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बाहरी हो या NGO अब असम में आसानी से नहीं खरीद पाएँगे जमीन, हिमंता सरकार ने बनाई नई SOP: अलग धर्म के लोग भी नहीं कर पाएँगे लैंड ट्रांसफर डील

                                            मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (साभार: X_himantabiswa)
असम में जनसांख्यिकीय बदलाव और संभावित सुरक्षा खतरों को लेकर चिंताओं को देखते हुए असम कैबिनेट ने एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को मंजूरी दी है। यह SOP अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच भूमि हस्तांतरण की जाँच के लिए बनाई गई है। इसके अलावा असम के बाहर से आने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा जमीन खरीदने की प्रक्रिया को भी इस SOP के तहत जाँचा जाएगा।

बुधवार (27 अगस्त 2025) को कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस नीति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में जमीन के लेन-देन को बहुत सावधानी से संभालना जरूरी है, ताकि कोई धोखाधड़ी न हो और समाज में शांति बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर जमीन का ट्रांसफर (खरीद-बिक्री, दान) एक ही धर्म के लोगों के बीच हो रहा है, तो इस SOP का कोई असर नहीं होगा और ऐसे सौदे बिना किसी अतिरिक्त रुकावट के हो सकेंगे। लेकिन अगर यह ट्रांसफर अलग-अलग धर्मों के बीच हो, जैसे हिंदू और मुस्लिम या इसके उलट, तो इसके लिए कई स्तरों पर जाँच होगी।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “जब कोई प्रस्ताव सब-डिविजनल ऑफिसर के पास आएगा, तो अगर यह एक ही धर्म के लोगों के बीच का सौदा है, तो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन अगर यह इंटर-रिलीजन सौदा है, जैसे हिंदू और मुस्लिम के बीच तो पहले यह जाँचा जाएगा कि जमीन का मालिक असली है या नहीं, जमीन असली है या नहीं। इसके बाद प्रस्ताव डिप्टी कमिश्नर के पास जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने आगे बताया, “डिप्टी कमिश्नर इस प्रस्ताव को राजस्व विभाग को भेजेगा। वहाँ से यह असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच को जाएगा। स्पेशल ब्रांच यह देखेगी कि कहीं यह सौदा जबरदस्ती, धोखाधड़ी या गैरकानूनी तो नहीं है। साथ ही खरीदार के पैसे का स्रोत भी जाँचा जाएगा कि वह काला धन तो नहीं है।”

इसके अलावा स्थानीय लोगों की राय भी ली जाएगी कि वे इस सौदे से सहमत हैं या नहीं, खासकर जब जमीन किसी अलग धर्म के व्यक्ति को बेची जा रही हो। मुख्यमंत्री ने कहा, “स्पेशल ब्रांच यह भी देखेगी कि इस सौदे से स्थानीय सामाजिक ढाँचे पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ रहा या इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा तो नहीं है। उनकी रिपोर्ट डिप्टी कमिश्नर को वापस भेजी जाएगी, जो अंतिम फैसला लेगा कि सौदा मंजूर करना है या नहीं।”

स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी, जो डिप्टी कमिश्नर को अंतिम फैसला लेने के लिए कहेगी। सरमा ने जोर देकर कहा कि यह सख्त जाँच जरूरी है ताकि धोखाधड़ी या गैरकानूनी काम, पैसे के स्रोत, स्थानीय सामाजिक ढाँचे पर प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को ठीक से देखा जा सके। उन्होंने कहा, “SOP के तहत, असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच यह जाँचेगी कि क्या भूमि हस्तांतरण में कोई धोखाधड़ी या गैरकानूनी काम है, खरीदार के पैसे का स्रोत क्या है, जमीन के आसपास के सामाजिक ढाँचे पर क्या असर होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई मुद्दा तो नहीं है।”

हिमंता ने यह भी बताया कि पिछले छह महीनों से रुके हुए कई भूमि हस्तांतरण के मामलों का अब इस नए ढाँचे के तहत जल्दी निपटारा किया जाएगा।

