वाल्मीकि मंदिर (बाएँ), कॉन्स्टबेल मोहम्मद अजीम (दाएँ), (फोटो साभार : Bhaskar) उत्तराखंड के रुद्रपुर में वाल्मीकि मंदिर के गेट पर मांस के टुकड़े फेंकने के आरोपित पुलिस कॉन्स्टेबल मोहम्मद अजीम को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस शर्मनाक हरकत के बाद SSP अजय गणपति ने आरोपित कॉन्स्टेबल को तुरंत सस्पेंड भी कर दिया है।
पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे कोर्ट में पेश किया है। यह मामला रुद्रपुर के भूत बंगला इलाके का है। आरोप है कि कॉन्स्टेबल अजीम ने कुर्बानी के मांस के टुकड़े मंदिर के मुख्य गेट पर फेंक दिए थे।
🚨 Rudrapur, Uttarakhand
Police Constable Mohammad Azeem has been arrested & suspended after being accused of dumping meat waste near a Valmiki Temple gate in the Bhoot Bangla area following Bakrid
शुक्रवार (29 मई 2026) को जब लोगों ने यह देखा, तो पूरे इलाके में तनाव फैल गया। इस घटना से नाराज वाल्मीकि समाज के लोगों ने मौके पर भारी हंगामा किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विरोध करने पर उनके साथ गाली-गलौज भी की गई।
इसके बाद पीड़ित पक्ष ने कोतवाली पहुँचकर तहरीर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
एक कहावत है "दिल के फफोले जल उठे सीने की आग से, इस घर को आग लग गयी घर के चिराग से" नवजोत सिंह सिद्धू की धर्मपत्नी नवजोत कौर ने मुख्यमंत्री की कुर्सी की कीमत बता "त्याग की देवी" की कांग्रेस में आग लगा दी। जिस आग को बुझाने की कोशिश कर मामले को ख़त्म करने की बजाए निलंबित पार्टी नेता नवजोत कौर सिद्धू को मंगलवार (9 दिसंबर) को कानूनी नोटिस भेजा है। उनसे अपमानजनक टिप्पणी के लिए माफी मांगने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने को कहा। मामला कोर्ट में जाने पर नवजोत अगर गाँधी परिवार के बैंक खातों की CBI, ED या IncomeTax से जांच करवाने की मांग करने पर National Herald से ज्यादा मुसीबत खड़ी हो सकती है।
जिस सोनिया गाँधी को कांग्रेस और इसके अंधभक्त "त्याग की देवी" कहकर खुद गुमराह होने के साथ-साथ देश को भी गुमराह करने वालों को नहीं मालूम की इसी "त्याग की देवी" को अध्यक्ष बनाने के चक्कर दलित अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर पटक देने के बाद से कांग्रेस चुनाव दर चुनाव नीचे जा रही है। अंजाम ये हो गया है कि आज अपनी पहचान बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों के आगे नाक रगड़नी पड़ रही है।
आखिरकार कांग्रेस के भीतर उस सच्चाई का ज्वालामुखी फूट ही गया, जिसे वर्षों से पार्टी राजसी कालीन के नीचे दबाती चली आ रही है। कांग्रेस नेत्री नवजोत कौर सिद्धू ने यह चौंकाने वाला खुलासा कर दिया कि कांग्रेस में “500 करोड़ लगाने वाले को मुख्यमंत्री बना दिया जाता है।” यह केवल एक आरोपित टिप्पणी-मात्र नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर की उस सड़ी हुई राजनीति का एक्स-रे है, जिसे सुनते ही पार्टी नेतृत्व बौखला गया। नवजोत कौर सिद्धू का निलंबन दिखाता है कि कांग्रेस का आलाकमान यह समझने में विफल है कि समस्या सजा देकर या आवाज़ दबाकर हल नहीं होगी। सच को दबाने का परिणाम सिर्फ विवाद को और हवा देना मात्र होता है। पार्टी ने जो कदम उठाया, उसने यह संदेश दिया कि भीतर की गंदगी को सार्वजनिक करने वाले किसी भी सदस्य को खामोश कर दिया जाएगा। इसी से जनता में यह धारणा और मजबूत हुई कि सोनिया-राहुल और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे के लिए पार्टी के भीतर पारदर्शिता और नैतिकता केवल नारे ही हैं।
‘500 करोड़ में मुख्यमंत्री बनाओ’ ने कांग्रेस पार्टी के परखच्चे उड़ाए पंजाब कांग्रेस से अध्यक्ष रहे नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी ने “500 करोड़ में मुख्यमंत्री बनाओ” जैसा विस्फोटक बयान दबे-छुपे अंदाज में नहीं दिया है, बल्कि मीडिया से बातचीत में खुलेआम कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को नंगा कर दिया है। नवजोत कौर का खुला आरोप केवल एक गुस्से भरी टिप्पणी नहीं, बल्कि लम्बे समय से चल रही उस अंदरूनी संस्कृति का खुला प्रदर्शन है, जिसमें पदों की बेंचिंग, लॉबिंग और पैसों-पैसों की राजनीति ने नैतिकता और सार्वजनिक जवाबदेही को निगल लिया है। जब पार्टी ने जवाब देने के बजाय सच बोलने वाली नेता को निलंबित कर दिया, तो उसने साफ कर दिया कि वह दोष क्यों छुपाना चाहती है। क्योंकि खुली जांच और सार्वजनिक बहस से जो परदा टूटेगा वह पार्टी की रही-सही इज्जत के परखच्चे उखाड़कर रख देगा।
असंवेदनशील, गैरजिम्मेदार, नैतिक रूप से बेईमान और भ्रष्ट प्रधान हैं वड़िंग पंजाब कांग्रेस से सस्पेंड किए जाने के बावजूद नवजोत कौर सिद्धू के तेवर और तीखे हो गए हैं। मंगलवार को अमृतसर में नवजोत कौर ने सस्पेंड किए जाने पर प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के लिए कहा- यह कार्रवाई उस प्रधान ने की, जिसे कोई नहीं मानता। राणा गुरजीत भी इसी नोटिस से चल रहे हैं। मेरी हाईकमान से बात हो रही है। हम चोरों का साथ नहीं देंगे। अगर 4-5 लोगों को हटा दें तो फिर देखेंगे। नवजोत कौर ने कहा कि मैं एक असंवेदनशील, गैरजिम्मेदार, नैतिक रूप से बेईमान और भ्रष्ट प्रधान के साथ खड़े होने से इनकार करती हूं। मैं उन सभी भाइयों और बहनों के साथ खड़ी हूं, जिन्हें उसकी अक्षमता और गैरजिम्मेदार व्यवहार से चोट पहुंची है। मैं उसे प्रधान मानने से इनकार करती हूं। मुझे हैरानी है कि मुख्यमंत्री उसे क्यों बचा रहे हैं।
सांसद सुखजिंदर रंधावा ने नवजोत कौर सिद्धू को कानूनी नोटिस भेजा कांग्रेस की पंजाब इकाई के वरिष्ठ नेता और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने निलंबित पार्टी नेता नवजोत कौर सिद्धू को मंगलवार (9 दिसंबर) को कानूनी नोटिस भेजा है। उनसे अपमानजनक टिप्पणी के लिए माफी मांगने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने को कहा। पार्टी के राजस्थान प्रभारी रंधावा ने नोटिस में कौर द्वारा मीडिया में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने संबंधी बयानों पर आपत्ति जताई। कौर कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। कांग्रेस ने नवजोत कौर को मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए 500 करोड़ रुपये वाले उनके बयान के लिए सोमवार (8 दिसंबर) को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया। रंधावा के वकील ने नवजोत कौर को भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा कि झूठे, निराधार और मानहानिकारक बयान दिए, जिनका इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारण और रिपोर्टिंग की गई।
