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राजस्थान: 2 नाबालिग बहनों को 4 युवकों ने गैंगरेप के बाद पहाड़ियों पर फेंका


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राजस्थान से आए दिन बलात्कार की घटनाएँ सामने आ रही हैं
। ताजा मामला जालोर के भीनमाल थाना क्षेत्र का है। यहाँ दो नाबालिग बहनों का अपहरण करके 4 युवकों (कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 6 युवक) ने उनके साथ गैंगरेप किया। बाद में पहाड़ की झाड़ियों में घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। फिर ऑटोरिक्शा से लड़कियों को अस्पताल पहुँचाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीनमाल क्षेत्र के एक गाँव से इन दोनों चचेरी बहनों का अपहरण शनिवार रात (अक्टूबर 17, 2020) उस समय हुआ जब वह अपने घर सो रही थी। चार युवकों ने इनका पहले अपहरण किया फिर बच्चियों को एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उनके साथ दुष्कर्म किया।

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित इन दोनो बच्चियों को राजपुरा की पहाड़ियों पर फेंककर फरार हो गए। वहीं परिजन पूरी रात बच्चियों की खोजबीन करते रहे। काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियाँ पहाड़ियों पर मिलीं। इन्हें इलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया। वहाँ एक पीड़िता की हालत गंभीर बनी हुई है।

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरी वारदात के मद्देनजर लड़कियों के परिजनों ने 4 युवकों (चेतनराम, अशोक, तेजाराम, पीराराम) को नामजद किया है। उनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। फिलहाल, उनका कोई सुराग नहीं है।

राजस्थान पुलिस को इस संबंध में सूचना अक्टूबर 18 की सुबह-सुबह ही मिल गई थी, लेकिन पुलिस पहले तो लड़कियों को तलाशने की बात कहकर इधर-उधर करती रही। फिर करीब 11 बजे जाकर लड़कियाँ राजपुरा की पहाड़ियों पर खून से लथपथ हालत में मिली। इनमें एक बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी कि वह अपने पैरों पर भी नहीं उठ पा रही थी।

चुरू विधायक राजेंद्र राठौर ने इस घटना के मद्देनजर लिखा, “जालोर के भीनमाल में दो नाबालिग लड़कियों को अगवा कर आधा दर्जन युवकों द्वारा गैंगरेप की घटना को अंजाम देना मानवता को शर्मसार करने वाला है। ऐसे कृत्य स्वयं ही प्रदेश में सरकार द्वारा राज्य में महिलाओं और बच्चियों के लिए किए जा रहे सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान है।”

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे लिखती हैं, “राजस्थान में हर रोज़ हो रहे दुष्कर्म की घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। भीनमाल (जालोर) में दो नाबालिग बच्चियों के साथ किए गए गैंगरैप ने यह साबित कर दिया है कि राजस्थान में ना कोई कानून – व्यवस्था दिखाई देती और ना ही कोई सरकार।”

उत्तर प्रदेश के हाथरस मुद्दे को जिस तरह गैर-भाजपाई उछाल कर भाजपा की छवि को धूमिल करने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे, विपरीत इसके भाजपा राजस्थान में हो रहे बलात्कारों पर चुप्पी साधे हुए हैं। मीडिया भी राजस्थान में हो रहे बलात्कारों को उतना महत्व नहीं दे रही, मानो राजस्थान महिलाओं का कोई सम्मान नहीं। काश! राजस्थान में भाजपा होती, भाजपा को जवाब देना भारी पड़ गया होता। और अपने बचाव में भाजपा बलात्कारों के लिए विरोधियों को दोषी ठहरा रही होती। राजस्थान हो या दिल्ली, यहाँ का भाजपा संगठन केवल योगी और मोदी के कंधे सवार सियासत कर रहा है। इतने होते बलात्कारों पर राजस्थान भाजपा की चुप्पी इसको प्रमाणित कर रहा है। वसुंधरा के ट्वीट पर भी जबरदस्त प्रक्रिया सामने आ रही है, जिसका भाजपा केन्द्रीय शीर्ष नेतृत्व को संज्ञान लेना चाहिए:-

