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राहुल गाँधी ने ट्रेन में जिस युवक की वीडियो को शेयर करके सरकार को घेरने की कोशिश की है उस घटना का कोई सोर्स नहीं


आखिर कांग्रेस का इकोसिस्टम कब तक अफवाह फैलाकर जनता को गुमराह करता रहेगा? कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ट्रेन में एक व्यक्ति की कथित तौर पर दम घुटने से मौत का दावा किया गया। बताया गया कि यह वीडियो पाटलिपुत्र स्टेशन की है और वीडियो में दिख रहा व्यक्ति एग्जाम देने जा रहा था। इस वीडियो को कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने भी रीपोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। लेकिन रेलवे ने कांग्रेस ने फैलाई इस वीडियो की हकीकत पर सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गाँधी ने वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा, “इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया। ये उस भारत के लाचार युवा हैं, जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती। चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है – भीड़, घुटन, और बेबसी।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूँज सुनना ही नहीं चाहती। पर मैं वादा करता हूँ – हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।”

वीडियो पर पूर्व मध्य रेलवे ने संज्ञान लिया। रेलवे ने जाँच के बाद बताया कि यह वीडियो पाटलिपुत्र स्टेशन की नहीं है। इसी के साथ रेलवे ने बताया कि इस वीडियो में व्यक्ति की मौत का कोई आधिकारिक सोर्स भी नहीं है। इसके अलावा रेलवे ने व्यक्ति की दम घुटने से मौत के दावे को भी खारिज किया।

रेलवे ने कहा, “वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के हाव-भाव और हालत देखकर ऐसा लगता है कि शायद वो किसी बीमारी या ज्यादा थकान की वजह से जूझ रहा हो।”

‘अब उपद्रव नहीं, यहाँ उत्सव होते हैं’: UP दिवस से पहले CM योगी ने जनता के नाम लिखी ‘पाती’, कहा- 6 करोड़ लोगों को निकाला गरीबी से बाहर

                                                                                                                                                                                                                    साभार: Mint
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (22 जनवरी 2025) को प्रदेश की जनता के नाम ‘योगी की पाती’ शीर्षक के साथ भावनात्मक पत्र लिखा। इस पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश में आए व्यापक बदलावों, सरकार की नीतियों, विकास की उपलब्धियों और भविष्य के संकल्पों को विस्तार से साझा किया।

उन्होंने प्रदेश की उस यात्रा का वर्णन किया, जिसमें उत्तर प्रदेश ने एक समय की बीमारू राज्य की छवि को पीछे छोड़ते हुए आज देश के विकास के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी पहचान बनाई है। पत्र में सुशासन, कानून व्यवस्था, आर्थिक प्रगति, सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषय प्रमुख रूप से उभरकर सामने आते हैं।

सुशासन और कानून व्यवस्था से बदली प्रदेश की तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में सबसे पहले प्रदेश में स्थापित कानून और सुशासन की चर्चा की। उन्होंने लिखा कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। पहले जहाँ माफिया और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलता था, वहीं अब उनके अवैध साम्राज्यों पर कठोर कार्रवाई की गई है।

उन्होंने लिखा कि बेहतर कानून व्यवस्था के कारण प्रदेश में निवेश का माहौल बदला है। जो निवेशक पहले उत्तर प्रदेश से दूरी बनाते थे, वे अब यहाँ निवेश के लिए उत्सुक हैं। सरकार की पारदर्शी नीतियों और सुरक्षा के भरोसे ने प्रदेश को उद्योग और व्यापार के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

आर्थिक विकास, कृषि और रोजगार की नई दिशा

‘योगी की पाती’ में सीएम ने आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन को विशेष स्थान दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश की खाद्य और आय सुरक्षा का मजबूत आधार बना है। ‘बीज से बाजार तक’ की व्यवस्था और सीधे बैंक खातों में भुगतान (DBT) से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
औद्योगिक विकास के चलते प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। लेबर रिफॉर्म, डी-रेगुलेशन, एमएसएमई को बढ़ावा, कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति और ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) जैसी योजनाओं ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है। बेरोजगारी की समस्या के समाधान की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण

