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तेलंगाना : कांग्रेस सरकार के ‘नंगा नाच’ पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, कहा- हम शक्तिहीन नहीं


सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को BRS (भारत राष्ट्र समिति) के विधायकों की अयोग्यता की याचिकाओं पर नोटिस जारी करने में लगभग 10 महीने लगाने पर तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष से सवाल पूछा है। ये विधायक BRS छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बयान की आलोचना की और उसे 10वीं अनुसूची का मजाक बताया।

कांग्रेस नेता एवं तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में कहा था कि विधायकों के पाला बदलने पर भी उपचुनाव नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मुख्यमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। दरअसल, संविधान की 10वीं अनुसूची दल बदलने से संबंधित अयोग्यता के प्रावधानों से संबंधित है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता से संबंधित आवेदिन पर निर्णय लेने में देरी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। एक याचिका में तीन विधायकों की अयोग्यता से संबंधित तेलंगाना हाई कोर्ट के नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। वहीं, दूसरी याचिका में दल बदलने वाले सात अन्य विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई थी।

दल बदलने वाले विधायकों को लेकर BRS ने हाई कोर्ट में याचिका दी थी। इस याचिका पर सुनवाई करने के बाद तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 9 सितंबर 2024 को विधानसभा सचिव को निर्देश किया था। इस निर्देश में कहा गया था कि वे विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष रखें तथा चार सप्ताह के भीतर सुनवाई निर्धारित करें।

इसको लेकर कांग्रेस ने अपील की। इसके बाद पिछले साल नवंबर में हाई कोर्ट की दो जजों की पीठ ने सुनवाई की। इस सुनवाई में दो जजों की खंडपीठ ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को तीनों विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर ‘उचित समय’ के भीतर फैसला करना चाहिए। उचित समय को लेकर स्पष्ट नहीं था। इसको लेकर BRS ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि पहली अयोग्यता याचिका 18 मार्च 2024 को दायर की गई थी। उसके बाद 2 अप्रैल और 8 अप्रैल को दो और याचिकाएँ दायर की गईं। हाई कोर्ट में याचिका 10 अप्रैल 2024 को दायर की गई थी। रोहतगी ने कहा, “क्या यह उचित समय तक इंतजार करना है?”

अयोग्यता याचिकाओं पर नोटिस देने में इतना समय लगने के सवाल पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह मामला हाई कोर्ट में लंबित था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश मुकुल रोहतगी से पूछा, “तो फिर जब मामला हमारे संज्ञान में था, तब आपने नोटिस क्यों जारी किया? क्या हमें अब अवमानना ​​का नोटिस जारी करना चाहिए?”

इस पर रोहतगी ने कहा कि हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका 15 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी और स्पीकर ने अगले दिन नोटिस जारी किया था। पीठ ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि जब मामला हाई कोर्ट में था तो स्पीकर ने कार्रवाई करने से परहेज किया, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा तो उन्होंने कार्रवाई की।

जस्टिस गवई ने कहा कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने सिर्फ 4 सप्ताह के भीतर शेड्यूल तय करने का निर्देश दिया था, ना कि उस समय सीमा में पूरे मामले का निपटारा करने के लिए कहा था। सर्वोच्च अदालत ने पूछा, “यदि अध्यक्ष कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो इस देश की अदालतें, जिनके पास न केवल शक्ति है, बल्कि संविधान के संरक्षक के रूप में उनका कर्तव्य भी है, शक्तिहीन हो जाएँगी?”

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायिक समीक्षा केवल निर्णय की सत्यता की जाँच करने के लिए लागू होती है। उन्होंने कहा, “चूँकि इस मामले में कोई निर्णय नहीं हुआ है तो क्या न्यायालय को सिर्फ खड़े होकर लोकतंत्र के नंगा नाच को देखते रहना चाहिए?” कोर्ट ने कहा कि उसके निर्देशों की अवहेलना की जाती है तो वह शक्तिहीन है।

अदालत ने सवाल किया, “हम शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का सम्मान करते हैं, लेकिन जब कोई संवैधानिक प्रावधान किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए बनाया जाता है तो क्या अदालतों को उसे निरस्त करने की अनुमति देनी चाहिए?” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं था।

