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क्या से क्या हो गया! कर्नाटक सरकार पर संकट, ICU में

क्या से क्या हो गए देखते-देखते! जब कुमारस्वामी का शपथग्रहण बना था विपक्षी एकता की मिसाल, PM मोदी को हराने का था सपना
कर्नाटक विधानसभा में हुए महागठबन्धन में पड़ी दरार खाई का रूप धारण कर रही है। 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लोकसभा चुनाव पूर्व गठबन्धन से लेकर महागठबन्धन होने का खूब शोर मच रहा था। जनता को मोदी सरकार के वापस आने पर सन्देह होने लगा। लेकिन लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही गठबंधन धराशाही होने लगे। झूठे सब्जबाग बंजर होने लगे, जिसको देखो अब अपनी दुकान यानि पार्टी बचाने में व्यस्त है, गठबंधन की चिन्ता नहीं। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव(उपरोक्त चित्र) में महागठबंधन के कसीदे पढ़े जा रहे थे। जो लोकसभा चुनाव होने पर मात्र गठबंधन बनकर रहा गया और अब उसमें भी पड़ी दरार खाई का रूप धारण कर रही है। जिसे पाटना निकट भविष्य में तो संभव नहीं।  
कर्नाटक के मंत्री एवं निर्दलीय विधायक एच. नागेश ने एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई में चल रही गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और इसके साथ ही उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस नए घटनाक्रम के चलते राज्य सरकार पर संकट और गहरा गया है. उधर कांग्रेस के सांसदों ने संसद में भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया है. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि मोदी सरकार राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश रही है और इसके लिए वह राजभवन का इस्तेमाल कर रही है. वहीं डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस के सभी मंत्री इस्तीफा दे देंगे और उनकी जगह पर नाराज विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है. फिलहाल देखने वाली बात यह होगी कि राज्यपाल को इस्तीफा सौंप चुके विधायक कितनी सुनते हैं. लेकिन इस नए घटनाक्रम से इतर अगर हम पीछे जाएं तो पता चलेगा कि जबसे राज्य में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी है वह लगातार छिचकोले खा रही है. साल 2018 में हुए चुनाव में बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसको 104 सीटें मिली थीं. लेकिन वह बहुमत से 10 सीटें पीछे रह गई. तत्कालीन सीएम सिद्धारमैया की अगुवाई में कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिलीं. खास बात यह है कि राज्य में तीनों ने ही अलग-अलग चुनाव लड़ा था.  इसके बाद बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का मौका दिया उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली. कई दिनों तक चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद जिसमें कांग्रेस को अपने विधायकों को होटल तक में बंद करना पड़ा, के बाद बीजेपी को बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाई और विधानसभा में बिना शक्ति परीक्षण के ही सीएम पद से इस्तीफा दे दिया.
इसके बाद राज्य में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाने की घोषणा कर दी. दोनों की सीटें मिलाकर बहुमत के जरूरी आंकड़े से ज्यादा थीं. कांग्रेस ने सीएम पद का दावा छोड़ते हुए जेडीएस नेता कुमारस्वामी को सीएम बनाने की घोषणा कर दी. यह एक बड़ा घटनाक्रम था जिसे कांग्रेस के लिए राजनीतिक संजीवनी माना गया क्योंकि कुमारस्वामी का शपथग्रहण विपक्षी एकता का भी मंच बन गया था. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और विपक्ष के तमाम दिग्गज पहुंचे थे. सरकार बनने के बाद कुछ दिन तक तो सब ठीक था लेकिन अंदर ही अंदर मंत्रिमंडल के बंटवारे और डिप्टी सीएम पद के लिए खींचतान जारी थी. कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता खुद को उपेक्षित समझ रहे थे. इसी बीच कई मु्द्दों पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे और कुमारस्वामी ने राहुल गांधी से मिलकर कांग्रेस नेताओं को समझाने के लिए कहा. लेकिन हालात नहीं संभले और एक दिन सीएम कुमारस्वामी ने सार्वजनिक मंच पर रोते हुए कहा, 'आप मेरा मान-सम्मान रखने के लिए गुलदस्ते के साथ खड़े हैं, क्योंकि आपका भाई सीएम बन गया है और आप सभी खुश हैं, लेकिन मैं नहीं हूं. मुझे गठबंधन सरकार का दर्द पता है. मैं विषकांत बन गया और इस सरकार के दर्द को निगल लिया.'
Embedded video
: Karnataka CM HD Kumaraswamy breaks down at an event in Bengaluru; says 'You are standing with bouquets to wish me, as one of your brother became CM & you all are happy, but I'm not. I know the pain of coalition govt. I became Vishkanth&swallowed pain of this govt' (14.07)
सरकार में अंदर ही अंदर ही उबाल था लेकिन किसी तरह से वह चल रही थी. इसके बाद लोकसभा चुनाव आया और दोनों पार्टियों के गठबंधन पर फिर एक संकट आ गया. कांग्रेस के रवैये से सीएम कुमारस्वामी नाराज थे क्यों कि कांग्रेस के नेता अब उनकी सरकार गिराने की धमकी भी दे रहे थे. इस पर कुमारस्वामी ने खुले मंच पर कांग्रेस से कहा कि वह जेडीएस के साथ चौथे दर्जे के चपरासी की तरह न पेश आए. इतना ही नहीं मंच पर प्रचार के दौरान फिर एक बार कुमारस्वामी के आंसू निकल आए. इस बार उन्होंने कहा, हर रोज मीडिया में कहा जा रहा है कि कल मैं चला जाउंगा (सीएम के पद से). लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों से सारी कसर पूरी दी. राज्य की 28 सीटों में बीजेपी ने 25 सीटें जीत लीं और एक सीट भी उसके समर्थन से प्रत्याशी जीती. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास सिर्फ 2 ही सीटें आईं. पीएम मोदी पहले से और अधिक ताकतवर बनकर उभरे. उसी के बाद से माना जाने लगा था कि कर्नाटक सरकार अब ज्यादा दिन की सरकार नहीं है. और अब 11 विधायक इस्तीफा देकर मुंबई के होटल में ठहरे हैं और कांग्रेस-जेडीए मिलकर सत्ता बचाने के लिए जूझ रहे हैं.
क्या है अभी का समीकरण 
कर्नाटक विधानसभा में कुल 225 सीटें हैं. इसमें 1 सीट नामांकित हैं. वर्तमान में 78 सीट कांग्रेस, 37 जेडीएस, बसपा 1, निर्दलीय-2, बीजेपी 105 और अन्य अन्य के खाते में कुल 1 सीट है. गठबंधन का दावा था कि उसके पास 118 विधायक हैं. अब 14 विधायकों के इस्तीफे के बाद विधायकों की संख्या 210 और बहुमत के लिए 106 विधायकों की जरूरत होगी. बीजेपी के पास पहले ही 105 विधायक हैं.