यह SOP सिर्फ व्यक्तिगत सौदों तक सीमित नहीं है। असम के बाहर से आने वाले NGOs जो जमीन खरीदकर स्कूल, कॉलेज या अन्य संस्थान बनाना चाहते हैं, उन्हें भी इस SOP के तहत जाँच से गुजरना होगा।

सरमा ने हाल के रुझानों पर चिंता जताई, जहाँ कुछ NGOs ने असम में जमीन खरीदी है। उन्होंने कहा, “हाल ही में हमने देखा कि केरल से कुछ NGOs ने यहाँ जमीन खरीदी। उन्होंने कुछ आयोजन किए, जो भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। अगर कोई बाहरी NGO शिक्षण संस्थान, मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग कॉलेज के लिए जमीन खरीदना चाहता है, तो उसे भी इस SOP की प्रक्रिया से गुजरना होगा।”

असम के मुख्यमंत्री ने खास तौर पर बराक वैली, श्रीभूमि और बरपेटा जैसे इलाकों का जिक्र किया, जहाँ बाहरी NGOs, जो अक्सर किसी खास धर्म से जुड़े होते हैं, स्कूल या अन्य सुविधाओं के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे कहते हैं कि वे स्कूल बनाना चाहते हैं, लेकिन उनका असली मकसद कुछ और हो सकता है। पुलिस इन सभी पहलुओं की जाँच करेगी।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह SOP असम में रजिस्टर्ड NGOs पर लागू नहीं होगी। यह सिर्फ बाहरी NGOs पर लागू होगी, ताकि किसी भी अनुचित प्रभाव या छिपे मकसद को रोका जा सके। उन्होंने दोहराया, “असम जैसे संवेदनशील राज्य में भूमि हस्तांतरण के मुद्दे को बहुत सावधानी से संभालना जरूरी है।” इस नीति का मकसद राज्य के जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखना और राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी खतरे से बचाना है।

मोदी 13-14 सितंबर को करेंगे असम का दौरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा, जो पहले 8 सितंबर को होने वाली थी, अब उप-राष्ट्रपति चुनाव के कारण टल गई है। चुनाव आयोग ने 9 सितंबर को उप-राष्ट्रपति चुनाव की तारीख तय की है, इसलिए अब पीएम मोदी 13 सितंबर को असम आएँगे और 14 सितंबर को वापस जाएँगे। इस वजह से 8 सितंबर को होने वाले सभी कार्यक्रम अब 13 और 14 सितंबर को होंगे।

पीएम मोदी डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगे और कई बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।

असम : सुपारी की जगह 11000 बीघे पर उग गए ‘घुसपैठिए’, अब ‘सफाई’ करवा रही असम की हिमंता बिस्वा सरकार: 2000 परिवारों का कब्जा हटा

असम में  बेदखली अभियान और हिमंता बिस्वा सरमा (साभार- X- @assamtribune/@himantabiswasarma)
असम सरकार ने गोलाघाट और उरियमघाट में बेदखली अभियान तेज कर दिया है। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने गोलागाट के रिजर्व वन के 11,000 बीघा जमीन से 2000 से अधिक परिवारों को हटाने और 3,600 एकड़ वन भूमि को खाली करने का अभियान शुरू करने की कवायद तेज कर दी है।

गोलाघाट के रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट असम-नागालैंड सीमा पर स्थित है। यहाँ लगभग 2,000 अवैध घुसपैठिए परिवारों ने कब्जा कर लिया था। इसके कारण लगभग 3,600 एकड़ (11,000 बीघे) जमीन पर अवैध कब्जा जमा हुआ था। इस जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

11,000 बीघे जमीन पर लगभग 2,000 घुसपैठिए परिवारों के कब्जे को हटाने के लिए लगभग 1,500 परिवारों को 7 दिन का नोटिस दिया गया था। इनमें से 80% से अधिक परिवारों ने पहले से ही घर खाली कर दिए। इसके अलावा लगभग 500 परिवारों के पास फॉरेस्ट राइट्स कमेटी (एफआरसी) से प्रमाणपत्र हैं। वे कानूनी रूप से जंगल क्षेत्र में रह रहे हैं।

