इजरायल ने लगातार दूसरे दिन गाजा पर किए हवाई हमले (फोटो साभार: Arab news) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा में पिछले वर्ष हुए संघर्षविराम समझौते को लागू करने की दिशा में बड़ी प्रगति का दावा किए जाने के बावजूद इजरायल ने रविवार (2 अगस्त 2026) को लगातार दूसरे दिन गाजा पट्टी पर हवाई हमले जारी रखे।
फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इजरायली लड़ाकू विमानों ने गाजा सिटी और मध्य गाजा के दीर अल-बलाह में अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाया।
स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सकों के मुताबिक, दीर अल-बलाह में एक अपार्टमेंट पर हुए हवाई हमले में एक दंपति की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। वहीं गाजा सिटी में एक अन्य अपार्टमेंट पर हुए हमले में एक बच्चे समेत दो लोगों की जान चली गई।
इन हमलों ने ऐसे समय में तनाव और बढ़ा दिया है, जब अमेरिका की मध्यस्थता में संघर्षविराम समझौते को लागू करने की कोशिशें तेज होने का दावा किया जा रहा है।
संघर्षविराम लागू करने की कोशिशें, लेकिन हथियारों और सैन्य वापसी पर बना गतिरोध
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि गाजा में संघर्षविराम समझौते को लागू करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उनका कहना था कि अमेरिकी समर्थन वाली पहल के तहत हमास ने अपने हथियार छोड़ने पर सहमति जताई है।
इसके बाद ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने संघर्षविराम समझौते को लागू करने के अंतिम चरणों का विवरण देते हुए 15 बिंदुओं वाला एक रोडमैप भी जारी किया। हालाँकि यह रोडमैप अभी तक लागू नहीं हो सका है।
हमास ने स्पष्ट किया है कि वह अपने हथियार केवल सुरक्षित भंडारण के लिए तभी सौंपेगा, जब इजरायल पिछले वर्ष हुए समझौते के अनुरूप अपने सैन्य अभियान बंद करेगा और गाजा से अपनी सेना वापस बुलाएगा।
दूसरी ओर एक इजरायली अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा कि जब तक हमास का ‘वास्तविक निरस्त्रीकरण’ (Genuine disarmament) नहीं होता, तब तक इजरायल अपनी मौजूदा सैन्य तैनाती से पीछे नहीं हटेगा।
नेतन्याहू की चुप्पी, बेन-गवीर का विरोध और मोहम्मद दहलान का बड़ा दावा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी पहल पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने इस पहल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि इजरायल को हमास के नेताओं के खिलाफ लक्षित हमले जारी रखने चाहिए।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे फतह के पूर्व वरिष्ठ नेता मोहम्मद दहलान ने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और इस पहल से जुड़े वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर ने उन्हें बताया है कि वह गाजा पर इजरायली हमले रुकवाने के लिए इजरायली पक्ष के साथ काम कर रहे हैं।
दहलान ने कहा कि अमेरिका के साथ संपर्क लगातार जारी है ताकि संघर्षविराम समझौते को पूरी तरह लागू कराया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि इजरायल गाजा पर अपने दैनिक हमले पूरी तरह बंद करता है या नहीं।
ख्वाजा आसिफ के बिगड़े बोल पर इजरायली PM नेतन्याहू ने लताड़ा (फोटो साभार : NDTV) इजरायल और पाकिस्तान के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई है। विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को इंसानियत के लिए ‘अभिशाप’ और ‘कैंसर’ कह दिया। इस पर पलटवार करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर ने कड़ा बयान जारी किया है। नेतन्याहू ने कहा कि किसी देश की सरकार से इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकती, खासकर उस देश से जो शांति के लिए बिचौलिया बनने का दावा करता हो। बता दें कि पहली बार इजरायल ने सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान को एक ‘आतंकवादी देश’ करार दिया है।
