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अय्याशजीवियों और देह व्यापार का अड्डा बना टिकरी बॉर्डर

मोदी विरोधियों के संरक्षण में चल रहे किसान आंदोलन की सच्चाई वैसे तो कई बार सामने आने पर किसानों को बदनाम करने के आरोप लगाए जाते थे, लेकिन ज़ी हिंदुस्तान के स्टिंग ऑपरेशन ने किसान आंदोलन स्थल पर हो रही अय्याशी को उजागर कर आंदोलन के छलावे को उजागर कर दिया है। 
असली किसान तो 26 जनवरी को हुए उपद्रव के बाद अलग हो गया था, लेकिन अब आंदोलन में चल रही अय्याशी पर जितने भी मोदी विरोधी हैं, सब खामोश हैं, क्यों? क्या अय्याशी के लालच में लोगों को जमा कर बिलों का विरोध करने का कौन-सा तरीका है?
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर धरना दे रहे फर्जी किसानों के चेहरे बेनकाब होते जा रहे हैं। दरअसल ये किसान ना होकर अय्याशजीवी है, जो पैसे, शराब और शबाब का प्रलोभन देकर बुलाए गए हैं। ये अय्याशजीवी अब फर्जी किसान नेताओं की मजबूरी बन चुके हैं, क्योकि तथाकथित किसान आंदोलन से असली किसानों का कोई लेनादेना नहीं है। ऐसे में इस आंदोलन को जिंदा रखने के लिए बेतहाशा पैसा खर्च किया जा रहा है। इसके लिए विदेशों से फंडिंग के साथ ही राजनीतिक हित साधने वाली पार्टियों से भी इनको आर्थिक मदद मिल रही है। इससे फर्जी किसान अय्याशी पर खुलकर पैसे लूटा रहे हैं। इसका खुलासा जी हिंदुस्तान के अंडर कवर रिपोर्टर ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए किया है।

जी हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे टिकरी बॉर्डर पर जब से फर्जी किसानों ने डेरा डाला है, तब से इस इलाके में देह व्यापार की एक अलग तरह की मंडी शुरू हो गई है। यहीं पास में एक गंदा नाला बहता है और उसी के आसपास की झाड़ियां इन फर्जी किसानों की अय्याशी का अड्डा बन गई हैं। इन झाड़ियों के पीछे पैसे देकर लाए गए सेक्स वर्करों के साथ फर्जी किसान अय्याशी करते देखे जा सकते हैं। स्टिंग के दौरान रिपोर्टर ने सेक्स वर्कर समेत कई लोगों से बात की। जब रिपोर्टर ने एक सेक्स वर्कर से बात की तो उसने चौकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि फर्जी किसान उनके पास आते हैं और 100 से लेकर 500 रुपये प्रति व्यक्ति देकर जाते हैं।

एक फर्जी किसान रिपोर्टर को टिकरी बॉर्डर पर गंदे नाले के पास स्थित फैक्ट्रियों में ले गया। उसने बताया कि जब से ये कथित किसान यहां आंदोलन के लिए आए हैं तब से सेक्स वर्कर की तादाद भी बढ़ गई है। फर्जी किसान के मुताबिक, आंदोलन साइट पर रुकने के लिए उसे प्रतिदिन 300 रुपये मिलते हैं। अगर दो लोग आंदोलन में शामिल होते हैं तो उन्हें संयुक्त रूप से 500 रुपये दिए जाते हैं। उन्हें ये पैसे आंदोलन में शामिल होने के लिए टेंट का मालिक देता है। रिपोर्टर ने जब फर्जी किसान से पूछा कि अगर वो भी आंदोलन में शामिल होता है तो उसका क्या फायदा होगा? इस पर फर्जी किसान ने कहा कि यहां शराब और शबाब दोनों उपलब्ध है। आंदोलन के नाम पर इसका आनंद लिया जा सकता है।  

धरना स्थल पर मौजूद एक चश्मदीद ने रिपोर्टर को बताया कि किसान आंदोलन के बहाने लोग अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए आते हैं। यहां तक कि आंदोलन के नाम पर लोगों को बहकाकर आसपास के राज्यों से यहां लाया जाता है। धरना स्थल पर लगाए गए टेंटों के भीतर पूरा खुलापन है। लोग नहाने के बाद टेंट में ऐसे ही नंगे ही रहते हैं। शरीर पर कपड़े के नाम पर कुछ भी नहीं होता। टिकरी बॉर्डर पर खुलेआम शराब पीकर लोग झूमते देखे जा सकते हैं। एक फर्जी किसान सड़क पर पड़ा दिखा। चश्मदीद के मुताबिक उसने अफीम या डोडापोस्त खाया हुआ था।

