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हिजाब+रेप से जल रहा ईरान : अब तक 83 मौतें, 15 साल की लड़की से कमांडर ऑफिस में बलात्कार

                           तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में ईरानी दूतावास के सामने प्रदर्शन (फोटो साभार- गेटी)
जनता से बढ़कर तानाशाह और धार्मिक नेता नहीं होते। जनता जब चाहे इन्हें उखाड़कर फेंक सकती है। इस्लामी मुल्क ईरान (Iran) में भी कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं के विरोध में वहाँ की महिलाएँ सड़कों पर उतर चुकी हैं और पूरे देश और दुनिया से उन्हें समर्थन मिल रहा है।

ईरान की इस्लामी सरकार की दमनकारी रवैए के बाद वहाँ का हिजाब विरोधी आंदोलन हिंसक हो गया है। वहीं, बलूचिस्तान में 15 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार के बाद वहाँ की जनता हिंसक हो गई है। आरोप है कि पुलिस कमांडर ने अपने ऑफिस में ले जाकर इस लड़की का बलात्कार किया।

लोगों के साथ एक झड़प में ईरानी पुलिस ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के सिस्तान एवं बलूचिस्तान के खुफिया प्रमुख अली मौसवी (Ali Mousavi) की मौत हो गई है। वहीं, सुरक्षाबलों की फायरिंग में कम से कम 36 लोगों के मारे जाने की खबर है।

सुन्नी समुदाय के बलूच लोगों का आरोप है कि 15 साल की इस लड़की के साथ चाबहार के पुलिस कमांडर कर्नल इब्राहिम कौचकजाई ने बलात्कार किया है। इसके बाद पुलिस इस मामले को दबाने में लगी हुई थी। पुलिस ने लड़की के परिजनों पर इसको लेकर चुप रहने का दबाव बनाया। इतना ही नहीं लड़की के 3 परिजनों को गिरफ्तार कर उनसे बलात्कार से इनकार वाले बयान देने का भी दबाव बनाया गया। इसके बाद लोग सड़कों पर उतर आए।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, आंदोलनकारी जाहेदान शहर में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने गोलियाँ चलाईं। इसके बाद आंदोलनकारियों की ओर से भी गोलियाँ चलाई गईं। इस झड़प में आंदोलनकारियों की गोली अली मौसवी को लगी। मौसवी को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।

मौसवी की मौत सरकार विरोधी लोगों में गुस्से का इजहार है। इसके पहले हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खोमनई की मौत की माँग कर रहे थे। ओस्लो स्थित ईरान मानवाधिकार संगठन का कहना है कि विरोध शुरू होने के बाद से सुरक्षाबलों ने कम-से-कम 83 लोगों को मार दिया है।

वहीं, हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष में कई सुरक्षाबलों की भी मौत हुई है, लेकिन मारे गए सुरक्षाबलों में अली मौसवी सबसे उच्च रैंक के अधिकारी हैं। बता दें कि बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान में एक ऐसा क्षेत्र हैं, जहाँ बलूच संप्रदाय के लोग रहते हैं। शिया बहुल ईरान में सुन्नी बलूचों के साथ अक्सर हिंसा की खबरें आती हैं।

पिछले साल भी इलाके के खराब हालात को लेकर यहाँ प्रदर्शन करने वाले लोगों पर ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ की पुलिस ने गोलियाँ चलाई थीं, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। बलूच ईरान और पाकिस्तान से बलूचिस्तान की माँग करते हुए सशस्त्र विद्रोह चलाते हैं। इसमें वे आतंकी संगठन अल-कायदा का भी सहयोग ले रहे हैं।

ईरान में हिजाब विरोधी हिंसा मध्य सितंबर उस समय भड़क उठी, जब महसा अमिनी (Mahsa Amini) नाम की एक युवती अपने भाई के साथ जा रही थी और हिजाब ढंग से नहीं पहने के कारण पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसे थाने में ले जाकर इतना पीटा गया कि वह कोमा में चली गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

