माँ दुर्गा को बताया ‘मू*ने वाली देवी’, देवी काली को कहा- ‘डरावना’: पुलिस ने अर्चना बौद्ध को पकड़ा, भीम कथावाचन के नाम पर कैसे फैला रही थी हिंदू घृणा

                    (साभार: यूट्यूब @Archana Singh Buddh Hathras, Gautam Studio Gyanpurwa)

खुद को भीम कथा वाचक बताने वाली अर्चना सिंह बौद्ध कथा के मंच से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का पाठ पढ़ाकर वैचारिक जहर परोस रही है। अर्चना सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह भगवान हनुमान, भगवान गणेश, माँ दुर्गा और माँ काली को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियाँ करती नजर आ रही है।

इस वायरल वीडियो में वह माँ दुर्गा के आठ हाथ, भगवान गणेश के सिर, माँ काली के रुप और भगवान हनुमान के चेहरे का ना केवल मखौल उड़ा रही है बल्कि वह लोगों से कह रही है कि इससे अच्छा तो घर में हीरो-हीरोइन की फोटो लगाओ। हिंदू आस्था को नीचा दिखाकर सस्ती तालियाँ बटोरने की कोशिश कर रही अर्चना का यह वीडियो उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहाँ मलखानपुर गाँव में अंबेडकर पार्क में भीम कथा का आयोजन किया गया था।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले हैं और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वायरल वीडियो के आधार पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रसूलाबाद कोतवाली पहुँचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन गुलाब राम नामक व्यक्ति द्वारा कराया गया था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और कथावाचक अर्चना सिंह बौद्ध और कार्यक्रम आयोजक गुलाब राम को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन से ली गई थी लेकिन कथा के दौरान तय की गई मर्यादाओं और शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि उसे जमानत भी दे दी गई है।

काली किसी बच्चे के सामने आ जाए तो एक महिने तक उसका बुखार ना उतरे: अर्चना सिंह बौद्ध

वायरल वीडियो में वह कह रही है, “आठ हाथ हैं दुर्गा महारानी के, हमें तो यहीं नहीं पता है भईया आठ हाथ वाली देवी पैदा हुई होंगी तो कैसे पैदा हुईं होंगी। जिस समय दुर्गा महारानी की मम्मी ने उनको जनम दिया होगा, पता नहीं उनके प्राण कहा रहें होंगे? पता नहीं कौन सा हॉस्पिटल बना है, उस हॉस्पिटल में आठ हाथ वाली देवी का जन्म हुआ होगा। इनके अम्मा-दादा तक का पता नहीं है कि इनके अम्मा-दादा हैं कौन? अगर आठ हाथ वाली देवी तुम्हारे घर में पैदा हो जाए फिर तुम्हें कैसी लगेगी?”
वीडियो में वह आगे कहती है, “तुम लोगों को तो दो हाथ वाले पैदा हों तो दो-दो महिना उठती नहीं, अरे आठ-आठ हाथ वाली देवी मईया कैसे पैदा हुईं होंगी? दिमाग लगाओ तुमलोग अपना, अगर आठ हाथ वाली देवी, ऐसी लड़की तुम्हारे घर में आ जाए तो अच्छी लगेगी? अच्छी नहीं लगेगी ना तो फिर इनकी अपने घर में फोटो और इनकी पूजा भी नहीं करनी चाहिए आप लोगों को। अब हनुमान की कोई सूरत है? हनुमान का मुँह कैसा है? अगर हनुमान जैसा संतान तुम्हारे घर में मिल जाए तो तुम्हें कैसी लगेगी वो संतान? ऐसा गलफुल्ला जैसा हो जाए तुम्हारे घर में तो तुम्हें वो बेटा कैसा लगेगा, अच्छा लगेगा? अच्छा लगेगा आपको हनुमान जैसा लड़का नहीं अच्छा लगेगा ना।”
माँ काली पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए वह कह रही है, “काली मईया का तो रूप ही ऐसा है कि बच्चे को बुखार इतनी जोर का आएगा कि एक महीने तक बुखार नहीं जाएगा उसका है ना? और आप ऐसी काली मईया की पूजा करती हो…अरे अच्छे लोगों का अपने घर में फोटो लगाओ, बाबा साहब का लगाओ, बड़े सुंदर थे बाबा साहब।”

भगवान गणेश का मजाक उड़ाते हुए हीरो-हीरोइन की फोटो लगाने की कही बात

अर्चना बौद्ध की यह घटिया बातें यहीं नहीं रुकी, वह आगे भगवान गणेश का भी मजाक उड़ाती है और कहती है, “अब गणेश भगवान हैं हमे तो यहीं समझ में नहीं आता कि गणेश भगवान आधे इंसान हैं और आधे जानवर हैं अब हमे यहीं नहीं पल्ले पड़ता है कि देखो हाथी का बच्चा भले छोटा हो लेकिन गर्दन उसकी छोटे पर भी मोटी होती है? अब गणेश की गर्दन और हाथी की गर्दन कैसे मैच खाई होगी?”
आगे कहती है, “इंसान की गर्दन तो इतनी सी होती है चार इंची की और गणेश भगवान के ऊपर का जो सर है वो हाथी का लगा है। अब हाथी का बच्चा भी तुम समझ लो तो गर्दन उसकी मोटी होती, लेकिन गणेश भगवान से कैसे मैच खा गया हाथी का सर? सोचने वाली बात है ना। अब हाथी का सर है और पेट इंसान का है अब हमें यहीं नहीं समझ आता है कि वो भोजन कौन सा करते होंगे हाथी वाला करते होंगे या इंसान वाला भोजन खाते होंगे? इन देवी-देवताओं की ना सूरत है, ना अकल है ना शक्ल है, इनसे अच्छा तो आप हीरो-हीरोइन की फोटो लगा लो ताकि अच्छे-अच्छे बच्चे तो पैदा हों।”

कौन है अर्चना सिंह बौद्ध?

अर्चना सिंह हाथरस की रहने वाली है। उसके वीडियोज यूट्यूब पर कई चैनल्स ने अपलोड किए है। हालाँकि, उसका अपना भी एक चैनल है जिसका नाम ‘Archana Singh Buddh Hathras’ है। इस चैनल पर उसके ऐसे ही कुल 554 वीडियोज अपलोड हैं। उसके करीब 4,000 सब्सक्राइबर्स हैं। उसका यह चैनल 25 सितंबर 2019 से चल रहा है।
इसके अलावा एक और चैनल है, जिससे उसके वीडियो शेयर किए गए हैं। इस चैनल का नाम ‘Gautam Studio Gyanpurwa’ है। इस पर अर्चना के अलावा ज्ञानसिंह बौद्ध कासगंज नाम के एक व्यक्ति का भी वीडियो शेयर किया गया है।
वीडियो में वह कह रहा है, “पूड़ी-कचौरी करे गोलगुला और करो गुलभत्ता और पथरा पूज के आई ढोकरिया, ओन्हें चाट गए कुत्ता।” इस वीडियो के थंबनेल में माँ काली की फोटो है, जिसके सामने एक कुत्ते को उन्हें चाटते हुए दिखाया गया है।
इस चैनल पर अर्चना का एक और वीडियो भी है, जिसके थंबनेल में लिखा है, ‘मूतादेवी का अविष्कार’ और नीचे लिखा है ‘कैसे मू**ने वाली देवी का जन्म हुआ।’ वीडियो मे वह माँ दुर्गा के बारे में उल्टी-सीधी बातें कर रही है।

महिषासुर को बताया राजा, माँ दुर्गा को बताया राक्षस की पत्नी

इस लड़की का इसी तरह का एक वीडियो यूट्यूब पर भी अपलोड है। इस वीडियो में वह कह रही है, “हमारा एक राजा हुआ यादव वंश में, जिनका नाम था महिषासुर राजा। जो हमारे समाज के लोग नौ दुर्गा मनाया करते हैं, आखिर ये नौ दुर्गा क्यों मनाया जाता है? कौन थी वो नौ दुर्गा? क्योंकि हमारी माताओं बहनों जो बिहार का राजा था बड़ा वीर बलवान, यादव समाज में जन्मा महिषासुर महाराज।”