इससे पहले 25 मार्च को बीआरएस नेता पाडी कौशिक रेड्डी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम ने तर्क दिया था कि मुख्य मुद्दा यह है कि क्या संवैधानिक न्यायालय के पास संवैधानिक प्राधिकरण को अपने आदेश के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य करने का अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि न्यायालयों को ऐसी शक्ति से वंचित करना ‘न्याय की पूर्ण विफलता’ होगी।

इस मामले में 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार और अन्य से जवाब माँगा था, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि समय पर निर्णय लेना महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने ऐसी स्थिति के खिलाफ चेतावनी दी थी कि ‘ऑपरेशन सफल हो जाए, लेकिन मरीज मर जाए’ का कोई फायदा नहीं है। कोर्ट ने विधायक दानम नागेंदर, वेंकटराव तेलम और कडियम श्रीहरि से भी जवाब माँगा था।

तेलंगाना : थल्ली की साड़ी का रंग किया हरा, सिर से मुकुट भी हटाया : कांग्रेस बदल रही राज्य की देवी की पहचान या कर रही हिंदू संस्कृति से किनारा?

                                तेलंगाना थल्ली (पुराना और नया स्वरूप) (फोटो साभार: nalagondaspeed/X)
तेलंगाना राज्य आंदोलन के दौरान संघर्ष की प्रमुख पहचान मानी जाने वाली ‘तेलंगाना थल्ली’ को 
कांग्रेस की रेवंत रेड्डी सरकार ने बदल दिया। तेलंगाना थल्ली की सचिवालय में नई मूर्ति लगाई गई जिसमें पहले की तुलना में कई बदलाव थे। पहले की मूर्ति जहाँ तेलंगाना की हिन्दू संस्कृति और त्यौहारों से मेल खाने वाली थी तो वहीं नई मूर्ति में कई निशानियों को बदल दिया गया है। कांग्रेस के सरकार के इस कदम के चलते काफी लोग नाराज हैं। उन्होंने इसे तेलंगाना की पहचान मिटाने का प्रयास बताया है।

कौन हैं ‘तेलंगाना थल्ली’?

तेलंगाना यानी तेलुगु बोलने वालों का राज्य और थल्ली का मलतब माँ। यानि तेलंगाना थल्ली का मलतब राज्य की माँ हैं। तेलंगाना थल्ली को सबसे पहले 2003 में सामने लाया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि 2003 में सबसे पहले तेलंगाना थल्ली की परिकल्पना की गई थी। तब तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन तेजी पर था।
निर्मल जिले के रहने वाले एक कलाकार ने तेलंगाना थल्ली की कल्पना की थी। तेलंगाना राज्य के लिए लड़ाई के दौरान आंदोलनकारियों ने अपनी पहचान के अलग निशान बनाने चालू कर दिए थे। 2003 में लाई गई तेलंगाना थल्ली की छवि में जिन देवी की कल्पना की गई थी, उन्होंने एक गुलाबी रंग की रेशम की साड़ी पहनी हुई थी।
गुलाबी रंग भी तेलंगाना राज्य आंदोलन के साथ जुड़ा रहा है। थल्ली के एक हाथ में मक्के की एक बाली थी। उनके हाथ में एक बर्तन है, जिसमें फूल रखे हैं। दरअसल, यह फूलों वाला बर्तन तेलंगाना के एक त्यौहार से संबंध रखता है। इसे बथुकम्मा त्यौहार कहते हैं।
यह त्यौहार तेलंगाना में नवरात्रि के साथ ही मनाया जाता है, जिसमें शक्ति और प्रकृति की पूजा की जाती है। इसी त्यौहार के दौरान फूलों की पूजा भी होती है। तेलंगाना थल्ली के सर पर मुकुट भी दिखाया गया है। उनके कमर से लेकर शरीर के बाकी अंग पर भी कई सोने के जेवर हैं।
कुल मिलाकर, इन तेलंगाना थल्ली को एक हिन्दू देवी के तौर पर दिखाया गया था। तेलंगाना थल्ली को राज्य बनने के बाद एक प्रमुख पहचान के तौर पर जानी जाती थीं।  

कांग्रेस सरकार ने क्या बदला?

