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बिहार चुनाव : वो RJD नेता कौन था जिसने IAS की पत्नी, माँ, भतीजी से लगातार 2 साल तक किया था रेप… , करवाना पड़ा था अबॉर्शन?

                                                             प्रतीकात्मक 

भारतीय जनता पार्टी शासित उत्तर प्रदेश के हाथरस की घटना को जिस तरह योगी विरोधी उछाल रहे हैं, ये ही लोग राष्ट्रीय जनता दल द्वारा बिहार में जंगल राज  पर चुप्पी साधे हुए थे। आरजेडी के राज में आम नागरिक तो दूर की बात है, ब्यूरोक्रेट्स के परिवार की महिलाएं तक सुरक्षित नहीं थीं। आरजेडी के राज में इस तरह के अपराध होना स्वाभाविक था, क्योकि जिस प्रदेश में मुख्यमंत्री अनपढ़ हो, और परिवार नियोजन को तार-तार कर बच्चों की लाइन लगाने में व्यस्त हो, कानून की धज्जियां उड़नी ही हैं। जिसे कवि अखिलेश द्विवेदी अपनी कविता पाठ में वर्णित कर रहे हैं:-

नेताओं के बाद अगर सरकार में किसी की सबसे ज्यादा चलती है तो वो हैं ब्यूरोक्रेट्स। कई बार तो उनकी भूमिका नेताओं से भी बढ़ कर होती है क्योंकि योजनाओं के क्रियान्वयन का जिम्मा उनके पास ही होता है। लेकिन, बिहार में जंगलराज का जो दौर था, उसमें IAS अधिकारी तक सुरक्षित नहीं थे। ऐसे ही एक अधिकारी की पत्नी थीं चम्पा विश्वास। चम्पा विश्वास के साथ रेप एक ऐसी घटना थी, जिसने पूरे बिहार ही नहीं, बल्कि देश को हिला कर रख दिया था।

बिहार में नेताओं पर यौन शोषण के आरोप नए नहीं हैं। हाल ही में सामने आए मुजफ्फरपुर बालिका गृह काण्ड के दौरान भी बड़े नेताओं का नाम सामने आया। राजद ने दो बलात्कारी विधायकों की पत्नियों को टिकट दे रखा है। अभी जब ये सब खुलेआम हो रहा है तो उस दौर की आप सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं, जब लालू यादव के क़रीबी पूरे बिहार में कुछ भी कर सकते थे, कुछ भी। इन्हीं काली घटनाओं में से एक की हम आज चर्चा करने जा रहे हैं।

चम्पा विश्वास के साथ रेप की घटना: बिहार के दामन पर लगा काला दाग

बिहार में जंगलराज के दौर में हत्याएँ और अपहरण इतने आम थे कि ऐसी घटनाओं को लोगों ने खबर मानना भी छोड़ दिया था। सत्ताधारी पार्टी के नेता ही गुंडे थे और उनके द्वारा यौन शोषण और हत्या की वारदातों के बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी। लेकिन, IAS अधिकारी बीबी विश्वास ने जब लालू यादव के करीबी मृत्युंजय यादव पर 2 साल में न सिर्फ उनकी पत्नी का बल्कि उनके कई सम्बन्धियों का भी रेप करने का आरोप लगाया, तो कोहराम मच गया।

अगर इस मामले की पुलिस में शिकायत होती तो या तो फाइलें धूल फाँकती, या फिर उलटा पीड़ितों के खिलाफ ही कार्रवाई हो जाती। लेकिन, मामला लाइमलाइट में तब आया जब पीड़िता ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल सुन्दर सिंह भंडारी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई। 2 साल तक किसी का जबरदस्ती यौन शोषण, यहाँ तक कि उसके नाते-रिश्तेदारी में कई अन्य महिलाओं का रेप – ये एक साधारण घटना नहीं थी।

1982 बैच के IAS अधिकारी बीबी विश्वास तब बिहार के लेबर विभाग में सोशल सिक्योरिटी के डायरेक्टर थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मृत्युंजय (तब 27 साल के) ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर न सिर्फ उनकी पत्नी का, बल्कि उनकी माँ, दो मेड्स और भतीजी तक के साथ रेप किया। उसने इसके लिए धमकी, लालच, जोर-जबरदस्ती और हिंसा – सभी का सहारा लिया। तब चम्पा विश्वास 30 साल की थीं।

चम्पा विश्वास को 1 बार एबॉर्शन भी कराना पड़ा। अंत में उन्होंने अपना ‘Sterlization’ ही करवा लिया था। कई बार बलात्कार किए जाने के कारण बार-बार गर्भवती होने से बचने के लिए उन्हें ये क़दम उठाने पड़े थे। तब उन्होंने ये भी अंदेशा जताया था कि उनकी भतीजी कल्याणी और दो मेड सर्वेन्ट्स, जो गायब हो गई थीं, उनकी हत्या भी की गई हो सकती है। राज्यपाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय को इस मामले को देखने की सिफारिश की थी।