कैसे बच सकती है सरकार 
अगर कांग्रेस अपने नाराज विधायकों को यह समझाने में कामयाब हो जाती है कि अगर चुनाव हुए तो सबकी हार होगी क्योंकि लोकसभा चुनाव नतीजे सभी देख चुके हैं. इसलिए साथ बने रहने में भी भलाई है.

कर्नाटक सरकार में मंत्री और निर्दलीय विधायक एच नागेश ने दिया इस्तीफा​

कर्नाटक में गरम है माहौल; गठबन्धन सरकार पर संकट के बादल

डी के शिवकुमार
भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रचंड बहुमत से वापसी करने पर देश के कई नेताओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। 
कर्नाटक में सियासी उठापठक जारी है। राजनीतिक हलचल और संकट का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है। कांग्रेस के विधायक खुद इस बात के गवाह बन रहे हैं कि राज्य में सरकार शायद लंबे समय तक चल पाए। इन सबके बीच कर्नाटक सरकार में मंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि यह मुझे पता है कि कौन जीता और किसके खाते में हार आई है। सामान्य तौर पर उन्हें कुछ संदेश मिलते हैं। लेकिन वो गांधी जी के सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं। जैसे बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो और बुरा मत देखो। 
Karnataka Minister DK Shivakumar in Benagluru: I just know who won and who lost. I don't have further details. Usually I get messages, I don't know anything further. I'm just following Gandhi ji's theory "Don't hear bad, don't speak bad and don't see bad." (27.05.2019) pic.twitter.com/RAChLT9GFX
— ANI (@ANI) May 28, 2019
कर्नाटक में राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने के बाद अपनी सक्रियता बढ़ा दी है जिससे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के कान खड़े हो गए हैं। भाजपा ने दावा किया है कि कांग्रेस के करीब 15 से 20 विधायक उसके संपर्क में हैं। भाजपा के इस दावे के बाद कांग्रेस हरकत में आ गई है और उसने 29 मई को विधायकों की आपात बैठक बुलाई है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक इस्तीफा दे सकते हैं जिसके बाद कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी। 
कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर संकट के बादल पहले भी मंडराते रहे हैं लेकिन गठबंधन ने हर बार अपनी सरकार संभाल ली है। इस सरकार में बीच-बीच में असंतोष के स्वर भी सुनाई दिए। सरकार बनने के पूर्व से ही कांग्रेस और जेडी-एस नेताओं के बीच तालमेल की कमी दिखी है और दोनों दल के नेताओं ने एक दूसरे के खिलाफ बयान दिया।
सरकार पर मंडराते खतरे को कांग्रेस ने अपनी 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' से दूर करते आई है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे उस पर भारी पड़ सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में देख उसके कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। 
कर्नाटक में भाजपा नेताओं का दावा है कि कांग्रेस के करीब 20 विधायक उसके संपर्क में हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के दर्जन विधायक अपने पद से इस्तीफा से दे सकते हैं। विधायकों के इस्तीफे के बाद कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि भाजपा राज्य में सरकार बनाने की कोशिश नहीं करेगी बल्कि वह राज्य में नए सिरे से चुनाव कराएगी। कर्नाटक की लोकसभा की 28 सीटों में से भाजपा ने इस बार 25 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस और जेडीएस के खाते में एक-एक सीटें आई हैं। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ है।
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद (एस) सरकार की चिंताओं को और बढ़ाते हुए कांग्रेस नेता के एन रजन्ना ने मई 27 को उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर पर तीखा निशाना साधा और दावा किया कि राज्य की मौजूदा गठबंधन सरकार 10 जून के बाद नहीं रहेगी। परमेश्वर पर निशाना साधते हुए रजन्ना ने कहा, ‘यह सरकार अब तक गिर गयी होती...मुझे पता चला है कि चूंकि मोदी 30 मई को शपथ ले रहे हैं (प्रधानमंत्री के रूप में), ऐसे में उनकी पार्टी (भाजपा) में फैसला किया गया है कि कुछ भी नहीं किया जाए। यह सरकार अधिक से अधिक 10 जून तक रहेगी। 

मैं छह महीने से चुप था, पर अब नहीं : कांग्रेस पर भड़के एचडी देवगौड़ा

अब मैं चुप नहीं बैठूंगा
आज हर पार्टी अपने मतभेद भुलाकर गठबन्धन कर रहे हैं, लेकिन क्यों कांग्रेस से दूरी बनाये हुए हैं? क्योकि पूर्व में हुए कांग्रेस के साथ हुए गठबन्धन किसी को रास नहीं आये। कांग्रेस ने हमेशा एक हसीना की तरह व्यवहार किया, मतलब जिस तरह कोई हसीना अपनी जरा-सी मांग या अपने इशारे पर अपने आशिक द्वारा नाचने से मना करने पर, उस आशिक को छोड़ दूसरे के आगोश में चली जाती है, ठीक वही स्थिति कांग्रेस की रही है। अब कर्नाटक में ही देख लो इसका प्रमाण, किस तरह जेडीयू सरकार को नचाने में लगी है। ऐसी स्थिति में कर्नाटक सरकार कितने दिन इस कलह में निकालती है, कहना मुश्किल है। 
जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा है कि कांग्रेस का बर्ताव एक सहयोगी के तौर पर अच्छा नहीं है। देवगौड़ा ने कहा कि छह महीने से कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन की सरकार है और कुमारस्वामी मुख्यमंत्री हैं लेकिन कांग्रेस का रवैया ऐसा नहीं है जैसा कि एक सहयोगी का होना चाहिए। 
अब मैं चुप नहीं बैठूंगा 
अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम में देवगौड़ा ने कहा, कुमारस्वामी के मुख्यमन्त्री बनने के बाद पिछले छह महीने के बहुत सारीबातें हुई हैं लेकिन मैं लगातार चुप रहा लेकिन अब शांत नहीं बैठूंगा। गठबंधन सरकार चलाने का आखिर यह कौन सा तरीका है जहां पर हर रोज अपने सहयोगी को यह अनुरोध करना पड़ता है कि वे कोई असंसदीय टिप्पणी न करें।
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एक तरफ भाजपा को शिकस्त देने कांग्रेस और अन्य दल एक दूसरे के साथ गठबंधन में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक में हुए .....