जहाँ अब तक तेलंगाना थल्ली धनधान्य और संस्कृति को दर्शाने वाली देवी के तौर पर दिखती थीं वहीं नई लगाई गई मूर्ति में कई पुराने फीचर गायब हैं। नई मूर्ति में साड़ी का रंग बदल कर हरा कर दिया गया है। उनके अधिकांश जेवर भी मूर्ति पर से हटा दिए गए हैं।
उनके बाएँ हाथ की मक्के की बाली को दाएँ हाथ में दे दिया गया है और इसमें दिखने वाला बथुकम्मा का बर्तन भी गायब है। यानि कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई नई डिजाइन में तेलंगाना के बड़े हिन्दू त्यौहार के लिए कोई जगह नहीं है। सबसे हास्यास्पद है कि उनके सर पर दिखने वाला मुकुट भी हटा दिया गया है। नई मूर्ति में चूड़ियों का रंग भी बदल कर हरा कर दिया गया है।
उनका जो एक हाथ खाली है, वह कांग्रेस के निशान की मुद्रा की तरह दिखता है। इसके अलावा तेलंगाना थल्ली के चेहरे में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। इस मूर्ति को सोमवार (9 दिसम्बर, 2024) को तेलंगाना सचिवालय के बाहर लगाया गया है। इस प्रतिमा का अनावरण कांग्रेस सरकार के मुखिया रेवंत रेड्डी ने किया है।
मूर्ति का अनावरण उस दिन किया गया, जिस दिन कांग्रेस की मुखिया सोनिया गाँधी का जन्मदिन था। गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी को ही तेलंगाना की माँ बताते आए हैं। इसके पीछे तर्क है कि कांग्रेस सरकार में ही तेलंगाना राज्य बना था और सोनिया गाँधी ने इसको लेकर काफी प्रयास किए थे। 

क्या संस्कृति से किनारा करने की कोशिश?

तेलंगाना की कांग्रेस सरकार का थल्ली की मूर्ति का डिजाइन बदलना राज्य की भव्य हिन्दू विरासत से किनारा करने के एक प्रयास के तौर पर देखा गया है। इसके पीछे तर्क भी दिए गए हैं। ऐसा दावा करने वालों ने प्रश्न उठाया है कि आखिर साड़ी का रंग का हरा करना क्या सेक्युलरिज्म से सम्बन्धित है।
इसी के साथ ही उनके हाथ से जो हिन्दू त्यौहार से सम्बन्धित बर्तन हटाया गया, वह भी संस्कृति छोड़ने के प्रयास के तौर पर देखा गया है। नई मूर्ति में कोई भी ऐसी सांस्कृतिक पहचान नहीं जोड़ी गई है। देवी के मुकुट को हटाना भी उनके गौरव को कम करने के तौर पर देखा गया है। हिन्दू परंपरा में अधिकांश देवियों के सर पर मुकुट रहता है।
संभवत: कांग्रेस सरकार शायद इसी हिन्दू पहचान से दूरी बनाना चाहती हो। वहीं उनके हाथ को खाली करके उसे कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजे की तरह दिखाने को लेकर भी चिंता जताई गई है। तेलंगाना थल्ली का रूप बदलने को लेकर राजनीतिक लड़ाई भी चालू हो गई है। कांग्रेस का दावा है कि यह तेलंगाना की एक सामान्य महिला को प्रदर्शित करती हैं। राज्य की विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस सरकार के इस कदम पर प्रश्न उठाए हैं।
BRS ने कांग्रेस के इस कदम को तेलंगाना की संस्कृति का अपमान बताया है। BRS नेता के कविता ने कहा, “यह प्रतिमा दशकों से हमारे संघर्ष, बलिदान और पहचान का प्रतीक रही है। इसे केवल सरकारी आदेश के आधार पर नहीं बदला जा सकता। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, जिनकी तेलंगाना आंदोलन में कोई भूमिका नहीं है और जो ऐतिहासिक रूप से एकीकृत आंध्र प्रदेश का समर्थन करते आए हैं, वे मनमाने ढंग से इस मूर्ति को अपनी सोच से नहीं बदल सकते।”

तेलंगाना : चुनाव से पहले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा की बना दी कब्र

