उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में ऐसा भड़काऊ बयान दिया है, जिस पर हंगामा मचना तय है। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “साल 2027 में सपा सरकार बनते ही यूपी के सारे बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कहा, “विधानसभा चुनाव में भाजपा का सफाया होगा और देश की राजनीति उसके चुनावी परिणाम से प्रभावित होगी। इस चुनाव में प्रदेश में समाजवादी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश के बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा।” अखिलेश यादव ने मंगलवार (3 सितंबर 2024) को सपा के मुख्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान यह बात कही।
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा की सरकार में निर्दोष लोगों को सताया जा रहा हैं। 2027 में समाजवादी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश के बुलडोजरों का रूख गोरखपुर की तरफ होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा का राजनीतिक चरित्र ही विकास विरोधी है। पिछले सात वर्षों में भाजपा ने विकास के नाम पर कोई काम नहीं किया है और न ही भाजपा नेतृत्व के पास विकास का कोई विजन है।
अखिलेश ने कहा कि भाजपा का एजेंडा समाज में नफरत फैलाकर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना है। समाजवादी पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता भाजपा के इन मंसूबों को कभी भी पूरा नहीं होने देगा। जनता समझ रही है कि उसको समाजवादी सरकार बनने पर ही तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृहजिला गोरखपुर ही है। गोरखपुर में गोरक्षधाम पीठ के वो महंत हैं। अखिलेश यादव का इशारा किस तरह है, इस बात के कयास लगने शुरू हो गए हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव के गृह जिला मैनपुरी पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने विकास योजनाओं का उद्धाघन और शिलान्यास किया, साथ ही अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव पर जोरदार हमला बोला। योगी आदित्यनाथ ने मैनपुरी में कहा कि जो मैनपुरी कभी वीवीआईपी जिला माना जाता था, वो आज विकास की दौड़ में पिछड़ कैसे गया? उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले यूपी में हर नौकरी बिकती थी, उसकी नीलामी होती थी। वसूली में चाचा और भतीजा समान भागीदार होते थे।
योगी को बदनाम करने के लिए केस करने वाले परवेज को 7 साल की सजा (फोटो साभार: Bhaskar/TOI) उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बीजेपी नेताओं की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी सीडी पेश करने के मामले में गोरखपुर की कोर्ट ने परवेज परवाज को 7 साल की सजा सुनाई है। जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 2007 का है। उस समय परवेज ने लोगों को भड़काकर एक वर्ग की दुकानों पर पथराव करवाया था। बाद में फर्जी सीडी पेश कर बीजेपी नेताओं पर माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर करवाया था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में जब इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को फाँसी दी गई तो परवेज ने गोरखपुर भड़काऊ भाषण दिए और मुस्लिम भीड़ इकट्ठी कर शहर में हिन्दुओं की दुकानों पर पत्थरबाजी करवाई थी। इससे पूरे शहर का माहौल खराब हो गया था। इसके बाद उसने गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा नेता शिवप्रताप शुक्ला, राधामोहन दास अग्रवाल और अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए एक फर्जी मामला दर्ज करवाया था।