वह कहती है, “महिषासुर राजा जब पहाड़ों से कूदा करते थे तो ऐसा लगता था, जमीन चटक जाती थी, ऐसा बल था उनके अंदर। इन मनुवादी लोगों को अच्छा नहीं लगा, इनलोगों को हमारे राजाओं का राज-पाठ अच्छा नहीं लगा तो इनलोगों ने क्या काम किया? ब्राह्मण समाज ने लड़की थी, जिसका नाम था दुर्गा। दुर्गा की शादी, इन्होंने सुंदर-सुंदर लड़कियाँ हमारे राजाओं-पुरखों को लाकर दी, हमारे राजा-पुरखे उन सुंदर-सुंदर लड़कियों में मस्त हो गए लेकिन ये नहीं पता था हमारे राजाओं को कि हमारे साथ में दुर्घटना भी घट सकती है।”

महिषासुर को माँ दुर्गा ने शराब पिलाकर मारा: अर्चना सिंह बौद्ध

वीडियो में वह आगे कहती है, “अपनी लड़की ब्राह्मण लोगों ने महाराज महिषासुर के साथ में शादी कर दी और उस लड़की से कहा देखो हम तुम्हारी शादी कर रहे हैं, लेकिन तुम्हें वहाँ घर नहीं पालना है तुम्हें पानी नहीं पीना है जब तक वो राजा मर ना जाए। दुर्गा की जब शादी महिषासुर के साथ हुई, यादव वंश का राजा था महिषासुर। महिषासुर महाराज के साथ में शादी होने के बाद ये मनुवादी विदेश से शराब बनाकर के लेते आए।”

उसने कहा, “जब शराब बनाकर लेते आए, वो अपनी लड़कियों को शराब दे दी बनाकर के और कहा कि इसे भगवान का प्रसाद बताकर के तुम्हें पिलाना होगा तो महिषासुर से वो लड़की दुर्गा बोली कि ये देखिए ये हमारे यहाँ भगवानों का प्रसाद है। ये प्रसाद तो पी लीजिए तो तुम्हें भगवान की तरफ से आराम मिलेगा। दुर्गा ने उसे इतना नशा करा दिया कि राजा को होश नहीं रहने दिया। एक दिन हाथों में तलवार उठाकर के राजा महिषासुर का बेहोशी में कत्ल कर दिया। कत्ल करने के बाद मेरे धम्मबंधुओं उससे पहले दुर्गा ने क्या काम किया था?”

माँ दुर्गा और महिषासुर के बेटे ने किए दुर्गा के नौ टुकड़े

वह कह रही है, “कत्ल करने के बाद दुर्गा ने महाराजा महिषासुर को मारने के बाद ये महिषासुर की गर्भवती हो गई थी, इसके बाद इसको एक लड़का पैदा हुआ, उसी लड़के का नाम था लांगुरिया। बड़े होने के बाद वो लड़का पूछने लगा कि माँ आज तक तुमने मेरे पिता का नाम नहीं बताया, मेरे पिता कहाँ हैं? तो दुर्गा बताया नहीं करती थी। एक दिन वो लड़का पीछे पड़ गया, आज मेरे पिता जी का पता बताओ।”

अर्चना आगे कहती है, “दुर्गा ने बताया कि तेरे पिता को मैंने मार दिया, जब मारने की खबर सुनी तो उसी लड़के ने हाथों में तलवार उठाकर के दुर्गा के नौ टुकड़े नौ दिशा में जब फेंक दिए, नौ टुकड़े कर के फेंके तब भी मनुवादी लोगों ने अपनी लड़की का पीछा नहीं छोड़ा, तब भी उन नौ टुकड़ों को इकट्ठा कर के नौ नाम दे दिए और कहा इसकी पूजा करो। उसे कहा गया नौ दुर्गा। उसकी हमारी माता-बहनें नौ दुर्गा कह कर पूजा करती हैं यानी तुम्हारे पुरखों का कत्ल किया गया और आप लोगों से उनकी पूजा करवाई गई।”

हिंदुओं के त्यौहार ना मनाने के लिए भड़काया

वीडियो में वह लोगों को भड़काते हुए कहती है, “मेरे समाज के लोगों आप जितने हिंदूवादी सनातनी त्यौहार करते हैं वो हमारे त्यौहार नहीं हैं याद रखना जो जो त्यौहार आता है, उसमें कोई ना कोई तुम्हारे राजाओं-पुरखों का कोई ना कोई रहस्य जरूर छिपा हुआ है। हमारे राजाओं को छल-कपट से मारने का काम किया। धीरे-धीरे इनलोगों ने हमारे दस राजा मार दिए गए, दस राजा मारने के बाद इन लोगों ने भारत पर कब्जा किया।”
वह सबको बताते हुए कहती है, “भारत भूमि बौद्धों की धरती थी, यहाँ हमारे राजा-पुरखों का राज रहा हमेशा और कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था लेकिन हमारी माताओं-बहनों 85% ज्यादा है, 15% कम है लेकिन भारत देश में शासन सत्ता किसका होना चाहिए 15% का होना चाहिए, लेकिन अभी किसका सत्ता चल रहा है? ये लोग ताक में है कि संविधान को खत्म कर दिया जाए। लोगों के दिल में संविधान चुभता है, जैसे काँटा पैर में चुभता है।”

मणिपुर हिंसा पर गीत गाते सत्ता चलाने वालों को कहा दुष्ट

इसी तरह मणिपुर हिंसा को लेकर भी उसका एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड है, जिसमें वह मणिपुर हिंसा का दोष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दे रही है और कह रही कि इन दुष्टों को धूल चटाना होगा। इस वीडियो में वो गाना गा रही है, “आग लगी है भारत में और सत्ता सो रही दिल्ली में, चप्पा-चप्पा राख हुआ है जाकर देखो मणिपुर में।” इस वीडियो के थंबनेल में प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी की फोटो लगी हुई है।

अर्चना ने सरोज सरगम से सीखा माँ दुर्गा का अपमान करना?

गौरतलब है कि इससे पहले मिर्जापुर पुलिस ने माँ दुर्गा पर आपत्तिजनक गाने के मामले में मुख्य आरोपित गायिका सरोज सरगम और उनके पति राममिलन बिंद को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी लोगों के भारी विरोध और सोशल मीडिया पर उठी माँगों के बाद की गई थी। सरोज सरगम ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने माँ दुर्गा के लिए वै$% और रं₹$ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश था। वह भी अर्चना की तरह ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काऊ और अभद्र टिप्पणी कर के पैसे बटोर रही थी। दरअसल इन लोगों का एक उद्देश्य तो ये होता है कि ये लोगों के अंदर से भगवान के प्रति आस्था को खत्म कर सकें और दूसरा उद्देश्य होता है पैसे कमाना, वो भी इस तरह की ओछी हरकतें कर के, क्योंकि ऐसे थंबनेल से ये लोगों को मजबूर करते है कि लोग इनके वीडियो को ओपन करें।

331करोड़ रूपए की मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहुल गाँधी के करीबी गुजरात कांग्रेस नेता तक पहुँची ED: Rapido ड्राइवर के ‘म्यूल अकाउंट’ से लेनदेन

आदित्य जुला के साथ राहुल गाँधी (फोटो साभार: X_AmitMalviya)
दिल्ली की गलियों में रैपिडो जैसे ट्रांसपोर्ट ऐप के जरिए अपनी बाइक चलाकर परिवार का गुजारा करने वाले एक ड्राइवर की जिंदगी में तूफान आ चुका है। रोजाना 500-600 रूपए कमाने वाले इस बाइक राइडर की जिंदगी 2 कमरों की झोपड़ी में कटती है, लेकिन उसके बैंक खाते में आठ महीनों में 331 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हो गया। दरअसल, ये कोई किस्मत का खेल नहीं था, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा जाल था, जिसके बाद में उसे खुद ही नहीं पता था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच ने खुलासा किया है कि ये ‘म्यूल अकाउंट’ अवैध सट्टेबाजी ऐप 1xBet से जुड़े काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल हुआ। और सबसे चौंकाने वाली बात इसी खाते से गुजरात यूथ कांग्रेस के नेता आदित्य जुला की नवंबर 2024 वाली उदयपुर की लग्जरी शादी पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए। जुला पर फर्जी सिग्नेचर और 17 अलग-अलग PAN नंबर्स इस्तेमाल करने का आरोप है।

