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आतंकवाद, भ्रष्टाचार, गरीबी हटाना हमारा मिशन : नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अप्रैल 14 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कहा कि आतंकवाद, भ्रष्टाचार और गरीबी हटाना उनका मिशन है। मोदी ने यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘मोदी का मिशन है। आतंकवाद को हटाना, भ्रष्टाचार को हटाना, बीमारी को हटाना, गरीबी को हटाना।’ उन्होंने उत्तर प्रदेश की पूर्व की सरकारों में हुई अनदेखी का उल्लेख करते हुए कहा, ” इतना बड़ा उत्तर प्रदेश और यहां इतने बड़े शक्तिशाली लोग, लेकिन उत्तर प्रदेश का हिन्दुस्तान में जो स्थान बनना चाहिए था, ये यहां की राजनीति ने बनने नहीं दिया।’ वहीं, मोदी ने सपा-बसपा पर हमला बोलते हुए कहा ‘आप कहते हैं कि आतंकवाद हटना चाहिए, लेकिन महामिलावट वाले कहते हैं कि मोदी हटना चाहिए।’
मोदी ने आगे कहा, पहले क्‍या होता था। आतंकवादी पाकिस्‍तान से आते थे, हम पर हमला करते थे और कांग्रेस सरकार दुनिया के सामने चिल्‍लाती रहती थी कि हम पर हमला हुआ है। लेकिन अब ये न्‍यू इंडिया है। जब आतंकियों ने उरी में हमला किया तो बहादुर सैनिकों ने सर्जिकल स्‍ट्राइक की। जब उन्‍होंने दोबारा गलती पुलवामा की, हम उनके घर में घुस गए और एयर स्‍ट्राइक की। उधर वालों को भी समझ में आ गया है कि अगर तीसरी गलती हुई तो लेने के देने पड़ जाएंगे। 
मोदी ने जनसभा में आए लोगों से कहा, ‘दुनिया में चेन्नई की चर्चा होती है। बेंगलूरू, मुंबई और अहमदाबाद की चर्चा होती है, मेरे उत्तर प्रदेश की होनी चाहिए कि नहीं, दुनिया के लिए उत्तर प्रदेश सबसे आकर्षण का केंद्र बनना चाहिए कि नहीं….’ वहीं सपा-बसपा पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जो लोग लोकसभा में प्रधानमंत्री का सपना देख रहे हैं। जो 40 सीट पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, वो क्या देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं।’ उन्होंने तंज कसा, ‘आप कहते हैं कि आतंकवाद हटना चाहिए, लेकिन महामिलावट वाले कहते हैं कि मोदी हटना चाहिए।’
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर उन्हें याद करते हुए मोदी ने कहा, ‘ये बाबासाहेब के संविधान की ताकत है कि दलित समाज से निकलकर एक सज्जन राष्ट्रपति पद पर हैं। ये बाबासाहेब का संविधान है कि एक चाय वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है।’
पीएम ने कहा कि मोदी अपनी नहीं, बल्कि पूरे देश की सोचता है। ‘आप सभी लोगों के सहयोग से बाबा साहब के बताए रास्ते पर चलने का इस चौकीदार ने प्रयास किया है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर सरकार चलाई है।’ मोदी ने कहा, ‘भाजपा और इस चौकीदार पर इस विश्वास का कारण स्पष्ट है। पांच वर्ष के विकास का इतिहास और आने वाले पांच वर्ष में विकास की नई आस।’
PM Modi in Moradabad: When they committed the second mistake in Pulwama, we entered their home & conducted airstrike. Udhar walon ko bhi samajh mein aa gaya hai ki agar teesri galti hui to lene ke dene padd jaenge.
सपा-बसपा सहित विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश 2014 में इन्हें बता चुका है कि जाति की स्वार्थभरी राजनीति नहीं, विकास चाहिए। उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश ने 2017 में फिर इन्हें बताया कि जाति की स्वार्थ भरी राजनीति नहीं, सबका साथ सबका विकास चाहिए।’
मोदी ने सपा-बसपा पर हमला जारी रखते हुए कहा, ‘(पश्चिमी उत्तर प्रदेश में) कैसे बहन-बेटियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, कैसे लोगों को अपना घर, अपना कारोबार छोड़ना पड़ा, ये देश ने देखा है। जब पश्चिमी यूपी जल रहा था, मासूम लोग मारे जा रहे थे, तब उसके पीड़ितों की आवाज को अनसुना करने वाला कौन था?’
पीएम ने कहा, ‘अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए ऐसे लोगों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की दुख-तकलीफें, उन पर जो गुजरी, सब भुला दिया है। पश्चिमी यूपी में कितना बड़ा पाप हुआ, पूरा देश इसका गवाह रहा है।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर दिए जा रहे हैं तो इसका फायदा भी सबको हुआ है। सौभाग्य योजना के तहत बिजली का कनेक्शन भी हर परिवार को मिला है, चाहे वो किसी भी जाति का हो। मोदी ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिया गया है तो इसका फायदा सबको हुआ है। 

