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आतंकियों की छवि सुधारने में लगी वामपंथी मीडिया, Al Jazeera-Guardian-CNN ने भी साधी इस्लामी टेरर पर चुप्पी: ‘भगवा’ को बदनाम करने वालों ने क्यों बदला दिल्ली ब्लास्ट पर अपना चश्मा

                       दिल्ली ब्लास्ट पर विदेशी मीडिया और भारतीय मीडिया ने अपना-अपना नैरेटिव गढ़ा
दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी कार ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। वहीं दूसरी ओर इस निंदनीय आतंकी घटना पर वामपंथी मीडिया अपना नैरेटिव चला रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया, द वायर जैसे मीडिया पोर्टल दिल्ली बम धमाके में संदिग्ध मुस्लिमों के प्रति सहानुभूति दिखाकर उनकी छवि सुधारने में लगी हुई है।

उधर, CNN, अल जजीरा(Al Jazeera), द गार्जियन( The Guardian), डॉन (Dawn) जैसे विदेशी मीडिया संस्थानों ने दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट को ‘घातक’ नाम देने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाए। लेकिन यही विदेशी मीडिया संस्थानों ने धड़ल्ले से रिपोर्ट्स छापी कि कैसे भारत की सरकार दिल्ली ब्लास्ट के पीछे ‘साजिश’ तलाश रही है। इन रिपोर्ट्स में तीन एजेंडे साफ नजर आए-

  1. भारत सरकार जबरन मुस्लिमों को दिल्ली ब्लास्ट का आरोपित साबित करने में लगी है।
  2. दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट जैसे ‘घातक’ हमले से पूरा भारत ‘डर’ गया है, यहाँ मोदी सरकार की नाकामी को दर्शाया गया।
  3. सवाल उठाए गए कि क्या भारत अप्रैल में हुए पहलगाम हमले के बाद तय की गई दुश्मन को सीधा जवाब देने वाली नीति पर कायम रहेगा?
इन सवाल और आरोपों के माध्यम से विदेशी मीडिया ने भारत सरकार को जमकर घेरा। यह विदेशी मीडिया का आम तरीका है भारत में मुस्लिम-पीड़ित को साबित करने का और वही घिसा-पीटा मोदी सरकार को ‘भगवा राजनीतिवाद’ दिखाने को और यह दर्शाने का कि मोदी सरकार ने जिन्हें बम धमाके का संदिग्ध बनाया है, इसका कारण केवल उनकी मुस्लिम पहचान है।

वामपंथी मीडिया का आतंकियों की छवि सुधारने का प्रोपेगेंडा

देश की वामपंथी मीडिया ने दिल्ली में आतंकी ब्लास्ट के संदिग्ध डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी की छवि को सुधारने के मिशन पर उतर गई। जैसे उमर नबी एक सीधा व्यक्ति है और उसने अनजाने में दिल्ली में इतना बड़ा ब्लास्ट कर दिया हो।
द वायर ने अपने लेख में पुलवामा में रहने वाले उमर नबी के परिवार की पीड़ा प्रस्तुत की। यह लेख इस तरह लिखा गया है कि पढ़ने पर यह एहसास होता है मानो लेखक आतंक के आरोपों में शामिल लोगों को ‘पीड़ित’ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हो।
                                                              The Wire का लेख

उमर नबी के परिवार में उसके अब्बू के कथनों को प्रमुखता देकर यह दिखाया गया है कि वे अन्याय और दुख झेल रहे हैं, जबकि यह तथ्य नजरअंदाज कर दिया गया है कि इन्हीं का बेटा दिल्ली धमाके का संदिग्ध है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के इस रिपोर्ट की लेखन शैली का अंदाज साफतौर पर दिखाता है कि दिल्ली धमाके का संदिग्ध डॉक्टर मुजम्मिल अहमद ‘पीड़ित’ है। रिपोर्ट में डॉ. मुजम्मिल की कॉलेज सीनियर डॉ. मोनिका लांघेह की प्रतिक्रिया दिखाई गई, वह मुजम्मिल के बारे में जानकर स्तब्ध हुईं हैं और कहती हैं, “एक श्रेष्ठ पद के व्यक्ति को गिरते देखा।” यह रिपोर्ट एक तरह से पाठक में मुजम्मिल के प्रति सहानुभूति जगाती है।