कांग्रेस अपने नेताओं को रोके 
 कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस को सुनाया
देवगौड़ा ने कहा, कांग्रेस के साथ हम आगे बढ़ना चाहते हैं, हम नहीं चाहते कि कांग्रेस के साथ संबंध खराब हों। कांग्रेस अगर दोस्ती चाहची है तो ये जरूरी है कि खराब भाषा बोलने वाले अपने विधायकों और नेताओं को रोके नहीं तो हम भी इसे नहीं सहेंगे।कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस को सुनाया 
इसी कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस को बर्ताव में सुधार लाने के कहा। उन्होंने कहा, वो उन लोगों में से नहीं हैं जो कुर्सी के लालच में किसी से कुछ भी सुनेंगे और चुप रहेंगे। मैं सीएम की कुर्सी की क्या परवाह करूंगा जब उस मेरे पिता ने प्रधानमंत्री की कुर्सी तक छोड़ दी थी। इससे पहले भी कुमारस्वामी कांग्रेस से नाराजगी जताते हुए इस्तीफे की बात कही थी। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही दोनों पार्टियों में कभी मंत्रिमंडल तो कभी दूसरे मुद्दों को लेकर लगातार टकराव होता रहा है।

कर्नाटक: गठबंधन सरकार में नहीं सबकुछ ठीक, कुमारस्वामी पद छोड़ने को तैयार

HD Kumaraswamy
एक तरफ भाजपा को शिकस्त देने कांग्रेस और अन्य दल एक दूसरे  के साथ गठबंधन में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक में हुए जेडीएस के साथ कांग्रेस गठबंधन में दरार पड़ गयी है। अब देखना यह है कि आखिर कब तक कर्नाटक में सरकार चलती है। 
कांग्रेस इतिहास के अवलोकन करने पर यही ज्ञात होता है कि सरकारें गिराने में कांग्रेस का इतिहास रहा है। कर्नाटक में कोई नहीं बात नहीं। 
कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा है। जनवरी 28 को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने यहां तक कह दिया कि मैं पद छोड़ने के लिए तैयार हूं। इसके बाद से कांग्रेस बैकफुट पर है और स्थिति संभालने में लगी हुई है। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि सहयोगी JDS से कोई परेशानी नहीं है और वह मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से बात करेंगे।
मीडिया से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, 'आप (मीडिया) परेशानी पैदा करने वाले लोग हैं। आप एक व्यक्ति, दूसरे व्यक्ति और फिर तीसरे व्यक्ति से पूछते हैं। कोई परेशानी नहीं है; मैं एचडी कुमारस्वामी से बात करूंगा।' 
दरअसल, जनवरी 28 को कुमारस्वामी ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, 'कांग्रेस के विधायकों का कहना है कि सिद्धारमैया उनके नेता हैं। कांग्रेस नेताओं को इन मुद्दों पर संज्ञान लेना होगा। मैं इसके लिए संबंधित व्यक्ति नहीं हूं। अगर वे इसे जारी रखना चाहते हैं, तो मैं पद छोड़ने को तैयार हूं। वे लाइन पार कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को अपने विधायकों को नियंत्रित करना चाहिए।' 


Karnataka Dy CM on 'Congress MLAs say Siddaramaiah is their leader'': Siddaramaiah has been best CM. He is our CLP leader. For the MLA, he (Siddaramaiah) is the CM. He has expressed his opinion. What is wrong in that? We are all happy with him (Karnataka CM HD Kumaraswamy).
जनवरी 27 को एक कार्यक्रम में एसटी सोमशेखर, एमटीबी नागराज सहित कुछ कांग्रेस विधायकों ने कथित तौर पर कहा कि वे केवल सिद्धारमैया को अपना नेता मानते हैं, एचडी कुमारस्वामी को नहीं। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी परमेस्वर ने कहा कि अपनी राय व्यक्त करने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, 'सिद्धारमैया सर्वश्रेष्ठ सीएम रहे हैं। वह हमारे CLP नेता हैं। विधायक के लिए वह (सिद्धारमैया) सीएम हैं। उन्होंने अपनी राय व्यक्त की है। इसमें गलत क्या है? हम सभी कुमारस्वामी से खुश हैं।' 


