान कहा था, ‘उमा भारती जी की जाति मालूम है किसी को? ऋतंभरा की जाति मालुम है किसी को? इस धर्म के बारे में किसी को मालूम है तो वो पंडित है. अजीब देश हो गया है. इस देश में उमा भारती लोधी समाज की हैं, वह हिंदू धर्म की बात कर रही हैं. साध्वी जी किस धर्म की हैं? वह हिंदू धर्म की बात कर रही हैं. नरेंद्र मोदी किस धर्म के हैं, हिंदू की बात कर रहे हैं. इन 50 सालों में इनकी अक्ल बाहर निकल गई’.
हालांकि, नवंबर 23 को कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किए गए एक ट्वीट के बाद सीपी जोशी ने अपने इस बयान  के लिए माफी मांगते हुए कहा था, कांग्रेस के सिद्धांतो एवं कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मेरे कथन से समाज के किसी वर्ग को ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं. 

गौरतलब है कि प्रदेश में 7 दिसंबर को मतदान होने वाला है. प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान किया जाएगा. जिसके बाद 11 दिसंबर को मतों की गिन्ती के बाद ही नई सरकार का फैसला होगा और चुनावी समर में कौन सी पार्टी जीतती है. इसका खुलासा होगा. 

मैं राजस्थान की बहू, इटली से आई हैं सोनिया गांधी--वसुंधरा राजे

Vasundhara Rajeअगले महीने होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने टाइम्स नाउ के कार्यक्रम 'फ्रैंकली स्पीकिंग' में मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार से खास बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी जवाब दिया। विरोधियों द्वारा खुद को बाहरी कह जाने पर राजे ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'मैं समझ नहीं पा रही हूं कि वे मुझे बाहरी के रूप में क्यों याद करते हैं, जबकि मैं राज्य की बहू हूं। जबकि विदेश से आने वाले लोगों के बारे में क्या?'
मुख्यमंत्री राजे ने कहा, 'कोई बाहरी नहीं कहता, कुछ लोग ऐसे हैं जो ऐसा कहता है। अपनी बहू को कौन आउटसाइडर कह सकता है। मेरी शादी यहां हुई, मेरे बच्चे यहां पैदा हुए, मेरे पोता-पोती बड़े हुए है। राजस्थान में मेरी जिंदगी कटी है और यहीं कटेगी। मुझे समझ नहीं आता ये आउटसाइडर का टैग कहां से आता है, परंतु मुझे याद है श्रीमती सोनिया गांधी कहीं इटली से नहीं आतीं। मुझे समझ नहीं आता कांग्रेसियों को मेरी याद आ जाती है, जबकि मैं घर की बहू हूं और जो बाहर से लोग आए हैं, वो दिखाई नहीं देते। ऐसा लगता है इटली भी देश का कोई जिला है।'
 
'I can't understand why they remember me as an outsider even though I am State's very own daughter-in-law. What about people who have actually come from abroad?', says CM @VasundharaBJP in conversation with @navikakumar
इसके अलावा राजे ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया कि राजपूत उनसे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि हमने हर किसी के लिए काम किया है। विकास का काम सबके लिए हुआ है। 
2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज की। इसका श्रेय वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से मोदी लहर थी क्योंकि तथ्य यह है कि वह एक बहुत ही करिश्माई नेता हैं।'

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: वसुंधरा के राज से लोग नाराज