जाँच में परवेज के दावे सिद्ध नहीं हो सके। न्यायालय ने परवेज से सबूत माँगा तो उसने एक सीडी उपलब्ध करवाई। उसने दावा किया कि इस सीडी में इन नेताओं के भड़काऊ भाषण हैं। इस सीडी को जब फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया तो यह फर्जी निकली और पाया गया कि भाषणों से छेड़छाड़ की गई है।
इस मामले में भाजपा के पूर्व एमएलसी स्वर्गीय वाईडी सिंह ने परवेज के विरुद्ध पार्टी नेताओं की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। इसी से जुड़े मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट आदर्श श्रीवास्तव ने उसे सजा सुनाई है। एक मामले में उसे पाँच वर्ष और दूसरे में सात वर्ष की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएँ साथ चलेंगी। उसके ऊपर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
परवेज पहले से ही दुष्कर्म के एक मामले में जेल में बंद है। उसे कोर्ट ने इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
गोरखनाथ मंदिर पर हमला (Gorakhnath Temple Attack) करने वाले अहमद मुर्तजा अब्बासी ने पूछताछ के दौरान आतंकवाद-निरोधक दस्ते (ATS) को कई सवालों के ऐसे जवाब दिए, जिससे यह साफ लग रहा है कि वह मानसिक रूप से बीमार नहीं, बल्कि शातिर और कट्टरपंथी है। ATS ने जब मुर्तजा से शादी और तलाक के बारे में सवाल किया तो उसने कहा- “अल्लाह के घर में यानी कि जन्नत में बहुत सारी हूरें मिलेंगीं। वहाँ बीवी का क्या काम? अल्लाह के घर जाना है तो सबको छोड़ना होगा।”
कहा जाता है कि जन्नत में 72 हूरें मिलती हैं। कई मौलवी भी यह दवा कर चुके हैं। जन्नत में हूरें कैसी होती हैं इसकी भी मौलवी व्याख्या करते रहते हैं। केरल में मौलाना ईपी अबूबकर कासमी ने जन्नत में मिलने वाले फायदों को बताते हुए दावा किया था कि वहाँ ‘बड़े-बड़े स्तन वाली महिलाएँ’ मिलती हैं। वह पेशाब या शौच भी नहीं करती हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया था कि जन्नत में शराब की नदियाँ बहती हैं, जिसे खुद अल्लाह ने ही बनाया है।
इसी तरह केरल के एक और मौलाना वायरल वीडियो में ‘मैली-कुचैली बीवियों’ के चक्कर में अल्लाह को भूल जाने और ‘सड़ी-गली लड़कियों’ के पीछे इश्क में पागल हो जाने की बातें कही थी। मौलाना ने हूर की खूबसूरती को बयाँ करते हुए कहा था कि उनकी आँखें खूबसूरत और गुलाबी होंगी। उसने कहा था कि मुस्लिम मर्द न सिर्फ हूर को चूम सकते हैं, बल्कि उनके साथ सो भी सकते हैं और एक-एक मर्द को 100-100 मर्दों की ताकत अल्लाह देंगे।
वहीं कुख्यात ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि मर्दों को 72 हूरें मिलना अय्याशी करना नहीं है। वहाँ कोई नापाक नहीं होता। हालाँकि जब उनसे महिलाओं को लेकर सवाल किया गया कि महिलाएँ भी इस्लाम के सारे नियम-कानून का पालन करती हैं, तो उन्हें वहाँ पर वही शौहर मिलता है, जबकि मर्दों को 72 हूरें, ऐसा क्यों? इसका जवाब मौलाना के पास नहीं था। उसने इससे कतराते हुए जवाब दिया कि जन्नत में मुस्लिमों के लिए चीजें रखने वाले अल्लाह से ये सवाल किया जाना चाहिए।
ज्यादातर नौजवानों को आतंकी बनाने के लिए जन्नत और 72 हूरों के सपने दिखाए जाते हैं। यह इस्लामिक कट्टरपंथियों का ब्रेनवॉश करने का बहुत पुराना तरीका है। मुर्तजा अब्बासी ने 3 अप्रैल 2022 को गोरखनाथ मंदिर पर हमला किया था। वह गमछे में धारदार हथियार छिपाकर लाया था। रोके जाने पर उसने पीएसी जवानों को घायल कर दिया था। वह अल्लाहु अकबर के नारे लगा रहा था।
हमला करने वाले मुर्तजा अब्बासी के मददगार कौन? गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में सहारनपुर के अब्दुल रहमान का नाम सामने आ रहा है। उसकी गिरफ्तारी को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की बात कही जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 3 अप्रैल 2022 को हमला करने से पहले मुर्तजा अब्बास ने उससे फोन पर बात की थी।
