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मुख्यमंत्री आवास के बाद AAP के दफ्तर में गुंडागर्दी : ‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकारों से बदसलूकी, पीटा, धक्का दिया, कैमरे का स्क्रीन तोडा, गालियाँ बकी… 7 करोड़ रूपए की विदेशी फंडिंग पर पूछा था सवाल

                                       AAP के दफ्तर में 'टाइम्स नाउ' के पत्रकारों से बदसलूकी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार तानाशाह कहने वाला विपक्ष एक बार फिर से बेनकाब हो गया है। दिल्ली की सत्ताधारी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के दफ्तर में मीडिया संस्थान ‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकारों के साथ मारपीट की गई है। ‘टाइम्स नाउ’ के क्रू में शामिल मीडियाकर्मियों को न सिर्फ थप्पड़ जड़े गए, बल्कि उनके साथ धक्कामुक्की भी की गई। असल में आकांक्षा खजुरिया AAP को लेकर ED (प्रवर्तन निदेशालय) की रिपोर्ट को लेकर कवर करने गई थीं।
अब चर्चा है कि 'क्या मुख्यमंत्री आवास के बाद पार्टी ऑफिस को गुंडागर्दी का अड्डा बनाया जा रहा है?' केजरीवाल कब तक सफेदपोशी गुंडागर्दी करते रहेंगे? क्या सुप्रीम कोर्ट ने इसी गुंडागर्दी के लिए केजरीवाल को interim bail दी है? इस गंभीर मुद्दे INDI गठबंधन को खुलकर आना चाहिए। स्वाति मालीवाल कांड से केजरीवाल ने अपनी पार्टी और परिवार को दुर्गति के दरवाजे पर पहुंचा दिया है, क्या INDI गठबंधन केजरीवाल का हाथ थाम अपनी पार्टियों का भी यही हाल करना चाहते हैं। चुनाव आएंगे जायेंगे, कोई जीतेगा कोई हारेगा, लेकिन क्या मोदी विरोध में INDI गठबंधन अराजक पार्टी का साथ देते रहेंगे? इतना तो तय है मतदान समाप्त होते ही, सब अपना-अपना रास्ता नाप लेंगे, चुनाव परिणाम तक कोई नहीं रुकने वाला।   

AAP के ‘चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर’ विकास कुमार ने इस करतूत को अंजाम दिया है। असल में ये पत्रकार विदेशी फंडिंग के मामले में सवाल पूछ रहे थे, जो AAP नेताओं को पसंद नहीं आया। पत्रकारों को गालियाँ भी बकी गईं। साथ ही कैमरा के स्क्रीन को तोड़ डाला गया। ये सब कैमरे में कैद हो गया। बता दें कि AAP को 2014-22 के बीच 7.08 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग मिली है। ED ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस संबंध में रिपोर्ट भी भेज दी है।

 इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) का उल्लंघन किया है। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 का भी उल्लंघन किया गया है। ‘टाइम्स नाउ’ की नाविका कुमार ने बताया कि दूसरी बार ऐसा हुआ है जब उनके चैनल के पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है। उन्होंने बताया कि ‘शीशमहल’ घोटाले को उजागर करने के बाद उनकी पत्रकार भावना किशोर को जेल में बंद कर दिया गया था।

अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक आवास को चमकाने में सरकारी खजाने से 45 करोड़ रुपए खर्च किए थे, वो भी कोरोना महामारी के भीषण दौर में। नाविका कुमार ने अरविंद केजरीवाल से कहा कि वो अपनी पार्टी के गुंडों को नियंत्रण में रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी रिपोर्टर या वीडियो जर्नलिस्ट को छुआ जाएगा तो दिल्ली की पूरी जनता के गुस्सा का सामना AAP को करना पड़ेगा। बता दें कि AAP को कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया तक से फंडिंग आई है।

I.N.D.I. गठबंधन ने किया बहिष्कार, कमल नाथ ने किया सत्कार: कमलनाथ के साथ नविका कुमार को देख भड़का विपक्षी गिरोह

इंडी गठबंधन की बहिष्कृत पत्रकार नविका कुमार के साथ कमलनाथ 
लोकसभा चुनाव-2024 से पहले भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार को हराने के लिए विपक्षी दलों का इंडी गठबंधन (INDI Alliance ) उससे पहले ही टूटता दिख रहा है। आए दिन गठबंधन के दल एक दूसरे के खिलाफ तीखे बयान-बाजी कर रहे हैं।

