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बंगाल: BJP सांसद अर्जुन सिंह की कार पर फेंका बम

मुस्लिमों का उग्र प्रदर्शन
नागरिकता संशोधन बिल पारित होने के बाद से देश में हो रहे उपद्रव के पीछे छद्दम धर्म-निरपेक्ष पार्टियों का हाथ बताया जा रहा है। जिसका कारण है इस बिल के कानून बनने से सरकार ने इनके वोटबैंक पर जबरदस्त हमला बोला है। 
दरअसल, अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, अफगानी, और अन्य लोगों के राशन कार्ड, मतदाता सूची में नाम, और आधार कार्ड आदिसरकारी सुविधाएं देकर अपने वोटबैंक को संजोए हुए थे। लेकिन उसी धराशाही होते देख, मुस्लिमों में डर का माहौल पैदा कर उपद्रव करवाया जा रहा है।  
नागरिकता संशोधन कानून (CAB) के खिलाफ पश्चिम बंगाल में हिंसक प्रदर्शन के बीच बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह पर हमले की खबर है। हालाँकि हमले में सांसद बाल-बाल बच गए, लेकिन इस अन्य शख्स जख्मी हो गया। घायल का नाम गणेश सिंह बताया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने बताया, “मैं कनकिनारा से लौट रहा था। मेरी कार के ऊपर ईंट से हमला किया गया और उसके बाद गाड़ी के नजदीक बम फेंका गया। पश्चिम बंगाल में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।”
हमले में घायल गणेश सिंह को सांसद अर्जुन सिंह ने ही भाटपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल पहुँचाया। हालत गंभीर होने पर उसे कल्याणी जेएनएम हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है।
बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने हमले के लिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी कार पर ईंट फेंके। इसके बाद मैं अपनी कार से बाहर आया और देखा कि एक व्यक्ति जमीन पर पड़ा है। उस व्यक्ति का नाम गणेश सिंह है। वह शराब के नशे में था। इसके बाद अचानक मेरी कार पर बम फेंका गया।” अर्जुन सिंह जब गणेश सिंह को लेकर हॉस्पिटल पहुँचे थे, तो उस समय भी उनकी टीएमसी के कार्यकर्ताओं के साथ बहस हुई थी।
इस घटना के बाद से भाटपाड़ा में एक बार फिर तनाव पसर गया है। तनाव को देखते हुए यहाँ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना ना हो। गौरतलब है कि इससे पहले भी भाजपा सांसद अर्जुन सिंह पर जानलेवा हमला हुआ हो चुका है। जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थीं।
इसी साल सितंबर में उत्तरी-24 परगना जिले में भी एक हमले में अर्जुन सिंह घायल हो गए थे, जिसमें उनके माथे पर कुछ टाँके लगे थे। दरअसल टीएमसी के लोग भाजपा के कार्यालय पर कब्जे की कोशिश कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब सिंह मौके पर पहुॅंचे तो उनकी कार में तोड़फोड़ की गई। इस हमले के पीछे भी उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं हाथ बताया था।
इसके अलावा जुलाई में भी अर्जुन सिंह के उत्तर-24 परगना के भाटपाड़ा स्थिति आवास के बाहर बम फेंके जाने का मामला सामने आया था। सिंह ने इस हमले के पीछे भी टीएमसी कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप लगाया था। वहीं मई में लोकसभा चुनावों के दौरान भी अर्जुन सिंह ने बैरकपुर में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा उन पर हमले का आरोप लगाया।

CAB के विरोध में बंगाल में जुमे की नमाज के बाद कई जगहों पर हिंसा देखने को मिली थी। मुर्शिदाबाद जिले में एक रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार शाम हजारों की भीड़ ने आगजनी की थी। पूर्वी मिदनापुर जिले में भाजपा महासचिव सायंतन बसु की कार पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था। हिंसा का हवाला देते हुए भाजपा महासचिव और बंगाल के पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इन्हीं हालातों से निपटने के लिए एनआरसी जरूरी है।
हिंसा का एक वीडियो ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है, “जो ये सवाल उठा रहे हैं कि एनआरसी क्यों जरूरी है, उन्हें बंगाल की हालत पर नजर डालनी चाहिए। यहाँ हिंसा और आगजनी की घटनाओं में वही घुसपैठिए संलग्न हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने वोट बैंक की खातिर राज्य में बसा रखा है। इन्हें खदेड़ने के लिए ही ऐसा कानून जरूरी है।”

पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के मुसलमानों को भी मिलेगी नागरिकता

पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के मुसलमानों को भी मिलेगी नागरिकता, ये है नियमनागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो चुका है. अब राष्ट्रपति का मुहर लगते ही ये कानून बन जाएगा. नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर अब भी कई सवाल उठ रहे हैं. नए नागरिकता कानून के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के वैसे हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्हें वहां धर्म के आधार पर प्रताड़ना सहनी पड़ी हो. नए कानून से मुसलमानों को अलग रखा गया है. इसी को लेकर सारा विवाद है.
नए नागरिकता कानून पर एक सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को भारतीय नागरिकता नहीं मिलेगी? और अगर इन देशों के मुसलमानों को नागरिकता मिलेगी तो उसका कानून क्या है?
how muslim of pakistan bangladesh and afghanistan can get indian citizenship know the ruleपुराने कानून के मुताबिक मुसलमान भी हासिल कर सकते हैं नागरिकता
नए कानून के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान भारतीय नागरिकता हासिल करने का दावा नहीं कर सकते हैं. लेकिन विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने के पुराने कानून के मुताबिक वो नागरिकता पाने का आवेदन कर सकते हैं.
इसका मतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक के कानून बनने के बाद भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान भारतीय नागरिकता हासिल कर सकते हैं. इसके लिए बस उन्हें नागरिकता के पुराने कानून की मदद लेनी होगी. नागरिकता के पुराने कानून के मदद से ही सिंगर अदनान सामी ने भारतीय नागरिकता हासिल की थी.
how muslim of pakistan bangladesh and afghanistan can get indian citizenship know the ruleकैसे हासिल की थी अदनान सामी ने भारतीय नागरिकता
2016 में मोदी सरकार ने ही पाकिस्तानी मूल के सिंगर अदनान सामी को भारतीय नागरिकता दी थी. अदनान सामी ने नागरिकता हासिल करने के नियम कायदों के मुताबिक गृहमंत्रालय को आवेदन किया था. जिसको मानते हुए सामी को नागरिकता मिली थी.
अदनान सामी पहली बार विजिटर्स वीजा पर 13 मार्च 2001 को भारत आए थे. इसके बाद उनके वीजा की अवधि बढ़ती रही. उन्होंने बॉलीवुड के लिए कई गाने गाए और काफी मशहूर हुए. इस दौरान 26 मई 2015 को उनका पासपोर्ट एक्सपायर कर गया. पाकिस्तान सरकार ने उनके पासपोर्ट को रिन्यू नहीं किया. इसके बाद अदनान सामी ने भारत की नागरिकता हासिल करने का आवेदन दिया. जिसके बाद 1 जनवरी 2016 को उन्हें भारत सरकार ने नागरिकता प्रदान की.
संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक की चर्चा करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने भी अदनान सामी का जिक्र किया और कहा कि जिस तरह से सामी को भारत की नागरिकता दी गई, उसी तरह से पुराने कानून के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को भी आवेदन करने पर नागरिकता देने की प्रक्रिया जारी रहेगी. हालांकि नए कानून के मुताबिक धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर उनके नागरिकता के दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
विदेशी मुसलमान ऐसे हासिल कर सकते हैं भारतीय नागरिकता
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान नागरिकता हासिल करने की नेचुरलाइजेशन पद्धति से भारत की नागरिकता पाने के लिए दावा कर सकते हैं. इस बारे में सिटीजनशिप एक्ट 1955 में कानूनन प्रावधान है. इस नियम के मुताबिक कोई भी ऐसा आदमी जो 12 साल से भारत में निवास कर रहा हो, इसमें आवेदन करने से पहले वो एक साल तक लगातार भारत में रहा हो, इसके अलावा उसने कुल 11 साल का वक्त भारत में रहकर बिताया हो, वो भारतीय नागरिकता हासिल करने का दावा कर सकता है. इसके साथ ही वो सिटीजनशिप एक्ट के तीसरे अनुसूची में निर्धारित योग्यता को पूरा करता हो. अदनान सामी को इसी आधार पर भारतीय नागरिकता हासिल हुई थी.
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पर जवाब देते हुए इसका जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि ये बिल किसी भी तरह से एंटी मुस्लिम नहीं है. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को पहले के कानून के मुताबिक भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हाल के वर्षों में करीब 566 मुसलामनों को इसी तरह से भारतीय नागरिकता दी गई है.

Citizenship Amendment Bill 2019 : प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी विधायक के घर में लगाई आग

Citizenship Amendment Bill 2019 का विरोध, बीजेपी विधायक के घर में लगाई आगनागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे लोगों ने असम में भारतीय जनता पार्टी के विधायक के घर में आग लगा दी. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना राज्य के चबुआ की है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार डिब्रूगढ़ जिला स्थित चबुआ में भाजपा विधायक बिनोद हजारिका के घर में आग लगा दी. बताया गया कि कम एक सर्किल ऑफिस में भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी.  CAB 2019 का विरोध कर रहे लोगों ने गाड़ियों में आग भी लगा दी.
वहीं जानकारी है कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स को मदद देने के लिए राज्य में राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ी भी पहुंचेगी. बताया गया कि अब तक असम में 5 कॉलम और त्रिपुरा में 3 कॉलम मिलिट्री तैनात कर दी गई है.
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नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी - हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है. यह विधेयक बुधवार को राज्यसभा से पारित किया गया. इस विधेयक के पारित होने के पहले भी पूर्वोत्तर में कई जगहों पर प्रदर्शन किये गए.
इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई रोक की अवधि को बढ़ाया
इससे पहले असम के दस जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई रोक की अवधि को बृहस्पतिवार की दोपहर 12 बजे से 48 घंटे के लिए और बढ़ा दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि शांति भंग करने के लिए सोशल मीडिया का ‘दुरुपयोग’ रोकने और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के वास्ते इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई गई थी.
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह और राजनीतिक विभाग) संजय कृष्णा ने बताया कि लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप में इंटरनेट सेवाएं बाधित रहेंगी. नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच बुधवार की शाम सात बजे इंटरनेट सेवाएं स्थगित कर दी गई थीं.