ईडी की ये जाँच 1xBet के अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से शुरू हुई, जो दिसंबर 2023 में भारत सरकार द्वारा बैन कर दिया गया था। जाँच एजेंसी ने पाया कि 1xBet ने 6,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया, जिनमें यूजर्स से पैसे इकट्ठा कर उन्हें मल्टीपल पेमेंट गेटवे से घुमाया जाता था। कुल 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की लॉन्ड्रिंग का अनुमान है।

इसी चेन में दिल्ली के इस ड्राइवर का खाता फंस गया। 19 अगस्त 2024 से 16 अप्रैल 2025 तक उसके अकाउंट में अनजान सोर्स से बड़े-बड़े डिपॉजिट आते रहे, जो तुरंत संदिग्ध खातों में ट्रांसफर हो जाते।

ईडी अधिकारियों ने कहा, “ये क्लासिक म्यूल अकाउंट है। असली मालिक को पता भी नहीं चलता, लेकिन कानूनी कार्रवाई का खतरा हमेशा रहता है।” ड्राइवर को शायद कमीशन के लालच में या अनजाने में फँसाया गया।

युवा कांग्रेसी नेता की शादी में ₹1 करोड़ का खर्च

उदयपुर शादी का कनेक्शन सबसे बड़ा ट्विस्ट है। ताज अरावली रिसॉर्ट में हुई इस ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ पर 1 करोड़ रूपए से ज्यादा का खर्च इसी म्यूल अकाउंट से हुआ। ईडी ने पाया कि जुला ने रिसॉर्ट को कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए फर्जी सिग्नेचर इस्तेमाल किए। साथ ही ट्रैवल एजेंट को 18 लाख रुपये कैश और 17 फर्जी PAN नंबर्स दिए, ताकि बुकिंग एडजस्ट हो सके।

गुजरात यूथ कांग्रेस के अहम चेहरों में से एक है जुला

जुला गुजरात यूथ कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और राहुल गाँधी के करीबी माने जाते हैं। भाजपा आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने 01 दिसंबर 2025 को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर इसे हाईलाइट किया। उन्होंने लिखा, “ईडी जाँच में उदयपुर रॉयल वेडिंग का बड़ा खुलासा। रैपिडो ड्राइवर के खाते से 331 करोड़ का ट्रांजेक्शन और अब गुजरात यूथ कांग्रेस लीडर आदित्य जुला का नाम। फर्जी सिग्नेचर से टाज रिसॉर्ट को कॉन्ट्रैक्ट, 18 लाख कैश और 17 PAN नंबर्स। ये लॉन्ड्रिंग चेन का हिस्सा है।” मालवीय ने जुला की राहुल गाँधी के साथ फोटो भी शेयर की, जो वायरल हो गई।
फिलहाल, ईडी ने जुला को पूछताछ के लिए समन भेजा है और शादी से जुड़े परिवारों की जाँच तेज कर दी है। जाँच में ये भी पता लगाया जा रहा है कि क्या ये शादी लॉन्ड्रिंग का एंडपॉइंट थी या कवर-अप।

कैसे होता है म्यूल अकाउंट्स के जरिए पूरा खेल

म्यूल अकाउंट फ्रॉड का ये केस पूरे देश में फैले साइबर क्राइम का आईना है। म्यूल अकाउंट क्या है? सरल शब्दों में ये वो बैंक खाता होता है जो अपराधी काले धन को घुमाने के लिए ‘किराए’ पर लेते हैं। गरीब या बेरोजगार लोगों को 5-7% कमीशन का लालच देकर आधार, PAN, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। फिर OTP चुराकर या पासवर्ड से कंट्रोल ले लेते। छोटे ट्रांजेक्शन से शुरू कर बड़े पैसे घुसेड़ते हैं।
ड्राइवर के केस में भी यही पैटर्न दिखा- अनजान सोर्स से डिपॉजिट और तुरंत सारे पैसे ट्रांसफर। ईडी अधिकारियों के मुताबिक, 1xBet ने ऐसे हजारों अकाउंट्स का नेटवर्क बनाया था। भारत में ऑनलाइन बेटिंग का बाजार 2023 में 1 लाख करोड़ का था, लेकिन ये ज्यादातर अवैध रूप से था। सरकार ने बैन भी लगाया लेकिन लॉन्ड्रिंग चेन शायद अब भी बरकरार है।

कई बड़े सितारे भी लपेटे में

ये पहला केस नहीं। 1xBet जाँच में ही पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन और सुरेश रैना के करोड़ों के एसेट्स अटैच हो चुके हैं। ईडी ने कई क्रिकेटरों और सेलिब्रिटीज से पूछताछ की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 1xBet ने सरोगेट ब्रैंडिंग और ऐड्स से भारतीय यूजर्स को टारगेट किया। कुल लॉन्ड्रिंग 1,000 करोड़ रूपए से ऊपर।

सामने आ चुके हैं म्यूल अकाउंट से जुड़े कई केस

म्यूल अकाउंट से जुड़े कई केस सामने आ चुके हैं। इसी तरह के केस में हैदराबाद में 120 म्यूल अकाउंट्स का गैंग पकड़ा गया था, जिसमें बैंक अफसर भी शामिल थे। वहीं, बेंगलुरु साइबर पुलिस ने गुजरात के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो फेक कंपनियाँ बनाकर डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करता था। सीबीआई ने 8.5 लाख म्यूल अकाउंट्स का पर्दाफाश किया, जिसमें बैंक स्टाफ ने मदद की थी।
इसी तरह वाराणसी के स्लम एरिया में SIM फ्रॉड से लोग फँसाए गए और कश्मीर में 7,000 अकाउंट्स सीज हुए। एक अन्य मामला चाइनीज हैंडलर्स से जुड़ा था, जिसमें 250 करोड़ फ्रॉड में तीन लोग पकड़े गए ते। ये लोग म्यूल अकाउंट्स सप्लाई करते थे। ऐसे ही एक मामले में लखनऊ में ‘युवा ग्लोबल नेटवर्क’ का हिस्सा बने युवा जेल पहुँच चुके हैं, तो मुंबई में 3.81 करोड़ के केस में KYC उल्लंघन केस में भी तीन गिरफ्तार हो चुके हैं।

अपराधियों के जाल में कैसे फँसते हैं आम लोग?

आम आदमी ज्यादातर लालच या अनजान में ऐसे मामलों में फँस जाते हैं। गाँवों और छोटे शहरों में ये ज्यादा होता है। किसी व्यक्ति का फोन आता है, “भाई, खाली खाता इस्तेमाल करेंगे, कमीशन मिलेगा।” और फिर लोग अपनी जानकारियाँ उनके साथ शेयर कर देते हैं। थोड़े से रुपयों यानी कमीशन के लालच में वो ऐसे गिरोह के हाथों फँस जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें जेल की हवा तक खानी पड़ती है। सर्वे बताते हैं कि ग्रामीण भारत में 40% फ्रॉड कमीशन के चक्कर में होते हैं।
ईडी का कहना है, “ये चेन रिएक्शन है। एक म्यूल से पैसे दूसरे में घूमते हैं, ट्रेल गुम हो जाती है।” डिजिटल बैंकिंग के जमाने में रेगुलेटरी होल्स से ये आसान हो गया है।
इस केस से सवाल भी उठ रहे हैं कि एनजीओ फंडिंग से लेकर पॉलिटिकल शादियों तक काला धन कैसे घुसता है। ईडी अब बड़े नेटवर्क की तह तक पहुँच रही है। इस मामले में जुला जैसे नाम आने से राजनीतिक घमासान तेज हो गया हो गया है। बहरहाल, अभी जाँच चल रही है, जो जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस मामले की व्यापकता सामने आती जाएगी।

भारत में वामपंथ के पूरे हुए 100 साल, स्वतंत्रता संग्राम का विरोध, चीन का समर्थन और सैंकड़ों सुरक्षाकर्मियों की हत्या: कम्युनिस्टों की ‘विदेशी विचारधारा’ ने देश को हिंसा की आग में जलाया


