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पंजाब का हो रहा ईसाईकरण; पगड़ी-कड़ा वाले ईसाई चारों तरफ; कहाँ है अकाल तख़्त? क्या कर रही है सिख संगत? क्या पंजाब सरकार और शिरोमणि प्रबंधक कमेटी सो रही है?

             पंजाब में ईसाइयत स्थानीय रूप ले चुकी है (फोटो साभार : Ankur Narula Ministries/YT)
किसी सिख द्वारा जाने-अनजाने कोई गलत काम होने पर अकाल तख़्त उसे तनखैया घोषित कर देता और जितने भी सिख संगठन है सभी अकाल तख़्त का समर्थन करते हैं, लेकिन अकाल तख़्त की नाक के नीचे सिख धर्म को कुचला जा रहा है, सिखों का ईसाईकरण हो रहा है अकाल तख़्त और अन्य सिख संगठन खामोश क्यों? क्या कर रही है भगवंत सिंह मान सरकार? क्या पंजाब सरकार के साथ प्रशासन भी सो रहा है? क्या सिखों को ईसाइयत बनाने का काम उनके इशारे पर हो रहा है? यदि समय रहते अकाल तख़्त और अन्य सिख संगठनों ने कार्यवाही नहीं की, फिर वो दिन भी अधिक दूर नहीं जब गुरुद्वारा गोल्डन टेम्पल चर्च न बन जाए?      

पंजाब में ईसाइयत तेजी से पैर पसार रही है। इस बार ईसाई बनाने वालों ने नई तरकीब अपनाई है। नए ईसाइयों का नाम पीटर, जॉन या रिचर्ड नहीं है। नए ईसाई गुरविंदर, प्रीतिंदर या जसप्रीत जैसे ही नाम वाले हैं। उनके सिरों पर सिक्खी की पहचान पगड़ी भी है। कई के हाथ में पंच ककार की पहचान बताने वाला कड़ा भी है। लेकिन उनकी जबान पर नाम नानक जी का नहीं बल्कि यीशु मसीह का है। ईसाइयत का यह स्थानीय वर्जन हर तरीके की समस्या हल करने का दावा करता है। कोट पैंट पहनने वाले पास्टर चमत्कार दिखाते हैं।

ईसाइयत का हो गया लोकलाइजेशन

 विज्ञान में एक थ्योरी है, अगर आप एक मेंढक को उबलते पानी में डाल देंगे, तो वह उछल कर भाग जाएगा। लेकिन आप ठन्डे पानी में मेंढक को डाल दें और धीमे-धीमे पानी गरमाएँ, तो अपनी ऊर्जा नए तापमान पर एडाप्ट होना में लगाएगा और जबतक तापमान उसे जलाने के स्तर तक पहुँचेगा, वह अपनी शक्ति खो चुका होगा। पंजाब और ईसाइयत का यही नाता है। पंजाब में ईसाइयत को फ़ैलाने वालों ने लोगों को धीमे-धीमे तरबियत देना चालू किया है। नई मिशनरियाँ ना किसी को नाम बदलने को कहती हैं, ना ही अपनी पहचान।

                                       किताबों का बदला स्वरुप (साभार: आजतक)

आजतक की एक ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि पंजाब के सीमाई इलाकों में बड़ी संख्या में चर्च और मिनिस्ट्री (जहाँ पास्टर रहते हैं और ईसाइयत से जुड़े काम होते हैं) फैली हुई हैं। रिपोर्ट बताती है कि यहाँ चर्च का नाम बदल कर ‘यहोवा दा मंदिर’ हो गया है। पास्टर यानी पादरी को ‘पापा जी’ कहा जाता है। बाइबल और बाकी किताबों को ‘पवित्र शास्त्र’ या ‘नीतिवचन’ जैसे नामों से चलाया जाता है। यहाँ तक कि यीशु की प्रार्थना में गाए जाने वाले ईसाई भजन भी पंजाब में आकर टप्पे (स्थानीय संगीत) और भजन का रूप ले लिया है।