साथ ही उन्होंने बिहार के तत्कालीन डीजीपी नियाज अहमद को भी इसकी जाँच करने के आदेश दिए। राजद के विधायक रहे मृत्युंजय यादव ने तब लालू यादव पर किताब भी लिखी थी। अगस्त 8, 1998 को भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा था कि यहाँ तक कि प्रभावशाली और सम्मानित परिवारों की महिलाएँ भी अब सुरक्षित नहीं हैं और असहाय हैं क्योंकि राजद के गुंडों को लगता है कि वो कुछ भी कर के बच कर निकल जाएँगे।

बीबी विस्वास इतने बड़े अधिकारी होने के बावजूद अपने परिवार को इससे नहीं बचा पाए, ये राजद के गुंडों के प्रभाव के बारे में बताता है। बाद में वो अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। चम्पा ने अपने पति के जीवन को खतरा बताते हुए कहा था कि उन्हें काफी बाद में इस मामले के बारे में पता चला। मृत्युंजय की माँ हेमलता यादव भी विधायक रह चुकी थीं और वो ‘बिहार सोशल वेलफेयर एडवाइजरी बोर्ड’ की अध्यक्ष थीं।

तब उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि ये उनके और उनकी माँ के खिलाफ साजिश है। साथ ही उन्होंने बीबी विश्वास पर अपनी ड्यूटी ठीक से न निभाने और दफ्तर से गायब रहने तक के आरोप भी लगाए। मोहम्मद नमतुल्लाह तब विधानसभा में राजद के चीफ व्हिप थे। उन्होंने कहा था कि वो हेमलता के परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और वो ‘लड़का’ ऐसा नहीं कर सकता।

ये उसी का एक वर्जन था, जब अपने बेटे अखिलेश यादव की सरकार रहते मुलायम सिंह यादव ने बलात्कारियों को लेकर ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है‘ वाला बयान दिया था। ये सब तब हो रहा था, जब मृत्युंजय का इतिहास भी ठीक नहीं था। इस घटना से 3 साल पहले भी एक राजनेता की बेटी का यौन शोषण करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया था। हेमलता उस वक़्त 8 सालों से लालू यादव की करीबी थीं।

क्या-क्या लगे थे आरोप?

बीबी विश्वास का परिवार पटना के बेली रोड में स्थित सरकारी क्वार्टर में रहता था। चम्पा ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनके बगल के क्वार्टर में रहने वाले अधिकारी और उनकी पत्नी उन्हें बुला कर अपने फ्लैट में लेकर गए, जहाँ मृत्युंजय और हेमलता पहले से ही बैठे हुए थे। वहाँ उन लोगों ने चम्पा को मृत्युंजय के साथ अकेले कमरे में बंद कर दिया, जहाँ उसने उनका रेप किया। आरोप है कि इसके बाद हेमलता ने उन्हें धमकाया कि इस घटना के बारे में किसी को भी पता चला तो उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी जाएगी और उनके आपत्तिजनक फोटोग्राफ्स सार्वजनिक कर दिए जाएँगे।

एक दिन अचानक से मृत्युंजय फिर अपनी माँ और कुछ लोगों के साथ कैमरा लेकर आ धमका, जहाँ उसने चम्पा के साथ शादी की जिद की। उसकी माँ ने कहा कि मृत्युंजय स्मार्ट है और बड़े परिवार से है, इसीलिए चम्पा को उससे शादी कर लेनी चाहिए। उन लोगों ने चम्पा के पति को बूढ़ा बताते हुए कहा कि हेमलता को मंत्री पद मिलने के बाद उन्हें भी कहीं का अध्यक्ष बना दिया जाएगा। वहाँ उनके साथ फिर बलात्कार किया गया।

शिकायत में बताया गया था कि दिसंबर 1995 में एक बार फिर मृत्युंजय पहुँचा, जहाँ उसने चम्पा विश्वास की माँ को किचेन में देखा। इसके बाद उसने उनका जबरन आलिंगन किया और किस किया। घबराई माँ ने चम्पा से परिवार सहित वो फ़्लैट खाली करने को कहा। इसी तरह उसने चम्पा विश्वास की भतीजी कल्याणी के साथ भी रेप किया। साथ ही वो घर की मेड से कह कर बीबी विश्वास को ड्रग्स दे दिया करता था, ताकि वो बेहोश हो जाएँ।

‘नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन’ को भेजे गए पत्र में चम्पा ने आरोप लगाया था कि बिहार के एक बहुत बड़े नेता (जंगलराज के मसीहा) ने भी उनके साथ बलात्कार किया। उनका आरोप था कि पुलिस ने भी उनके बयान को हूबहू कोर्ट में पेश नहीं किया और उसमें बदलाव कर दिया। दिल्ली में शिफ्ट होने के बाद परिवार के भीतर ऐसा डर बैठा हुआ था कि उन्होंने 20 बार अपना घर बदला। मृत्युंजय के दोस्तों ने भी चम्पा के साथ बलात्कार किया था।

