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पंजाब : AAP के प्रोपेगंडा का पर्दाफाश; खर्च नहीं कर पाए पास पड़े 8000 करोड़ रूपए, केंद्र से माँगते रहे पैसे: भगवंत मान ने सचिवों को दिए ‘जुगाड़’ खोजने के निर्देश

           मोदी सरकार पर आरोप लगाती है AAP, CM भगवंत मान नहीं खर्च पा रहे फंड (चित्र साभार: Jagran)
भीषण आर्थिक संकट का सामना करने वाली पंजाब की ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) की सरकार केंद्र से मिले 8000 करोड़ रुपए को खर्च नहीं कर पाई है। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों से ऐसे जुगाड़ सोचने को कहा है कि जिससे यह पैसा केंद्र को लौटाना ना पड़े।

पंजाब की सरकार को यह धनराशि केंद्र से विकास कार्यों के लिए मिली थी। वित्त वर्ष 2023-24 के लगभग 8 महीने बीत जाने के बाद भी इसमें से पंजाब सरकार मात्र 3000 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई है। यह स्थिति तब है जब आए दिन भगवंत मान केंद्र से नए फंड माँगते रहते हैं। पंजाब की खराब आर्थिक स्थिति के चलते भगवंत मान यह तक कह चुके हैं कि उन्हें केंद्र सरकार उनके द्वारा लिए कर्जों पर पाँच साल ना लौटाने की छूट दे। मगर जितना पैसा केंद्र सरकार से मिल रहा है, उनके अधिकारी उसे ही नहीं खर्च कर पा रहे हैं और मान से यह शिकायत कर रहे हैं कि केंद्र उन्हें पैसा नहीं दे रहा।

अंग्रेजी समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ की एक खबर के अनुसार, हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान की राज्य के वरिष्ठ सचिवों के साथ हुई बैठक में यह पूरा मामला उठा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों पर इस बात के लिए गुस्सा जाहिर किया कि 8 महीने निकलने के बाद भी वह पैसा खर्च नहीं कर पाए हैं।

अगर नए बजट तक ऐसा नहीं होता है तो यह पैसा केंद्र सरकार को वापस चला जाएगा। सचिवों ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया है कि उन्होंने नए ठेके निकाल दिए हैं और जल्द ही वह फाइनल हो जाएँगे। ऐसे में यह धनराशि खर्च होगी और केंद्र को नहीं लौटानी पड़ेगी।

केंद्र से पहले ही मिले पैसे को खर्च ना कर पाने वाले अधिकारियों ने इस बैठक में भगवंत मान से शिकायत की कि उन्हें केंद्र सरकार ग्रामीण विकास समेत अन्य कई कामों के लिए पैसा नहीं दे रही है। उनकी यह भी शिकायत थी कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य विभाग का पैसा भी रोक रहा है। दरअसल, बीते दिनों केंद्र सरकार ने भगवंत मान को हिदायत दी थी कि पंजाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आम आदमी पार्टी मोहल्ला क्लीनिक बनाकर प्रचार कर रही है, ऐसे में इसकी फंडिंग भी वह खुद करे। इसी को लेकर भगवंत मान की सरकार बौखलाई हुई है।

वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक पंजाब पर वर्तमान में 3.12 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। वर्ष 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने से पहले यह कर्ज 2.82 लाख करोड़ रुपए था। भगवंत मान ने एक बयान में बताया था कि उनकी सरकार ने 18 महीनों में 47,107 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है।

अक्टूबर 2023 में भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को लिखे गए एक पत्र में माँग की थी कि वह प्रधानमंत्री मोदी को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच वर्षों के लिए कर्ज वसूली रोक दी जाए। इस भीषण आर्थिक संकट के बाद भी पंजाब सरकार केंद्र सरकार से मिले विकास के पैसे को भी खर्च नहीं कर पा रही है। जब पूछा जा रहा है तो आम आदमी पार्टी की सरकार को गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

पंजाब : खौफनाक वीडियो: पंजाब में काट दी हाथ की अंगुलियाँ, CM भगवंत मान से नहीं संभल रही कानून-व्यवस्था?