अगर आप भजन के बोल पर ध्यान ना दें, तो शायद बता भी ना पाएँ कि कोई यीशु की शान में कसीदे पढ़ रहा है। पंजाब में ईसाइयत का नया ढाँचा आपकी पहचान नहीं बदलता, आपके विचार जरूर बदल देता है। आपको अपने मूल धर्म से दूर कर देता है। यह काफी सोच समझ कर किया गया है। ईसाइयत में लाए जा रहे लोगों को लगता है कि कुछ भी ऐसा नहीं बदल रहा जो उनको बाहर से दिखे, ऐसे में क्या बुराई है। इन्हीं को ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’ कहते हैं।

चमत्कार की कहानी, पवित्र तेल और गवाहियाँ

आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, ईसाइयत को फैलाने के लिए बनाई गई मिनिस्ट्री का रकबा एकड़ों में है। ऐसी ही एक मिनिस्ट्री में आजतक की एक पत्रकार पहुँची थी। यह पास्टर अंकुर नरूला की थी। यहाँ विश्व का चौथा सबसे बड़ा चर्च बन रहा है। रिपोर्ट बताती है कि इस संस्थान के भीतर हर कदम पर वो लोग खड़े हैं, जो अपनी चमत्कार की कहानी सुनाते हैं। सारी कहानियों में ईसाइयत या फिर ‘पापा जी’ की शरण में आने से पहले की दुखभरी कहानी होती है, जबकि शरण के बाद सारी समस्याएँ खत्म हो चुकी होती हैं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ मिले हुए लोग नए आए लोगों को दिल का दौरा सही होने से लेकर कैंसर ठीक करने तक के चमत्कार बताते हैं। आजतक की एक रिपोर्टर को एक महिला अपनी माँ के दिल का दौरा सही करने की कहानी सुनाती है। वह यहाँ मिलने वाले एक पवित्र तेल का प्रताप इसमें बताती है। रिपोर्ट बताती है कि इस मिनिस्ट्री के भीतर कई काउंसिलर तक बैठे हैं। वह यहाँ आने वालों की समस्या सुनते हैं। उनकी विदेश जाने जैसी इच्छाएँ भी सुनते हैं। हर तरह की समस्या के लिए एक अलग काउन्टर बनाया गया है।

इन चर्च में हर चीज के लिए दुआ करवाई जाती है। सास-बहू का झगड़ा हो या भूत-प्रेत का साया, कोई अगर अपने पैर पर नहीं चल पाता तो उसके लिए भी प्रार्थनाएँ भी हैं। हेल्पलाइन नम्बर भी है। यूट्यूब पर अंकुर नरूला के चैनल पर ऑटिज्म वाले बच्चे को सही करने से लेकर विदेश यात्रा तक के किस्से पड़े हैं। इन्हें अंकुर नरूला के लोग गवाहियां कहते हैं। इसी चैनल पर एक वीडियो पड़ी है, जिसमें पश्चिम बंगाल में किसी जगह पर लोग अजीब तरह से अपने शरीर को झूंकते दिखते हैं। इसमें भी ना जाने कितने लोगों का चमत्कार दिखाया गया है।

लगातार पॉपुलर होते पास्टर

पंजाब में ईसाइयत फ़ैलाने के मिशन के केंद्र में कुछ पास्टर हैं। इनकी पूरी व्यवस्थाएँ हैं। बड़े बड़े चर्च हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम ‘तेरी बहन बोल नहीं सकती थी’ से फेमस हुए बजिंदर सिंह का है। उनके अलावा अंकुर नरूला एक दूसरा बड़ा नाम हैं। तीसरा बड़ा नाम गुरनाम सिंह खेड़ा हैं। गुरनाम पहले पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर थे। एक और नाम अमृत संधू का है। सुखपाल राणा भी ईसाइयत फैलाने वाले एक बड़े किरदार हैं। इन सबके अलावा एक महिला पास्टर कंचन मित्तल भी पंजाब में काफी सक्रिय हैं।

                                                     अंकुर नरूला और कंचन मित्तल

इन सबके बीच एक चीज कॉमन हैं। इनमें से अधिकांश पेंटाकोस्टल खेमे से जुड़े हैं। यह ईसाइयत का ही एक रूप है। ईसाइयत को बढ़ावा दे रहे यह लोग सालों पहले अपना पूर्व धर्म छोड़ चुके हैं, लेकिन नाम वैसा ही है, ताकि स्थानीय लोगों से जुड़ने में मदद मिले। सबको यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर हैं। सबके यूट्यूब पर चमत्कार के किस्से हैं। कहीं कोई किसी महिला के माँ बनने का किसा बताता है तो कोई जन्म से अपाहिजों को चलाने का।

                                                      अंकुर नरूला के एक प्रोग्राम की भीड़

निशाने पर कौन?