हालाँकि, 2010 में बिहार के पटना हाईकोर्ट ने हेमलता यादव और मृत्युंजय को चम्पा विश्वास रेप कांड से जुड़े मामले में बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। आरोपित का कहना था कि राजद और भाजपा की लड़ाई में उसे बकरा बनाया गया। उसका कहना था कि सुशील मोदी ने इसे मुद्दा बना दिया, जिससे उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो गई, वरना वो दिल्ली के हिन्दू कॉलेज में पढ़ता था और सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था। उसने कहा था कि उसके अधिकतर दोस्त अब सिविल सर्विसेज में हैं।

लेकिन, मृत्युंजय यादव ने सितम्बर 2005 में एक ऐसा बयान दिया था, जिसकी चर्चा आवश्यक है। उसने कहा था कि राजद के बड़े नेताओं को बचाने के लिए उसे फँसाया गया। उसने ये भी आरोप लगाया था कि जिस जज ने उसे और उसकी माँ को सजा सुनाई, उसे प्रमोट किया गया। अपनी जान को ख़तरा बताते हुए उसने पूरी जाँच प्रक्रिया को ही भ्रष्ट बता दिया था। उसने आरोप लगाया था कि राजनैतिक लाभ के लिए उसका इस्तेमाल हुआ।

चीन : मुस्लिम औरतों के गर्भाशय में यंत्र फिट कर हजारों का जबरन गर्भपात, ड्रग्स देकर रोके पीरियड्स

चीन, उइगर महिला
उइगर मुस्लिम महिलाओं द्वारा इस तरह के रैंप शो करवा कर दुनियां से अत्याचार छुपाने का प्रयास  
चीन में करीब 20 लाख उइगर मुसलमान डिटेंशन कैम्प्स में रखे गए हैं। उनके परिवारों पर सरकारी अधिकारी निगरानी रखते हैं। अब पता चला है कि उइगर महिलाओं का जबरदस्ती गर्भपात करा दिया जाता है।
चीन में करीब 20 लाख उइगर मुसलमान डिटेंशन कैम्प्स में रखे गए हैं। उनके परिवारों पर सरकारी अधिकारी निगरानी रखते हैं। अब पता चला है कि उइगर महिलाओं का जबरदस्ती गर्भपात करा दिया जाता है।
उइगर महिलाओं का नियमित रूप से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया जाता है। साथ ही उनके गर्भाशय में यंत्र फिट कर दिए जाते हैं। हज़ारों महिलाओं का जबरन गर्भपात कराए जाने की भी ख़बर सामने आई है। कहा जा रहा है कि अब तक लाखों महिलाओं के साथ ये सब कुछ किया जा चुका है। जहाँ पूरे चीन में गर्भपात की संख्या घटती जा रही है, शिनजियांग में इसमें जबरदस्त वृद्धि आई है।
उइगर मुसलमानों में जिन लोगों के ज्यादा बच्चे होते हैं, उन्हें चीन जबरदस्ती प्रताड़ना कैम्पों में ठूँस देता है। जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं, उन माता-पिता के बच्चों को उनसे दूर कर दिया जाता है। उन्हें भारी धनराशि जमा करवाई जाती है। बिलखते माता-पिता अपने बच्चों से दूर उन्हें खोजने में लगे रहते हैं। साथ ही पुलिस ऐसे लोगों के घर पर छापेमारी करती है और बच्चों तक को भी उठा कर ले जाती है।
कजाखस्तानी मूल की एक उइगर मुस्लिम महिला गुलनार ओमिरजाख ने जैसे ही अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया, चीन की कम्युनिस्ट सरकार को इसकी भनक लग गई। इसके बाद अधिकारियों और मेडिकल टीम भेज कर उसके गर्भाशय में IUD में गर्भनिरोधक यंत्र डाल दिए गए। इसके 2 साल बाद जनवरी 2018 में चीनी अधिकारी उसके पास फिर पहुँचे और तीन बच्चे पैदा करने के लिए 2 लाख रुपए की धनराशि दंडस्वरूप देने को कहा। इसके लिए उन्हें मात्र 3 दिनों का समय दिया गया।
ऐसा नहीं करने पर महिला को धमकी दी गई कि उसे और उसके पति को लाखों दूसरे उइगर मुसलमानों की तरह प्रताड़ना कैम्पों में डाल दिया जाएगा। शिनजियांग में डर का आलम ये है कि मात्र 1 साल में बच्चों के जन्म की दर 24% घट गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये औसत काफ़ी कम, मात्र 4.2% ही है।
‘द एसोसिएट प्रेस’ के अनुसार, शिजियांग सबसे ज्यादा जन्म दर वाला क्षेत्र हुआ करता था, लेकिन सरकार द्वारा करोड़ों डॉलर फूँकने के बाद यहाँ जन्म दर काफ़ी तेज़ी से घट रहा है।
चीन में अल्पसंख्यक क्षेत्रों का अध्ययन करने वाले जेंग ने कहा कि इस तरह की गिरावट शायद ही कहीं देखी जाती है। ये एक बड़े ‘बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम’ का हिस्सा है, जिसे चीन कि कम्युनिस्ट सरकार द्वारा चलाया जा रहा है। इसमें स्वेच्छा के लिए कोई जगह नहीं है और अत्याचार पर ही सारी प्रक्रिया आधारित है। 2014 मे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शिनजियांग दौरे के साथ ही वहाँ ‘बर्थ कंट्रोल’ वाला प्रोग्राम तय कर लिया गया था।
चीन सरकार समर्थक विशेषज्ञों का कहना है कि बम ब्लास्ट, चाकूबाजी और अन्य प्रकार के हमलों के अलावा आतंकी हमलों के लिए भी शिनजियांग के उइगर मुसलमान ही दोषी हैं।
शिनजियांग अकादमी ऑफ सोशल साइन्सेज का कहना है कि चीन मे गरीबी और कट्टरता के लिए यही उइगर मुसलमान जिम्मेदार हैं, इसीलिए इनके बच्चे पैदा करने कि दर को कम करना जरूरी है। अन्य विशेषज्ञ इसे उइगर मुसलमानों को उनकी पहचान से दूर करने और उनकी जनसंख्या कम करने के इरादे को कारण बताते हैं।