दल में देश की विपक्षी पार्टियों को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एकजुट करने का झंडा बुलंद करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी से गठबंधन के बाकी दल खार खाए बैठे हैं। इस कड़ी में अब मध्य प्रदेश समाजवादी पार्टी की यूनिट ने कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ के इंडी गठबंधन के बहिष्कृत पत्रकारों में शामिल नविका कुमार के साथ घूमने पर आड़े हाथों लिया।

समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश यूनिट ने अपने एक्स हैंडल पर कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा के हैंडल पर पत्रकार नविका कुमार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ की फोटो के साथ ही इंडी गठबंधन के बहिष्कृत पत्रकारों की लिस्ट के साथ लिखा गया, “इंडिया अलायन्स की मीटिंग में सर्वसम्मति से तय हुआ था कि कुछ पत्रकार जो भाजपा के एजेंडे पर डिबेट्स करते हैं उनके किसी कार्यक्रम में अलायन्स में शामिल दलों के प्रतिनिधि नहीं जाएँगे और ना ही उन्हें बुलाएँगे। अब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता। पूर्व मुख्यमंत्री तथा मध्य प्रदेश कांग्रेस के सर्वेसर्वा कमलनाथ जी इंडिया अलायन्स द्वारा बहिष्कृत पत्रकार को लेकर अपने साथ चुनाव प्रचार में घूम रहे। कांग्रेस पार्टी खुद इंडिया अलायन्स के साथी दलों के साथ ईमानदार नहीं है और कांग्रेस खुद भाजपा के एजेंडे पर काम कर रही।”

I.N.D.I. अलायंस ने गुरुवार, (14 सितंबर, 2023 ) को खुलेआम 14 समाचार एंकरों की एक सूची जारी कर उनके ‘बहिष्कार’ का फैसला लिया था। इनकी लिस्ट इसी दिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई थी। 

अब उसी कांग्रेस के नेता कमलनाथ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले लिस्ट में 9वें नबंर पर शामिल पत्रकार नविका कुमार के साथ चुनाव प्रचार अभियान पर जाते हैं और उनसे बात करते हैं। इससे इंडी गठबंधन के दलों की छाती पर साँप लोटना स्वाभाविक था।

इससे पहले भी चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में सीटों को लेकर नाराज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस पार्टी की छिछालेदार कर चुके हैं। उन्हें यहाँ कांग्रेस ने पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए वादे के मुताबिक 6 सीटें तो छोड़िए, एक भी सीट नहीं दी।

इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा कि अगर उन्हें पता होता कि राज्यों के स्तर पर गठबंधन नहीं है, तो वो कभी इंडी गठबंधन की किसी बैठक में जाते ही नहीं। इसके बाद उनकी पार्टी ने यहाँ अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

यहाँ के प्रदेश प्रभारी व्याजी गोंड ने कहा समाजवादी पार्टी सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की कोशिश कर रही है। अभी तक 31 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया गया है। उधर दूसरी तरफ सभी विपक्षी दलों को बटोर कर लाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का भी कुछ ऐसा ही हाल है।

इस बीच, अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया है कि वो इंडी गठबंधन को परे रखकर उत्तर प्रदेश की 80 में से 65 लोकसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। उन्हें किसी दल के संग-साथ की जरूरत नहीं है।

वहीं जम्मू-कश्मीर से भी इंडी गठबंधन में शामिल दल जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) के भी इसे लेकर बगावती तेवर दिखने लगे हैं। जेकेएनसी के वाइस प्रेजिडेंट उमर अब्दुल्ला भी कांग्रेस नेता कमलनाथ के संग पत्रकार नाविका कुमार को देख अपनी त्यौरियाँ चढ़ा रहे हैं। उन्होंने अपने एक्स हैंडल से तंज करते हुए पोस्ट किया, “एंकरों का बहिष्कार करने वाली एक मूर्खतापूर्ण सूची के लिए इतना ही। मुझे खुशी है कि यह अपनी ही मौत मर गया INDIA गठबंधन।”

खुद को सभी को साथ लेकर चलने वाला नेता बताते हुए बिहारी बाबू नीतीश कुमार ने गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को सीपीआई और वामदलों की पटना में हुई एक रैली के मंच से कांग्रेस पर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि अभी कांग्रेस पार्टी गठबंधन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उसका तवज्जो महज 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है।

नीतीश कुमार का ये बयान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसा ही है। कांग्रेस पर हमलावर होते हुए नीतीश कुमार ने इंडी गठबंधन से बाहर जाने की बात साफ तो नहीं की, लेकिन ये कहा कि वो सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं। इसलिए ही सभी को एकजुट कर रहे हैं।