राष्ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी से कई पूर्व सैनिक अफसरों ने किया इनकार

पूर्व सेना प्रमुखों ने सशस्त्र सेनाओं के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी को गलत बताया है. पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेना के राजनीतिक इस्तेमाल से जुड़ी चिट्ठी राष्ट्रपति को नहीं लिखी है. बता दें कि खबर के मुताबिक एक चिट्ठी में सेना के 8 पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया है.
पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल हैं.
हालांकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज ने इस तरह के किसी पत्र से इंकार किया है. उन्होंने कहा, 'सर्विस के दौरान हम जो भी सरकार होती है उसका ऑर्डर फोलो करते है, सेना का राजनीति से कोई लेना देना नहीं होता है, कोई कुछ भी कह सकता है और उसे फेक न्यूज बनाकर बेच सकता है. मैं नहीं जानता कि वो कौन लोग हैं जिन्होंने यह सब लिखा है.'

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Goa: General SF Rodrigues who is mentioned as the first signatory in the purported letter written by armed forces veterans to President, denies signing it.
आज(अप्रैल 12) पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने इससे इंकार किया है, एनसी सूरी ने कहा, 'इस चिट्ठी में जो कुछ भी लिखा है मैं उससे सहमत नहीं हूं. हमारी बात को गलत ढंग से पेश किया गया है.'
तीन पूर्व नौसेना प्रमुखों एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश, एडमिरल (सेवानिवृत्त) मेहता और एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. पत्र अप्रैल 11 को राष्ट्रपति के पास भेजा गया.
सामने आई कथित चिट्ठी में पूर्व सैनिकों की तरफ से लिखा गया, ‘‘महोदय हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वह सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और यहां तक कि सशस्त्र सेनाओं को ‘मोदी जी की सेना’ बताने का दावा तक कर रहे हैं.’’ 
पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह चिंता और सेवारत तथा सेवानिवृत्त सैनिकों के बीच असंतोष का मामला है कि सशस्त्र सेनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है.

Air Chief Marshal NC Suri to ANI: To put an end to it,I wrote that armed forces are apolitical&support the politically elected govt. And no, my consent has not been taken for any such letter. I don’t agree with whatever has been written in that letter. We have been misquoted. 2/2
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक चुनावी रैली में सशस्त्र सेनाओं को ‘‘मोदीजी की सेना’’ बताया जिसपर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.निर्वाचन आयोग ने भी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई. पत्र में पूर्व सैनिकों ने चुनाव प्रचार अभियानों में भारतीय वायु सेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान और अन्य सैनिकों की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी नाखुशी जताई.(इनपुट भाषा से भी)

लोकसभा चुनाव 2019 से पूर्व लगी लाल बहादुर शास्त्री की फिल्म पर रोक

लोकसभा चुनाव से पहले एक और फिल्म फंसी कानूनी विवाद में, रिलीज रोकने की मांग'
आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
आखिर विरोधियों को PM Narendra Modi और The Tashkent Files फिल्मों के प्रदर्शन से क्या परेशानी है? क्यों जनता के समक्ष सच्चाई आने से डर रहे हैं? क्यों नहीं, लाल बहादुर शास्त्री की आकस्मिक मृत्यु की जाँच करवाई गयी? क्यों परिवार को उनके शव से दूर रखे जाने का प्रयास किया गया था? शास्त्री विरोधियों को सच्चाई सामने आने पर इतना डर क्यों सता रहा है?
लोकसभा चुनाव से पहले विवेक ओबेरॉय की फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ (PM Narendra Modi) की रिलीज को लेकर विवाद हुआ. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस फिल्म को प्रोपगेंडा फिल्म बताते हुए निर्वाचन आयोग से इसकी रिलीज पर रोक लगाने की मांग की. यह विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि इस बीच एक और फिल्म कानूनी पचड़े में फंसती नजर आ रही है. पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की रूस के ताशकंद में रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मृत्यु पर आधारित फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ (The Tashkent Files) की रिलीज रोकने की मांग की गई है. यह फिल्म विवेक अग्निहोत्री ने बनाई है.
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र ने फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री को उनकी फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ की रिलीज से पहले कानूनी नोटिस भेजा है. विवेक ने कहा कि लाल बहादुरी शास्त्री के पौत्र ने फिल्म को लेकर एक आपत्ति जताई है और इसकी रिलीज रोकने को कहा है. इस फिल्म में भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 युद्ध की समाप्ति पर दोनों देशों के बीच हुए ताशकंद समझौते के तुरंत बाद 1966 में लाल बहादुर शास्त्री के निधन को कहानी का आधार बनाया गया है. विवेक ने बुधवार को बताया, “हमें देर रात फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करने वाला कानूनी नोटिस मिला. तीन दिन पहले ही हमने दिल्ली में फिल्म की स्क्रीनिंग की थी, जिसमें उन्होंने (शास्त्री के पौत्र) फिल्म देखी थी और उन्हें फिल्म पसंद भी आई थी व उन्होंने उसकी तारीफ भी की थी.”
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार इन दिनों बॉलीवुड भी पूरी तरह से चुनाव के मौसम और राजनीति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। ज...