इजराइल से फटकार पड़ते ही डरपोक आसिफ ने पोस्ट डिलीट कर दिया। आखिर पाकिस्तान कितना नीचे गिरेगा? इजराइल द्वारा पाकिस्तान को 'आतंकी देश' घोषित करना बहुत बड़ी बात है। जो पाकिस्तान को बर्बादी की ओर धकेल देगा। इसमें कोई शक भी नहीं आतंकियों की पनाहगार बने पाकिस्तान को मुस्लिम मुल्कों से इसी बात की ही ज़कात मिलती है। और उस ज़कात पर पाकिस्तान हुक्मरान आवाम को पागल बनाकर ऐश करते हैं। विदेशों में बैंक खातों में धन जमा कर पाकिस्तान को भुखमरी में डाल रखा है।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने क्या कहा था?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट डाला था। ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को ‘बुराई’ और ‘इंसानियत के लिए श्राप’ बताया। ख्वाजा आसिफ ने लिखा कि जब इस्लामाबाद में शांति की बातें हो रही हैं, तब इजरायल लेबनान में नरसंहार कर रहा है।
ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में मासूमों का खून बहाया जा रहा है। उन्होंने इजरायल को एक ‘कैंसर वाला देश’ बताते हुए ‘वे नरक में जलें’ जैसे विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया।
नेतन्याहू का जवाब, पाकिस्तान पर भरोसा नहीं
पाक रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को मोर्चा संभाला। इजरायल की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा इजरायल को मिटाने की बात करना बेहद अपमानजनक है। इजरायल ने पाकिस्तान की साख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो देश खुद को शांति का दूत बताता हो, उसके मुँह से ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं।
इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह शांति वार्ता में पाकिस्तान को एक भरोसेमंद खिलाड़ी नहीं मानता। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि अमेरिका भले ही अपने कारणों से पाकिस्तान की मदद ले रहा हो, लेकिन इजरायल पाकिस्तान को क्रेडिबल (भरोसेमंद) नहीं मानता। उन्होंने इसकी तुलना कतर और तुर्की जैसे देशों से की, जिन्हें इजरायल समस्या पैदा करने वाला मानता है। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अमेरिका के साथ तालमेल बिठाकर ही आगे बढ़ना चाहता है।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और सीरिया के राष्ट्रपति अल शारा (फोटो साभार: एकरेकेटर) पश्चिम एशिया एक बार फिर संकट के मुहाने पर है। दक्षिणी सीरिया के सुवेदा में दो समुदायों ड्रूज (Druze) और बेडौइन के बीच स्थानीय संघर्ष के रूप में शुरू हुआ विवाद अब क्षेत्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। इजरायली फाइटर प्लेन ने सीरियाई क्षेत्र में 160 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं।
इस हमले का कारण सीरिया की नई सरकार द्वारा ड्रूज अल्पसंख्यकों के विरुद्ध की गई क्रूर कार्रवाई थी। इसके तहत कई ड्रूज नागरिकों की सामूहिक हत्या की गई। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी हैं। ड्रूज समुदाय का इजरायल से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ता है।
इन्हीं घटनाओं के बाद इजरायली वायुसेना ने सीरिया पर 160 से ज्यादा हवाई हमले किए। इजरायल ने यह कार्रवाई सिर्फ आत्म-रक्षा के लिए नहीं, बल्कि मानवीय सहायता के तहत भी की ताकि ड्रूज समुदाय को बचाया जा सके। हालाँकि यह हमला केवल ड्रूज की सुरक्षा तक सीमित नहीं था। इजरायल ने इस मौके का इस्तेमाल सीरियाई सेना को नुकसान पहुँचाने और इजरायल व सीरिया के बीच एक बफर जोन बनाए रखने के लिए भी किया।
गौर करने वाली बात यह है कि इजरायल ने राजनीतिक कारणों से सीरिया में एक पूर्व जिहादी को राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार किया था। लेकिन इस हमले के जरिए इजरायल ने साफ कर दिया कि वह सीरियाई सरकार द्वारा धार्मिक और जातीय हिंसा को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
दरअसल बेंजामिन नेतन्याहू आतंकियों पर कार्यवाही करने का साहस इसलिए कर पा रहे हैं क्योकि वहां भारत की तरह दोगला और देश-विरोधी विदेशियों के हाथ की कठपुतली वाला विपक्ष नहीं है। Operation Sindoor में विपक्ष पाकिस्तान की बोली बोल वहां की सुर्खियां बन अपने ही देश की सरकार और सेना को घेरने में लगा रहा। पाकिस्तान अपने डोसियर में भारत के इन दोगले नेताओं के बयानों का उल्लेख कर रहा था। Operation Sindoor से पाकिस्तान से ज्यादा चोट और चीखा-चिल्ली भारत के दोगले नेताओं की निकली है।
कौन हैं ड्रूज और क्यों है इजरायल को उनकी परवाह ?