उन्होंने खुद को सोशलिस्ट का तमगा देते हुए कहा कि सीपीआई से पुराना रिश्ता है। कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट को एक होकर आगे चलना है। अब एक बार पाँचों राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो जाए, उसके बाद इस गठबंधन के भविष्य पर चर्चा होगी।

भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने में सीएम नीतीश कुमार अहम रोल में रहे। उन्होंने भाजपा के खिलाफ सभी दलों को इकट्टा करने में एड़ी चोटी का जोर लगाया था। इसी वजह से पटना की बैठक के बाद मुंबई और फिर बेंगलुरु में बैंठके हुईं।

इस बैठक में ही राहुल गाँधी ने उनसे पूछे बगैर ही गठबंधन का नामकरण I.N.D.I. Alliance कर डाला था। इससे सुशासन बाबू खासे नाराज हुए थे और गठबंधन की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए थे। हालाँकि बाद में साझा बयान जारी कर इस घटना पर लीपापोती करने की कोशिश की गई थी।

यही नहीं एजेंडा के तौर पर शामिल की गई जातीय जनगणना की माँग पर सभी दलों की रजामंदी नहीं थी। इसके बाद इस मुद्दे को भी राहुल गाँधी ने हाईजैक करने की कोशिश की है और वो लगातार इस मुद्दे पर खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं।

वहीं दक्षिण में इंडी गठबंधन का हिस्से डीएमके पार्टी ने सनातन पर उल्टी-सीधी बयानबाजी की। इस पर गठबंधन चुप्पी साधे बैठे रहा। हालाँकि उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए बयान के बाद इंडी गठबंधन की भोपाल की रैली चुनावों की वजह से कॉन्ग्रेस के दबाव में रद्द कर दी गई।

उधर दूसरी तरफ आरजेडी के नेताओं की सनातन और हिंदू विरोधी बयानों पर गठबंधन के सभी दल होठ सिले बैठे रहे। इसी तरह पंजाब से लेकर दिल्ली तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की तनातनी जगजाहिर है। उधर सीएम ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में वामदलों के साथ काम करने में एतराज हैं।

पंजाब पुलिस : तुम्हारी जाति क्या है, दरवाजा खोलकर वाॅशरूम जाओ… : भावना किशोर, महिला पत्रकार

टाइम्स नाउ की महिला पत्रकार भावना किशोर (Bhawana Kishore) को 5 मई 2023 को पंजाब पुलिस ने उनके सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया था। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इन्हें जमानत दे दी है। 9 मई को टाइम्स नाउ की ग्रुप एडिटर नविका कुमार और एंकर सुशांत सिन्हा के साथ बातचीत में हिरासत के दौरान पंजाब पुलिस की प्रताड़ना का जिक्र करते हुए किशोर फूट-फूटकर रो पड़ीं।

भावना ने बताया कि हिरासत के दौरान उनसे दरवाजा खोलकर वाॅशरूम जाने को कहा गया। उनकी जाति को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने बताया, “पुलिस ने बोला रात के एक बजे आपका मेडिकल होगा। आपको मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना है। मुझे कानून का इतना दांवपेंच नहीं पता था। मेरी तबीयत खराब हो रही थी। घबराहट हो रही थी। जो उन्होंने दिया मैंने खाया। ड्राइवर और कैमरापर्सन ने भी थोड़ा सा खाया। मैं बहुत पानी पी रही थी, क्योंकि मैं नर्वस महसूस कर रहा था। जब मैं वॉशरूम गई तो मेरे साथ 2-3 महिला कॉन्स्टेबल भी थीं। पुलिस स्टेशन में बिजली या पानी नहीं था।”

इसके बाद अपनी प्रताड़ना के बारे में बताते हुए भावना रोने लगीं। उन्होंने बताया, “मुझे वाॅशरूम दरवाजा खोलकर जाने को कहा गया। मैंने दरवाजा खोलकर वाॅशरूम किया। मुझे नहीं आई शर्म, क्योंकि उस वक्त मैं इतने प्रेशर में थी…”