पंजाब में लगातार ईसाइयत को बढ़ावा दे रहे इन लोगों का पहला निशाना वो लोग हैं, जो किसी समस्या से परेशान हैं। दूसरे वो हैं जिनके मन में विदेश जाने जैसी अभिलाषाएँ हैं। यह सभी पास्टर इन सारी समस्याओं का हल देने की बात कहते हैं। दैनिक जागरण की हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि बीते 2 वर्षों में यहाँ 3.50 लाख लोग ईसाई बनाए गए हैं। तरनतारन जैसे जिलों में यह संख्या तेजी से बढ़ी है। इसको रोकने के लिए सिख धर्मगुरु ज्ञानी हरप्रीत सिंह धर्मांतरण कानून की माँग कर चुके हैं।

दिल्ली के लोगों को पानी-बिजली का बिल नहीं भरने के लिए अरविंद केजरीवाल ने उकसाया, कहा- फरवरी में AAP की सरकार बनते ही कर दूँगा माफ; क्या केजरीवाल पार्टी झूठ बोलने वालों का गिरोह है?

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को सलाह दी है कि वह बिजली और पानी के बिल ना भरें। उन्होंने वादा किया कि वह जब चुनाव में जीतेंगे तो इन बिलों को माफ़ कर देंगे। केजरीवाल ने माना कि दिल्ली में अब लोगों को बढ़े हुए बिजली और पानी के बिल मिल रहे हैं। आखिर ये बिल किसने बढ़ाये? और क्यों? इन विभागों पर केंद्र का कोई हस्तक्षेप नहीं।   

आखिर कब तक आम आदमी जनता को झूठ बोलकर पागल बनाती रहेगी? अरे, कभी सच बोल लिया करो। दिल्ली सरकार की सहमति के बिना बिजली और पानी के दाम नहीं बढ़ सकते हैं। 2013 में बिजली कंपनियों को 3577 करोड़ रूपए का लाभ होने पर कंपनियों ने दाम(tariff) कम करने का फैसला लिया लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने तुरंत अध्यक्ष को हटा कर उस लाभ को 3577+603=4180 करोड़ का घाटा दिखा कर बिजली के दाम बढ़ा दिए। (देखिए संग्लन पृष्ठ) आखिर केजरीवाल पार्टी क्यों और कब तक जनता को पागल बनाती रहेगी? गनीमत है दिल्ली इसलिए बची हुई है कई विभाग केंद्र सरकार के अधीन हैं जिनके खर्चों का भार दिल्ली सरकार पर नहीं पड़ता अन्यथा कर्नाटक, हिमाचल और पंजाब से भी बुरी हालत दिल्ली की हो गयी होती।   

शनिवार (2 नवम्बर, 2024) को दिल्ली के संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में केजरीवाल ने यह सलाह जनता को दी। वह यहाँ एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हाल ही में जब मैं जेल में था तो मैंने सुना कि तो उन्होंने मेरी पीठ पीछे कुछ गड़बड़ की और आपको फिर से भारी-भरकम पानी का बिल भेज दिया। कई लोगों को गलत और बढ़ा हुआ बिल मिला है।”

इसके बाद केजरीवाल ने कहा, “जिन लोगों को पानी के गलत बिल मिले हैं, उन्हें भरने की जरूरत नहीं है। बस फरवरी में मेरी सरकार एक बार फिर से बन जाए, मैं सबके पानी के बिल माफ कर दूँगा और आपको पहले की तरह ही पानी के बिल जीरो मिलने लगेंगे।”

जहाँ एक ओर केजरीवाल वादा कर रहे हैं कि वह पानी के बढ़े हुए बिल माफ़ कर देंगे, वहीं दूसरी तरफ यह बिल भेजे भी उन्हीं की सरकार ने ही हैं। यह समस्या लम्बे समय से चली आ रही है। वह अपनी ही सरकार द्वारा पैदा की गई समस्या से लड़ने को अब ‘मास्टरस्ट्रोक’ घोषित करना चाहते हैं।