                                                        टाइम्स ऑफ इंडिया का लेख

उधर, भारत की मीडिया में दिल्ली ब्लास्ट में शामिल आतंकी उमर नबी की भाभी और आतंकी मुजम्मिल की अम्मी की ‘विक्टिम कार्ड’ वीडियो भी खूब प्रसारित की।

                                                               हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट

जहाँ उमर नबी की भाभी मुजमिल ने उमर नबी के बचपन और पढाई पर बात करते हुए उसे एक बेहतर बेटे और इंसान के रूप में पेश किया। यह माहौल बनाती है कि लोग सोच सकें- “ऐसा शांत-स्वभाव का व्यक्ति कैसे इतने बड़े आतंक जगत में शामिल हो गया?”

वहीं फरीदाबाद में 360 किलो विस्फोटक और हथियार के साथ पकड़े गए डॉ. मुजम्मिल, जो दिल्ली ब्लास्त का संदिग्ध भी है, उसकी अम्मी ने बेटे को बेगुनाह होने की बाते कहीं और आतंक के आरोपों को पूरी तरह नकारा। इस बयान के हवाले से Mint ने अपनी रिपोर्ट में आंतकी के परिवार को ‘बेबस’ और ‘अन्याय’ झेलने रूप में दर्शाया।

                                                               LiveMint की रिपोर्ट

आतंकी की अम्मी के दुख और भरोसे को, “मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता, हमें तो किसी ने बताया कि उसे पकड़ लिया गया” जैसे बातें लिखकर पाठक के सामने आतंकी की छवि को साफ सुथरी प्रदर्शित करने की कोशिश की गई।

दिल्ली ब्लास्ट पर विदेशी मीडिया का प्रोपेगेंडा

दिल्ली ब्लास्ट पर विदेशी मीडिया ने भी अपने नैरेटिव को आगे बढ़ाया। तमाम तरीके के प्रोपेगेंडा चलाकर ब्लास्ट के दिल्ली धमाके को भारत की नाकामी दर्शाया गया। लेकिन मुस्लिम पहचान वाले संदिग्ध आरोपितों की बात तक नहीं की गई। यहाँ विदेशी मीडिया का इस्लामी कट्टरपंथी सोच सामने आती है। Dawn से लेकर अल जजीरा और द गार्जियन ने धड़ल्ले से दिल्ली ब्लास्ट को कवर करते हुए ऐसी रिपोर्ट्स छापी हैं।

द गार्जियन की इस रिपोर्ट में दिल्ली ब्लास्ट को एक बेहद घातक और डरावना हमला बताया गया है, जिससे पूरे भारत में दहशत फैल गई। लेख की शुरुआत ही इस तरह की भाषा से होती है कि यह घटना भारत की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

                                                              द गार्जियन की रिपोर्ट

अल जजीरा की इस रिपोर्ट में सवाल उठाए गए कि कैसे भारत की मोदी सरकार दिल्ली ब्लास्ट पर इतने आनन-फानन में आरोप लगाने में जुटी हुई है। रिपोर्ट में पीएम मोदी का पहलगाम हमले के बाद दिए गए बयान- आतंकी हमले को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा का हवाला देते हुए सवाल किया कि भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष शुरू किए बिना कथित अपराधियों को दोषी ठहरा दिया है।

                                                                  अल जजीरा की रिपोर्ट

इस रिपोर्ट में दिल्ली ब्लास्ट को लेकर डर और असुरक्षा का माहौल उभारने की कोशिश की गई है। लेख में कहा गया, “दिल्ली धमाका ने पूरे देश को सतर्क कर दिया है।” यानी इस विस्पोट से पूरा देश सतर्क और डर गया है। इस तरह का वाक्य भारत को एक डर से घिरे देश के रूप में दिखाने की कोशिश है और भारत की सुरक्षा व्यवस्था को नाकाम बताने जैसा दावा है।

                                                                 अल जजीरा की रिपोर्ट

अमेरिकन मीडिया CNN ने अपनी इस रिपोर्ट में दिल्ली में आतंकी ब्लास्ट और अगले ही दिन पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुए ब्लास्ट को समान बताने की कोशिश की गई। जबकि असलियत यह है कि दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार संदिग्धों के सीधे संबंध पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से पाए गए हैं। इसके बावजूद भारत ने अब तक पाकिस्तान को बिना ठोस सबूत के दोषी नहीं ठहराया है।