मुख्यमंत्री ने पत्र में समाज के हर वर्ग के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया। महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी बढ़ने, बेटियों के जन्म से विवाह तक आर्थिक सहायता, निराश्रित महिलाओं, वृद्धों और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन योजनाओं का उल्लेख किया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हेल्थ-टेक के जरिए सुविधाएँ आमजन तक पहुँची हैं। जल, थल और नभ कनेक्टिविटी के विकास से व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिली है। साथ ही अयोध्या, काशी, मथुरा से लेकर संभल तक सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं का पुनर्जागरण हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जीरो पॉवर्टी के लक्ष्य के साथ करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। उन्होंने लिखा, “हमने जीरो पॉवटी लक्ष्य के साथ 6 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। डबल इंजन सरकार ने प्रदेश को ‘बॉटलनेक से ब्रेक’, ‘रेवेन्यू डेफिसिट से रेवेन्यू सरप्लस’ एवं ‘उपद्रव से उत्सव की ओर अग्रसर किया है।”
अंत में उन्होंने 24 जनवरी को मनाए जाने वाले उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दोहराते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं।
बता दें कि साल 2026 में उत्तर प्रदेश 77 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा। 24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम अधिकारिक तौर पर बदलकर ‘उत्तर प्रदेश’ कर दिया गया था। इस दिन को प्रदेशवासी ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के रूप में मनाते हैं। पहली बार इसे आधिकारिक रूप से प्रदेश में BJP सरकार आने के बाद जनवरी 2018 में मनाया गया था।

प्रसून शर्म कर; ‘वाराणसी में 50 बच्चों के पिता का नाम राजकमल दास’: राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा को बदनाम कर रहा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम

                                                               राहुल गाँधी के झूठ का उजागर
राजनीति में जब कोई भी दल सत्ता में होता है, तो उस पर यह ज़िम्मेदारी होती है कि वह न्यायपालिका, कानून और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखे। लेकिन जब लगातार कुछ विशेष लोगों को ही बार-बार अग्रिम जमानत मिलती है, तो जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या न्याय सबके लिए समान है?
साभार सोशल मीडिया 
राहुल गांधी, सोनिया गांधी, रॉबर्ट वाड्रा, पी. चिदंबरम जैसे बड़े नामों को अगर हर बार बिना किसी देरी के राहत मिलती है, तो आम नागरिक सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्या यह कानून केवल आम जनता के लिए ही सख्त है? क्या बड़े नामों के लिए अलग मानदंड हैं? यह बात लोकतंत्र की आत्मा पर चोट करती है।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का हक़ देता है, फिर चाहे वो प्रधानमंत्री हो या एक आम नागरिक। जब बार-बार एक ही परिवार या पार्टी के लोगों को आसानी से राहत दी जाती है, तो यह न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। न्यायपालिका का सबसे बड़ा मूल्य है – जनता का विश्वास, और उसे टूटने नहीं देना चाहिए।
इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि ऐसे मामलों में केवल अभियुक्तों की जांच ही नहीं, बल्कि फैसला देने वाले न्यायाधीशों की भूमिका की भी समीक्षा की जाए। इससे ना केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
अगर देश का आम नागरिक यह महसूस करने लगे कि उसे न्याय मिलने की संभावना कम है, लेकिन रसूखदारों को तुरंत राहत मिलती है, तो यह व्यवस्था की जड़ों को हिला सकता है। ऐसे में जांच की प्रक्रिया और निर्णय देने वाले न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर भी नजर रखना एक ज़रूरी कदम बन जाता है।

कांग्रेस समर्थकों और कुछ कथित पत्रकारों ने इसे सच बताकर खूब प्रचारित किया। लेकिन जब इस वायरल स्क्रीनशॉट दावे की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही निकली। दरअसल यह कहानी 2023 के वाराणसी नगर निगम चुनाव की है और 48 बेटों वाली बात एक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, न कि कोई गड़बड़ी।

फैक्ट चेक: क्या रामकमल दास के 48 बेटे हैं?