इसके बाद ईरान में हिजाब जलाकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन प्रदर्शनों में ईरान पुलिस ने गोली मारकर कई महिला प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी। हालाँकि, पुलिस के दमन के बाद यह आंदोलन और विस्तृत और हिंसक होता जा रहा है। ईरानी महिलाओं के समर्थन में दुनिया भर में प्रदर्शन हो रहे हैं।

‘दी प्रिंट’ की पत्रकार का दावा : जाफराबाद में गोली चलाने वाले का नाम है शाहरुख

शाहरुख़
मौजपुर में गोलीबारी करने वाला निकला शाहरुख़
दिल्ली करीब ढाई महीने से शाहीन बाग़ में चल रहे नागरिकता कानून विरोध (CAA) के विरोध ने सोमवार को नई शक्ल ले ली। रविवार शाम से ही शुरू हुए हिंसा और दंगों ने सोमवार सुबह व्यापक दंगों और पत्थरबाजी का रूप ले लिया। दंगाइयों ने पेट्रोल पम्प से लेकर ऑटो, रिक्शा तक को आग के हवाले कर दिया।
इसी बीच एक युवक ने आठ राउंड गोलियाँ भी चलाई, जिसकी पहचान किसी शाहरुख नाम के व्यक्ति के रूप में बताई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस लगातार जाँच कर रही है। ट्विटर पर ‘दी प्रिंट’ की सीनियर एसोसिएट एडिटर BhardwajAnanya (अनन्या भारद्वाज) ने बन्दूक पकड़े हुए इस युवक की पहचान शाहरुख के रूप में बताई है। हालाँकि, इसके बाद एक अन्य ट्वीट में दी प्रिंट की एडिटर ने कहा कि इस पर अभी किसी भी तरह घोषणा नहीं की गई है।
ट्विटर पर जारी एक वीडियो में इस युवक को दिल्ली पुलिस की ओर गोलियाँ चलाते हुए आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। सोमवार को मौजपुर-जाफराबाद सड़क पर एक युवक ने ताबड़तोड़ कई राउंड फायर किए हैं। इस युवक ने करीब 8 राउंड फायर किए। इस दौरान एक पुलिसवाले ने फायरिंग कर रहे युवक को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं रूका और फायर करते रहा।

इस बीच सोशल मीडिया पर पत्थरबाजी कर रहे और गोलियाँ चलाने वाले प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘नारंगी रंग’ की टोकरियाँ इस्तेमाल करने के कारण इस हिंसा को भगवा रंग से जोड़ने की भी कोशिशें की गईं। लेकिन कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गोली चलाने वाले इस युवक के CAA और NRC विरोध प्रदर्शन में भी नजर आने की बात कही है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है।
दिल्ली में हुई इस हिंसा और पत्थरबाजी के दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत हो गई। वह एसीपी गोकुलपुरी ऑफिस में तैनात थे। इसके अलावा शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा भी घायल हो गए। उन्हें पटपड़गंज के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

