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बंगाल : करोड़ों की वसूली में TMC नेता सब्यसाची दत्ता को देर रात घर में घुसकर पुलिस ने किया गिरफ्तार

                    करोड़ों की वसूली में TMC नेता सब्यसाची दत्ता गिरफ्तार (फोटो साभार : ETVbharat)
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने TMC को एक और बड़ा झटका दिया है। पुलिस ने बिधाननगर नगर निगम के पूर्व चेयरमैन और दिग्गज TMC नेता सब्यसाची दत्ता को गिरफ्तार कर लिया है। सब्यसाची दत्ता पर करोड़ों रुपए की रंगदारी और उगाही करने का गंभीर आरोप है।

बिधाननगर नॉर्थ पुलिस ने सोमवार (8 जून) को उन्हें राजारहाट स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया। राज्य में सरकार बदलने के बाद से TMC नेताओं पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सब्यसाची दत्ता बिधाननगर-राजारहाट इलाके के बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

जानकारी के अनुसार, सब्यसाची दत्ता पर दंगा करने का आरोप है। एक व्यापारी ने सब्यसाची के खिलाफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसी एफआईआर के आधार पर पुलिस ने तृणमूल के पूर्व विधायक को गिरफ्तार किया। सब्यसाची ने 26वें चुनाव में तृणमूल के टिकट पर बारासात से चुनाव लड़ा था। इससे पहले वे राजारहाट-न्यूटाउन निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल के विधायक रह चुके हैं। सब्यसाची बिधाननगर नगरपालिका के महापौर भी रह चुके हैं।

पुलिस काफी समय से इन आरोपों की जाँच कर रही थी। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब TMC में बड़ी बगावत के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी के करीब 20 विधायक दिल्ली में एनडीए (NDA) के बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। ये सभी विधायक जल्द ही एनडीए में शामिल होना चाहते हैं।

देर रात हुए गिरफ्तार

उस शिकायत के आधार पर, सब्यसाची को सोमवार रात को उनके न्यूटाउन स्थित फ्लैट से गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। लंबी पूछताछ के बाद, जब उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो पुलिस ने उन्हें देर रात गिरफ्तार कर लिया। उन्हें मंगलवार(9 जून) को बिधाननगर अदालत में पेश किया जाएगा। हालांकि, बिधाननगर उत्तर पुलिस स्टेशन ने इस संबंध में अब तक कोई घोषणा नहीं की है। सब्यसाची के खिलाफ जबरन वसूली या मानसिक उत्पीड़न के आरोप नए नहीं हैं। न सिर्फ व्यापारी और आम लोग, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनके खिलाफ कई आरोप लग चुके हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी समय-समय पर लगते रहे हैं।

पहले भी होती रही है शिकायत

मधुसूदन चक्रवर्ती ने पहले भी कई बार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, तृणमूल सरकार के दौरान पुलिस की निष्क्रियता के आरोप लगे थे। आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन सरकार बदलने के बाद वही पुलिस अब सक्रिय हो गई है। राज्य में सत्ता में आने के बाद से भाजपा सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को किसी भी तरह से बख्शा नहीं जाएगा। तब से पुलिस लगातार सक्रिय है। तृणमूल नेताओं और पार्षदों को एक के बाद एक गिरफ्तार किया जा रहा है। इस बार सब्यसाची का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है।

सीरिया में ISIS से जुड़ने गई थीं 3 जिहादने, ऑस्ट्रेलिया लौटते ही पुलिस ने लिया गिरफ्तार: 8.5 लाख रूपए में औरतें खरीदकर गुलाम बनाने का आरोप, 25 साल सड़ेंगी जेल में

                                                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: दैनिक जागरण)
सीरिया से लौटते ही ऑस्ट्रेलिया में तीन महिलाओं को आतंकवाद और गुलामी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। मेलबर्न एयरपोर्ट पर 53 वर्षीय महिला और उसकी 31 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया। दोनों पर आरोप है कि वे 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने के लिए सीरिया गई थीं।

शुरू में तो पैसे के लालच में लड़कियां ISIS में शामिल होने अपना मुल्क छोड़ देती है, लेकिन दुर्गति होने पर ISIS के चुंगल से भाग जाती है। 2019 में भी एक हसीना ब्रिटेन से भाग ISIS में शामिल हो गयी और ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई।      