Former Karnataka CM & Congress leader Siddaramaiah on 'Congress MLAs say Siddaramaiah is their leader': You (media) are the people who create trouble. You ask one person, then second person and then third person. There is no trouble, I will speak to HD Kumaraswamy
वहीं कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'उन्हें (कर्नाटक कांग्रेस के विधायकों को) मीडिया के सामने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। बीजेपी-आरएसएस से लड़ने के लिए हम सब साथ आए हैं। किसी भी सदस्य के लिए पार्टी आलाकमान की इच्छाओं के खिलाफ बोलना उचित नहीं है। इस तरह की घटनाओं से गठबंधन में भ्रम पैदा होगा।'

नौ महीने पहले कांग्रेस-जेडीएस ने बनाई सरकार


कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए 113 विधायकों की जरूरत है. अभी कुमारस्वामी सरकार के साथ कांग्रेस के 80 और जेडीएस के 37 यानी कुल 117 विधायक हैं. जबकि 2 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया है, वहीं बसपा का 1 विधायक पहले ही समर्थन वापस ले चुका है. वहीं बीजेपी के पास अभी 104 विधायक हैं।

कर्नाटक में 52 दलित और अनुसूचित जनजातियों को बन्धक बनाए जाने पर राहुल, मायावती और #intolerance आदि गैंग खामोश क्यों?