AAP नेता ने किया ट्वीट डिलीट; मतलब कपिल गुर्जर की हकीकत पर फँस चुकी है पार्टी

कपिल गुर्जर
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन एवं धरने में प्रारम्भ से ही इसके पीछे वामपंथियों, कांग्रेस और आप पार्टियों का योगदान माना जा रहा था, कि घुसपैठियों को रोकने के लिए आम मुसलमान को भड़का कर मोदी सरकार का डर मुसलमानों में बैठा कर अपनी तुष्टिकरण नीति को अंजाम देकर अपनी कुर्सी को बचाओ। 
अपनी कुर्सी की खातिर इन विरोधों में उठ रहे हिन्दू और अलगाववादी नारों के लगने पर भी संविधान की दुहाई देने वालों को लेशमात्र भी लज्जा नहीं आयी, यानि अपनी कुर्सी की खातिर इन्हें देश विभाजन होने की भी परवाह नहीं। मोदी-योगी-अमित का विरोध तो समझ आता है, लेकिन अलगाववादी नारे क्यों? हिन्दुओं को पागल बनाने लोकसभा चुनावों में राहुल गाँधी कोट पर जनेऊ धारण करते दिखे, अब केजरीवाल अपने आपको हनुमान भक्त कहते नज़र आ रहे हैं, लेकिन ऐसे जनेऊ धारण कर और हनुमान भक्त होने का स्वांग खेल हिन्दू धर्म को बदनाम होते पार्टी में हिन्दू कार्यकर्ता और नेता देखते रहे। उस स्थिति में हिन्दू विरोधी नारों का लगने पर हैरान नहीं होना चाहिए।   
शाहीन बाग में गोली चलाने वाले कपिल गुर्जर के राजनैतिक बैकग्राउंड का खुलासा होने के बाद आम आदमी पार्टी की बहुत फजीहत हो रही है। पार्टी के जो नेता कल तक ऐसी अप्रिय घटनाओं के लिए भाजपा को दोषी ठहरा रहे थे, मोदी-शाह पर ऊँगली उठा रहे थे वो अब खुद अपने ट्वीट डिलीट करते घूम रहे हैं।
सोमवार (फरवरी 4, 2020) को क्राइम ब्रांच के खुलासे के बाद आम आदमी पार्टी के नेता कुलदीप कुमार ने बिना किसी सफाई के अपना वो ट्वीट डिलीट कर दिया, जिसमें उनकी पार्टी के दिग्गज नेता कपिल गुर्जर के साथ दिखाई दे रहे थे और जो प्रमाण था कि वाकई कपिल ने साल 2019 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन की थी।
डिलीट किए पोस्ट को कुलदीप कुमार ने पिछले साल 14 मई को ट्वीट किया था। 
उन्होंने अपने ट्वीट में बताया था कि पार्टी के मुख्यालय में कॉन्ग्रेस और बसपा छोड़ कई नेताओं ने राज्यसभा सांसद संजय आजाद और आतिशी मार्लेना के हाथों टोपी व पटका पहन आम आदमी पार्टी ज्वाइन की। इसके अलावा अपने ट्वीट में उन्होंने कपिल गुर्जर के पिता गजे सिंह का नाम भी मुख्य रूप से लिखा था। उन्होंने अपने डिलीट किए ट्वीट में लिखा था कि मुख्य रूप से उनकी पार्टी में पटपड़गंज जिले के बसपा अध्यक्ष गजे सिंह एवं पूर्व ईडीएमसी सचिव मदन मोहन और प्रदीप हांडले शामिल हुए।


दिल्ली विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टियों के बीच बिना निराधार आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला आम हो चुका है। लेकिन कपिल गुर्जर की सच्चाई का खुलासा होने के बाद कुलदीप कुमार द्वारा डिलीट किया गया उनका ये ट्वीट उनकी पार्टी की मंशा पर सवाल उठाता है और बताता है कि क्राइम ब्रांच द्वारा दिए गए सभी सबूत सही हैं। कपिल गुर्जर ने और उनके पिता ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली थी। वो भी चोरी छिपे नहीं। बल्कि आतिशी मार्लेना और संजय सिंह जैसे नेताओं की मौजूदगी में।
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शाहीन बाग शूटर मामले में नया मोड़ निकल आया है। दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शन स्थल .....

दिल्ली : तीस हज़ारी कोर्ट में वकील-पुलिस में झड़प

दिल्ली के 30 हजारी कोर्ट में पार्किंग को लेकर वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच शनिवार( नवम्बर 2) को हुई हिंसक झड़प में एक वकील घायल हो गया।
जानकारी के मुताबिक एक वकील पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, गुस्साए वकीलों ने पुलिस के वाहनों को आग लगा दी और तोड़फोड़ की।
विवाद एक वकील की गाड़ी के पुलिस की गाड़ी से टकराने को लेकर हुआ था। पुलिस फायरिंग के बाद वकील भड़क गए। काफी देर तक अदालत परिसर में हंगामा चलता रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। इस बीच, वकील इस बात पर अड़े हुए हैं कि गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
वकीलों ने आरोप लगाया कि उनके दो सहयोगी घायल हो गए, इसमें एक पुलिस की गोलीबारी में घायल हुआ. हालांकि, पुलिस ने इनकार किया कि उसने गोली चलायी. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पार्किंग के मुद्दे पर कुछ वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस होने के बाद घटना ने गंभीर रूप अख्तियार कर लिया.