प्रदेश अध्यक्ष पर लगे आरोप का मानवीय और राजनीतिक भार कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी के रूप में रंधावा ने कार्य करते हुए भ्रष्टाचार किया, जिसमें रुपये के बदले पार्टी के टिकट बांटना भी शामिल है। नवजोत ने कहा कि रंधावा के स्मगलरों से संबंध हैं। रंधावा के पास इतनी फार्म लैंड कहां से आई? अपनी पत्नी को तो जिता नहीं सके। रंधावा ने सिद्धू की पीठ में छुरा घोंपा। नवजोत कौर द्वारा सीधे पार्टी अध्यक्ष पर ‘भ्रष्ट’ कहे जाने का अर्थ सिर्फ व्यक्तिगत आरोप नहीं है। यह संगठनात्मक विफलता की गम्भीर चेतावनी है। यदि पार्टी के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति ऐसे आरोपों से मुक्त नहीं है, तो छोटे स्तर पर अनुशासन और जवाबदेही की क्या बात की जाए? ऐसे आरोप पार्टी की छवि के साथ-साथ उसकी विचारधारा की भी जड़ों से हिला देते हैं।
कौर के क्रोध से कर्नाटक के डीके की नाराजगी को मिली आग पंजाब का मामला अकेला ही खतरनाक नहीं है। कर्नाटक में डीके शिवाकुमार की नाराजगी ने इस आग को राष्ट्रीय आकार दे दिया है। शिवाकुमार का आक्रोश यह संकेत देता है कि सत्ता के भीतर निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी केवल पंजाब तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में गहरे स्तर पर मौजूद है। जब एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता यह महसूस करे कि उसे किनारे कर दिया गया या उसके हितानुसार निर्णय नहीं लिये गये, तो वह सार्वजनिक संघर्ष की राह पकड़ लेता है। कांग्रेस के भीतर यह विभाजन जल्दी ही संगठनात्मक टूट में बदल सकता है। सबसे चिंताजनक पहलू पार्टी हाईकमान की मौन नीति है। पत्रकारों और सार्वजनिक मंचों पर जहां विपक्ष पर तीखे बोल फटते हैं, वहीं अपने घर की पोल खुलते ही गूंगी चुप्पी दिखाई देती है। यह चुप्पी नेतृत्व की विफलता की निशानी है।
नैतिकता का पतन, टूटती एकता और बढ़ता आंतरिक असंतोष यदि कांग्रेस के स्वयंभू आलाकमान ने इस समय भी मजबूती से सुधार नहीं किये, तो यह संकट केवल रिपोर्ट-लाइन तक सीमित रहेगा। विविध राज्यों में इसका गंभीर असर दिखेगा। उसके कार्यकर्ताओं का मनोबल और ज्यादा गिरेगा और आगामी चुनावों में उम्मीदवारों को संगठनात्मक कमजोरी का बोझ उठाना कठिन होगा। कांग्रेस का आंतरिक असंतोष बाहर निकलकर सार्वजनिक हो चुका है और यह प्रवाह तेज होने वाला है। कांग्रेस के पास अब दो रास्ते हैं। या तो यह संकट खुली ईमानदारी से स्वीकार कर पार्टी व्यवस्था का पुनर्निर्माण करे, या फिर चुप्पी और दबाव से इसे ठप कर, गिरती साख को और खो दे। नवजोत कौर के आरोपों ने सिर्फ एक बयान नहीं दिया, बल्कि उन्होंने कांग्रेस के भीतर की विषैली हवा को सार्वजनिक कर दिया है। यदि पार्टी ने तुरंत, पारदर्शी और निर्णायक प्रतिक्रिया नहीं दी तो आने वाले वर्षों में कांग्रेस का किरदार और भी घटिया और हाशिये पर चला जाएगा।
इंडिगो और डीजीसीए (फोटो साभार - AI) 2014 में जब से भारत में मोदी सरकार सत्ता में आयी है किसी भी विदेशी मेहमान के आने पर #Toolkit के बिकाऊ देशद्रोही हरकत में आ जाते हैं। CAA विरोध से लेकर अब एयरलाइन्स द्वारा हुए उपद्रव प्रत्यक्ष प्रमाण है। विदेशी मेहमान के भारत आने पर #Toolkit के बिकाऊ देशद्रोही कोई नया मुद्दा लेकर देश का माहौल ख़राब करते हैं। इतना ही नहीं कुछ समय पहले कुछ विदेशी हमारी संसद प्रणाली देखने आये तो संसद में बैठे सफेदपोशी गुंडों ने संसद में कितना हंगामा किया था। और अब जॉर्जिया के कुछ मेहमान आये तो उनके सामने इन सफेदपोशी गुंडों ने हंगामा कर देश को कलंकित करने की कोशिश की। Indigo पर सख्त कार्यवाही करनी होगी। इसको प्रतिबंधित करना होगा। जनता को भी Indigo एयरलाइन का बहिष्कार करना होगा। जिस समस्या पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन के आने पर उपद्रव किया क्या वह पुतिन के जाने के बाद नहीं किया जा सकता था? आखिर इन #Toolkit के बिकाऊ देशद्रोहियों पर मोदी सरकार हिटलर बन कब हंटर चलाएगी? इन उपद्रवियों पर मोदी सरकार को हंटर चलाना होगा। सरकार को इन उपद्रवियों उग्र होना पड़ेगा। जो किसी विदेशी मेहमान के भारत में आने पर उपद्रवियों द्वारा उपद्रव करने से पहले हज़ार बार सोंचे।
भारत की सबसे बड़ी कम लागत वाली एयरलाइन ‘इंडिगो’ पिछले चार दिनों से उड़ान संकट से जूझ रही है। शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को देशभर के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर इंडिगो की उड़ानें रद्द होने की घटनाओं ने यात्री और अधिकारी दोनों को हैरान कर दिया।
दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी घरेलू उड़ानों को आधी रात तक रद्द कर दिया गया, जबकि बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कम से कम 102 उड़ानें रद्द हुईं। यह स्थिति उस दिन आई, जब इंडिगो ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को बताया कि 8 दिसंबर 2025 से उड़ानों को सीमित किया जाएगा ताकि उड़ान हो रही रुकावट को कम किया जा सके।
एयरलाइन ने चेतावनी दी कि अगले दो-तीन दिनों तक विलंब और रद्द होने वाली उड़ानों की स्थिति बनी रहेगी। हालाँकि, एयरलाइन ने यह भी कहा कि फरवरी 10, 2026 तक संचालन पूरी तरह से स्थिर होने की उम्मीद है। इस दौरान, इंडिगो ने नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के तहत रात की उड़ानों में कमी के नियमों से छूट माँगी है। उसने कहा है कि अभी और फ्लाइट्स कैंसिल होंगी और सबकुछ सही होने में करीब 10 दिन का समय लग जाएगा।
#WATCH | On flight services disruption, IndiGo CEO Peter Elbers says, "It will take some time to return to a full normal situation, which we do anticipate between 10-15 December..."