यूके के न्यूकासल यूनिवर्सिटी के जाऊन स्मिथ फिनली का कहना है कि ये एक ऐसा नरसंहार है, जिसकी प्रक्रिया को एकदम धीमा रखा गया है। उन्होंने कहा कि उइगर मुसलमानों कि जनेटिक जनसंख्या कम करने के लिए ये सब किया जा रहा है। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी गर्भवती महिलाओं और बच्चों को खोजने के लिए उइगर मुसलमानों के घर-घर जाकर चेक करते हैं। चीन सरकार ने स्पेशल कमरे बनाए हैं, जहां अल्ट्रासाउन्ड स्कैनर्स लगे गए हैं।

साथ ही उइगर मुस्लिम महिलाओं का जबरन गायनोकोलॉजी टेस्ट कराया जाता है। ट्रैक्टर ड्राइवर अबदुशुकुर उमर को 7 साल कि सजा दी गई, क्योंकि उनके 7 बच्चे थे। साथ ही चीन हान समुदाय और उइगर मुसलमानों के बीच अन्तर्जातीय विवाह पर भी जोर दे रहा है, ताकि वहाँ कि डेमोग्राफी बदली जाए। महिलाओं को जबरन ऐसे लेक्चरों मे हिस्सा लेने कहा जाता है, जहाँ बच्चे न पैदा करने की सलाह दी जाती है।
7 ऐसी ही पीड़ित उइगर मुस्लिम महिलाओं ने खुलासा किया है कि उन्हें बर्थ कंट्रोल पिल खिलाए गए और इंजेक्शन दिए गए। महिलाओं को इन दवाओं के कारण आलस, थकान और बेहोशी जैसी हालत हो गई। इसके बाद उन महिलाओं के पीरियड्स आने ही बंद हो गए। जब हिरासत और प्रताड़ना कैंपों से निकल कर ये महिलाएँ किसी तरह चीन से बाहर निकलने में कामयाब हुई और उन्होंने मेडिकल टेस्ट कराया तो पाया कि उन्हें ड्रग्स देकर बाँझ बना दिया गया है।
हालाँकि, जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफी और अत्याचार का रोना रोने वाले वहाँ कि जनता के झूठे ठेकेदारों के पास चीन के खिलाफ बोलने के लिए हिम्मत नहीं है, क्योंकि उन्हें अपना उल्लू सीधा करना है। इन इस्लामी कट्टरपंथियों ने आज तक लाखों उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार पर एक शब्द नहीं कहा। जबकि जम्मू-कश्मीर में सारी चीजें लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के तहत होती है। वहाँ लोगों को शेष भारत से ज्यादा ही सुविधाएँ और अधिकार मिलते रहे हैं।
इससे पहले ख़बर आई थी कि चीनी उइगर मुस्लिमों की पत्नियों के साथ उसी बिस्तर पर सोते हैं। उइगर मुस्लिम परिवारों के लिए नियम बनाया गया है कि वो नियमित रूप से चीनी अधिकारियों को अपने घर पर आमंत्रित करें और अपने मजहबी और राजनीतिक विचारों से उन्हें अवगत कराएँ। ये चीनी सम्बन्धी उइगर मुस्लिमों के परिवारों को चीन की क्षेत्रीय नीति और चीनी भाषा की शिक्षा देते हैं। वो अपने साथ शराब और सूअर का माँस लाते हैं, और मुस्लिमों को जबरन खिलाते हैं। 