पिछले दिनों राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा पर सख्ती की पोल खोलती एनसीआरबी की रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि राजस्थान में महिलाएँ सबसे ज्यादा बलात्कार का शिकार होती हैं। इसमें दिए आँकड़ों के अनुसार वहाँ पिछले साल 5997 मामले दर्ज किए गए थे। यानी प्रतिदिन का औसत देखा जाए तो प्रदेश में हर दिन 16 रेप की घटना हुईं। सूची, रेप पीड़िताओं की संख्या भी प्रदेश में 6051 बताती है। इतना ही नहीं प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध की दर 15.9 है। 

पत्थर का जवाब AK-47 से देता हूं, मोदी जी, वसुंधरा जी.. सबको पेटीपैक कर दूंगा- जगत सिंह, पूर्व विदेश मन्त्री नटवरसिंह का बेटा


 
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पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के बेटे जगत सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे विवाद पैदा हो सकता है। राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट से बसपा उम्मीदवार जगत सिंह ने अपनी चुनावी जनसभा के दौरान जो बयान दिया था वो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जगत सिंह पत्थर का जवाब एके-47 से देने की बात कर रहे हैं। वीडियो को लेकर अभी तक जगत सिंह की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 
आपको बता दें कि जगत सिंह पिछली भाजपा सरकार में बीजेपी से विधायक थे लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। 10 साल से यहां विधायक रह चुके जगत सिंह इस बार मायवाती की पार्टी बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।दरअसल रामगढ़ विधानसभा सीट पर पूर्व में बसपा उम्मीदवार के निधन के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया था।  अब इस सीट पर 28 जनवरी को वोट डाले जाने हैं। जिस वीडियो में जगत सिंह जनसभा को संबोधित कर रहे हैं यह नामांकन भरने वाले दिन का बताया जा रहा है।  मैं पीछे नहीं हटूंगा। गोली चलेगी तो पहली गोली मेरे सीने पर चलेगी।
जनसभा को संबोधित करते हुए जगत सिंह कहते हैं, 'अभी जुगरावर में इतना बड़ा झगड़ा हो गया, कहां थी भारतीय जनता पार्टी उस दिन, हमारे 200 लड़के बंद होने वाले थे। कौन था उनको बचाने के लिए? कौन था उनकी पीड़ा को सुनने के लिए? कोई नहीं था.. मैं था. मैं पहुंचा। मैं पीछे नहीं हटूंगा भाइयों। गोली चलेगी तो पहली गोली मेरे सीने में लगेगी और पत्थर का जवाब एके 47 से करता हूं मैं.. तो आ जाओ अशोक जी, आ जाओ मोदी जी और आ जाओ वसुंधरा जी सब को पेटी पैक करके भेजूंगा।' 

शपथ ग्रहण समारोह में भतीजे ज्योतिरादित्य से कुछ यूं मिलीं वसुंधरा राजे सिंधिया

Vasundhara Raje and jyotiraditya scindia
ज्योतिरादित्य सिंधिया से गले मिलीं वसुंधरा राजे सिंधिया 
दिसम्बर 17 को अशोक गहलोत ने सीएम पद की शपथ ली। उनके साथ उनके नायब सचिन पायलट ने मंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बस के जरिए अल्बर्ट हॉल पहुंचे। राहुल गांधी के साथ विपक्षी दलों के तमाम बड़े नेता भी मौजूद थे। एक बस के जरिए विपक्षी नेताओं ने ये संदेश देने की कोशिश की आने वाले आम चुनाव में वो तमाम विरोधों के बीच एक मंच से मौजूदा केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। 
शपथ ग्रहण से पहले तमाम राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए नेता एक दूसरे से मिले और हालचाल ली। चुनाव प्रचार के दौरान नेता एक दूसरे के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं, अपने अपने समर्थकों को लुभाने के लिए करारे शब्दों का इस्तेमाल करते है। कभी कभी माहौल बेहद तनावपूर्ण हो जाता है। लेकिन कुछ खास मौकों पर जब वो खास अंदाज में मिलते हैं तो किसी के लिए भी अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है क्या वो वही नेता थे जो एक दूसरे के खिलाफ जहर उगलते थे।
अशोक गहलोत के मंच पर जब राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया जब ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिलीं तो नजारा कुछ अलग था। ये बात सच है कि दोनों लोगों का अलग अलग राजनीतिक दलों से संबंध है। लेकिन उनके बीच खून का रिश्ता भी है। वसुंधरा राजे सिंधिया रिश्ते में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ लगती है। वसुंधरा राजे सिंधिया और ज्योतिरादित्य एक दूसरे से गले मिले और शायद ये संदेश देने की कोशिश करते नजर आए कि राजनीतिक अदावत अपनी जगह है। लेकिन खून के रिश्तों को बोली की खटास कभी कम नहीं कर सकती है। 