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला ने करीब 10 हजार अमेरिकी डॉलर (साढ़े 8 लाख से 9 लाख तक) देकर एक महिला को गुलाम के तौर पर खरीदा था, जबकि उसकी बेटी ने उसे अपने घर में गुलाम बनाकर रखा। दोनों पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 25 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, ISIS के पतन के बाद 2019 में कुर्द बलों ने इन महिलाओं को पकड़ लिया था। तब से वे सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रही थीं। गुरुवार (7 मई 2026) की रात कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं 32 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और ISIS में शामिल होने का आरोप है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह 2015 में अपने शौहर के पास सीरिया गई थी, जो पहले से ISIS का लड़ाका था।

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ के नवजात बच्चे की मौत, सीरिया से आना चाहती है वापस

2019 में ब्रिटेन ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है। यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस  में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।

दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।

इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।

Kashmir Times Office Raid: जम्मू में कश्मीर टाइम्स के दफ्तर पर छापा, AK-47 और पिस्टल की गोलियां बरामद


जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष जाँच एजेंसी स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने गुरुवार (20 नवंबर 2025) की सुबह अंग्रेजी अखबार ‘कश्मीर टाइम्स’ के जम्मू ऑफिस पर छापा मारा। यह कार्रवाई अखबार पर देश-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोपों से जुड़ी जाँच का हिस्सा है।

सूत्रों के अनुसार, एसआईए की छापेमारी के दौरान कश्मीर टाइम्स न्यूज पेपर कार्यालय जम्मू में तलाशी अभियान के दौरान एके-47 और पिस्तौल के कुछ राउंड और ग्रेनेड का एक लीवर बरामद किया गया है।

एक अधिकारी ने कहा कि अखबार के खिलाफ "देश के हितों के खिलाफ एक्टिविटीज़ का महिमामंडन" करने का केस दर्ज किया गया है। अधिकारी ने कहा कि SIA के अधिकारियों ने अखबार की जगह और कंप्यूटर की पूरी तलाशी ली। पब्लिकेशन और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, और उनसे पूछताछ हो सकती है।

दफ्तर में लंबी तलाशी और FIR

अधिकारियों के मुताबिक, SIA की टीम सुबह ही दफ्तर पहुँची और अलग-अलग हिस्सों में लंबी तलाशी ली। टीम ने कई दस्तावेज़ों, कंप्यूटरों और डिजिटल डिवाइसों को खंगाला और कुछ सामग्री जब्त कर ली। SIA का कहना है कि यह कार्रवाई बड़े एंटी-टेरर ऑपरेशन्स का हिस्सा है।

अखबार और इसके प्रमोटर्स में इसकी एडिटर अनुराधा भसीन भी शामिल हैं, उनके खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) की धारा 13 के तहत FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि अखबार देश के खिलाफ असंतोष फैलाने और देश-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने में शामिल रहा है।

जल्द होगी पूछताछ

रिपोर्ट्स के मुताबिक, SIA जल्द ही एडिटर अनुराधा भसीन से पूछताछ करेगी। उनसे उनकी गतिविधियों, संपर्कों और कथित ‘प्रोपेगेंडा नेटवर्क’ में उनकी भूमिका के बारे में सवाल किए जाएँगे। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में अखबार से जुड़े अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब कश्मीर टाइम्स पर ऐसी कार्रवाई हुई है। साल 2020 में इसके श्रीनगर ऑफिस को भी कुछ समय के लिए सील कर दिया गया था। अखबार ने अपना प्रिंट संस्करण बंद कर दिया है और फिलहाल यह सिर्फ डिजिटल चलता है। इस मामले पर अभी तक SIA या कश्मीर टाइम्स की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

हिंदू संत को बांग्लादेश ने क्यों किया गिरफ्तार, क्या बदले की कार्रवाई कर रही मोहम्मद यूनुस सरकार

