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छाज बोले सो बोले छलनी बोले जिसमें 72 छेद

मनोज चतुर्वेदी, समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-पत्र 

(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

एक कहावत है कि छाज बोले सो बोले, छलनी बोले जिसमें 72 छेद। यह कहावत उत्तरप्रदेश की राजनीति में जातिवादी और साम्प्रदायिक तड़का लगाने वाले लाल टोपिधारियों पर बिल्कुल फिट बैठती है।

आज वह लोग योगी सरकार को कानून व्यवस्था सुधारने की सीख दे रहे हैं जिनके ख़ुद के शासनकाल में खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई गईं।

अखिलेश के कार्यकाल में हिन्दू पूजा पद्द्ति पर कुठाराघात हुए, चौरासी कोसी परिक्रमा पर आघात हुए, मुज़फ्फरनगर हिन्दू विरोधी दंगे, महिलाओं का बलात्कार, गुंडागर्दी, लूटपाट आदि आदि। इतना ही नहीं, इनके पिता मुलायम सिंह के कार्यकाल में निहत्ते राम भक्तों पर गोलियां चलवा दीं। लेकिन आज जब वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन सब कुकर्मों को समाप्त कर रहे हैं, समाजवादी पार्टी को बर्दाश्त नहीं हो रहा। 

योगी को अखिलेश यादव की नींद और रोटी हराम करने के लिए मुज़फ्फर नगर दंगों की फाइल खोल कार्यवाही करनी चाहिए। 

अखिलेश से पूछो कि जब इस नगर अध्यक्ष द्वारा एक दलित के मुंह में पेशाब करने पर क्या कार्यवाही की थी? 

उत्तरप्रदेश के इटावा के सैफई महोत्सव में समाजवादी पार्टी के संस्थापक माननीय मुलायम सिंह यादव के भाई और दिग्गज नेता रामगोपाल यादव ने अखिलेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था-चुनावी एजेंडे में हमने ग़रीब जनता से वायदा किया था कि ग़रीब सर उठाकर चलेंगे और अपराधी सर झुकाकर चलेंगे। लेकिन हमारी सरकार के नेताओं के संरक्षण में अपराधी सर उठाकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री जी गुंडागर्दी बन्द कराइये, वरना हमारी सत्ता दोबारा नहीं आने वाली।"

2012 में यूपी में संभल के भीम नगर में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार की जीत के बाद निकाले गए जुलूस में गोली चलने से एक नौ साल के बच्चे की मौत हो गई थी। जुलूस को देखने के लिए जमा हुई भीड़ में यह बच्चा भी शामिल था। चश्मदीदों के मुताबिक जीत के नशे में चूर समाजवादी कार्यकर्ता जुलूस के दौरान हवा में गोलियां चला रहे थे। अचानक एक गोली एक बच्चे को लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बच्चा पास में ही एक फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर का बेटा था।

अपराध और भयमुक्‍त प्रदेश का दावा करने वाली सपा सरकार की पोल एनसीआरबी ने खोल दी। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012-13 में रेप के मामलों में 55 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2012 में 5,676 दंगों के मामले दर्ज किए गए, साल 2013 में यह आंकड़ा बढ़कर 6089 हो गया। 

दिल्ली - कानपुर हाईवे ( एनएच-91) पर  मां-बेटी गैंगरेप हुआ। जिसमें एक पूरे परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट की गई और परिवार की दो महिलाओं जो कि रिश्ते में माँ-बेटी थीं, के साथ कई लोगों ने बलात्कार किया। हैवानियत का यह नँगा नाच 4 घण्टे तक चलता रहा।

2012 में यूपी में कुल 227 दंगे हुए. 2013 में 247. 2014 में 242. 2015 में 219. 2016 में भी 100 के ऊपर हो चुके थे. (स्रोत-लल्लन टॉप.कॉम)