पंजाब में तलवार से एक शख्स की उँगलियाँ काटने का वीडियो हुआ वायरल (साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट/इंडिया टुडे)
बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने पंजाब का एक भयावह वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया है। इसमें कुछ लोग तलवार से एक व्यक्ति की उँगलियाँ काटते हुए दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित व्यक्ति उनसे रहम की गुहार लगाते हुए जोर-जोर से चिल्लाता नजर आ रहा है, लेकिन उन लोगों ने दया नहीं की। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि जब उँगलियाँ पूरी तरह नहीं कटी तो आरोपित उसे हाथ से खींचकर अलग कर देता है।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने वीडियो के साथ लिखा, “पंजाब का यह भयानक वीडियो नहीं देख सका। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति भयावह हो गई है। केजरीवाल अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए पंजाब को तालिबानी हुकूमत की ओर ले जा रहे हैं। पंजाब पुलिस, क्या आप सक्रिय हैं?”

खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह की चर्चा हो रही है। अमृतपाल के समर्थकों द्वारा अजनाला थाने पर कब्जे के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान की नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है। इसके बाद सामने आए अब इस वीडियो ने पंजाब सरकार की मुश्किलें बढ़ा दीं।

यह घटना 9 फरवरी 2023 को पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह (एसएएस) नगर की बताई जा रही है। पुलिस थाना पीएच-1, जिला एसएएस नगर में पहले ही धारा 326, 365, 379बी, 34 आईपीसी और 25 आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। एक अधिकारी ने दावा किया, “यह आपसी रंजिश का मामला है। अपराधियों की शिनाख्त के बाद उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।”

पंजाब में अशांति, अमृतसर में पुलिस पर हमला

हथियारों से लैस खालिस्तान समर्थकों (Khalistan Supporter) ने गुरुवार (23 फरवरी 2023) को अमृतसर स्थित अजनाला थाने पर हमला कर, उस पर कब्जा कर लिया था। हमलावर अमृतपाल सिंह के खिलाफ FIR और उसके करीबी लवप्रीत तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे।
अमृतपाल और उसके साथियों के खिलाफ फेसबुक पोस्ट करने के लिए एक युवक ने अगवा कर मारपीट करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा, अमृतपाल ने गृहमंत्री अमित शाह को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जैसा हश्र करने की धमकी दी है। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के कहने पर पंजाब के अजनाला थाने पर कब्जा करने और फिर पुलिस द्वारा अपनी बात मनवाने के बाद उसकी तुलना कुख्यात जरनैल सिंह भिंडरावाले के साथ होने लगी है।

आतंकी पन्नू के घर पर पंजाब के लोगों ने फहराया तिरंगा

                                              फोटो साभार: नवभारत टाइम्स
पंजाब में युवाओं को खालिस्तान (Khalistan) का झंडा फहराने के लिए उकसाने वाले सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू  के घर पर ही तिरंगा फहरा दिया गया है।

इस साल भारत अपनी स्वतंत्रता का 75वें स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के इस अमृत महोत्सव समारोह से पहले पंजाब के अमृतसर स्थित उसके गाँव में लोगों के एक समूह ने पन्नू के आवास पर तिरंगा फहराया।

अभी कुछ दिन पहले पन्नू ने एक वीडियो जारी कर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को धमकाया था। इसके साथ ही उसने खालिस्तानी झंडा फहराने वालों को इनाम की घोषणा की थी।

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस से पहले एक वीडियो जारी कर पन्नू ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था। इसको लेकर उस पर राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया था।

अप्रैल 2022 में पन्नू ने एक वीडियो जारी हरियाणा के कलेक्टर ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील की थी। उसने कहा था, “हरियाणा पर पंजाब का अधिकार है। यह अधिकार प्रदर्शित करने के लिए 29 अप्रैल को गुरुग्राम के DC कार्यालय पर खालिस्तान का झंडा लगाया जाएगा। यह खालिस्तान के 36वें घोषणा दिवस के मौके पर होगा।” 

इसके साथ ही उसने मई 2022 में कश्मीर के अलगाववादी एवं कट्टरपंथी नेता यासीन मलिक की सजा को लेकर एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया था। यासीन मलिक को आइकॉनिक नेता बताते हुए उसकी सजा के विरोध में मुस्लिमों से अमरनाथ यात्रा रोकने की अपील की थी।

कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू

पन्नू का पुश्तैनी घर अमृतसर के खानकोट गाँव में है। इसी गाँव में पन्नू का जन्म हुआ था। बाद में वह विदेश चला गया। पन्नू के पिता महिंदर सिंह विभाजन के समय पाकिस्तान से खानकोट आए थे। महिंदर सिंह मार्कफैड में नौकरी करते थे। पन्नू अपने भाई मंगवंत सिंह के साथ विदेश जाकर बस गया।
बाद में वह अमेरिका पहुँचा और वहाँ उसने उसने सिख फॉर जस्टिस नाम से अमेरिका में अलगाववादी खालिस्तान बनाया है। इसके जरिए वह देश भर के युवाओं को खालिस्तान के लिए बरगलाने का काम करने लगा।
पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के सहयोग से पन्नू खालिस्तानी अलगाववादी को फिर से जिंदा करने की कोशिश करने में लगा हुए। उसकी देश विरोधी गतिविधियों को देखते हुए साल 2019 में भारत सरकार ने संगठन को बैन कर दिया। पन्नू भी भारत में वांछित आतंकी है।
खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के पिता की मौत बहुत पहले हो गई थी। भारत में रहने वाली अपनी माँ को उसने बताया था कि वह कनाडा में बहुत बड़ा वकील है। कुछ वर्ष पहले उसकी माँ की भी मौत हो गई। अब भारत में उसके परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता।

भगवंत मान के ‘पुल’ की खोली थी पोल, अब गिरफ्तार किए गए PTC चैनल के एमडी: लड़कियों का यौन शोषण करवाने के आरोप

                                         पीटीसी के एमडी रबींद्र नारायण (बाएँ) भगवंत मान (दाएँ)
पीटीसी नेटवर्क के प्रेसिडेंट और एमडी रबींद्र नारायण (PTC TV MD Rabindra Narayan) को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक ‘मिस पंजाब’ कंटेस्टेंट ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसको लेकर पंजाब पुलिस ने उन्हें बुधवार (6 अप्रैल, 2022) तड़के सुबह उनके गुरुग्राम स्थित आवास से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि ‘मिस पंजाब’ कॉन्टेस्ट के दौरान पीटीसी स्टाफ के एक सदस्य ने उसे जबरदस्ती एक कमरे में बंद कर दिया और उसका शोषण किया।

कंटेस्टेंट ने यह भी आरोप लगाया है कि चैनल द्वारा हर साल कराने जाने वाले ब्यूटी कॉन्टेस्ट की आड़ में मानव तस्करी हो रही है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, PTC नेटवर्क पर यह आरोप भी है कि चैनल में मिस पंजाबी कॉन्टेस्ट के नाम पर भोली-भली लड़कियाँ बुलाई जाती थीं और फिर बड़े-बड़े लोगों से उनका यौन शोषण करवाया जाता था।

पीटीसी नेटवर्क ने एमडी को हिरासत में लिए जाने को सियासी रंजिश करार दिया है। उधर, पीटीसी के एमडी ने आरोप लगाया है कि यह जाँच मीडिया पर हमला है। नारायण ने भगवंत मान सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया। पीटीसी चैनल के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में गठित एसआईटी पहले ही हमारे एमडी रबींद्र नारायण का बयान दर्ज कर चुकी है और एमडी ने भी जाँच में पूरा सहयोग किया है। साथ ही कहा कि पुलिस को सभी डीवीआर सौंप दिए हैं, जिन्हें देखने से साफ पता चलता है कि आरोप लगाने वाली लड़की हमारे साथ कभी जुड़ी ही नहीं थी।

नारायण को उनके गुरुग्राम स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनके खिलाफ मोहाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कथित तौर पर, पंजाब पुलिस इस मामले में एक और संदिग्ध की तलाश कर रही है, जबकि अधिकारियों ने इसमें शामिल बड़े रैकेट की भूमिका की पहचान करने के लिए गहन जाँच शुरू कर दी है।

भगवंत मान के पुल पर पीटीसी की रिपोर्ट

31 मार्च, 2022 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अरविंद केजरीवाल के साथ एक इंटरव्यू में मान ने सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 1.80 करोड़ रुपए के कोटेशन के मुकाबले सिर्फ 6 लाख रुपए में पंजाब में एक पुल बनाने के बारे में हास्यास्पद दावे किए थे। स्थानीय समाचार चैनल पीटीसी न्यूज ने पुल को कवर करने के लिए एक रिपोर्टर को वहाँ भेजने का फैसला किया।
पीटीसी ने मान के दावों की पोल खोलते हुए उनकी धज्जियाँ उड़ा दी थीं। चैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि संगरूर जिले के दिर्बा गाँव में जलमार्ग के ऊपर एक पुल की बजाए एक कंक्रीट पावर स्लैब बिछाया गया था।
गौरतलब है कि पीटीसी के एमडी रबींद्र नारायण की गिरफ्तारी चैनल द्वारा भगवंत मान के कथित झूठे दावों को उजागर करने के कुछ दिनों बाद हुई है। पीटीसी टेलीविजन नेटवर्क का स्वामित्व शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के पास है।