इससे पहले आंदोलन के नाम पर महिलाओं को धरने में शामिल कर उनका शारीरिक शोषण करने की खबरें सामने आ चुकी हैं। पश्चिम बंगाल से किसान आंदोलन में भाग लेने आई एक युवती से गैंगरेप किया गया था। दुष्कर्म के बाद कोरोना के चलते युवती की मौत हो गई थी। युवती के पिता ने दो महिलाओं समेत 6 लोगों पर केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस का कहना था कि आरोपी अनिल मलिक ने दुष्कर्म की वीडियो बनाकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया था, उसके साथ ट्रेन और फिर किसान आंदोलन की झोपड़ी में भी दुष्कर्म हुआ था। अनूप चनौत ने भी दुष्कर्म किया था और अंकुर सांगवान ने छेड़खानी की थी। दुष्कर्म के आरोपी अनिल मलिक और अनूप चनौत आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे।

बंगाल की युवती से गैंगरेप का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि टिकरी बॉर्डर पर एक और युवती ने शारीरिक उत्‍पीड़न का आरोप लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले एक जाने माने वकील ने टिकरी बॉर्डर पर एक और युवती के साथ दुष्कर्म किए जाने की जानकारी ट्वीट की तो हरियाणा पुलिस के अधिकारियों और आंदोलनकारी किसान नेताओं में खलबली मच गई। वैसे यह सूचना ट्विटर पर सबसे पहले एक न्यूज एजेंसी के पत्रकार ने ट्वीट की, जिसे वकील ने रीट्वीट किया। दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद किसान नेताओं ने युवती को टिकरी बॉर्डर से सिंघू बॉर्डर भेज दिया। 

जनवरी 2021 में आई दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि जैसे-जैसे शाम ढलती जाती है, टिकरी बॉर्डर पर शराब के ठेकों पर भीड़ बढ़ती जाती है। शराब खरीदने वालों में युवा, अधेड़ और बुजुर्ग सभी होते हैं। शराब खरीदने के बाद डिब्बा वहीं फेंक देते हैं और बोतल को कपड़ों में रखकर अपनी ट्रॉलियों की तरफ बढ़ जाते हैं। कुछ युवा तो कोल्डड्रिंक की बोतल में शराब भरकर पीने लगते हैं। पास में ही एक नॉन-वेज बेचने वाले ढाबे की किस्मत खुल गई। ढाबे पर खूब भीड़ लग रही है। किसानों को तंदूरी चिकन के साथ शराब के पैग लगाते देखा जा सकता है।

‘किसान आंदोलन’ : यौन शोषण की 3 घटना: पीड़ित नर्स ने बताई प्रताड़ना की दास्ताँ, अमेरिकी सिख डॉक्टर का लिया नाम

       डॉक्टर सवाईमान सिंह (बाएँ) के वॉलंटियर्स पर नर्स (दाएँ, प्रतीकात्मक चित्र) ने लगाया यौन शोषण का आरोप

टिकरी सीमा पर ‘किसान आंदोलन’ में पश्चिम बंगाल की एक महिला के साथ बलात्कार की घटना को अभी एक साल भी नहीं हुए हैं कि अब एक नर्स ने वहाँ यौन शोषण का आरोप लगाया है। शिवानी ढिल्लों नामक सोशल मीडिया यूजर ने उक्त पंजाबी नर्सिंग असिस्टेंट के साथ हुई वारदात के बारे में बताया। टिकरी सीमा पर किसान प्रदर्शनकारियों ने कई महीनों से हाइवे को ब्लॉक कर के रखा हुआ है और अब वहाँ मेकशिफ्ट कैम्प भी बना लिए गए हैं।

पीड़िता ने टिकरी सीमा पर हो रहे प्रदर्शन के आयोजकों में से एक डॉक्टर सवाईमान सिंह के वॉलंटियर्स पर यौन शोषण का आरोप लगाया। इंस्टाग्राम पर अपनी दास्ताँ शेयर करते हुए पीड़िता ने बताया कि कैसे डॉक्टर सवाईमान सिंह और उनके अनुयायियों ने उसे प्रताड़ित किया। पीड़िता ने बताया कि डॉक्टर सिंह के वीडियोज देख कर वो उनसे प्रभावित थी और प्रदर्शन स्थल पर कोरोना वैक्सीन को लेकर जागरूकता फैलाना चाहती थी।

फिर उसने अप्रैल में इस काम के लिए वॉलन्टियरिंग शुरू की। डॉक्टर सवाईमान सिंह ने वहाँ ‘पिंड कैलिफोर्निया’ नामक अस्थायी अस्पताल बनाया है। उसी इमारत के एक कॉरिडोर में गाँव की अन्य महिला प्रदर्शनकारियों के साथ रहने के लिए पीड़िता को भी जगह दी गई। पीड़िता ने बताया कि कुछ पुरुष वॉलंटियर्स के साथ पहली बातचीत में ही उसे सब कुछ ठीक नहीं लग रहा था, लेकिन उसे जाने दिया।