केजरीवाल की यह घोषणा उनके पुराने क़दमों के भी विपरीत जा रही है। जहाँ अब वह बिल भरने से मना कर रहे हैं तो वहीं उनकी ही सरकार ने फरवरी, 2024 में बकाया बिल वसूलने को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत बढ़े हुए बिल वसूले जाने थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दिल्ली के 10 लाख से अधिक परिवार बढ़े हुए पानी के बिल से परेशान हैं। यह बढ़ा हुआ बिल तब आया है जब केजरीवाल सरकार लोगों को मुफ्त पानी देने का दावा करती है और इसको हर बार चुनावी घोषणापत्र में भी जगह देती है।

केजरीवाल ने दिल्ली के भीतर पानी के बिल जीरो करने का वादा तो कर दिया है, लेकिन उन्होंने इस बीच यह नहीं बताया है कि इससे दिल्ली जल बोर्ड और भी घाटे में जाएगा। दिल्ली जल बोर्ड वर्तमान में ₹3000 करोड़ से अधिक के घाटे में हैं।

भाजपा ने केजरीवाल के इस वादे पर हमला बोला है। भाजपा ने पूछा है कि आखिर किसने यह बिल बढ़ाए हैं। भाजपा दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि AAP सरकार में दिल्ली की स्थित बदहाल है और लोग त्यौहार के दिन भी बिजली नहीं पा रहे हैं।

मोदी के खिलाफ चुनाव आयोग जाने वालों को ही नहीं मालूम कांग्रेस मैनिफेस्टो में क्या लिखा है और राहुल गाँधी अपने भाषणों में क्या बोल रहा है; सैम पित्रोदा भी संपत्ति विभाजन की वकालत कर रहा है ; वीडियो

                      सैम पित्रोदा (बाएँ) और राहुल गाँधी (दाएँ ) (चित्र साभार: Mint & India Today)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 अप्रैल 2024 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘कांग्रेस और इंडी गठबंधन की नजर, अब आपकी कमाई और आपकी संपत्ति पर है। कांग्रेस का कहना है कि उनकी सरकार आई तो कौन कितना कमाता है, किसके पास कितनी प्रॉपर्टी है, किसके पास कितना धन है। किसके पास कितने मकान हैं। उसकी जांच कराएंगे। इतना ही नहीं वो आगे कहते हैं, ये जो संपत्ति है, उनको सरकार अपने कब्जे में लेकर उसको सबको बांट देगी। आपकी मेहनत की कमाई, आपकी संपत्ति पर कांग्रेस अपना पंजा मारना चाहती है। आपका स्त्री धन लूटना चाहती है। माताओं-बहनों का मंगलसूत्र अब सलामत नहीं रहेगा।’

फिरोज जहांगीर खान की पोती प्रियंका हिन्दू कब से हो गयी? कब हिन्दुत्व अपनाया, जो कह रही है कि 'मेरी माँ ने देश की खातिर मंगलसूत्र न्यौछावर कर दिया'? क्या मुस्लिम समाज में सुहागन मंगलसूत्र पहनती है?

मोदी के इस बयान पर विपक्ष हंगामा कर रहा है कि मोदी भड़काऊ बयानबाज़ी कर मुद्दों से भटका रहे हैं। चुनाव आयोग में शिकायत की जा रही है, जो इस बात को साबित करता है कि कांग्रेस को ही नहीं मालूम की मेनिफेस्टों में क्या लिखा है और कांग्रेस का बंटाधार करने वाला राहुल अपने भाषण में इस बात को कह रहा है। यानि परिवार भक्ति में डूबी कांग्रेस को भी न मैनिफेस्टो की चिंता और न ही राहुल के भाषणों की।


देखिए वीडियो:-

 

कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने मृत्यु के बाद लोगों की आधी सम्पत्ति जब्त करने के कानून की वकालत की है। उन्होंने इसके लिए अमेरिकी कानून का हवाला दिया है। पित्रोदा का बयान राहुल गाँधी के सम्पत्ति के सर्वे और उसे दोबारा बाँटने के वादों के बीच आया है।