"Dec 5 was the most severely impacted day with the number of cancellations well over 1000. I… pic.twitter.com/J45QLxjV2y
वहीं, DGCA ने कहा है कि वो इस छूट पर विचार करेगी, लेकिन इसके लिए एयरलाइन को विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करना होगा। उसमें पायलट और क्रू की भर्ती, प्रशिक्षण, रोस्टर पुनर्गठन और सुरक्षा योजनाओं का विवरण होगा।
केंद्र सरकार ने इंडिगो की लगातार उड़ान रद्द होने की स्थिति में DGCA के नए FDTL नियमों को तुरंत रोक दिया है और मामले में उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं। जाँच यह पता लगाएगी कि इंडिगो ने नए नियमों की तैयारी क्यों नहीं की और इतनी बड़ी अव्यवस्था कैसे हुई। मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि उड़ान सेवाएँ जल्द सामान्य हों और जहाँ भी लापरवाही मिले, कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद सरकार की प्रतिक्रिया
देश भर में इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने और शेड्यूल बिगड़ने के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने DGCA द्वारा लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को तुरंत प्रभाव से रोक दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुविधा को देखते हुए लिया गया है, ताकि समय पर यात्रा पर निर्भर बुजुर्गों, छात्रों और मरीजों को राहत मिल सके।
सरकार ने साफ कहा है कि FDTL आदेशों को रोका गया है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी किसी भी बात पर कोई समझौता नहीं किया गया है। मंत्रालय ने एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत ऐसे कदम उठाएँ, जिससे उड़ानें जल्द से जल्द सामान्य हो सकें और यात्रियों को काम से काम परेशानी हो।
इसी के साथ, इंडिगो में हुई भारी अव्यवस्था पर सरकार ने उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। जाँच में यह पता लगाया जाएगा की आखिर इतनी बड़ी संख्या में फ्लाइट कैंसिल क्यों हुईं और इंडिगो ने DGCA के नए नियम लागू होने के बावजूद पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की। आरोप है कि जहाँ बाकी एयरलाइंस ने समय रहते नए क्रू और पायलटों की भर्ती की, वहीं इंडिगो ने भर्ती के बिना अपने ऑपरेशन लगातार बढ़ाए, जिसके कारण यात्रियों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
जाँच में इंडिगो के आंतरिक प्लानिंग, स्टाफ मैनेजमेंट और DGCA के नियमों को लागू करने की तैयारी की डीटेल से समीक्षा की जाएगी। सरकार ने कहा है कि जहाँ भी लापरवाही या जिम्मेदारी तय होगी, कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न पैदा हो।
मंत्रालय ने 24×7 कंट्रोल रूम भी बनाया है, ताकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और यात्रियों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके। सरकार ने उम्मीद जताई है कि अगले एक-दो दिनों में उड़ानें सामान्य होने लगेंगी और तीन दिनों के भीतर स्थिति पूरी तरह ठीक कर दी जाएगी।
क्या है समस्या का कारण ?
इस समस्या के पीछे मुख्य कारण DGCA के नए FDTL नियम हैं, जो पायलटों और उड़ान कर्मचारियों के लिए अधिक आराम करने और थकान को कम करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।
इन नियमों के तहत सात दिनों में पायलटों को 36 से 48 घंटे का आराम देना होगा, जिसके कारण लगातार काम करने वाले घंटे कम किए गए हैं। जुलाई और नवंबर 2025 में दो चरणों में लागू हुए इन नियमों के कारण इंडिगो ने अपनी उड़ान योजनाओं का सही अंदाज नहीं लगा सके।
The last two days have seen widespread disruption across IndiGo’s network and operations. We extend a heartfelt apology to all our customers and industry stakeholders who have been impacted by these events. IndiGo teams are working diligently and making all efforts with the…
एयरलाइन ने मान लिया कि उनके पास पर्याप्त पायलट और क्रू नहीं हैं, क्योंकि जिन पायलटों को पहले रोस्टर में ऑन ड्यूटी दिखाया गया था, उन्हें अब उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी। इंडिगो सामान्य परिस्थितियों में हर दिन 2,200 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती है, जिनमें कई रात की उड़ानें शामिल हैं।
एयरलाइन ने यह भी माना कि FDTL नियमों के दूसरे चरण को लागू करते समय उनकी प्लानिंग और गिनती में गलती हो गई। असल में उन्हें जितने पायलट और क्रू की जरूरत थी, वह उनकी उम्मीद से ज़्यादा निकली।
अधिकारिक बयान और एयरलाइन की प्रतिक्रिया
इस पूरे परेशानी के दौरान इंडिगो ने कई बार यात्रियों और अधिकारियों से माफी माँगी है। एयरलाइन ने एक्स पर कहा कि पिछले दो दिनों में उनके नेटवर्क में काफी समस्याएँ देखने को मिला है और उन्होंने प्रभावित सभी यात्रियों से माफी माँगी।
इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स ने कर्मचारियों और यात्रियों से कहा कि सेवाओं और टाइम पर काम करने की व्यवस्था फिर से ठीक करना आसान नहीं होगा, लेकिन उनकी टीम सरकार और DGCA के सहयोग से स्थिति को सामान्य बनाने में पूरी मेहनत कर रही है।
एयरलाइन ने यह भी कहा कि 8 दिसंबर 2025 से उड़ानों की संख्या कम कर दी जाएगी ताकि व्यवधान कम हो सके और संचालन को स्थिर किया जा सके। DGCA ने एयरलाइन को निर्देश दिए हैं कि वह क्रू भर्ती और प्रशिक्षण, रोस्टर पुनर्गठन, सुरक्षा उपायों और तत्काल सुधारात्मक योजनाओं का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करे।
इसके साथ ही एयरलाइन को हर 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। DGCA इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखेगी और यात्रियों की मदद सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटीज को निर्देशित किया गया है।
DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने क्रू मेंबर्स को मिलने वाले साप्ताहिक अवकाश से जुड़ी अपनी पुरानी गाइडलाइन वापस ले ली है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब पायलट और क्रू की भारी कमी की वजह से IndiGo समेत कई एयरलाइनों के संचालन में बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं।
नई अधिसूचना में DGCA ने कहा है कि मौजूदा ऑपरेशनल अव्यवस्था और एयरलाइनों से मिली शिकायतों को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। अब पहले वाला नियम, जिसमें कहा गया था कि क्रू के साप्ताहिक आराम की जगह कोई छुट्टी नहीं लगाई जा सकती, तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है।
इस फैसले का मतलब यह है कि एयरलाइंस अब पायलटों और क्रू की कमी को देखते हुए शेड्यूल को थोड़ी छूट के साथ चला सकेंगी, ताकि उड़ानों का संचालन स्थिर रहे और अव्यवस्था कम हो सके। यह कदम मौजूदा संकट को संभालने के लिए तत्काल राहत देने जैसा माना जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया और व्यापक असर
इसका असर यात्रियों पर सबसे अधिक हुआ है। दिल्ली में अकेले शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को 220 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, बेंगलुरु में लगभग 100 और हैदराबाद में लगभग 90 उड़ानें रद्द हुईं।
यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए, जिसमें लम्बी प्रतीक्षा, भोजन और पानी की कमी और सही जानकारी न मिलने जैसी समस्याओं का जिक्र था। कई यात्री 12 से अधिक घंटे तक हवाई अड्डों पर फंसे रहे।
More than 550 IndiGo flights were cancelled today. Thousands of people are stuck in transit, a father was seen pleading for a sanitary pad for his daughter
इंडिगो ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे उड़ान की स्थिति की जाँच करें, समय से पहले हवाई अड्डे पहुँचें और आवश्यक वस्तुएँ जैसे पानी, स्नैक्स और दवाइयाँ साथ रखें। इस दौरान पायलट संघों ने कहा कि एयरलाइन की प्लानिंग ठीक नहीं थी।
उनके हिसाब से यह पूरा सँकट इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी ने समय पर लोगों की भर्ती नहीं की और स्टाफ को संभालने की रणनीति भी ठीक नहीं थी। एयरलाइन पायलट संघों का कहना है कि FDTL नियमों की तैयारी के दो साल का समय मिला, लेकिन एयरलाइन ने इसे सही तरीके से लागू नहीं किया। हालाँकि नियम सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन एयरलाइन के संचालन और बड़ी संख्या में उड़ानों के कारण समस्या इतनी बढ़ गई।
प्रतीकात्मक फोटो साभार: WION भारत के सिंधु जल समझौता निलंबित करने का असर पाकिस्तान पर दिखने लगा है। भीषण गर्मी में पाकिस्तान के बाँध सूख रहे हैं। इन बाँधों से पानी भी कम छोड़ा जा रहा है। इसके चलते पाकिस्तान में खेती पर असर पढ़ने की संभावना है। पानी कम होने का असर सीधे-सीधे आँकड़ों में भी दिखा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में सिंधु नदी पर बने बाँधों से इस वर्ष कम पानी छोड़ा जा रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें लगभग 15% की कमी आई है। इस बात की पुष्टि आधिकारिक डाटा से हुई है। यह कमी बीते सप्ताह (1 जून 2025-8 जून 2025) में आई है।
सूखे पाकिस्तान के बाँध
पाकिस्तान में सिंधु नदी के सहारे ही खेती और बाकी उद्योग चलते हैं। यह पाकिस्तान के पंजाब समेत बाकी राज्यों की जीवनरेखा सरीखी है। इसी पर कई बाँध भी बनाए गए हैं। अब पाकिस्तान के पंजाब में सिंधु से छोड़ा जाने वाला पानी मात्र 1.24 लाख क्यूसेक रह गया है। पिछले वर्ष यह 1.44 लाख क्यूसेक था।
पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण तरबेला बाँध भी सूख रहा है। तरबेला बाँध में सिंधु नदी का स्तर वर्तमान में 1465 मीटर पर है। यह इसके डेड लेवल 1402 मीटर से थोड़ा ही ऊपर है। किसी बाँध का डेड लेवल वह स्तर होता है, जहाँ से पानी को आगे भेजने के लिए पम्प का इस्तेमाल होता है।
इससे ऊपर के स्तर से पानी स्वयं ही आगे बह जाता है। यह हाल सिर्फ तरबेला बाँध का ही नहीं है बल्कि सिंधु नदी पर ही बने चश्मा बाँध का भी यही हाल है। पाकिस्तान के मियांवाली में बने इस बाँध में पानी का स्तर, डेड लेवल मात्र से 6 मीटर ही ऊपर है। यहाँ डेड लेवल 638 मीटर का है, जबकि यहाँ पानी का स्तर 644 मीटर है।
इस भीषण गर्मी में पानी की लगातार माँग बढ़ने वाली है, ऐसे में जल्द ही पाकिस्तान को और पानी इन बाँधों से छोड़ना पड़ेगा। तब यह डेड लेवल पर जा सकते हैं। पाकिस्तान के एक और महत्वपूर्ण मंगला बाँध में भी यही हाल है। यह झेलम नदी पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बना है।
इसमें भी डेड लेवल 1050 मीटर के निकट ही 1163 मीटर पर पानी आ चुका है। इस पानी की कमी से पाकिस्तान में केवल खेती ही नहीं बल्कि बिजली का उत्पादन भी प्रभावित होने वाला है। पाकिस्तान इन बाँधों से बनने वाली पनबिजली पर बड़े स्तर पर निर्भर है।
खरीफ बुवाई में 21% पानी की कमी
पाकिस्तान का पंजाब और सिंध प्रांत बड़े स्तर पर सिंधु नदी से आने वाले पानी पर निर्भर है, इसी से यहाँ खेती होती है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट कहती है कि 10 जून, 2025 तक चलने वाली खरीफ की बुवाई में 21% पानी की कमी पाकिस्तान को इस वर्ष झेलनी पड़ेगी। यह असर सीधे तौर पर भारत के एक्शन का होगा।
पानी की कमी से परेशान पाकिस्तान अब लगातार भारत से सिंधु जल समझौते पर बात करने की गुहार लगा रहा है। उसने सिंधु जल समझौता निलंबित किए जाने के बाद 4 बार भारत को पत्र लिख कर ऐसा ना करने की गुहार लगाई है। पाकिस्तान ने यह पत्र भारत के जलशक्ति मंत्रालय को लिखे हैं। हालाँकि, भारत अपने स्टैंड पर कायम है।
क्या है सिन्धु जल समझौता?