अब्दुल रहमान सहारनपुर के बड़कला गाँव का रहने वाला है। इस गाँव के प्रधान मोतीलाल ने ऑपइंडिया को बताया कि रहमान ज्यादातर छुटमलपुर बाजार में रहता है। छुटमलपुर एक कस्बा है जो सहारनपुर जिले से उत्तराखंड जाने वाली सड़क पर पड़ता है। प्रधान के मुताबिक मंदिर पर हमले के बाद से उनके गाँव में पुलिस का लगातार आना-जाना बना हुआ है।
ऑपइंडिया से बातचीत में छुटमल बाजार के ही निवासी रोहित सैनी से बताया, “रहमान मूल रूप से बड़कला गाँव का निवासी है। उसकी दुकान गाँव के बगल में स्थित छुटमलपुर बाजार में पड़ती है। किराना स्टोर के साथ वो लड़कियों के श्रृंगार के सामान की दुकान भी चलाता है। उसकी दुकान जहाँ है, उस क्षेत्र में अधिकतर मुस्लिम ही रहते हैं। उसका गाँव दुकान से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। यह गाँव फतेहपुर थाना क्षेत्र में आता है।”
आज तक और एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार रहमान की मोबाइल की दुकान है। वह एक मस्जिद में इमाम भी है। प्रधान मोतीलाल ने बताया, “अब्दुल रहमान के अब्बा का नाम अख्तर था। उनकी मौत लगभग 5 साल पहले ही हो गई थी। वो भगवानपुर (सहारनपुर) के मदरसे में पढ़ाते थे। रहमान का भाई सुलेमान है जो गाँव में ही रहता है। ये दोनों भाई भी अपने अब्बा के मदरसे में पढ़ते और पढ़ाते थे। रहमान की अम्मी की भी कुछ दिन पहले मृत्यु हो गई थी। रहमान ज्यादातर छुटमलपुर बाजर में ही रहता था।” रहमान की उम्र लगभग 30 साल है। प्रधान के अनुसार उसका निकाह मेरठ में हुआ है। उसकी बीवी गाँव में ही रहती है। उन्होंने बताया कि गाँव में किसी को भी उसकी इन हरकतों के बारे में नहीं पता था।
अब्दुल रहमान का नाम मुर्तजा से पूछताछ में सामने आया था। लेकिन शुरुआती पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार मुर्तजा के कॉल डिटेल की पड़ताल के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इससे यह बात सामने आई कि हमले वाले दिन भी वह मुर्तजा के संपर्क में था और दोनों की बात हुई थी। सहारनपुर के एसएसपी आकाश तोमर ने इस संबंध में पूछे जाने पर बताया कि एटीएस ने स्थानीय पुलिस से इसके बारे में फिलहाल जानकारी साझा नहीं की है।
यह भी कहा जा रहा है कि मुर्तजा के साथ वह नेपाल भी गया था। अब्दुल रहमान के भी सीरिया से संपर्क बताए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मुर्तजा के लिंक भी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से मिले हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार हमले के बाद उसकी योजना नेपाल के रास्ते सीरिया भागने की ही थी। 3 अप्रैल को आईआईटी से केमिकल इंजीनियर 30 वर्षीय अहमद मुर्तजा अब्बासी ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों हमला कर दिया था। इस हमले में पीएसी के दो कॉन्स्टेबल घायल हो गए थे। अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर उसके हथियार को जब्त कर लिया था। अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे पता चला है कि उसके आईएसआईएस से लिंक थे। उसने बीते डेढ़ साल में लगभग 8 लाख रुपए नेपाल के बैंकों के माध्यम से ISIS का गढ़ कहे जाने वाले सीरिया भेजे थे।