MP फंड से मिले 25 करोड़ रूपए, खर्च 26.6 करोड़ रूपए : जिस ‘ब्याज’ पर भगवंत मान ने ठोकी खुद की पीठ उसका देना होता है हिसाब

पंजाब के विधानसभा चुनाव को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच 16 फरवरी 2022 को न्यूज चैनल आज तक के ‘पंजाब पंचायत‘ पर अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने अपनी जीत का दावा किया। इसी क्रम में भगवंत मान ने इस बात का भी दावा किया कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत 25 करोड़ रुपए की निधि दी गई थी, लेकिन 2014-2019 के बीच उन्होंने कुल 26.6 करोड़ रुपए का हिसाब दिया। मान के मुताबिक, ये जो 1.1 करोड़ रुपए हैं ये उन्हें पाँच साल में बैंकों के द्वारा ब्याज मिले हैं। बाकी बचा फंड पिछले सांसद ने जो छोड़ दिया था वो है।

दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने एक रैली के दौरान भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा था कि आखिर मान ने अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया है? इसके जवाब में मान ने कहा, “सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत मुझे 2014-2019 के दौरान 25 करोड़ रुपए का फंड मिला। मैंने 26.61 करोड़ रुपए का हिसाब दिया।” भगवंत मान ने अधिक फंड के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जब भी किसी तरह का चुनाव होता था तो वो आचार संहिता के कारण एमपीलैड फंड का इस्तेमाल नहीं कर पाते थे, जिस पर बैंक की तरफ से ब्याज दिया जाता था। उन्होंने दावा किया कि पाँच साल में उन्हें बैंकों के जरिए 1.01 करोड़ रुपए की ब्याज मिली है। मान कहते हैं कि इन 26 करोड़ में से 60 लाख रुपए पिछले सांसद ने छोड़ दिया था। मैंने कहा कि अगर 25 करोड़ रुपए जनता के हैं, तो उसका हित भी जनता का है।

2014-2019 के बीच सांसद के तौर पर भगवंत मान का रिकॉर्ड

MPLADS की बेवसाइट्स के मुताबिक, 2014-2019 के दौरान भगवंत मान को 2.5 करोड़ रुपए की 10 किस्तों में कुल 25 करोड़ रुपए की राशि दी गई थी।
                                                       साभार: MPLADS.gov.in
उस वक्त ब्याज समेत मिलाकर कुल 25.84 करोड़ रुपए का फंड उपलब्ध था। इसमें से से आप सांसद ने 24.87 करोड़ रुपए का फंड अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यो के लिए मंजूर किया था। इसमें से 24.53 करोड़ रुपयों (96.11%) का इस्तेमाल प्रोजेक्ट्स में किया गया, लेकिन 16वीं लोकसभा में उनका कार्यकाल पूरा होने तक मान के पास कुल 1.31 करोड़ रुपए का फंड ऐसा था, जिसका उपयोग ही नहीं किया गया था।
                                                              साभार: MPLADS.gov.in
डैशबोर्ड के आँकड़ों को देखने पर पता चलता है कि मान ने 2,103 कार्यों के विकास की सिफारिश की थी, जिनमें से केवल 1,759 पूरे हो पाए थे। वहीं परियोजनाओं पर उनके द्वारा किए गए खर्च को देखें तो उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर (73.67%) पर सबसे ज्यादा और सबसे कम कृषि (0.64%) खर्च किया था।
                                                      साभार: MPLADS.gov.in

भगवंत मान का ब्याज का दावा

भगवंत मान ने फंड मिलने का जो दावा किया है वो करीब-करीब सरकारी आँकड़ों से मेल खाता है। इस थोड़े से अंतर के साथ ही मान ने ये साबित करने की कोशिश की है कि वो इकलौते ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने ब्याज का हिसाब देने के साथ ही पिछले सांसद की निधि को आगे बढ़ाने का काम किया है।
जबकि हकीकत ये है कि नियमों के मुताबिक, किसी भी सीट पर पूर्व सांसद जो भी राशि का इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो वो नए सांसद को आगे बढ़ाना होता है। ऐसे में सारे ब्याज का भी हिसाब देना होता है।
                                                      साभार: MPLADS.gov.in
पंजाब के 15 सांसदों में से 6 सांसदों ने मान की तुलना में कम खर्च किया था। वहीं तीन सांसदों, सुनील कुमार जाखड़ (कॉन्ग्रेस) ने 119.23 फीसदी, विजय सांपला (बीजेपी) ने 100.23% और शेर सिंह घुबाया (कॉन्ग्रेस) ने 100.33 फीसदी की स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किया था।
                                        तीन से अधिक सांसदों ने 100 फीसदी से अधिक राशि का किया इस्तेमाल
नियमानुसार, अगर जरूरत पड़ती है तो सांसद सरकार से अतिरिक्त फंड की माँग कर सकता है। इसके अलावा ब्याज और आगे की राशि प्रत्येक सांसद के लिए ‘ब्याज के साथ उपलब्ध राशि’ में जोड़ी जाती है।