ड्रूज एक छोटा लेकिन एकजुट मजहबी समुदाय हैं। इनकी शुरुआत 10वीं सदी में इस्माइली शिया इस्लाम से हुई थी। हालाँकि समय के साथ यह समुदाय एक अलग मजहबी और जातीय पहचान बन गया है। ये लोग मुख्य रूप से सीरिया, लेबनान और इजरायल के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं।
वे इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) में सेवा करते हैं, समाज में सक्रिय भूमिका निभाते हैं और देश के प्रति वफादार नागरिक माने जाते हैं। उनकी पहचान इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। दक्षिणी सीरिया में, खासकर स्वैदा (Suwayda) नामक इलाके में ड्रूज लोग रहते हैं।
यह इलाका इजरायल के गोलान हाइट्स के पास है और लंबे समय से इजरायल और सीरियाई जिहादी समूहों के बीच एक बफर जोन का काम करता रहा है। यहाँ अस्थिरता इजरायल के लिए सिर्फ एक मानवीय संकट नहीं, बल्कि एक रणनीतिक खतरा भी है। अगर इस इलाके से बेडुइन (Bedouin) जनजाति के लोगों के रुप एक और दुश्मन मोर्चा खुलता है तो यह इजरायल के लिए अस्वीकार्य है।
हाल ही में जब एक बेडुइन जनजाति ने स्वैदा में एक चेकपोस्ट बनाई और एक ड्रूज व्यक्ति पर हमला किया, तो जवाबी कार्रवाई शुरू हो गई। इसके बाद अपहरण, हत्या और बदले की कार्रवाइयों का सिलसिला चल पड़ा। सीरियाई सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप किया, लेकिन वो तटस्थ नहीं रही। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियाई सेना ने बेडुइन पक्ष का साथ दिया, जिससे हिंसा और बढ़ गई। कुछ ही दिनों में 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें 27 ड्रूज नागरिकों को बेरहमी से मारने की खबरें सामने आईं।
इजरायल ने कई बार दमिश्क (सीरियाई सरकार) को चेतावनी दी कि वे ड्रूज लोगों को निशाना बनाना बंद करें, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। जब ड्रूज लोगों की हत्याओं के वीडियो सामने आने लगे और इजरायल के अंदर से ड्रूज स्वयंसेवक अपने लोगों की मदद के लिए सीमा पार करने लगे, तब IDF ने हस्तक्षेप किया।
पूर्व जिहादी के हाथ से निकल रही सीरिया की व्यवस्था
सीरिया के वर्तमान राष्ट्रपति और पूर्व जिहादी अल-शरा के पास अपने देश के लिए एक सुनहरा मौका था। वे लंबे समय से प्रतिबंधों का सामना कर रहे सीरियाई समाज को शांति, समृद्धि और निवेश के साथ एक नई दिशा दे सकते थे।
सऊदी अरब, तुर्की, और कुछ हद तक इजरायल और अमेरिका जैसे देश किसी न किसी कारण से उनके प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं। उन्हें यह परिस्थिति समझनी चाहिए और अपने लोगों की रक्षा करनी चाहिए थी, न कि समाज में हिंसा को बढ़ावा देना चाहिए था। लेकिन जो कुछ ड्रूज अल्पसंख्यकों पर हो रहा है, वह कुछ और ही कहानी बताता है।
इजरायल की कई चेतावनियों के बावजूद अल-शरा ने इन हमलों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उल्टा उनकी सेनाएँ इस हिंसा का समर्थन करती दिखीं। इसके बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिका ने किया हस्तक्षेप लेकिन यह इतना भी आसान नहीं
अमेरिका ने अब हस्तक्षेप करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। लेकिन उसकी स्थिति थोड़ी जटिल है। सीरिया अमेरिका के खेमे में नहीं आता। फिर भी हाल के वर्षों में तुर्की और सऊदी अरब के कहने पर अमेरिका ने सीरिया के राष्ट्रपति अल-शरा से बातचीत की थी।