कांग्रेस में नहीं थम रहा विवादित बयानों का सिलसिला

राजस्थान: कांग्रेस में नहीं थम रहा विवादित बयानों का सिलसिला, अब गहलोत ने लांघी मर्यादाराजस्थान के नागौर जिले के मकराना में जनसभा को सम्बोधित कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर अपने भाषण के दौरान सभी मर्यादाओं को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और विवादित बयान दे डाला. अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के समय कहा था कि यदि उनका नोटबंदी का उद्देश्य सफल ना हो तो जनता चौराहे पर खड़ा कर उन्हें फांसी दे सकती है. अब लोग चौराहे पर खड़े नरेंद्र मोदी का इंतजार कर रहे हैं.
गहलोत मोदी के खिलाफ यही नहीं थमे, गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी मां और जाति का नाम आते ही सहानुभूति बटोरने लगते है. लेकिन खुद इस बात का ध्यान नहीं रखते है की वे किन शब्दों से कांग्रेस के आला नेताओ को सम्बोधित करते रहे है.
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अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा को हॉट सीट माना जाता है। यहां हमेशा से ही धार्मिक भावनाओं पर ही नेताओं या मंत्रियों द.....

वहीं अशोक गहलोत ने अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह के रिश्तो को लेकर भी कटाक्ष किया. उन्होने आरोप लगाया की चुनाव से पहले एक दूसरे को पसंद नहीं करने वाले दोनों नेता आज एक दूसरे के सामने झुके हुए है. गहलोत ने अमित शाह के पुत्र पर भी नोटबंदी के दौरान करोड़पति बनने का आरोप जड़ते हुए कहा कि अमित शाह को करोड़पति बनने का फार्मूला देश के बेरोजगार नौजवानों को भी बताना चाहिए.
साथ ही बेरोजगारी के मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए गहलोत ने बीजेपी पर आरोप लगाया की राजस्थान और केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा की नीतियों के चलते बेरोजगार युवा आत्महत्या को मजबूर हो रहे है. गौरतलब है कि कुछ ही जिन पहले 4 दोस्तों ने नौकरी न मिलने की वजह से ट्रने के आगे कूद गए थे जिसमें 3 युवकों की जान मौके पर ही चली गई थी और चौथे युवक ने अस्पलात में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. 