चीन : उइगर मुस्लिम महिलाओं का गर्भपात और 35 के कम महिलाओं के हो रहे बलात्कार

कजाकी-उइगरचीन के शिनजिंग प्रांत में उइगर मुसलमानों की भाँति ही हजारों की संख्या में कजाकिस्तान के मुस्लिमों को भी बंदी बनाकर रखा गया है। कई कार्यकर्ताओं के अनुसार चीन के यातना गृहों में करीब 20 लाख से ज्यादा लोग कैद हैं। इनमें से अधिकतर उइगर हैं। कुछ कजाक मुस्लिमों जैसे अल्पसंख्यक समूह के भी हैं। इन्हें भी उइगर मुस्लिमों की तरह ही प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके कारण कई सुनने में अक्षम हो गए हैं तो कुछ कि यादाश्त चली गई है।इसके अलावा उइगर मुस्लिम महिलाओं की तरह इस समुदाय की महिलाओं का भी पहले बलात्कार होता है और फिर बाद में जबरन इनका गर्भ गिरवा दिया जाता है।
अलजज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, उसके संवाददाता ओसामा बिन जावेद ने कजाकिस्तान के सबसे बड़े शहर अलमाती में चीन से भागकर आए कुछ कजाकियों से मुलाकात की। इस दौरान उसे कई ऐसे सहमे लोग भी मिले, जिन्होंने अपनी पहचान बताने से मना कर दिया। उन्हें डर था कि अगर वे अपना मुँह खोलेंगे तो उनके रिश्तेदारों के साथ चीन के यातना गृह में और ज्यादा अत्याचार होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक समय तक चीन की हिरासत में बंदी बनकर रहे एक कज़ाकी ने बताया कि डिटेंशन कैंप में उसे ऐसी दवाइयाँ और इंजेक्शन लेने को मजबूर किया गया, जिससे उसका शरीर बर्बाद हो गया। उसके सुनने की क्षमता चली गई। कजाकी व्यक्ति के अनुसार आज उसकी स्थिति ये हो चुकी है कि उसे अब अपने साथ हुआ ज्यादा कुछ तो याद नहीं है, लेकिन चीनी कविताएँ उसे अच्छे से याद हैं। इन्हें पढ़ने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को कैंप में मजबूर किया जाता है।
इसके अलावा, चीन के नॉर्थवेस्ट इलाके के डिटेंशन कैंप में अरसे तक बंदी बनाकर रखी गई कजाकी महिलाओं ने बताया कि चीन के प्रशासन ने उनके साथ बहुत बर्बरता की और जबरन उनका गर्भपात करवाया।
गुलजीरा मॉडगिन नामक महिला, जिन्होंने कजाक की नागरिकता मिलने से पहले अपने कटु अनुभवों के बारे में कभी जुबान नहीं खोली थी, ने बताया कि यातना गृह में उन्हें जान से मारने की धमकी देकर डराया जाता था। उनको प्रताड़ित किया जाता था। गुलजीरा के अनुसार एक बार हिरासत के दौरान उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए भेजा गया। जहाँ वे प्रेगनेंट निकलीं। जब अधिकारियों को ये बात पता चली, तो उनपर गर्भपात का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने इससे मना किया तो उन्हें अकेला छोड़ दिया गया और बाद में एक क्लिनिक भेजा गया और टीबी की दवाइयों के नामपर कुछ दवाइयाँ खाने को कहा गया। लेकिन वो समझ गई वो क्या हैं।
चीनी बर्बरता और उनके तौर-तरीके देख तुर्की के सदस्यों का कहना है कि चीनी प्रशासन गर्भपात को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। जब भी वह इससे मना करते हैं, तो जबरन उनके साथ ऐसे काम किया जाता है।
वहीं इस संबंध में कई कजाकियों का कहना है कि चीन आतंक से लड़ने के नाम पर मुस्लिमों पर लगातार अत्याचार कर रहा है और हर बार मानवाधिकारों का उल्लंघन भी कर रहा है। लेकिन कोई भी नेता उनके पक्ष में नहीं खड़ा हो रहा। उनकी मुस्लिम होने की पहचान को समय से पहले ही मिटाया जा रहा है और उनके बच्चों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है।
इससे पहले डेली मेल ने ऐसी ही दो महिलाओं की आपबीती छापी थी। इन्हें 2009 में शिनजियांग में हिरासत में लिया गया था। 4 साल तक चीनी अधिकारियों की प्रताड़ना झेलने के बाद अब दोनों तुर्की में हैं। इन्होंने बताया था कि चीन में 35 साल से कम उम्र के हर आदमी और हर औरत का बलात्कार किया जाता है। कैंप के गार्ड जिसके साथ रात गुजारना चाहते हैं, उसके सिर पर बैग रखते हैं और फिर खींचते हुए बाहर ले जाते है। फिर पूरी रात उसका बलात्कार होता है।
2017 में उइगर मुस्लिमों, कजाकी मुस्लिमों, वीगर समुदाय के साथ हो रहे अत्याचारों का खुलासा हुआ था। इसके बाद इस मामले पर कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं। जिसमें खुलासा हुआ था कि चीन द्वारा री-एड्युकेशनल कैंपों के नाम पर चलाए जा रहे यातना गृहों में महिलाओं के साथ पहले रेप होता है और फिर उनका जबरन गर्भपात करवाया जाता है। इसके अलावा यहाँ महिलाओं के गुप्तांगों में मिर्ची के पेस्ट लगाए जाने भी बेहद आम हैं।
लेकिन फिर भी चीन की प्रवक्ता वैश्विक स्तर पर इस संबंध में बात करते हुए दावा करती हैं कि उइगर मुस्लिमों की तरह उनके देश में 56 और समूह रहते हैं। वे यहाँ बेहतर जिंदगी जी रहे हैं और अपनी आजादी एवं अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चाइना भी मुस्लिम बहुसंख्यक देशों से अपने दोस्ताना संबंधों को आनंद ले रहा है।