भारत और पाकिस्तान, एक ही भूभाग का हिस्सा है। भारत से कई नदियाँ बह कर पाकिस्तान जाती हैं। सिंधु नदी तंत्र की नदियाँ पाकिस्तान के पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इन्हीं के पानी के बँटवारे को लेकर किया गया समझौता सिंधु जल समझौताकहलाता है।
यह समझौता वर्ष 1960 में हुआ था। इसके लिए लगभग एक दशक तक बातचीत पाकिस्तान और भारत के बीच चली थी। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तानाशाह अयूब खान ने इसको मंजूरी दी थी। सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 नदियों (व्यास, रावी, सतलुज, सिन्धु, चेनाब और झेलम) के पानी का बँटवारा होता है।
इस जल समझौते के अनुसार, पूर्वी नदियाँ (व्यास, रावी और सतलुज) के पानी पर पूरा अधिकार भारत का है। यानी इनमें बहने वाले पानी का वह किसी भी तरह से इस्तेमाल कर सकता है। भारत इन नदियों पर बाँध बना सकता है, उनकी जलधाराएँ मोड़ सकता है, उनसे नहरें निकाल सकता है और पूरा उपयोग कर सकता है।
सिंधु जल समझौते के अनुच्छेद 2 का खंड (1) कहता है, “पूर्वी नदियों का पूरा पानी भारत के अप्रतिबंधित उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा, सिवाय इसके कि इस अनुच्छेद में अन्यथा अलग से उसके लिए कोई प्रावधान किया गया हो।” पूर्वी नदियों को लेकर पाकिस्तान को दखलअंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है।
इसको लेकर भी अनुच्छेद 2 के खंड (2) में प्रावधान है। इसमें लिखा है, “घरेलू उपयोग को छोड़कर, पाकिस्तान सतलुज और रावी नदियों के पानी को बहने देने के लिए बाध्य होगा और उन स्थानों पर इनके पानी में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होने देगा, जहाँ ये पाकिस्तान में बहती हैं और अभी तक पूरी तरह से पाकिस्तान में प्रवेश नहीं कर पाई हैं।”
दरअसल, यह नदियाँ पाकिस्तान में अंतिम रूप से घुसने से पहले कई बार दोनों सीमाओं के इधर-उधर बहती हैं। पूर्वी नदियों के अलावा बाक़ी पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) के पानी पर पूरा अधिकार पाकिस्तान का है। समझौता के अनुसार, भारत इन नदियों को लेकर कोई भी रोक नहीं लगा सकता।
समझौते का अनुच्छेद 3 का भाग (2) कहता है, “भारत पश्चिमी नदियों के जल को बहने देने के लिए बाध्य होगा, और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा, कुछ परिस्थितियों को छोड़ कर।” यह परिस्थितियाँ घरेलू उपयोग और कृषि उपयोग से जुड़ी हुई हैं।
इस समझौते के तहत इन 6 नदियों के लगभग 70%-80% पानी पर पाकिस्तान को जबकि 20%-30% पानी पर भारत को अधिकार मिलता है। इसको लेकर पहले भी प्रश्न उठाए जाते रहे हैं कि इसका सीधा फायदा पाकिस्तान को मिला है और भारत का इससे कोई लाभ नहीं है।
अब जब भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम हमले के बाद ने यह समझौता रद्द कर दिया है, तो पाकिस्तान में पानी की कमी साफ़ तौर पर दिखने लगी है।
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सरकारी शिक्षिका जेबा अफरोज को पहलगाम आतंकी हमले पर आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने के लिए निलंबित कर दिया गया है। जेबा, चोपन के मालोघाट प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका थी। उसने फेसबुक पर सैन्य अधिकारियों के खिलाफ गलत बातें लिखीं, जिससे लोगों में गुस्सा भड़क गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों ने जेबा अफरोज की शिकायक की, इसके बाद (बेसिक शिक्षा अधिकारी) BSA मुकुल आनंद पांडे ने उसे निलंबित कर दिया है। मामले की जाँच खंड शिक्षा अधिकारी (BEO)को सौंपी गई है। जिन्हें 15 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश हैं।
जेबा अफरोज ने फेसबुक अकाउंट पर पहलगाम हमले के संबंध में आपत्तिजनक पोस्ट को शेयर किया था। इस पोस्ट में सैन्य अधिकारियों को लेकर गलत बातें लिखी गई थीं।
जेबा अफऱोज द्वारा किया गया विवादित पोस्ट (साभार : facebook/zeba afroz)
जेबा अफरोज पर आगरा में मारे गए मुस्लिम युवक के संबंध में विवादित टिप्पणी करने का भी आरोप है।
ASI उमा देवी और भाजपा प्रत्याशी माधवी लता हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के. श्रीनिवास रेड्डी ने भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी के. माधवी लता को गले लगाने वाली ASI को निलंबित कर दिया है। निलंबित की गई ASI सैदाबाद में तैनात थी और उनका नाम उमा देवी है। माधवी लता हैदराबाद लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। उमा देवी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह माधवी लता से हाथ मिलाते और गले लगते हुए दिख रही हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर ने इसका संज्ञान लिया है। पुलिस कमिश्नर ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए उन पर कार्रवाई की और उन्हें निलंबित कर दिया। दरअसल, माधवी लता सैदाबाद थाने की सीमा में चुनाव प्रचार कर रही थीं, तब उमा देवी वर्दी में ड्यूटी पर थीं। इसी दौरान उन्होंने भाजपा उम्मीदवार से मुलाकात की थी।
दरअसल, हैदराबाद के वर्तमान सांसद असदुद्दीन ओवैसी के समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने हैदराबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी इसमें टैग करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के जाँच के जाँच के आदेश दिए और आखिर में उन्हें निलंबित कर दिया।
वास्तव में असदुद्दीन को ऐसे ही विरोधी उम्मीदवार चाहिए जो इसे ईंट का जवाब पत्थर से देने की हिम्मत रखता हो। अगर हैदराबाद के उन मुस्लिम मतदातों ने माधवी को वोट नहीं दिया, जिनके लिए लगभग 8 सालों से काम कर रही थी, माधवी को चिन्ता नहीं करनी चाहिए। असदुद्दीन के गढ़ में सेंध लगा कर अगला चुनाव उतना ही सुगम कर दिया है। दरअसल, इन ओवैसी भाइयों को बीजेपी से ऐसे ही fire brand चाहिए, जो इनकी चुलें हिला दे। माधवी ने तीर छोड़ा कहाँ, और लगा कहां? तेलंगाना को माधवी और राजा सिंह जैसे 2/4 fire brand मिलने पर तेलंगाना में बीजेपी को मात देने वाला नहीं होगा।
#Hyderabad- Saidabad Assistant Sub Inspector of Police- Umadevi has been suspended for hugging BJP candidate @Kompella_MLatha .
Was expecting this,they will cite decorum to be maintained in professional duties..a shake hand is the normal. Anyways could have been warned,a suspension a bit harsh for a casual hug from friendly police. Friendly police is their motto. Let's hope this is revoked.
