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पंजाब : AAP के प्रोपेगंडा का पर्दाफाश; खर्च नहीं कर पाए पास पड़े 8000 करोड़ रूपए, केंद्र से माँगते रहे पैसे: भगवंत मान ने सचिवों को दिए ‘जुगाड़’ खोजने के निर्देश

           मोदी सरकार पर आरोप लगाती है AAP, CM भगवंत मान नहीं खर्च पा रहे फंड (चित्र साभार: Jagran)
भीषण आर्थिक संकट का सामना करने वाली पंजाब की ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) की सरकार केंद्र से मिले 8000 करोड़ रुपए को खर्च नहीं कर पाई है। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों से ऐसे जुगाड़ सोचने को कहा है कि जिससे यह पैसा केंद्र को लौटाना ना पड़े।

पंजाब की सरकार को यह धनराशि केंद्र से विकास कार्यों के लिए मिली थी। वित्त वर्ष 2023-24 के लगभग 8 महीने बीत जाने के बाद भी इसमें से पंजाब सरकार मात्र 3000 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई है। यह स्थिति तब है जब आए दिन भगवंत मान केंद्र से नए फंड माँगते रहते हैं। पंजाब की खराब आर्थिक स्थिति के चलते भगवंत मान यह तक कह चुके हैं कि उन्हें केंद्र सरकार उनके द्वारा लिए कर्जों पर पाँच साल ना लौटाने की छूट दे। मगर जितना पैसा केंद्र सरकार से मिल रहा है, उनके अधिकारी उसे ही नहीं खर्च कर पा रहे हैं और मान से यह शिकायत कर रहे हैं कि केंद्र उन्हें पैसा नहीं दे रहा।

अंग्रेजी समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ की एक खबर के अनुसार, हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान की राज्य के वरिष्ठ सचिवों के साथ हुई बैठक में यह पूरा मामला उठा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों पर इस बात के लिए गुस्सा जाहिर किया कि 8 महीने निकलने के बाद भी वह पैसा खर्च नहीं कर पाए हैं।

अगर नए बजट तक ऐसा नहीं होता है तो यह पैसा केंद्र सरकार को वापस चला जाएगा। सचिवों ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया है कि उन्होंने नए ठेके निकाल दिए हैं और जल्द ही वह फाइनल हो जाएँगे। ऐसे में यह धनराशि खर्च होगी और केंद्र को नहीं लौटानी पड़ेगी।

केंद्र से पहले ही मिले पैसे को खर्च ना कर पाने वाले अधिकारियों ने इस बैठक में भगवंत मान से शिकायत की कि उन्हें केंद्र सरकार ग्रामीण विकास समेत अन्य कई कामों के लिए पैसा नहीं दे रही है। उनकी यह भी शिकायत थी कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य विभाग का पैसा भी रोक रहा है। दरअसल, बीते दिनों केंद्र सरकार ने भगवंत मान को हिदायत दी थी कि पंजाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आम आदमी पार्टी मोहल्ला क्लीनिक बनाकर प्रचार कर रही है, ऐसे में इसकी फंडिंग भी वह खुद करे। इसी को लेकर भगवंत मान की सरकार बौखलाई हुई है।

वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक पंजाब पर वर्तमान में 3.12 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। वर्ष 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने से पहले यह कर्ज 2.82 लाख करोड़ रुपए था। भगवंत मान ने एक बयान में बताया था कि उनकी सरकार ने 18 महीनों में 47,107 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है।

अक्टूबर 2023 में भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को लिखे गए एक पत्र में माँग की थी कि वह प्रधानमंत्री मोदी को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच वर्षों के लिए कर्ज वसूली रोक दी जाए। इस भीषण आर्थिक संकट के बाद भी पंजाब सरकार केंद्र सरकार से मिले विकास के पैसे को भी खर्च नहीं कर पा रही है। जब पूछा जा रहा है तो आम आदमी पार्टी की सरकार को गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

जब इंदिरा गाँधी ने प्रधानमंत्री बनते ही पिता डॉ.के. सुब्रमण्‍यम को हटा दिया, राजीव ने जूनियर को दी वरीयता: डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री

                                                               साभार ANI 
आज कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर प्रश्न करने से पहले अपने शासन की कारगुजारी पर क्यों नहीं नज़र डालती? 
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर  (Dr. S.Jaishankar) ने न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) के साथ पोडकास्ट इंटरव्यू में कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि किस तरह पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और फिर राजीव गाँधी के कार्यकाल के दौरान उनके पिता डॉ.के. सुब्रमण्‍यम के साथ नाइंसाफी हुई थी। साक्षातकार के दौरान विदेश मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्री का पद दिए जाने के साथ उन पर भाजपा ज्वाइन करने का कोई दबाव नहीं था।

एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश सचिव (Foreign Secretary) से लेकर विदेश मंत्री (Foreign Minister) बनने तक के सफर पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे ब्यूरोक्रेट्स के परिवार से आते हैं और हमेशा एक बेहतरीन ऑफिसर बनना चाहते थे। अपने पिता को याद करते हुए जयशंकर ने बताया कि उनके पिता सचिव पद (1979) तक पहुँच गए थे।

एस जयशंकर ने अनुसार, जब 1980 में इंदिरा गाँधी की सरकार बनी तो उनके पिता के जयशंकर को उनके पद से हटा दिया गया। के जयशंकर उस वक्त डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में सचिव थे। जयशंकर ने बताया कि उनके पिता संभवतः पहले सचिव थे जिन्हें इंदिरा गाँधी ने सरकार बनने के बाद सबसे पहले हटाया था। एस जयशंकर ने बताया कि राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री रहते हुए भी के. जयशंकर को नज़रअंदाज किया गया और उनके जूनियर को कैबिनेट सचिव बनाया गया।

एएनआई को दिए तकरीबन पौने 2 घंटे के साक्षातकार में यह हिस्सा 12 वें मिनट से सुना जा सकता है। इस दौरान एस. जयशंकर ने अपने विदेश सचिव से विदेश मंत्री बनने तक के घटनाक्रम पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 2019 में कैबिनेट का हिस्सा बनने के लिए कॉल किया था। जयशंकर ने कहा कि यह पूरी तरह से चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें भाजपा ज्वाइन करने को लेकर जोर नहीं दिया गया।

एस जयशंकर ने कहा कि बीजेपी में शामिल होने का फैसला उनका अपना था। उन्होंने कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन अपने उत्तरदायित्व के ईमानदारी के साथ निर्वहन और नेतृत्व का सहयोग प्राप्त करने के लिए उन्होंने भाजपा को चुना।

एस. जयशंकर कहते हैं कि उनके पिता एक ईमानदार व्यक्ति थे। हो सकता है इसकी वजह से समस्या हुई हो। उसके बाद वो कभी सचिव नहीं बने। जयशंकर ने बताया कि परिवार में इस बात को लेकर कभी चर्चा तो नहीं हुई लेकिन जब उनके बड़े भाई सचिव बने तो पिता काफी खुश हुए थे। बाद में एस. जयशंकर भी विदेश सचिव बने, हालाँकि तब तक उनके पिता का निधन हो चुका था। पिता ने भले ही उन्हें सचिव के पद पर नहीं देखा, लेकिन पिता के रहते जयशंकर ग्रेड वन तक पहुँच चुके थे जो सेक्रेटरी के बराबर का ही रैंक होता है।