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दिल्ली विधानसभा चुनावों में पहली बार बीजेपी को वोट दिया : मौलाना साजिद रशीदी, अध्यक्ष, ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन


2019 लोकसभा चुनावों के बाद लिखा था कि 2029 चुनावों से मुसलमान मुस्लिम कट्टरपंथियों के चुंगल से बाहर निकल बीजेपी को वोट देना शुरू करेगा। और फरवरी 5 को हुए दिल्ली चुनावों में आल इंडिया इमाम एसोसिएशन 
के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने ज़िंदगी में पहली बार बीजेपी को वोट देने के दावे से संकेत मिल रहे हैं कि मुसलमान बहुत जल्दी विपक्ष के हिन्दू-मुसलमान के विवाद से बाहर आ सकते हैं।  

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने दावा किया है कि उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनावों में पहली बार बीजेपी को वोट दिया है। इसके पीछे उन्होंने कई कारण बताए हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के इंतजार के बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी का एक वीडियो काफी चर्चा में है। जिसमें वह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि उन्होंने पहली बार अपनी वोट बीजेपी को दिया है। इसके बाद उन्होंने समाचार एजेंसी को इंटरव्यू भी दिया है। उन्होंने कहा कि वह मुसलमानों के अंदर से ये डर खत्म करना चाहते हैं कि भाजपा के सत्ता में आने पर उनके अधिकारों को नहीं छिनेगी।

दरअसल, ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने न्यूज एजेंसी से अपनी वायरल वीडियो को लेकर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैंने दिल्ली में बीजेपी को वोट दिया है और अपना वीडियो वायरल किया है। ऐसा मैंने इसलिए किया क्योंकि बीजेपी के नाम पर मुसलमानों में डर पैदा किया जाता है और विपक्षी दल कहते हैं कि मुसलमान बीजेपी को वोट नहीं देते हैं। मुसलमानों के मन में यह बात बैठा दी गई है कि बीजेपी को हराओ नहीं तो अगर भाजपा सत्ता में आई तो मुसलमानों के अधिकार छीन लिए जाएंगे।

मौलाना ने आगे कहा कि मैंने मुसलमानों के मन से उस डर को दूर करने के लिए भाजपा को वोट दिया है। अगर दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनी तो  मैं मुसलमानों को दिखाऊंगा कि मुसलमानों के कौन से अधिकार छीन लिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया है कि वह बीजेपी में शामिल नहीं हुए है और ना ही उन्होंने बीजेपी के सामने सरेंडर कर दिया है। अगर बीजेपी की कोई नीति मुसलमानों के खिलाफ जाती है, तो मैं उसका विरोध करूंगा।

मौलाना साजिद रशीदी ने आगे कहा कि मुझे धमकियां मिल रही हैं और आरोप लगाया जा रहा है कि मैं भाजपा के हाथों बिक गया हूं। ऐसा कुछ भी नहीं है, मेरे खिलाफ कोई भी केस नहीं है। मेरा एकमात्र उद्देश्य मुसलमानों के दिल और दिमाग से उस डर को दूर करना है। हमारे पास सही दावा होगा और अगर भाजपा हमारे खिलाफ कुछ करती है तो हम उनके खिलाफ सवाल उठा सकते हैं।

बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर मौलाना साजिद रशीदी का वीडियो शेयर किया था। इसमें वह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि दोस्तों मैंने वोट कर दिया है। यह सुनकर आपको बहुत ही हैरानी होगी कि मैंने अपना वोट भारतीय जनता पार्टी को दिया है। जिंदगी में पहली बार मैंने BJP को वोट दिया है। मैंने ऐसा क्यों किया है। इसके पीछे बहुत सारे कारण है। अब तक मुसलमानों पर यह आरोप लगता रहा कि बीजेपी को हराने के लिए मुसलमान वोट करते हैं। लेकिन मैंने यह वोट इसलिए किया आज दिल्ली के अंदर बीजेपी जीते। इसके और भी बहुत सारे कारण है। 

गुजरात में FIR : ‘सोमनाथ मंदिर गलत कामों का अड्डा’ बोलने वाला मौलाना साजिद रशीदी अब माँग रहा माफी

पिछले माह जनवरी 2023 में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान गुजरात के सोमनाथ मंदिर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ FIR दर्ज हो गई है। यह केस श्री सोमनाथ ट्रस्ट के जनरल मैनेजर विजय सिंह चावड़ा की शिकायत पर दर्ज हुआ है।