उस समय ट्रंप पश्चिम एशिया के दौरे पर थे। तुर्की की चिंता थी कि शरणार्थियों की आमद कम हो, जबकि सऊदी अरब चाहता था कि सीरिया को एक बड़े सुन्नी गठबंधन में शामिल किया जाए। हालाँकि इसका मतलब यह नहीं है कि अब सीरिया अमेरिका का मित्र बन गया है। दरअसल यहीं पर ‘ब्लॉक थ्योरी’ काम नहीं करती। आज की दुनिया में गठबंधन वैचारिक नहीं बल्कि लेन-देन के हिसाब से बनते हैं।
उदाहरण के तौर पर भारत अगर चीन से बातचीत कर रहा है, तो इसका ये मतलब नहीं कि वो चीन के साथ हो गया है। वैसे ही अमेरिका का सीरिया से संपर्क भी भरोसे पर नहीं बल्कि अस्थायी जरूरतों पर आधारित है।
‘ग्रेटर इजरायल’ की तरफ बढ़ रहा यहूदी राष्ट्र
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम इजरायल की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इसे कुछ लोग ‘ग्रेटर इजरायल’ की सोच कहते हैं। हालाँकि यह सिद्धांत अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।
हालाँकि मौजूदा हकीकत यह है कि इजरायल अपनी सीमाओं के आस-पास स्थिर और सुरक्षित बफर जोन बनाना चाहता है, खासकर उन इलाकों में जहाँ उसकी अपनी अल्पसंख्यक आबादी, जैसे कि ड्रूज समुदाय रहता है। ड्रूज समुदाय की रक्षा कर के इजरायल न सिर्फ नैतिक बढ़त हासिल करता है, बल्कि सीरिया के एक रणनीतिक क्षेत्र में अपना प्रभाव भी बढ़ाता है।
इजरायल का मकसद कोई क्षेत्र छीनना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसके दुश्मन इन इलाकों पर प्रभावी न हों। फिलहाल अमेरिका के राजदूत टॉम बैरक ने जानकारी दी है कि इजरायल और सीरिया ने युद्ध विराम पर सहमति जताई है। लेकिन इजरायल ने साफ कहा है कि अगर ड्रूज समुदाय पर दोबारा हमला हुआ, चाहे वो हमला उसकी सीमाओं के बाहर ही क्यों न हो तो वह सैन्य कार्रवाई करेगा।
भारत में आतंकवादियों का सम्मान से नाम लेने, देर रात उनकी फांसी रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट खुलवाना, सुप्रीम कोर्ट द्वारा वृद्ध मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता मिलने के फैसले को संसद से बदलवाने पार्टी ईरान और गाज़ा पर रो कर क्या साबित करना चाहती है? खामेनेई के सत्ता सँभालने से ईरान की महिलाएं अपना जीवन जी रही थी, लेकिन खामेनेई संम्भालते ही महिलाओं को बुर्के में कैद करना वहां की महिलाओं को पसन्द नहीं आया। काफी समय से खामेनेई के हटने की दुआएं मांगी जा रही थी। कट्टरपंथी सोंच का विरोध करने कई बार महिलाओं ने प्रदर्शन किए, सड़क पर प्रदर्शन करते बुर्के और हिजाब को हवा में उड़ाया और बाल भी काटे। लगता है ईरानी महिलाओं की दुआ का असर है कि खामेनेई पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
‘मेक ईरान ग्रेट अगेन’ ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ये बयान दिया था। दरअसल अमेरिका ऐसा कह कर ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना तलाश रहा है।
अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, “सत्ता परिवर्तन शब्द का उपयोग करना राजनीतिक रूप से सही नहीं है, लेकिन अगर वर्तमान शासन ईरान को फिर से महान बनाने में समर्थ नहीं है, तो सत्ता परिवर्तन क्यों नहीं होगा?? MIGA (Make Iran Great Again)!”