BJP ने जारी किया घोषणा पत्र, 50 लाख नौकरियों, हर जिले में योग भवन का वादा

Rajasthan Gaurav Sankalp 2018भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राजस्थान के लिए मंगलवार(नवंबर 27) को अपना घोषणा पत्र जारी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और प्रकाश जावड़ेकर भी मौजूद रहे। बीजेपी ने इसे राजस्थान गौरव संकल्प 2018 का नाम दिया है। इस मौके पर वसुंधरा ने अपने 5 साल के कार्यकाल का भी ब्योरा दिया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने 95 प्रतिशत वादों को पूरा किया। 
राजे ने कहा, 'भाजपा ने अपने 2013 के घोषणापत्र के 81 प्रतिशत वादों को पूरा किया, 665 बिंदुओं में से 630 पर काम पूरा हुआ या कार्रवाई चल रही है। हमने रोजगार का वादा पूरा किया, 2.25 लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी।'
इस मौके पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा, 'भाजपा का गौरव संकल्प पत्र राजस्थान के भविष्य का रोडमैप बताता है। देश में जो आर्थिक प्रगति है जब उसका विकास अधिक बढ़ता है तो स्वाभाविक है वो केवल एक आंकड़ा नहीं होता, वो हर नगर में, हर शहर में, हर गांव में उसके चिह्न दिखाई देते हैं, और उससे विकास जब बढ़ता है तो सरकार के पास राजस्व भी अधिक आता है।' उन्होंने घोषणा पत्र के बारे में जानकारी देने से पहले पिछले घोषणा पत्र पर चर्चा करते हुए कहा, हमने 669 बिंदुओं का घोषणा पत्र बनाया था जिसमें से 81 फीसदी काम को पूरा कर लिया गया है. जिसके बाद उन्होंने पिछले 5 सालों में सरकार द्वारा किए गए कामों के बारे में चर्चा की और इसकी जानकारी दी. पहले हम सुराज की तरफ गए थे और अब हम इसे गौरव की तरफ ले जा रहे हैं. 
  • किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य 
  • MSP खरीद की प्रक्रिया और सुदृढ़, पारदर्शी बनाएंगे
  • कृषि केंद्रित 250 करोड़ रुपये का ग्रामीण स्टार्ट-अप फंड बनेगा
  • नए सदस्यों को ऋण देने का अभियान चलेगा
  • इसके लिए 1 लाख करोड़ के सहकारी ऋण 5 साल में देंगे
  • हर संभाग में बनेगी ऋण राहत आयोग की बेंच 
  • ईस्टर्न राजस्थान केनाल परियोजना से वंचित गांवों को जोड़ने की योजना
  • 6060 करोड़ की परियोजना से जंवाई बांध में पानी लाएंगे
  • हर ज़िले में योग भवन का निर्माण किया जाएगा 
  • सेना भर्ती शिविरों से पहले युवाओं को ट्रेनिंग देंगे, हर उपखंड में प्रशिक्षण केंद्र
  • 21 साल से ज्यादा के शिक्षित बेरोज़गारों को 5 हज़ार प्रतिमाह बेरोज़गारी भत्ता
  • हर साल करीब 30 हज़ार सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य 
  • स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में 50 लाख रोज़गार सृजित करने का लक्ष्य
  • ​ग्रामीण क्षेत्र रोज़गार गारंटी (नरेगा) की तर्ज पर शहरी रोज़गार गारंटी कानून बनाएंगे
  • सभी ज़िलों को 4 लेन 'राजस्थान माला' हाइवे से जोड़ेंगे
  • राजस्थान माला से 250 से ज्यादा आबादी के 100% गांव-बस्तियां सड़क से जुड़ेंगे
  • यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंस की दिशा में भामाशाह योजना को बढ़ाएंगे
यह बताता है कि राजस्थान पार्टी 5 साल में राजस्थान को कहां ले जाएगा. यह एक संक्षिप्त चित्र है जिसे पीएम मोदी द्वारा पेश किया गया है. देश में जो आर्थिक प्रकृति है जब उसका विकास अधिक बढ़ता है तो उससे सरकार के पास राजस्व भी अधिक आता है. राज्य अपना राजस्व इक्ट्टठा करते हैं. केंद्र अपना करता है उसमें से 42 प्रतिशत हर राज्य को मिलता है लेकिन कांग्रेस काल में यह केवल 32 प्रतिशत था. 
हमने देश के टैक्सेशन बेस को भी बढ़ाया है. जिससे साधन की मात्रा भी बढ़ी है. दोनों केंद्र और राज्य के पास और इसका इस्तेमाल दोनों राज्यों और केंद्र द्वारा किया जा रहा है. देश के इंफ्रास्ट्रकर का निर्माण जिसमें हाईवे हैं, पोर्ट है, प्राइवेट सेक्टर है. आज 10 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे हर साल बनते हैं. पोर्ट कैपेसिटी बढ़ रही हैं. रेलवे के विकास की ओर सरकार का ध्यान है. कई योजनाएं हैं जो हम मिलकर चलाते हैं. 40 प्रतिशत राज्य देता है और 60 प्रतिशत केंद्र देता है. हर गांव में बिजली पहुंचाने का काम समाप्त हुआ है. कूकिंग गैस देने की 5 करोड़ की योजना थी आज 8 करोड़ पहुंचा है.

सुरेश राम सेक्स स्कैंडल: कांग्रेस में रहते मेनका गाँधी ने रोका था दलित को प्रधानमंत्री बनने से