पंजाब : केजरीवाल ने भगवंत मान को आगे नहीं किया है बल्कि हालात देख अपने पैर पीछे खींचे हैं

राकेश सैन, उगता भारत 

पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों का सिंहावलोकन करने पर सामने आएगा कि राज्य में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता का खजाना सिकुड़ता-सा नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी पंजाब में आन्धी की तरह आई।

सांसद भगवंत मान को पंजाब में आम आदमी पार्टी का मुख्यमन्त्री का चेहरा घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रश्न पूछा जा रहा है कि पार्टी के सर्वेसर्वा दिल्ली के मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने इस राज्य में अपने पैर पीछे क्यों खींच लिए ? पिछले तीन-चार महीनों से पंजाब की दीवारें इस नारे के साथ पाट दी गईं कि ‘इक मौका-केजरीवाल नूं’ तो यकायक नया नारा क्यों दे दिया कि ‘इक मौका-भगवंत मान नूं ?’

पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों का सिंहावलोकन करने पर सामने आएगा कि राज्य में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता का खजाना सिकुड़ता-सा नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी पंजाब में आन्धी की तरह आई। राज्य के बड़े राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ दूसरे दलों के असन्तुष्टों, युवाओं, विदेशों में बड़ी संख्या में रह रहे अनिवासी भारतीयों, यहां तक कि सिविल सोसाइटी व बुद्धिजीवी वर्ग ने भी दिल्ली की इस सनसनी को हाथों-हाथ लिया। विगत चुनावों में तत्कालीन अकाली दल बादल और भारतीय जनता पार्टी गठजोड़ वाली सरकार के खिलाफ जनाक्रोश भी काफी था जिसको चलते लग रहा था कि आम आदमी पार्टी बाजी मार जाएगी। केजरीवाल भी दिल्ली जैसे आधे-अधूरे राज्य को छोड़ पंजाब जैसे पूर्ण प्रान्त को अपनी राजनीति का केन्द्र बनाने को लालायित दिखे। नारा दिया गया कि ‘केजरीवाल-केजरीवाल सारा पंजाब तेरे नाल।’ इस दावे का आधार भी था क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनावों में पंजाब से आम आदमी पार्टी के चार सांसदों ने पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। परन्तु इस सारी कवायद का परिणाम निकला वही ढाक के तीन पात, राज्य की 117 विधानसभा सीटों में 100 सीटों का दावा करने वाली दिल्ली की इस पार्टी को मात्र 20 सीटों पर संतोष करना पड़ा। केजरीवाल के नारे को लेकर पंजाब के लोग उपहास में कहने लगे ‘केजरीवाल-केजरीवाल एह की होया तेरे नाल।’
पंजाब में पिछले पांच सालों में आम आदमी पार्टी की राजनीतिक ताकत कमजोर हुई है। विगत विधानसभा चुनावों के बाद बड़े-बड़े चेहरे पार्टी को छोड़ गए। इस दौरान राज्य में हुए आधा दर्जन विधानसभा उपचुनावों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अपनी जमानतें तक नहीं बचा पाए। 2019 के लोकसभा चुनावों में लोकसभा सांसदों की संख्या चार से घट कर केवल एक रह गई और भगवंत मान ही पार्टी की थोड़ी बहुत इज्जत बचा पाए। ग्रामीण व निकाय चुनावों में भी पार्टी फिसड्डी रही। केवल इतना ही नहीं, पार्टी के 20 विधायकों में भी पार्टी नेतृत्व को लेकर असन्तोष पनपने लगा और पांच सालों में आधा दर्जन विधायक आम आदमी पार्टी को छोड़ गए। केवल इतना ही नहीं कुछ दिन पहले फिरोजपुर (ग्रामीण) विधानसभा क्षेत्र के आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ने ही पार्टी छोड़ दी। देश के इतिहास में शायद यह पहली बार सुनने को मिला कि किसी उम्मीदवार ने भाग-दौड़ करके किसी पार्टी की टिकट प्राप्त की हो और मतदान की तारीख की घोषणा होते ही पार्टी छोड़ दी हो। यह सब आम आदमी पार्टी की गिरती साख व लोकप्रियता की निशानियां बताई जा रही हैं।