पाकिस्तान : गर्भपात बन चुका है उद्योग

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सांकेतिक चित्र 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कई दशक पहले, पाकिस्तान में परिवार नियोजन अभियान एक नारा था, “बच्चे दो ही अच्छे”, लेकिन इस नारे को धार्मिक वर्ग के साथ-साथ राष्ट्रवादियों ने भी खारिज कर दिया था, जो पड़ोसी देश भारत की 1.2 अरब लोगों की आबादी को देखते हुए देश की जनसंख्या में वृद्धि करना चाहते हैं। पाकिस्तान की वर्तमान जनसंख्या 207 मिलियन है।
Image result for इमरान खानपाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सेक्स एजुकेशन और गर्भ निरोधक अभियानों की वकालत करते रहे है। लेकिन अब भी महिलाओं के लिए हालात नहीं बदले। वे या तो बच्चा पैदा करती हैं या अल्सर की दवाइयाें से एबॉर्शन कराती हैं
पाकिस्तान में रहने वाली जमीना का परिवार गरीब और बेहद जरूरतमंद हैं। लेकिन गरीबी इनके लिए शायद सबसे बड़ी समस्या नहीं है। अगर कोई मुश्किल है तो वह है बच्चे पैदा करना। जमीना के सामने मजबूरी अपनी जान पर खेलकर अपने पति के छठे बच्चे को जन्म देने की थी। अगर बच्चा नहीं करती तो कहीं चुपचाप, चोरी-छुपे, गैरकानूनी ढंग से एबॉर्शन कराती। दोनों ही सूरतों में उसकी जान को बड़ा खतरा था। अंत में जमीना ने गर्भपात करा लिया
लेकिन यह कोई इक्का दुक्का मामला नहीं है। पाकिस्तान में हर साल आधे से अधिक प्रेगनेंसी बिना प्लानिंग के होती हैं। अमेरिकी रिसर्च एजेंसी गुटमाखर इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट बताती है, "देश की तकरीबन 42 लाख महिलाएं बिना किसी तैयारी और सोच-विचार के गर्भधारण करती हैं। साथ ही पाकिस्तान की 54 फीसदी महिलाएं गर्भपात के लिए जाती है।"
Related imageआपको यह जानकर शायद हैरानी हो कि दुनिया में सबसे ज्यादा गर्भपात यानी अबॉर्शन पाकिस्तान में करवाए जाते हैं। यहां तक कि फ्री सेक्स और खुले माहौल वाले यूरोपीय देशों में भी अबॉर्शन की दर इतनी नहीं है जितनी पाकिस्तान में। 2012 में न्यूयॉर्क की संस्था पॉपुलेशन कौंसिल ने एक अध्ययन किया था जिसमें यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तान में 15 से 44 साल की उम्र की हर 1000 महिलाओं में से 50 अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को गिरवाती हैं। यह अनुपात अमेरिका से लगभग चार गुना अधिक है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तान में कानूनी तौर पर गर्भपात करवाना बेहद मुश्किल है। कुछ खास स्थितियों में ही महिलाओं को अबॉर्शन की छूट दी जाती है। खासतौर पर तब गर्भपात बिल्कुल नहीं करवाया जा सकता, जब ऐसा करने पर महिला की जान को कोई खतरा हो। अबॉर्शन की छूट सिर्फ उन हालात में दी जाती है, जब ऐसा करना मां की जिंदगी बचाने के लिए जरूरी हो। लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान में गर्भपात कराए जा रहे हैं उसे देखते हुए वहां के समाज पर कई सवाल खड़े होते हैं।
परिवार नियोजन से दूरी
पाकिस्तान में परिवार नियोजन हमेशा से ही एक विवादित मुद्दा रहा है। देश में सक्रिय धार्मिक नेता परिवार नियोजन के खिलाफ आलोचनात्मक रुख रखते हैं। साथ ही देश में सेक्स एजुकेशन और गर्भ-निरोधकों के इस्तेमाल को लेकर कोई खास जागरुकता भी नहीं है
जमीना बताती है कि डॉक्टर की सलाह जब उसने अपने 35 साल के पति को बताई तो उसके पति ने जवाब में कहा, "खुदा पर भरोसा रखो।" जमीना कहती है, "मेरा पति एक धार्मिक इंसान है और वह कई सारे बेटे चाहता है।"
तकरीबन एक दशक पहले पाकिस्तान में परिवार नियोजन अभियान चलाया गया था। नारा दिया गया, "दो बच्चे ही अच्छे"। लेकिन देश में सक्रिय कट्टर धार्मिक नेताओं ने इस पूरे कदम को सिरे से नकार दिया। देश के राष्ट्रवादी नेता ज्यादा से ज्यादा आबादी की वकालत करते हैं
आबादी का बोझ
पाकिस्तान की कुल आबादी 20.7 करोड़ के करीब है. अधिक बच्चे पैदा करने की चाहत देश के संसाधनों पर भी भारी पड़ रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर बढ़ती जनसंख्या पर लगाम नहीं कसी गई तो देश के लिए मुश्किलें पैदा हो जाएगी। जमीना बताती हैं, "मेरी सास के नौ बच्चे हैं, जब मैं अपने पति से कहती हूं कि मुझे और बच्चे नहीं करने तो वह कहता है कि जब मेरी मां नहीं मरी तो तुम भी जिंदा रहोगी।"
हालांकि इस बीच अब कुछ गैरसरकारी संस्थाएं सामने आई हैं जो ऐसी महिलाओं की मदद कर रही हैं
इस्लाम के कारण गर्भपात
पाकिस्तान में बढ़ते गर्भपात की बड़ी वजह लड़कियां पैदा होने से रोकना है। यह बुराई भारत में भले ही लगभग खत्म होने को है, लेकिन पाकिस्तान के तमाम इलाकों में आज भी लड़कियों को परेशानी समझा जाता है और पढ़े-लिखे परिवारों में भी लड़कों को तरजीह दी जाती है। साथ ही दूसरी बड़ी वजह ये कि पाकिस्तान में गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल लगभग नहीं के बराबर होता है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि इस्लाम में बच्चों को अल्लाह की देन और औरतों को मर्द की खेती कहा गया है। ऐसी स्थिति में पुरुष लगातार बच्चे पैदा करने में जुटे रहते हैं और महिलाओं पर दबाव रहता है कि लड़का ही पैदा हो। कई बार महिलाएं लड़की पैदा होने की आशंका के चलते ही खुद ही कुछ घरेलू उपाय करके बच्चे को मारने की कोशिश करती हैं। इस्लाम में फेमिली प्लानिंग या गर्भधारण रोकने के उपायों को हराम करार दिया गया है। ऐसे में महिलाओं के आगे गर्भपात करवाकर अपनी जिंदगी जोखिम में डालने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचता। इसके कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर जोखिम भी बढ़ता जा रहा है।
Pakistan Abtreibung und Geburtenkontrolle (AFP/A. Majeed)
महिलाओं की मदद
गैरसरकारी संस्था अवेयर गर्ल्स अब महिलाओं को गर्भनिरोधक दवाओं के बारे में सही जानकारी दे रही है। संस्था की सह संस्थापक गुलालाई इस्माइल कहती हैं, "हम में से अधिकतर ऐसी महिलाओं को जानते थे जिनकी एबॉर्शन के चलते मौत हुई है।" संस्था में काम करने वाली 26 साल की आयशा कहती हैं, "हॉटलाइन पर आने वाले कॉल पर हम लोगों को दवा की सही खुराक की जानकारी देते हैं।"
परिवार नियोजन के लिए काम करने वाले एनजीओ ग्रीनस्टार से जुड़े डॉ हारुन इब्राहिम कहते हैं, "प्रशासन कभी इस विषय को जरूरी नहीं बना सका है। सारी बातें महज बयानबाजी और बेमतलब हैं।" कुछ विशेषज्ञ इन हालातों को प्रशासनिक असफलता से भी नहीं चूकते हैं
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नायिका मीरा ने करवाया गर्भपात 
पाकिस्तान की अदालत ने एक्ट्रेस मीरा के खिलाफ कथित रूप से गर्भपात कराने के आरोपों को लेकर मामला दर्ज करने की अपील संबंधी याचिका का संज्ञान लिया है। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश मुहम्मद अयूब खान ने मुहम्मद इस्लाम की ओर से दाखिल की गयी याचिका को स्वीकार करने के साथ ही मामले की जांच के लिए पुलिस को नोटिस भेजा।
इस्लाम ने अपनी याचिका में एक हालिया समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि मीरा ने हाल ही में गर्भपात कराया है। उसने कहा है कि चूंकि अभिनेत्री कुंवारी होने का दावा करती है इसलिए गर्भपात की कार्यवाई गैर कानूनी तथा गैर इस्लामिक है।
उन्होंने अदालत से मीरा के खिलाफ विवादास्पद हुदूद अध्यादेश के तहत मामला दर्ज करने का प्रशासन को निर्देश दिए जाने को कहा है। हुदूद 1979 का एक कानून है जो विवाहेत्तर यौन संबंधों तथा शराब के सेवन जैसे अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
पाकिस्तानी अमेरिकी पायलट नावेद शाहजाद के साथ अपने संबंधों तथा कथित गर्भपात को लेकर मीरा पिछले कई सप्ताह से खबरों में है जिसका उसने खंडन किया है।
मीरा के पति का दावा करने वाले कारोबारी अतिकुर रहमान ने मीरा की शाहजाद के साथ शादी की योजना को लेकर अदालत में एक याचिका दाखिल कर रखी है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टो में कहा गया है कि शाहजाद ने मीरा के साथ अपनी सगाई तोड़ दी है।