vashundhara raje scindiaहिन्दी हॉर्टलैंड के तीन राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान समेत दो और राज्यों मिजोरम और तेलंगाना की जनता अपने नए प्रतिनिधियों का चुनाव करने जा रही है। ईवीएम में मतदाता उम्मीदवारों की किस्मत को बंद कर देंगे जिसका नतीजा 11 दिसंबर को सबके सामने होगा। लेकिन मतदान से पहले मतदाताओं के मूड को टाइम्स नाउ और सीएनएक्स ने भांपने की कोशिश की। इन पांच राज्यों में से एक राजस्थान के मूड के बारे में बताएंगे कि क्या बीजेपी, वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व में सरकार बनाएगी या राजस्थान अपने पुराने रिकॉर्ड को दोहराएगा। राजस्थान के तमाम मुद्दों को समझने से पहले देखते हैं कि सीटों के मामले में सर्वे क्या कह रहा है।
किसका होगा राजस्थान ?
राजस्थान कौन जीत रहा है। इसका जवाब ये है कि सर्वे के मुताबिक कांग्रेस आसानी से सरकार बनाती हुई नजर आ रही है। कांग्रेस स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापस आ रही है, कांग्रेस को 115-120 सीटें मिल रही हैं जबकि पिछली बार केवल 21 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। यानि कांग्रेस को करीब  94 सीटों का इजाफा हो रहा है। लेकिन राजस्थान से बीजेपी के लिए अच्छी खबर नहीं है। वसुंधरा राजे सिंधिया की करारी हार होती नजर आ रही है। बीजेपी को सिर्फ 70 से 80 सीटें मिल रही हैं जबकि पिछली बार 163 सीटों के साथ सरकार बनाई थी। यानि करीब 88 सीटों का सीधे सीधे नुकसान हो रहा है। 
जनमत, मुद्दे और राजस्थान
इसके साथ ही हम ये बताने की बताने की कोशिश करेंगे कि वहां कौन से मुद्दे हावी है। इसमें से भ्रष्टाचार, राफेल, सत्ताविरोधी लहर और स्थानीय मुद्दे अहम हैं। राजस्थान की सिर्फ 40 प्रतिशत आबादी वसुंधरा राजे सिंधिथा सरकार से खुश है जबकि 43 प्रतिशत सरकार के क्रियाकलाप से नाराज है।

राफेल नहीं बन पा रहा मुद्दा
सर्वे से साफ है कि राजस्थान के चुनाव में राफेल मुद्दा नहीं बन पा रहा है। ये बात अलग है कि कांग्रेस अध्यक्ष इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। राजस्थान में बेरोजगारी, विकास, महंगाई, मॉब लिंचिंग, एससी एसटी ऐक्ट मुख्य मुद्दे हैं। लोगों का कहना है कि बेरोजगारी के मुद्दे पर मौजूदा सरकार चुनकर आई थी। लेकिन उस दिशा में कदम नहीं उठाए गए। इसके साथ ही राज्य का चहुंमुखी विकास भी नहीं हुआ।

वैसे जब से केन्द्र में मोदी शासित सरकार एससी एसटी ऐक्ट को लाई है, सवर्णों में भाजपा से नाराजगी हो गयी है। हर कोई अपने भविष्य प्रति चिंतित है। अन्य सरकारों की भाँति वर्तमान सरकार भी आरक्षण को अपनी ठाल बना राज्य कर रही है। "सबका साथ सबका विकास" करने वाले क्यों संविधान के अनुरूप काम करते? क्या हमारा संविधान जनता को विभाजित करने की अनुमति देता है? आखिर कब तक आरक्षण और तुष्टिकरण के नाम पर देश की अन्य जनता के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता रहेगा?
बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा
27 फीसद लोगों के लिये विकास मुख्य मुद्दा है। 35 फीसद लोगों के लिए बेरोजगारी मुख्य मुद्दा है। महंगाई 15 फीसद लोगों के लिए अहम है जबकि मॉब लिंचिंग 10 फीसद लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। एससी-एसटी 6 फीसद लोगों के लिए अहम है जबकि राफेल महज एक फीसद लोगों के लिए पसंदीदा मुद्दा है। लोगों का कहना है कि वसुंधरा राजे सरकार में कहीं न कहीं सांप्रदायिक शक्तियों को बढ़ावा मिला जिसका असर मॉब लिंचिंग के तौर पर देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही एससी एसटी ऐक्ट के मुद्दे पर सरकार की भूमिका लचर दिखाई दी।

मोदी का जादू बरकार
लोगों से ये जानने की कोशिश की गई कि राजस्थान में पीएम मोदी के बारे में लोगों की सोच क्या है। इस सवाल के जवाब में 53 प्रतिशत लोग मोदी सरकार के कामकाज से खुश नजर आए। देश के अगले पीएम के सवाल पर 69 प्रतिशत लोगों ने मोदी को बेहतर बताया जबकि सिर्फ 23  प्रतिशत लोगों की पसंद राहुल गांधी हैं।