माधवी लता ने पिछले सप्ताह रामनवमी पर निकाले गए जुलूस में शामिल हुई थीं। इस दौरान उन्होंने सांकेतिक रूप से धनुष पर बाण रखकर छोड़ा था। जिस तरफ वह ऐसा कर रही थीं, उसी तरफ एक मस्जिद था। इसको लेकर विपक्षियों ने हंगामा कर दिया कि उन्होंने मस्जिद पर बाण चलाई है। शेख इमरान नाम के एक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत भी दी।
पुलिस ने माधवी लता के खिलाफ अपने भड़काऊ हाव-भाव से एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया है। यह मामला बेगम बाजार थाने में दर्ज किया गया है। उन पर धारा 295A (जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण कार्यों से किसी धर्म के विश्वासों का अपमान कर भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दरअसल, माधवी लता का यहाँ मुकाबला AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से है। ओवैसी साल 2004 से यानी लगातार चार बार से यहाँ से सांसद हैं। पाँचवीं बार के लिए भी उन्होंने नामांकन करा लिया है। इसके पहले उनके अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी साल 1984 से 1999 तक यहाँ से सांसद रहे। इसके पहले वे यहाँ से विधायक थे।
काकतीय विश्वविद्यालय (फोटो साभार : Sakshi) तेलंगाना के काकतीय विश्वविद्यालय में रैगिंग के आरोप में 81 छात्राओं को हॉस्टल से निलंबित कर दिया गया है। यह घटना शुक्रवार (22 दिसंबर 2023) को सामने आई। घटना की सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और सभी आरोपित छात्राओं को हॉस्टल से निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि इन छात्राओं पर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के अलावा पुलिसिया कार्रवाई नहीं की गई है।
ये मामला तेलंगाना के हनुमाकोंडा का है, जहाँ काकतीय विश्वविद्यालय के पद्माक्षी गर्ल्स हॉस्टल में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का मामला सामने आया था। ये रैगिंग तीन दिनों तक चलती रही थी। इसकी सूचना जब विश्वविद्यालय प्रशासन को मिली, तो सबके होश उड़ गए। इस मामले की जाँच की गई, तो इकोनॉनिक्स, कॉनर्स और जूलॉजी डिपार्टमेंट की 81 लड़कियों के नाम सामने आए।
विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि ये रैगिंग तीन दिनों से चल रही थी, लेकिन जूनियर छात्राओं ने किसी भी एचओडी या स्टल स्टाफ को इसकी जानकारी नहीं दी। जब वे इसे और सहन नहीं कर सके, तो जूनियरों ने रजिस्ट्रार प्रोफेसर टी श्रीनिवास राव के पास शिकायत दर्ज कराई, जिन्होंने बदले में पद्माक्षी छात्रावास में एंटी-रैगिंग समिति के सदस्यों और सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया।
कॉमर्स कॉलेज के प्रिंसिपल एस नरसिम्हाचारी और रजिस्ट्रार ने बाद में पाया कि आरोप सही थे। शनिवार (23 दिसंबर 2023) को सभी जूनियर और सीनियर छात्राओं को एंटी रैगिंग कमेटी और सीनियर प्रोफेसरों के सामने काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया। इसके बाद कार्रवाई की गई।
एंटी रैगिंग पैनल नहीं करेगा पुलिस केस दर्ज
जूनियर छात्रों से पूछताछ के बाद अधिकारियों ने पाया कि तीन विभागों के 81 सीनियर छात्र रैगिंग में शामिल थे। उन्हें समझाया गया और एक सप्ताह के लिए छात्रावास से निलंबित कर दिया गया। प्रोफेसर राव ने पत्रकारों को बताया कि समिति ने आरोपित छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज नहीं करने का फैसला किया है।
बिहार में भी रैगिंग
कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की रैगिंग का मामला नया नहीं है। मुजफ्फरपुर के एस के मेडिकल जीएनएम कॉलेज में भी छात्रा के साथ रैगिंग हुई। इस रैगिंग के कारण वो छात्रा इतनी तनाव में आ गई कि वो किसी से शिकायत भी नहीं कर पा रही। उसके परिजनों ने बताया कि कॉलेज में उससे पूछा जाता था कि उसका बॉयफ्रेंड है या नहीं और अगर है तो कितने हैं। प्रिंसिपल ने पीड़िता की बहन से इस संबंध में शिकायत पाने के बाद कि वो इस मामले में उचित कार्रवाई करेंगे।
बिहार के कैमूर जिले में अपनी अधीनस्थ महिला सब-इंस्पेक्टर का यौन शोषण करने वाला डिप्टी एसपी सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबित DSP का नाम फैज़ अहमद खान है जिस पर महिला दरोगा को अपने साथ सोने का ऑफर देने का आरोप है। इसके बदले आरोपित ने पीड़िता को SHO बनाने का लालच दिया था। निलंबन की यह कार्रवाई सोमवार (18 दिसंबर, 2023) को हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सस्पेंड हुआ DSP फैज़ अहमद खान कैमूर के मोहनिया में SDPO के पद पर तैनात था। कैमूर जिले में ही तैनात एक महिला सब-इंस्पेक्टर ने सीनियर अधिकारियों को फैज़ अहमद के खिलाफ शिकायत दी थी। इस शिकायत में बताया गया था कि फैज़ अहमद खान लगातार उनको व्हाट्सएप्प पर अश्लील मैसेज भेजता था। इन संदेशों में वह पीड़िता को अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने पर SHO के पद पर प्रमोशन का लालच दिया करता था। थोड़े समय बाद पीड़िता सब-इंस्पेक्टर का ट्रांसफर हो गया।
आरोप है कि ट्रांसफर के बावजूद आरोपित DSP महिला दरोगा को परेशान करता रहा और अनैतिक संबंधों का दबाव बनाता रहा। पीड़िता ने अपने आरोपों के साथ DSP के खिलाफ सबूत भी पेश किए थे। पीड़िता दरोगा की शिकायत पर कैमूर जिले के पुलिस अधीक्षक ललित मोहन शर्मा ने जाँच कमेटी गठित की। 3 सदस्यों की इस कमेटी में महिला SDM और महिला थाना प्रभारी शामिल थीं। इस कमेटी ने दोनों पक्षों का बयान लिया और सबूतों की जाँच की। अंतिम जाँच रिपोर्ट में आरोपों को सही पाया गया।
IG शाहाबाद की इसी रिपोर्ट पर आखिरकार DSP फैज़ अहमद खान को सोमवार को सस्पेंड कर दिया। बिहार सरकार के गृह मंत्रालय ने इस बावत नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। आखिरकार कैमूर के SP ने यह जाँच रिपोर्ट शाहबाज़ रेंज के IG नवीन चंद्र झा को भेजी। IG शाहाबाद ने शासन से DSP फैज़ अहमद खान को सस्पेंड कर के कहीं और ट्रांसफर किए जाने की सिफारिश की। बताते चलें कि इससे पहले इसी साल सितंबर माह में कैमूर के ही भभुआ जिले में इंस्पेक्टर राजकुमार पर एक महिला सिपाही ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इन आरोपों के चलते इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया था।
रेवंत रेड्डी के साथ तेलंगाना डीजीपी अंजनी कुमार (चित्र साभार: HT)
चुनाव आयोग ने तेलंगाना के डीजीपी अंजनी कुमार को निलंबित कर दिया है। डीजीपी अंजनी को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है। वह सुबह तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँचे थे।
3 दिसंबर 2023 तेलंगाना समेत चार राज्यों के चुनावों की मतगणना के दौरान ही जब रुझानों में कांग्रेस, तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति को पीछे छोड़ती दिखी तो डीजीपी अंजनी कुमार अन्य कुछ अधिकारियों के साथ रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँच गए और बाकायदा उन्हें गुलदस्ता देते हुए फोटो भी खिंचवाई।