हिन्दुओं को रशीदी पर करवाचौथ(2022) वाले दिन News18 पार ऋग्वेद पर गलत बयानबाज़ी करने पर ही हो जानी चाहिए थी। उस दिन पैनल में मौजूद महिला ने ऐसी बेइज्जती की थी, उसके बावजूद ये कट्टरपंथी ने सोमनाथ मंदिर पर गलत बयानबाज़ी करने से बाज़ नहीं आया। इसने जिस रोमिला थापर की किताब के हवाले से कहा है, राज्य एवं केंद्र सरकार को रोमिला थापर सहित उन अन्य इतिहासकारों की किताबों को बैन कर देना चाहिए। इन्ही तथाकथित इतिहासकारों ने चंद चांदी के सिक्कों के लालच में भारत के गौरवशाली हिन्दू इतिहास को कलंकित किया है।  

शिकायत में रशीदी पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने और 2 समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने का आरोप है। यह केस गुरुवार (9 जनवरी 2023) को दर्ज हुआ है। केस दर्ज होने के बाद मौलाना साजिद रशीदी अब माफी माँग रहे हैं।

मौलाना रशीदी ऑल इंडिया इमाम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह केस गिर सोमनाथ जिले में दर्ज हुआ है। शिकायतकर्ता के मुताबिक सोमनाथ मौलाना साजिश रशीदी की टिप्पणी से मंदिर से जुड़े भक्तों की भावनाएँ आहत हुई हैं। अपनी शिकायत में विजय सिंह ने पुलिस से साजिश रशीदी पर कार्रवाई की माँग की है।

अक्सर बहस के दौरान हिन्दू आस्थाओं और प्रतीकों पर नकारात्मक टिप्पणी करने वाले रशीदी पर IPC 153- A और 295- A के तहत कार्रवाई हुई है। इस मामले में गिर सोमनाथ जिले के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह जडेजा ने जाँच किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि साजिद रशीद पहले भी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे हैं।

रशीदी ने कहा था 

जनवरी 2023 में मौलाना साजिश रशीदी ने ANI से बात करते हुए विदेशी आक्रांता महमूद ग़ज़नवी की शान में कसीदे गढ़े थे। तब उन्होंने कहा, “जैसे गज़नवी को लोग कहते हैं कि उसने सोमनाथ का मंदिर तोड़ा। जबकि इतिहास ये है कि वहाँ के लोगों ने जाकर ग़ज़नवी को बताया था कि वहाँ आस्था और देवी-देवताओं के नाम पर क्या हो रहा है। वहाँ लड़कियों को कैसे लापता कर दिया जाता है। और उसके बाद भी गजनवी ने वहाँ बाकायदा पता करवाया और CID भेजी। तब जाकर सोमनाथ के मंदिर पर चढ़ाई की। उन्होंने सोमनाथ के मंदिर को तोड़ने का काम नहीं किया बल्कि वहाँ जो गलत कार्य हो रहे थे उसको खत्म करने का काम किया।”

सोमनाथ मंदिर कर इतिहास 

सोमनाथ मंदिर न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी मौजूद हिन्दुओं की आस्था का प्राचीन समय से मुख्य केंद्र रहा है। इतिहासकारों के मुताबिक 11वीं सदी में विदेशी आक्रांता महमूद गज़नी ने यहाँ हमला करके लूटपाट की थी। बताया जाता है कि जाते-जाते गज़नी ने मंदिर को तोड़ डाला था और यहाँ के सेवादारों व पुजारियों की हत्या कर दी थी। स्वतंत्रता के बाद इसका पुनर्निर्माण तत्कालीन गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल के प्रयासों से हो पाया था।

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने गज़नी के समकालीन उदबू की लिखी किताब तारीख उल यामिनी का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उदबू के अनुसार मंदिर लूटने के बाद गज़नवी से मूर्तियों को न तोड़ने की अपील की गई थी। इस पर गज़नवी का जवाब था कि वो मंदिर जरूर तोड़ेगा, ताकि क़यामत के दिन वो बुत फरोश के तौर पर जाना जाए।

मौलाना साजिद रशीदी का ज़हर : ‘सोमनाथ मंदिर में होता था गलत काम, इसीलिए गजनवी ने तोड़ दिया’: राम मंदिर ध्वस्त करने की भी दी थी धमकी