सरकार का रुख
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दिसंबर 2018 में माना था कि इस मुद्दे पर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही है। प्रधानमंत्री ने वादा भी किया था कि वह मीडिया, मोबाइल फोन, स्कूल और मस्जिदों के जरिए सेक्स एजुकेशन और गर्भनिरोधक अभियानों को शुरू करेंगे
खान ने जोर देकर कहा था कि इस पूरे अभियान में मौलवियों की भूमिका अहम होगी। वहीं इस्लामिक विचारधारा को मानने वाली धार्मिक संस्था काउंसिल ऑफ पाकिस्तान ने सरकार को दिए अपने मशविरे में कहा कि परिवार नियोजन इस्लाम के खिलाफ है। काउंसिल ने समाचार एजेंसी से कहा, "सरकार की ओर से जन्म नियंत्रण अभियान को तुरंत रोका जाना चाहिए और इस कार्यक्रम को इकोनॉमिक प्लानिंग से हटा दिया जाना चाहिए"
अवैध संबंधों से बिगड़े हालात
अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ साल में पाकिस्तानी समाज में अवैध रिश्तों के कारण गर्भपात के मामले बढ़े हैं। बंद समाज होने के कारण अब तक महिलाएं घरों में दबी-कुचली रहा करती थीं। लेकिन इंटरनेट और मोबाइल आने के बाद पाकिस्तान में सेक्स क्रांति आई हुई है। खास तौर पर गांवों और छोटे शहरों में कम उम्र की लड़कियां अवैध रिश्तों में पड़कर गर्भवती हो रही हैं। ऐसे रिश्तों में धार्मिक शिक्षा से जुड़े मौलवियों का भी बड़ा हाथ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुरान या उर्दू पढ़ाने वाले मौलवियों के साथ अवैध रिश्तों के मामले कई गुना बढ़े हैं। क्योंकि टीचर के तौर पर इनकी एंट्री घरों में अंदर तक होती है। अक्सर नाबालिग लड़कियां भी इनकी शिकार बन जाती हैं। जब भी ऐसे किसी मामले में लड़की प्रेगनेंट हो जाती हैं तो उनके पास चोरी-छिपे अबॉर्शन कराने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता है।
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गर्भपात बन चुका है उद्योग 
भारत और चीन भले ही दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले देश हों, पाकिस्तान दुनिया में सबसे तेज बढ़ती आबादी वाला देश है। पाकिस्तान में आज भी बड़े इलाके में औसतन 13 साल की उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है और वो 18 साल की होने तक 3-4 बच्चों की मां हो चुकी होती हैं। शहरों में तो हालात फिर भी ठीक हैं, गांवों में लोग गर्भनिरोधक उपायों के बारे में जानते तक नहीं। कारण ये कि पाकिस्तान के कट्टरपंथी मौलवी इन इलाकों में फेमिली प्लानिंग से जुड़े सरकारी अफसरों को भगा देते हैं। ऐसे में गांव-गांव में दाइयों और आया के भरोसे अबॉर्शन का धंधा चल रहा है। ये सिर्फ 200 से 400 रुपये में पेट में पल रहे बच्चे को मारने की सुपारी ले लेती हैं। अक्सर ऐसी कोशिश में महिलाओं की जान भी चली जाती है। कई बार उन्हें ऐसे जानलेवा संक्रमणों से गुजरना पड़ता है जिससे जिंदगी भर के लिए बीमारी लग जाती हैं। इस्लाम के असभ्य और बर्बर रूप को कहीं पर देखना हो तो वो पाकिस्तान है। इसका जीता-जागता सबूत यहां पर हो रहे गर्भपात हैं।