                             पुलिस की गिरफ्त में चिन्मय कृष्ण दास (फोटो साभार: @deepscribble)
बांग्लादेश में हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास को सोमवार (25 नवम्बर, 2024) को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें मंगलवार को भी जमानत नहीं दी गई। बांग्लादेश की पुलिस ने हिन्दुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाले चिन्मय दास को कथित देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया है। वर्तमान में वह जेल में हैं। उनकी रिहाई के लिए हिन्दुओं ने प्रदर्शन किया तो उन पर भी पुलिस ने हमला किया और इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी उन्हें निशाना बनाया।

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद युनुस सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। बांग्लादेश के कानून के जानकार कह रहे हैं कि चिन्मय कृष्ण दास के मामले में सही प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। कुछ का कहना है कि जिस आधार पर चिन्मय दास पर कार्रवाई हुई है, वैसे ही कार्रवाई बाकी पर होने लगे तो हजारों लोग देशद्रोह के दोषी हो जाएँगे। 

किस मामले में गिरफ्तार हुए चिन्मय कृष्ण दास?

 25 अक्टूबर, 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दुओं ने एक रैली आयोजित की। इस रैली का नेतृत्व चिन्मय कृष्ण दास कर रहे थे। यह रैली चटगाँव में ऐतिहासिक लाल दीघी मैदान में आयोजित की गई थी। इसमें हजारों हिन्दू शामिल हुए थे। चटगाँव में यह रैली हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के विरोध में आयोजित की गई थी।

इस रैली के दौरान हिन्दुओं ने भगवा झंडे लहराए और सरकार से कार्रवाई की माँग की। चटगाँव में हुई इस रैली के कारण इस्लामी कट्टरपंथी बिदक गए। उन्होंने इस रैली में एक जगह पर एक भगवा झंडा, बांग्लादेश के झंडे से ऊँचा लहराता हुआ देख लिया।

इसी के आधार पर फिरोज खान नाम के एक शख्स ने चटगाँव में ही चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। फिरोज खान ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश का झंडा नीचे करके लहराया जा रहा था जो इसका अपमान है और यह देशद्रोह का कार्य है। फिरोज ने आरोप लगाया कि इससे चिन्मय कृष्ण दास देश में अशांति लाना चाहते हैं।

इसके बाद चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें चटगाँव की अदालत में पेश किया गया। यहाँ मजिस्ट्रेट काजी नजरुल इस्लाम ने उन्हें देशद्रोह का आरोपित मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और जेल भेज दिया।

क्या कहता है कानून?

यह बात सही है कि बांग्लादेश के कानून के अनुसार, राष्ट्रीय झंडे से ऊपर कोई झंडा नहीं फहराया जा सकता। बांग्लादेश झंडा कानून, 1972 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है तो उसे 1 साल तक की सजा या फिर 5000 टका का जुर्माना हो सकता है। उस पर कोर्ट दोनों भी लगा सकती है।
इसके अलावा झंडे का अपमान करने पर बांग्लादेश की दंड संहिता की धारा 124 भी लग सकती है। इसका संबंध देशद्रोह से है। यदि झंडे के अपमान में या साबित होता है कि उस व्यक्ति ने देशद्रोह भी किया है, तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

वकीलों ने क्या बताया?

ढाका ट्रिब्यून की एक खबर के अनुसार, बांग्लादेश के बड़े वकीलों ने कहा कि यदि किसी ने झंडे का अपमान किया भी है, तो इससे यह नहीं सिद्ध होता कि वह देशद्रोही है। उन्होंने बताया कि अगर ऐसा होता तो जिन फैन्स ने अपनी फेवरेट टीम का झंडा, बांग्लादेश के झंडे से ऊपर फुटबॉल मैच के दौरान दिखाया, वह भी देशद्रोह के आरोपित बन जाते।
वकीलों ने बताया कि अगर किसी को लगता है कि किसी दूसरे व्यक्ति के झंडा फहराने के कारण उसकी देशभक्ति की भावना आहत हुई है तो वह मामला दर्ज करवा सकता है। ऐसी स्थिति में पहले कोर्ट मामले की जाँच करेगा और तय करेगा कि देशद्रोह का आरोप बनता भी है या नहीं।
चिन्मय कृष्ण दास के मामले में उन्हें बिना कोई राहत दिए हुए और मामले की जाँच किए बगैर ही देशद्रोही करार दिया जा रहा है। उन्हें कानूनी सहायता भी नहीं मिल रही है। बांग्लादेश के बड़े वकील ZI खान पन्ना ने बताया कि अगर किसी पर धारा 121 और 124 के आधार पर देशद्रोह का मामला दर्ज करना है तो इसके लिए पहले गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती है।
पन्ना ने इस बात पर हैरानी जताई है कि एक पुलिस थाने ने अपने ही मन से यह मामला दायर कर दिया। उन्होंने यूनुस सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कल को अगर मोहम्मद यूनुस सत्ता से बाहर होंगे तो उन पर भी ऐसे ही देशद्रोह का मुकदमा लादा जाएगा। उन्होंने इस मामले में पूर्वाग्रह की बात कही है। 