पहले दो दिन में सिर्फ जरूरत की ही बातें हुईं, लेकिन तीसरे दिन उसके कमरे में रहने वाले एक महिला डॉक्टर को जाना था। नर्स ने बताया कि वो कमरे में अकेले नहीं सोना चाहती थी, इसीलिए बगल के कमरे की महिला प्रदर्शनकारियों को अपने साथ सोने को कहा। अज्ञात नर्स ने बताया कि डॉक्टर सिंह के वॉलन्टियर्स ने उस पर अश्लील टिप्पणियाँ की और साथ ही दावा किया कि वो किसी पुरुष वॉलंटियर के साथ रोमांस कर रही है।

पीड़िता ने बताया कि जब उसने पास खड़े एक बुजुर्ग व्यक्ति से इसकी शिकायत की तो उसके बाद वॉलंटियर्स मिल कर उसके खिलाफ गैंगबाजी करने लगे। जब उसने डॉक्टर सिंह से इसकी शिकायत की तो उन्होंने ‘ये अमेरिका नहीं है’ कहते हुए शिकायत को नजरअंदाज कर दिया और कहा कि वो वॉलंटियर्स 4-5 महीने से हैं, जबकि उक्त नर्स के आए अभी 2-3 दिन ही हुए हैं। अगले दिन जब नर्स ने फिर से डॉक्टर सवाईमान सिंह को इन मुद्दों के बारे में बताया तो उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि वो नर्स की सेफ्टी की गारंटी नहीं दे सकते।

महिला के अनुसार, डॉक्टर सवाईमान सिंह ने नर्स से कहा कि वो उसे सिंघु सीमा पर छोड़ आएँगे और तभी बुलाएँगे, जब कोई लेडी डॉक्टर आ जाएगी। महिला ने डॉक्टर सिंह के वॉलंटियर्स पर ‘स्लट-शेमिंग’ का भी आरोप लगाया। पीड़िता ने बताया कि वो लोग एक महिला के मुँह से ना सुनने के आदी नहीं थे और खुद को श्रेष्ठ समझते थे। साथ ही पीड़िता के कारण वो अपने ईगो को हर्ट हुआ भी समझते थे।

महिला ने बताया, “इन लोगों ने जिस तरह से मुझे प्रताड़ित किया, मेरा यौन शोषण किया और स्त्रियों के प्रति उनकी घृणा को जिस तरह से मैंने झेला, उससे स्पष्ट है कि वहाँ कई अन्य महिलाओं को भी ऐसे ही अनुभव हुए होंगे। मोर्चा की चिंता मुझे थी, डॉक्टर सिंह को नहीं। एक महिला का प्रताड़ना के खिलाफ आवाज़ उठाने से उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसे लोगों के चुप होने से पड़ेगा। इस प्रदर्शन में महिलाओं को तुच्छ समझी जाने वाली सोच बदली जानी चाहिए।”

टिकरी बॉर्डर पर पहले भी हुई है रेप की घटना

मई 2021 में दिल्ली के टिकरी बॉर्डर स्थित ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर बंगाल से आई युवती की कोरोना से मृत्यु के बाद युवती के पिता ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी बेटी ने खुद फोन पर कहा था कि उसका शारीरिक शोषण किया गया था। गैंगरेप के इस मामले के आरोपितों में से दो आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हैं। ‘स्वराज पार्टी’ के योगेंद्र यादव को किसानों के टेंट में हुई इस घटना के बारे में पता था।
शिकायत के अनुसार, युवती ने पिता को बताया कि अनिल और अनूप अच्छे लोग नहीं हैं। यात्रा के दौरान जब सब सो रहे थे तब उनमें से अनिल ने पास आकर उसे जबरन चूमा। उसने हड़बड़ी में उसे अपने से दूर होने को कहा और दोबारा हरकत न दोहराने की चेतावनी दी। मगर, इसके बाद अनिल और अनूप उसे ब्लैकमेल करने लगे, उस पर प्रेशर बनाने लगे। उसके साथ साथ ट्रेन में भी जबरदस्ती हुई और बाद में प्रदर्शनस्थल पर भी उसे आरोपितों के साथ जबरदस्ती टेंट शेयर करने को कहा गया।
बाद में योगेंद्र यादव ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी बांग्ला भाषी पत्नी को लड़की से बात करने को कहा, जहाँ लड़की ने उन्हें अपने शोषण की हल्की-फुल्की हिंट दी। उनके मुताबिक, 25 अप्रैल को यादव ने खुद उसको संपर्क किया था लेकिन लड़की के पिता ने कहा कि उसे कहीं और ले जाया गया है। उन्होंने बताया था कि ये जानने के बाद उन्होंने लड़की को फोन किया और उससे बात की।
इतना ही नहीं, ‘किसान आंदोलन’ में महिला पत्रकारों तक को बदसलूकी का सामना करना पड़ा है। इंडिया टुडे की एडिटर प्रीति चौधरी ने बताया था कि प्रदर्शनस्थल पर मौजूद ‘कुछ प्रदर्शनकारी’ रिपोर्टरों (पत्रकारों) का यौन उत्पीड़न भी करने लगे हैं, वहीं वहाँ मौजूद अन्य लोग ये सब होने देते हैं। महिला पत्रकारों के नितम्बों पर चुटकी काटने के आरोप लगे थे। रिपब्लिक और ज़ी न्यूज़ के पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी के वीडियो सामने आए थे।