अग्निहोत्री ने कहा, “मुझे नहीं पता कि क्या हुआ, लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष परिवार से किसी ने उन्हें हमें कानूनी नोटिस भेजने के लिए उकसाया है. यह कोई प्रोपगेंडा फिल्म नहीं है. मुझे नहीं पता कि लोगों को फिल्म से क्या दिक्कत है.” विवेक ने कहा, “मैंने अभी नोटिस का जवाब नहीं दिया है. मैं संवाददाता सम्मेलन करने की योजना बना रहा हूं.” नोटिस की एक प्रति विवेक ने मीडिया से साझा की है. इसमें यह आरोप लगाया गया है कि ‘फिल्म अनुचित और अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है. इसके साथ ही फिल्म समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को आहत भी करेगी.’ फिल्म को शुक्रवार को रिलीज करने की योजना है. इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, पल्लवी जोशी, श्वेता बसु, पंकज त्रिपाठी, मिथुन चक्रवर्ती और विनय पाठक प्रमुख भूमिकाओं में हैं.

गाजियाबाद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी वी.के. सिंह ने किए सबसे अधिक खर्च

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सभी  प्रत्याशियों की ओर से अब तक चुनाव का जो खर्च बताया गया है, उसके मुताबिक चुनाव में सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी के प्रत्याशी वी.के सिंह ने किया है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से खर्च का जो लेखा-जोखा चुनाव एजेंट प्रदीप कुमार ने जारी किया। वी. के. सिंह ने कुल 23,64,218 रुपये का खर्च दिखाया है। वहीं, गठबंधन प्रत्याशी सुरेश बंसल का खर्च दूसरे नंबर पर है।
लोकसभा के पहले चरण का मतदान जारी है। पहले चरण में वोटिंग में 20 राज्यों की 91 सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आज जिन 91 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है, उनमें अधिकतर में सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो चुका है। ​पहले चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, उत्तराखंड, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और तेलंगाना की सभी लोकसभा सीटों के लिए मतदान जारी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों (सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और नोएडा) और बिहार की 4 सीटों (औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई), असम की 5 और महाराष्ट्र की 7, ओडिशा की 4 और पश्चिम बंगाल की 2 सीटों के लिये मतदान हो रहा है।

चुनाव के लिए गाजियाबाद में खर्च किए जा रहे हैं  53,45,407 रुपए

ऐसे में गाजियाबाद के प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने चुनावी खर्च का ब्यौरा निर्वाचन विभाग को दे दिया है। सभी  प्रत्याशियों की ओर से अब तक चुनाव का जो खर्च बताया गया है, उसके मुताबिक चुनाव में सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी के प्रत्याशी वी.के सिंह ने किया है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से खर्च का जो लेखा-जोखा चुनाव एजेंट प्रदीप कुमार ने जारी किया। वी. के. सिंह ने कुल 23,64,218 रुपये का खर्च दिखाया है। वहीं, गठबंधन प्रत्याशी सुरेश बंसल का खर्च दूसरे नंबर पर है। बंसल के चुनाव एजेंट अमित गर्ग ने उनका कुल चुनावी खर्च 15,54,314 रुपये दिखाया है। वहीं, कांग्रेस की उम्मीदवार डॉली शर्मा ने सबसे कम खर्च किया है। उनके एजेंट रजनीकांत शर्मा ने चुनावी खर्च 14,26,875 रुपये दिखाया है। यदि देखा जाए तो इस बार गाजियाबाद में चुनाव में कुल 53,45,407 रुपए खर्च किए जा रहे हैं। 
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लोकसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी का माहौल है। चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने तैयारी कर ली है। इस बीच अमेरिका स्थित एक ....