                                               जेपी नड्डा की 'कब्र' (फोटो साभार: ANI)
तेलंगाना के नलगोंडा जिले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की फोटो लगाकर उनके नाम की सांकेतिक कब्र खोद जाने का मामला सामने आया है। जेपी नड्डा की फोटो के साथ कब्र के पास क्षेत्रीय फ्लोराइड शमन और अनुसंधान केंद्र का बोर्ड भी लगा है। भाजपा ने इसे उपचुनाव से पहले बीआरएस (पुराना नाम टीआरएस) नेताओं की हरकत बताते हुए शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। तेलंगाना में 3 नवंबर को उपचुनाव होने हैं।

गौरतलब करने की बात है कि चुनावों में बहुत वायदों की झड़ी लगाई जाती है, जिन्हें केवल सत्ता आने पर ही पूरा करने का प्रयास किया जाता है। नड्डा की कब्र इसलिए बनाई गयी है कि तेलंगाना में फ्लोराइड शमन और अनुसंधान केंद्र बनाने का नड्डा ने जो वायदा किया वह पूरा नहीं करने की वजह से उनकी कब्र बनाई गयी है, लेकिन तेलंगाना की जनता को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि तेलंगाना राज्य बनने पर मुख्यमंत्री दलित होगा, कहाँ है दलित मुख्यमंत्री? कौन पूछेगा और कौन देगा इसका जवाब?

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को प्रतीकात्मक रूप से दफनाने को लेकर टीआरएस नेताओं ने दावा किया है यह स्वास्थ्य मंत्री के रूप में नड्डा द्वारा किए गए वादों का प्रतिफल है। टीआरएस नेता और मंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया है कि जेपी नड्डा ने साल 2016 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए मैरीगुडा में 300 बेड का अस्पताल बनवाने का वादा किया था। साथ ही, चौतुप्पल में फ्लोराइड अनुसंधान केंद्र और फ्लोराइड पीड़ितों को सहायता का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक ये वादे पूरे नहीं हुए हैं। इसलिए लोग विरोध कर रहे हैं।

वहीं, इस मामले में भाजपा नेता एनवी सुभाष ने कहा है “बीजेपी ने जेपी नड्डा के फ्लोराइड संस्थान बनाने वाले आश्वासनों को लेकर टीआरएस सरकार से कई बार अनुरोध किया है। लेकिन, बार-बार आश्वासन के बाद भी टीआरएस सरकार अंधी और बहरी बनी हुई है। चूँकि, टीआरएस सरकार पूरी तरह से फेल हो गई है और उनके पास कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए, उन्होंने उपचुनाव से पहले इस मुद्दे को उठाया है। कब्र खोदना और जेपी नड्डा की तस्वीर लगाना मूर्खता है। हम इसकी निंदा करते हैं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।”

आंध्र प्रदेश के बीजेपी महासचिव विष्णु वर्धन रेड्डी ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की ‘कब्र’ वाला वीडियो ट्वीट कर कहा है “यह निंदनीय है। टीआरएस कार्यकर्ताओं ने हमारे पार्टी अध्यक्ष की कब्र बनाई है। हम इसकी घोर निंदा करते हैं। सब को पता है कि केटीआर बीजेपी के बढ़ते जनसमर्थन से निराश हैं, लेकिन सोचिए अगर बीजेपी के 18 करोड़ सदस्य टीआरएस के साथ ऐसा ही करने लगें तो क्या होगा।”

वहीं, इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे भारतीय राजनीति का निचला स्तर करार दिया है। उन्होंने लिखा, “भारतीय राजनीति में एक नया निचला स्तर। विनाश काले विपरीत बुद्धि।”

इसके अलावा, भाजपा प्रवक्ता और पूर्व एमएलसी रामचंदर राव ने कहा है कि बीजेपी इस हरकत की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने, इस हरकत के लिए टीआरएस नेताओं पर आरोप लगाया है। साथ ही, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

तेलंगाना : विधायक का बेटा सेक्स के लिए पत्नी ‘माँग’ रहा था; ‘अकेले मरा तो वह मेरी पत्नी-बेटियों को नहीं छोड़ेगा’: परिवार के साथ जिंदा जले रामकृष्ण