‘किसान आंदोलन’ में बलात्कार : 25,000 रूपए का इनामी AAP नेता अनिल मलिक गिरफ्तार

                      अनिल मलिक AAP का सक्रिय कार्यकर्ता अपने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ 
दिल्ली की टिकरी सीमा पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में आई पश्चिम बंगाल की युवती के सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित अनिल मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कुल 6 आरोपित हैं, जिनमें से 3 के सिर पर 25-25 हजार रुपए के इनाम हैं। हरियाणा की झज्जर पुलिस ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर भिवानी से अनिल मलिक को धर-दबोचने में कामयाबी पाई।

अनिल मलिक के आम आदमी पार्टी (AAP) का कार्यकर्ता होने की बात भी पता चली थी। भाजपा नेताओं ने इस सम्बन्ध में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से स्पष्टीकरण भी माँगा है। इससे पहले भी किसान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते आए हैं। इनमें मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान (ट्रॉली टाइम्स का सदस्य), अंतरप्रीत सिंह (स्टूडेंट फॉर सोसायटी का नेता) और स्वराज फॉर यूथ का अध्यक्ष मनीष कुमार भी शामिल है।

अनिल मलिक तभी से फरार चल रहा है, जब इस मामले की FIR भी दर्ज नहीं हुई थी। ‘किसान सोशल आर्मी’ नाम से बनाए गए तम्बू को तोड़े जाने के बाद अन्य आरोपित भी इधर-उधर भूमिगत हो गए थे। उस समय तक किसान नेता ही इन्हें बचाने में लगे थे। FIR दर्ज होने से पहले एक आरोपित अनूप चानौत ने वीडियो फुटेज जारी कर खुद का बचाव किया था और बताया था कि कमिटी के लोगों ने पंचायत कर उसे छिप कर रहने को कहा है।

इस मामले में दो महिलाओं समेत 25 लोगों से पूछताछ हो गई है। त्वरित कार्रवाई के लिए एक SIT का गठन भी किया गया था। एक अन्य आरोपित अंकुर सांगवान की जमानत याचिका जिला अदालत में ख़ारिज हो गई, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की सुनवाई बुधवार (जून 16, 2021) को होनी है। अनिल मलिक को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भी भेज दिया गया है।

पूछताछ में मलिक ने कबूल किया है कि उसने रेप का वीडियो बना लिया था और उसी के सहारे पीड़िता को ब्लैकमेल करता था। युवती से ट्रेन में और फिर ‘किसान आंदोलन’ के तम्बू में भी बलात्कार हुआ था। भिवानी के भीम स्टेडियम से गिरफ्तार मलिक ने स्वीकारा कि अनूप ने भी युवती के साथ रेप किया था और अंकुर ने छेड़खानी की थी। अनिल मलिक पहले फ़ौज में था लेकिन 2016 में रिटायर हो चुका है।

अनिल मलिक मूल रूप से झोझूंकला का रहने वाला है। उसकी गिरफ़्तारी की कार्रवाई इतनी गोपनीय थी कि किसी को भी भनक नहीं लगी। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने किसान नेताओं के सहयोग के लिए बैठकें की थीं, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। एक तरफ किसान नेता आरोपितों को बचाते रहे, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के पिता को साथ लाकर उन्हें न्याय दिलाने की बातें करते रहे।

मई 2021 में दिल्ली के टिकरी बॉर्डर स्थित ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर बंगाल से आई युवती की कोरोना से मृत्यु के बाद युवती के पिता ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी बेटी ने खुद फोन पर कहा था कि उसका शारीरिक शोषण किया गया था। गैंगरेप के इस मामले के आरोपितों में से दो आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हैं। ‘स्वराज पार्टी’ के योगेंद्र यादव को किसानों के टेंट में हुई इस घटना के बारे में पता था।