मुजफ्फरनगर दंगों में बड़ी जनधन हानि हुई थी। हजारों लोग बेघर हो गए थे, जब यह लोग शिविरों में ठिठुर रहे थे तब अखिलेश यादव सैफई में सलमान खान के ठुमके देख रहे थे।

रामवृक्ष यादव द्वारा 280 एकड़ सरकारी जमीन पर किये गए अतिक्रमण को हटाने गई पुलिस टीम पर हमला हो गया. एसपी और एसएचओ मारे गये. 23 पुलिसवाले अस्पताल में भर्ती हुए. जवाहर पार्क में रामवृक्ष यादव ने कब्जा जमा रखा था. पूरी सेना बना रखी थी. पुलिस के साथ लड़ाई चली. कुल 24 लोग मारे गये. चारों ओर से खुसुर-फुसुर होने लगी कि रामवृक्ष को सपा नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त था. क्योंकि बिना उसके इतनी बड़ी घटना नहीं हो सकती. सवाल ये है कि सरकार क्या कर रही थी इतने दिन तक. किसने उसे प्रश्रय दिया था. क्या सरकार अनजान थी. तब तो ये और ज्यादा खतरनाक हो जाएगा. क्या अखिलेश को इसके बारे में पता नहीं था?

 बदायूं में दो नाबालिग लड़कियों के साथ रेप किया गया और उनकी लाश को पेड़ पर लटका दिया गया था। इस नृशंस कांड में तत्कालीन सपा सांसद के कुछ करीबियों का नाम सामने आया था।

शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जलाया गया. इसमें भी सपा के एक मंत्री का नाम आया. क्या वो मंत्री अभी जेल में है? नहीं. ये मामला ही पता नहीं कहां चला गया. जबकि मरते हुए जगेंद्र ने बयान दिया था कि मंत्री राममूर्ति वर्मा की शह पर पुलिस ने जलाया था. इस बयान को आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने ही रिकॉर्ड किया था. राममूर्ति स्टेट बैकवर्ड क्लासेज मिनिस्टर थे. इस मामले की गवाह थी एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता. और विडंबना ये है कि उसी औरत ने मूर्ति और उनके लोगों पर रेप का इल्जाम लगाया था. जगेंद्र ने इसी औरत के लिए लड़ाई लड़ी थी. 

यह घटनाएं तो केवल बानगी भर हैं, सपा सरकार के पांच वर्षों का लेखाजोखा तो इससे कई गुना अधिक है। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे माफिया और गुंडों को संरक्षण देने वाली सपा सरकार 2012 में जब जीत कर आई थी, तो उसके निरंकुश कार्यकर्ताओ ने कई जगहों पर हिंसा की थी। मीडिया स्रोतों की माने तो कई जगहों पर तो थाने भी फूंक दिए गए थे।

अवलोकन करें:-

वेंकैया नायडू ने मायावती की भाषा में दिया करारा जवाब

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वेंकैया नायडू ने मायावती की भाषा में दिया करारा जवाब
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आज वही समाजवादी पार्टी प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर प्रवचन कर रही है। इसे कहते हैं छाज बोले सो बोले, छलनी बोले जिसमें 72 छेद।

मुजफ्फरनगर दंगा 2013: दो युवकों की हत्या मामले में सात आरोपियों को उम्रकैद की सजा