                                                                CNN की रिपोर्ट

उधर, आतंक को पनाह देने वाले पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जो ब्लास्ट हुआ वह एक सुसाइड बॉम्बिंग है। जिसके तार अब तक भारत से दूर-दूर तक जुड़ने के कोई सबूत नहीं है। तब भी पाकिस्तान ने बिना तथ्यों के सीधा भारत पर हमले के आरोप लगा डाले।

दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल

फिर बात करें दिल्ली ब्लास्ट के तारों की और फरीदाबाद में सामने आए आतंकी मॉड्यूल की तो इस ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई कार, विस्फोट और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जाँच में यह साफ हुआ है कि यह एक बड़ा आतंकी नेटवर्क था। जाँच एजेंसियों को फरीदाबाद, सहारनपुर, लखनऊ समेत कुछ जिलों से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, जो सीधे दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ रही है।

इसके अलावा जिस i20 कार से ब्लास्ट हुआ, उसमें बैठा डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी के तार भी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े। उसके दोस्त सज्जाद अहमद और परिवार वालों से पूछताछ की गई तो सामने आया कि वह संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में शामिल था। जाँच एजेंसियों को यह भी शक है कि फरीदाबाद से गिरफ्तार आतंकी मुजम्मिल की गर्लफ्रेंड डॉ. शाहीना का भी दिल्ली ब्लास्ट में बड़ा रोल हो सकता है। डॉ. शाहीना पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला ट्रेनर थी, उसके पास से एके-47 और हथियार बरामद हुए।

यहाँ तक कि भारत सरकार ने दिल्ली ब्लास्ट की घटना को आतंकी हमला बताने में कोई संकोच नहीं किया। सरकार ने कहा कि यह हमला निंदनीय था और पीएम मोदी ने भूटान के मंच से चेतावनी दी कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

दिल्ली ब्लास्ट पर सरकार की कार्रवाई और इस्लामी कट्टरपंथ सोच

दिल्ली ब्लास्ट पर भारत की मोदी सरकार की कार्यवाही जारी है। जाँच एजेंसिया अब तक दोषियों के काफी करीब पहुँच चुकी है। यहाँ तक कि दिल्ली ब्लास्ट के फिदायीन उमर नबी और उसके परिवार पर भी जाँच एजेंसियों ने शिकंजा कसा है। हमले की जाँच में रोजाना नई परते खुल रही हैं। लखनऊ के सहारनपुर से गिरफ्तार डॉ. शाहीन को लेकर भी जाँच एजेंसियाँ बड़ा शक जता रही हैं क्योंकि वह जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर है।

इन सब सबूतों और जाँच से साफ स्पष्ट होता है कि भारत सरकार आतंक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कितनी सक्रिय है। वहीं अब तक कि जाँच से यह भी साफ है कि संदिग्ध आरोपितों की कौम एक ही है। सभी पकड़े गए लोगों की पहचान मुस्लिम ही है। वैसे ये कोई चौंकने वाली बात नहीं है क्योंकि भारत में अब तक जो भी आतंकी हमले या ब्लास्ट हुए हैं उसके पीछे इस्लामी कट्टरपंथी की विचारधारा ही है। फर्क सिर्फ यह है कि इस बार हमला देश के भीतर बैठे इस्लामी कट्टरपंथों के जरिए किया गया है।

विदेशी मीडिया की इस्लामी कट्टरपंथ पर चुप्पी

अब वापस आते हैं विदेशी मीडिया की दिल्ली ब्लास्ट को लेकर छापी गई रिपोर्ट्स पर। यहाँ बड़े-बड़े विदेशी मीडिया संस्थानों ने दिल्ली ब्लास्ट को लेकर बेहतर तरीके से खबरें छापीं और पाठकों को हर मिनट अपडेट किया लेकिन यह सब अपना नैरेटिव ध्यान में रखते हुए किया गया। कहीं दिल्ली ब्लास्ट को ‘घातक’ हमला करार दिया गया तो कहीं भारत की मोदी सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए गए। लेकिन संदिग्धा आरोपितों पर कोई खबरें नहीं छापी गईं, क्योंकि उनकी पहचान ‘मुस्लिम’ थी।