अवलोकन करें:-

आम आदमी पार्टी में ही महिलाओं का अत्याधिक यौन शोषण क्यों?
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आम आदमी पार्टी में ही महिलाओं का अत्याधिक यौन शोषण क्यों?
पार्टी पार्षद रमेश मटियाला के खिलाफ महिला ने दर्ज कराई शिकायत अपनी चुनावी

वहीं अब टिकरी सीमा पर फिर से इसी तरह का एक मामला सामने आया है। वहाँ स्थित एक अस्थायी अस्पताल की नर्स ने प्रदर्शन के आयोजकों में से एक डॉक्टर सवाईमान सिंह के वॉलंटियर्स पर यौन शोषण का आरोप लगाया। इंस्टाग्राम पर अपनी दास्ताँ शेयर करते हुए पीड़िता ने बताया कि कैसे डॉक्टर सवाईमान सिंह और उनके अनुयायियों ने उसे प्रताड़ित किया। डॉक्टर सिंह के वॉलन्टियर्स ने उस पर अश्लील टिप्पणियाँ भी की।

टिकरी बॉर्डर : आन्दोलनजीवी योगेंद्र यादव को बलात्कार की जानकारी थी

जब कोई आंदोलन जनहित की बजाए केवल विरोध पर आधारित होकर लम्बे समय तक चलता है, उसमें बलात्कार जैसी घटनाओं पर हैरान नहीं होना चाहिए। जिन धरनों में हर तरह की सुख-सुविधाओं का प्रबंध हो, वहां इस तरह की घटनाओं का होना स्वाभाविक ही है। हाँ, जब तक पर्दा पड़ा रहे, लेकिन इन स्थानों पर हुई ऐसी घिनौनी हरकतें कभी नहीं परदे में रह ही नहीं सकती। शाहीन बाग में क्या हुआ, लेकिन वहां की घटनाएं हिन्दू विरोधी दंगों में दब गयी। ऐसे में प्रश्न होता है कि इन आंदोलनों को समर्थन देने वाली सियासती पार्टियां क्यों खामोश हैं? क्यों नहीं अपराधियों को दण्डित करने की आवाज़ उठाई जाती?
दिल्ली के टिकरी बॉर्डर स्थित ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर बंगाल से आई युवती की कोरोना से मृत्यु के बाद मामले में 
नया मोड़ आया है। युवती के पिता का कहना है कि उन्हें उनकी बेटी ने खुद फोन पर कहा था कि उसका शारीरिक शोषण किया गया था। इस मामले ने अब नया मोड़ लिया है। खबर आ रही है कि युवती के साथ रेप सहित अन्य धाराओं में 6 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन 6 लोगों में 2 किसान नेता, 2 आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और किसान आंदोलन से जुड़ी 2 महिला वॉलंटियर शामिल हैं।
कहाँ हैं, फर्जी किसान नेता, टिकैत, योगेन्द्र यादव, बलबीर सिंह राजोवाल जो 10 दिन तक 6 बलात्कारीयों  बचाते रहे। 
विदेशी फंडिग से चलने वाले इस फर्जी आदोंलन का एकमात्र उद्देश्य मोदी सरकार को अस्थिर करना था।
बलात्कार जैसे जघन्य अपराध पर राहुल, सोनिया, केजरीवाल, ममता, अमरिंदर सिह सुखबीर और हरसिमरत कौर, हुड्डा,चौटाला जैसे लोगों की जुबान मे Fevicol जम गया है।
एक आरोपी अनूप तोआम आदमी पार्टी, हिसार का अध्यक्ष है। इस आंदोलन मे दिल्ली सरकार का फंड फूंकने वाले केजरीवाल और सिसोदिया की जुबान पर ताला लग गया है।

गैंगरेप के इस मामले के आरोपितों में से दो आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हैं। इतना ही नहीं, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में दावा किया गया है योगेंद्र यादव को किसानों के टेंट में हुई इस घटना के बारे में पता था।

पिता की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 120बी, 342, 354,365, 376D और 506 के तहत 6 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। इनमें किसान नेता और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि घटना की जानकारी योगेंद्र यादव तक को थी। लेकिन उन्होंने पीड़िता की मृत्यु के बाद भी इसे पुलिस से साझा नहीं किया।

30 अप्रैल को झज्जर के अस्पताल में युवती की मृत्यु के बाद उसके पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। अब पुलिस मामले में जाँच कर रही है। बहादुरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारी विजय कुमार का कहना है,”युवती की मृत्यु कोरोना से हुई। उसका उपचार कोरोना मरीजों की तरह किया गया। हमने दस्तावेजों के लिए अप्लाई किया है। जैसे ही कुछ डॉक्यूमेंट हमें मिलते हैं हम तभी पुष्टि कर पाएँगे कि ये मौत कोरोना संबंधी थी।”