स्थानीय अदालत ने 2013 मुजफ्फरनगर दंगों (Muzaffarnagar Riot) की शुरुआत से पहले हुई दो युवकों की हत्या मामले में सात लोगों को दोषी करार दिया था आज (फरवरी 8)इन सातों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इनमें से एक आरोपी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ था। कहा जाता है कि 2013 में इन्हीं दोनों युवकों की हत्या के बाद मुजफ्फरनगर दंगे भड़के थे।
2013 का वो साल था और देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। अखिलेश यादव उस सरकार की अगुवाई कर रहे थे। लेकिन मुजफ्फरनगर की धरती पर एक ऐसे गुनाह की साजिश रची गई थी जिसमें 65 लोगों के लहू से वहां की जमीन लाल हो गई और करीब 50 हजार लोग अपनी ही जमीन पर अपने ही समाज में बेसहारा हो चुके थे। खौफ का वो आलम था जिसकी वजह से लोगों को अपनों पर से ऐतबार उठ चुका था। इन सबके बीच एक जगह जो सबसे ज्यादा चर्चा में रही उसका नाम कवाल था। सवाल उठता है कि क्या कवाल कांड की वजह से ही 65 लोगों की जान चली गई। जो लोग गंगा यमुना के दोआब में भाईचारे के साथ रह रहे थे वो एक दूसरे के खून के प्यासे हो चुके थे। अदालत ने फरवरी 6 को सात लोगों को गौरव और सचिन की हत्या का दोषी करार दिया।
जिले के सरकारी वकील राजीव शर्मा ने बताया कि अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश ने 27 अगस्त, 2013 को युवकों की हत्या और दंगों के मामले में मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुरकान, नदीम, जनांगिर, अफजल और इकबाल को दोषी करार दिया था।
सरकारी वकील अंजुम खान के मुताबिक, बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ। पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाने के कारण मुजम्मिल को अदालत नहीं लाया जा सका था।
2013 Muzaffarnagar riots: The 7 convicts - Muzammil, Mujassim, Furkan, Nadeem, Jahangir, Afzal and Iqbal - are accused of killing 2 people - Gaurav and Sachin - and rioting in Kawal village.
इस हत्या के बाद ही 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा भड़का था, जिसमें करीब 60 से अधिक लोग मारे गए थे। प्रथम सूचना रिपोर्ट के मुताबिक, जनसठ थाना अंतर्गत कवाल गांव के दो युवकों की हत्या कर दी गयी थी।
kawal riotआंकड़ों के मुताबिक 2013 के दंगे के बाद 6,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और दंगे में कथित भूमिका के लिए 1480 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
स्मरण हो यही वो दंगा था, जिसका दोष भाजपा पर लगाया गया था, यही वो दंगा था जिसमे समाजवादी पार्टी, तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह और इनके कद्दावर नेता आज़म खान ने नंगा नाच किया था। और इनकी हिन्दू विरोधी दंगे की मंशा को टक्कर दी थी, भाजपा विधायक हुकुम सिंह(अब स्वर्गीय) और संगीत सोम ने। 
कवाल गांव जानसठ तहसील में आता है। 27 अगस्त 2013 को कवाल गांव में दो ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के बाद दो समुदाए के बीच नफरत की चिंगारी ऐसी भड़की कि पिछले 72 साल से भाई-चारे और मुहब्बत के साथ रहते चले आ रहे दो समुदाए एक- दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे। इस दोहरे हत्याकांड के बाद मुजफ्फरनगर और शामली की धरती लहू से लाल हो गई थी।
दरअसल कवाल के रहने वाले शाहनवाज और मुजस्सिम की बाइक से गौरव की साइकिल भिड़ गई थी। सचिन, गौरव और शाहनवाज-मुस्सिम के बीच की कहासुनी हत्याकांड तक पहुंच गई। इस मामले में आरोपी पक्ष के शाहनवाज की भी मौत हो गई थी।
इस घटना के  बाद मृतक गौरव के पिता रविंद्र सिंह की ओर से जानसठ कोतवाली में कवाल के मुजस्सिम व मुजम्मिल पुत्र नसीम, फुरकान पुत्र फजला, जहांगीर, नदीम, शाहनवाज (मृतक) पुत्रगण सलीम, अफजाल व इकबाल पुत्रगण बुंदू के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मृतक शाहनवाज के पिता सलीम ने भी मृतक सचिन और गौरव के अलावा पांच परिजनों के खिलाफ जानसठ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल ने जांच के बाद शाहनवाज हत्याकांड में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।    

क्या आतंकियों का गढ़ बन रहा पश्चिम यूपी?