गोलाघाट जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरुपथार उप-मंडल में असम-नगालैंड सीमा पर उरियमघाट में रेंगमा वन अभयारण्य की लगभग 11,000 बीघा (3,600 एकड़ से अधिक) भूमि पर अतिक्रमण को हटाने के लिए मंगलवार (29 जुलाई 2025) की सुबह से बेदखली अभियान शुरू किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिद्यापुर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान अवैध मकानों को तोड़ा जा रहा है। स्थानीयों के अनुसार, जिनके पास एफआरसी प्रमाणपत्र हैं वे बोडो, नेपाली समेत अन्य जनजातीय समुदायों से हैं। इसके अलावा स्थानीयों ने यह भी कहा कि जिनके घर अतिक्रमण के तहत तोड़े जा रहे हैं वे लगभग सभी मुस्लिम समुदाय से हैं।

अतिक्रमण को हटाने के लिहाज से क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ काफी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया है। इस दौरान 12 गाँवों के 2648 अवैध घरों को तोड़ने की तैयारी है। इन गाँवों में – सोनारीबिल टॉप, नंबर 2 पिथाघाट, नंबर 2 और नंबर 3 दयालपुर, दलानपाथर, खेरबारी, विद्यापुर, विद्यापुर बाजार, नंबर 2 मधुपुर, आनंदपुर, राजापुखुरी और गेलाजा शामिल हैं।

असम सरकार का कहना है कि जंगल की जमीन को अतिक्रमणकारियों ने सुपारी की खेती के लिए साफ कर दिया था। जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा जमा लिया गया। इसके कारण असम की सांस्कृतिक पहचान को भी खतरा है। यह इलाका रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट का हिस्सा है, जो पारिस्थितिकीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेदखली अभियान को लेकर 21 जुलाई 2025 को बयान दिया था कि पिछले चार वर्षों में राज्य में 1.29 लाख बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है, जबकि अभी भी 29 लाख बीघा भूमि पर अभी भी अतिक्रमण है।

उत्तराखंड : ‘लैंड जिहाद’ पर प्रहार, खाली कराई 5000 एकड़ जमीन: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले – भगवान राम की कृपा, देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखेंगे

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार (29 दिसंबर, 2023) को कहा कि प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक की ‘लैंड जिहाद’ के जरिए हड़पी भूमि को उनकी सरकार ने मुक्त कराया है और आगे भी उनकी कोशिशें जारी रहेंगी। दरअसल, दिल्ली के IP एक्सटेंशन में एक ‘राम कथा’ में भाग लेने के दौरान उन्होंने ये खुलासा किया।

धामी ने कहा, “देवभूमि के अंदर हमने बहुत सारे चुनौतीपूर्ण और कठिन काम उन पर भी भगवान राम की कृपा से हमने निर्णय लिया है कि हम उस पर आगे बढ़ेंगे। कठोर निर्णय लेने से भी हम पीछे नहीं हटेंगे। हमने कठोर निर्णय लिए हैं फिर चाहे वो अतिक्रमण का मामला हो क्यों न हो।”

उन्होंने आगे कहा कि आपने ने देखा होगा राज्य के अंदर आज 5 हजार एकड़ से भी ज्यादा जमीन जो ‘लैंड जिहाद’ के तौर पर अतिक्रमण की गई थी उसे अतिक्रमण से मुक्त कराने का काम हमने किया है। प्रदेश के अंदर जो ‘लैंड जिहाद’ चलता था उस लैंड जिहाद से मुक्ति का काम हमने प्रारंभ किया है।”

इस दौरान सीएम धामी ने ये भी कहा कि इस सबके साथ-साथ देव भूमि का जो मूल स्वरूप है। जिसके लिए देव भूमि जानी जाती है। देवभूमि का वो मूल स्वरूप बना रहे उसके लिए हम यथा संभव हर कोशिश, हर प्रयत्न कर रहे हैं।

उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की बार-बार शिकायतों के बाद सीएम धामी ने राज्य पुलिस और वन विभाग को सभी अवैध संरचनाओं की पहचान करने का निर्देश दिया था।

इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि धर्म की राह पर चलने जीवन में कोई दुविधा नहीं रहती है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यसेवक के तौर पर धर्म के मार्ग पर चलते हुए वो जो भी फैसले लेते हैं वो खुद ही समाज हित में सही हो जाते हैं।