पुलिस अफसर ने कहा- बहुत प्रेशर है

भावना ने यह भी बताया कि उन्हें नहीं बताया गया था कि वह गिरफ्तार हो चुकीं हैं। इसलिए वह एक पुलिस अफसर से बार-बार विनती कर रहीं थीं कि उन्हें घर जाने दिया जाए। इस पर पुलिस अफसर ने कहा, “भावना मैं हाथ जोड़कर तुमसे माफी माँगता हूँ। तुमने अब तक बहुत हिम्मत दिखाई है। मेरी दो बेटियाँ हैं। मैं घर जाकर उनसे क्या बोलूँगा मुझे यह नहीं पता। लेकिन मुझे पता है कि मैं अपनी ड्यूटी के साथ ईमानदारी नहीं कर रहा हूँ। भावना तुमने जो खबर चलाई है उसे हटाओ बात करके। ये सरकार है, तुम कभी जीत नहीं पाओगी।”
भावना का दावा है कि पुलिस अफसर ने उनसे कहा था कि उनके ऊपर बहुत प्रेशर है। साथ ही उनसे दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के बंगले को लेकर किए गए खुलासे ‘ऑपरेशन शीशमहल’ को हटाने के लिए कहा था। भावना का यह भी दावा है कि पुलिस ने उनसे और उनके दोनों सहयोगियों से उनकी जाति भी पूछी थी। जब भावना ने उन्हें बताया कि वह ओबीसी वर्ग से हैं तो पुलिस ने उनसे कहा कि नहीं तुम सामान्य वर्ग से हो।
उन्होंने आगे कहा है कि इसके बाद वहाँ मौजूद लोगों में से एक व्यक्ति ने कहा कि उन पर एससी/ एसटी एक्ट लगाने की तैयारी हो रही है। भावना किशोर का यह भी कहना है कि उन्हें पहले कहा गया था कि चाय-पानी के लिए ले जाया जा रहा है। सीएम भगवंत मान के जाने के बाद छोड़ दिया जाएगा। लेकिन फिर सारी चीजें बदल गईं। टाइम्स नाउ का दावा है कि पंजाब सरकार ने यह सब ‘ऑपरेशन शीशमहल’ का बदला लेने के लिए किया।

हाई कोर्ट ने लगाई पंजाब पुलिस को फटकार

टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्टर भावना किशोर की गिरफ्तारी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि भावना और उनके दोनों सहयोगियों की गिरफ्तारी गैर-कानूनी थी। इसके साथ ही कोर्ट ने तीनों को अंतरिम जमानत दे दी थी। आम आदमी पार्टी के एक कार्यक्रम को कवर करने के दौरान इनलोगों की गिरफ्तारी हुई थी। कथित एक्सीडेंट और जातिगत टिप्पणी को लेकर यह कार्रवाई की गई थी।

क्या दिल्ली के समाचार छुपाने के लिए विज्ञापनों से केजरीवाल ने मीडिया को खरीद लिया है? Times Now पत्रकारों का आरोप

मोदी पर मीडिया खरीदने का आरोप लगाने वालों को शायद नहीं मालूम कि मुफ्त की रेवड़ियों के सहारे बने  दिल्ली का मुख्यमंत्री किस तरह चैनलों पर विज्ञापनों की भरमार कर दिल्ली की वास्तविक स्थिति से दिल्ली वालों को कितनी दूर ले गया है। आप चैनलों पर दूसरे राज्यों की स्थिति देख सकते हैं, लेकिन दिल्ली की नहीं, क्यों? कहाँ गए खोजी पत्रकार? क्या भाजपा शासित राज्य में ही पत्रकारिता का जलवा दिखाया जाता है? क्या मीडिया अरविन्द केजरीवाल के इशारे पर ही लीपापोती कर दिल्ली के समाचार दिखाएंगे? अपनी नाकामियों को दूसरों पर थोपने वाला कोरोना पर अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए चैनलों पर अपने विज्ञापनों से अपनी धूमिल छवि को सुधारने का प्रयास कर रहा है। शायद यही कारण है कि लोग केजरीवाल का विज्ञापन आते ही टीवी बंद कर देते हैं।   
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से राजधानी दिल्ली की स्थिति भी बदतर है। लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के विज्ञापनों से सारे न्यूज चैनल्स भरे पड़े हैं। लोग जो भी टीवी न्यूज चैनल खोल रहे हैं, उस पर सीएम केजरीवाल दिख रहे हैं। इसी बीच ‘टाइम्स नाउ’ के कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि इन्हीं विज्ञापनों की वजह से चैनल दिल्ली में कोरोना से हुई बदतर स्थिति को नहीं दिखा रहा है।

कथित रूप से ‘Times Now’ के कर्मचारियों ने टाइम्स ग्रुप के MD विनीत जैन को पत्र लिख कर दिल्ली में कोविड-19 के कवरेज पर आपत्ति जताई है। चैनल के शीर्ष पत्रकारों राहुल शिवशंकर, नविका कुमार और पद्मजा जोशी का भी जिक्र पत्र में है। ऑपइंडिया ने एक विश्वसनीय सूत्र के माध्यम से इस पत्र की एक प्रति प्राप्त की है। साथ ही पत्रकारों के बीच ये पत्र खासा वायरल हो रहा है। हालाँकि, हम इसकी सत्यता की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते।