चुनाव से पहले अहम सर्वे
CNX ने 8040 लोगों से सवाल पूछा जिसमें पुरुष 4250 और महिला 3790 शामिल हैं। सर्वे 16 अक्टूबर से 29 अक्टूबर के बीच किया गया था। 2013 में कांग्रेस को 33.07 प्रतिशत वोट मिला था इस बार भारी उछाल सीधे 10.43 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।यानि 43.5 फीसदी वोट कांग्रेस को मिलता हुआ नजर आ रहा है। 2013 में BJP को 45.17 प्रतिशत वोट मिला था इस बार भाजपा 4.8 प्रतिशत वोट का नुकसान झेल रहा है। यानि 40 .37 प्रतिशत वोट भाजपा को मिल रहा है। 

दूसरे, वसुंधरा ने आज तक अपने अलावा किसी अन्य को आगे नहीं आने दिया। जिस कारण जनता वसुंधरा से ज्यादा खुश नज़र नहीं आ रही; लेकिन कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही उठा पटक से असमंजस्य की भावना भी पनप रही है। जिस कारण भाजपा की शायद कम सीटों से संतोष कर सरकार बनानी पड़े। जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है।  

गली-गली में शोर है हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है--राहुल गाँधी

Rahul Gandhiराजस्थान दौरे पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित बयान दिया है। पीएम मोदी का नाम लिए बगैर कांग्रेस अध्यक्ष ने भाषण के दौरान 'गली-गली में शोर है हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है' का नारा लगाया। राहुल के इस बयान से विवाद खड़ा हो सकता है। अपने भाषण के दौरान राहुल ने राफेल डील और किसानों की कर्ज माफी के मामले को लेकर भी केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, 'मैं राजस्थान में अधिक से अधिक महिला उम्मीदवार देखना चाहता हूं क्योंकि महिलाओं के बिना भारत में कुछ नहीं हो सकता।' यहीं नहीं राहुल ने आगे कहा, 'हम चाहते हैं कि एक दिन आप अपने फोन के पीछे देखें और उस पर लिखा हो मेड इन राजस्थान, मेड इन दूनापुर।'



Desh ke dil main, Rajasthan ke janta ke dil main nayi awaaz uth rai hai, gali gali main shor hai, Hindustan ka chowkidar chor hai: Rahul Gandhi |



'Pradhan Mantri padh ke liye Rahul Gandhi ke mann mein koi samman nai hai', says Union Minister @smritiirani
राहुल के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मैं तो यह कहूंगी कि प्रधानमंत्री पद के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी जी के मन में कोई भी सम्मान नहीं है। प्रधानमंत्री पद का उल्लेख मैं इसलिए कर रही हूं कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तब भी राहुल गांधी जी ने सार्वजनिक रूप से ऑर्डिनेंस फाड़ा था। तो राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री का तभी सम्मान करते हैं जब गांधी खानदान का कोई वहां बैठा हो। उनको शायद यह बात आज तक नहीं पची कि गुजरात के गांव का एक साधारण परिवार में जन्मा व्यक्ति पिछड़े साढ़े चार साल से देश का प्रधानमंत्री है।'
ज्ञात हो, जब राहुल के पिताश्री राजीव गाँधी पर बोफोर्स में कमीशन खाने का आरोप लगा था, तब शायद दूरदर्शन सम्वाददाता ने चुनाव दिनों में गली-कूचों में बच्चो को "गली-गली में शोर है, राजीव गाँधी चोर है" नारे लगाते दिखाए जाने पर उस सम्वाददाता को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन आज उसी राजीव गाँधी का पुत्र राहुल गाँधी प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के लिए सार्वजनिक रूप से वही नारे लगाते हैं।  
अवलोकन करें:--

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कांग्रेस का हाथ आतंकवादियों के साथ आज पूरे देश में ये कथन सत्य होता दिख रहा है.…
इस दौरान राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' पर भी तंज कसा और कहा, 'हमारी सरकार जनता को बार-बार अपने 'मन की बात' नहीं सुनाएगी बल्कि आपके 'मन की बात' की सुनेगी।'
विशेष विमान से उदयपुर पहुंच राहुल का कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत भी और पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने स्वागत किया। आपको बता दें कि इसी साल के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने है और चुनाव की घोषणा होने से पहले राहुल की राजस्थान में यह पहली रैली है।