राज्य सरकार के मुहैया कराए गए आँकड़ों के मुताबिक, मई 2023 तक राज्य के अधिकारियों ने लैंड जिहाद के जरिए अतिक्रमण की गई कुल 3,793 ऐसी जगहों की पहचान की थी। इस तरह के अतिक्रमण के सबसे अधिक मामले नैनीताल जिले में पाए गए। इस जिले में 1,433 से अधिक जगहों पर अतिक्रमण पाया गया था।

वहीं उसके बाद 1,149 अतिक्रमण हरिद्वार जिले में पाए गए। चमोली में 423 अवैध ढाँचे पाए गए थे। वहीं राज्य के अन्य जिलों में जिनमे टेहरी (209), अल्मोड़ा (192) और चंपावत (97) शामिल हैं। अधिकांश अतिक्रमण वन भूमि पर थे। इस साल की शुरुआत में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू होने के बाद से, राज्य में करीब 500 ‘मजारों’ और लगभग 50 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया है।


उत्तराखंड : जमीनों के मालिक खुद ही तुड़वा रहे मज़ार: ऋषिकेश में पुरोहित से लेकर पूर्व सैनिक के घरों में दरगाहें, जागरूक हिन्दुओं ने उठाया बीड़ा

इन दिनों सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में मजारों को ध्वस्त करने के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ हैंडलों पर इसे LIVE भी किया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद मुस्लिम तबके के कुछ लोग इस मामले में प्रशासन से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं ‘देवभूमि रक्षा अभियान’ के स्वामी दर्शन भारती ने अपने संगठन द्वारा मजारों को तोड़े जाने की जिम्मेदारी भी ली है। ऑपइंडिया ने उन लोगों से सम्पर्क किया जिन्होंने मजारों के ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह से कानून के दायरे में बताते हुए हमसे अपने काम को एक बड़ी साजिश के खिलाफ संघर्ष का नाम दिया।

ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में मजारों के खिलाफ हल्लाबोल की शुरुआत करने की जिम्मेदारी एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभूषण शर्मा ने ली है। ऑपइंडिया से मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को हुई बातचीत के दौरान उन्होंने हमें विस्तार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान की शुरुआत उन्होंने पिछले माह 26 अगस्त से की थी।

खैर, इस काम से एक बात तो जाहिर हो गयी कि जगह-जगह बनने वाले मजार और कुछ नहीं, बल्कि ज़मीन जिहाद है। यदि इन पद-भ्रष्ट हिन्दुओं ने मजारों की बजाए घर-घर मूर्ति स्थापित की होती, कोई सनातन धर्म पर उंगली उठाने का साहस नहीं करता। 

मजारों से मिलता लव जिहाद/आतंकवाद और मुस्लिम कट्टरपंथियों को वित्तीय सहायता 

देश में फ़ैले लव जिहाद के कारण सूट केसों/फ्रिज में टुकड़े में होती राह भटकी हिन्दू लड़कियों की लाशे, मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा सर से तन से जुदा करने वालों को रुपयों का लालच के लिए धन कहीं से ओर से नहीं मजारों से आता है, जिसे हिन्दू मजारों पर चढ़ाकर आते हैं। जिस दिन हिन्दू मजारों पर माथा टेकने की बजाए अपने मंदिरों में जाना शुरू कर देंगे, मजारों पर सन्नाटा ही नहीं छाएगा, लव जिहाद/आतंकवाद और फैलती मुस्लिम कट्टरपंथी पर भी चोट लगेगी। 

मजारों पर जाने वाले हिन्दू यदि प्रतिदिन सुबह गायत्री मन्त्र का जाप, बजरंग बली, दुर्गा/काली माता, देवों के देव महादेव, भैरों बाबा या जगत पालनहार विष्णु आदि की पूजा करें और सूर्य देवता को जल अर्पित करने से समस्याओं के समाधान में सहायता जरूर मिलेगी। पत्थर की मूर्तियां जरूर हैं, लेकिन बेदर्द नहीं। जिस दिन श्रद्धा से इनके चरणों में माथा टेक देंगे जीवन तर जाएगा। क्योकि इस दुनिया से बिदा होने पर राम नाम सत्य ही बोल बोले जाएंगे।    