सोशल मीडिया पर वायरल हुई वोटर लिस्ट के स्क्रीनशॉट में वाराणसी के वार्ड नंबर 51 की मतदाता सूची दिखाई गई है। इसमें एक ही पते पर रहने वाले कई मतदाताओं के पिता का नाम रामकमल दास लिखा गया है। इन सभी मतदाताओं की उम्र अलग-अलग है, जिससे यह दावा किया गया कि एक ही व्यक्ति के इतने सारे बेटे कैसे हो सकते हैं।

यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह लिस्ट 2023 के वाराणसी नगर निगम चुनाव की है, जिसमें 48 वोटरों के पिता के रूप में राम जानकी मठ के महंत स्वामी रामकमल दास वेदांती का नाम दर्ज है। ये सभी उनके बच्चे नहीं, बल्कि शिष्य हैं।

जब से बिहार में चुनाव आयोग ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन शुरू करने का ऐलान किया है, तभी से विपक्ष बौखला रहा है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इससे वोटिंग लिस्ट में गड़बड़ियाँ हो रही हैं। 7 अगस्त 2025 को कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वोटर लिस्ट से जानबूझकर छेड़छाड़ की जा रही है।

इसी गर्मा-गर्मी में 2 साल पुरानी एक वायरल तस्वीर सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि एक ही व्यक्ति के 48 बेटे हैं। इस फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें की जा रही हैं।

असली सच्चाई क्या है?

वायरल तस्वीर की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर खोज की। हमें कई बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म की खबरें भी मिलीं, जिनमें दैनिक जागरण, अमर उजाला और ईटीवी भारत शामिल है। इनमें सबसे पहले मई 2023 की एक रिपोर्ट पर ध्यान गया।

वायरल तस्वीर वाराणसी की वोटर लिस्ट की है। यह लिस्ट वार्ड नंबर 51 भेलूपुर की नगर निगम चुनाव के दौरान बनी थी। इसमें एक नाम है– रामकमल दास। उन्हें 48 लोगों का पिता बताया गया है।

अब जानिए असल बात। रामकमल दास एक साधु महात्मा हैं। वह शादीशुदा नहीं हैं। वह वाराणसी के राम जानकी मठ के महंत हैं। उनके साथ जो 48 लोग रहते हैं, वे उनके बेटे नहीं बल्कि शिष्य हैं। मठ में गुरु-शिष्य परंपरा चलती है। यहाँ शिष्य अपने गुरु को पिता जैसा मानते हैं।

जब ये शिष्य वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाते हैं तो पिता के नाम की जगह गुरु का नाम लिखते हैं। इसलिए सभी ने रामकमल दास का नाम पिता के तौर पर दिया। यह कोई धोखा या फर्जीवाड़ा नहीं है।

मठ के प्रबंधक ने भी यही बात बताई। उन्होंने कहा कि ये सभी शिष्य मठ में ही रहते हैं। कुछ तो आजीवन वहीं रहते हैं। उनकी पढ़ाई के कागजों में भी पिता के नाम पर गुरु का नाम होता है। पहले लिस्ट में 150 और नाम भी थे, लेकिन बाद में कुछ हटाए गए। अब कुल 48 शिष्यों का नाम लिस्ट में है।

हमने निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिस्ट भी चेक की। B, 24/19 नाम के घर में 51 वोटर्स हैं। इनमें 48 ने रामकमल दास को पिता बताया है। यह जानकारी आपको भाग-5, संख्या-725 पर मिलेगी। कई की उम्र एक जैसी है- जैसे 13 लोग 37 साल के हैं। बाकी की उम्र भी 39, 40 या 42 साल है।