ये बिल्कुल वैसा ही है, जैसे विदेशी मीडिया हमेशा से करती आई है। एक बार फिर विदेशी मीडिया की इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा उजागर हुई है। ये मीडिया CAA, NRC और आर्टिकल 370 को मुस्लिमों के खिलाफ कार्यवाही बताने में नहीं हिचकिचाती है। तब भारत में मोदी सरकार की ‘भगवा राजनीति’ पर बड़े-बड़े लेख लिखे जाते हैं। लेकिन अब जब भारत की राजधानी में आतंकी हमला हुआ और आरोपित मुस्लिम हैं तो वे चुप्पी साधे बैठे हैं।

आरोप लगाए गए कि मोदी सरकार पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अपनी नई नीति को साबित करने के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाने में जल्दबाजी कर रहा है। बता दें जिस नीति की बात हुई वह भारत की आतंकी हमले पर ‘युद्ध की कार्रवाई’ के कड़े संदेश हैं। तो विदेशी मीडिया को जान लेना चाहिए कि भारत अब चुप नहीं बैठता है, यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिया जा चुका है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की बात आएगी तो भारत सबसे आगे रहेगा। इसका उदाहरण भारत की मोदी सरकार URI स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य ऑपरेशन चलाकर दे चुकी है और आगे भी देती रहेगी।

भारत की वामपंथी मीडिया का दोहरा रवैया

यहाँ सिर्फ विदेशी मीडिया तक बात सीमित नहीं हो जाती है। बल्कि भारत के कुछ वामपंथी मीडिया संस्थान भी अपना नैरेटिव गढ़ने के लिए दिल्ली में हुए निंदनीय आतंकी धमाके पर प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर देते हैं। इन मीडिया संस्थानों ने दिल्ली ब्लास्ट के संदिग्ध आरोपितों की छवि सुधारने को लेकर खबरें छापी। लोगों को इस भ्रम में डाला गया कि डॉ. मुजम्मिल और डॉ. उमर नबी जैसे आतंकी है तो आम इंसान ही लेकिन पता नहीं कैसे उन्होंने दिल्ली में ब्लास्ट कर दिया।

आतंकियों की छवि बदलने के लिए छापी गई खबरों का उद्देश्य साफतौर पर पारदर्शी था। वामपंथी मीडिया केवल यह साबित करने में लगी हुई थी कि इस्लामी कट्टरपंथी जैसा कुछ नहीं होता है और मुस्लिम को आतंकी बताना गलत है। इन मीडिया संस्थानों ने यहाँ जाँच एजेंसियों के उन पुख्ता सबूतों को नजरअंदाज किया, जिसमें साफ कहा गया है कि दिल्ली ब्लास्ट एक आतंकी महला था और इतना ही नहीं पकड़े गए आतंकियों ने भी कबूला कि वे इससे भी बड़ी साजिश रच रहे थे।

अब इतना तो साफ हो गया है कि चाहे भारत पर आतंकी हमला हो या युद्ध की स्थिति क्यों न आ जाए। देश का वामपंथी मीडिया अपना मुस्लिम पीड़ित वाला नैरेटिव गढ़ने के लिए आतंकियों को भी सफेद चोला पहनाने में नहीं कतराएगा। वहीं विदेशी मीडिया भी लगातार तथ्यों को जाँचे बिना भारत पर हमलावर रहेगा और इस्लामी कट्टरपंथी की विचारधारा को आगे बढ़ाता रहेगा।

विपक्ष की गुलाम मीडिया प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों को बरगलाया, 5 लाख रूपए की सहायता राशि को बता रही 5,000 रूपए, क्यों?

                          उत्तरकाशी हादसे का जायजा लेने पहुँची सीएम पुष्कर धामी (फोटो साभार: TOI)
आखिर मीडिया विपक्ष की गुलाम बन क्यों विपक्ष की तर्ज पर जनता को गुमराह कर रही है? आखिर इस गुलाम मीडिया को जहर खोलने या फ़ैलाने से क्या मिल रहा है? इस बेशर्म मीडिया को जख्मों पर मरहम लगाने की बजाए नमक छिड़कते शर्म नहीं आयी? एक तो धराली की जनता प्राकृतिक आपदा से परेशान है, क्यों उनकी परेशानी का मजाक उड़ाया जा रहा है? क्या इस गुलाम मीडिया की आत्मा मर गयी है? नेताओं और उनकी पार्टियों को तो गन्दी सियासत करनी है, ये गुलाम क्यों जख्मों पर नमक छिड़क कर कौन-सी सियासत खेल रहे हैं?        