अमेरिका ने ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई को सत्ता से हटाने की कई बार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोशिश की है। लेकिन मुस्लिम शिया धर्म के सुप्रीम लीडर खामेनेई को हटाना संभव नहीं हो सका। इस वक्त भी ईरान में सत्ता परिवर्तन की माँग उठ रही है। खुद खामेनेई के परिवार से इसकी माँग उठने लगी है।
कौन हैं महमूद मोरदखानी
महमूद मोरादखानी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के भतीजे हैं। वह 1986 में ईरान छोड़कर फ्रांस चले गए थे और निर्वासन की जिंदगी जी रहे हैं। महमूद मोरदखानी ने कहा है कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ईरानी सरकार का खात्मा ही यहाँ स्थायी शांति के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा, ” जो भी इस शासन को मिटा सके, वह जरूरी है।” उनका मानना है कि कई ईरानी लोग खामेनेई के कमजोर होने से ईरान में खुश हैं।
कौन हैं रजा पहलवी
ईरान के पूर्व शहजादे रजा पहलवी ने भी शासन में बदलाव पर जोर दिया है। उनका कहना है कि तेहरान में सत्ता पतन जरूरी है।
रजा पहलवी ईरान के अंतिम पहलवी शासक मोहम्मद शाह पहलवी के बड़े बेटे हैं। उनका परिवार अमेरिका में निर्वासन की जिंदगी गुजार रहा है। 1979 में देश छोड़कर भागे पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी इस वक्त काफी सक्रिय हैं।
रजा अमेरिका में रहते हैं और खुद को ईरान के शासक के रूप में देखना चाहते हैं। 2016 में पहली बार जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने थे तो शाह ने ईरान में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने और लोकतंत्र की बहाली की वकालत की थी।
इसके बाद फिर जब ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बने तो पहलवी ने ईरान में लोकतंत्र की वकालत करते हुए पश्चिमी राष्ट्रों से उसके संबंध सुधारने पर जोर दिया था। अब जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया तो वह इजरायल का पक्ष लेते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि ईरान में अभी कई ऐसे लोग हैं जो इजरायल के इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं और खामनेई को सत्ताच्युत करना चाहते हैं।
माना जा रहा है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन में रजा पहलवी को समर्थन दे सकते हैं और ईरान में लोकतंत्र की स्थापना की पहल कर सकते हैं। हालाँकि खामनेई ने अपने विकल्प के तौर पर तीन उत्तराधिकारियों को चुन लिया है। ये तीनों ही मौलवी हैं यानी ईरान को इस्लामिक राष्ट्र बनाए रखने की व्यवस्था खामेनेई ने कर दी है।
खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर उतरे कई संगठन
ईरान में अभी कई संगठन एक्टिव हैं जो चाहते हैं कि सत्ता परिवर्तन हो। इनमें पीपुल्स मुजाहिदीन या मोजाहिदीन ए खल्क यानी एमईके, ग्रीन मूवमेंट प्रमुख हैं। एमईके ऐसा संगठन है जिसे गोरिल्ला युद्ध लड़ने में महारत हासिल है। लेकिन अमेरिका इसे नहीं पसंद करता क्योंकि ये संगठन रूस के नजदीक रहा है। अमेरिका विरोध के बावजूद खामेनेई को उखाड़ फेंकने की कोशिश में ये संगठन लगा हुआ है।
दरअसल खामेनेई ने ही इस संगठन को कुचला था। धीरे-धीरे खुद को खड़ा करने के दौरान संगठन अमेरिका के संपर्क में भी आ गया। इस दल के नेता को अल्बानिया में स्थापित करने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई। हालाँकि आज की तारीख में ये कहना काफी मुश्किल है कि संगठन ईरान की इस्लामिक सत्ता को उखाड़ फेंकने में सक्षम है।
ग्रीन मूवमेंट ईरान में 2009 में सुर्खियों में आया। राष्ट्रपति चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए संगठन ने आंदोलन चलाया। देश में लोकतांत्रिक सुधारों की बात करने वाला ये संगठन खामेनेई को सत्ता से हटाना चाहता है और अक्सर विरोध प्रदर्शन करता रहता है।
इस संगठन ने 2010 में बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। इस्लामिक राष्ट्र का विरोध करने के कारण इसके आंदोलन को दबा दिया गया और इसके नेताओं को गिरफ्तार किया गया। आज की परिस्थिति में ये उम्मीद करना मुश्किल है कि ये संगठन ईरान में इस्लामिक सत्ता को हटा सकता है।