अब पंजाब को एक बार फिर जीतने की मंशा से निकले केजरीवाल ने तीन-चार महीने पहले रैलियां, रोड शो और विभिन्न वर्गों के साथ बैठकें आयोजित करनी शुरू कर दीं परन्तु ये आयोजन उनके पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कार्यक्रमों के मुकाबले फीके दिखे। शायद यही कारण है कि केजरीवाल ने अब अपने पैर खींच कर भगवंत मान को आगे कर दिया है। भगवंत मान को मुख्यमन्त्री का चेहरा घोषित करने के लिए चाहे केजरीवाल ने चिर-परिचित राजनीतिक स्टण्ट किया और लोकमत से नाम घोषित करने का दावा किया परन्तु वे इस मोर्चे पर भी गच्चा खा गए और उन्होंने स्वयं स्वीकार कर लिया कि पंजाब में पार्टी की ताकत पहले जैसी नहीं रही।
पंजाब के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेण्ट एण्ड कम्यूनिकेशन के निदेशक डॉक्टर प्रमोद कुमार कहते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में पाँच पार्टियों की लड़ाई है। हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता कम हुई है क्योंकि भगवंत मान को मुख्यमन्त्री बनाने के लिए केवल 21 लाख लोगों ने वोट डाले जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए 36.62 लाख लोगों ने वोट किया था, जो कुल मतों का 23.28 प्रतिशत था। अगर उनकी लोकप्रियता बढ़ी होती तो 36 लाख से ज़्यादा लोगों को मुख्यमन्त्री के नाम पर मुहर लगाने के लिए हुए वोट में हिस्सा लेना चाहिए था। ज्ञात रहे कि मान को 21 लाख लोगों द्वारा पसन्द किए जाने का आंकड़ा भी खुद केजरीवाल का ही है, किसी निष्पक्ष एजेंसी का नहीं। अगर इस आंकड़े को सही भी मान लें तो इसमें वर्गीकरण किया जाना सम्भव नहीं कि फोन के माध्यम से अपना मत रखने वाले लोग पंजाब के ही थे या किसी दूसरे राज्य के भी। फिलहाल केजरीवाल का 21 लाख का स्वघोषित आंकड़ा भी बताता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता घटी है।

केजरीवाल चाहे भगवंत मान को अपनी व लोगों की पसन्द बता रहे हैं परन्तु सच्चाई अलग ही सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मान न मान, केजरीवाल की मजबूरी बन गए थे भगवंत मान वाली हालत बन गई थी। किसी बड़े चेहरे की तलाश में पूरी जोड़तोड़ के बाद ही अन्त में सांसद भगवंत मान को मुख्यमन्त्री का चेहरा बनाया गया। बॉलीवुड कलाकार सोनू सूद से लेकर दुबई के होटल कारोबारी एसपीएस ओबेरॉय और किसान नेता बलबीर राजेवाल के नाम मुख्यमन्त्री चेहरे के लिए चले। चर्चा यही रही कि आम आदमी पार्टी और इनके बीच बात नहीं बनी और आखिर में भगवंत मान को आगे करना पड़ा। पंजाब का मुख्यमन्त्री बनने की इच्छा दिल्ली वाले नेताओं की भी चर्चा में रही लेकिन पंजाबी किसी बाहरी नेता को स्वीकार नहीं करते। इसलिए यह विकल्प पिट गया। हर तरह की कोशिशों के बीच चुनाव सिर पर आ गए तो केजरीवाल की मजबूरी बन गई कि मान के नाम की घोषणा कर दे। कहीं चोकोणीय तो कहीं पांच कोणीय चुनाव होने के कारण पंजाब की राजनीति प्याज के छिलके जैसी होती जा रही है जिसमें कोई दल छाती ठोक कर अपनी जीत का दावा नहीं कर सकता। 

अवलोकन करें:-

जब 5 मिनट तक फ्लाइंग किस देते भगवंत मान बार-बार गिर रहे थे: AAP ने बनाया चेहरा तो बोले लोग – ‘उड़ते पंज
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जब 5 मिनट तक फ्लाइंग किस देते भगवंत मान बार-बार गिर रहे थे: AAP ने बनाया चेहरा तो बोले लोग – ‘उड़ते पंज