खर्च का ब्यौरा ना देने पर, चुनाव लड़ने पर आयोग ने लगाई रोक

लोकसभा चुनाव में खर्च का ब्यौरा ना देने पर निर्वाचन आयोग ने गोंडा जिसे के एक निर्दलीय उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। जिला निर्वाचन अधिकारी को आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं। जिले के भदवा सोमवंशी गांव निवासी अंबिका दत्त वर्मा ने 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। मेहनौन विधानसभा चुनाव में पराजित होने के साथ ही उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी। निर्वाचन आयोग निर्देशानुसार सभी उम्मीदवारों से चुनाव में हुए खर्च का ब्योरा जमा करने का निर्देश दिया गया था लेकिन, अंबिका ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई। राज्य निर्वाचन आयोग ने उनके 9 अप्रैल 2021 तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ज्ञानचंद गुप्ता ने बताया कि निर्वाचन आयोग का आदेश मिला है, अनुपालन कराया जाएगा। 
Image result for महेश शर्मानोएडा में पोलिंग बूथ पर नमो फ़ूड पैकेट 
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए पहले चरण का मतदान (11 अप्रैल 2019) के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर लोकसभा क्षेत्र के नोएडा सेक्टर 15A पोलिंग बूथ पर फूड पैकेट्स मिले जिस पर नमो लिखा हुआ मिला। इन पैकेट्स को बूथ के भीतर पहुंचाया गया। वहां मौजूद लोगों पोलिंग बूथ पर नमो फूड पैकेट्स पहुंचाए जाने का विरोध किया और आरोप लगाया कि यह मॉडल कोड और कंडक्ट का उल्लंघन है।
इस पर गौतमबुद्धनगर के सीनियर एसपी वैभव कृष्णा ने कहा कि नमो फूड पैकेट को लेकर गलत सूचना फैलाई गई। उन्होंने इनकार किया कि सेक्टर 15ए बूथ पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिस को किसी राजनीतिक दल द्वारा पूड पैकेट दिया गया था। एसपी ने कहा ये फूड पैकेट्स नमो फूट कॉर्नर नाम की एक दुकान लाया गया ना कि किसी राजनीतिक पार्टी से।
कृष्णा ने कहा, गलत जानकारियां फैलाई गई हैं कि एक राजनीतिक पार्टी ने कुछ पुलिसकर्मियों को भोजन के पैकेट्स बांटे हैं। यह बिल्कुल गलत है। कुछ फूड पैकेट्स नमो फूड शॉप से लाए गए और ना कि राजनीतिक दल से लिए गए। कुछ लोग राजनीति से प्रेरित होकर अफवाह फैला रही हैं। कोई आधिकारिक ऑर्डर नहीं है किसी खास फूड आउटलेट से फूड लेना है।
अतिरिक्त चीफ चुनाव अधिकारी बीआर तिवारी ने इस मामले में कहा कि हमें मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए जानकारी मिली है। यह बहुत पुरानी दुकान है। करीब 10 साल पुरानी है। उसका ब्रांड नाम है। इसे मीडिया में एक अलग तरीके से उजागर किया गया है।
गौतमबुद्धनगर, केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा का संसदीय क्षेत्र है। इस लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के महेश शर्मा के कांग्रेस अरविंद कुमार और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के सतवीर नागर चुनाव लड़ रहे हैं।(एजेंसीज इनपुट्स सहित)