आतंकियों का गढ़ बन रहा पश्चिम यूपी! 10 से अधिक आतंकी संगठन हैं सक्रिय
उत्‍तर प्रदेश आतंकियों के गढ़ के रूप में उभर रहा है। पश्चिम यूपी में आतंकी पनाह लेकर बड़े स्‍तर पर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। यह बात जांच एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से सामने आई है।  इसके अनुसार पश्चिम उत्‍तर प्रदेश में 10 से अधिक आतंकी संगठन सक्रिय हैं। जिन जिलों में आतंकी संगठन सक्रिय हैं, उनमें सहारनपुर, शामली, अमरोहा, आगरा, मेरठ, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और हापुड़ शामिल हैं। 
कहा जा रहा  है कि इन आतंकियों के खिलाफ जांच कर रही जांच एजेंसियों ने पिछले 10 सालों का ब्यौरा भी खंगालना शुरू कर दिया है। पिछले दस साल में अमेरिका में पकड़े गए पाकिस्‍तानी आतंकवादी डेविड हेडली, तसव्वुर राणा और अलकायदा आतंकी इलियास कश्मीरी तक की मेरठ में गतिविधियां पाई गईं थी। 
स्मरण हो, अक्टूबर 2013 में पूर्व तत्कालीन मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में मुज़फ्फर नगर दंगा हुआ था, जिसमे अखिलेश ने आर्मी की सहायता भी ली थी। आर्मी के सक्रिय होते ही, अखिलेश की रातों की नींद और रोटी हराम हो गयी। आर्मी को छापेमारी के दौरान घरों के साथ-साथ मस्जिदों तक में से इतना असला बरामद हुआ, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। उस समय प्राप्त समाचारों के अनुसार आर्मी साहिबाबाद से लेकर सहारनपुर तक तलाशी की योजना बना ही रही थी कि तुष्टिकरण के पुजारी अखिलेश यादव ने केन्द्र की सहायता से आर्मी कार्यवाही को रुकवा दिया। जिस व्यापक स्तर पर आर्मी छापेमारी कर रही थी, उससे अखिलेश ही नहीं छद्दम धर्म-निरपेक्षों को अपने वोट बैंक की चिन्ता हो गयी। यदि अखिलेश और उनके समर्थक छद्दम धर्म-निरपेक्षों ने अपने वोट की बजाए प्रदेश और देशहित के बारे में सोंचा होता, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आतंकियों का गढ़ नहीं बनता। 
2013 में हुए मुज़फ्फर नगर दंगे 
उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ को इस दंगे की फाइलों को भी खंगालने की जरुरत है।इसी दंगे के दौरान जब हिन्दू पुलिसकर्मियों  ने कुछ मुस्लिम दंगाइयों को पकड़ जब थाने में लाकर बंद कर दिया, एक मुस्लिम अधिकारी ने तुरन्त यह कहते हुए रिहा कर दिया था "पहले मैं एक मुसलमान हूँ, बाद में पुलिस अधिकारी..." जिस पर तत्कालीन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने उस मुस्लिम अधिकारी की पीठ भी थप-थपाई थी। जिसका उल्लेख उस समय एक पाक्षिक को सम्पादित करते, विस्तार से प्रकाशित किया था। यदि उस मुस्लिम अधिकारी की बजाए किसी हिन्दू पुलिस ने ऐसा किया होता, समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष चील-कौओं की भांति उस हिन्दू पुलिस अधिकारी को नोंचकर खाने को तैयार हो जाते। पता नहीं लाइन हाज़िर करवाने के अलावा कितने आरोप लगाकर शायद नौकरी से भी निकलवा देते।    
चित्र में ये शामिल हो सकता है: 3 लोग
संभावित सक्रिय आतंकी संगठन