पीड़िता के पिता की शिकायत 

                                                          पीड़िता के पिता की शिकायत
                             दैनिक भास्कर के रोहतक संस्करण में 10 मई 2021 को प्रकाशित संबंधित खबर
मृतका के पिता ने अपनी शिकायत में 6 लोगों का नाम लिया। इनकी पहचान अनिल मलिक, अनूप सिंह छनौत, अंकुर सांगवान, कविता आर्या, जगदीश ब्रार और योगिता सुहाग के तौर पर हुई है। ये सारे लोग संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बंगाल गए थे। वहीं इनकी मुलाकात लड़की और उसके पिता से हुई थी। लड़की ने इनके सामने प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई। इसके बाद वह उनके साथ 11 अप्रैल को हावड़ा से रवाना हो गई।

शिकायत के अनुसार, युवती ने पिता को बताया कि अनिल और अनूप अच्छे लोग नहीं हैं। यात्रा के दौरान जब सब सो रहे थे तब उनमें से अनिल ने पास आकर उसे जबरन चूमा। उसने हड़बड़ी में उसे अपने से दूर होने को कहा और दोबारा हरकत न दोहराने की चेतावनी दी। मगर, इसके बाद अनिल और अनूप उसे ब्लैकमेल करने लगे, उस पर प्रेशर बनाने लगे।

पिता के मुताबिक, उनकी बेटी के साथ ट्रेन में भी जबरदस्ती हुई और बाद में प्रदर्शनस्थल पर भी उसे आरोपितों के साथ जबरदस्ती टेंट शेयर करने को कहा गया। युवती ने जब सारी आपबीती पिता को बताई तो उन्होंने उसे सलाह दी कि वह कुछ महिलाओं को विश्वास में लेकर अपनी बातें बताए।
16 अप्रैल को उसने योगिता और जगदीश को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उसका बयान वीडियो में कैद किया गया। पिता ने फोन कर ये वीडियो माँगी। 17 अप्रैल को बताया गया कि युवती को यूरीन के साथ खून आया है। इसके बाद 18 अप्रैल को उसे महिलाओं के साथ टेंट में शिफ्ट कर दिया गया। 21 अप्रैल को उसमें कोविड के लक्षण दिखने लगे और हल्का बुखार भी आया। 24 अप्रैल उसे साँस लेने में दिक्कत हुई और 26 अप्रैल उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
आप से आरोपियों का सम्बन्ध  
रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में आरोपित बनाया गया अनूप सिंह हिसार क्षेत्र में AAP का सक्रिय कार्यकर्ता है। वहीं अनिल मलिक दिल्ली में AAP का कार्यकर्ता है। आप विधायक सुशील कुमार का इस मामले में कहना है कि उन्हें इस घटना का कुछ नहीं पता लेकिन ये दोनों किसान प्रदर्शनस्थल पर सक्रिय थे। किसान सोशल बैनर आर्मी के बैनर तले ये साइट पर काम कर रहे थे। लेकिन जब से युवती की मृत्यु हुई, तभी से अनूप प्रदर्शनस्थल से फरार है। 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपित अनूप सिंह हिसार क्षेत्र का है और आम आदमी पार्टी (AAP) का सक्रिय कार्यकर्ता भी है जिसकी पुष्टि आप सांसद सुशील गुप्ता ने की। अनिल मलिक भी दिल्ली में AAP का कार्यकर्ता बताया जा रहा है।
इससे पहले भी किसान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते आए हैं। इनमें मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान (ट्रॉली टाइम्स का सदस्य), अंतरप्रीत सिंह (स्टूडेंट फॉर सोसायटी का नेता) और स्वराज फॉर यूथ का अध्यक्ष मनीष कुमार भी शामिल है।
आन्दोलनजीवी योगेंद्र यादव को थी जानकारी  
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, युवती की मृत्यु के बाद उसके पिता द्वारा कराई गई एफआईआर में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव का नाम भी सामने आया है। पिता का कहना है कि योगेंद्र यादव को इस बात की जानकारी थी कि किसान नेता युवती के साथ गलत कर रहे हैं। वह 24 अप्रैल से युवती के संपर्क में रहे, लेकिन उसकी मौत से पहले या बाद में पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सूचना नहीं दी।
संयुक्त किसान मोर्चा का बयान 
कोरोना संक्रमण के चलते युवती की 30 अप्रैल को मौत हो गई थी। इसके बाद किसान नेताओं ने सभी कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए उसे शहीद करार दिया और उसका शव खुली जीप में रखकर घुमाया। हालाँकि, बाद में युवती के साथ रेप वाला एंगल उजागर हुआ, जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने इस संबंध में बयान जारी किया।
बयान में कहा गया कि वह आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। उन्होंने किसान सोशल आर्मी का टेंट भी कथित तौर पर प्रदर्शनस्थल से हटा दिया है। पंजाब किसान यूनियन के नेता ने कहा, “ये गंभीर चिंता का विषय है जिस पर बात होनी चाहिए। यहाँ प्रदर्शन पर पुरुष और महिलाओं में कोई अंतर नहीं है। महिलाएँ बड़े तादाद में भाग ले रही हैं। किसान मामले में पड़ताल कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोबारा ऐसा न हो।”
यौन उत्पीड़न का पहला मामला किसान आंदोलन के बीच प्रदर्शनस्थल से नहीं आया है। इससे पहले मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान, अंतरप्रीत सिंह और मनीष कुमार का नाम भी यौन उत्पीड़न केस में उछला था। इन लोगों ने कथित तौर पर कई पीड़िताओं का शोषण किया था।