उत्तराखंड: दहेज उत्पीड़न के मामले में फंसीं कांग्रेस मेयर प्रत्याशी गिरफ्तार

उत्तराखंड की काशीपुर कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस से मेयर प्रत्याशी रहीं मुक्ता सिंह व उनके पति रविन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
कांग्रेस नेत्री की गिरफ्तारी के विरोध में कार्यकर्ताओ ने कोतवाली गेट पर प्रदर्शन कर धरना दिया। बीती 29 सिंतबर को गिरीताल कॉलोनी निवासी प्रियंका पुत्री महेश वर्मा ने कुंडेश्वरी निवासी मुक्ता सिंह, उनके पति रविन्द्र सिंह, पुत्र शशांक सिंह समेत जेठ जेठानी के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने व जबरन गर्भपात कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
इस मामले में पूर्व विवेचना अधिकारी ने पति के अलावा अन्य के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। एसएसपी ने इस मामले में विवेचना अधिकारी मंजू पवार व दरोगा पीडी जोशी को निलंबित कर दिया था। इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक जय प्रकाश को सौंपी गई थी। पुलिस ने नवंबर 22 को आरोपी दम्पति को गिरफ्तार कर लिया

बता दें कि दिसंबर 2011 को हिंदू रीति-रिवाज के साथ मुक्ता की शादी शशांक सिंह के साथ हुई थी। इस दौरान पिता ने सामर्थ्य के अनुसार आई-20 कार समेत दहेज भी दिया था। लेकिन कुछ समय बाद ही ससुरालियों ने उसे फिर से दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
ससुरालियों ने दहेज में 50 लाख रुपये और एंडेवर कार की मांग की। इतनी बड़ी डिमांड पूरी न करने पर पति शशांक, ससुर रविंदर सिंह, सास मुक्ता सिंह, जेठ अनुराग व जेठानी दीपाली ने मारना पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद मई 2015 में वह मायके आ गई। आरोप लगाया था कि इस बीच सास मुक्ता सिंह ने पीड़िता का दो बार गर्भपात भी करा दिया था।