खामेनेई के विरोध में महिलाएँ
ईरान में इस्लामिक शासन के दौरान वर्षों से महिलाओं का दमन किया जाता रहा है। हिजाब के खिलाफ महिलाएँ सड़कों पर उतरती रही हैं और सरेआम इसे उतार कर फेंकती रही हैं। विरोध प्रदर्शन में हिजाब जलाना, खामेनेई की तस्वीर जलाकर ‘मुल्ला भाग जाओ’ का नारा बुलंद करना आम रहा है। अब इन महिलाओं को खामेनेई को सत्ता से हटाने का विकल्प सामने दिखने लगा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस का बयान
इधर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान में सत्ता परिवर्तन पर बड़ा बयान दिया। उनका कहना है कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना चाहते हैं। वे सत्ता परिवर्तन नहीं चाहते।
🚨VP Vance emphasizes the need for peace following US air strike on Iran’s nuclear facilities:
“Our national interest is for Iran not to get a nuclear weapon...If the Iranians want to enlarge this by attacking American troops I think that would be a catastrophic mistake.” pic.twitter.com/EIx4hYZdhC
अमेरिका और इजरायल के अलावा भी कई देश हैं जो खामेनेई को सत्ता से बेदखल होते हुए देखना चाहते हैं। इनमें इराक, सऊदी अरब, लेबनान, मिस्र जैसे पड़ोसी इस्लामिक देश भी शामिल हैं। दरअसल इन राष्ट्रों का झगड़ा शिया-सुन्नी को लेकर है। ईरान एकमात्र शिया इस्लामिक देश है, जबकि बाकी देश सुन्नी इस्लामिक राष्ट्र हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (बाएँ), ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई (बीच में), अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (दाएँ), (फोटो साभार : ABC, Mint & The Economic Times) इजरायल और ईरान के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब अपने पाँचवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर गुजरते दिन के साथ ईरान की आक्रामकता मिडिल ईस्ट में अशांति बढ़ा रही है। इस संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की राजधानी तेहरान को तुरंत खाली करने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे दुनिया भर में इस क्षेत्र में ईरान के बढ़ते खतरे की गंभीरता समझ में आ रही है।
वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को जान से मारने की धमकी देकर साफ कर दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। दोनों नेताओं की यह दृढ़ता साफ तौर पर ईरान की आतंकी गतिविधियों और परमाणु महत्वकांक्षा पर लगाम लगाने की ओर इशारा कर रही है, जिससे मिडिल ईस्ट में स्थिरता की उम्मीद जगी है।
तेहरान खाली करो- ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर न करने को लेकर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान का यह रवैया मूर्खतापूर्ण है और इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “ईरान को उस ‘समझौते’ पर हस्ताक्षर करने चाहिए थे, जिस पर साइन करने के लिए मैंने उनसे कहा था। लोगों का मारा जाना कितने शर्म की बात है। साफ शब्दों में कहूँ तो, ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं रख सकता है। मैंने यह बार-बार कहा है। सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए।”
हालाँकि, अमेरिकी प्रवक्ता एलेक्स फिफर और पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने साफ किया है कि अमेरिका अभी तक किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है और उसकी सेनाएँ सिर्फ आत्मरक्षा के लिए तैयार हैं।
लेकिन ट्रंप का राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) को सिचुएशन रूम तैयार रखने का आदेश यह बताता है कि अमेरिका इस स्थिति को कितनी गंभीरता से ले रहा है और ईरान के खतरे को रोकने के लिए बड़े फैसलों की जरूरत पड़ सकती है।
‘खामेनेई को मार डालो’-नेतन्याहू
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को सीधे तौर पर निशाना बनाने की बात कहकर सबको चौंका दिया है। एबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि खामेनेई को निशाना बनाना संघर्ष को बढ़ाएगा नहीं, बल्कि खत्म करेगा।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने पहले भी ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है, जो हिटलर की न्यूक्लियर टीम की तरह काम कर रहे थे। नेतन्याहू का मानना है कि खामेनेई की हत्या से यह युद्ध खत्म हो जाएगा और ईरान के परमाणु व बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकेगा, चाहे ईरान खुद ऐसा करे या इजरायल को ऐसा करना पड़े।