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा, बीजेपी से नाता तोड़ कर अकाली दल और बीएसपी गठबन्धन मैदान में है। वहीं पंजाब के पूर्व मुख्यमन्त्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबन्धन किया है। इतना ही नहीं किसान आन्दोलन में शामिल रहे 22 संगठन भी संयुक्त समाज मोर्चा के मंच पर चुनाव लड़ रहा है। ऐसी अनिश्चितता के दौर में केजरीवाल ने अपना राजनीतिक भविष्य दांव पर लगाना उचित नहीं समझा और पंजाब से अपने पैर वापिस खींच लिए। पंजाब में आम आदमी पार्टी के लोग अब ‘इक मौका केजरीवाल नूं’ का नारा भुला कर ‘इक मौका भगवन्त मान नूं’ का नया नारा याद कर रहे हैं। 

जब 5 मिनट तक फ्लाइंग किस देते भगवंत मान बार-बार गिर रहे थे: AAP ने बनाया चेहरा तो बोले लोग – ‘उड़ते पंजाब का उड़ता CM’

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भगवंत मान (Bhagwant Mann) को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। भगवंत मान को लोग नेता के अलावा बतौर कॉमेडियन के रूप में भी जानते हैं। उन्हें सीएम उम्मीदवार बनाने की औपचारिक घोषणा करने के बाद से उनके पुराने फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे हैं।

ट्विटर पर यूजर्स भगवंत मान को ‘पेगवंत मान’ कहकर संबोधित कर रहे हैं। उनके पाँच साल पहले का फोटो शेयर कर रहे हैं, जब उन पर शराब पीकर जनसभा में पहुँचने के आरोप लगे थे और लगातार 5 मिनट तक फ्लाइंग KISS देते रहे थे।

ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, “पंजाब में सीएम उम्मीदवार के लिए ‘पेगवंत मान’ का चयन करना गलत है। वह गोवा में बेहतर सेवाएँ दे सकते हैं।”

वहीं संतोष कुमार नाम के यूजर ने लिखा, “केजरीवाल चले पंजाब को नशामुक्त करने, एक नशेड़ी के सहारे।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “पंजाब में दारू वाला, गोवा में फेनी वाला।”

पाँच साल पहले की बात है। मोगा की पुरानी अनाज मंडी में भगवंत मान एक जनसभा में पहुँचे थे, लेकिन जब वह बोलने उठे तो 5 मिनट तक ऑडियंस को फ्लाइंग किस ही देते रहे और बार-बार लड़खड़ाकर गिर रहे थे। संभले, उठे और फिर से फ्लाइंग किस देने लगे। बताया जाता है कि वह भाषण के दौरान एक बार भी सीधे खड़े नहीं हो पाए थे। किसी तरह सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें संभाला और सहारा देकर गाड़ी तक पहुँचाया था।

इसको लेकर कभी दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी रह चुके वकील प्रशांत भूषण ने ‘आप’ सांसद भगवंत मान पर शराब पीकर जनसभा को संबोधित करने का अरोप लगाया था। भूषण ने एक अखबार की फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा था, “आम आदमी पार्टी के स्‍टार परफॉर्मर भगवंत मान चुनावी बैठकों में शराब पीकर पहुँचे।”

अवलोकन करें:-

पंजाब में AAP का भगवत मान मुख्यमंत्री उम्मीदवार
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पंजाब में AAP का भगवत मान मुख्यमंत्री उम्मीदवार
पंजाब में ‘आम आदमी पार्टी’ ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोहाली के एक कार्यक्रम में मंगलवार (18 जनवरी 2022) को घोषणा करते हुए बताया कि 93.9% लोगों ने CM उम्मीदवार के रूप में भगवंत मान को अपनी पसंद बताया। वो 2014 से ही AAP से जुड़े हुए हैं। उससे पहले उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में संगरूर के लेहरा विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें हार नसीब हुई थी। अल्कोहल को लेकर उनकी समस्या को लेकर कई बार आवाज़ उठ चुके हैं। हालाँकि, वो पंजाब में नशा मुक्ति की बात करते हैं।

पंजाब में AAP का भगवत मान मुख्यमंत्री उम्मीदवार

पंजाब में ‘आम आदमी पार्टी’ ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पार्टी ने इसके लिए भगवंत मान का नाम आगे किया है। इससे पहले पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने एक मोबाइल नंबर जारी के के लोगों से कहा था कि वो AAP के किस नेता को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में देखना चाहते हैं, इस पर राय दें। बता दें कि लगभग सभी ओपिनियन पोल्स में पंजाब में AAP को बढ़त में दिखाया जा रहा है। अधिकतर सर्वे वहाँ AAP को बहुमत मिलता दिखा रहे हैं।