फोटो क्रेडिट-(ABP/News on air)
अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 22 जनवरी 2023 को एक बार फिर हिंदू धर्म के खिलाफ जहर उगला है। रशीदी ने कहा है कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर में गलत काम होता था और इसी वजह से मोहम्मद गजनवी ने मंदिर को तोड़ने का काम किया था। साथ ही उसने कहा कि मुगलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।

लेकिन मुग़लों की आतताई की पैरवी करना ये मौलाना कभी नहीं भूलता। इस तरह का जहर जब इसी मौलाना ने करवाचौथ(2022) के दिन News18 पर एंकर अमिश देवगन के शो 'आर पार' में हिन्दुओं की उस धार्मिक ग्रन्थ ऋग्वेद को आधार बनाकर सनातन धर्म पर प्रहार करने का प्रयास किया था, जिसकी इसने पन्नी तक नहीं उतारी, लेकिन इसे नहीं मालूम था कि एक शेरनी भी पैनल में बैठी है, शेरनी जब इस पर दहाड़ रही थी, मानो माँ जगदम्बा साक्षात धरती पर अवतरित हो गयीं हैं। "मैं तेरे को बोल रही हूँ श्लोक पढ़ ...पृष्ठ संख्या बता... ", संक्षेप में इतना ही कह सकता है कि उस शेरनी ने इसे जरुरत से ज्यादा बेइज्जत किया, उस पुरे कार्यकम को कई लेखो में डाल चूका हूँ। 

ये मौलाना झूठे इतिहास का महिमामंडन कर मुग़ल आक्रांताओं का बचाव कर सनातन धर्म पर प्रहार करता रहेगा, लेकिन क्या Quran Petition पर भी बोलने का साहस दिखाएगा? क्या 31 जुलाई 1986 को तीस हज़ारी कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट Z.S. Lohat द्वारा दिए विवादित आयतों पर दिए निर्णय पर भी बोलने का हिम्मत दिखाएगा? इन मुद्दों पर न ही रशीदी जैसा कोई मौलाना बोलेगा और न ही कोई साम्प्रदायिकता के खिलाफ बोलने वाला, ये गैंग तो सनातन के विरुद्ध बोल 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' चिल्ला-चिल्लाकर हिन्दुओं को भ्रमित करते रहेंगे। परन्तु समस्त हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं को एकजुट होकर पिछली सरकारों द्वारा मुस्लिम प्रेम को दर्शाते इन मुद्दों को दफ़न कर दिया था, ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए इन मुद्दों को जीवित कर जनमानस को जाग्रत करना होगा। हर मुसलमान जेहादी नहीं है, उन्हें रशीदी जैसे मौलानाओं ने बदनाम कर रखा है। 'सर तन से जुदा' करने और इस काम के लिए प्रेरित करने वालों के विरुद्ध गृह मंत्रालय को कठोरता से पेश आना होगा। 

Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts
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Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts

इस जैसे जेहादी मौलानों द्वारा जहर उगलने पर संविधान की बात करने वाले, गंगा-जमुना तहजीब की बात करने वाले, विदेशी चंदे पर सनातन धर्म को अपमानित करने वाले हिन्दुओं आंखे खोलो, होश में आओ, क्यों नहीं इस जैसे मौलानाओ के खिलाफ कब बोलोगे? क्या तुम्हारी अंतरआत्मा मर गयी है? कब तक सनातन धर्म सहन करते रहोगे?       

इसके साथ ही उसने इतिहास की उल्टी गंगा बहाते हुए मुगल आक्रांताओं पर ज्ञान दिया। उसने कहा, ”यह सच है कि मुगल एक काल था। मुगल जितने भी बादशाह हुए हैं, उनका एक दौर था, जमाना था। मुगलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था। इन 800 सालों में जितने भी मुगल बादशाह हुए हैं या दूसरे और बादशाह रहे हों। आप अगर उनकी हिस्ट्री को पढ़ेंगे तो उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।”

रशीदी ने आगे कहा, ”उन्होंने धर्म के नाम पर किसी भी तरह का काम किया भी नहीं। इस तरह के बहुत सारे उदाहरण हैं। जैसे गजनवी के बारे में लोग कहते हैं कि उसने सोमनाथ मंदिर तोड़ा है। जबकि हिस्ट्री ये है कि वहाँ के लोगों ने गजनवी को बताया कि वहाँ आस्था के नाम पर क्या हो रहा है। देवी-देवता के नाम पर क्या हो रहा है। कैसे वहाँ लड़कियों को लापता कर दिया जाता है।”