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के 100 साल पूरे होने पर इसके नेता और समर्थक जश्न और पुरानी यादों के साथ इस मौके को मना रहे हैं। हालाँकि, सौ साल का सफर सिर्फ यादें ताजा करने के लिए नहीं होता, बल्कि यह समय आत्म-मंथन और गंभीर मूल्यांकन का भी है। राजनीतिक आंदोलन केवल अपनी उम्र से प्रासंगिक नहीं बनते, बल्कि वे अपने परिणामों (कामयाबियों) से अपनी अहमियत साबित करते हैं।

पिछली एक सदी में, भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन ने खुद को गरीबों, मजदूरों और किसानों की आवाज के रूप में पेश किया है। इसने हमेशा यह दावा किया कि वह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक लंबी अवधि का समाधान है और नैतिक रूप से अन्य राजनीतिक परंपराओं से बेहतर है। हालाँकि, अपनी इस छवि के बावजूद, आज कम्युनिस्ट आंदोलन चुनावी रूप से सिमट गया है, विचारधारा के मामले में काफी सख्त (जड़) हो गया है और भारत की सामाजिक व आर्थिक सच्चाइयों से पूरी तरह कटता जा रहा है।

इससे एक ऐसा अनिवार्य सवाल खड़ा होता है जिसे महज नारों या अतीत की पुरानी यादों के सहारे टाला नहीं जा सकता:

क्या भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन ने वाकई भारत की सेवा की, या फिर इसने देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाया?

यह लेख इस सवाल का जवाब किसी खोखली बयानबाजी या वैचारिक भेदभाव के आधार पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड, राजनीतिक व्यवहार और ठोस परिणामों के जरिए देने की कोशिश करता है। क्योंकि 100 साल बीत जाने के बाद, कोई भी विचारधारा न तो बिना सोचे-समझे सम्मान की हकदार है और न ही बिना सोचे-समझे तिरस्कार की, बल्कि वह एक ईमानदार ऑडिट (सच्चे मूल्यांकन) की हकदार है।

साम्यवाद का क्षेत्र: भारतीय नहीं, स्वदेशी कभी नहीं

कम्युनिज्म (Communism) का उदय भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक या आर्थिक हकीकत से नहीं हुआ था। यह एक यूरोपीय वैचारिक उत्पाद था, जो 19वीं सदी के यूरोप की खास परिस्थितियों में पैदा हुआ था। वे परिस्थितियाँ थीं- तेजी से होता औद्योगिकीकरण, फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर और पूंजीपतियों व औद्योगिक श्रमिकों के बीच गहरी वर्गीय खाई।

इस सिद्धांत को कार्ल मार्क्स ने विकसित किया था, जिन्होंने यूरोपीय पूंजीवाद का विश्लेषण किया, और बाद में इसे व्लादिमीर लेनिन ने अपनाया, जिन्होंने सत्ता हथियाने के लिए एक कड़े नियंत्रण वाले और ‘हरावल दस्ते’ (vanguard) के नेतृत्व वाली क्रांति की वकालत की थी।

इन दोनों विचारकों (मार्क्स और लेनिन) ने ऐसे समाजों में काम किया जो एक जैसे थे और जहाँ उद्योग मुख्य थे। वहाँ इंसान की असली पहचान उसकी आर्थिक स्थिति या ‘क्लास’ से होती थी। उनके काम करने का तरीका इन तीन बातों पर टिका था।

शोषक और शोषित की साफ पहचान: यानी समाज में एक पक्ष हमेशा जुल्म करने वाला और दूसरा जुल्म सहने वाला होता है।

न्याय के लिए हिंसा का रास्ता: यानी इंसाफ पाने के लिए पुरानी व्यवस्था को हिंसक तरीके से तोड़ना जरूरी है।

कड़ा सरकारी नियंत्रण: यानी गैर-बराबरी को खत्म करने के लिए सारी ताकत एक जगह (सरकार के हाथ में) रखना ही समाधान है।

लेकिन भारत की बनावट कभी ऐसी नहीं रही। भारतीय समाज हजारों साल पुरानी एक सभ्यता है, जो विविधताओं (अलग-अलग तरह के लोगों) से भरी हुई है। यहाँ समाज सिर्फ अमीर-गरीब (आर्थिक क्लास) से नहीं, बल्कि समुदायों, क्षेत्रों, धर्मों, भाषाओं और परंपराओं से बना है। इतिहास गवाह है कि भारत में सामाजिक बदलाव हमेशा सुधार आंदोलनों और आपसी तालमेल से आए हैं, न कि पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह तबाह करके।

भारत की इसी खूबी और कम्युनिस्ट विचारधारा के बीच मेल न होना ही वह कारण है, जिसकी वजह से कम्युनिज्म को यहाँ गहराई से नहीं अपनाया गया। एक ऐसी विचारधारा जो केवल ‘दो पक्षों’ (शोषक और शोषित) की लड़ाई पर टिकी हो, वह उस सभ्यता में नहीं टिक सकती जो विविधता और सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। भारतीय समाज लचीला और सबको साथ जोड़ने वाला है, जबकि कम्युनिज्म सख्त और बँटा हुआ है। यही विरोध भारत में कम्युनिज्म की असफलता की सबसे बड़ी वजह है।

देश से ऊपर विचारधारा: भारत छोड़ो आंदोलन और चीन युद्ध

नतीजे देने में फेल होने के साथ-साथ, भारतीय कम्युनिस्टों पर यह आरोप भी लगता है कि उन्होंने हमेशा देश के हित से ऊपर अपनी विचारधारा को रखा। इस विरोधाभास के दो बड़े उदाहरण गौर करने लायक हैं।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942): जब CPI देश के साथ खड़ी नहीं हुई

अगस्त 1942 में, भारत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा जन-आंदोलन देखा, जिसे ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ कहा गया। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में देश के हर कोने और हर समुदाय के लोग शामिल हुए थे। लेकिन ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी’ (CPI) ने इस आंदोलन का विरोध करने का फैसला किया।

CPI ने इस आंदोलन का साथ क्यों नहीं दिया? इसकी वजह जानकर आपको हैरानी हो सकती है। यह फैसला भारत के लिए नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा से जुड़ा था। उस समय दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ (रूस) पर जर्मनी ने हमला कर दिया था, जिसके बाद रूस ने ब्रिटेन के साथ हाथ मिला लिया। चूंकि ब्रिटेन अब रूस का साथी बन चुका था, इसलिए CPI ने इस युद्ध को फासीवाद के खिलाफ ‘जनता का युद्ध‘ (People’s War) घोषित कर दिया।

उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अंग्रेजों के खिलाफ कोई रुकावट पैदा न करें और हड़ताल या विरोध प्रदर्शनों को रोकें। यहाँ तक कि कई मामलों में कम्युनिस्ट नेताओं ने ब्रिटिश सरकार का सहयोग भी किया। जब लाखों भारतीय अंग्रेजों की गोलियाँ खा रहे थे और जेल जा रहे थे, तब CPI हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। ऐसा इसलिए नहीं था कि भारत आजादी के लिए तैयार नहीं था, बल्कि इसलिए था क्योंकि उनकी प्राथमिकता भारत नहीं, बल्कि ‘मॉस्को’ (रूस) के हित थे।

1962 का चीन युद्ध: चुप्पी, उलझन और चीन के प्रति लगाव

ठीक 20 साल बाद 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान फिर से वही पुरानी बात दोहराई गई। जब चीनी सेना ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमाओं को पार किया, तब पूरे देश को राजनीतिक एकता और स्पष्टता की उम्मीद थी। लेकिन इसके बजाय, कम्युनिस्ट आंदोलन के एक बड़े हिस्से ने चीन के प्रति हमदर्दी दिखाई और इस मामले पर गोल-मोल बात की। इसी विवाद की वजह से आगे चलकर CPI के दो टुकड़े हो गए और चीन का समर्थन करने वाले गुट ने अलग होकर ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)’ यानी CPM बना ली।

देशहित से अलग हटकर सोचना तो कम्युनिज्म की असफलता का सिर्फ एक हिस्सा था। इससे भी ज्यादा नुकसानदेह वह तरीका था, जिसमें कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ हिस्सों ने लोकतांत्रिक राजनीति का रास्ता ही छोड़ दिया और हथियारों के दम पर बगावत शुरू कर दी। 1960 के दशक के आखिर से, भारत में कम्युनिस्ट विचारधारा ने न केवल सरकार का विरोध किया, बल्कि उसके खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।