चर्चा यह है कि कुछ दिन पूर्व तक केजरीवाल पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी में शामिल कर मुख्यमंत्री बनाने की योजना पर काम कर रहे थे, परन्तु सिद्धू के विरोधी तेवर और दूसरे, मान को मुख्यमंत्री मनोनीत न करने से पार्टी में बगावत के डर से इतनी जल्दी निर्णय लिया गया है। 

भगवंत मान नेता के साथ-साथ अभिनेता भी हैं। उन्हें पहली बार लोकसभा के लिए 2014 के चुनाव में पंजाब के संगरूर से चुना गया था। 2019 में दोबारा जीत दर्ज करते हुए उन्होंने इस सीट को अपने पास ही रखा। 48 वर्षीय भगवंत मान ने ‘जगतार जग्गी’ नाम के कॉमेडी एल्बम से पंजाब में सुर्खियाँ बटोरी थीं। फिर उन्होंने ‘जुगनू कहंदा है’ नामक टीवी शो बनाया। राजनीति पर कॉमेडी शो करते-करते उन्होंने राजनीति को ही अपना पेशा बना लिया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोहाली के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि 93.9% लोगों ने CM उम्मीदवार के रूप में भगवंत मान को अपनी पसंद बताया। वो 2014 से ही AAP से जुड़े हुए हैं। उससे पहले उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में संगरूर के लेहरा विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें हार नसीब हुई थी। अल्कोहल को लेकर उनकी समस्या को लेकर कई बार आवाज़ उठ चुके हैं। हालाँकि, वो पंजाब में नशा मुक्ति की बात करते हैं।

पंजाब : कांग्रेस के बाद अब AAP में घमासान, मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं करने पर भगवंत मान नाराज

पंजाब कांग्रेस में चल रहा सियासी तूफान फिलहाल टल जरूर गया है, लेकिन ख़त्म नहीं हुआ है, क्योकि  पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के बगावती तेवरों ने साफ कर दिया कि आगे चलकर कांग्रेस का चुनावी सफर मुश्किल होने वाला है। उधर आम आदमी पार्टी में भी तूफान आने से पहले के संकेत दिखाई दे रही है, लेकिन अंदर-ही-अंदर सियासी घमासान जारी है। अभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करने से नाराज भगंवत मान ने पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बना ली है। वहीं उनके समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के लिए मुहिम चला रहे हैं।  

भगवंत मान को आखिरी बार 26 अगस्त को पंजाब में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में देखा गया था, लेकिन तब से अब तक वह पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं। हकीकत यह है कि प्रमुख अरविंद केजरीवाल भगवंत मान को पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने की बजाए किसी और पार्टी या सामाजिक संगठन से बड़े चेहरे की तलाश में है। दूसरी ओर, पंजाब आप के एक बड़े धड़े का कहना है कि पिछले सात सालों से पार्टी में सबसे सक्रिय रहने वाले भगवंत मान को दरकिनार किया जा रहा है।

भगवंत मान के समर्थक उनको दरकिनार किए जाने से नाराज हैं। समर्थकों का कहना है कि जब पार्टी के पास भगवंत मान जैसा सशक्त उम्मीदवार मौजूद है तो हम दूसरी पार्टियों में मुख्यमंत्री क्यों खोज रहे हैं? यही गलती हमने 2017 में भी की थी। आम आदमी पार्टी के कम से कम 5 से 6 विधायकों ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि भगवंत मान को पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में पेश किया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर मान समर्थकों ने पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा के सरकारी घर के बाहर प्रदर्शन किया था। 

फिलहाल भगवंत मान शांत हैं, लेकिन उन्‍होंने पंजाब के नए मुख्‍यमंत्री चन्‍नी को बधाई देकर राजनीतिक गलियारे में हलचल जरूर तेज कर दी है। वो खुद खुलकर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन अपने समर्थकों के माध्यम से पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के एक सीनियर विधायक ने कहा कि यह ठीक है कि मान पार्टी में ही बहुत लोगों को नाराज करके बैठे हैं लेकिन उनके बिना भी बात नहीं बनेगी। ऐसे में अगर पार्टी किसी दूसरे को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाती है, तो मान शांत नहीं बैठ सकते हैं और आम आदमी पार्टी की पंजाब ईकाई में सियासी उठा-पटक देखने को मिल सकता है।