सेक्स बहुत गन्दी चीज है, इसके बावजूद आज हम डेढ़ सौ करोड़ तक पहुँच गये है। बच्चों को सेक्स की शिक्षा देना चाहिए, तर्कपूर्ण सहमति है। लेकिन सेक्स की ताकत देखिये और उसका अंतर्विरोध, जब तक गोपनीय है, ग्राह्य है, परम आनंद की पराकाष्ठा है, उघर गया तो आपको समूल नष्ट कर देगा।
जो समाज इस अंतर्द्वंद पर खड़ा है, उसकी भ्रूण हत्या तय है। एक वाक्या सुनिये। बाबू जगजीवन राम बहुत बड़ी शख्सियत थे, उनके बेटे सुरेश राम किसी होटल में अपनी महिला मित्र के साथ नग्न अवस्था में देखे गए। दुनिया में समय से बड़ा बलवान कोई नहीं। एक समय था जब मेनका ने अगस्त, 1978 में मेनका गांधी के संपादन में छपने वाली सूर्या मैगजीन में बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम का कथित 'सैक्स स्कैंडल' छापा गया। मैगजीन के दो पन्नों में सुरेश राम और दिल्ली विश्वविद्यालय की सत्यवती कॉलेज की छात्रा के अंतरंग पलों को बिना सेंसर किये हुए छापा गया था। खास बात यह है कि सुरेश राम अपने पिता की तरह राजनीति में नहीं थे। आज उसी मेनका गाँधी के पुत्र वरुण के आपत्तिजनक चित्र दूसरी मैगज़ीन प्रकाशित कर रही हैं। वाकई समय बड़ा बलवान है। 
Related imageइस खबर का नकारात्मक असर तब के रक्षा मंत्री और दलित नेता बाबू जगजीवन राम पर पड़ना था और पड़ा भी। यह खबर सिर्फ तत्कालीन रक्षामंत्री और उस समय देश से सबसे बड़े दलित नेता जगजीवन राम को बदनाम करने की साजिश थी। जिसमे इन्ही की पार्टी के के.सी.त्यागी,ओमपाल सिंह और ए,पी. सिंह  अप्रत्यक्ष रूप से लिया जा रहा था। सुरेशराम की आड़ में जगजीवन के राजनैतिक जीवन को धरातल में डालने से यह भी सिद्ध हो गया कि जनता को गुमराह और विभाजित करने में व्यस्त रहते हैं। जिस कांग्रेस ने दलित नेता को प्रधानमंत्री बनने से रोका, आज उसी पार्टी में दलित प्रेम कहाँ से उमड़ आया ? हालांकि जगजीवन राम एक ईमानदार और अच्छी छवि के नेता थे वह जन लोकप्रिय नेता थे. लेकिन उनके बेटे सुरेश राम के एक सेक्स स्कैंडल के सामने आने के कारण राजनैतिक गलियारों में भूचाल आ गया था और इसी वजह से जगजीवन राम के प्रधानमंत्री बनने का सपना चकनाचूर हो गया था। लेकिन संजय गाँधी की मृत्यु उपरान्त यह मैगज़ीन भी मेनका के हाथ से निकल भाजपा की वरिष्ठ नेता विजयराजे सिंधिया के पास चली गयी, जिसका कुछ समय बाद प्रकाशन ही बंद हो गया। मेनका से  मैगज़ीन को लेने में अकबर अहमद "डम्पी" और वसुन्धरा राजे की अहम् भूमिका थी। 
आज इतिहास ने फिर पलटा खाया है। मेनका के सुपुत्र वरुण गांधी उसी तरह लपेटे में आये हैं जैसे सुरेश राम आये थे। फोटो कौन बाँट रहा है। यह तो अँधेरे में है लेकिन इतना तो तय है कि इतिहास आपने आप को दोहरा रहा है वो भी गजब तरीके से। 
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इतना ही नही आज वरुण पर आरोप लग रहा है कि वरुण इस फोटो के बदले देश की सारी गुप्त बातें आर्म्स डीलर को देते रहे। यानी वरुण देश द्रोही हैं। पीएमओ के पास इसका खुलासा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपातकाल में मेनका गांधी की भूमिका का बदला इस तरह लिया जा रहा है।
जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम के सेक्स स्कैंडल की कहानी ने सियासी गलियारे में ना केवल भूचाल ला दिया था, बल्कि पिता के प्रधानमंत्री बनने का सपना तक चकनाचूर कर दिया था।
पत्रकारों पर सरकारी डंडा चलाने की इच्छा रखने वाली मेनका गांधी का अपना पत्रकारिता का इतिहास ज्यादा उज्ज्वल नहीं है. मेनका गांधी की पत्रिका सूर्या मैगजीन ने अपने समय में जिस तरह की पत्रकारिता की उसे पत्रकारिता के दामन पर काला धब्बा कहा जा सकता है.
इन्दिरा गाँधी की छत्रसाया में रहते मेनका गाँधी ने रोका था जगजीवन राम को प्रधानमन्त्री बनने से 
1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी चुनाव हार चुकी थीं. केंद्र में जनता पार्टी के नेतृत्व में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ था. मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री थे और बाबू जगजीवन राम रक्षामंत्री। 
सूर्या मैगजीन में छपी फोटो
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अगस्त, 1978 में मेनका गांधी के संपादन में छपने वाली सूर्या मैगजीन में बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम का कथित 'सैक्स स्कैंडल' छापा गया. मैगजीन के दो पन्नों में सुरेश राम और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा सुमन चौधरी (काल्पनिक नाम) के अंतरंग पलों को बिना सेंसर किये हुए छापा गया था. खास बात यह है कि सुरेश राम अपने पिता की तरह राजनीति में नहीं थे.
sureshsex2.jpgराजनीति और पत्रकारिता के इतिहास में ऐसे कम ही मौके आए होंगे जब निहित स्वार्थों के कारण विरोधियों की छवि खराब करने के लिए उसके निजी जीवन और अंतरंग पलों को सार्वजनिक कर दिया गया. 