टिकरी बॉर्डर : कोरोना से पश्चिम बंगाल की 25 वर्षीय युवती की मृत्यु

दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ पाँच महीने से ज्यादा समय से किसानों का आंदोलन जारी है। इसी बीच आंदोलन में कई दिनों से सक्रिय पश्चिम बंगाल की 25 वर्षीय युवती ने शुक्रवार (30 अप्रैल) की सुबह दम तोड़ दिया। वह 27 अप्रैल से टिकरी बॉर्डर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थी। इस घटना बाद से किसानों में भय का माहौल है।

वहीं, कोरोना के प्रकोप के बावजूद अलग-अलग जगहों पर पंचायतें करने पर किसान आंदोलन के नेतृत्व दल में शामिल किसान नेता राकेश टिकैत और गुरनाम सिं​ह के खिलाफ हरियाणा के भिवानी में मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतका मोमिता बसु पश्चिम बंगाल के हुगली की रहने वाली थीं। वह 11 अप्रैल को टीकरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन में शामिल होने आई थीं। वह अलग-अलग संगठनों के साथ यहाँ पर रहीं।

कीर्ति किसान यूनियन के एक नेता राजेंद्र सिंह दीप सिंह वाला ने कहा, “मोमिता प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 11 अप्रैल को पश्चिम बंगाल से टिकरी आई थी। चार दिन पहले उसकी हालत बिगड़ने पर उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उसके फेफड़ों में संक्रमण पाया था। उन्होंने शुक्रवार को अस्पताल में अंतिम साँस ली।”

किसान यूनियन के सदस्य सार्वजनिक रूप से दावा कर रहे हैं कि बसु की मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण हुई थी, लेकिन संदीप सिंह नाम के एक पत्रकार ने ट्विटर पर इस बात की पुष्टि की है कि कोरोना से महिला की मौत हुई है।

उन्होंने कहा कि मोमिता बसु के फेफड़ों में संक्रमण था और वह कोरोना से भी संक्रमित थीं। पत्रकार ने पुष्टि की कि टिकरी बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्थल पर COVID-19 के कारण मौत का यह पहला मामला है, जहाँ हजारों किसान मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के विरोध कर रहे हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है।

पिछले साल सितंबर में मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे कोरोना जैसी विश्व व्यापी महामारी के दौरान भी प्रदर्शन स्थल से हटने को तैयार नहीं हो रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (29 अप्रैल) को कहा कि किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि सीमा पर उनका आंदोलन कोरोना के मामलों में तेजी आने के बावजूद जारी रहेगा।

हरियाणा में कोरोना महामारी के कारण धारा 144 लागू है। इसी बीच गुरुवार को भिवानी के प्रेमनगर गाँव में किसान पंचायत का आयोजन करने के आरोप में राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

2500 डॉलर के लालच में खालिस्तानी झंडा लहराने वाले मोगा के 3 युवकों को नहीं मिली फूटी कौड़ी जेल में सड़ रहे

जिस तरह रुपयों, बिरयानी और फलों के लजीज नाश्ते के लालच में बने शाहीन बागों की जब असलियत सामने आनी शुरू होने पर लोग मजाक बनाते थे, ठीक उसी तर्ज पर कृषि कानून के विरोध में हुए जमावड़े को रुपयों, पिज़्ज़ा, मसाज और स्वादिष्ट भोजन के लालच में यह सब ड्रामा किया गया, जो हर बीतते दिन के साथ उजागर हो रहा है।   

तीन सिख युवकों ने 14 अगस्त 2020 को पंजाब के मोगा जिला की प्रशासनिक इमारत पर खालिस्तानी झंडा लहरा दिया था। सिख फॉर जस्टिस के नेता गुरुपतवंत सिंह पन्नू के उकसाने पर उन्होंने ऐसा किया। तीनों आज भी जेल में बंद हैं और उन्हें फूटी कौड़ी नहीं मिली है। खालसा टुडे के एडिटर इन चीफ सुखी चहल ने यह बात सार्वजनिक की है।