परिवार के साथ आत्महत्या करने वाले रामकृष्ण और उनकी पत्नी, TRS विधायक के बेटे राघवेंद्र (दाएँ) (साभार: NewsMeter)
तेलंगाना के भद्रादरी-कोठागुडम जिले के पलोंचा कस्बे में दो जनवरी 2022 की रात एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो जुड़वा बेटियों के साथ आग लगा ली थी। इस मामले में अब एक सेल्फी वीडियो सामने आया है​, जिससे पता चला है कि इस व्यक्ति की पत्नी को लेकर एक विधायक के बेटे ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। अप्रत्यक्ष तौर पर उसके साथ सेक्स का दबाव डाला था। ये विधायक हैं, वी वेंकटेश्वर राव (MLA Vanama Venkateswara Rao)। वे सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) से जुड़े हैं और इस इलाके में उनका खासा दबदबा बताया जाता है। उनका आरोपित बेटा वनमा राघव राव (राघवेंद्र) फरार बताया जा रहा है।

45 वर्षीय रामकृष्ण ने अपनी 12 वर्षीय दो जुड़वा बेटियों साहित्य और सहिति तथा 40 वर्षीय पत्नी लक्ष्मी के साथ आत्मदाह कर लिया था। इस घटना में दंपती और उनकी एक बेटी की मौत हो गई थी। एक अन्य बेटी की बाद में इलाज के दौरान कोठागुडम सरकारी अस्पताल में मौत हो गई।

जाँच के दौरान पुलिस को मृतक का सुसाइड नोट भी मिला था। लेटर में भी राघवेंद्र का जिक्र था। साथ ही मृतक ने अपनी माँ सूर्यवती और बहन माधवी का भी नाम लिखा था। इसमें कहा गया था कि माँ और बहन ने मृतक को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी नहीं दी। उस पर 30 लाख रुपए का कर्ज था और उसको किराया भी देना पड़ता था। इस मामले के समाधान के दौरान उसकी बहन ने स्थानीय विधायक के बेटे से उस पर दबाव डलवाया। विधायक के बेटे ने मृतक से ‘समस्या के समाधान के बदले’ कथित तौर पर अपनी पत्नी को पेश करने को कहा था।

वायरल हो रहे वीडियो में मृतक रामकृष्णन को कहते सुना जा सकता है, “MLA के बेटे वनमा राघव (Vanama Raghava) ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है। ऐसे लोगों से कोई सुरक्षित नहीं है। इन्हे बड़ा न बनने दें और न ही इनके अत्याचारों को सहन करें। वनमा राघव ने जो कुछ भी मेरी पत्नी के लिए कहा उसको कोई भी पति सुन नहीं सकता। वह मेरी पत्नी को मेरे बच्चों के बिना ही हैदराबाद बुला रहा था। अगर मैंने अकेले आत्महत्या की तो वह मेरी पत्नी और बच्चों को नहीं छोड़ने वाला। इसलिए मैंने सबके साथ मरने का फैसला किया है। मेरे बुरे हालातों में मेरी माँ और बहन ने मुझे प्रताड़ित किया। एक साथ मैं सभी से नहीं लड़ सकता।”

इस मामले में शिकायतकर्ता मृतक रामकृष्ण के साले हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विधायक के बेटे वनमा राघव के समर्थकों ने फोन कर मुकदमा वापस लेने की धमकी दी है। उनको पैसे का भी लालच दिया जा रहा है। इस मामले में वनमा राघव के साथ मृतक की माँ और बहन को भी आरोपित किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपितों पर धारा 302, 306 & 307 IPC के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपितों की तलाश में पुलिस की 8 टीमें लगाई गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वनमा राघव ने खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने बताया कि उनका नाम बीच में क्यों आया उन्हें ये भी पता नहीं। इसी के साथ उन्होंने इस पूरे मामले को अपने राजनैतिक कैरियर के खिलाफ एक साजिश बताया है। वनमा राघव की गिरफ्तारी पर अभी संदेह है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में वनमा राघव की गिरफ्तारी की खबर प्रकाशित हुई है। ETV का दावा है कि खुद विधायक ने अपने बेटे को पुलिस के हवाले कर दिया है। साथ ही बेटे को बेगुनाह बताते हुए पुलिस की जाँच में पूरा सहयोग करने की भी बात कही है। इस मामले में विपक्षी दलों ने 7 जनवरी कोठागुडम विधानसभा में बंद का आह्वान किया है।