इसके बाद जो कुछ हुआ, वह मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि हिंसा का एक लंबा दौर था। इसमें हत्याएँ की गईं, नरसंहार हुए, सरकारी संपत्तियों को तबाह किया गया और आम जनता को डराया-धमकाया गया। इस हिंसा के शिकार कोई विदेशी शासक या बड़े पूंजीपति नहीं थे, बल्कि भारत के आम लोग थे। जनजातीय (आदिवासी), किसान, जनप्रतिनिधि, पुलिसकर्मी और दिहाड़ी मजदूर। भारतीय कम्युनिज्म की असली मानवीय कीमत को समझने के लिए नारों या किताबों को नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट उग्रवाद द्वारा छोड़े गए खून के निशानों को देखना होगा।

भारत में कम्युनिस्ट उग्रवादियों द्वारा किए गए 10 सबसे बड़े नरसंहार

दंतेवाड़ा नरसंहार (2010), छत्तीसगढ़– 6 अप्रैल 2010 को, ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (नक्सली)’ के लड़ाकों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बहुत ही सोची-समझी साजिश के तहत हमला किया। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 76 जवान शहीद हो गए थे। उग्रवादियों ने पहले बारूदी सुरंगों (landmines) का इस्तेमाल किया और फिर ऑपरेशन से लौट रहे जवानों पर अँधाधुँध गोलियाँ बरसा दीं। आजादी के बाद भारतीय सुरक्षा बलों पर हुआ यह अब तक का सबसे बड़ा और भयानक हमला माना जाता है। इस घटना के बाद देश में ‘नक्सलवाद’ के खिलाफ लड़ने के तरीके में बड़ा बदलाव आया।

झीरम घाटी नरसंहार (2013), छत्तीसगढ़- 25 मई 2013 को, नक्सली उग्रवादियों ने बस्तर के झीरम घाटी इलाके में कॉन्ग्रेस पार्टी के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में वरिष्ठ राजनेताओं समेत 27 लोगों की जान चली गई। नक्सलियों ने यह हमला उस समय किया जब नेता जनता के बीच जा रहे थे। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि माओवादी चुनाव लड़ने या लोकतंत्र में भरोसा रखने के बजाय, जनता द्वारा चुने गए नेताओं को खत्म करने की रणनीति पर काम करते हैं। इस हमले की पूरी देश में निंदा हुई और इसे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला माना गया।

नयागढ़ शस्त्रागार हमला (2008), ओडिशा- फरवरी 2008 में, नक्सली लड़ाकों ने ओडिशा के नयागढ़ में पुलिस के शस्त्रागार (जहाँ हथियार रखे जाते हैं) पर एक साथ मिलकर रात में हमला बोला। इस हमले में 15 पुलिसकर्मी मारे गए, भारी मात्रा में हथियार लूट लिए गए और सरकारी इमारतों को तबाह कर दिया गया। इस घटना ने दिखाया कि उग्रवादी कितने खतरनाक और बड़े हमले करने की ताकत रखते हैं। इस लूट के बाद उस इलाके में नक्सलियों के पास हथियारों की ताकत काफी बढ़ गई।

सुकमा हमला (2017), छत्तीसगढ़- 24 अप्रैल 2017 को, सुकमा जिले के चिंतालनार इलाके में नक्सलियों ने CRPF की एक टीम पर अचानक हमला कर दिया, जिसमें 25 जवान शहीद हो गए। उग्रवादियों ने इस हमले में देशी बमों (IED) और बहुत करीब से गोलीबारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने वहाँ के मुश्किल रास्तों और खुफिया जानकारी के लीक होने का फायदा उठाया। इस घटना ने यह दिखाया कि सालों से चल रहे अभियानों के बावजूद, नक्सली उग्रवाद की ताकत अभी भी खत्म नहीं हुई है।

अरनपुर IED हमला (2023), छत्तीसगढ़- अप्रैल 2023 में, नक्सली उग्रवादियों ने दंतेवाड़ा के अरनपुर इलाके में एक प्रेशर IED (बारूदी सुरंग) में धमाका किया। इस हमले में ‘डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड’ (DRG) के 10 जवान और एक नागरिक ड्राइवर की जान चली गई। उग्रवादियों ने एक ऐसे वाहन को निशाना बनाया जो उग्रवाद विरोधी अभियान से लौट रहा था। यह घटना एक बार फिर नक्सलियों की उस रणनीति को दिखाती है, जिसमें वे सार्वजनिक सड़कों पर बिना सोचे-समझे बमों का इस्तेमाल करते हैं।

सेनारी गाँव नरसंहार (1999), बिहार- मार्च 1999 में, ‘माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर’ (MCC) ने बिहार के सेनारी गाँव में 34 आम लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। मरने वाले ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के थे। उग्रवादियों ने इन लोगों को कतार में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था और इसे ‘अमीर-गरीब की लड़ाई’ (क्लास स्ट्रगल) बताकर सही ठहराया। इस घटना ने नक्सलियों के नारों और उनकी असलियत के बीच के अंतर को साफ कर दिया।

बारा नरसंहार (1992), बिहार- फरवरी 1992 में, नक्सली उग्रवादियों ने गया जिले के बारा गाँव पर हमला किया और 37 ग्रामीणों की जान ले ली। निहत्थे ग्रामीणों के खिलाफ वामपंथी चरमपंथी हिंसा की यह शुरुआती बड़ी घटनाओं में से एक थी। इसी घटना के बाद बिहार में हिंसा और बदले का एक लंबा दौर शुरू हुआ जिसने राज्य को अस्थिर कर दिया।

लातेहार पुलिस वैन ब्लास्ट (2016), झारखंड- जुलाई 2016 में, नक्सलियों ने झारखंड के लातेहार जिले में एक लैंडमाइन धमाका किया, जिसमें गश्ती वाहन में सवार आठ पुलिस अधिकारी शहीद हो गए। यह हमला ग्रामीण इलाकों में पुलिस और सरकारी व्यवस्था को कमजोर करने की उनकी सोची-समझी कोशिश का हिस्सा था।

सुकमा रोड-ओपनिंग पार्टी हमला (2018), छत्तीसगढ़- मार्च 2018 में, सुकमा जिले में नक्सलियों ने CRPF की उस टीम पर हमला किया जो सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगी थी। इस हमले में नौ जवान शहीद हुए। उग्रवादियों ने विकास के कामों को रोकने के लिए जानबूझकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया, क्योंकि वे जनजातीय क्षेत्रों में सड़कों और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के खिलाफ हैं।
गिरिडीह लैंडमाइन ब्लास्ट (2007), झारखंड- अक्टूबर 2007 में, नक्सलियों ने गिरिडीह जिले में एक आम नागरिक वाहन के नीचे लैंडमाइन धमाका किया, जिसमें 14 लोग मारे गए। इस घटना ने दिखाया कि नक्सली हिंसा कितनी अंधी है, जहाँ सरकार को निशाना बनाने के चक्कर में अक्सर आम नागरिक अपनी जान गँवा देते हैं।

सौ साल, कोई सुधार नहीं

100 साल पूरे होने के बाद, भारतीय कम्युनिज्म का मूल्यांकन सिर्फ उनके इरादों, सिद्धांतों या भाषणों से नहीं किया जा सकता। इसका फैसला उनके रिकॉर्ड से होना चाहिए। वह रिकॉर्ड बताता है कि यह एक ऐसी विचारधारा है जो भारत के बाहर से आई, जिसने भारतीय समाज को कभी नहीं समझा, देश के हितों से ऊपर विदेशी ताकतों को रखा और देश से ऊपर हमेशा अपनी विचारधारा को चुना। जब चुनावों में उनकी ताकत कम हुई, तो इस आंदोलन के कुछ हिस्सों ने लोकतंत्र का रास्ता छोड़ दिया और हिंसा अपना ली। पीछे रह गए हजारों मृत नागरिक, शहीद जवान और तबाह हुए परिवार।
यह कहानी किसी ऐसी विचारधारा की नहीं है जो परिस्थितियों की वजह से हार गई। यह उस विचारधारा की कहानी है जो इसलिए फेल हो गई क्योंकि वह भारत की हकीकत, यहाँ की विविधता और लोकतांत्रिक सोच के साथ तालमेल नहीं बिठा सकी। इसलिए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होना जश्न का नहीं, बल्कि हिसाब-किताब का मौका है। इन 100 सालों में कम्युनिज्म ने न तो गरीबों को आजाद किया, न लोकतंत्र को मजबूत किया और न ही देश की रक्षा की। इसने सिर्फ एक बात साबित की है, एक बाहर से आई विचारधारा जो खुद को देश से ऊपर रखती है, वह आखिर में देश और खुद- दोनों को नुकसान ही पहुँचाती है।