जांच एजेंसियां पिछले दस सालों के ब्यौरे से जानकारी लेकर जिनकी तलाश कर रही हैं, उनमें मेरठ में सलमान, मुजफ्फरनगर में हाफिज, शहजाद और इकबाल, आगरा में सालार, मुरादाबाद में मो. हनीफ प्रमुख रूप से शामिल हैं
। जांच एजेंसियों के अनुसार पश्चिमी यूपी में अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, हूजी, इस्‍लामिक स्‍टेट, आईएसआईएस, सिमी। 
पुराना रहा है इतिहास
26 जनवरी, 2010 को मेरठ की रूबी और पाकिस्तानी असद को रुड़की (हरिद्वार) में गिरफ्तार किया गया था। असद नाम बदलकर रह रहा था और पासपोर्ट भी बनवाया. दोनों आइएसआइ एजेंट बताए गए थे। 11 जनवरी 2010 को आबूलेन में आइएसआइ एजेंट नासिर गिरफ्तार हुआ। 12 सितंबर, 2009 को कानपुर में पकड़े आईएसआई एजेंट इम्तियाज, 10 जनवरी 2009 को कैंट में पकड़े गए आईएसआई एजेंट अमीर अहमद, 2 जून 2011 को रुड़की में पकड़ा गया मेरठ निवासी आइएसआइ एजेंट फुरकान अहमद उर्फ अजय ने मेरठ से कनेक्शन होने का खुलासा किया। अजय से ही पूछताछ में खुलासा हुआ कि जयपुर सीरियल ब्लास्ट में शामिल शमीम बागपत के किरठल का निवासी था और वह हूजी का कमांडर है। 
मुजफ्फरनगर: बुढ़ाना के गांव जौला से आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद का कमांडर मोहम्मद वारिस गिरफ्तार हुआ था। अटारी बार्डर पर हेरोइन के साथ कांधला निवासी साबिर और नसीरन पकड़ी गई थी। आठ साल पहले महलकी निवासी नेत्रहीन कारी सलीम गिरफ्तार किया गया था। 
सहारनपुर: शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल पटियाला में पकड़ा गया था। सहारनपुर में उसने जन्म प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया था। दो कश्मीरी छात्र पकड़े, जो चार महीना पहले ही मेरठ जेल से सजा पूरी होने के बाद छूट गए। अयोध्या में आतंकी हमले की साजिश से जुड़ा एक आरोपी डाक्टर सहारनपुर के तीतरो से गिरफ्तार हुआ था। 
शामली: वर्ष 2005 में एसटीएफ ने पांच किलो आरडीएक्स और अत्याधुनिक असलहों के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जो जम्मू कश्मीर निवासी थे। कैराना निवासी इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तान में रहकर नकली नोटों के नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। गठरी उद्योग के जरिये समझौता एक्सप्रेस से कैराना पहुंची 40 पिस्टल बरामद हुई थीं। 
बिजनौर: दिल्ली में गिरफ्तार किए गए जनपद निवासी दो युवक आतंकी संगठन हूजी के लिए काम कर रहे थे। बिजनौर से मुकीम और नासिर को गिरफ्तार किया गया। 
हापुड़: पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा गिरफ्तार किया गया। हापुड़ से चार आतंकी गिरफ्तार हुए थे, जिन पर पोटा भी लगा था। 
आगरा: जनवरी निवासी मेहरुन्निसा उर्फ ज्योति अक्टूबर 2009 में कोलकाता में गिरफ्तार हुई उसने मेरठ में दर्जनभर एजेंट बनाए। 
हाल ही में राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली में छापेमारी करके बड़े स्‍तर पर आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट (आईएसआईएस) के मॉड्यूल के संदिग्‍ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है।इनके पास से बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार भी बरामद किए गए थे। एनआईए इस मामले में लगातार छापेमारी कर रही है।