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गाँव में बादल फटने के बाद जो स्थिति पैदा हुई उससे निपटने के लिए धामी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। पीड़ितों को सहायता देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है। खुद मुख्यमंत्री प्रभावित इलाके में जाकर पीड़ितों से मिल रहे हैं, उन्हें मदद का आश्वसन दे रहे हैं। बावजूद इसके मीडिया में एक खबर सामने आई है जिसमें दावा है कि धामी सरकार की ओर से पीड़ितों को मात्र 5000 रुपए दिए गए हैं और वह इससे नाराज होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस खबर की सच्चाई क्या है… आइए जानें और ये भी देखें कि जिन स्थानीयों के नाम पर धामी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं वो जमीन पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

हकीकत यह है कि 05 अगस्त 2025 को धराली गाँव में तबाही के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ितों के लिए शोक संवेदनाएँ व्यक्त की। यहाँ तक की गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना की जानकारी लेने के लिए सीएम से बात की थी। सीएम ने पीड़ितों के लिए ₹5 लाख की सहायता राशि प्रदान करने की भी घोषणा कर दी।

सीएम ने यह जानकारी 09 अगस्त 2025 को एक्स/ट्विटर एक पोस्ट कर दी। उन्होंने लिखा था कि धराली गाँव में आई आपदा से ग्रसित लोगों को ₹5 लाख की राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों के मकान, जमीन, खेती और अन्य नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है, जिसके मुआवजे का वितरण भी हम शीघ्र शुरू करेंगे।

सीएम ने यह जानकारी दी कि 09 अगस्त 2025 को दी और यह भी लिखा कि मुआवजा प्रक्रिय़ा शीघ्र शुरू की जाएगी। लेकिन इस बात को 24 घंटे भी नहीं बीते कि मीडिया में अलग प्रोपेगेंडा चालू हो गया। खबरें फैली कि स्थानीय लोगों को ₹5 हजार की सहायता राशि दी गई, जबकि सीएम ने तो ₹5 लाख का वादा किया था।

इन खबरों को चलाने के लिए शिकार भी घटना से ग्रस्त ग्रामीणों को बनाया गया। खबरें चलाई गई कि ग्रामीण सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि यह दावा एक झटके में झूठा साबित हो गया। जब सीएम धामी को धराली गाँव की ही एक महिला राखी बाँधती नजर आई।

यह वीडियो धराली गाँव में बादल फटने के हादसे के बाद सीएम धामी के दौरे का है। जब एक महिला अपनी साड़ी के पल्लू से कपड़ा फाड़कर सीएम धामी को राखी बाँधती है। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे महिला सीएम को आशीर्वाद दे रही हैं। इस वीडियो से साफ है कि प्रदेश की जनता का सीएम धामी के लिए काफी स्नेह है।

परंतु मीडिया धराली गाँव में प्रदर्शन की खबरें चलाकर प्रोपेगेंडा सेट करना चाहती है कि उत्तराखंड सरकार हादसे के बाद भी पीड़ितों के लिए कुछ नहीं कर रही है। जबकि हकीकत इस वीडियो में साफ दिखती है। प्रदेश की जनता सीएम धामी द्वारा किए गए प्रयासों पर संतुष्ट हैं।

इससे साफ है कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश पर आए हर संकट के लिए तैयार है। सरकार ने घटनास्थल पर हर नजर बनाई हुई थी, खुद प्रदेश के सीएम पल-पल की जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन और NDRF रेस्क्यु टीम से फोन पर जुड़े रहे। घटनास्थल पर जाकर भी ग्रामीणों से बात की। इसके बावजूद मीडिया ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया।

05 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गाँव में बादल फटने से दर्दनाक हादसा हो गया। पहाड़ से तेज बहाव से आए पानी में पूरा गाँव डूब गया। घटना में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 50 लोग अब भी लापता है। घटनस्थल पर रेस्क्यु ऑपरेशन जारी है।

पत्रकारों के बहिष्कार से क्या I.N.D.I.A. सत्ता में आने पर आपातकाल लगाने का संकेत दे रही है?