मौलाना यहीं नहीं रुका, उसने आगे कहा, ”इसके बाद गजनवी ने वहाँ बकायदा मुआयना करवाया। जब पता चला कि वहाँ ऐसा है, तब जाके उसने सोमनाथ के मंदिर पर चढ़ाई की। सोमनाथ मंदिर को उसने तोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि वहाँ जो गलत हो रहा था, उसे रोकने का काम किया।”

ऐसा नहीं है कि मौलाना ने हिंदू धर्म के खिलाफ पहली बार जहर उगला है। इससे पहले वह राम मंदिर को तोड़ने की धमकी दे चुका है। उसने कहा था कि 50-100 साल बाद मुस्लिम शासक के आने पर अयोध्या के राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई जा सकती है। मुस्लिमों की आने वाली नस्लें इसको लेकर खामोश नहीं रहेंगी।

मौलाना रशीदी ने कहा था , ”आज मुसलमान खामोश है। मेरी आने वाली नस्ल… मेरा बेटा, उसका बेटा, उसका पोता…. 50-100 साल के बाद एक हिस्ट्री उनके सामने आएगी कि हमारी मस्जिद को तोड़कर मंदिर बना दिया गया। उस वक्त हो सकता है कि कोई मुस्लिम शासक हो, कोई मुस्लिम जज हो या मुस्लिम शासन आ जाए… कुछ नहीं कहा जा सकता है कि क्या फेरबदल हो जाए… तो क्या उस हिस्ट्री की बुनियाद पर इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई जाएगी? बिल्कुल बनाई जाएगी।”

‘टॉपलेस’ होकर कॉलेज जाती लड़कियाँ पर कोई सवाल नहीं, तो इस्लामिक ड्रेस कोड पर क्यों: कर्नाटक बुर्का विवाद पर बचाव में बोले मौलाना साजिद रशीदी

                                                  मौलाना साजिद रशीदी ने फिर दिया विवादित बयान
हिंदुओं और राम मंदिर के खिलाफ भड़काऊ बयान देने के लिए कुख्यात ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। कर्नाटक के कॉलेजों में चल रहे बुर्का और हिजाब विवाद पर बयान देते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने 10 फरवरी को कहा कि हिजाब इस्लाम का ड्रेस कोड है और महिलाओं को खुद को सुरक्षित और समाज में संरक्षित रखने के लिए पर्दे में रहना चाहिए। उन्होंने सभी मुस्लिम महिलाओं से बुर्का पहनना जारी रखने की अपील की और मुस्लिम पुरुषों से कुर्ता और जालीदार टोपी (Skull Cap) सहित पारंपरिक मुस्लिम पोशाक अपनाने को कहा।

मौलाना साजिद रशीदी ने कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों पर भारतीय संविधान का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मजहब (इस्लाम) का पालन करना मुस्लिमों का मौलिक अधिकार है और हिजाब पहनना ‘इस्लाम का अभिन्न अंग’ है।

एक्टिविस्ट अंबर जैदी से खास बातचीत में रशीदी ने कहा, “महिलाएँ टॉपलेस होकर कॉलेज, स्कूल जाती हैं तो कोई उनसे सवाल नहीं करता, फिर हिजाब और बुर्का पहनने वाली लड़कियों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।” विवादास्पद मौलवी ने कहा, “जीन्स पहनना, स्कूलों में टॉपलेस होना इस्लाम में अच्छा नहीं माना जाता है। महिलाओं को पर्दा करना चाहिए और पुरुषों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उसे टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए और समाज में पुरुषों के सामने अपने शरीर के अंगों को उजागर नहीं करना चाहिए।”

जब अंबर जैदी ने पूछा कि स्कूल और कॉलेज में टॉपलेस होकर कौन जाता है, तो रशीदी ने जवाब दिया कि बहुत सारी लड़कियाँ ऐसा करती हैं। उन्होंने कहा कि वह कॉलेज जाकर लड़कियों को टॉपलेस और अभद्र कपड़े, जींस पहनकर घूमते हुए देख सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को कॉलेजों में जींस पहनने का मौलिक अधिकार है तो उन्हें भी बुर्का पहनने का मौलिक अधिकार है।