ऋषिकेश व आस-पास घरों में 200 से अधिक मजारें

चंद्रभूषण शर्मा ने दावा किया कि प्राइवेट नौकरी के दौरान फील्ड में रह कर उन्होंने पाया कि ऋषिकेश व आसपास 200 से अधिक मजारें घरों के अंदर बन चुकी हैं। इन्हें हिन्दू धर्म के पूर्व सैनिक, व्यापारी और यहाँ तक कि मंदिर के पुजारियों तक ने अपने घरों में बनवा रखा था। कुछ मजारें बनाने वालों के घर तक ही सीमित थीं जबकि कई अन्य तो धीरे-धीरे सार्वजनिक रूप ले चुकी थीं। यहाँ कव्वाली आदि बजा कर सालाना उर्स मनाया जा रहा था और बाहरी लोग नमाज़ पढ़ने लगे थे।

ऋषिकेश के कई हिस्सों में फैला है जाल

जिन मजारों को 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच ध्वस्त किया है, वो ऋषिकेश के अमित ग्राम, मनसा देवी वार्ड और सुमन विहार इलाके में हैं। चंद्रभूषण शर्मा ने बताया कि ये अभियान अभी आगे भी तब तक जारी रहेगा जब तक ऋषिकेश मजार मुक्त नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने कहा कि यह काम अपने खुद के पैसे और जनसहयोग से किया जा रहा है जिसमें अगली कार्रवाई की जानकारी किसी को भी नहीं दी जाती। आगे भी अवैध मजारों को वैध तरीके से तोड़ने की बात खुद को इस अभियान में सक्रिय भागीदार बताने वाले ऋषिकेश के अनिल कुमार ने भी कही। हमें बताया गया कि घर के अंदर मजार वाली साजिश से ऋषिकेश शहर और 5 किलोमीटर का इलाका बुरी तरह से प्रभावित है।
                                                         अनिल कुमार द्वारा भेजी गई तस्वीर

दरगाहों पर रची जाती है साजिश

चन्द्रभूषण शर्म ने हमें बताया कि जो लोग किसी वजह से छोटी-छोटी बातों से परेशान हो कर दरगाहों पर जाते हैं वहाँ उन्हें घर में मजार बनाने की सलाह दी जाती है। दरगाह के नाम पर चंद्रभूषण ने खासतौर पर रुड़की की पिरान कलियर का नाम लिया। यहाँ उन्हें न सिर्फ घर में मजार बनाने वाले कारीगर दिए जाते हैं बल्कि बाद में अंदर ही अंदर इबादत करने के लिए नमाज़ी टोपी सहित इस्लामी वेशभूषा भी दी जाती है। शर्मा का दावा है कि इसी जगह पर उन्हें इबादत की ट्रेनिंग आदि भी मिलती है।
शर्मा ने बताया कि मंदिर के पुरोहित और सैनिक सहित अन्य व्यापरी भी दरगाहों पर बताए कानून से अंदर ही अंदर इबादत करते थे।

हर ध्वस्तीकरण की लिखित सहमति

हमने चंद्रभूषण शर्मा से सवाल किया कि मजारों पर हथौड़े चलाने पर क्या उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। इस सवाल के जवाब में शर्मा ने कहा कि उन्होंने इस कार्रवाई की लिखित अनुमति और सहमति उन मकान मालिकों से ले रखी है जिन्होंने किसी की बातों में आ कर घर में मजार बनवा ली थी। शर्मा ने यह भी कहा कि ऋषिकेश को मजार मुक्त करने के अभियान से पहले उन्होंने सभी कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया था।
                                                              सहमति पत्र
घरों में बनी मजारों के ध्वस्तीकरण के अभियान में शामिल एक अन्य व्यक्ति अनिल कुमार ने भी बताया कि उन्होंने घर मालिकों से इसकी अनुमति और सहमति ले रखी थी। अनिल कुमार ने हमें कुछ मकान मालिकों के सहमति पत्र भी भेजे। इस सहमति पत्र में स्वेच्छा और हिन्दू धर्म के सम्मान में अपने घर से मजारों को हटाने की अनुमति लिखी हुई है। साथ ही भविष्य में दोबारा ऐसा कृत्य न करने व कभी न्यायालय आदि न जाने की घोषणा की गई है। सहमति पत्र की शुरुआत ‘श्री गणेशाय नमः’ से की गई है।