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अनुसूचित जातियों और जनजातियों की सुरक्षा के तमाम कड़े कानूनों के बावजूद आये दिन अत्याचार की दिल हिलाने वाली घटनाएँ सुनने को मिलती रहती हैं। ताजा मामला कर्नाटक के हासन जिले में हुआ है। दलितों पर अत्याचार का ये ऐसा मामला है, जिसकी किसी आज़ाद देश में कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 52 दलितों और आदिवासियों को 3 साल तक बंधक बनाकर रखा गया था। इनमे 16 महिलाएँ और 4 बच्चे शामिल हैं। इन सभी को दिसंबर 16 को छुड़ाया गया है। गुलाम बनाकर रखे गए इन दलितों और आदिवासियों से ईंटों के भट्टे में काम करवाया जाता था। इसके अलावा उनसे बिल्डिंग निर्माण के काम में भी इस्तेमाल किया जाता था। कहीं से भी मजदूरों की अधिक माँग होने पर ठेकेदार ट्रैक्टर पर इनको बैठाकर निर्मित हो रही बिल्डिंग साइट पर ले जाता है। ये लोग इतने डरे हुए होते थे कि किसी से अपनी व्यथा तक नहीं कह पाते थे। इस मामले में कर्नाटक पुलिस भी शक के दायरे में है। स्थानीय लोगो का कहना है कि बिना पुलिस की मदद से इतने दलितों और आदिवासियों को बन्धक नहीं बनाया जा सकता।
Image result for कर्नाटक में दलितों पर हुए अत्याचारभाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं अन्य केन्द्रीय मन्त्रियों ने न्याय की गुहार करते हुए ट्वीट किये, लेकिन दलितों, मुस्लिमों और आदिवासियों के लिए मगरमछी आँसू बहाने वाली मायावती, राहुल गाँधी, अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव आदि गिरोह के अन्य छद्दम धर्म-निरपेक्षों के अलावा #metoo, #mob lynching, #intolerance, #not in my name, और #award vapsi आदि गैंग को लगता है, साँप सूंघ गया या कोई पीना साँप पी गया। क्योकि गैर-भाजपाई राज्य में इन दलितों को बन्धक बनाए जाने पर किसी ने विधवा विलाप करने का दुस्साहस तक नहीं किया। जो इस बात को प्रमाणित करता है कि गैर-भाजपाइयों को सब खून माफ़ हैं, लेकिन भाजपा शासित राज्य में जरा सा भी कुछ होने पर असहिष्णुता नज़र आने लगती है, संविधान खतरे में दिखता है। देखिए गैर-भाजपाई राज्य कर्नाटक में एक या दो नहीं बल्कि 52 दलितों को बंधक बनाये जाने पर सब सूरदास, और गूंगे बनने के अलावा लगता है कि इनके कानों में सीसा घोलकर डाल दिया गया है। यह भी सम्भव हो सकता है, इस गैंग को षड्यंत्रकारियों ने धन ही न दिया हो। 
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प्राप्त खबर के अनुसार इनको तीन साल से बंधक बनाकर रख, कम मजदूरी पर 19 घण्टे तक काम करवाया जाता था। जिसका विरोध करने पर चाबुक से पिटाई की जाती थी। उन्हें गुलामों की भाँति रखा जाता था। इनमे अधिकतर दलित और शेष अनुसूचित जनजातियों से हैं। इन लोगों की गरीबी का लाभ उठाकर इन्हे कर्नाटक के रायचूर, चिकमंगरूर, तुमकुरु और चित्रकुरु क्षेत्रों से लाया गया था। इनमे कुछ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से हैं। छुड़ाई गयीं सभी महिलाओं के साथ यौन-शोषण किया गया है। इन लोगों को एक टीन शेड में बहुत ही अमानवीय परिस्थितियों में रखा जाता था। इस अमानवीय घटना का रहस्योघाटन एक बंधक द्वारा 12 फुट ऊँची दीवार को लाँघ कर भागने पर हुआ। जिसने बाहर आकर कुछ लोगों को अपनी आपबीती सुनाने पर पुलिस की सहायता से बाकी लोगों को छुड़ाया गया। पुलिस ने जानकारी मिले जाने तक 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन असली अपराधी को पुलिस बचाने का प्रयास कर रही है, जो साबित करता है कि यह अमानवीय काम पुलिस की मिलीभगत से हो रहा था।  
Image result for कर्नाटक में दलितों पर हुए अत्याचारजानवरों से बदतर ज़िन्दगी 
इन 52 पीड़ितों में 6 वर्ष की आयु से लेकर 62 वर्ष की आयु के लोग हैं, जिन्हे मेहनताने के नाम पर तीन टाइम खाना और पुरुषों को कभी-कभी देसी दारू भी दी जाती थी। पुलिस ने उस वाहन को भी जब्त कर लिया है, जिसमे बैठाकर इन गुलामों उर्फ़ बन्धकों को एक स्थान से दूसरे/तीसरे स्थान पर ले जाया जाता था। इस दौरान किसी को भी शौच अथवा पेशाब करने तक की इजाजत नहीं थी। उनके लिए अलग से कोई शौचालय नहीं था। बल्कि उसी टिन शेड के एक कोने में जानवरों की तरह नित्यक्रिया करने को मजबूर थे। छुड़ाए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर आरोपियों की पहचान हो गयी है। परन्तु कर्नाटक पुलिस क ढिलाई के चलते कुछ आरोपी भागने में सफल हो गए हैं।  
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बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती को अब तक का सबसे करारा जवाब दि....

खामोश मीडिया क्यों?
इसी समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी ने दलित को अपना 
मूत्र पिलाया था। विस्तार 
से पढ़ने के लिए उपरोक्त लिंक पर क्लिक करें।  
स्वतन्त्र भारत में इतनी भयानक घटना घटती है, मीडिया में कोई चर्चा ही नहीं होती। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस समर्पित सरकार के राज में होने के कारण मीडिया इसे छुपाने की कोशिश कर रही है। यही नहीं, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अखिलेश यादव के कार्यकाल में एक मुस्लिम पदाधिकारी द्वारा के दलित को मूत्र पिलाये जाने पर भी मीडिया खामोश रही। उस समय भी किसी  #metoo, #mob lynching, #intolerance, #not in my name, और #award vapsi आदि गैंग के मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली थी।   
अब प्रश्न यह है कि कांग्रेस अपने राज्यों में दलितों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में असफल है। लेकिन राहुल गाँधी भी अब तक खामोश हैं। 
अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को हर सम्भव सहायता देने का आग्रह किया है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के राज में दलितों और अनुसूचित जनजातियों को बन्धक बनाया जा रहा है और कांग्रेस अपनी सरकार बचाने में लगी हुई है।    