मौलाना ने अपने सभी विचार को कुरान पर आधारित बताया। उन्होंने बताया कि इस्लाम का सिद्धांत पूरी तरह से कुरान, हदीस से लिया गया है और जो महिलाएँ हिजाब या बुर्का नहीं पहनती हैं उन्हें इस्लाम का पालन नहीं माना जाता है।

RSS हिजाब की इजाजत नहीं देकर इस्लाम पर हमला कर रहा है: मौलाना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीखी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ‘RSS के गुंडे’ पहले तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाकर और अब हिजाब की अनुमति नहीं देकर इस्लाम पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में 17:13 मिनट पर मौलाना कहते हैं, “ये लोग (RSS) भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। वे पूरे देश में गुंडागर्दी करना चाहते हैं। तिरंगे की भी इज्जत नहीं करते। वे केवल भगवा ध्वज मानते हैं।”
उन्होंने कर्नाटक के संस्थानों को भी बहस में घसीटा और कहा कि कॉलेजों ने अभी-अभी RSS के रास्ते पर चलना शुरू किया है। उन्होंने आरोप लगाया, “जिन लड़कों ने हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं का विरोध किया, उन्होंने भगवा दुपट्टा पहना था। ये लोग कौन हैं? वे किस तरह की मिसाल कायम कर रहे हैं? वे (RSS) इस देश को मजहब के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं।” हालाँकि यह आरोप लगाते हुए वह यह बात आसानी से भूल गए कि कर्नाटक हिजाब विवाद की शुरुआत आठ मुस्लिम लड़कियों ने की थी, जिन्होंने कॉलेज के सेम यूनिफॉर्म ड्रेस कोड के नियमों का पालन करने से इनकार किया था।

मुस्लिम जहाँ भी जाएँ अपने ‘मजहब’ का पालन करेंगे: मौलाना रशीदी

उन्होंने संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में इंटरव्यू लेने वाली एक्टिविस्ट अंबर जैदी (जो कि एक मुस्लिम भी हैं) के साथ डिबेट किया। उन्होंने उन पर इस्लाम का पालन न करने का आरोप लगाया और कहा कि आजादी का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिम महिलाएँ कुरान में वर्णित अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन के तरीके को भूल जाएँ। उन्होंने अंबर पर स्वतंत्र विचारों को अपनाने का आरोप लगाया और इसे ‘हराम’ कहा।
अपनी इस राय पर कि ‘मुस्लिम महिलाओं को पर्दा करना चाहिए और हिजाब पहनना चाहिए’, उन्होंने कहा कि मुस्लिम जहाँ भी जाएँगे, अपने ‘मजहब’ का पालन करेंगे। वीडियो में 16:40 मिनट में उन्होंने कहा, “जिस समुदाय से मैं संबंध रखता हूँ, वह कॉलेजों, बाजारों और पूरे समाज में इस्लाम का पालन करने में विश्वास करता है। हमें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता।”
मौलाना रशीदी इससे पहले भी हिंदू विरोधी विवादास्पद बयान दे चुके हैं। अयोध्या में राम मंदिर पर फैसला आने के बाद उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने इस्लाम के हवाले से कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी और उसे तोड़ा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि मस्जिद को ध्वस्त कर मंदिर बनाया गया, अब मंदिर ध्वस्त कर मस्जिद फिर से बनेगा।
साजिद रशीदी ने कहा था, “इस्लाम कहता है कि एक मस्जिद हमेशा एक मस्जिद होगी। इसे कुछ और बनाने के लिए नहीं तोड़ा जा सकता है। हम मानते हैं कि बाबरी मस्जिद थी और हमेशा एक मस्जिद रहेगी। मंदिर को गिराने के बाद मस्जिद की तामीर नहीं की गई थी लेकिन अब मस्जिद बनाने के लिए हो सकता है मंदिर को तोड़ा जाए।”
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‘हिजाब विवाद’ की शुरुआत कैसे हुई?

हिजाब को लेकर विवाद की शुरुआत उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी। जहाँ पिछले दिनों हिजाब पर बैन लगा दिया गया था। हिजाब पहने हुई छात्राओं को गेट पर रोक दिया गया था। इसके बाद एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट में ये कहते हुए याचिका दायर किया था कि हिजाब पहनने की अनुमति न देना असंवैधानिक है। मामले में गुरुवार (10 फरवरी 2022) कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान छात्रों को धार्मिक पोशाक पहनने पर जोर न देने के लिए कहा गया। मामले की अगली सुनवाई सोमवार (14 फरवरी 2022) को होगी।