रामकमल दास किसी के जैविक पिता नहीं हैं। जो नाम उनके नीचे लिखे हैं, वे शिष्य हैं, बेटे नहीं। यह परंपरा के तहत हुआ है। और यह सब कानूनी और सही तरीके से हुआ है। सोशल मीडिया पर जो बातें फैलाई गईं, वो अधूरी और भ्रामक हैं।

हज के दौरान BJP-RSS की बर्बादी की दुआ… मोहसिन रज़ा, मुस्लिम नेता ने की नागरिकता रद्द करने की माँग तो बिफरे कट्टरपंथी

उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मोहसिन राजा ने मंगलवार (20 जून 2023) को एक वीडियो ट्विट किया है। 53 सेकेंड के इस वीडियो में मुस्लिमों का एक जमावड़ा अरबी भाषा में कुछ बोलता दिखाई दे रहा है। एक व्यक्ति द्वारा कहे गए शब्द को कई लोग दोहरा रहे हैं। इसी में RSS का भी जिक्र किया जा रहा है। वीडियो को हज से संबंधित बताते हुए मोहसिन राजा ने दिख रहे लोगों को देश विरोधी ताकतों के हाथों के खिलौने कहा है।

योगी सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री रहे मोहसिन रजा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “हज जैसी पवित्र यात्रा और काबा जैसे मुक़द्दस स्थान पर भी देश विरोधी विदेशी ताकतों के हाथ के खिलौने ये चंद लोग जिन्होंने अपनी नकारात्मकता वाली सोच का प्रदर्शन किया है। ये लोग देश की भाजपा सरकार और आरएसएस के नाश की बद्दुआ कर रहे हैं।” मोहसिन रजा ने वीडियो में दिख रहे लोगों और उनसे ऐसा करवा रहे संदिग्धों की जाँच करवा कर देशद्रोह के तहत केस दर्ज करने की माँग की है।

नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, जेपी नड्डा सहित कई अन्य लोगों को अपने ट्विटर पर टैग करते हुए मोहसिन रज़ा ने वीडियो में दिख रहे लोगों की नागरिकता भी रद्द करने की अपील की है। वीडियो में आसमानी रंग के कपड़ों में महिलाएँ आगे खड़ी दिख रहीं हैं। उनके पीछे सफेद रंग के कपड़ों में कई पुरुष दिख रहे हैं। हालाँकि, लोगों से अपनी लाइनों को बुलवाता शख्स पूरे वीडियो में कहीं भी नहीं दिखाई दिया। कथित तौर पर बर्बादी की माँग वाले इस वीडियो की शुरुआत ‘बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम’ शब्द से की गई है।

कट्टरपंथी दे रहे हैं गालियाँ

मोहसिन रजा के इस ट्वीट पर कुछ कट्टरपंथी उन पर नाराजगी दिखा रहे हैं तो कुछ उनका मजाक उड़ा रहे हैं। सामी खान ने लिखा, “अमूल बटर खाता है इंडिया तो अब्दुर रब खान ने इसे चाटुकारिता बताया है। एक अन्य यूजर फखरुद्दीन ने रज़ा के इस ट्वीट पर लिखा, “डूब के मर जा भ%वे भाईयों को बदनाम कर रहा है।”
                                       चित्र साभार- @Mohsinrazabjpup
हालाँकि इसी ट्वीट पर कई लोग इस बद्दुआ पर नाराजगी भी जता रहे हैं। अमल अवस्थी के मुताबिक, दूसरों को दी गई बद्दुआ खुद पर लौट कर आती थी। वहीँ जितेंद्र तिवारी ने लिखा, ‘संघ इतना मजबूत हुआ कि इन्हे अल्लाह के दरबार में जा कर दुआ माँगनी पड़ी।”