नेतन्याहु ने यह भी कहा कि ईरान का शासन बहुत कमजोर है और इस लड़ाई का परिणाम ईरान में तख्तापलट का कारण बन सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट का चेहरा हमेशा के लिए बदल जाएगा और क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
नेतन्याहु ने यह भी दावा किया है कि ईरान की राजधानी तेहरान का हवाई क्षेत्र अब इजरायली वायुसेना के कब्जे में हैं।
युद्ध की आग में झुलसता मिडिल ईस्ट
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में अब तक भारी नुकसान हो चुका है। इजरायली हमलों में 224 ईरानी मारे जा चुके हैं और 1,481 लोग घायल हुए हैं, जबकि इजरायल में 24 लोगों की मौत हुई है और 600 से ज्यादा घायल हुए हैं।
इजरायल ने तेहरान पर कई बार एयरस्ट्राइक की है, जो ईरान की आक्रामकता का जवाब है। वहीं, ईरान ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव और हाइफा पर बमबारी की है, जिससे साफ है कि ईरान की मंशा सिर्फ नुकसान पहुँचाना है।
इस युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान से भागने की कोशिश कर रहे हजारों लोग फँस गए हैं। न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने और टैक्सी न मिलने के कारण लोग सीमा तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जो ईरान की बदइंतजामी को दर्शाता है।
इजरायल ने अपने नागरिकों से जॉर्डन और मिस्र के जरिए देश छोड़ने को कहा है। चीनी दूतावास ने भी इजरायल में रह रहे अपने नागरिकों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की अपील की है और उन्हें जमीन के रास्ते जॉर्डन जाने की सलाह दी है।
धमाका इतना तेज कि स्टूडियो हिला, एंकर डरकर भागी: इजरायल बोला- ईरान के ‘झूठ के अड्डे’ पर किया हमला, सेट पर मची चीख-पुकार-भगदड़
इजरायली वायुसेना ने ईरान के सरकारी टीवी चैनल IRIB के हेडक्वार्टर पर धमाकेदार हमला किया है। लाइव प्रसारण के बीच ही अचानक स्टूडियो की लाइटें बुझ गईं, धमाके हुए और एंकर सहर इमामी डरकर कैमरे से भाग गई। सेट पर मौजूद लोगों को ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए सुना जा सकता है।
Footage showing strikes moments ago by the Israeli Air Force on the studios and offices of the Iranian state-run broadcaster IRIB in Tehran. pic.twitter.com/V5sBiyEM6p
इजरायल ने हमले से पहले ही तेहरान के उस इलाके को खाली करने की चेतावनी दे दी थी, जहाँ ये चैनल है।
इजरायली सेना ने बताया कि उन्होंने ईरान के ‘कम्यूनिकेशन सेंटर‘ को निशाना बनाया है, जो उनका झूठ फैलाने का अड्डा है। इस हमले के बाद तेहरान में लोग जान बचाकर भागने लगे, सड़कों पर गाड़ियों का लंबा जाम लग गया।
यह हमला तब हुआ जब ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागी थीं, जिसमें 8 इजरायली नागरिक मारे गए थे। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने साफ कहा है, ‘हम ईरानी तानाशाह को हर जगह मारेंगे।’
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और इजरायल के पीएम नेतन्याहू (साभार: NTV) फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए कत्लेआम के बाद इजरायल ने दूसरे चरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले चरण में उसने आतंकियों और उनके ठिकानों पर बम बरसाई और अब दूसरे चरण में गाजा में जमीनी सैनिकों को उतारकर आतंकियों का खात्मा शुरू कर दिया है। इजरायल की कार्रवाई में अब तक 7700 फिलिस्तीनी मारे गए। इस कार्रवाई पर अब तुर्की ने इजरायल को ‘क्रूसेड वार’ यानी धर्मयुद्ध की धमकी दी है।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) ने कहा कि कुछ देशों को छोड़ दिया जाए तो गाजा में फिलिस्तीनियों की हत्या में पश्चिमी देशों का सीधा हाथ है। आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन इसमें न्याय कहाँ है? उन्होंने धमकी वाले अंदाज में कहा कि अगर गाजा में हमले नहीं रूके तो एक बार फिर से क्रूसेड वार शुरू हो जाएगा।