कुछ धर्मान्तरित हिन्दू ही हैं साजिश के संचालक

चंद्रभूषण शर्मा ने बताया कि ऋषिकेश में फ़ैल रहा मजारों का जाल पिछले 30 सालों से शुरू हुआ है। पिछले हफ्ते जो मजारें तोड़ी गईं हैं उनमे से कुछ 2 दशक पुरानी हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 5 से 6 साल के बीच तो अंधाधुंध मजारें बनी हैं। इसके पीछे चंद्रभूषण ने कुछ ऐसे हिन्दुओं को सक्रिय बताया जो अंदर ही अंदर धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया है जो पहले हिन्दू था लेकिन अब वह इस्लामी रंग-ढंग में रहता है। शर्मा ने कहा कि अथाह पैसे का मालिक और बाउंसरों की सुरक्षा में चलने वाला वह व्यक्ति अब हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर के लोगों को अपने में मिलाने का प्रयास करता है।
चन्द्रभूषण शर्मा ने इस अभियान में शामिल अपने अन्य साथियों का नाम बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने निकट भविष्य में इसे गति देने का भी एलान किया और लोगों से जागरूकता की अपील की।

जिसने बनवाई मजार उसी की बीवी से लव जिहाद

ऑपइंडिया ने इस मामले में देवभूमि रक्षा अभियान के संरक्षक स्वामी दर्शन भारती से बात की। स्वामी दर्शन भारती ने हमें बताया कि ऋषिकेश के जिस अमित ग्राम इलाके में सबसे अधिक मजारें घर में बनी हैं वहाँ के एक मकान में लव जिहाद की घटना घट चुकी है। दर्शन भारती ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उस हिन्दू परिवार ने लगभग 15 साल पहले घर में मजार बनवाया था जिसका पति इबादत ही करता रह गया और उसकी बीवी मुस्लिम के साथ भाग गई। स्वामी के अनुसार यह घटना लगभग 5 साल पुरानी है।

प्रशासन जता चुका है लाचारी

मजारों के खिलाफ खुद से कार्रवाई के सवाल पर स्वामी दर्शन भारती ने हमें बताया कि उन्होंने इस बाबत पहले प्रशासन से ही बात की थी। उन्होंने दावा किया कि मजारों को निजी मकानों में स्वेच्छा से बने होने की बात कह कर प्रशासन ने किसी भी कार्रवाई में असमर्थता जताई थी। संगठन द्वारा चलाए जा रहे अभियान को उन्होंने कानूनी और अंतिम विकल्प बताया। साथ ही उन्होंने इसे बेहद खतरनाक साजिश बताते हुए कहा कि पहाड़ियों के खिलाफ अंदर ही अंदर पहाड़ी ही खड़े कर दिए गए।

साधु-संतों में मुस्लिमों का डर

धर्मनगरी ऋषिकेश में चुपके से इतनी मजारें बन जाने के पीछे स्वामी दर्शन भारती ने वहाँ तमाम संतों में मुस्लिमों का डर बताया। उन्होंने इस डर को कइयों की मजबूरी कहा और आगे से अवैध मज़ार विरोधी अभियान में शामिल होने की अपील की।

‘विदेशी फंडिंग से देश की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश कर रहे जो NGO, उनके प्रति कोई नरमी नहीं’: संसद में गरजे अमित शाह – ये कांग्रेस नहीं, मोदी सरकार है

                                                                                                                               साभार एएनआई
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार वैसे गैर-सरकारी संगठनों के प्रति कोई दया नहीं दिखाएगी जो विदेशी फंडिंग की मदद से देश की जनसांख्यिकी को बदलने और सामाजिक गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा यह कांग्रेस नहीं, मोदी सरकार है।