शबाना आजमी का कन्हैया कुमार को समर्थन

शबाना आजमी ने किया कन्हैया कुमार को सपोर्ट, सोशल मीडिया पर पड़ने लगी गालियां लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और इस बीच लोग अपने पसंदीदा कैंडिडेट को पूरा सपोर्ट कर रहे हैं. ऐसे में कई सेलेब्स ट्रोलर्स के निशाने पर बने हुए हैं. लाल सलाम नेता कन्हैया कुमार को सपोर्ट करके सीनियर एक्टर शबाना आजमी को भी गालियों का सामना करना पड़ रहा है. शबाना आजमी ने कन्हैया के पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा कि तुमसे उम्मीद है. एक सच्ची लड़ाई लड़ना. 
शबाना आजमी के इस पोस्ट के बाद से कई यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं. कुछ का तो कहना है कि उन्हें पाकिस्तान शिफ्ट हो जाना चाहिए. 
In @kanhaiyakumar lies http://Hope.In  Kanhaiya lies Sanity. In Kanhaiya lies Truth. We are with You. Fight ‘The Good Fight.’
इतना ही नहीं कुछ यूजर्स ने लिखा कि जिस देश ने इनको सर माथे बिठाया उसी की क़ब्र खोदने वालों के कंधे से कंधा मिला के ऐसे लोग एहसान फरामोशी की मिसाल पेश करते हैं. वहीं एक यूजर कहना था कि अफसोस ताउम्र रहेगा कि ऐसे देश के गद्दारों की फिल्म पर पैसे खर्च करते थे जो देश के टुकड़े करने वालों के प्रमोशन में लगे हैं.
Yay! lands ticket 2 contest Despite being subjected to a hysterical & inaccurate trial Kanhaiyya has been steadfast in raising important issues that matter 2 democracy & people! V need more like Kanhaiyya in Parliament!
शबाना आजमी के अलावा एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने भी कन्हैया का सपोर्ट करते हुए लिखा है कि कन्हैया ने सही मुद्दों को रखते हुए साबित कर दिया है कि वो लोकसभा चुनाव के सही उम्मीदवार हैं. हमें कन्हैया के जैसे कई लोगों की जरूरत संसद में है. 

1951 में हुआ देश का पहला लोकसभा चुनाव और लोकतन्त्र की निर्मम बर्बर हत्या

Loksabha 1951 205
                                                                                साभार 