तुक्रिये के अलावा ईरान ने भी इस इस युद्ध के लिए अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया है और सीधी धमकी दी है। वहीं, कतर सहित अधिकांश इस्लामी देश फिलिस्तीन के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं। इन देशों में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में फिलिस्तीन के लोगों के समर्थन में रैलियाँ निकाली जा रही हैं।
तुर्किये के इंस्तांबुल में आयोजित एक रैली में एर्दोगन ने इज़रायल को ‘युद्ध अपराधी’ और ‘कब्जा करने वाला’ बताया। अपने लगभग एक घंटे के भाषण में एर्दोगन ने यह भी कहा कि इजरायल में घुसकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का गर्दन रेतने वाला हमास आतंकवादी संगठन नहीं है। इसके साथ ही कुछ पश्चिमी देशों के इज़रायल के लिए बिना शर्त समर्थन देने की भी आलोचना की।
एर्दोगन के बयान की इजरायल ने निंदा की है और तुर्किये और उन्हें साँप कहा है। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत गिलाद एर्दान ने कहा, “साँप तो साँप ही रहेगा“। ऊर्जा मंत्री इजरायल कार्ट्ज ने कहा, “मुस्लिम ब्रदरहुड का आदमी हमास-दाएश आतंक का समर्थन कर रहा है।”
वहीं इजरायल ने तुर्किये के अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है। इजरायल के विदेश मंत्री एली कोहेन ने कहा, “तुर्किये के गंभीर बयानों को देखते हुए मैंने आपसी संबंधों के पुनर्मूल्यांकन के लिए तुर्किये से अपने राजयनिक प्रतिनिधियों को लौटने का आदेश दे दिया है।”
दरअसल, एर्दोगन ने जिस धर्मयुद्ध की बात कही है, वह साल 1000 से साल 1291 के बीच यरुशलम को लेकर ईसाइयों और मुस्लिमों के बीच चला था। हालाँकि, उसके बाद भी यह कई सदियों तक चलता रहा। येरुशलम यदूदी, ईसाई और मुस्लिम, तीनों के लिए महत्वपूर्ण है। यहूदी की शुरुआत इसी येरुशलम से हुई थी, जबकि ईसाइयों के ईसा मसीह को यहीं क्रूस पर लटकाया गया था। इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद भी यहाँ कुछ दिन ठहरे थे।
येरुशलम पहले रोम साम्राज्य का अंग था। ये बाद में ईसाई हो गए। बाद में इस मुस्लिमों ने अधिकार कर लिया। फिर अधिकार को लेकर मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच सात भीषण युद्ध लड़े गए थे। इन यु्द्धों में येरुशलम कभी इसाइयों को हाथ लगा तो कभी मुस्लिमों के। आखिर में येरुशलम पर तुर्की के इस्लामी ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा हो गया था। इसी को लेकर एर्दोगन पश्चिमी देशों को धमकी दे रहे हैं।
इन सब तमाम बयानों के बीच इजरायल अपने लक्ष्य से बिना भटके हमास के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में जुटा है। इजरायल ने साफ कह दिया है कि वह गाजा में ऐसी कार्रवाई करेगा कि अगले पचास सालों तक इस्लामी आतंकी इजरायल पर हमले के बारे में सोचेंगे नहीं। इजरायल ने अब गाजा में जमीनी सैनिकों को भी उतार दिया है।
इजरायल की कार्रवाई में अब 7700 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इनमें हमास के प्रमुख कमांडर से लेकर उसके वायुसेना प्रमुख भी शामिल हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा है कि यह लड़ाई इजरायल के अस्तित्व की लड़ाई है। इजरायल गाजा में हमास के सुरंगों को नष्ट करने के लिए भी स्पॉन्ज बम इस्तेमाल करने वाला है।
वहीं, इजरायल की कठोर कार्रवाई से सहमे हमास के आतंकियों ने कहा था कि अगर इजरायल अपने हमले रोकता है तो वह बंधकों को छोड़ देगा। उसने बंधकों को छोड़ने के लिए समय माँगा था, लेकिन इजरायल ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी। अब हमास ने दावा किया है कि इजरायल के हमलों में 50 बंधकों की मौत हो गई है।
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर एक साथ लगभग 5000 रॉकेट दाग दिया था। इसके साथ ही चौतरफा जमीनी हमला करके निर्दोष इजरायली महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों सहित 1400 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके साथ ही लगभग 229 महिला, बच्चों और पुरुषों को बंधक बनाकर आतंकी अपने साथ गाजा लेकर चले गए हैं।