पूर्वांचल की राजनीति में कभी हरिशंकर तिवारी की बोलती थी तूती (फाइल फोटो) पूर्वांचल की राजनीति में एक व्यक्ति ऐसा हुआ है, जिसने हर दलों की सरकार में अपना प्रभाव कायम किया और लंबे समय तक इलाके में प्रभावशाली बने रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने परिवार के कई सदस्यों को भी विधायक और सांसद से लेकर ऊँचे-ऊँचे पदों तक पहुँचाया। वो नाम है हरिशंकर तिवारी, जिन्होंने क्राइम से लेकर राजनीति तक की पिच पर बैटिंग की और गोरखपुर में गोरखनाथ मठ के अलावा सत्ता का कोई और केंद्र था तो वो था ‘हाता’, उनका घर।
राजनीति में लंबे समय तक रहा हरिशंकर तिवारी का दबदबा, परिवार के अन्य लोग भी बड़े-बड़े पदों पर
हरिशंकर तिवारी ने चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से 1985 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद उन्होंने 1989, 91 और 93 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। पाँचवी बार वो ‘ऑल इंडिया इंदिरा कॉन्ग्रेस (तिवारी)’ के टिकट पर जीते। 2002 में उन्होंने इसी क्षेत्र से ‘अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कॉन्ग्रेस’ के टिकट पर लगातार छठी बार जीत का स्वाद चखा। 2017 में उन्होंने होने बेटे विनय शंकर तिवारी को बसपा का टिकट दिला कर इस सीट से विधायक बनवाया।
वहीं उनके एक अन्य बेटे भीष्म शंकर तिवारी संत कबीर नगर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए थे। 2009-14 लोकसभा के काल में वो सांसद रहे थे। हरिशंकर तिवारी की छवि एक गैंगस्टर की रही है। उनका पैतृक गाँव चिल्लूपार के ही टांडा में है। हरिशंकर तिवारी के नाम एक रिकॉर्ड दर्ज है कि वो जेल में से चुनाव जीतने वाले पहले गैंगस्टर हैं। उन्हें कभी उत्तर प्रदेश का सबसे प्रभावशाली ‘ब्राह्मण चेहरा’ माना जाता था। 1997 में उन्होंने अन्य नेताओं के साथ मिल कर ‘अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कॉन्ग्रेस’ का गठन किया था।
मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव हों या फिर कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता हों या फिर राजनाथ सिंह, चाहे वो मायावती ही क्यों न हों – उन्होंने इन सभी की सरकारों में मंत्री पद सँभाला। उनके भतीजे गणेश शंकर पांडेय उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति के पद तक पहुँचे। अब चलते हैं थोड़ा पीछे, जब पूर्वांचल को गैंगवॉर का इलाका माना जाता था। 1980 के दशक में ही हरिशंकर तिवारी ने राजनीति का अपराधीकरण शुरू कर दिया था। हालाँकि, 2007 और 2012 के चुनावों में उन्हें अपने गढ़ में ही हार झेलनी पड़ी थी।
पूर्वांचल में अपराध की शुरुआत और माफियाओं के बीच गैंगवॉर
पूर्वांचल में ये वो दौर था, जब छात्रों को अपराध से जोड़ने का काम शुरू हुआ। जो जितना तेज़-तर्रार और अव्वल होता था, उसे माफिया गिरोह में लाने की उतनी ही ज्यादा कोशिश होती थी। हरिशंकर तिवारी का कहना है कि उन्हें राजनीति में इसीलिए आना पड़ा, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने उस पर झूठे केस चला कर उन्हें जेल भिजवा दिया था। वो पहले से ही कॉन्ग्रेस के सदस्य थे और इंदिरा गाँधी के साथ काम करने का अनुभव भी उनके पास था।
80 के दशक में उनके ऊपर 26 मामले दर्ज थे। इसमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, छिनौती, रंगदारी, वसूली और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित कई मामले शामिल थे। लेकिन, आज तक किसी भी मामले में उन्हें न्यायालय ने दोषी नहीं करारा। 80 का दशक वो था, जब पूर्वांचल में विकास के नाम पर कई योजनाओं के टेंडर जारी हुए और उनके लिए अपराधियों में भिड़ंत हुई। हरिशंकर तिवारी धीरे-धीरे पूरे पूर्वांचल के ठेके अपने पास लेने लगे।