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
1951 में पहली बार देश की पहली लोकसभा के लिए चुनाव कराए गए।489 संसदीय सीटों पर अपनी किस्‍मत आजमाने वाले 1874 उम्‍मीदवारों का फैसला 10.59 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करके किया।इस चुनाव में जहां कुल मतदाताओं की संख्‍या करीब 17.32 करोड़ थी, वहीं मतदान करने वाले मतदाताओं का प्रतिशत 44.87 था। इस चुनाव में एक संसदीय सीट ऐसी भी थी, जहां एक भी मतदाता ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। जी हां, संसदीय सीट का नाम था बिलासपुर।चुनावनामा में अब विस्‍तार से बात करते हैं बिलासपुर रियासत की।
दरअसल, देश के पहले चुनाव के दौरान बिलासपुर एक रियासत का नाम था। इस रियासत के राजा थे आनंद चंद्र।1951 के पहले लोकसभा चुनाव में राजा आनंद चंद्र ने निर्दलीय प्रत्‍याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया था। इस चुनाव के दौरान बिलासपुर रियासत में कुल मतदाताओं की संख्‍या 68,130 थी। मतदान के दिन इस रियासत में रहने वाले किसी भी मतदाता ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। जिसके चलते चुनाव आयोग ने इस संसदीय क्षेत्र के चुनाव को रिटर्न अनकंटेस्‍टेड घोषित कर दिया था। राजा आनंद चंद्र को इस लोकसभा सीट से निर्विरोध सांसद चुना गया। 1951 से लेकर 1954 इस रियासत की यही स्थिति बनी रही। 1 जुलाई 1954 को बिलासपुर रियासत का विलय हिमाचल प्रदेश में हो गया और बिलासपुर को हिमाचल प्रदेश का नया जिला घोषित कर दिया गया।
बिलासपुर की तरह कोयंबटूर और यादगीर संसदीय क्षेत्र में भी नहीं हुआ मतदान 
चुनाव आयोग के दस्‍तावेज खंगालने पर पता चला कि बिलासपुर देश का इकलौता संसदीय क्षेत्र नहीं था, जहां पर लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान नहीं हुआ
। बिलासपुर रियासत की तरह मद्रास की कोयंबटूर और हैदराबाद का यादगीर संसदीय क्षेत्र में भी किसी भी मतदाता ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया. 3.46 लाख मतदाताओं वाले कोयंबटूर से टीए रामलिंगा इकलौते प्रत्‍याशी थे। टीए रामलिंगा कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, हैदराबाद रियासत के अंतर्गत आने वाली याद‍गीर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर कृष्‍ण चंद्र जोशी इकलौते प्रत्‍याशी थे। इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्‍या करीब 3.62 लाख थी। इन दोनों संसदीय क्षेत्र को चुनाव आयोग ने रिटर्न अनकंटेस्‍टेड घोषित किया था।इस चुनाव में कांग्रेस के दोनों उम्‍मीदवारों को निर्विरोध सांसद चुन लिया गया था।
इसी चुनाव में कांग्रेस ने लोकतन्त्र की निर्मम हत्या भी की थी 
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अब जब तानपुरे पर उँगलियाँ पहुँच गयीं हैं, फिर क्यों न तानपुरे की ध्वनि का भी आनंद लिया जाए। 70 के दशक में फिल्म आयी थी "यादगार", और इसका तानपुरे पर एक गीत बहुत चर्चित है,"एक तारा बोले सुन सुन, क्या कहे ये तुमसे सुन सुन...।" जो सुर इस तानपुरे से न निकल पाए, सुनिए वह सुर:  
यह चुनाव देश का प्रथम चुनाव ही नहीं, वरन कई कारणों से याद भी किया जाएगा। जिस तरह आज "गरीबी हटाओ", "भ्रष्टाचार मिटाओ", "लोकतन्त्र बचाओ" और "महँगाई दूर करो" आदि मुद्दों पर लड़ा जाता है, उसी भाँति इसी प्रथम चुनाव में मुद्दा था "हिन्दू-मुस्लिम" यानि जब धर्म के आधार पर भारत का बटवारा हुआ है, फिर किस आधार पर मुस्लिमों को भारत में रोक, हिन्दू राष्ट्र घोषित क्यों नहीं किया गया?" और इस चुनाव में हिन्दू महासभा ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। 
आज जब कांग्रेस लोकतन्त्र की दुहाई देती है, तो हँसी आती है। जिस पार्टी ने देश के प्रथम चुनाव में ही लोकतन्त्र की बड़ी बेरहमी से निर्मम हत्या कर दी हो, उस पार्टी के मुँह से लोकतन्त्र की बात करना शोभा नहीं देता। 
फूलपुर से जवाहर लाल नेहरू के विरुद्ध हिन्दू महासभा के उम्मीदवार थे प्रभुदत्त ब्रह्मचारी और रामपुर से नेहरू के प्यारे अबुल कलाम आज़ाद के विरुद्ध थे सेठ विशन। और उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री थे, नेहरू के लाडले गोबिन्द बल्लब पन्त। नेहरू तो चुनाव जीत गए, लेकिन रामपुर से उनके प्यारे और दुलारे कलाम लगभग 6000 से अधिक मतों से पराजित होने का समाचार जैसे ही नेहरू को मिला, गुस्से में इतना तिलमिला गए कि तुरन्त मुख्यमन्त्री पन्त को फोन पर कहा कि "किसी भी कीमत पर मुझे संसद में आज़ाद चाहिए।"
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नेहरू का फ़ोन सुनते ही पन्त के पैरों से नीचे मानो ज़मीन ही खिसक गयी। पन्त ने तुरन्त जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर को परिणाम बदलने को कहा। और जब तक अधिकारी हरकत में आते, तब तक विजयी विशन सेठ अपना विजयी जुलुस लेकर सड़क आ चुके थे। बीच जुलुस में से विजयी विशन को अगवा कर मतगणना स्थल पर ले जाकर, उनके बक्से की वोटें आज़ाद के बक्से में मिलाकर हारे हुए उम्मीदवार आज़ाद को 3000 के लगभग वोटों से विजयी घोषित कर दिया गया था। विशन सेठ चीखते-चिल्लाते रहे लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। उन्हें केवल यही कहा "सेठ साहब हम अपनी नौकरी बचा रहे हैं।"  ये रहस्योघाटन उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सुचना निदेशक शम्भुनाथ टंडन ने अपने एक लेख मे किया है। 
उन्होंने अपने लेख "जब विशन सेठ ने मौलाना आजाद को धुल चटाई थी भारतीय इतिहास की एक अनजान घटना " में लिखा है की भारत मे नेहरु ही बूथ कैप्चरिंग के पहले मास्टर माइंड थे। उस ज़माने में भी बूथ पर कब्जा करके परिणाम बदल दिये जाते थे और देश के प्रथम आम चुनाव मे सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस के 12 हारे हुए प्रत्याशियों को जिताया गया।  देश के बटवारे के बाद लोगो मे कांग्रेस और खासकर नेहरु के प्रति बहुत गुस्सा था लेकिन चूँकि नेहरु के हाथ मे अंतरिम सरकार की कमान थी इसलिए नेहरु ने पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके जीत हासिल थी। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर लाल नेहरू देश में हुए प्रथम आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से पराजित घो...
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