I.N.D.I. अलायंस अब न्यूज़ एंकरों का सीधे-सीधे बहिष्कार करेगी। गठबन्धन ने ऐसे 14 समाचार एंकरों की एक सूची जारी कर उनका खुलेआम ‘बहिष्कार’ करने का निर्णय लिया है। सूची की एक प्रति गुरुवार, (14 सितंबर, 2023 ) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा औपचारिक रूप से सोशल मीडिया एक्स पर साझा की गई थी। जिसके बाद चर्चा तेज है।

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नज़र आ जाते हैं, जो अभी सत्ता से दूर बैठे I.N.D.I.A गठबंधन ने दिखाने शुरू कर दिए हैं, जो इस गठबंधन के शुभ संकेत नहीं। जो मोदी विरोध से सनातन के विरोध करने के बाद प्रेस की आज़ादी पर आ गया है। देश में लोकतंत्र की दुहाई देने वाली पार्टियां ही आपातकाल की तरह प्रेस पर पाबन्दी लगाकर कौन से लोकतंत्र का पालन कर रहे हैं। जनता को ज्ञात हो, आपातकाल में कांग्रेस सरकार के विरुद्ध समाचार लिखने एवं प्रकाशित करने पत्रकारों और अख़बार पर कार्यवाही की जाती थी। अख़बारों पर सेंसरशिप लगी हुई थी। संजय गाँधी के एक कार्यक्रम में चर्चित गायक किशोर कुमार द्वारा मना करने पर रेडियो और फिल्मों में किशोर कुमार को प्रतिबंधित कर दिया था। गुलज़ार की फिल्म "आंधी" बैन कर दी गयी थी। अभिनेता-निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म "रोटी,कपडा और मकान" से गीत "हाय महंगाई तू कहाँ से आयी, तुझे क्यों मौत आयी...." को बैन करने के साथ-साथ कुछ फिल्में भी सेंसर से पास नहीं होने दी।    

विपक्षी दलों के गठबंधन की मीडिया समिति ने आज एक वर्चुअल मीटिंग करके TV न्यूज़ एंकरों की एक लिस्ट जारी की है। जिसमें विपक्ष ने इन एंकरों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। कांग्रेस  नेता पवन खेड़ा ने गठबंधन के निशाने पर आए समाचार एंकरों के नामों की सूची की एक प्रति साझा करते हुए लिखा, ये वह नाम है जिनके शो पर INDI अलायन्स न अपना कोई प्रतिनिधि भेजेगी और न ही पार्टी अपना कोई भी सन्देश प्रसारित कराएगी।  

सूची में शामिल समाचार एंकरों के नाम : 

  1. अदिति त्यागी-भारत एक्सप्रेस
  2. अमन चोपड़ा-न्यूज़18
  3. अमीश देवगन-न्यूज़18
  4. आनंद नरसिम्हन-न्यूज़ 18
  5. अर्नब गोस्वामी- रिपब्लिक
  6. अशोक श्रीवास्तव-डीडी न्यूज
  7. चित्रा त्रिपाठी- आजतक
  8. गौरव सावंत – इंडिया टुडे
  9. नविका कुमार – टाइम्स नाउ
  10. प्राची पाराशर – इंडिया टीवी
  11. रुबिका लियाकत – भारत 24
  12. शिव अरूर – इंडिया टुडे
  13. सुधीर चौधरी-आज तक
  14. सुशांत सिन्हा
13 सितंबर को एक दिलचस्प फैसले में, गठबंधन समन्वय समिति ने मीडिया पर उप-समिति को गठबंधन द्वारा बहिष्कार किए जाने वाले टीवी एंकरों के नामों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। आई.एन.डी.आई. एलायंस ब्लॉक पार्टियाँ अपने प्रवक्ताओं को उप-समिति द्वारा चयनित एंकरों द्वारा आयोजित शो में नहीं भेजेंगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज INDI अलायंस ने एक ऑनलाइन बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा, “गठबंधन के समन्वय समिति ने मीडिया के उन एंकरों के नाम तय करने के लिए अधिकृत किया था, जिनके शो में INDI अलायंस में शामिल कोई भी पार्टी अपने प्रतिनिधियों को नहीं भेजेगी।” बता दें कि मीडिया के लिए बने वर्किंग ग्रुप में 19 सदस्य शामिल हैं।
अवलोकन करें:-
मीडिया के इस हिट-लिस्ट की घोषणा कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने की। वेणुगोपाल ने 13 सितंबर को विपक्षी गुट के सदस्यों द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के आवास पर एक साथ चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार करने के लिए एक बैठक आयोजित करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि 28 सदस्यों वाली विपक्षी पार्टी के समन्वय समिति में 14 सदस्य हैं और उनमें से भी 12 ने इस बैठक में भाग लिया।