कांग्रेस का तेलंगाना हार पर विवादित पोस्टर

telangana congress posters
तेलंगाना में कांग्रेस के पोस्टर पर विवाद 
तेलंगाना में दूसरी बार के चंद्रशेखर राव सत्ता पर काबिज हैं। समय से पहले चुनाव कराने का उनका फैसला हिट रहा। टीआरएस के विरोध में कांग्रेस और टीडीपी ने गठबंधन चुनाव में उतरी थी। लेकिन तेलंगाना की जनता ने उन्हें नकार दिया। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद दोनों दलों ने ये आरोप लगाना शुरू किया कि के चंद्रशेखर राव की जीत लोकतंत्र का हरण है और इसके साथ ही निर्वाचन आयोग को भी निशाने पर लिया जाने लगा। ताजा मामला एक पोस्टर ने जुड़ा हुआ है जिसकी वजह से तेलंगाना की राजनीति में उबाल है। तेलंगाना बीजेपी ने कांग्रेस के पोस्टर को हिन्दू महिलाओं का अपमान बताया है। 
अवलोकन करें:--
जनता कांग्रेस से यह जानना चाहती है कि इतने वर्ष सत्ता में रहने पर किसानों की दुर्दशा क्यों? क्यों किसान कर्ज़े में डूबा? देश से गरीबी क्यों नहीं दूर हुई, जबकि तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी ने एक चुनाव केवल "गरीबी हटाओ" के नारे पर ही जीता था? कांग्रेस पार्टी हमेशा कहती है कि जवाहर लाल नेहरु ने देश में अच्छा काम करते हुए अभूतपूर्व योगदान दिया, इसी मामले पर आतिफ रशीद ने कटाक्ष कर दिया। लोकतन्त्र की निर्मम हत्या तो कांग्रेस ने भारत के पहले ही चुनाव में कर दी थी, जब उत्तर प्रदेश के रामपुर में हिन्दू महासभा के उम्मीदवार विशन सेठ ने कांग्रेस उम्मीदवार मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को लगभग 6000 मतों से हरा दिया था। जो जवाहर लाल नेहरू को बर्दाश्त नहीं हुई और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोबिन्द बल्लब पन्त को हारे हुए उम्मीदवार आज़ाद को किसी भी कीमत पर जितवाने को कहा,और पंत ने तुरन्त जिला अधिकारी को नेहरू जी की बात पूरी करने को कहा।
इस वेबसाइट का परिचय
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आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार आम चुनाव 2019 के लिए भारत का राजनीतिक स्टेज सज चुका है। सभी राजनीतिक दलों की निगाह है कि क....

तेलंगाना में चुनावी नतीजों के खिलाफ कांग्रेस ने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। इस संबंध में कांग्रेस की तरफ से एक पोस्टर जारी किया गया है जो विवादों में है। तेलंगाना बीजेपी का कहना है कि विरोध के लिए जिस तरह से एक महिला के वस्त्रहरण का जिक्र किया गया है उससे हिंदू औरतों का अपमान है। इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का माफी मांगनी चाहिए। 
अब मुद्दे की बात ये है कि कांग्रेस के पोस्टर में क्या कुछ दिखाया और बताया गया है। दरअसल तस्वीर में एक महिला के चीरहरण को दिखाया गया है। उस तस्वीर के जरिए बताया गया है कि कैसे महाभारत के समय द्रौपदी का चीरहरण हुआ था और कुछ वैसे ही तेलंगाना में लोकतंत्र का चीरहरण हुआ जिसके लिए निर्वाचन आयोग जिम्मेदार है। तेलंगाना में लोकतंत्र के साथ मजाक हुआ है। 