थोड़ी देर में डीजीपी की रेवंत रेड्डी के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग उनकी आलोचना करने लगे। लोगों ने कहा कि एक सेवारत अधिकारी कैसे चुनाव के अंतिम नतीजों को जाने बिना एक दल के मुखिया से मिलने पहुँच गया।
जानकारी के अनुसार, रेवंत रेड्डी के साथ ही राज्य के नोडल पुलिस अफसर संजय जैन और चुनावी खर्चों का देखरेख करने वाले अधिकारी महेश भागवत भी रेवंत रेड्डी के पास मिलने पहुँचे थे।
#UPDATE | The Election Commission of India has suspended Anjani Kumar, Director General of Police Telangana for violation of the Model Code of Conduct and relevant conduct rules: Sources
119 सीटों पर हुए तेलंगाना चुनावों में कांग्रेस 64 सीटों पर आगे है जिनमें से कुछ सीटों पर वह जीत भी चुकी है। इसके प्रदेश अध्यक्ष व तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी, कोडंगल सीट से जीते हैं और एक अन्य सीट कामारेड्डी से हार गए हैं। इस कामारेड्डी सीट पर उन्हें भाजपा के केवी रेड्डी ने हराया है। इसी कमारेड्डी सीट पर अब तक सत्तारूढ़ बीआरएस के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी हार गए हैं।
वहीं, अंजनी कुमार 1990 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वह दिसम्बर 2022 में तेलंगाना के डीजीपी बने थे। इससे पहले हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर रहे थे। उनका नक्सल विरोधी अभियान में काफी अनुभव रहा है, वह इनसे लड़ने के लिए बनाई गई यूनिट ‘ग्रेहाउंड्स’ के मुखिया थे।
फिलिस्तीन के लिए फेसबुक पर चंदा माँग रहा था कांस्टेबल सोहेल अंसारी (साभार- X हैंडल चन्दन शर्मा)
हमास के समर्थन में भारत के भी कई मुस्लिम खुलेआम लिखने और बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक मामला आया उत्तर प्रदेश पुलिस का, जहाँ एक कांस्टेबल को फ़िलिस्तीन के प्रति समर्थन व्यक्त करने और फ़िलिस्तीन के लिए चंदा माँगने के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। आरोपित कांस्टेबल का नाम सोहेल अंसारी है। सोहेल अंसारी ने फेसबुक पर पोस्ट करके फिलिस्तीन के समर्थन के लिए चंदे की अपील की थी।
जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। चन्दन शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह है मोहम्मद सोहेल अंसारी, उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल हैं।
फिलिस्तीनी आतंकवादियों के लिए यह फेसबुक पर पोस्ट करके चंदा माँग रहे थे लेकिन योगी बाबा के रडार पर आ गए, उम्मीद करते हैं आतंकवादी समर्थक का जल्दी ही वर्दी जाएगा और जेल की हवा खाएगा, फिलहाल इस आतंकवादी समर्थक के अब्बू माफी माँगते हुए बोल रहे है कि बच्चा है गलती हो गया।
दरअसल, कांस्टेबल सोहेल अंसारी ड्रोन कैमरा उड़ाने वाली टीम में तैनात हैं मगर फिलहाल वह अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से जाने जा रहे हैं, फिलिस्तीन के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं और लोगों से चंदा माँग रहे हैं!
इस पूरे मामले पर लखीमपुर खीरी जिले के एडिशनल एसपी नेपाल सिंह ने बताया, “इस संदर्भ में जाँच की जा रही है, जाँच में जो भी तथ्य आएँगे, जो भी सही होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”
यह है मोहम्मद सोहेल अंसारी उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल हैं
फिलिस्तीनी आतंकवादियों के लिए यह फेसबुक पर पोस्ट करके चंदा मांग रहे थे लेकिन योगी बाबा के रडार पर आ गए, उम्मीद करते हैं आतंकवादी समर्थक का जल्दी ही वर्दी जाएगा और जेल की हवा खाएगा, फिलहाल इस आतंकवादी समर्थक के अब्बू… pic.twitter.com/NnoWF9FpFN
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने कांस्टेबल सोहेल अंसारी के खिलाफ कार्रवाई की है। मामला सामने आने के बाद एडिशनल एसपी को जाँच का जिम्मा सौंपा गया था। जाँच में आरोपों में दम पाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। फ़िलहाल, सिपाही सोहेल अंसारी को निलंबित कर दिया गया है।
फिलिस्तीन के लिए समर्थन में सोहेल का पोस्ट
कांस्टेबल सोहेल अंसारी ने अपने फेसबुक पर फिलिस्तीन के लिए समर्थन व्यक्त करते हुए और इस उद्देश्य के लिए चंदा देने का अनुरोध करते हुए पोस्ट किया था। सोहेल अंसारी ने अपने फेसबुक पर लिखा था, “HELP SAVE PALESTINE. I REPOST =$1 ALL DONATION ARE DIRECTLY SENT TO…. ADD TO STORY TO HELP SAVE PALESTINE.
इसके बाद कॉन्स्टेबल सोहेल अंसारी की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। एक बार जब पुलिस अधिकारियों को मामले की जानकारी हुई, तो उन्होंने कांस्टेबल के खिलाफ जाँच शुरू की।
वहीं जब इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की तो कांस्टेबल ने दावा किया कि यह उसके बेटे की गलती थी। हालाँकि, उन्होंने अपना पूरा फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दिया है। फ़िलहाल, लखीमपुर के एसपी ने पहले ही मामले की जाँच के आदेश जारी कर दिए थे।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिला प्रशासन ने डॉक्टर एम खान अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इस अस्पताल में जीभ का इलाज कराने के लिए लाए गए बच्चे का खतना किए जाने का मामला सामने आया था। लाइसेंस सस्पेंड किए जाने के बाद अस्पताल में अन्य मरीजों को इलाज के लिए दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। राज्य सरकार को भेजने के लिए जिला प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर रहा है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले की जाँच के लिए कमेटी के गठन की घोषणा की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन अस्पताल के कागजातों की जाँच कर रहा है। प्रथम दृष्टया जाँच कमेटी ने हिंदू बच्चे के खतना मामले में अस्पताल को दोषी पाया है। इसी आधार पर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त किया गया है। 4 सदस्यीय जाँच टीम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हुई है। जाँच टीम में अस्पताल मैनेजमेंट का बयान दर्ज कर चुकी है। 24 जून को जाँच टीम ने पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए। अपने बयान में अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि पीड़ित परिवार ने बच्चे के गुप्तांग का इलाज करने की लिखित सहमति दी थी।
जानकारी के मुताबिक पीड़ित परिवार ने बताया है कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती। उनसे अंग्रेजी के पर्चे पर दस्तख्त लिए गए थे। हस्ताक्षर लेने से पहले डॉक्टरों ने कहा था कि कोई गंभीर बात नहीं है। ऑपरेशन के बाद बच्चे को जब वार्ड में लाया गया तब उन्हें खतने की जानकारी मिली। पीड़ित परिवार ने अस्पताल पर साजिश रचकर बच्चे का खतना करने का आरोप लगाया है।
बारादरी थाना क्षेत्र में हरिमोहन यादव ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर जावेद ने उनके बच्चे की जीभ का इलाज करने के बहाने खतना कर दिया। 23 जून को बरेली पुलिस मामले की जाँच की जानकारी ट्वीट कर दी थी।