चहल के मुताबिक तीनों युवकों का परिवार अब पन्नू को कोस रहा। उसने इस काम के बदले 2500 डॉलर देने का लालच दिया था। लेकिन, इस घटना के बाद कोई पैसा नहीं दिया।

चहल ने कहा कि भारत के बाहर रहने वाले भारत विरोधी तत्व पंजाब जैसे राज्यों में युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। इन तीन युवकों के केस से यह सबको पता चलना चाहिए कि यदि कोई लालच में आकर भारत विरोधी कार्य कर रहा है तो वह मात्र अपने आप को संकट में डाल रहा है।

इस मामले में मोगा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124A (राजद्रोह) और 121 (सरकार के विरुद्ध बगावत) के तहत केस दर्ज किया है। इसके अलावा तीनों युवकों पर राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम के तहत भी धाराएँ लगाई गई हैं।

एसएसपी हरमनबीर सिंह गिल ने कहा कि तीनों युवक प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के लालच में आ गए थे। गिल ने बताया कि पन्नू ने कई बार ऐसे कामों के लिए 2500 डॉलर अथवा 25,000 डॉलर देने का लालच दिया है और उसके इसी लालच के कारण कई युवा उसके जाल में फँस जाते हैं। एसएसपी गिल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि तीनों युवक ऑफिस के छत पर चढ़ गए और वहाँ लगे तिरंगे को उतार कर खालिस्तान का झण्डा लगा दिया था। यह एक राष्ट्र विरोधी गतिविधि है।  

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो में कहा था कि हरियाणा जो कि पंजाब का एक भाग था, खालिस्तान का भाग बनेगा।

लुधियाना सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा था कि पन्नू और जत्थेदार साहब जो जहर फैला रहे हैं उसका असर मोगा में देखने को मिला जब सिख युवकों ने भारतीय तिरंगा उतार कर उसकी जगह खालिस्तान का झण्डा लहर दिया। कानून को इन राष्ट्र विरोधी तत्वों को गिरफ्तार करके इनके माथे पर गद्दार लिख देना चाहिए। बिट्टू ने यह भी कहा था कि समय आ गया है यह समझने का कि कौन इस देश से प्यार करता है और कौन गद्दारी।

‘सिख फॉर जस्टिस’ का नेता पन्नू पंजाब के युवाओं को भड़काने के लिए ‘किसान आंदोलन’ का भी सहारा ले चुका है। उसने भारतीय सेना के सिख जवानों को लद्दाख सीमा छोड़कर सिंघू बॉर्डर आने के लिए कहा था। साथ ही उसने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को भारत से अलग होने की सलाह भी दी थी।

टिकरी बॉर्डर पर पैसे को लेकर हुए झगडे में किसान प्रदर्शनकारी को उसके साथी ने ही पीट-पीटकर मार डाला

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीनों से नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन चल रहा है। टिकरी बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल एक 26 वर्षीय किसान की 2 अप्रैल की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोपित भी प्रदर्शनकारी ही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के बरनाला जिले का युवा किसान गुरप्रीत सिंह कई हफ्तों से किसान आंदोलन में सक्रिय था। वह अपने गाँव के ही किसान रणबीर सिंह उर्फ सट्टा सिंह के साथ टिकरी बॉर्डर पर ट्रॉली टेंट में ठहरा हुआ था। शुक्रवार को दोनों के बीच पैसों को लेकर झगड़ा हो गया।

बताया जा रहा है कि इसको लेकर गुस्साए रणबीर ने गुरप्रीत को लाठी से पीट-पीटकर बुरी तरह घायल कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गया। गुरप्रीत को घायल अवस्था में देखकर वहाँ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी उसे इलाज के लिए बहादुरगढ़ सिविल हॉस्पिटल ले गए। लेकिन गुप्तांगों समेत शरीर के कई अंगों में गंभीर चोट आने के कारण शुक्रवार रात को गुरप्रीत की अस्पताल में ही मौत हो गई।

शुक्रवार (3 अप्रैल 2021) रात करीब नौ बजे मामले की सूचना मिलने पर सेक्टर-6 थाना से SHO जयभगवान पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर बहस हुई, जिसके बाद रणबीर ने गुरप्रीत को लाठी से पीट-पीटकर घायल कर दिया। वहाँ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी किसानों ने गुरप्रीत को घायल अवस्था में बहादुरगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसकी मौत हो गई। हमने शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।

पुलिस ने मृतक युवक के परिजनों को भी इसके बारे में सूचित कर दिया है। पुलिस ने मृतक के चाचा नाहर सिंह की शिकायत पर उनके ही गाँव के निवासी रणबीर उर्फ सट्टा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।