जिस आधार पर आज मेनका गांधी रॉयटर्स के पत्रकारों की मान्यता रद्द करवाना चाहती हैं उस आधार पर किसी जमाने में मेनका की सूर्या मैगजीन को प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए था। 
इस खबर का नकारात्मक असर बाबू जगजीनवन राम के राजनीतिक जीवन पर पड़ा. आज इस तरह की पत्रकारिता को अपराध की श्रेणी में रखा जाता है और छापने वाले की जगह जेल में हो सकती है. उस समय जिस व्यक्ति ने यह स्टिंग किया वे आज एक नेता और राज्यसभा सदस्य हैं. बाद में उन्होंने कहा था कि यह साफ-साफ एक अपराध है. यह खबर सिर्फ तत्कालीन रक्षामंत्री और उस समय देश से सबसे बड़े दलित नेता जगजीवन राम को बदनाम करने की साजिश थी।  उस समय जगजीवन राम पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे। जगजीवन राम बेटे सुरेश राम के सेक्स स्कैंडल में न फंसे होते तो वह देश के पहले दलित प्रधानमन्त्री बन सकते थे।दुर्भाग्यवश 1978 में सूर्या नाम की एक पत्रिका में ऐसी तस्वीरें छपीं, जिसमें जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम को यूपी के बागपत जिले के एक गांव की एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया। इन तस्वीरों ने सियासी गलियारे में तूफान ला दिया था।
आगे चलकर सुरेश राम ने उससे शादी भी की थी, लेकिन सुरेश की मौत के बाद जगजीवराम के परिवारवालों ने उसका बहिष्कार कर दिया था।
भारत की राजनीति में रुचि रखने वालों लोगों को पता होगा कि इस सेक्स स्कैंडल का खुलासा जगजीवन राम के राजनैतिक करियर को खत्म करने के लिए किया गया था। इसमें उन्हीं के पार्टी के कई नेता शामिल थे। इन नेताओं में केसी त्यागी, ओमपाल सिंह और एपी सिंह का नाम अप्रत्यक्ष रूप से आता है।
इस चर्चित सेक्स स्कैंडल का सूत्रधार खुशवंत सिंह को माना जाता है। वह उस समय कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड के प्रधान संपादक और मेनका की पत्रिका सूर्या के कंसल्टिंग एडिटर भी थे। वह बंद लिफाफे में तस्वीरें लेकर पहुंचे. इसके बाद इसे सूर्या पत्रिका ने प्रकाशित किया था। महज 20 साल की उम्र में 'सूर्या' मैगजीन का एडिटर होने का सौभाग्य प्राप्त है.
केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स इंडिया के दो पत्रकारों आदित्य कालरा और एंड्रयू मैकेस्किल की पीआइबी मान्यता रद्द करवाने की मांग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से की थी.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार 19 अक्टूबर, 2015 को रॉयटर्स इंडिया ने एक खबर छापी थी जिसमें मेनका गांधी के हवाले से मोदी सरकार की आलोचना की गई थी. ये रहा उस स्टोरी का लिंक.
'India’s budget cuts hurt fight against malnutrition: Maneka Gandhi'
उपरोक्त खबर में मेनका के हवाले से कहा गया था कि उनके मंत्रालय का बजट करीब 50 फीसदी घटाकर 1.6 अरब डॉलर कर दिया गया है. इसकी वजह से कुपोषण के खिलाफ उनकी लड़ाई प्रभावित होगी, क्‍योंकि बजट में दिया गया पैसा 27 लाख स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को जनवरी महीने की तक तनख्‍वाह देने में ही खर्च हो जाएगा.
खबर छपने के तुरंत बाद मेनका के मंत्रालय ने रॉयटर्स की रिपोर्ट को शरारतपूर्ण बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया था. अगले दिन यानि 20 अक्टूबर को रॉयटर्स ने मंत्रालय का खंडन छापते हुए कहा कि संस्थान अपनी खबर की सत्यता पर कायम हैं.
20 अक्टूबर, 2015 को मेनका गांधी के निजी सचिव मनोज के अरोड़ा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव सुनील अरोड़ा को एक चिट्ठी लिखी. इसमें कहा गया, 'मुझे आपसे कालरा और मैकस्किल की पीआइबी (प्रेस इन्‍फोरमेशन ब्‍यूरो) मान्‍यता रद्द करने का आग्रह करने के लिए निर्देश दिया गया है.'
रॉयटर्स की रिपोर्ट से मेनका गाांधी असहमत हो सकतीं हैं, लेकिन मेनका गांधी ने जो आज से लगभग 40 साल पहले जो किया था वह अपराध की श्रेणी में रखा में जा सकता है. मेनका गांधी को और ज्यादा लोकतांत्रिक और उदारमना होने की जरूरत है. लेकिन सिर पर सास यानि तत्कालीन भूतपूर्व प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी का हाथ होने के कारण किसी तरह का अंकुश लगा। 
पत्रकारिता में जब किसी भी व्यक्ति या संस्थान को खबर से आपत्ति होती है तो वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) का दरवाजा खटखटाता है या कोर्ट की शरण में जा सकता है
उन्होंने पीसीआई और कोर्ट में अपनी बात रखने की जगह सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के जरिए फरमान जारी कर दिया. एक तरह से उन्होंने सरकारी डंडा फटकारने की कोशिश पत्रकारों के साथ की.