रेलवे, कोयला सप्लाई और खनन से लेकर शराब तक के ठेकों पर उनका ही राज चला करता था। उन्होंने लोगों के बीच अपनी ‘रॉबिनहुड’ वाली छवि बना ली। वो बार-बार जीत कर विधानसभा पहुँचते रहे और मंत्री बनते रहे, उधर आरोप लगते रहे। उनकी उम्र फ़िलहाल 85 वर्ष है और 2012 की हार के बाद उन्होंने चुनाव लड़ना बंद कर दिया। गोरखपुर के जटाशंकर मोहल्ले में उनका एक किलानुमा घर है। पूर्वांचल में कभी इसी ‘हाता’ में दरबार लगा कर अधिकतर फैसले लिए जाते थे।
वो ऐसा समय हुआ करता था, जब हरिशंकर तिवारी का नाम किसी पार्टी के साथ जुड़ते ही पूर्वांचल में उसकी किस्मत बदल जाती थी। गाजीपुर से लेकर वाराणसी तो बाद में माफियाओं का केंद्र बना, लेकिन हरिशंकर तिवारी ने गोरखपुर से ही इसकी शुरुआत की। गोरखपुर को उस समय जातीय हिंसा की आग में झोंक दिया गया था। लोग आज भी उन्हें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अपराधीकरण के लिए जिम्मेदार मानते हैं। इसी वजह से श्रीप्रकाश शुक्ला नाम के कुख्यात शूटर का भी जन्म हुआ।
कहा जाता है कि चालाक हरिशंकर तिवारी ने हमेशा फ्रंटफुट पर खेलने की बजाए पर्दे के पीछे से बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देने में दक्षता हासिल की। राजपूत बनाम ब्राह्मण का एक नया संघर्ष शुरू हो गया। लेकिन, अपने शातिर दिमाग के कारण वो हर पार्टी के चाहते बने रहे। उन्होंने एक माफिया से लेकर यूपी की राजनीति के ‘पंडित जी’ तक का सफर तय किया। गैंगवॉर से पहले तब लोगों में ऐलान कर दिया जाता था कि कोई घर से न निकले। बाहर गोलियाँ चलती थीं और लाशें गिरती थीं।
उन्होंने 1985 में जेल से पहले चुनाव ही निर्दलीय जीता था, वो भी भारी अंतर से। जब जगदम्बिका पाल एक दिन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, तब भी हरिशंकर तिवारी उनकी कैबिनेट में थे। राजपूत नेता वीरेंद्र प्रताप शाही के साथ उनका गैंगवॉर कुख्यात है। वर्चस्व की लड़ाई के लिए इन दोनों के बीच खूनी खेल चलता रहता था। वीरेंद्र शाही को मठ से भी समर्थन मिला था। बता दें कि इन दोनों पर लगाम कसने के लिए ही पहली बार गैंगस्टर एक्ट लागू हुआ था।
योगी सरकार के आने के बाद ‘हाता’ में भी पड़े छापे
अब स्थिति ये है कि इनका कुछ खास राजनीतिक प्रभाव बचा नहीं है, लेकिन ब्राह्मण चेहरा के नाम पर गुलदस्ते की तरफ पार्टियाँ इन्हें अपनी तरफ करना चाहती हैं। दिसंबर 2021 में उनके परिवार ने सपा का दामन थाम लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के साथ ही जब माफियाओं पर कार्रवाई शुरू हुई, तो हरिशंकर तिवारी भी नहीं बचे। उनके घर पर पाँच थानों की पुलिस ने छापेमारी की। ‘तिवारी हाता’ में तलाशी ली गई। ये मामला खोराबार के जगदीशपुर में मार्च 2017 में रिलायंस पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से 98 लाख रुपए की लूट से जुड़ा है।
इस मामले में जिस छोटू चौबे को गिरफ्तार किया गया था, उसने किसी सोनू पाठक का नाम लिया। इस व्यक्ति की लोकेशन हरिशंकर तिवारी के घर पर मिली थी। इस आधार पर उनके घर आधे घंटे की छापेमारी हुई थी। वहाँ से 6 लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। तिवारी परिवार ने इसे मुद्दा भी बनाया था और हरिशंकर तिवारी सड़क पर उतर गए थे। भारी भीड़ के कारण कई थानों की पुलिस लगानी पड़ी थी। उनके बेटे विजय के ठिकानों पर CBI की छापेमारी हो चुकी है।
CBI ने लखनऊ, गोरखपुर और नोएडा के उनके ठिकानों पर रेड मारी थी। ये मामला बैंक लोन घोटाले से जुड़ा था। ये घोटाला 1500 करोड़ रुपए का है। ‘गंगोत्री इंटरप्राइजेज’ नामक की कंपनी का विधायक विनय शंकर तिवारी से सम्बन्ध बताया गया था। आरोप है कि इस कंपनी ने लोन हड़प किसी दूसरे जगह लगा दिया। मोदी लहर में भी उन्होंने 2017 में जीत दर्ज कर ली थी। उनके विधानसभा क्षेत्र में इस बार भी मुकाबला कड़ा होने वाला है और सबकी नजर इस परिवार पर है।