खाड़ी देशों से आता है ड्रग्स- अमित शाह

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में 21 दिसंबर, 2022 को गृह मंत्री अमित शाह ने देश में ड्रग्स की समस्या और इससे निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से बात की। गृह मंत्री अमित शाह ने ड्रग्स के मुद्दे पर संसद में कहा कि इसे लेकर कोई सियासत नहीं होनी चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ड्रग के कारोबार और उसके मुनाफे से होने वाले आतंकवाद को मोदी सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि ड्रग्स बच्चों को अपना शिकार बनाता है और नस्लें बर्बाद होती हैं।

अपने संबोधन में अमित शाह ने जानकारी दी कि देश में खाड़ी देशों से बड़े स्तर पर ड्रग्स की खेप भेजी जाती है। इस सिलसिले में 12 राज्यों में छापेमारी हुई और ड्रग्स तस्करी में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि हमने राज्यों में ड्रग नेटवर्क की मैपिंग की है। उन्होंने भरोसा दिया कि अगले 2 सालों में बड़ा से बड़ा अपराधी सलाखों के पीछे होगा।

संबोधन के दौरान नाराज़ हो गए अमित शाह

जब अमित शाह अपनी बात रख रहे थे उस बीच टीएमसी सांसद सौगत राय ने टोका-टाकी शुरू कर दी। बीच भाषण में इस टोका-टाकी से अमित शाह नाराज़ हो गए। अमित शाह ने कहा कि बीच में टोका–टाकी ठीक नहीं है। यह न आपकी उम्र के लिए ठीक है न ही आपकी सीनियरिटी के लिए। अमित शाह ने कहा यदि आप बोलना चाहते हैं तो मैं बैठ जाता हूँ। अमित शाह ने इस दौरान विषय की गंभीरता समझने का भी आग्रह किया और आगे अपनी बात रखी।

कई बार बड़ों को भी समझाना पड़ता है

टोका-टाकी पर अमित शाह के नाराज़ होने के बाद विपक्ष के एक सांसद ने पूछा कि आप इतने नाराज क्यों होते हैं। इस पर अमित शाह ने कहा, “मैं नाराज़ नहीं हो रहा हूँ, समझा रहा हूँ कई बार बड़ों को भी समझाना पड़ता है।” इसके बाद सदन में टोका-टाकी बंद हो गई और अमित शाह ने ड्रग्स के मुद्दे पर अपनी बात पूरी की।

डेमोग्राफी चेंज पर अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कुछ एनजीओ विदेशी चंदा लेकर देश में जनसांख्यिकी बदलने (डेमोग्राफी चेंज) करने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि कुछ एनजीओ ऐसे हैं जो भारतीय समाज को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने ऐलान किया कि सरकार देश की जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिश कर रहे गैर सरकारी संगठनों के प्रति कोई दया नहीं दिखाएगी। विदेशी फंडिंग के माध्यम से सामाजिक गड़बड़ी फैलाने वाले संगठनों पर कार्रवाई होगी।
अमित शाह ने कहा कि संगठनों को विदेशी योगदान अधिनियम (FCRA) का पालन करना ही होगा जो FCRA का पालन नहीं करेंगे उनके साथ सख्‍ती की जाएगी। विदेशी फंडिंग पर अब सरकार की निगरानी होगी। अमित शाह ने कहा, “यह नरेंद्र मोदी की सरकार है, देश को खत्म करने के लिए देश में एक पाई भी हम नहीं आने देंगे।”

बॉर्डर पर 10 साल में 32% मुस्लिम बढ़े, BSF के हवाले हो सकता है 100 किमी इलाकाः नेपाल-बांग्लादेश से सटे इलाकों में डेमोग्राफी चेंज से बढ़ा खतरा

                                                                               सीमा इलाकों में बढ़े मुस्लिम (तस्वीर साभार: जनसत्ता)
बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी मुल्कों की सीमा से सटे इलाकों में होने वाला डेमोग्राफिक बदलाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ये बदलाव सामान्य नहीं हैं। पिछले 10 साल में उत्तर प्रदेश और असम के बॉर्डर वाले इलाकों में जनसांख्यिक में अप्रत्याशित परिवर्तन हुआ।