वसुंधरा राजे के खिलाफ ताल ठोकेंगे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह

manvendra singh_vashundhra rajeकांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची नवम्बर 17 को जारी कर दी। पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ उनकी पारंपरिक झालरापाटन सीट से मैदान में उतारा है। पार्टी ने 32 नामों की घोषणा की है, जिसमें पूर्व भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह का भी नाम शामिल है। मानवेंद्र हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
मानवेंद्र ने कहा कि वह वसुंधरा के खिलाफ चुनौती स्वीकार करते हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें 'बाहरी चेहरा' करार दिया है। झालरापाटन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सीट है जहां से उन्होंने अपना नामांकन नवम्बर 17 को दाखिल किया।
झालावाड़ जिले का झालरापाटन निर्वाचन क्षेत्र 2003 से राजे को विधानसभा भेजता आ रहा है। बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले मानवेंद्र सिंह ने सितंबर में सत्तारूढ़ भाजपा का दामन छोड़ दिया था। वह 2014 लोकसभा चुनाव में अपने पिता को पार्टी से दरकिनार किए जाने को लेकर नाराज थे।
कांग्रेस ने 16 नवंबर को 152 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी, जिसमें अशोक गहलोत और सचिन पायलट को मैदान में उतारा गया था। दोनों ही नेता मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा के लिए सात दिसंबर को मतदान होना है। नतीजों की घोषणा 11 दिसंबर को की जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। गौरतलब है कि मानवेंद्र सिंह के पिता जसवंत सिंह पिछले कुछ सालों से कोमा में हैं। जसवंत सिंह ने भाजपा छोड़कर 2014 में बाड़मेर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गए। भाजपा ने 2013 में उनके बेटे मानवेंद्र को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया था जिस पर वह विजयी हुए।
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इस चुनाव को लेकर कांग्रेस को उम्मीद है कि राजस्थान में इतिहास अपने को दोहराएगा और सत्ता में इस बार उसकी वापसी हो जाएगी। वहीं, भाजपा को उम्मीद है कि वह राजस्थान में इस बार इतिहास बदल देगी।