क्या चिन्मय कृष्ण दास के साथ हो रहा भेदभाव?

चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। वह बांग्लादेश में हिन्दू अधिकारों के लिए बोलने वाला एक बड़ा नाम बन कर उभरे हैं। उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि के कारण उनको समर्थन भी अच्छा-ख़ासा है।
जिस दिन उन्हें यूनुस सरकार ने गिरफ्तार किया, तब भी वह ढाका से चटगाँव हिन्दुओं के लिए ही प्रदर्शन में जा रहे थे। इससे पहले कि वह चटगाँव पहुँचते, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन्हें जमानत भी नहीं दी गई। चिन्मय कृष्ण दास के समर्थकों पर भी लाठी-डंडे चले।
मोहम्मद यूनुस की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के न्यायालय एक के बाद एक मामले मसे देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को बरी करते जा रहे हैं। उनके अलावा देश भर में कई ऐसे मौलाना हैं जो भड़काऊ बयानबाजी करते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यूनुस सरकार ने सत्ता में आते ही अल कायदा से जुड़े आतंकी संगठन के एक आतंकी को छोड़ दिया था।
ऐसे में शांति और सद्भाव का सन्देश देने वाले हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार करना और फिर उन्हें जमानत नहीं दिए जाने का कारण सिर्फ इस्लामी कट्टरपंथी सोच को ही माना जा सकता है। बांग्लादेश की सरकार में शामिल दो एडवाइजर ISKCON को प्रतिबंधित करने की माँग कर चुके हैं। यह कथित छात्र नेता हैं।


क्या भारत का विपक्ष इंटरनेशनल भिखारी है? CAA विरोधी प्रदर्शन में हिंसा भड़काने के लिए NewsClick ने चीन के पैसे का किया इस्तेमाल, अमेरिका के रास्ते तीस्ता सीतलवाड़ को मिला पैसा: रिपोर्ट

न्यूजक्लिक के तीस्ता सीतलवाड़ और नेविल रॉय सिंघम के संबंधों पर चार्जशीट में बड़ा खुलासा
70 के दशक में निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर की बहु-चर्चित फिल्म "आंखें" में महमूद पर फिल्माया बहु-चर्चित गीत "दे दे अल्लाह के नाम पर, इंटरनेशनल भिखारी आये हैं..." हमारे दिशाहीन विपक्ष की क्या ऐसी स्थिति हो गयी है? भारत में जब कभी सरकार के विरोध में शाहीन बाग बनते हैं, जनता भी केंद्र सरकार के विरुद्ध चर्चा करने लगते हैं, लेकिन जब उनकी जाँच में विदेशी धन का खेल सामने आता है, उसे देख सोंचने को विवश होना पड़ता है कि क्या जिन्हे जनहितैषी नेता मानकर वोट देते हैं, मालूम पड़ता है कि वह नेता नहीं, सफेदपोशी भिखारी है। CAA विरोध से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन तक विदेशी धन का खुलासा हुआ। जिस तरह भिखारी का काम सिर्फ भीख मांगना और उससे आगे भिखारी कुछ सोंचता ही नहीं, वही हालत हमारे नेताओं की हो गयी है। विदेशों में बैठे मोदी विरोधी तो इन नेताओं को फंडिंग कर रहे हैं, ऊपर से George Soros भी आ गया जो 1000 करोड़ रूपए खर्च कर रहा है। 

अगर जनहित में काम करने की बजाए विदेशी भीख पर काम करने वाले नेता और उनकी पार्टियां क्या इन हरकतों से देश का नाम रोशन कर रहे हैं? जिस खालिस्तान के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की जान गई, वही खालिस्तान किसान आंदोलन में नज़र आया, और कांग्रेस समेत सारा विपक्ष उस आंदोलन अपना-अपना समर्थन देता नज़र आया, क्यों? लाल किला पर चढाई कर दी, इस विपक्ष को तब भी शर्म नहीं आयी। अगर इन नेताओं और पार्टियों में देशप्रेम भावना होती, तुरंत इस आंदोलन का बहिष्कार कर केंद्र के साथ खडा होना चाहिए था, लग गया मालपुए खाने। क्या ऐसे नेता और पार्टियां एक भी वोट की हक़दार हैं? 