कर्नाटक उपचुनाव : भाजपा को बड़ा झटका, पांच में से चार सीटों पर कांग्रेस-JDS की जीत

Representative Image
जीत का जश्न मनाती हुईं कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता 
कर्नाटक में तीन लोकसभा सीटों और दो विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए अच्छी खबर नहीं लाए हैं। उपचुनावों में सबसे बड़ा उलटफेर बेल्‍लारी लोकसभा सीट पर देखने को मिला है. कभी कांग्रेस का गढ़ माने जानी वाली इस लोकसभा सीट पर 2004 से बीजेपी पर दबदबा था. लेकिन कांग्रेस ने लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी से यह सीट लगभग छीन ली है. इस सीट पर 2014 में बेल्‍लारी किंग के नाम से मशहूर रेड्डी ब्रदर्स के बेहद करीबी बी श्रीरामुलु ने चुनावी जीत हासिल की थी.
भाजपा के खाते में केवल शिमोगा सीट आई है जहां से पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे राघवेंद्र 47388 वोटों से चुनाव जीत गए हैं। बाकी 4 सीटों पर कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की जीत हुई है। रामनगरम विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री कुमारस्वामी की पत्नी अनीता कुमारस्वामी 109137 वोटों से चुनाव जीत गई हैं। जामखंडी विधानसभा सीट से कांग्रेस के आनंद सिद्धू 39480 हजार वोटों से चुनाव जीत गए हैं।
कांग्रेस का गढ़
बेल्‍लारी कांग्रेस का गढ़ रहा है. 14 लोकसभा चुनाव कांग्रेस ने यहां से जीते हैं. 1999 में यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने बेल्‍लारी से लोकसभा चुनाव जीतकर यहां से सियासी करियर शुरू किया था. उन्‍होंने उस चुनाव में बीजेपी की दिग्‍गज नेता सुषमा स्‍वराज को हराया था. इस बार यह 15वीं जीत है.
यह चुनाव भाजपा के साथ-साथ सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। नतीजों पर जेडीएस नेता और मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा, 'मैं राज्य और केंद्र में कांग्रेस के नेताओं को बधाई देता हूं। मैं जेडीएस के राज्य के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी बधाई देता हूं, जिन्होंने इस जीत के लिए काम किया। बीजेपी ने जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन को 'अपवित्र मैत्री' कहा,  आज यह विवाद खत्म हो गया है।'
उन्होंने कहा, 'यह चुनाव पहला कदम था। यहां 28 लोकसभा सीटें हैं, हम उन सभी को जीतने के लिए कांग्रेस के साथ काम करेंगे, यह हमारा लक्ष्य है। यह सिर्फ खाली जीत नहीं है, यह लोगों का हमारे में विश्वास है। यह जीत हमें घमंडी नहीं बना रही है।'
मांड्या लोकसभा सीट पर जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने 324943 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। 
भाजपा के लिए बड़ा झटका, रामनगरम सीट से मुख्यमंत्री की पत्नी अनीता कुमारस्वामी ने चुनाव जीता।
बेल्‍लारी बंधु