जूनागढ़ के AAP अध्यक्ष गोपाल इटालिया के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR, पुलिस स्टेशन में किया महिला अफसर के पैरों में गिरने का ड्रामा

                                          गोपाल इटालिया का ड्रामा (साभार: ऑपइंडिया गुजराती)
गुजरात के जूनागढ़ जिले के विसावदर तालुका स्थित मंडावद में मूंगफली खरीद केंद्र पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और केंद्र पर काम कर रहे श्रमिकों के बीच तीखा झड़प हो गया। इस घटना के बाद एक मजदूर की पत्नी के साथ कथित तौर पर जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और उत्पीड़न के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपितों में AAP के जिला अध्यक्ष हरेश सावलिया का नाम भी शामिल है।

मामले में पुलिस द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद AAP विधायक गोपाल इटालिया पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ रविवार (28 दिसंबर 2025) को पुलिस थाने पहुँचे। दरअसल, हरेश और अन्य आरोपितों को अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। इसी दौरान थाने में एक महिला पुलिस अधिकारी और गोपाल इटालिया के बीच तीखी बहस हो गई। AAP समर्थकों ने भी हंगामा किया जिसके चलते स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस अधिकारी ने इटालिया और उनके समर्थकों से शांत और सम्मानजनक तरीके से बात करने का आग्रह किया लेकिन इटालिया काफी आक्रोशित हो गए। इस दौरान वे पार्टी कार्यकर्ताओं के उकसाने पर महिला पुलिस अधिकारी के पैरों में गिर पड़े। महिला अधिकारी ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई और वहाँ से चली गईं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में गोपाल इटालिया बार-बार यह कहते सुने जा सकते हैं कि ‘झूठी शिकायत दर्ज की गई है’ और वे पुलिस से सबूत दिखाने की माँग करते नजर आए।

इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए विसावदर के ASP रोहित डागर ने बताया कि संबंधित मूंगफली खरीद केंद्र पर उस समय खरीद प्रक्रिया चल रही थी जब AAP के नेता और कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे। मूंगफली को बोरियों में भरने जैसे किसी छोटे मुद्दे को लेकर वहाँ मौजूद श्रमिकों से उनकी बहस शुरू हो गई। बहस धीरे-धीरे हिंसक रूप लेती चली गई। आरोप है कि इस दौरान एक मजदूर के साथ मारपीट की गई, उसकी पत्नी को धक्का दिया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज होने के बाद MLA गोपाल इटालिया ने हरेश सावलिया और दूसरे आरोपितों को माला पहनाई और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ रैली के रूप में पुलिस स्टेशन पहुँचे। शिकायत दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इटालिया की देखरेख में नाटक करने के लिए पुलिस स्टेशन पहुँचे। शिकायत दर्ज होने के बाद इटालिया ने थाने में प्रदर्शन किया और वहाँ पहुँचकर BJP पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला किसानों की आवाज उठाने वालों को जेल में डालने की साजिश है, जिसे BJP ने रचा है।

हालाँकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मजदूरों के खिलाफ अपराध करने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। वहीं, गोपाल इटालिया का आरोप है कि कानून का गलत इस्तेमाल कर झूठे अत्याचार और उत्पीड़न के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

इस मामले में जूनागढ़ के पुलिस अधीक्षक (SC/ST सेल) रविसेज सिंह परमार ने आरोपितों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 75(2), 115(2), 296(B), 351(33) और 54 के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(R)(S) भी लगाई गई हैं। पुलिस ने हरेश सहित तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और मामले की आगे की जाँच जारी है।

एक दिन में सुप्रीम कोर्ट के दो निर्णय : दोनों के लिए दबाव में आ गया कोर्ट; अब रोहिंग्या के लिए भी रेड कारपेट बिछा सकता है

सुभाष चन्द्र

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस अगस्टीन मसीह की पीठ ने एक ही दिन में अरावली हिल्स और कुलदीप सेंगर के बारे में जैसे निर्णय दिए उनसे साफ़ प्रतीत होता है कि सुप्रीम कोर्ट जनता के विद्रोह के दबाव में आ गया और एक संदेश आम जनता को दे दिया कि अगर हमसे अपने मत अनुसार निर्णय चाहिए तो आंदोलन करो  अब कल को रोहिंग्या भी हिंसक प्रदर्शन करे तो कोई बड़ी बात नहीं है सूर्यकांत जी उनके लिए रेड कारपेट बिछा दें।अरावली हिल्स के मामले तो जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने चीफ जस्टिस गवई, जस्टिस के वी चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया के 20 नवंबर के निर्णय पर रोक लगा कर एक तरह साफ़ कह दिया कि उन्होंने “गलत निर्णय” दिया इसके लिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जनता के प्रदर्शनों पर  स्वतः संज्ञान लेकर नए सिरे से सुनवाई की और आगे खनन पर रोक लगा दी जो केंद्र सरकार पहले ही लगा चुकी है गवई की बेंच ने कहा कि 100 मीटर से ऊपर की पहाड़ी ही अरवली हिल्स का हिस्सा होंगी और सिर्फ 8.7% पहाड़ ही हैं

लेखक 
चर्चित YouTuber 
कुलदीप सेंगर के विषय में भी इसी पब्लिक प्रेशर में आ गए और हाई कोर्ट के सेंगर की सजा को निलंबित करने वाले और जमानत देने वाले आदेश पर रोक लगा दी और कहा "every finest judges are prone to errors” and judicial scrutiny is a part of the system. पीड़िता के वकील ने जब कहा कि Sengar was making hue and cry तो चीफ जस्टिस ने कहा “you are forgetting that he was convicted by the judiciary only; Don’t try to browbeat the judiciary”.

मजे की बात है कि सेंगर के केस में सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि "every finest judges are prone to errors” and judicial scrutiny is a part of the system. लेकिन अरावली हिल्स के केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में ही गलती मान ली अब आगे भी उसमे गलती होगी या सेंगर के केस में हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा कर गलती है तो फिर उसका Judicial scrutiny कौन करेगा

सेंगर को तो जमानत दी गई थी और सजा निलंबित हुई थी, फिर वो क्यों hue and cry करेगा, वह तो पीड़िता पक्ष की तरफ से सड़को पर की गई थी जिसके दबाव में सूर्यकांत आ गए। मैंने सेंगर की बेटी का इंटरव्यू देखा और उसकी बातें सुनकर आश्चर्य हुआ कि पीड़िता ने रेप का समय अपने बयानों में 3 बार बदला, एक बार दिन के 2 बजे बताया, फिर शाम के 6 बजे और तीसरी बार रात के आठ बजे AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता को बालिग बताया गया था लेकिन फिर भी केस का पोक्सो एक्ट में ट्रायल किया गया और सजा दी गई 

समस्या यह है कि हाई कोर्ट ने सेंगर की अपील 7 साल के लटका रखी है अगर निर्णय सुना दिया होता तो तो देखा जा सकता था कि क्या ट्रायल कोर्ट ने रेप का समय 3 बार बदलने पर कैसे संज्ञान लिया और कैसे नाबालिग मानकर सजा सुनाई

जिस तरह सड़कों पर हाई कोर्ट के निर्णय का विरोध किया गया और महमूद प्राचा का पीड़िता का वकील होना पूरी तरह प्रमाणित करता है कि इस मामले को राजनीतिक रंग दे दिया गया है महमूद प्राचा टीवी चैनल्स में आकर हिंदुओं और भाजपा के खिलाफ जहर उगलता है और राममंदिर के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी पलटने के लिए कोर्ट गया था जिसे Frivolous मानकर उसकी याचिका ख़ारिज हुई थी और एक लाख रुपए का दंड भी लगा था

पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी ने अपने भाई से किया निकाह, 26 दिसंबर को रावलपिंडी में हुआ कार्यक्रम:


पाकिस्तान की फौज के मुखिया फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी माहनुर का निकाह अपने भतीजे से करवा दिया है। पाकिस्तानी पत्रकारों ने इसकी पुष्टि की और पत्रकार जाहिद गिश्कोरी ने X पर इससे जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है। जाहिद ने कहा कि ये हाई प्रोफाइल निकाह पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुआ है। उन्होंने कहा, “ये निकाह उनके भाई कासिम मुनीर के बेटे के साथ हुई है।”

जाहिद गिश्कोरी ने बताया कि असीम मुनीर के भतीजे पहले सेना में कैप्टन थे और अब सिविल सर्विसेज में चले गए हैं। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में सेना के अधिकारियों के लिए सिविल सर्विसेज में कोटा होता है। और अब वो असिस्टेंट कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं।” उन्होंने इस निकाह में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, मरियम नवाज के साथ-साथ कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की पुष्टि की है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह निकाह 26 दिसंबर को रावलपिंडी में हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में परिवारों में निकाह होना आम है और वहाँ 60% से 70% निकाह खून के रिश्तों में होती हैं। इनमें से भी अधिकतर शादियाँ फर्स्ट कजन के बीच होती है और यह आँकड़ा दुनिया के औसत से करीब 10% अधिक है। 

पौष पुत्रदा एकादशी मंगलवार 30, दिसम्बर 2025

पौष शुक्ल एकादशी का नाम पुत्रदा है। उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
कथा ::एक बार की बात है, श्री युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! पौष शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा है। अब आप शांतिपूर्वक इसकी कथा सुनिए। इसके सुनने मात्र से ही वायपेयी यज्ञ का फल मिलता है।
द्वापर युग के आरंभ में महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महीजित नाम का राजा राज्य करता था, लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई।
वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुलाया और कहा- हे प्रजाजनों! मेरे खजाने में अन्याय से उपार्जन किया हुआ धन नहीं है। न मैंने कभी देवताओं तथा ब्राह्मणों का धन छीना है। किसी दूसरे की धरोहर भी मैंने नहीं ली, प्रजा को पुत्र के समान पालता रहा। मैं अपराधियों को पुत्र तथा बाँधवों की तरह दंड देता रहा। कभी किसी से घृणा नहीं की। सबको समान माना है। सज्जनों की सदा पूजा करता हूँ। इस प्रकार धर्मयुक्त राज्य करते हुए भी मेरे पुत्र नहीं है। सो मैं अत्यंत दु:ख पा रहा हूँ, इसका क्या कारण है?
राजा महीजित की इस बात को विचारने के लिए मंत्री तथा प्रजा के प्रतिनिधि वन को गए। वहाँ बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के दर्शन किए। राजा की उत्तम कामना की पूर्ति के लिए किसी श्रेष्ठ तपस्वी मुनि को देखते-फिरते रहे। एक आश्रम में उन्होंने एक अत्यंत वयोवृद्ध धर्म के ज्ञाता, बड़े तपस्वी, परमात्मा में मन लगाए हुए निराहार, जितेंद्रीय, जितात्मा, जितक्रोध, सनातन धर्म के गूढ़ तत्वों को जानने वाले, समस्त शास्त्रों के ज्ञाता महात्मा लोमश मुनि को देखा, जिनका कल्प के व्यतीत होने पर एक रोम गिरता था।
सबने जाकर ऋषि को प्रणाम किया। उन लोगों को देखकर मुनि ने पूछा कि आप लोग किस कारण से आए हैं? नि:संदेह मैं आप लोगों का हित करूँगा। मेरा जन्म केवल दूसरों के उपकार के लिए हुआ है, इसमें संदेह मत करो।
लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर सब लोग बोले- हे महर्षे! आप हमारी बात जानने में ब्रह्मा से भी अधिक समर्थ हैं। अत: आप हमारे इस संदेह को दूर कीजिए। महिष्मति पुरी का धर्मात्मा राजा महीजित प्रजा का पुत्र के समान पालन करता है। फिर भी वह पुत्रहीन होने के कारण दु:खी है।
उन लोगों ने आगे कहा कि हम लोग उसकी प्रजा हैं। अत: उसके दु:ख से हम भी दु:खी हैं। आपके दर्शन से हमें पूर्ण विश्वास है कि हमारा यह संकट अवश्य दूर हो जाएगा क्योंकि महान पुरुषों के दर्शन मात्र से अनेक कष्ट दूर हो जाते हैं। अब आप कृपा करके राजा के पुत्र होने का उपाय बतलाएँ।
यह वार्ता सुनकर ऋषि ने थोड़ी देर के लिए नेत्र बंद किए और राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत जानकर कहने लगे कि यह राजा पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य था। निर्धन होने के कारण इसने कई बुरे कर्म किए। यह एक गाँव से दूसरे गाँव व्यापार करने जाया करता था। एक समय ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन मध्याह्न के समय वह जबकि वह दो दिन से भूखा-प्यासा था, एक जलाशय पर जल पीने गया। उसी स्थान पर एक तत्काल की ब्याही हुई प्यासी गौ जल पी रही थी।
राजा ने उस प्यासी गाय को जल पीते हुए हटा दिया और स्वयं जल पीने लगा, इसीलिए राजा को यह दु:ख सहना पड़ा। एकादशी के दिन भूखा रहने से वह राजा हुआ और प्यासी गौ को जल पीते हुए हटाने के कारण पुत्र वियोग का दु:ख सहना पड़ रहा है। ऐसा सुनकर सब लोग कहने लगे कि हे ऋषि! शास्त्रों में पापों का प्रायश्चित भी लिखा है। अत: जिस प्रकार राजा का यह पाप नष्ट हो जाए, आप ऐसा उपाय बताइए।
उद्देश्य ::लोमश मुनि कहने लगे कि पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को जिसे पुत्रदा एकादशी भी कहते हैं, तुम सब लोग व्रत करो और रात्रि को जागरण करो तो इससे राजा का यह पूर्व जन्म का पाप अवश्य नष्ट हो जाएगा, साथ ही राजा को पुत्र की अवश्य प्राप्ति होगी। लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर मंत्रियों सहित सारी प्रजा नगर को वापस लौट आई और जब पौष शुक्ल एकादशी आई तो ऋषि की आज्ञानुसार सबने पुत्रदा एकादशी का व्रत और जागरण किया।
इसके पश्चात द्वादशी के दिन इसके पुण्य का फल राजा को दिया गया। उस पुण्य के प्रभाव से रानी ने गर्भ धारण किया और प्रसवकाल समाप्त होने पर उसके एक बड़ा तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ।
महिमा ::इसलिए हे राजन! इस पौष शुक्ल एकादशी का नाम पुत्रदा पड़ा। अत: संतान सुख की इच्छा हासिल करने वाले इस व्रत को अवश्य करें। इसके माहात्म्य को सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में संतान सुख भोगकर परलोक में स्वर्ग को प्राप्त होता है।
पुत्रदा एकादशी श्रावण शुक्ल मेँ भी पडती है ||
भगवान् नारायण की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तत्पश्चात निसंतान दमपत्ति नीचे दिए कवच का यथा सामर्थ्य पाठ करे संतान बाधा शांत होगी
वंश वृद्धिकरं दुर्गाकवचम्
भगवन् देव देवेशकृपया त्वं जगत् प्रभो ।
वंशाख्य कवचं ब्रूहि मह्यं शिष्याय तेऽनघ ।
यस्य प्रभावाद्देवेश वंश वृद्धिर्हिजायते ॥ १॥
॥ सूर्य ऊवाच ॥
शृणु पुत्र प्रवक्ष्यामि वंशाख्यं कवचं शुभम् ।
सन्तानवृद्धिर्यत्पठनाद्गर्भरक्षा सदा नृणाम् ॥ २॥
वन्ध्यापि लभते पुत्रं काक वन्ध्या सुतैर्युता ।
मृत वत्सा सुपुत्रस्यात्स्रवद्गर्भ स्थिरप्रजा ॥ ३॥
अपुष्पा पुष्पिणी यस्य धारणाश्च सुखप्रसूः ।
कन्या प्रजा पुत्रिणी स्यादेतत् स्तोत्र प्रभावतः ॥ ४॥
भूतप्रेतादिजा बाधा या बाधा कुलदोषजा ।
ग्रह बाधा देव बाधा बाधा शत्रु कृता च या ॥ ५॥
भस्मी भवन्ति सर्वास्ताः कवचस्य प्रभावतः ।
सर्वे रोगा विनश्यन्ति सर्वे बालग्रहाश्च ये ॥ ६॥
॥ अथ दुर्गा कवचम् ॥
ॐ पुर्वं रक्षतु वाराही चाग्नेय्यां अम्बिका स्वयम् ।
दक्षिणे चण्डिका रक्षेन्नैऋत्यां शववाहिनी ॥ १॥
वाराही पश्चिमे रक्षेद्वायव्याम् च महेश्वरी ।
उत्तरे वैष्णवीं रक्षेत् ईशाने सिंह वाहिनी ॥ २॥
ऊर्ध्वां तु शारदा रक्षेदधो रक्षतु पार्वती ।
शाकंभरी शिरो रक्षेन्मुखं रक्षतु भैरवी ॥ ३॥
कन्ठं रक्षतु चामुण्डा हृदयं रक्षतात् शिवा ।
ईशानी च भुजौ रक्षेत् कुक्षिं नाभिं च कालिका ॥ ४ ॥
अपर्णा ह्युदरं रक्षेत्कटिं बस्तिं शिवप्रिया ।
ऊरू रक्षतु कौमारी जया जानुद्वयं तथा ॥ ५॥
गुल्फौ पादौ सदा रक्षेद्ब्रह्माणी परमेश्वरी ।
सर्वाङ्गानि सदा रक्षेद्दुर्गा दुर्गार्तिनाशनी ॥ ६॥
नमो देव्यै महादेव्यै दुर्गायै सततं नमः ।
पुत्रसौख्यं देहि देहि गर्भरक्षां कुरुष्व नः ॥ ७॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं ऐं ऐं ऐं
महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती रुपायै
नवकोटिमूर्त्यै दुर्गायै नमः ॥ ८॥
ह्रीं ह्रीं ह्रीं दुर्गार्तिनाशिनी संतानसौख्यम् देहि देहि
बन्ध्यत्वं मृतवत्सत्वं च हर हर गर्भरक्षां कुरु कुरु
सकलां बाधां कुलजां बाह्यजां कृतामकृतां च नाशय
नाशय सर्वगात्राणि रक्ष रक्ष गर्भं पोषय पोषय
सर्वोपद्रवं शोषय शोषय स्वाहा ॥ ९॥
॥ फल श्रुतिः ॥
अनेन कवचेनाङ्गं सप्तवाराभिमन्त्रितम् ।
ऋतुस्नात जलं पीत्वा भवेत् गर्भवती ध्रुवम् ॥ १॥
गर्भ पात भये पीत्वा दृढगर्भा प्रजायते ।
अनेन कवचेनाथ मार्जिताया निशागमे ॥ २॥
सर्वबाधाविनिर्मुक्ता गर्भिणी स्यान्न संशयः ।
अनेन कवचेनेह ग्रन्थितं रक्तदोरकम् ॥ ३॥
कटि देशे धारयन्ती सुपुत्रसुख भागिनी ।
असूत पुत्रमिन्द्राणां जयन्तं यत्प्रभावतः ॥ ४॥
गुरूपदिष्टं वंशाख्यम् कवचं तदिदं सुखे ।
गुह्याद्गुह्यतरं चेदं न प्रकाश्यं हि सर्वतः ॥ ५॥
धारणात् पठनादस्य वंशच्छेदो न जायते ।
बाला विनश्यंति पतन्ति गर्भास्तत्राबलाः कष्टयुताश्च वन्ध्याः ॥ ६ ॥
बाल ग्रहैर्भूतगणैश्च रोगैर्न यत्र धर्माचरणं गृहे स्यात् ॥
इति श्री ज्ञान भास्करे वंश वृद्धिकरं वंश कवचं
सम्पूर्णम् ॥