न्यूज़क्लिक केस में बड़ा खुलासा हुआ है। न्यूजक्लिक के साथ काम करने वाले लोगों ने जाँच के दौरान चौंकाने वाले बयान दर्ज कराए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में इन गवाहों के बयान को रखा गया है, जिसमें बताया गया है कि न्यूजक्लिक ने CAA विरोधी हिंसा के दौरान मुस्लिमों को हिंसा और दंगों में शामिल होने के लिए उकसाने के लिए उन्हें ‘आदेश’ दिया था। इसके लिए उन्हें सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों तक पैसे पहुँचाने के लिए भारी मात्रा में नकदी दी गई थी।

इन गवाहों ने बताया है कि दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों में इस्तेमाल किए गए हथियारों को खरीदने के लिए न्यूजक्लिक के माध्यम से चीनी पैसों का इस्तेमाल किया गया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में आतंकवादियों को भी पैसे पहुँचाए गए थे।

इन गवाहों की पहचान छिपाई गई है। ये गवाह न्यूजक्लिक में काम करते थे। यूएपीए की धारा 41 के तहत इनकी पहचान को छिपाते हुए दिल्ली पुलिस ने इनके बयानों को चार्जशीट के माध्यम से कोर्ट में पेश किया है। इन गवाहों ने बताया है कि उन्हें धर्म विशेष (हिंदुओं) के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए सीएए विरोधी और शाहीन बाग के प्रदर्शनों में भेजा गया था। इसके लिए न्यूजक्लिक ने अपने कर्मचारियों को पैसे देकर बाँटने के लिए कहा, ताकि अराजकता और हिंसा को भड़काया जा सके।

इस दौरान कई वॉट्सऐप ग्रुपों का इस्लेमात किया गया, खासतौर पर 2 ग्रुपों के बारे में बताया गया है, जिसमें एक ग्रुप का इस्तेमाल CAA विरोधी प्रदर्शनों, किसानों के प्रदर्शनों और शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया गया। दूसरा ग्रुप कश्मीर में हिंसा और तनाव भड़काने में लगा था। ये लोग न्यूजक्लिक में पत्रकार के रूप में काम कर रहे थे और न्यूजक्लिक का एजेंडा आगे बढ़ा रहे थे। इन्हीं लोगं ने संवेदनशाली कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के नक्शों में छेड़छाड़ भी की थी।

जिन लोगों तक पैसे पहुँचाए गए, उसमें से एक नाम शरजील इमाम का है। वो सीएए-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा का मुख्य आरोपित है। उसने प्रबीर पुरकायस्थ से पैसे लिए और अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाता रहा। इस चार्जशीट में सभी गवाहों के बायन दर्ज हैं और उन्हें दिल्ली पुलिस कोर्ट में पेश कर चुकी है।