खनिज के लिए प्रसिद्ध बेल्लारी का इलाका बेल्लारी बंधुओं की वजह से भी सुर्खियों में रहा है. बेल्लारी बंधुओं में तीन भाई हैं. गली सोमशेखर रेड्डी, उनसे बड़े गली जनार्दन रेड्डी और सबसे बड़े गली करुणाकर रेड्डी. येदियुरप्पा की भाजपा सरकार में जनार्दन रेड्डी पर्यटन मंत्री रह चुके हैं, जी करुणाकर वित्त मंत्री रह चुके हैं और जी सोमशेखर ने सादी विधायक रह चुके हैं. 
इन भाइयों के पिता कभी आंध्रप्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल थे (बेल्लारी आंध्र से लगा हुआ है). तीनों का बचपन तंगी में बीता है. बड़े हुए, तो भाइयों ने एक चिटफंड कंपनी शुरू की, लेकिन वह ज्यादा नहीं चली. इन्होंने लौह अयस्क (आयरन ओर) की खदानें शुरू कीं, तब से ये लगातार सुर्खियों में रहे.
बेल्लारी में सुंदुरु रेंज नाम से पहाड़ों की एक श्रृंखला है. यहां के कई पहाड़ लौह अयस्क के बने हैं. बेशकीमती मिट्टी, जिसे पिघलाकर लोहा बनता है. अब लौह अयस्क बेल्लारी और आंध्रप्रदेश के ओबुलपुरम – दोनों जिलों में मिलता है. रेड्डी बंधु खनन का सारा कारोबार 2002 में शुरू की OMC के ज़रिए करते थे, माने ओबुलपुरम माइनिंग कंपनी. ओबुलपुरम आंध्रप्रदेश में है. लेकिन इसका हेडक्वार्टर बेल्लारी में है.
Karnataka By Election 2018: BJP प्रत्याशी के सहयोग से CM की पत्नी जीतीं, जामखंडी में भी पैर नहीं जमा पाई BJP
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी ने रामनगर सीट से जीत दर्ज की
भाजपा प्रत्याशी के सहयोग से CM की पत्नी ने फहराया परचम
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी जेडीएस प्रत्याशी के तौर पर रामनगर विधानसभा सीट से विजयी हुई हैं. अनिता ने अपने प्रतिद्ंवदी प्रत्याशी के 109137 वोटों से जीत दर्ज की है. यहां बीजेपी प्रत्याशी ने अनिता के लिए राह आसान कर दी थी.
इस सीट पर कांग्रेस के नेता एल चंद्रशेखर ने बीजेपी का दामन थामा था. पार्टी ने उनको टिकट भी दिया और इस तरह वह मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्‍वामी की पत्‍नी अनीता को चुनौती देने के लिए चुनावी मैदान में उतर गए. 
दरअसल, कुमारस्‍वामी ने कर्नाटक चुनावों के दौरान दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ा था. दोनों ही जगहों से जीतने के कारण उन्‍होंने अपनी इस परंपरागत सीट को छोड़ दिया. अपनी जगह अनीता को इस बार उम्‍मीदवार बना दिया. लेकिन अब चुनाव से महज दो दिन पहले बीजेपी प्रत्‍याशी चंद्रशेखर ने मुकाबले से हटने का ऐलान करते हुए फिर से कांग्रेस में जाने की बात कहकर सबको हैरान कर दिया था.
एल चंद्रशेखर ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में एकता नहीं है और उनको कोई वास्‍तविक सहयोग नहीं मिला. इसलिए वह अपनी पुरानी पार्टी में वापस जा रहे हैं. इससे तीन नवंबर को रामनगर विधानसभा सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव में अनीता को फायदा मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है. रामनगर सीट एचडी कुमारस्‍वामी का गढ़ मानी जाती है. यह सीट इसलिए भी मशहूर है क्‍योंकि इसी इलाके में 'शोले' फिल्‍म की शूटिंग भी हुई थी.