हैरानी होगी कि ऐसे इलाकों में अचानक से साल 2011 के बाद 32% मुस्लिम बढ़ गए जबकि पूरे राज्य में मिलाकर ये दर 10-15 फीसद की है। कथिततौर पर सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम आबादी 20% तेजी से बढ़ी है और साथ ही इनके मजहबी स्थलों की गिनती में भी वृद्धि देखी गई है।

समाचारों पर विश्वास करने पर मोदी सरकार पर शंका होनी लगती है। कोई न कोई त्यौहार फौजियों के साथ मनाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्या भारतीय सीमाओं पर इस डेमोग्राफिक बदलाव की तरफ ध्यान क्यों नहीं गया? क्या हमारी सीमाओं की सुरक्षा में कोई चूक हो रही है?  जो बहुत ही चिंता का विषय है। कश्मीर में पत्थरबाज़ी बंद हुई लेकिन आतंकवाद नहीं। 2014 से मोदी सरकार क्या कर रही है? अगस्त 5 को इसी विषय पर चर्चा के दौरान एक वक्ता ने इस खतरनाक बदलाव के लिए सीमा पर तैनात फौज को ज़िम्मेदार बताया। जो बहुत गंभीर और चिंता की बात है।  

BSF का दायरा बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी

सीमा पर हो रहे इन बदलावों को देख सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस ने अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मुद्दा कहा है। माँग की गई है कि बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किमी से बढ़ाकर 100 किमी किया जाए ताकि उन्हें जाँच में आसानी हो।
इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी बयान आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इतना ज्यादा डेमोग्राफिक बदलाव सिर्फ आबादी बढ़ने का मसला नहीं है। ये भारत में घुसपैठ का नया पैटर्न हो सकता है। यही वजह है कि यूपी और असम की सीमा सुरक्षित रखने के लिए बीएसएफ का दायरा बढ़ाने की माँग हो रही है।

राजस्थान, उत्तराखंड में भी अचानक हुआ कट्टरपंथ का विस्तार

यूपी और असम से पहले राजस्थान में भी अचानक से मुस्लिम आबादी में हुई वृद्धि सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बनी थी। बीएसएफ अध्य्यन में सामने आया था कि राजस्थान के इलाकों में हुआ जनसांख्यिक बदलाव में अजीब सा फर्क था। जहाँ बाकी समुदाय के लोगों में केवल 8-10 फीसद आबादी बढ़ी मिली थी। वहीं मुस्लिमों की जनसंख्या 20-25 फीसद तेजी से बढ़े थे। इसके अलावा अचानक से ज्यादा बच्चों को मदरसों में जाता देखा गया था और ये भी पता चला कि पोखरण, मोहनगढ़ और जैसलमेर जैसे सीमा वाले इलाकों में अचानक देवबंद के मौलवी आने लगे जो समुदाय को कट्टरपंथ की तालीम देते थे।
नेपाल से लगे उत्तराखंड के इलाकों का भी यही हाल है। वहाँ के लिए भी सुरक्षा एजेंसियाँ चिंता जता चुकी हैं। पिछले साल गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट अनुसार वहाँ मजहब विशेष की आबादी में 2011 की मतगणना से ढाई गुना ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों का दावा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी नेपाल के रास्ते भारत में सक्रिय हैं। वह यहाँ मदरसों को खोल रही हैं। वहीं अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।

मुस्लिम गलियारा बनाने की हो रही तैयारी

इससे पहले उत्तर भारत में एक मुस्लिम पट्टी बनाने की साजिश का खुलासा एक लेख में हुआ था। दावे के मुताबिक पट्टी में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों के इलाकों को निशाना बनाए जाने की बात थी जो कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े थे। लेख के अनुसार मुस्लिम गलियारा बनाने के लिए मुस्लिम घुसपैठियों की जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ये गलियारा बंगाल से बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान में मिलेगा। 
इसके अलावा इसमें ये भी कहा गया था कि कैसे नेपाल सीमा पर जो मदरसे बढ़े और यूपी में धर्मांतरण गिरोह सक्रिय हुआ, ये सब उसी गलियारे को बनाने की साजिश का हिस्सा है। दावे के अनुसार मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है।