नेविल रॉय सिंघम से मिला पैसा तीस्ता सीतलवाड तक पहुँचाया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूजक्लिक को विदेश से आए पैसों को तीस्ता सीतलवाड़ तक पहुँचाए गए। चार्जशीट में पुलिस ने बताया है कि अमेरिका से मिले पैसों को तीस्ता सीतलवाड़ के पोर्टल ‘सबरंग इंडिया’ को नया जीवन देने में किया गया। चार्जशीट के मुताबिक, ‘न्यूज सिंडिकेशन स्कैम’ के माध्यम से आर्टिकल लेखकों और स्तंभकारों को न्यूजक्लिक से मिले पैसे दिए गए और इन लेखों का इस्तेमाल सबरंग इंडिया पर प्रकाशित करने के लिए किया गया।
खास बात ये है इन आर्टिकल्स को सबरंग इंडिया पर प्रकाशित करते समय इन्हें ‘सबरंग इंडिया’ द्वारा लिखा दिखाया गया, और असली लेखकों के नाम छिपा लिए गए। चार्जशीट के मुताबिक, इससे तीस्ता सीतलवाड़ को करीब 3 लाख, 1 करोड़ से ज्यादा रुपए उनके कर्मचारियों के लिए और 39 लाख रुपए उनके परिवार के निजी खर्च के लिए मिले।
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि जाँच एजेंसियों के रडार पर होने के बावजूद तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा दागी विदेशी धन पाने का यह “सबसे सुविधाजनक तरीका” था। पुलिस ने कहा कि ई-मेल, गवाहों की जाँच, वित्तीय उकसावे और संरक्षित गवाहों की गवाही के विश्लेषण से यह स्थापित हुआ कि तीस्ता सीतलवाड, प्रबीर पुरकायस्थ और नेविल रॉय सिंघम एक “खास तिकड़ी” का हिस्सा थे। बता दें कि नेविल रॉय सिंघम न्यूजक्लिक के संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ का लंबा समय से साथी है और एक अमेरिकी करोड़पति है। उसका जुड़ाव चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से है और वो चीनी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रबीर पुरकायस्थ और न्यूजक्लिक के माध्यम से भारत के अंदर काम कर रहा था।
चार्जशीट के मुताबिक, तीनों लोग (प्रबीर पुरकायस्थ, तीस्ता सीतलवाड़ और नेविल रॉय सिंघम) एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हुए साथ में काम कर रहे थे। इसमें नेविल रॉय सिंघम की ओर से पैसा आता और सभी लोग मिलकर लेफ्ट विंग अतिवाद (LWE) एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, तीस्ता सीतलवाड़ और नेविल रॉय सिंघम के बीच ई-मेल्स का जो आदान प्रदान हुआ, उसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि नेविल रॉय सिंघम ने तीस्वा सीतलवाड़ के पोर्टल सबरंग इंडिया और तीस्ता के एनजीओ सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) को प्रबीर पुरकायस्थ के माध्यम से फंडिंग दी।
चार्जशीट के मुताबिक, इस मामले की जाँच के लिए 13 दिसंबर 2023 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने मुंबई जाकर जाँच की और तीस्ता सीतलवाड़ और उसके शौहर जावेद आनंद को नोटिस भी थमाया था। जावेद आनंद सबरंग इंडिया का सह-संपादक भी है। स्पेशल सेल ने इन लेन-देन की जानकारी भी माँगी। स्पेशल सेल ने सबरंग इंडिया और न्यूजक्लिक के फाउंडर-एडिटर के बीच मैनपॉवर शेयरिंग, सैलरी डिटेल्स और आर्टिकल/वीडियो के प्रोडक्शन को लेकर साइन हुए एग्रीमेंट की भी जाँच की।
न्यूजक्लिक पर चीनी माध्यम से 80 करोड़ प्राप्त करने के आरोप हैं। एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि न्यूजक्लिक ने भारत की संप्रभुता पर चोट करने और देश में नफरत का माहौल तैयार करने के लिए चीनी संगठनों से पैसे लिए। कुछ दिन पहले ही दिल्ली की कोर्ट ने प्रबीर पुरकायस्थ की 10 दिनों की कस्टडी बढ़ा दी थी। बता दें कि इस मामले में अमित चक्रवर्ती, जिसे प्रबीर के साथ ही गिरफ्तार किया गया था, वो अब सरकारी गवाह बन चुका है।
दिल्ली पुलिस ने पिछले साल 3 अक्टूबर को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत न्यूज़क्लिक के संस्थापक और संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक के दफ्तर को छापेमारी के बाद सील कर दिया गया था। पुलिस ने बताया कि अक्टूबर 2023 में दिल्ली और सात अन्य राज्यों में 88 स्थानों पर छापे मारे गए, जिसमें एफआईआर में शामिल व्यक्तियों के साथ-साथ डेटा विश्लेषण के दौरान सामने आए लोगों को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा, प्रबीर पुरकायस्थ पर 2019 के लोकसभा चुनावों में तोड़फोड़ करने की साजिश रचने और पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म (पीएडीएस) के साथ सहयोग करने का आरोप है।