साथ ही ‘Times Now’ ने भी ऐसे किसी पत्र को लेकर अनभिज्ञता जताई है। इस पत्र में पत्रकारों ने पूछा है कि क्या AAP सरकार द्वारा दिए जाने वाले विज्ञापनों के कारण दिल्ली में कोरोना संक्रमण के कवरेज पर असर पड़ रहा है? इसमें लिखा है, “हम अपने चैनल पर आने वाले विज्ञापनों में उस व्यक्ति को देख कर चकित हैं, जो आज दिल्ली की बदतर स्थिति के लिए जिम्मेदार है।”

इसमें आगे लिखा है, “हम उस व्यक्ति का नाम लेने से भी नहीं हिचकिचाएँगे। उसका नाम अरविंद केजरीवाल है। अरविंद केजरीवाल ने हमारे चैनल को आपत्तिजनक विज्ञापनों से भर दिया है, ताकि हम दिल्ली में उनके द्वारा किए गए कोरोना के चौतरफा घोर कुप्रबंधन पर सवाल न खड़े करें। हम जानते हैं कि चैनल के लिए विज्ञापन महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या हमें उस व्यक्ति से करदाताओं के पैसे लेने चाहिए, जिसने उन्हीं करदाताओं से पैसों का इस्तेमाल 2015-19 में एक भी अस्पताल बनवाने के लिए नहीं किया?”

चैनल के कर्मचारियों ने लिखा कि ये कारोबार की बात नहीं है, बल्कि दिल्ली की जनता और उनकी समस्याओं की बात है। हमें हमेशा जनता और उनकी समस्याओं के बारे में सोचना चाहिए। कर्मचारियों ने पूछा है कि क्या उस व्यक्ति के खिलाफ जिसके खराब कार्यप्रणाली के चलते सैकड़ों लोगों की जानें चली गई हों सिर्फ इसलिए नरमी दिखाना उचित है, क्योंकि उसने हमें विज्ञापन देने में बड़ा खर्च किया है?

‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकारों ने ये भी याद दिलाया कि किस तरह से अरविंद केजरीवाल सारी चीजों के लिए अब किसी और पर दोष डाल रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इसलिए माधव जैसे पत्रकार दिल्ली सरकार को बचाते हुए इन सबका दोष किसी और पर डाल रहे हैं? यहाँ माधव का तात्पर्य वहाँ के सीनियर एडिटर माधवदास से हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब कोई केजरीवाल की गलती याद दिलाता है तो माधव उस व्यक्ति को सड़कों पर भी गाली देते हैं और लाइव टीवी पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।

पत्रकारों ने दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी की भी याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कुछ नहीं किया और ऊपर से दिल्ली की सीमा पर पहुँचे ऑक्सीजन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए भी कोई प्रयास नहीं किया। पत्रकारों ने कहा कि दूसरी तरफ श्रेयसी उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ‘ऑक्सीजन वॉर रूम’ वाला ट्वीट रीट्वीट कर रही थी, क्या हमारा चैनल AAP सरकार की प्रोपेगेंडा मशीनरी बन गई है?

पत्रकारों ने ये भी आरोप लगाया कि मीडिया के ही कुछ लोग गंभीर पत्रकारिता करने की जगह विभाजनकारी कार्य कर रहे हैं। प्रशांत कुछ मामलों में राहुल गाँधी के विचारों को आगे बढ़ाने में लगे हैं तो कुछ मुद्दों पर तेजस्वी यादव का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या हमारे पत्रकार गुंडाराज और भ्रष्टाचार के सिरमौरों के किराए के लोग हो गए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि हमारे पत्रकार जनता की आवाज़ बनने की बजाए इस त्रासदी के काल में बेचैनी, घृणा और झूठा एजेंडा फैला रहे हैं।

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हालाँकि, ‘टाइम्स नाउ’ ने ऑपइंडिया को दी गई प्रतिक्रिया में इसे एक फेक, आधारहीन और द्वेषपूर्ण प्रयास बताया है, ताकि चैनल को बदनाम किया जा सके और उसकी छवि को नुकसान पहुँचाई जा सके। चैनल ने कहा कि उसे ऐसा कोई पत्र मेल से प्राप्त नहीं हुआ है। उसने कहा कि ये खुले और पारदर्शी संस्कृति वाला चैनल है, जहाँ लोग अच्छे उद्देश्य से साथ मिल कर काम करते हैं। चैनल ने अपनी सालों की बनाई प्रतिष्ठा की भी बात की है।