कर्नाटक: कांग्रेस-जेडीएस सरकार से BSP बाहर

कर्नाटक: कांग्रेस-जेडीएस सरकार से BSP बाहर, एन महेश ने दिया मंत्री पद से इस्तीफाकर्नाटक में बीएसपी के एकमात्र विधायक एन महेश ने गुरुवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. वह कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में शिक्षा मंत्री थे. उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब बसपा सुप्रीमो मायावती मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन न करके अपने उम्मीदवार अलग से उतारने का ऐलान कर चुकी हैं.
एन महेश ने कुछ दिन पहले कहा था कि अगर पार्टी अध्यक्ष मायावती उन्हें गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने के लिए कहेंगी तो वह उनके निर्देश का पालन करेंगे. महेश ने कांग्रेस, बीजेपी, और जनता दल सेक्युलर पर जातिवादी राजनीति करने का भी आरोप लगाया था. 
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था, "मैं यह खुले तौर पर बोल रहा हूं, चाहे वह कांग्रेस हो या बीजेपी या जेडीएस, उनके कार्यकर्ता मैं जिस विचारधारा की बात कर रहा हूं, उसे नहीं समझते. जब तक जातिवादी व्यवस्था और असमानता है, उन्हें इसको समझने की जरूरत नहीं हैं. कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस का अस्तित्व बरकरार रहेगा. जिस समय जातिवादी व्यवस्था और असमानता खत्म हो जाएगी, उस दिन बहुजन समाज पार्टी सत्ता में आएगी."