योगी-मोदी विरोधी पत्रकारों को लगता है किसी भी करवट नींद नहीं आ रही। ये वही पत्रकार हैं जो हिन्दू होते हुए भी अयोध्या में राममंदिर के विरुद्ध जहर उगलने से नहीं कभी नहीं चुके, हमेशा छद्दम धर्म-निरपेक्षता की चादर ओढ़ सच्चाई को छुपाकर तुष्टिकरण की पत्रकारिता करते रहे और आज भी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ किस क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरेंगे ये कुछ दिन पहले तक एक बहुत बड़ा सवाल बना हुआ था। कुछ लोग अयोध्या सीट को लेकर कयास लगा रहे थे कि संभव है कि वहाँ बीजेपी ने इतना काम करवाया है तो योगी आदित्यनाथ वहीं से अपनी किस्मत आजमाएँ। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ और कल की घोषणा के साथ ये साफ हो गया कि योगी आदित्यनाथ अपनी पुरानी सीट गोरखपुर से ही चुनावी मैदान में उतरेंगे।
इस ऐलान के साथ जहाँ गोरखपुर के लोगों में उत्साह देखने को मिला। वहीं लिबरल धड़े की हिपोक्रेसी भी सामने आई। जो लोग कुछ दिन पहले लंबी-लंबी वीडियोज से आपको ये समझा रहे थे कि आखिर क्यों योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से भाग रहे हैं। वहीं अब उनकी रिपोर्ट हो रही है कि आखिर गोरखपुर से ही योगी आदित्यनाथ क्यों चुनाव लड़ेंगे। इस लिस्ट में अभिसार शर्मा और आशुतोष जैसे पत्रकारों का नाम है। लोग इनकी हिपोक्रेसी देखकर इन्हें ‘द%^ला यूट्यूबर’ कह रहे हैं। इनकी वीडियोज शेयर करके लिखा रहा जा रहा- ‘चित भी मेरी, पट भी मेरी और…’
अभिसार शर्मा जो पहले कह रहे थे कि बीजेपी अयोध्या से योगी को इसलिए चुनाव लड़वा रही है क्योंकि उन्हें लगता है कि जीत का रास्ता सिर्फ कट्टर हिंदुत्तव से ही होकर जाता है। वही अभिसार शर्मा बाद में अपने दर्शकों को ये समझाते नजर आए कि एक तो अयोध्या में समाजवादी पार्टी मजबूत हो रही है इसलिए योगी आदित्यनाथ यहाँ से चुनाव नहीं लड़ रहे और दूसरी बात ये है कि अयोध्या में पिछले दिनों जितने भी कार्यक्रम हुए वहाँ नरेंद्र मोदी ही नजर आ रहे थे इसलिए अब वो नहीं चाहते हैं कि इन कार्यों का श्रेय किसी और को जाए। वह कहते हैं कि अगर सीएम योगी वहाँ से चुनाव लड़ते और जीत जाते तो हो सकता है कि पीएम मोदी को राम मंदिर का सारा श्रेय अपने सीएम के साथ शेयर करना पड़ता।
इसी तरह ‘आशुतोष की बात’ एपिसोड में पहले इस बात पर पैनेलिस्ट बुलाकर चर्चा हुई कि आखिर क्यों योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से क्यों भाग रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि क्या गोरखपुर से चुनाव लड़ने से हिंदुत्व की लहर नहीं खड़ी होगी। क्या सिर्फ अयोध्या से ही इस लहर को कायम किया जा सकेगा। आशुतोष के मुताबिक दो दिन पहले तक लोगों का कहना था कि गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ की हार का खतरा है इसलिए वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते। अब यही आशुतोष अपने हालिया एपिसोड में ये समझाते दिखे थे कि आखिर क्यों वो और उनके जैसे लोग ये मान रहे थे कि योगी अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे।
एक ओर जहाँ गोरखपुर सीट पर सीएम योगी के नाम का ऐलान होने के बाद लिबरल मीडिया अपने अपने ढंग से अपने पुराने प्रोपगेंडा को जस्टिफाई करने के लिए विभिन्न तर्क दे रही है, वहीं सपा के अखिलेश यादव भी इस खबर को सुनकर बयानबाजी करने में पीछे नहीं हैं। गोरखपुर सीट से सीएम योगी को टिकट मिलने के ऐलान के बाद उन्होंने कहा, “कभी कहते थे मथुरा से लड़ेंगे, कभी कहते थे अयोध्या से लड़ेंगे… मुझे ख़ुशी है कि BJP ने पहले ही उनको अपने घर भेज दिया। अब लगता है कि उनको गोरखपुर में ही रहना पड़ेगा उनको वहाँ से वापस आने की ज़रूरत नहीं उनको बधाई।”