"केसीआर का मतलब खाओ कमीशन राव" --राहुल गाँधी

 Khao Commission Rao: Rahul Gandhis Scathing Attack On KCR
तेलंगाना से आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकर 
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तेलंगाना में चुनावी रैली को संबोधित करने के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री के चेंद्रशखर राव पर जोरदार हमला किया। राहुल ने केसीआर पर किसान और जनजातीय विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूंजीवादी मित्रों की मदद के लिए किसानों और जनजातियों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा तो ताख पर रख दिया। राहुल ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर का मतलब समझाते हुए कहा कि KCR का मतलब 'खाओ कमीशन राव' है।
"केसीआर का मतलब खाओ कमीशन राव "
उन्होंने कहा कि केसीआर ने तेलंगाना की कीमत पर अपने परिवार को आगे बढ़ाया। राहुल ने जोर देते हुए कहा कि कांग्रेसनीत गठबंधन पहले तेलंगाना में टीआरएस को और फिर केंद्र में मोदी सरकार को उखाड़ फेकेगी। निजामाबाद में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि केसीआर ने बस एक ही काम किया कि उन्होंने कांग्रेस सरकार की पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर उसकी कीमत बढ़ा दी और अपने लिए कमीशन जुटा लिया। केसीआर का मतलब 'खाओ कमीशन राव।' है। उन्होंने कहा कि केसीआर जिस तरह से मोदी और आरएसएस के सभी कदमों को अपना रहे हैं उन्हें अपनी पार्टी टीआरएस का नाम बदलकर 'टी-आरएसएस' रख लेना चाहिए।
टीआरएस का नाम बदलकर 'टी-आरएसएस' रख लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केसीआर का सिर्फ एक ही मकसद है तेलंगाना में अपने परिवार का और दिल्ली में मोदी सरकार को सुनिश्चित करना। उन्होंने केसीआर के बेटे केटी रामाराव की संपत्ति का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में उनकी 29 लाख रुपए थी और साल 2018 में संपत्ति बढ़कर करीब 74 लाख रुपए हो गई। उन्होंने प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि जब केसीआर मुख्यमंत्री बने तो तेलंगाना का अधिशेष 17 हजार करोड़ रुपए था, लेकिन आज वो 2.5 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज के बोझ से दबा है। केसीआर के शासन में 4,500 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की।
लेकिन राहुल ने यह नहीं बताया कि जब केन्द्र में 10 साल उनकी सरकार थी, इस दौरान कितने किसानों ने देश भर में आत्महत्या की थी? कितने किसानों के क़र्ज़ माफ़ किये गए? सत्ता में आने पर उनकी और परिवारजनों की आय में कितनी बढ़ोतरी हुई? जिनके घर शीशे के होते हैं, दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकते। 
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि उनकी सरकार सत्ता में आने के बाद किसानों की कर्ज माफी करेगी। वहीं तेलंगाना में अनुसूचित जनजाति की आबादी के अनुपात में उनके उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों और सरकारी शैक्षिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण देने का भरोसा दिलाया।

'Tere Baap ko Bolunga', KCR Loses Cool at Voter Who Queried About 12% Quota For Muslims

Telangana Assembly Election 2018: KCR Loses Cool, Abuses Voter at Rally Who Queried About 12% Quota For Muslims; Faces FlakTelangana caretaker Chief Minister K Chandrasekhar Rao on Friday faced flak from Opposition parties for losing cool on a man, who asked him about the proposed 12 per cent reservation for Muslims during an election rally in Komaram Bheem Asifabad district of the poll bound state.
Insisting the man to remain silent, Rao reportedly said,”What are you talking? Sit silent. What about 12 per cent? Why are you in hurry? Tere baap ko bolunga na (I will tell your father). Are you doing tamasha.” The TRS leader had earlier accused Prime Minister Narendra Modi of not clearing the proposed reservation for Muslims.
If reports are to be believed, the man asked Rao about the status of the proposed quota which was passed by the State Assembly and sent to the Centre for approval.
Reacting sharply to this, Congress’ Telangana unit tweeted,”Drunk with power, KCR acts like a dictator. KCR, you are answerable to the people of Telangana. Arrogance and dictatorship have no space in a democracy!”
Former India cricketer and senior Congress leader Mohammed Azharuddin said KCR should tender an apology and also answer the question about the 12 per cent reservation he promised for Muslims.  “He should tender an apology. He should not have said that. Why should he make such promises when he knows very well that it cannot be fulfilled,” Azharuddin, who is the Congress’ Telangana unit working president, said.
A few days back, at an election rally at Mahabubnagar district of the state, Prime Minister Narendra Modi had attacked KCR over the issue saying,”TRS’s talk of (raising) Muslim reservations is vote bank politics which the Congress has been doing for a long time.”
Telangana will go to polls to choose a new government on December 7, 2018 with the Telangana Rashtra Samithi (TRS) bidding to retain power and the Congress-led alliance ready for a no-holds-barred contest. The 119-member Assembly was dissolved on September 6 on the recommendation of the K Chandrasekhar Rao-led TRS government, more than eight months ahead of the expiry of its term, paving the way for early elections.