अनेकों बिमारियों की दवाई हींग : औषधि का खजाना हमारी रसोई

सनातन शास्त्रों में आयुर्वेद का इतना खजाना भरा है जिसे हम नज़रअंदाज करते रहे हैं। वास्तव में हमारी रसोई ही औषधियों का भंडार है। रसोई में इतना भंडार है जिसके प्रयोग करने से भोजन भी स्वादिष्ट बनता है भोजन का स्वाद ही बदल जाता है। लेकिन आज जवान के चटकारे के लिए बाजार के चिप्स, भुजिया और भोजन का सेवन किया जा रहा है। आज की युवा पीढ़ी को नहीं मालूम की बाज़ारू खाने में टाटरी का प्रयोग किया है जो जिव्हा को चटकारा तो देता है लेकिन उतना ही सेहत के लिए नुकसानदेह है।
हींग को आयुर्वेद में महा औषधि माना गया है। किसी भी दाल या सब्जी में इसका प्रयोग करने से दाल और सब्जी का स्वाद बढ़ जाता जाता। यह Ferula asafoetida पौधे के गोंद (gum-resin) से बनती है।

आयुर्वेद के अनुसार हींग:
रस (Taste): कटु (तीखा)
गुण: लघु (हल्की), तीक्ष्ण
वीर्य: उष्ण (गरम तासीर)
विपाक: कटु
दोषों पर प्रभाव:
वात (सबसे ज्यादा)
कफ
पित्त (अगर ज्यादा ले ली जाए)
हींग के मुख्य Ayurvedic फायदे
1.पाचन तंत्र के लिए
गैस, अफारा, पेट दर्द में तुरंत राहत; अपच (Indigestion) में फायदेमंद; भूख बढ़ाने में मदद करती हैआंतों को एक्टिव करती है
इसलिए दाल, सब्ज़ी और कढ़ी में हींग डाली जाती है।
2.वात दोष को संतुलित करती है
आयुर्वेद में कहा गया है कि वात से जुड़े ज़्यादातर रोगों में हींग औषधि जैसी काम करती है: जोड़ों का दर्द
पेट में मरोड़;नसों की जकड़न;गैस से होने वाला सिर दर्द
3.कब्ज (Constipation) में लाभ
आंतों की गति सुधारती हैमल को नरम करने में मदद करती है पुराने कब्ज में सहायक
4.महिलाओं के लिए फायदेमंद
पीरियड्स के दौरान पेट दर्द और ऐंठन में राहत;अनियमित माहवारी में सहायक; गर्भाशय की मांसपेशियों को रिलैक्स करती है
गर्भावस्था में बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
5.सर्दी-खांसी और बलगम में कफ निकालने में मदद,गले की जकड़न में राहतआयुर्वेद में इसे expectorant माना गया है
6.कीड़े और इंफेक्शन में
आंतों के कीड़े खत्म करने में सहायक, बैक्टीरिया-रोधी गुण पाए जाते हैं
आयुर्वेद की किन किताबों में हींग का उल्लेख है
1. चरक संहिता
हींग को दीपन-पाचन और वातनाशक बताया गया हैपेट रोग, गुल्म (abdominal lump), शूल (pain) में उपयोग
2. सुश्रुत संहिता
दर्द निवारक गुणों का उल्लेख पेट और स्त्री रोगों में लाभकारी
3. भावप्रकाश निघंटु
हींग के रस, गुण, वीर्य और उपयोगों का विस्तृत वर्णन गैस,अपच और वात रोगों के लिए श्रेष्ठ औषधि
हींग का सही उपयोग (General use)
खाने में चुटकी भर हींग काफी होती है, घी या तेल में डालकर ही प्रयोग करेंज्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है
हींग कब नुकसान कर सकती है?
बहुत ज्यादा लेने से जलन, एसिडिटी, पित्त प्रकृति वालों को सावधानी, गर्भवती महिलाएं बिना सलाह न लें, छोटे बच्चों को औषधि रूप में न दें।