गाली गलौज का ऑडियो वायरल होने पर सब इंस्पेक्टर सस्पेंड (चित्र साभार- @NCIBHQ) उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में एक सब इंस्पेक्टर का ऑडियो वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में पुलिसकर्मी ब्राह्मण और ठाकुर के साथ बनिया समाज को खुलेआम गालियाँ दे रहा है। ऑडियो में खास तौर पर ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया है। आरोपित सब इंस्पेक्टर का नाम दिनेश कुमार दोहरे है जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। 8 जनवरी 2023 को ललितपुर पुलिस द्वारा जानकारी देते हुए बताया है कि मामले में जॉंच बिठा दी गई है।
26 सेकेंड के इस ऑडियो को पत्रकार शुभम शुक्ला ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। वायरल ऑडियो में एक तरफ सब इंस्पेक्टर की तस्वीर है जबकि दूसरी तरफ प्रतीकत्मक चित्र है। ऑडियो में दरोगा ने खुद को SC समुदाय से बताते हुए कहा, “ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया मा$$द होते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा ब्रह्मण।” ऑडियो में दूसरी तरफ वाले व्यक्ति को रजक बताया जा रहा है जो दरोगा की बातों में हाँ में हाँ मिलाता सुनाई दे रहा है।
ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया बहुत मादर.... हैं, खासकर ब्राह्मण. ललितपुर जनपद के मडावरा तहसील में तैनाती SI का ऑडियो वायरल. सोचिए कैसी-कैसी मानसिकता के लोग हैं, इनसे क्या न्याय मिलता होगा लोगों? pic.twitter.com/SU4q3hzfNs
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल ऑडियो सब इंस्पेक्टर से एक व्यक्ति की हुई बातचीत का एक अंश है। बताया जा रहा है कि इसे बात करने वाले व्यक्ति ने ही वायरल किया है। ललितपुर के पुलिस अधीक्षक ने आरोपित सब इंस्पेक्टर दिनेश कुमार दोहरे को सस्पेंड करते हुए मामले की जाँच पुलिस सर्किल ऑफिसर (DSP) मडावरा को सौंपी है।
सोशल मीडिया पर नाराजगी
साभार – @NCIBHQ पर आए कमेंट के स्क्रीनशॉट
दरोगा दिनेश कुमार दोहरे का ऑडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। एस पी त्रिपाठी ने लिखा है कि दरोगा दिनेश दोहरे की जॉइनिंग से ले कर अंतिम पोस्टिंग तक जाँच किए गए मामलों की फिर से जाँच करवाई जाए। मनीष तिवारी ने लिखा है कि ऐसी सोच वाले अधिकारी ने सब जातियों के फरियादियों के साथ कैसा न्याय किया होगा। जबकि गौरव कुमार के मुताबिक आरोपित सब इंस्पेक्टर अपने पद पर रहते हुए न्याय नहीं कर सकता।
कर्नाटक के धरवाड़ क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में गुप्त रूप से इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित करने के कारण कार्रवाई की गई है। गडक जिले में स्थित सरकारी स्कूल के हेडमास्टर अब्दुल मुनाफ को निलंबित कर दिया गया है।
कर्नाटक सरकार की ओर इसे इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित करने का किसी तरह का निर्देश नहीं दिया गया था। इसके बावजूद हेडमास्टर ने पैगंबर पर गुप्त रूप से प्रतियोगिता आयोजित की। लोक निर्देश के अतिरिक्त आयुक्त सिद्रमप्पा एस. बिरादर ने बताया, “प्रारंभिक जाँच के दौरान हेडमास्टर के खिलाफ आरोप सही साबित हुए। यही वजह है कि उन्हें निलंबित कर दिया गया है।”
घटना नागवी के सरकारी हाईस्कूल की है। मामले का खुलासा हिंदू संगठन श्रीराम सेना के सदस्यों द्वारा प्रधानाध्यापक के विरोध के बाद हुई। इसके बाद बुधवार (28 सितंबर 2022) को घटना की जाँच शुरू की गई। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि एक शिकायत दर्ज की गई थी और वह शिकायत की एक प्रति राज्य शिक्षा विभाग के उप-निदेशक को भेजेंगे।
#UPDATE | Headmaster Abdul Munaf Lad Saheb Bijapur of a govt school in Gadag dist has been suspended on orders of Dharwad's Addl Commissioner of Public Instruction Sidramappa Srishaila Biradar
The headmaster was heckled by some people over essay competition on Prophet Muhammad
जाँच में पाया गया कि प्रधानाध्यापक मुनाफ ने अन्य शिक्षकों या विभाग को बताए बिना कक्षा 8 के 43 छात्रों को पैगंबर मुहम्मद पर एक पुस्तक देकर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया था। प्रधानाध्यापक अब्दुल मुनाफ ने कथित तौर पर बच्चों को किताबें दीं और इस प्रतियोगिता के लिए 5,000 रुपए के नकद पुरस्कार की भी घोषणा की।
एक अभिभावक शरणप्पा गौड़ा हापलाद ने कहा, “मुझे पता चला कि स्कूल के प्रधानाध्यापक निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित करके और 5,000 रुपए का नकद पुरस्कार घोषित कर छात्रों के दिमाग में इस्लाम थोपने की कोशिश कर रहे थे। लड़के और लड़कियों को 5,000 रुपए जीतने की उम्मीद में निबंध लिखने के लिए कहा गया था।”
उन्होंने छात्रों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए आगे बताया, “हेडमास्टर अब्दुल मुनाफ का इरादा छात्रों का धर्म परिवर्तन कराना था। इसलिए मैंने श्रीराम सेना के कार्यकर्ताओं को सूचित किया। मैं जानना चाहता हूँ कि पैगंबर मुहम्मद पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित करने के पीछे और क्या इरादा हो सकता है।”
राजस्थान के पुष्कर में स्विमिंग पुल में 6 साल के बच्चे के साथ अश्लील हरकत करने के मामले में राज्य सरकार ने निलंबित पुलिस उपाधीक्षक हीरालाल सैनी और महिला कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद पुलिस विभाग ने गत 8 सितंबर 2021 को दोनों को निलंबित कर दिया था।
मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस हेडक्वार्टर ने हीरालाल व कॉन्स्टेबल के मोबाइल रिकाॅर्ड खंगाले थे, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। बताया जा रहा है कि दोनों हर रोज कई बार फोन पर बातें करते थे। एक साल में इनके बीच में 5,500 से ज्यादा कॉल किए गए थे। हीरालाल के मोबाइल की लोकेशन भी ज्यादातर कालवाड़ में मिली थी।
अश्लील वीडियो सामने आने के बाद हीरालाल सैनी को पुलिस हेडक्वार्टर में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन वह पुलिस हेडक्वार्टर में नहीं पहुँचा, बल्कि महिला कॉन्स्टेबल के साथ उदयपुर के होटल में गया था। वहाँ दोनों एक ही कमरे में रुके हुए थे। एसओजी ने राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) अधिकारी हीरालाल सैनी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे 9 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद महिला कांस्टेबल को 12 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था।
10 जुलाई को पुष्कर के रिसॉर्ट में दोनों ने एक अश्लील वीडियो बनाया था। इसमें महिला कॉन्स्टेबल का 6 साल का बच्चा भी था। दोनों बच्चे का बर्थडे मनाने के लिए रिसॉर्ट गए थे। वहाँ दोनों बच्चे के साथ अश्लील हरकतें करते नजर आए थे। यह मामला तब सामने आया जब महिला कॉन्स्टेबल वीडियो को अलग फोल्डर में सेव कर रही थी, तभी वीडियो वॉट्सऐप के स्टेटस पर लग गया था। महिला के भाई-भाभी ने ही उसे फोन कर वीडियो के बारे में बताया था। उसके वीडियो को काफी लोगों ने डाउनलोड कर लिया था। इसके बाद महिला के पति ने उससे तलाक माँगा था।