ओवरसीज कांग्रेस के मुखिया सैम पित्रोदा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “अमेरिका में एक विरासत कर (इनहेरिटेंस टैक्स) है। अगर किसी व्यक्ति के पास 100 मिलियन डॉलर है और जब वह मरता है तो वह केवल इसका 45% ही अपने बच्चों को दे सकता है, 55% सरकार के खजाने में जाता है। इस कानून के अनुसार, आपने अपने समय में सम्पत्ति बनाई और अब इसे जनता के लिए छोड़ दीजिए। पूरी नहीं तो कम से कम आधी तो जनता के लिए छोड़ ही दें। मुझे ये एकदम सही लगता है।”

इसके बाद सैम पित्रोदा ने इस कानून की वकालत में कहा, “भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, भारत में अगर किसी के पास 10 बिलियन डॉलर (लगभग 82,000 करोड़ रूपए) हैं और वह मरता है तो उसके बच्चों को पूरे 10 बिलियन डॉलर मिलते हैं। जनता को उसमे से कुछ नहीं मिलता। यह कुछ मामले हैं जिन पर बहस और विचार होगा। जब हम सम्पत्ति दोबारा से बाँटने के बारे में बात करेंगे तो इसका मतलब नए कानून और नीतियों पर बात करना होगा।”

सैम पित्रोदा ने आरोप लगाया कि भारत के लोग अपने नौकरों को पैसा नहीं बांटते बल्कि उस पैसे से दुबई और विदेश घूमने टहलने जाते हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस यदि सत्ता में आती है तो वह नौकरों और घर में काम करने वालों को कितना पैसा दिया जाए इसके लिए भी नियम बनाएगी।

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार देश के लोगों के सम्पत्ति के सर्वे की बात कर रहे हैं। कांग्रेस के मेनिफेस्टो में भी सर्वे की बात की गई है। राहुल गाँधी ने यह भी कहा है कि सर्वे के बाद सम्पत्ति का दोबारा से बँटवारा किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के इस चुनावी एजेंडे को लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस महिलाओं का मंगलसूत्र छीनना चाहती है। कांग्रेस के सम्पत्ति बँटवारे की योजना को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘जनता के धन को लूटना कांग्रेस अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझती है। सेना की हर खरीद में घोटाले करने वाली कांग्रेस कभी यहां डिफेंस कॉरिडोर नहीं बनवा सकती थी। बीजेपी की वजह से अब हमारा यूपी आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर सेना का बहुत बड़ा हब बनने जा रहा है। कुछ दिन पहले ही हमने ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप फिलिपींस को निर्यात की है। आने वाले दिनों में ये घातक ब्रह्मोस मिसाइल भी यूपी में बनेंगी।’

अलीगढ़ की विशाल रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘अलीगढ़, हाथरस और आसपास के छोटे, लघु और कुटीर उद्योग ये सभी विकसित भारत की ऊर्जा हैं। आपके काम को बढ़ावा मिले, इसलिए भाजपा वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पर बल दे रही है। अलीगढ़ के ताले हों, हाथरस का हींग हो, मेटल उद्योग हो, गारमेंट उद्योग हो, गुलाल उद्योग हो, भाजपा सरकार हर उद्योग की ताकत बढ़ा रही है।’

उन्होंने ये भी कहा कि ‘आजकल जब मैं कहता हूं कि 10 साल में जो किया वो ट्रेलर है, अभी तो बहुत सारा काम करना है। और जब मैं इतनी सारी बातें बताता हूं न तो सपा-कांग्रेस वाले को समझ ही नहीं आता ये मोदी कहां ले जा रहा है। वो मोदी के साथ कदम ही नहीं मिला पा रहे हैं। ये मोदी है, आपके लिए जीता है, वो रुकना जानता नहीं है। और इसीलिए क्योंकि मैंने तय किया है, आपका सपना ही मेरा संकल्प है।’

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प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कांग्रेस-सपा जैसी पार्टियों ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की और मुसलमानों के राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए कभी कुछ नहीं किया। और जब मैं पसमांदा मुसलमानों की मुसीबत की चर्चा करता हूं, तो इनके बाल खड़े हो जाते हैं, क्योंकि ये उपर के लोगों ने मलाई खाई है और पसमांदा मुसलमानों को भी उसी हालत में जीने के लिए इन लोगों ने मजबूर कर दिया है।’